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ऊर्जा बचत का संदेश, जिम्मेदारी का आह्वान — कृष्णा गौर ने किया सक्षम महोत्सव का उद्घाटन

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बच्चे भी बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवन शैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।  

चीन का नाम लेकर ट्रंप ने फिर दी चेतावनी, कनाडा और कार्नी पर तीखा हमला

विदेश  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेतावनी दी है। चीन के साथ व्यापारिक डील करने की मंशा रखने वाले कार्नी को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह ऐसे किसी समझौते पर आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका बहुत बड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। गौरतलब है कि कार्नी की चीन यात्रा के बाद जब इस तरह की संभावना जताई जा रही थी, तभी ट्रंप ने कार्नी को ऐसी किसी डील पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं अमेरिका की धमकी के बाद कनाडा ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि वह ऐसी कोई डील नहीं करने जा रहे। रविवार को एयरफोर्स वन में सवार राष्ट्रपति ट्रंप से जब एक बार फिर से कनाडा द्वारा इस डील पर आगे बढ़ने की बात कही गई, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। अगर कनाडा यह व्यापारिक सौदा करता है, जो शी जिनपिंग करना चाहते हैं, तो चीन कनाडा के ऊपर हावी हो जाएगा। ऐसा होने के बाद वह सबसे पहला काम आइस हॉकी को खत्म करने का करेंगे।" बड़ा कदम उठाएंगे: ट्रंप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से जब पूछा गया कि अगर कनाडा ऐसा कोई समझौता करता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी। ट्रंप ने इसका जवाब देते हुए कहा, "अगर वह चीन के साथ कोई समझौता करते हैं, तो हां, हम कोई बहुत बड़ा कदम उठाएंगे।" आपको बता दें अमेरिका के राष्ट्रपति कि कनाडा को लेकर यह तल्ख टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब वह ईरान के प्रति थोड़े नरम नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान लगातार अमेरिकी सरकार से बात कर रहा है। हालांकि, इसके बीच मध्य-पूर्व और अरब क्षेत्र में लगातार अमेरिकी सेना की तैनाती बढ़ रही है। ट्रंप की धमकियों के बाद झुका कनाडा? अमेरिका में ट्रंप का शासन आने के यूरोपीय देश और तमाम नाटो सहयोगी देश अब अमेरिका का विकल्प खोजते हुए नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में पहले कनाडा और उसके बाद ब्रिटेन के नेताओं ने चीन की यात्रा की थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्को कार्नी की जनवरी में हुई चीन यात्रा के दौरान यह संभावना जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच में एक व्यापारिक समझौता हो सकता है। हालांकि, बाद में ट्रंप ने 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दे दी। इसके बाद कनाडा की तरफ से साफ किया गया कि वह चीन के साथ किसी तरह के व्यापारिक समझौते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। ओटावा में पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने कहा, “चीन के साथ हमने पिछले कुछ वर्षों में पैदा हुई कुछ समस्याओं को ठीक करने के लिए कदम उठाए हैं।” उन्होंने चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों, कृषि उत्पादों और मछली उत्पादों जैसे व्यापारिक मुद्दों का जिक्र किया। आपको बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप के शासन में आने के बाद से ही लगातार अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में दरार आती जा रही है। ट्रंप के शुरुआती समय में वहां पर जस्टिन ट्रूडो का शासन था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें गवर्नर कहकर संबोधित किया था। ट्रंप लगातार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहते नजर आते हैं। दोनों देशों के बीच में लगातार तल्खी देखने को मिल रही है।

