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ओंकारेश्वर में महाशिवरात्रि के दिन 24 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के पट, फूलों से किया जाएगा विशेष शृंगार

खंडवा  महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर 24 घंटे दर्शनार्थियों के लिए खुला रहेगा। इस वजह से प्रतिदिन रात साढ़े आठ बजे होने वाली शयन आरती नहीं होगी। महापर्व पर भगवान शिव भी रतजगा करेंगे। ज्योतिर्लिंग मंदिर की फूलों से सजावट की जाएगी। श्रीजी मंदिर ओंकारेश्वर ट्रस्ट द्वारा तड़के तीन बजे से मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे, जो अगले दिन रात तीन बजे कुछ समय बंद रहने के बाद फिर खुल जाएंगे। शास्त्रों के अनुसार ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती रात्रि विश्राम करते हैं। इसके चलते रात्रि में यहां भगवान के लिए सेज, झूला और चौंसर भी बिछती है। रात्रि 8:30 बजे के बाद मंदिर के पट बंद कर शयन आरती की जाती है। इसके बाद भगवान विश्राम करते हैं। महाशिवरात्रि पर शयन आरती और भगवान के लिए सेज और झूला नहीं सजेगा। मंदिर ट्रस्ट के पंडित आशीष दीक्षित और पं. डंकेश्वर दीक्षित ने बताया कि उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के समान ओंकारेश्वर में भगवान की शयन आरती का महत्व है। पट खुलने पर पहले साधु-संत करेंगे दर्शन महाशिवरात्रि पर तड़के तीन बजे पट खुलने के बाद साधु-संत और संन्यासी शोभायात्रा के साथ मंदिर पहुंचकर पूजन-दर्शन करेंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दोपहर 12:20 बजे भगवान को भोग के लिए कुछ समय के लिए पट बंद होंगे। फिर तड़के तीन बजे तक सतत दर्शनार्थ पट खुले रहेंगे। शिवरात्रि पर मंदिर में फूलों से सजावट और तीर्थनगरी तथा घाटों पर रोशनी की जाएगी।  

राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि का बड़ा कदम, फीस वृद्धि का निर्णय वापस, छात्रों को मिली राहत

 ग्वालियर  राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा प्रदेशभर के संबद्ध निजी कालेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की फीस में की गई भारी वृद्धि के मामले में छात्रों को राहत मिल गई है। निजी कालेज संचालकों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने गुरुवार को बैठक कर फीस वृद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है, जिससे आगामी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को राहत मिली है। विश्वविद्यालय द्वारा एक झटके में लगभग पांच हजार रुपये तक फीस बढ़ाने के निर्णय पर प्रदेशभर के कालेज संचालकों ने सामूहिक आपत्ति दर्ज कराते हुए पुनर्विचार की मांग की थी। उनका कहना था कि इतनी बड़ी वृद्धि अव्यावहारिक है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर भारी बोझ पड़ेगा। किस चीज को लेकर था विवाद सबसे ज्यादा विवाद ‘आकस्मिक शुल्क’ को लेकर था। विश्वविद्यालय ने स्वाध्यायी छात्रों पर 1500 से पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, जिसका स्पष्ट औचित्य प्रबंधन नहीं बता पाया। कालेज संचालकों ने कहा कि प्रदेश के किसी अन्य विश्वविद्यालय में इस तरह का आकस्मिक शुल्क नहीं लिया जाता। फीस वृद्धि के तहत पीजी में हर साल पांच हजार रुपये बढ़ाए गए थे, जिससे दो साल का कुल शुल्क 22-25 हजार रुपये तक पहुंच जाता। वहीं छह वर्षीय स्कूल स्तर के डिप्लोमा में प्रतिवर्ष 1500 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि छात्र पहले से ही अपने स्कूलों में फीस जमा करते हैं। नई दरों के अनुसार फीस जमा करने का आदेश विश्वविद्यालय ने पहले 10 फरवरी तक नई दरों के अनुसार फीस जमा करने का आदेश दिया था। बढ़ते विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक समिति गठित कर मामले की समीक्षा शुरू की थी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने फीस वृद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है।  

एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार \’मसल ट्रांसफर\’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

