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स्पेस वॉर की तैयारी? विशालकाय अंतरिक्ष युद्धपोत पर काम कर रहा चीन, जानिए इसकी ताकत

बीजिंग  चीन ने दुनिया के सामने एक ऐसी कल्पना पेश की है जिसे अब तक सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों में ही देखा गया था. बीजिंग ने ‘लुआननियाओ’ नाम के एक विशाल अंतरिक्ष विमान वाहक (Space Aircraft Carrier) का खाका तैयार किया है. यह प्रोजेक्ट चीन के ‘नांतियानमेन’ या ‘साउथ हेवनली गेट’ मिशन का हिस्सा है. दावा किया जा रहा है कि यह भविष्य का युद्धपोत होगा. यह पृथ्वी के वायुमंडल की सीमा पर रहकर पूरे ग्रह पर नजर रख सकेगा. चीन के सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो के मुताबिक लुआननियाओ एक विशाल ग्रे रंग का त्रिकोणीय जहाज होगा. इसकी लंबाई 242 मीटर और चौड़ाई 684 मीटर बताई जा रही है. इसका वजन लगभग 1,20,000 टन होगा जो आज के किसी भी आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर से बहुत ज्यादा है. यह स्पेस कैरियर 88 ‘शुआन नू’ मानवरहित लड़ाकू विमानों को अपने साथ ले जाने में सक्षम होगा. ये जेट इतने एडवांस होंगे कि वे स्टील्थ तकनीक से लैस होकर हाइपरसोनिक मिसाइलें दाग सकेंगे. क्या चीन अंतरिक्ष में अमेरिका को मात देगा? डिफेंस एक्सपर्ट पीटर लेटन का कहना है कि अगर चीन इसे बनाने में सफल रहा तो यह दुनिया की हर डिफेंस सिस्टम को फेल कर देगा. यह विमान वाहक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और मौजूदा फाइटर जेट्स की पहुंच से बहुत ऊपर होगा. यह सीधे टारगेट के ऊपर जाकर हमला कर सकता है. इससे चीन को ताइवान और साउथ चाइना सी में अमेरिका के खिलाफ बड़ी बढ़त मिल सकती है. चीन अपनी रॉकेट और सैटेलाइट तकनीक पर भारी निवेश कर रहा है जो अमेरिका की चिंता बढ़ा रहा है. क्या यह सिर्फ एक चीनी प्रोपेगेंडा है? इतनी बड़ी योजना के बावजूद दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसे लेकर काफी संशय में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस जहाज को पृथ्वी की कक्षा में भेजने या हवा में टिकाए रखने के लिए जिस प्रोपल्शन सिस्टम और ईंधन की जरूरत है वह फिलहाल मौजूद नहीं है. इसे ऑर्बिट में भेजने के लिए चीन को एलन मस्क की स्पेसएक्स जैसे रियूजेबल रॉकेट चाहिए. चीन अभी ऐसी तकनीक विकसित करने से कम से कम 10 से 15 साल दूर है. कई लोग इसे चीन का एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ मान रहे हैं. साउथ हेवनली गेट प्रोजेक्ट क्या है? यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं है. इसमें ‘बैदी’ जैसे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी शामिल हैं जो अंतरिक्ष के करीब जाकर ऑपरेट कर सकते हैं. चीन ने 2024 के विमानन मेले में इसका मॉडल भी दिखाया था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन ऐसी घोषणाएं अपनी जनता को प्रेरित करने और पड़ोसी देशों को अपनी ताकत दिखाने के लिए करता है. यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हो सकता है जिससे चीन खुद को दुनिया का सबसे एडवांस सैन्य पावर साबित करना चाहता है. हवा में ही खत्म हो जाएंगे दुश्मन के सारे रडार? चीन का यह फ्लाइंग  स्पेस रेस में चीन की मौजूदा स्थिति क्या है? भले ही लुआननियाओ अभी एक कल्पना जैसा लगे लेकिन चीन के हालिया मिशन हकीकत हैं. 2024 में चीन के ‘चांग-ई-6’ मिशन ने चंद्रमा के सबसे दूर वाले हिस्से से नमूने लाकर इतिहास रचा था. अब चीन ‘चांग-ई-7’ के जरिए चांद पर पानी खोजने की तैयारी में है. अमेरिका की रफ्तार जहां कुछ धीमी पड़ी है वहीं चीन लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. लुआननियाओ का सपना साकार होने में भले ही 20-30 साल लगें लेकिन इसने भविष्य की जंग का खाका जरूर खींच दिया है.