दलाई लामा का गैमी अवॉर्ड और चीन का विरोध: धर्म और राजनीति के बीच तनातनी

बीजिंग चीन ने सोमवार को दलाई लामा को दिए गए ग्रैमी पुरस्कार की निंदा करते हुए कहा कि वह तिब्बती आध्यात्मिक नेता द्वारा इस सम्मान का उपयोग "चीन विरोधी गतिविधियों" को अंजाम देने के लिए किए जाने का "कड़ा विरोध" करता है। दलाई लामा, तेनजिन ग्यात्सो ने रविवार को लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कारों में अपने स्पोकन-वर्ड एल्बम, 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई की रिकॉर्डिंग श्रेणी में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता। दलाई लामा को पुरस्कार मिलने पर उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने चीन के इस आरोप को दोहराया कि 90 वर्षीय आध्यात्मिक नेता धर्म के नाम पर अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं। लिन ने यहां मीडिया से कहा कि दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा, "वह एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जो धर्म की आड़ में चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि बीजिंग इस बात का पुरजोर विरोध करता है कि संबंधित पक्ष इस पुरस्कार का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक उपकरण के रूप में करें। दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। उनको तिब्बत को मुक्त कराने के लिए उनके निरंतर, अहिंसक संघर्ष के लिए 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इस श्रेणी में कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एंड मी: द कैरल कॉनर्स स्टोरी), ट्रेवर नोआ (इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन: ए मेमॉयर) और फैब मोरवन (यू नो इट्स ट्रू: द रियल स्टोरी ऑफ मिली वैनिली) जैसे कलाकारों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता। दलाई लामा ने यह पुरस्कार मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, ''मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मेरा दृढ़ विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ, सभी आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए आवश्यक है।'' दलाई लामा ने कहा, "मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को व्यापक रूप से फैलाने में मदद कर सकता है।"  

मुफ्त शिक्षा का सुनहरा अवसर! UP RTE 2026 के लिए प्राइवेट स्कूलों में ऑनलाइन आवेदन आज से शुरू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूलों की 25% आरक्षित सीटों पर फ्री एडमिशन की प्रक्रिया आज, 2 फरवरी 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इस साल प्रवेश प्रक्रिया को चार चरणों में विभाजित किया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके। क्या है RTE प्रवेश प्रक्रिया? आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत, प्राइवेट स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25% हिस्सा उन बच्चों के लिए आरक्षित रखना होता है, जिनके परिवार की वार्षिक आय बहुत कम है या जो सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। महत्वपूर्ण तिथियां (प्रथम चरण) अगर आप अपने बच्चे का दाखिला पहले चरण में कराना चाहते हैं, तो इन तारीखों को नोट कर लें। ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 2 फरवरी 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 25 फरवरी 2026 दस्तावेजों का सत्यापन: 26 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक। लॉटरी निकालने की तिथि: 3 मार्च 2026। स्कूल में दाखिला: 8 मार्च 2026 तक छात्रों को आवंटित स्कूलों में प्रवेश लेना होगा। जरूरी पात्रता और डॉक्यूमेंट आवेदन करने के लिए बच्चे की आयु 3 से 7 वर्ष के बीच होनी चाहिए (नर्सरी से कक्षा 1 तक के लिए)। आवेदन के लिए इन डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होगी। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र। परिवार का आय प्रमाण पत्र (निर्धारित सीमा के भीतर)। निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी)। बच्चे की नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो। जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)। कैसे करें आवेदन? अभिभावक घर बैठे या पास के जन सुविधा केंद्र (CSC) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं-     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rte25.upsdc.gov.in पर जाएं। 2. 'Online Application/Student Registration' लिंक पर क्लिक करें। 3. बच्चे का विवरण और पते की जानकारी भरें। 4. पसंदीदा स्कूलों की लिस्ट का चयन करें (अभिभावक अपने वार्ड के स्कूलों को प्राथमिकता दें)। 5. डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें। शिक्षा विभाग की तैयारी उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और बीएसए (BSA) को निर्देश दिया है कि वे पोर्टल की निगरानी करें और आवेदनों के वेरिफिकेशन में देरी न होने दें। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।  