भोपाल  एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है, जिसमें शरीर के एक हिस्से की सक्रिय मांसपेशी को दूसरे हिस्से में लगाकर अंग की गति वापस लाई गई। 'फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर' (एफएफएमटी) नामक इस तकनीक के जरिए 55 वर्षीय एक ऐसे मरीज का हाथ सक्रिय किया गया है, जो 'पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी' के कारण पूरी तरह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका था। मरीज एक ऐसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था जिसमें कंधे से हाथ तक जाने वाली नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप उसका ऊपरी अंग पूरी तरह निष्क्रिय था और वह हाथ हिलाने तक में असमर्थ था। इस स्थिति में जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है क्योंकि मरीज दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है। कैसे हुई जटिल माइक्रोसर्जरी? इस सर्जरी में मरीज की जांघ से 'ग्रैसिलिस' नामक मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला गया। इस जीवित मांसपेशी को प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से नसों और खून की नलियों को जोड़ा गया। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब मरीज की कोहनी में सक्रिय लचीलापन बहाल हो सकेगा, जिससे वह हाथ मोड़ना और उठाना जैसे बुनियादी कार्य कर पाएगा। इन विशेषज्ञों की टीम ने रचा इतिहास इस ऐतिहासिक सर्जरी में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. राहुल दुबेपुरिया (एसोसिएट प्रोफेसर) की मुख्य भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने किया। जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध     प्रदेश में यह अपनी तरह की पहली और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इस उपलब्धि ने साबित किया है कि एम्स भोपाल अब दुनिया की सबसे उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों को अपनाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। – प्रो. डॉ. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार \’मसल ट्रांसफर\’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

भोपाल  एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है, जिसमें शरीर के एक हिस्से की सक्रिय मांसपेशी को दूसरे हिस्से में लगाकर अंग की गति वापस लाई गई। 'फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर' (एफएफएमटी) नामक इस तकनीक के जरिए 55 वर्षीय एक ऐसे मरीज का हाथ सक्रिय किया गया है, जो 'पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी' के कारण पूरी तरह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका था। मरीज एक ऐसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था जिसमें कंधे से हाथ तक जाने वाली नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप उसका ऊपरी अंग पूरी तरह निष्क्रिय था और वह हाथ हिलाने तक में असमर्थ था। इस स्थिति में जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है क्योंकि मरीज दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है। कैसे हुई जटिल माइक्रोसर्जरी? इस सर्जरी में मरीज की जांघ से 'ग्रैसिलिस' नामक मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला गया। इस जीवित मांसपेशी को प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से नसों और खून की नलियों को जोड़ा गया। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब मरीज की कोहनी में सक्रिय लचीलापन बहाल हो सकेगा, जिससे वह हाथ मोड़ना और उठाना जैसे बुनियादी कार्य कर पाएगा। इन विशेषज्ञों की टीम ने रचा इतिहास इस ऐतिहासिक सर्जरी में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. राहुल दुबेपुरिया (एसोसिएट प्रोफेसर) की मुख्य भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने किया। जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध     प्रदेश में यह अपनी तरह की पहली और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इस उपलब्धि ने साबित किया है कि एम्स भोपाल अब दुनिया की सबसे उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों को अपनाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। – प्रो. डॉ. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

चीतों के इलाके में बाघ की एंट्री, कूनो पार्क में पहली बार आया नजर, कैमरे ने पकड़ी तस्वीर

