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लोकसभा में चीन को लेकर सियासी संग्राम, राहुल गांधी के आरोपों पर रक्षा मंत्री का पलटवार

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानपर लोकसभा में हंगामा मच गया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के नाम पर दावा करते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास हैं। इसके लिए उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देने की बात कही, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें चैलेंज कर दिया। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी और कहा कि आप बताएं कि आखिर यह पुस्तक प्रकाशित हुई भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी पुस्तक के आधार पर यहां बात नहीं की जा सकती, जो प्रकाशित ही नहीं हुई है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि यह पुस्तक पब्लिश हुई थी या नहीं। अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।   राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह मनोज नरवणे की पुस्तक के आधार पर यह बात कह रहे हैं। इस पर डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि वह पुस्तक को प्रस्तुत कर दें। यदि कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है तो फिर उसके आधार पर ऐसे दावे कैसे किए जा सकते हैं। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का हवाला दिया है, जो प्रकाशित ही नहीं हुए हैं। इस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की स्पीच का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी इस सदन से बाहर के संदर्भों की बात की थी। इस पर होम मिनिस्टर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने किसी मीडिया रिपोर्ट या फिर विषय से हटकर किसी पुस्तक का जिक्र नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी स्पीच में 2004 से 2014 तक राष्ट्रपति के अभिभाषणों पर बात की थी। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जो आपत्तिजनक था। राजनाथ सिंह और अमित शाह के ऐतराज के बाद भी राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ये लोग तो आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि यह सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती। अखिलेश यादव ने भी दिया दखल- बोलने देने से परेशानी क्या है? राहुल गांधी की स्पीच को लेकर बवाल बढ़ा तो अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि चीन का मसला संवेदनशील है और उससे सावधान रहने की जरूरत है। डॉ. लोहिया भी ऐसा कहते थे और मुलायम सिंह यादव भी उसे लेकर चिंतित थे। ऐसे में नेता विपक्ष यदि चीन को लेकर कुछ कहना चाहते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक लगी है तो फिर उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। ऐसा करना गलत है और सदन की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी बार-बार इसी मसले पर बोलना चाहते थे, लेकिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राजनाथ सिंह ने कई बार खड़े होकर ऐसी पुस्तक के जिक्र पर आपत्ति जताई, जो प्रकाशित ही नहीं हुई। मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, राहुल गांधी को स्पीकर की नसीहत अंत में बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

जबलपुर में रैकेट का खुलासा: उज़्बेकिस्तान की महिला और उसके पति को हिरासत में लिया, मुख्य आरोपी फरार

जबलपुर  शहर में एक घर में पुलिस ने दबिश दी. यहां उज़्बेकिस्तान की एक महिला मिली. उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था. पुलिस की दबिश के दौरान मुख्य आरोपी फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी को हिरासत में लिया है. पुलिस जांच में जुटी है. जांच में पता चला कि उज्बेकिस्तान की इस महिला की शादी मुंबई में हुई थी. वह दिल्ली में ब्यूटी पार्लर की एक लड़की के माध्यम से जबलपुर पहुंची. जबलपुर में इसके पहले भी विदेशी महिलाओं से देह व्यापार करवाने के मामले सामने आ चुके हैं. मुखबिर ने 11 महिलाओं की दी सूचना महिला अपराध शाखा की नगर पुलिस अधीक्षक आशीष जैन ने बताया "जबलपुर के माढोताल थाने में पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि शिव चौधरी नाम का व्यक्ति देह व्यापार का अड्डा चला रहा है और इस बार उसने विदेशी महिलाओं को बुलाया है. जबलपुर में 11 महिलाओं की पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने जब शिव चौधरी के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां उज़्बेकिस्तान की रहने वाली महिला मिली." मुख्य आरोपी की पत्नी हिरासत में देह व्यापार चलाने का आरोपी शिव चौधरी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी और विदेशी महिला को हिरासत में ले लिया. सीएसपी आशीष जैन ने बताया "उज़्बेकिस्तान की महिला ने पूछताछ में जानकारी दी है कि 2011 में उसकी शादी मुंबई में हुई थी. 2023 में उसके पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद से ही वह दिल्ली में एक पार्लर में काम करती थी." स्पा सेंटर के नाम पर देह व्यापार उज्बेकिस्तान की महिला ने पुलिस को बताया "दिल्ली में एक लड़की ने शिव चौधरी से मेरी मुलाकात करवाई थी और उसी के माध्यम से मैं जबलपुर आई." सीएसपी आशीष जैन का कहना "उज़्बेकिस्तान की महिला पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इसकी जांच की जा रही है." जबलपुर में इसकी पहले भी विजयनगर में इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां कुछ विदेशी महिलाएं मिली थीं. जबलपुर में देह व्यापार कराने वाले लोग इन महिलाओं को रहने की जगह उपलब्ध करवाते हैं. मोबाइल पर ग्राहकों को फोटो और नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं. स्पा सेंटर की आड़ में भी कई जगहों पर इसी तरह के गलत काम चल रहे हैं. 