ग्वालियर भर्ती अपडेट: आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 65 करोड़ का टेंडर मंजूर, प्रक्रिया फिर शुरू

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के एक बड़े जिले में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब खत्म होने की कगार पर है। नगर निगम ने आउटसोर्स मैनपावर की नई टेंडर प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही एमआईसी (Mayor-in-Council) के समक्ष रखा जाएगा। एमआईसी की मंजूरी और परिषद से पास होने के बाद नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे निगम के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो जाएगा। गलत गणना बनी थी विवाद की जड़ दरअसल, वर्ष 2024 में नगर निगम द्वारा आउटसोर्स मैनपावर के लिए करीब 65 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। इसमें सर्विस चार्ज की गणना में गंभीर त्रुटि सामने आई, जिससे निगम को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति होने की आशंका थी। इसी कारण निगमायुक्त ने परिषद द्वारा पारित ठहराव पर पुनर्विचार का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन परिषद ने उसे अस्वीकार कर दिया। यदि उस समय कार्यादेश जारी होता, तो निगम पर 3.22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता। शासन ने किया हस्तक्षेप मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्च 2025 में निगमायुक्त ने शासन से मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव शीलेंद्र सिंह ने 7 जनवरी को परिषद के सभी ठहरावों को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद अब नगर निगम को दोबारा से सही और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाने की अनुमति मिल गई है।

कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, MP में जंबो कार्यकारिणी खत्म, संगठन ने जारी किया सख्त आदेश

भोपाल  कांग्रेस संगठन के ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के सख्त आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस में टेंशन का माहौल बन गया है। अब जिलों में मनमाने तरीके से बड़ी कार्यकारिणी बनाने पर रोक लगा दी गई है। जिला अध्यक्षों को मिला सीधा आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि — बड़े जिलों में अधिकतम 55 सदस्य छोटे जिलों में सिर्फ 35 सदस्य ही जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाएंगे। यह फैसला AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। 15 दिन में कार्यकारिणी गठन के निर्देश वेणुगोपाल ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी जिलों को 15 दिन के भीतर नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी का गठन करना होगा। MP में पहले ही तोड़ी जा चुकी है गाइडलाइन मध्य प्रदेश में गुटबाजी को साधने के लिए लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी बनाने की परंपरा रही है। लेकिन नए निर्देश आने से पहले ही 30 जनवरी को कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी कर दी, जिनमें तय सीमा से कहीं ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। आंकड़े जो बढ़ा रहे हैं संगठन की मुश्किल छिंदवाड़ा: 240 सदस्य सागर: 150 से ज्यादा पदाधिकारी मऊगंज (छोटा जिला): 40 सदस्य भोपाल शहर: 106 नामों की सूची भोपाल ग्रामीण: 85 सदस्यों की सूची तैयार इन आंकड़ों ने अब कांग्रेस संगठन को असमंजस में डाल दिया है।  अब क्या बदलेगी MP कांग्रेस की रणनीति? राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त रुख के बाद सवाल यह है कि— क्या जारी की गई जम्बो कार्यकारिणियों में कटौती होगी? या फिर संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ेगा? फिलहाल, कांग्रेस के नए फरमान ने मध्य प्रदेश की सियासत में नई बेचैनी और सियासी हलचल जरूर पैदा कर दी है।

यूरोप में बढ़ी सख्ती, ऑस्ट्रेलिया के बाद स्पेन और ग्रीस भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगा सकते हैं बैन

मैड्रिड  ऑस्ट्रेलिया के बाद अब स्पेन और ग्रीस भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच पर प्रतिबंध लगा दिया था, और अब यूरोप में भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल रही है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने कहा कि उनका देश 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हानिकारक कंटेंट जैसे पोर्नोग्राफी और हिंसा से बचाने के लिए सोशल मीडिया बैन करना चाहता है। वहीं ग्रीस भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर सकता है। स्पेन और ग्रीस की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कई देश सोशल मीडिया को एडिक्टिव और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं। यूरोप में ब्रिटेन और फ्रांस भी सोशल मीडिया पर सख्त रुख अपनाने की दिशा में हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है। स्पेन के इस प्रस्ताव पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के मालिक एलन मस्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।  मस्क ने प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ को सोशल मीडिया पर अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया और उन्हें “तानाशाह” करार दिया। मस्क ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और सरकार के इस कदम का विरोध किया। हाल के समय में AI-जेनरेटेड कंटेंट और बिना सहमति के यौन छवियों के निर्माण की रिपोर्टों ने सोशल मीडिया के जोखिमों को उजागर किया है। विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़ी घटनाओं ने सरकारों को सख्त नियमों की तरफ प्रेरित किया है। इस पूरे विवाद में बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच बहस और तेज हो गई है।