 श्योपुर देश-दुनिया में चीतों के घर के रूप में पहचान बनाने वाले मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अब टाइगर की भी मौजूदगी है. एक दिन पहले कूनो नेशनल पार्क के टिकटोली गेट क्षेत्र के जंगल में एक बाघ नजर आया, जिसे पहली बार पर्यटकों ने देखा. इससे पहले कूनो में टाइगर की मौजूदगी के संकेत तो मिलते रहे थे, लेकिन यह पहला मौका है, जब पर्यटकों को बाघ का दीदार हुआ. गुरुवार सुबह टिकटोली गेट से निजी फ्लाइंग कैट सफारी के दौरान पर्यटक कूनो भ्रमण पर निकले थे. इसी दौरान जंगल क्षेत्र में एक टाइगर दिखाई दिया. बाघ बैठा हुआ था, लेकिन पर्यटकों की जिप्सी को देखकर चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल के भीतर ओझल हो गया. वन विभाग के अनुसार, यह बाघ राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व का टी-132 हो सकता है, जो करीब 6 महीने पहले रणथंभौर क्षेत्र से बाहर निकला था. इससे पहले भी कूनो में टाइगर के पगमार्क मिलने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब पहली बार उसकी प्रत्यक्ष मौजूदगी सामने आई है. कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने आजतक को फोन पर बताया कि कूनो नेशनल पार्क में एक टाइगर की मौजूदगी काफी समय से मानी जा रही थी, लेकिन हाल के दिनों में वह नजर नहीं आया था. संभव है कि वही टाइगर टिकटोली गेट के पास दिखाई दिया हो. कूनो में अब बिग कैट की तीन प्रजातियां दुनियाभर में बिग कैट की 6 प्रजातियां- शेर, बाघ, जगुआर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता मानी जाती हैं. इनमें से अब कूनो नेशनल पार्क में तीन प्रजातियां मौजूद हैं. यहां पहले से ही तेंदुओं की अच्छी संख्या है. बीते साढ़े तीन साल से कूनो चीता प्रोजेक्ट का केंद्र बना हुआ है. अब बाघ की मौजूदगी ने पार्क की जैव विविधता को और समृद्ध कर दिया है.

एमपी में ठंड का कहर, तापमान 10 डिग्री से नीचे, उज्जैन और इंदौर में धूप, 8 फरवरी से बारिश की संभावना

भोपाल  वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सिस्टम का असर खत्म होते ही मध्य प्रदेश में सर्दी ने दोबारा जोर पकड़ लिया है। उत्तरी हवाओं के तेज होने से दिन में ठिठुरन बढ़ गई है, वहीं रात का तापमान कई इलाकों में 10 डिग्री से नीचे चला गया। ओले-बारिश से मिली राहत के बाद अब ठंड और कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।मौसम विभाग के मुताबिक, बीते एक हफ्ते से सक्रिय सिस्टम के कमजोर पड़ते ही गुरुवार को प्रदेश के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार-गुरुवार की रात ग्वालियर समेत 8 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा, जबकि 30 से ज्यादा जिलों में हलके से घने कोहरे ने सुबह की रफ्तार थाम दी।  एमपी में अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने 7 फरवरी को प्रदेश में हल्का कोहरा रहने का अनुमान जताया है लेकिन बारिश की कोई चेतावनी नहीं है. इस बीच तेज ठंडी हवाओं का असर प्रदेश के ऊपर बना रहेगा. इसके साथ ही 8 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा छाने की संभावना है. इस दिन भी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है. 8 फरवरी से नया मौसम सिस्टम होगा सक्रिय, फिर गिरेगा मावठा मौसम वैज्ञानिक डॉ दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा. इसके असर से प्रदेश के मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है. 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना जताई गई है. राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार शुक्रवार को राजगढ़ में सबसे कम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. इसके बाद रीवा में 7.2 डिग्री, खजुराहो में 8.2 डिग्री, दतिया में 8.4 डिग्री, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ है. वहीं पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री रहा है. बड़े शहरों में भी ठंड का असर, गिरा न्यूनतम तापमान भोपाल और उज्जैन में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा इंदौर में 13.2 डिग्री, जबलपुर में 13.5 डिग्री और ग्वालियर में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ. न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज प्रदेश में सबसे ठंडा राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। रीवा में 7.2, खजुराहो में 8.2, दतिया में 8.4, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तथा पचमढ़ी में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और उज्जैन में 13 डिग्री, इंदौर में 13.2 और जबलपुर में 13.5 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर में पारा 9 डिग्री तक लुढ़क गया। सुबह-सुबह कोहरे की चादर शुक्रवार सुबह ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में हलका से मध्यम कोहरा छाया रहा। कोहरे का असर परिवहन पर भी दिखा। दिल्ली से आने-जाने वाली कई ट्रेनों की टाइमिंग प्रभावित हुई है। मालवा, सचखंड और शताब्दी जैसी ट्रेनों के यात्री देरी से परेशान नजर आए। अगले दो दिन का मिजाज 7 फरवरी: हलका कोहरा, बारिश का अलर्ट नहीं, ठंड बनी रहेगी। 8 फरवरी: कई जिलों में हलका से मध्यम कोहरा, फिलहाल बारिश नहीं। फिर बदलेगा मौसम मौसम विभाग का कहना है कि 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा और 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना है। यानी ठंड के साथ बारिश का दौर एक बार फिर लौट सकता है। 