MP को केंद्रीय बजट में 7500 करोड़ का झटका, सिंहस्थ पैकेज की उम्मीदें टूटीं, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू 'महिला अमृत मित्र' की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 'महिला अमृत मित्र' को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है।

छत्तीसगढ़ में मतांतरण विरोधी विधेयक पर कानूनी संकट, बजट सत्र में पास होने की संभावना कमजोर

रायपुर  विष्णु देव साय सरकार के कड़े मतांतरण विरोधी कानून लाने के संकल्प पर फिलहाल कानूनी अड़चनों के बादल मंडरा रहे हैं। शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने की घोषणा के बाद अब 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में भी इसके पेश होने की उम्मीद कम नजर आ रही है। मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने विधेयक की राह कठिन कर दी है। दरअसल, देश के विभिन्न राज्यों में लागू मतांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और राजस्थान को नोटिस जारी करके जवाब दाखिल करने कहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी तक टाल दी है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार चूंकि मूल कानून की वैधता पर ही सवालिया निशान है, इसलिए राज्य सरकार नए संशोधन विधेयक को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। प्रस्तावित कानून: 10 साल की सजा का प्रविधान सूत्रों के अनुसार साय सरकार जिस नए विधेयक पर काम कर रही है, वह ''छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968'' का स्थान लेगा। इसमें सजा के कड़े प्रावधान शामिल हैं। प्रलोभन या जबरन मतांतरण पर 10 साल तक की कैद, मतांतरण से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होना, वर्तमान में मात्र 5,000 रुपये जुर्माने का प्रविधान है, जिसे कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। राज्य सरकार का कहाना है कि जबरन मतांतरण और प्रलोभन की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा में बढ़े मामले एक अनुमान के मुताबिक राज्य में पिछले दो वर्षों में मतांतरण से जुड़ी 100 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। हिंदू संगठनों का आरोप है कि विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों (बस्तर और सरगुजा) में भोले-भाले ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि मंत्रिमंडलीय उप-समिति इस पर काम कर रही है, लेकिन उन्होंने विधेयक पेश करने की निश्चित तिथि पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालिया घटनाएं: राज्य में तनाव की स्थिति     केस 01: राजनांदगांव में प्रार्थना सभा पर हंगामा एक फरवरी 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में एक घर के भीतर चल रही ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप था कि वहां मतांतरण कराया जा रहा है। पुलिस के दखल के बाद मामला शांत हुआ।     केस 02: सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार 29 जनवरी 2026 को सरगुजा पुलिस ने चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराने के आरोप में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार किया। उनके निवास पर 50-60 लोग मौजूद थे, जहां कथित तौर पर मतांतरण की प्रक्रिया चल रही थी।     केस 03: कांकेर में प्रलोभन का आरोप पांच जनवरी 2026 को कांकेर में एक प्रार्थना सभा को लेकर ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का दावा था कि आर्थिक प्रलोभन देकर लोगों का मतांतरण कराया जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था।  

Chhattisgarh Board Exam 2026: 20 फरवरी से परीक्षा का आगाज, शिक्षकों पर \’एस्मा\’ के तहत कार्रवाई