छोटे राज्य से बड़ी उड़ान: छत्तीसगढ़ का उभरता टेक्निकल इंस्टीट्यूट, Google में प्लेसमेंट

भिलाई  आज के समय में स्टूडेंट्स सिर्फ एक नामी कॉलेज नहीं, बल्कि ऐसा इंस्टीट्यूट चाहते हैं जहां पढ़ाई के साथ-साथ सोचने, प्रयोग करने और आगे बढ़ने का मौका मिले. IIT भिलाई ठीक इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है. यह इंस्टीट्यूट पूरे देश के स्टूडेंट्स के लिए एक नया अवसर बनकर उभरा है. यहां पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज, रिसर्च और रियल-लाइफ प्रॉब्लम्स से जोड़ा जाता है. मॉडर्न कैंपस, सपोर्टिव नेचर और फ्यूचर ग्रोथ पढ़ाई के कारण IIT भिलाई आज तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है. आइए जानते हैं कि आईआईटी भिलाई में एडमिशन कैसे लें, फीस क्या है और प्लेसमेंट के क्या-क्या अवसर है. IIT Bhilai Admission: एडमिशन प्रोसेस IIT भिलाई में BTech कोर्स में एडमिशन पूरी तरह नेशनल लेवल के एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होता है. बीटेक कोर्स में एडमिशन लेने के लिए JEE Advanced एग्जाम पास करना पड़ता है. जेईई एडवांस्ड में मिले रैंक के बेसिस पर JoSAA काउंसलिंग के जरिए सीट अलॉट की जाती है. GATE स्कोर के आधार पर MTech कोर्स में एडमिशन दिया जाता है. IIT Bhilai Fees: फीस स्ट्रक्चर आईआईटी भिलाई में BTech कोर्स की फीस लगभग 170270 (प्रतिवर्ष) रुपये हैं, जिसमें ट्यूशन फीस और हॉस्टल और अन्य सभी फीस शामिल है. MTech कोर्स की फीस लगभग 86420 रुपये (प्रतिवर्ष) है. फीस रिलेटेड डिटेल्स जानने के लिए स्टूडेंट्स कॉलेज की ऑफिशियल वेबसाइट iitbhilai.ac.in चेक कर सकते हैं. IIT Bhilai Placement Details: प्लेसमेंट डिटेल्स IIT भिलाई को एक उभरता हुआ IIT माना जाता है. यहां प्लेसमेंट रिकॉर्ड बहुत अच्छा है. CSE और DSAI जैसे टेक्निकल ब्रांच में ज्यादा हाई-पैकेज देखे जाते हैं. यहां टॉप कंपनियां जैसे Google, TCS, Infosys और Accenture कॉलेज के स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट ऑफर देने के लिए आते हैं. 2024-25 में स्टूडेंट्स का हाईएस्ट पैकेज 13.28 लाख रुपये तक का देखा गया है.