U19 World Cup Final: इंग्लैंड को हराकर खिताब जीतने की उम्मीद, सूर्यवंशी से तूफानी बैटिंग की संभावना

 हरारे आईसीसी पुरुष अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में 6 फरवरी (शुक्रवार) को भारतीय टीम का सामना इंग्लैंड से होगा. हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला खेला जाना है. रिकॉर्ड छठा अंडर-19 वर्ल्ड कप खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ भारत इस मुकाबले में उतरेगा. वहीं इंग्लिश टीम की निगाहें दूसरी बार खिताबी जीत हासिल करने पर हैं. भारतीय समयानुसार इस मुकाबले में टॉस दोपहर 12.30 बजे होगा और पहली गेंद दोपहर 1 बजे फेंकी जाएगी. यह भारत की 10वीं बार U19 वर्ल्ड कप फाइनल में एंट्री है. साथ ही भारत लगातार छठा फाइनल खेलने जा रहा है. ये सिलसिला 2016 में शुरू हुआ था. भारत अब तक 5 बार चैम्पियन रह चुका है. उसने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में खिताब जीता था. इंग्लैंड ने अब तक सिर्फ 1 बार U19 वर्ल्ड कप जीता है, जब साल 1998 में उसने न्यूजीलैंड को हराया था. खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम की ओर से वैभव सूर्यवंशी धमाल मचाना चाहेंगे. वैभव ने अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में शानदार 68 रन बनाए थे. उस मुकाबले में एरॉन जॉर्ज ने तो शतक ठोक दिया था. कप्तान आयुष म्हात्रे, अभिज्ञान कुंडू, उप-कप्तान विहान मल्होत्रा भी फॉर्म में चल रहे हैं. गेंदबाजी में आरएस अम्बरीश, दीपेश देवेंद्रन, हेनिल पटेल, खिलान पटेल और कनिष्क चौहान ने दमदार प्रदर्शन किया है. फाइनल में भारत की संभावित प्लेइंग-11: एरॉन जॉर्ज, वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे (कप्तान), विहान मल्होत्रा, वेदांत त्रिवेदी, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), आरएस अम्बरीश, कनिष्क चौहान, खिलान पटेल, हेनिल पटेल और दीपेश देवेंद्रन. फाइनल में इंग्लैंड की संभावित प्लेइंग-11: बेन डॉकिन्स, जोसेफ मूर्स, बेन मेस, थॉमस रेव (कप्तान/विकेटकीपर), कालेब फाल्कनर, राल्फी अल्बर्ट, फरहान अहमद, सेबेस्टियन मॉर्गन, जेम्स मिंटो, मैनी लम्सडेन और एलेक्स फ्रेंच. इंडिया U19 vs इंग्लैंड U19 (H2H) कुल मैच: 55 भारत ने जीते: 41 इंग्लैंड ने जीते: 13 टाई: 1 बेनतीजा: 0 अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत का फुल स्क्वॉड: आयुष म्हात्रे (कप्तान), विहान मल्होत्रा (उप-कप्ताान), वैभव सूर्यवंशी, एरॉन जॉर्ज, वेदांत त्रिवेदी, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), हेनिल पटेल, दीपेश देवेंद्रन, खिलान पटेल, मोहम्मद एनान, हरवंश पंगालिया, आरएस अम्बरीश, कनिष्क चौहान, किशन कुमार सिंह और उधव मोहन. अंडर-19 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड का फुल स्क्वॉड:  बेन डॉकिन्स, जोसेफ मूर्स, बेन मेस, थॉमस रेव (विकेटकीपर/कप्तान), कालेब फाल्कनर, राल्फी अल्बर्ट, फरहान अहमद, सेबेस्टियन मॉर्गन, जेम्स मिंटो, मैनी लम्सडेन, एलेक्स फ्रेंच, एलेक्स ग्रीन, इसक मोहम्मद, ल्यूक हैंड्स, विल बेनिसन और अली फारूक.