असम CM के बयान पर कानूनी लड़ाई, ‘मियां’ शब्द को लेकर जमीअत सुप्रीम कोर्ट पहुंची

देश  जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है। याचिका में सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। साथ ही संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है। जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने अपने अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के माध्यम से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिसवा सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को घृणा आधारित, सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन बताया है। याचिका में असम के मुख्यमंत्री के 27 जनवरी 2026 को दिए गए उस भाषण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि चार से पांच लाख ‘मियां’ वोटर्स को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। याचिका के अनुसार, ‘मियां’ शब्द असम में मुसलमानों के लिए अपमानजनक और बेइज्जती करने वाले तरीके से प्रयोग किया जाता है। याचिका में आगे कहा गया है कि असम के मुख्यमंत्री एक ऊंचे संवैधानिक पद आसीन हैं। उनका उपरोक्त भाषण किसी भी तरह से केवल अभिव्यक्ति के दायरे में नहीं आता। इसका एकमात्र और प्रमुख उद्देश्य एक समुदाय के विरुद्ध नफरत, दुश्मनी और दुर्भावना को बढ़ावा देना है। ऐसे बयानों से सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा है और एक विशेष समुदाय को सामूहिक रूप से निशाना बनाया गया है, जो अपने पद की गरिमा के साथ गद्दारी है। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की है कि वह संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पद की आड़ में सांप्रदायिक नफरत फैलाने, उकसाने या किसी समुदाय को बदनाम करने का अधिकार न रखता हो। ऐसी संहिता इस सिद्धांत को मजबूत करेगी कि कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है और यही अवधारणा कानून के शासन का आधार है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के बयान भारत के संविधान में प्रदत्त समानता, भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और इंसानी गरिमा की गारंटी को कमजोर करते हैं और अभिव्यक्ति की आजादी के संरक्षण में नहीं आ सकते। जमीअत ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नफरती बयानों के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेने से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद ऐसे बयानों का जारी रहना चिंताजनक है। ज्ञात रहे कि यह याचिका जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही विचाराधीन हेट स्पीच और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के अपमान के खिलाफ रिट पिटीशन नंबर 1265/2021 में संलग्न की गई है। इस मामले में चार साल की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने से पहले जमीअत उलेमा-ए-हिंद के सीनियर वकील एमआर शमशाद और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फर्रुख रशीद से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि उनके अनुसार में देश में हेट स्पीच को रोकने के लिए कौन से प्रभावी और उपयोगी कदम आवश्यक हैं।

इलाके में हाथियों का बढ़ता खतरा, लकड़ी बीनने गए बुजुर्ग को हाथी ने कुचला

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल रेंज अंतर्गत ग्राम चुहकीमार में एक जंगली हाथी के हमले से बुजुर्ग ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई. घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों के बीच भारी दहशत देखी जा रही है. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और हाथी मित्र दल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुट गए हैं. मृतक की पहचान 70 वर्षीय गंगाराम सारथी के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, गंगाराम रोजाना की तरह सुबह करीब 10 बजे लकड़ी लेने के लिए जंगल गया हुआ था. दोपहर लगभग ढाई बजे के आसपास जंगल में उसका सामना एक विशालकाय हाथी से हो गया. इससे पहले कि बुजुर्ग संभल पाता, हाथी ने उस पर हमला कर दिया और उसे कुचलकर मौत के घाट उतार दिया. फिलहाल वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और मुआवजे की आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. जिले में हाथियों की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय बनी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक, इन दिनों रायगढ़ जिले में कुल 101 हाथी विचरण कर रहे हैं, जिनमें रायगढ़ वन मंडल में 59 और धरमजयगढ़ वन मंडल में 42 हाथी सक्रिय हैं. इन दलों में 32 नर और 48 मादा हाथियों के साथ 21 शावक भी शामिल हैं. चुहकीमार के जंगलों में अभी भी 12 हाथियों का दल मौजूद है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में खतरा बना हुआ है. वहीं, बीती रात एक अन्य दंतैल हाथी ने लैलूंगा रेंज के कई गांवों में जमकर उत्पात मचाया. दंतैल ने टोंगोटोला, झारआमा, पाकरगांव और सागरपाली में पांच ग्रामीणों के मकानों को ध्वस्त कर दिया. इसके अलावा प्रेमनगर और कुडेकेला जैसे क्षेत्रों में फसलों और सिंचाई के पाइपों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आंकलन कर रही हैं और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की हिदायत दी गई है.

पाकिस्तान से आए हिंदुओं के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से भारत आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं की दुर्दशा पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने इन लोगों को नागरिकता दी तो उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से रहने की जगह भी उपलब्ध करानी चाहिए। यह टिप्पणी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रहने वाले इन शरणार्थियों के विस्थापन के खतरे के बीच आई है, जहां सिग्नेचर ब्रिज के पास उनका कैंप है। दरअसल, ये लोग पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे। ज्यादातर अनुसूचित जाति के हिंदू हैं और यहां झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। कइयों को नागरिकता मिल चुकी है, जबकि कुछ के आवेदन प्रक्रिया में हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) और अन्य एजेंसियां यमुना फ्लडप्लेन पर अवैध कब्जे के नाम पर उन्हें हटाने की तैयारी कर रही थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मई 2025 में एक फैसले में हटाने का रास्ता साफ किया था, जिसके खिलाफ ये लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीडीए को नोटिस जारी किया और चार हफ्तों के अंदर जवाब मांग लिया। साथ ही, कोर्ट ने फिलहाल इन लोगों को विस्थापित करने की किसी भी योजना पर रोक लगा दी है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार में सिर्फ नागरिकता काफी नहीं है, बल्कि आश्रय और सम्मानजनक जीवन भी शामिल है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नागरिकता देने के बाद इन्हें वैकल्पिक आवास या पुनर्वास क्यों नहीं दिया जा रहा। यहां करीब 250-260 परिवार (लगभग 800-1200 लोग) रहते हैं। ज्यादातर मजदूरी, घरेलू काम या छोटे-मोटे काम करके गुजारा करते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान में उन्हें 'काफिर' कहा जाता था। भारत आने पर शुरुआत में संदेह झेलना पड़ा। लेकिन, अब नागरिकता मिलने के बाद भी बेघर होने का डर सता रहा है।