किसानों के लिए राहत की खबर: गेहूं MSP 2585 रुपये, आष्टा मंडी में नीलामी शुरू

आष्टा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। बीते साल यह मूल्य 2425 रुपये था। एमएसपी की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसान अब खरीदी की तारीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  पंजीयन की जानकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत किसान ऑनलाइन नि:शुल्क पंजीयन कर सकते हैं। वहीं कियोस्क या अन्य ऑनलाइन केंद्रों से पंजीयन कराने पर 50 रुपये शुल्क देना होगा। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भू-अभिलेख, ऋण पुस्तिका और आधार से लिंक बैंक खाता अनिवार्य है। किसान एप और ई-उपार्जन पोर्टल पर घर बैठे पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध है। मौसम और उत्पादन की उम्मीद इस रबी सीजन में मौसम अब तक किसानों के अनुकूल रहा है। पर्याप्त ठंड और नमी की वजह से फसल अच्छी स्थिति में है। लोकवन, तेजस, 1544 और 322 जैसी उन्नत किस्मों की बोवनी बड़े पैमाने पर की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह बना रहा, तो इस बार गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। MSP का पिछले वर्षों का सफर पिछले वर्षों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में गेहूं का MSP 2300 रुपये था। उस पर मध्य प्रदेश सरकार ने 125 रुपये बोनस जोड़कर 2425 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी की थी। वर्ष 2025 में केंद्र ने MSP 2425 रुपये तय किया, जबकि राज्य सरकार ने 175 रुपये बोनस जोड़कर 2600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को भुगतान किया। अब 2026-27 के लिए MSP 2585 रुपये घोषित किया गया है। चुनावी वादा और किसानों की उम्मीद किसान राधेश्याम राय और कैलाश विश्वकर्मा का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदी का वादा किया था। बीते वर्ष बोनस देकर सरकार इस आंकड़े के करीब जरूर पहुंची, लेकिन वादा अधूरा रहा। इस बार MSP 2585 रुपये होने के बाद किसानों को उम्मीद है कि यदि राज्य सरकार 115 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देती है, तो भाजपा अपना चुनावी वचन पूरा कर सकती है। बोनस पर टिकी निगाहें प्रदेश में भाजपा की सरकार होने की वजह से किसानों की नजरें पूरी तरह राज्य सरकार के फैसले पर हैं। पिछले वर्ष बोनस ने किसानों को बड़ी राहत दी थी। इस बार भी किसान आशा लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी लागत, मेहनत और भरोसे की कद्र करेगी। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार उनकी उम्मीदों को हकीकत में बदलती है या 2700 रुपये का वादा फिर इंतजार में रह जाएगा। आष्टा मंडी में रबी सीजन की नीलामी शुरू सीहोर जिले की आष्टा कृषि उपज मंडी में मंगलवार से नए रबी सीजन की गेहूं की आवक और नीलामी का औपचारिक शुभारंभ हो गया। मंडी परिसर में सुबह से ही किसानों की चहल-पहल और व्यापारियों की सक्रियता ने नए सीजन की शुरुआत खास बना दी। पहली नीलामी से उत्साह सीजन की पहली नीलामी में इछावर तहसील के ग्राम डाबला राय निवासी किसान राजाराम ने चार क्विंटल गेहूं मंडी में लाया। उसकी उपज को सात्विक एग्रो फूड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड ने 2381 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा। पहले दिन मिले भाव ने न सिर्फ राजाराम का हौसला बढ़ाया, बल्कि मंडी पहुंचे अन्य किसानों में भी उत्साह भर दिया। एक दिन में 9904 क्विंटल आवक मंडी सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने बताया कि 3 फरवरी 2026 को आष्टा मंडी में कुल 9904 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में आवक और बढ़ सकती है क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में फसल की कटाई जोरों पर है। उन्नत किस्मों को बेहतर भाव मंडी में गेहूं की अलग-अलग किस्मों को गुणवत्ता के अनुसार अच्छा भाव मिला। ‘गेहूं सुजाता 3006’ किस्म का उच्चतम भाव 3440 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। वहीं लोकवन किस्म 2602 रुपये से 2834 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकी। अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं की मांग ने मंडी में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया। शरबती गेहूं की साख आष्टा मंडी शरबती और उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की फसल देश के कई हिस्सों में पसंद की जाती है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में आने वाले गेहूं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है, जिससे बाहर के खरीदार ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं और किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना मजबूत हुई है। पड़ोसी जिलों के किसानों का भरोसेमंद केंद्र सीहोर जिले की आष्टा और भैरूंदा मंडी बड़े व्यापारिक केंद्र मानी जाती हैं। यहां की साख ऐसी है कि हरदा, देवास और राजगढ़ जैसे जिलों के किसान भी अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। मंडी से खरीदा गया गेहूं महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में भेजा जाता है। बेहतर भाव और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण किसान बड़ी संख्या में आष्टा मंडी का रुख कर रहे हैं।  

भारतीय नौसेना की शान: INS विक्रांत 60 साल बाद अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में, ताकत का दिखावा