अमेरिका का बड़ा दांव: बलूचिस्तान में निवेश, ट्रंप की नजर सोने के भंडार पर, पाकिस्तान का खजाना खतरे में

वाशिंगटन  पाकिस्तान के बलूचिस्तान को खजानों की धरती कहा जाता है. बलूचिस्तान की बंजर जमीन के अंदर खूब खजाने दबे हैं. बलूचिस्तान रेयर अर्थ मिनिरल्स से भरा है. दुनिया के सबसे बड़े सोने का भंडार भी यहीं है. यही कारण है कि चीन भी इसमें इंट्रेस्ट लेता रहा है. अब इसी बलूचिस्तान की धरती पर अमेरिका की नजर पड़ गई है. जी हां, बलूचिस्तान के सोना-चांदी और तांबा समेत कई रेयर अर्थ मिनिरल्स को पाने की ख्वाइश में अमेरिका पाकिस्तान में पानी की तरह पैसा बहाने जा रहा है. अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दुनिया के सबसे बड़े सोने-तांबे के भंडार ‘रेको डीक माइन में 1.3 अरब डॉलर (करीब 117,594,574,500 करोड़ रुपये) का निवेश करने का ऐलान कर दिया है. यह पैसा अमेरिका के नए प्रोजेक्ट ‘वॉल्ट’ का हिस्सा है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन ही लॉन्च किया था. दरअसल, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह अपने ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के हिस्से के रूप में पाकिस्तान की रेको डिक खदान में 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा. बुधवार को विदेश विभाग की ओर से घोषित इस परियोजना का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी के लिए वैश्विक बाजार को नया आकार देना है. अमेरिका का मकसद चीन से भी जुड़ा है. रेयर अर्थ मिनिरल्स का बादशाह चीन है. उसे टक्कर देने के लिए ही अमेरिका ने यह चाल चली है. कहां है यह खजाने का भंडार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेको डिक बलूचिस्तान प्रांत में है, यह दुनिया का सबसे बड़ा सोने और तांबे का भंडार है. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार, रेको डिक ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के लिए अमेरिका के बाहर किया गया एकमात्र निवेश भी है. प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी, 2026 को की थी, जो यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के चेयरमैन के नेतृत्व में एक पहल थी. रेको डीक में क्या खजाना है? पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रेको डिक खदान दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडारों में से एक है. रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में अनुमानित 5.9 बिलियन टन अयस्क है, जिसमें 0.41 फीसदी तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोने का भंडार है. यानी दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड-कॉपर डिपॉजिट. बलूचिस्तान के चागई पहाड़ों में यह स्थित है. इलाका ज्वालामुखी चेन का हिस्सा है, जो अफगानिस्तान बॉर्डर तक फैला हुआ है. अब समझते हैं कि आखिर प्रोजेक्ट वॉल्ट क्या है? डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिका की ‘स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल्स रिजर्व’ बनाने के लिए शुरू किया है. इसका मकसद है- रेयर अर्थ मिनिरल्स के मामले में चीन पर निर्भरता कम करना और ग्लोबल मार्केट को रीशेप करना. अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने इसके लिए 10 अरब डॉलर का सबसे बड़ा लोन मंजूर किया है. कुल 12 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट अमेरिका के अंदर कई माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च हो रहा है. लेकिन एक ही विदेशी निवेश है और वह है पाकिस्तान का रेको डीक. विवाद क्या 2011 में पाकिस्तान ने चिली की एंटोफागास्टा और कनाडा की बैरिक गोल्ड की कंपनी टेथियन को माइनिंग राइट्स देने से मना कर दिया था. मामला इंटरनेशनल कोर्ट तक गया. अब बैरिक गोल्ड फिर से प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, लेकिन हाल ही में बलूचिस्तान में सुरक्षा घटनाओं के कारण उसने पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है. फिर भी अमेरिका का 1.3 अरब डॉलर का निवेश आगे बढ़ रहा है. अमेरिका क्यों आया बलूचिस्तान? अमेरिका को क्रिटिकल मिनरल्स (तांबा, सोना, रेयर अर्थ्स) की जरूरत है. .ये रेयर अर्थ मिनिरल डिफेंस, इलेक्ट्रिक कार, टेक्नोलॉजी सबके लिए जरूरी हैं. चीन इनकी सप्लाई चेन पर दबदबा रखता है. रेको डीक में निवेश इसका सबसे बड़ा विदेशी कदम है. बलूचिस्तान में अलगाववादी मूवमेंट और सुरक्षा इश्यूज हैं, फिर भी अमेरिका ने दांव लगाया है. अमेरिका की नजर अब बलूचिस्तान के सोने पर टिक गई है. और लगता है आसिम मुनीर की वाइट हाउस में बिरयानी वाली लंच की कीमत अमेरिका इसी से वसूलेगा.