कृषि में बड़ा बदलाव! CM योगी का आय बढ़ाने वाला इंटरक्रॉपिंग फॉर्मूला सभी किसानों के लिए

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।  

धीमी शुरुआत के बाद पटरी पर लौटी \’मर्दानी-3\’, तीसरे दिन कमाई में उछाल

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ ने भले ही बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की हो, लेकिन फिल्म ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। सिनेमाघरों में 30 जनवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में रानी एक बार फिर दमदार पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में में हैं। उनके साथ जानकी बोदीवाला और मल्लिका प्रसाद हैं। कहानी पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय की है जो सिर्फ़ तीन महीनों में रहस्यमयी हालात में गायब हुई 93 जवान लड़कियों के केस की जांच करती है। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और इसे यशराज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के तीसरे दिन (रविवार) 7.25 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इसके पहले दो दिनों की तुलना में सबसे ज्यादा है। फिल्म ने पहले दिन 4 करोड़ से ओपनिंग की थी, जबकि दूसरे दिन इसका कलेक्शन 6.25 करोड़ रहा। इस तरह तीन दिनों में फिल्म की कुल कमाई 17.50 करोड़ हो गई है। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, जिससे बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही थी। कई ट्रेड विश्लेषकों का मानना था कि फिल्म पहले दिन ही डबल डिजिट में कमाई कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बावजूद वर्ड ऑफ माउथ के सहारे फिल्म की कमाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। घरेलू बॉक्स ऑफिस के अलावा फिल्म को विदेशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। तीन दिनों में वैश्विक स्तर पर फिल्म का कलेक्शन लगभग 25.1 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि, 'मर्दानी' फ्रेंचाइजी की शुरुआत 2014 में हुई थी, जबकि 'मर्दानी-2' 2019 में रिलीज हुई थी। दोनों फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली थी। अब 'मर्दानी-3' भी उसी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है और आने वाले दिनों में इसके प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

धीमी शुरुआत के बाद पटरी पर लौटी \’मर्दानी-3\’, तीसरे दिन कमाई में उछाल

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ ने भले ही बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की हो, लेकिन फिल्म ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। सिनेमाघरों में 30 जनवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में रानी एक बार फिर दमदार पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में में हैं। उनके साथ जानकी बोदीवाला और मल्लिका प्रसाद हैं। कहानी पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय की है जो सिर्फ़ तीन महीनों में रहस्यमयी हालात में गायब हुई 93 जवान लड़कियों के केस की जांच करती है। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और इसे यशराज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के तीसरे दिन (रविवार) 7.25 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इसके पहले दो दिनों की तुलना में सबसे ज्यादा है। फिल्म ने पहले दिन 4 करोड़ से ओपनिंग की थी, जबकि दूसरे दिन इसका कलेक्शन 6.25 करोड़ रहा। इस तरह तीन दिनों में फिल्म की कुल कमाई 17.50 करोड़ हो गई है। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, जिससे बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही थी। कई ट्रेड विश्लेषकों का मानना था कि फिल्म पहले दिन ही डबल डिजिट में कमाई कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बावजूद वर्ड ऑफ माउथ के सहारे फिल्म की कमाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। घरेलू बॉक्स ऑफिस के अलावा फिल्म को विदेशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। तीन दिनों में वैश्विक स्तर पर फिल्म का कलेक्शन लगभग 25.1 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि, 'मर्दानी' फ्रेंचाइजी की शुरुआत 2014 में हुई थी, जबकि 'मर्दानी-2' 2019 में रिलीज हुई थी। दोनों फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली थी। अब 'मर्दानी-3' भी उसी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है और आने वाले दिनों में इसके प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।