नई दिल्ली भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक पल आने वाला है. भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत 18 फरवरी 2026 को इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में हिस्सा लेगा. यह रिव्यू बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के तट पर होगा. लगभग 60 साल बाद कोई भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर फ्लीट रिव्यू में दिखेगा – पिछली बार 1966 में मूल INS विक्रांत ने ऐसा किया था. IFR 2026 क्या है? IFR एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नौसेना कार्यक्रम है, जहां दुनिया की कई नौसेनाएं अपने युद्धपोतों के साथ जमा होती हैं. यह मैरीटाइम डिप्लोमेसी का माध्यम है. भारत ने 137 से ज्यादा देशों को निमंत्रण भेजा है. 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लेने की पुष्टि की है.     मुख्य दिन: 18 फरवरी 2026 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर) फ्लीट की समीक्षा करेंगी. वे INS सुमेधा (स्वदेशी नेवल ऑफशोर पेट्रोल वेसल) से रिव्यू करेंगी, जिसे इस बार प्रेसिडेंट्स यॉट बनाया गया है.     अन्य कार्यक्रम: 15 से 25 फरवरी तक MILAN 2026 (मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज) और IONS (Indian Ocean Naval Symposium) चीफ्स कॉनक्लेव भी होंगे. INS विक्रांत क्यों सबसे बड़ा आकर्षण? आईएनएस विक्रांत भारत का पहला घरेलू एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह 45,000 टन का है. लंबाई 262.5 मीटर, चौड़ाई 61.6 मीटर. 1600 से ज्यादा लोग इसमें काम करते हैं (महिला अधिकारी भी शामिल).     हवाई जहाज: MiG-29K फाइटर जेट, MH-60R रोमियो हेलीकॉप्टर (अमेरिका से), Chetak, Sea King, Kamov-31 आदि. फ्रांस से 26 Rafale-M नेवल फाइटर आने वाले हैं, जो इसकी ताकत बढ़ाएंगे.     डिफेंस सिस्टम: 2 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (64 Barak-8 मिसाइलें), 4 OTO Melara 76 mm गन, 4 CIWS (क्लोज-इन वेपन सिस्टम).     क्षमता: एंटी-सबमरीन वारफेयर, एंटी-शिप अटैक, एयर डिफेंस, सर्वेलेंस, सर्च एंड रेस्क्यू. इसे फ्लोटिंग एयरफील्ड कहा जाता है. ऑपरेशन सिंदूर में विक्रांत ने कमाल दिखाया: 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान अरब सागर में तैनात होकर पाकिस्तानी नौसेना को बेस से बाहर आने से रोका. इससे कैरियर बैटल ग्रुप की ताकत साबित हुई. अब IFR में यह दुनिया को भारत की समुद्री शक्ति दिखाएगा. अन्य स्वदेशी जहाज भी होंगे शामिल     नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स (प्रोजेक्ट 17A) – स्टेल्थ फ्रिगेट्स, 1980 के बाद पहली बार फ्लीट रिव्यू में.     विशाखापत्तनम- क्लास डेस्ट्रॉयर, अर्नाला-क्लास ASW कॉर्वेट्स आदि. भारत की फ्लीट रिव्यू की परंपरा     1953: पहला फ्लीट रिव्यू (बॉम्बे में).     1966: मूल INS विक्रांत ने हिस्सा लिया.     2001: पहला IFR (मुंबई में).     2016: दूसरा IFR (विशाखापत्तनम में, थीम United Through Oceans).     2026: तीसरा IFR – अब भारत बिल्डर नेवी बन चुका है, जहां स्वदेशी जहाजों पर जोर है. IFR 2026 भारत की मैरीटाइम पावर, आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक में नेतृत्व को दिखाएगा. यह दोस्ताना नौसेनाओं के साथ सहयोग बढ़ाएगा और डिटरेंस (रोकथाम) का संदेश देगा.

5000 शिक्षक पदों की भर्ती को मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

यूपी में स्वास्थ्य पहल: 9.8 करोड़ बच्चों को दी जाएगी कृमि मुक्ति दवा

लखनऊ  राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पेट के कीड़ों से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल दवा खिलाई जाएगी। जो बच्चे इस दिन दवा का सेवन नहीं कर पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के तहत दवा दी जाएगी। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ. सतीश कुमार गौतम ने बताया कि प्रदेश में लगभग 9.8 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्ति दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान वर्ष में दो बार फरवरी और अगस्त में संचालित किया जाता है, जिसे स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस और शिक्षा विभाग के संयुक्त सहयोग से लागू किया जाएगा।  अभियान चलाया जाएगा उन्होंने बताया कि प्रदेश के 21 जनपदों के 64 चयनित ब्लॉकों, शहरी क्षेत्रों और प्लानिंग यूनिट्स में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन नहीं होगा, क्योंकि आईडीए अभियान के तहत एल्बेंडाजोल दवा पहले से ही दी जा रही है। किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए एल्बेंडाजोल दवा सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दी जाएगी। स्कूल न जाने वाले बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए दवा खिलाई जाएगी। शिक्षक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों को अपने सामने दवा का सेवन कराना सुनिश्चित करेंगे तथा यह विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए। रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी कार्यक्रम की रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी तथा कृमि मुक्ति दिवस से जुड़ी सभी गतिविधियों को विद्यालयों द्वारा ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। दवा सेवन के बाद कुछ बच्चों में मतली, चक्कर या उल्टी जैसे हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किसी भी गंभीर या असामान्य स्थिति में आशा या एएनएम से संपर्क करें अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर 104 या एम्बुलेंस सेवा 108 पर कॉल की जा सकती है।   

कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।