पाक-सऊदी डील के बीच भारत का बड़ा दांव, खाड़ी देशों से नई व्यापारिक साझेदारी

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने  एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए बातचीत फिर से शुरू होने जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं। GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में, लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और नीतियों में स्थिरता लाना है। पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते का एंगल भारत और GCC के बीच यह बातचीत उस समय फिर से शुरू हो रही है जब क्षेत्र की भू-राजनीति काफी जटिल है। सितंबर 2025 में, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक 'सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता' (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। यह रक्षा समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य गतिरोध (ऑपरेशन सिंदूर) के कुछ महीनों बाद हुआ था। ज्ञात हो कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास एक तरफ जहां पाकिस्तान और सऊदी अरब करीब आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। विमानतल सौदा रद्द: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के कुछ ही समय बाद UAE ने पाकिस्तान के साथ एक बड़ा समझौता रद्द कर दिया। पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रबंधन से जुड़ा सौदा इसलिए स्थगित कर दिया क्योंकि पाकिस्तान किसी स्थानीय साझेदार को नामित नहीं कर सका। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तानी पक्ष ने अंतिम कॉल लेटर भेजकर स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन UAE ने यह कहते हुए असमर्थता जताई कि वह अब तक किसी नामित इकाई की पुष्टि नहीं कर सका है। रणनीतिक कारण: पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता करने के बाद से UAE और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ी हैं। भारत-UAE की बढ़ती नजदीकियां: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया दिल्ली यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। भारत-UAE: $200 बिलियन का लक्ष्य UAE के राष्ट्रपति की संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण भारत यात्रा के कुछ ही घंटों बाद, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 2032 तक 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और दूसरी ओर UAE के भारत के साथ बढ़ते संबंध इस खाड़ी देश की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाते हैं।

RSS पर टिप्पणी से दिग्विजय सिंह के लिए मुसीबत, मानहानि मामला खारिज करने से कोर्ट ने किया इनकार

भोपाल  कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर से जुड़ी एक टिप्पणी के चक्कर में फंसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है। 8 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया साइट पर किए गए एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर की एक तस्वीर साझा करके उसके कैप्शन में लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वह दलितों, पिछड़े वर्गों, मुसलमानों और भूमि, जल व जंगल से जुड़े मुद्दों पर गोलवलकर के विचारों से परिचित हैं? इस पोस्ट को लेकर ठाणे निवासी और संघ के स्वयंसेवक शशिकांत चंपानेकर ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दायर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघ की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। याचिका के दाखिल होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी। राज्यसभा सांसद ने इस याचिका को खारिज करने की अपील करते हुए तर्क दिया कि यह मामला कानूनन विचारणीय नहीं है। इस पर सिविल जज राजेश बी. खंडारे ने कहा कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में वैध कारण बनता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस नेता की तरफ से दलील दी गई कि याचिका कर्ता को यह मुकदमा दायर करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि संघ न तो कोई पंजीकृत संस्था है और न ही कानूनी व्यक्ति है। ऐसे में वह मुकदमा दायर नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कोई व्यक्तिगत सदस्य संघ और गोलवलकर की ओर से हर्जाना कैसे मांग सकता है? इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि आपराधिक मानहानि कानून के तहत किसी पहचाने जाने योग्य समूह की मानहानि की जा सकती है और उस समूह का कोई आहत सदस्य कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े गंभीर और विचारणीय मुद्दे हैं, जिनका फैसला केवल साक्ष्य दर्ज होने के बाद ही किया जा सकता है, न कि वाद खारिज करने के चरण पर। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस वाद को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिका में कारण बनता है, संघ सदस्य के मुकदमा दायर करने के अधिकार को इस चरण पर कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं कहा जा सकता और वाद के मूल्यांकन या कोर्ट फीस की पर्याप्तता जैसे मुद्दे बिना सुधार का अवसर दिए वाद खारिज करने का आधार नहीं बन सकते।