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाओं के सुचारु संचालन को लेकर राज्य सरकार ने शिक्षकों और परीक्षा कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया है। एस्मा के तहत 15 फरवरी से 30 अप्रैल तक शिक्षक और कर्मचारी किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं ले सकेंगे। इस दौरान हड़ताल, धरना या किसी भी तरह के आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी शिक्षकों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही उनकी ई-पुस्तिका अपडेट की जाएगी। 2,514 परीक्षा केंद्र, कंट्रोल रूम से निगरानी प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाओं के लिए कुल 2,514 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा संचालन की निगरानी के लिए मंडल स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस वर्ष लगभग सात लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। ड्यूटी से इन्कार पर होगी कार्रवाई गृह विभाग के निर्देशानुसार परीक्षा अवधि में न तो छुट्टियां स्वीकृत होंगी और न ही सामूहिक अवकाश लिया जा सकेगा। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी से इन्कार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़े कार्यों को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा है। क्या है एस्मा? निवारण अधिनियम, 1979 के तहत एस्मा लागू होने पर अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी कार्य से इन्कार नहीं कर सकते। अधिनियम की धारा 4 (1) के अनुसार कोई भी कर्मचारी पूर्ण या आंशिक हड़ताल, कार्य बहिष्कार या किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है, जिसमें कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है।  

Chhattisgarh Board Exam 2026: 20 फरवरी से परीक्षा का आगाज, शिक्षकों पर \’एस्मा\’ के तहत कार्रवाई

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाओं के सुचारु संचालन को लेकर राज्य सरकार ने शिक्षकों और परीक्षा कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया है। एस्मा के तहत 15 फरवरी से 30 अप्रैल तक शिक्षक और कर्मचारी किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं ले सकेंगे। इस दौरान हड़ताल, धरना या किसी भी तरह के आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी शिक्षकों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। उपस्थिति दर्ज होने के बाद ही उनकी ई-पुस्तिका अपडेट की जाएगी। 2,514 परीक्षा केंद्र, कंट्रोल रूम से निगरानी प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाओं के लिए कुल 2,514 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा संचालन की निगरानी के लिए मंडल स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस वर्ष लगभग सात लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होंगे। ड्यूटी से इन्कार पर होगी कार्रवाई गृह विभाग के निर्देशानुसार परीक्षा अवधि में न तो छुट्टियां स्वीकृत होंगी और न ही सामूहिक अवकाश लिया जा सकेगा। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी से इन्कार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने परीक्षा संचालन, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणाम से जुड़े कार्यों को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा है। क्या है एस्मा? निवारण अधिनियम, 1979 के तहत एस्मा लागू होने पर अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी कार्य से इन्कार नहीं कर सकते। अधिनियम की धारा 4 (1) के अनुसार कोई भी कर्मचारी पूर्ण या आंशिक हड़ताल, कार्य बहिष्कार या किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध है, जिसमें कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है।  

सफाई कर्मचारी की बेटी से भिलाई में गैंगरेप, 7 साल तक कई बार मिटाई हवस, दो गिरफ्तार, 4 की तलाश जारी

भिलाई  छतीसगढ़ से भिलाई से सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक सफाई कर्मचारी के बेटी के साथ गैंगरेप जैसे जघन्य घटना को अंजाम दिया दिया गया। करीब 7 साल तक आरोपियों ने युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया और रेप करते रहे। पुलिस ने इस संगीन मामले में विभाग के दो कर्मचारी, होटल मैनेजर, ठेकेदार और सांसद कार्यालय में अटैच रहे कर्मचारी के साथ ही  6  आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है नियमित करने का झांसा देकर करके रहे दुष्कर्म दरअसल सरकारी कार्यालय में सफाई का काम करने वाली लड़की के साथ ये खेल खेला गया। लड़की को नियमित नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ सालों तक हद पार की गई। सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले से हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विभाग के ही दो कर्मचारियों, के साथ  होटल मैनेजर, ठेकेदार और सांसद कार्यालय में अटैच रहे कर्मचारी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। आपको बता दें कि यह मामला अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2025 के बीच का है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के साथ जब ये शुरु हुआ तो वो नाबालिग थी और फिर कई साल तक ये चलता रहा । आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(1), 70(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 12 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है, जबकि बाकी चारों की तलाश अभी भी जारी है। लड़की का वीडियो बनाने का भी है आरोप पीड़िता ने शिकायत में कहा है कि आरोपियों ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो भी बनाए थे। इनको वायरल करने की धमकी दी जाती थी जिससे वो चुप रही। जानकारी के मुताबिक लड़की को आश्वासन दिया जाता रहा कि उसकी स्थायी नौकरी लगवाई जाएगी लेकिन इस दौरान शोषण होता रहा । जब स्थाई  नौकरी नहीं लगी तो उसने पूरी घटना अपनी मां को बताई। लिहाजा छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, और बाकियों की तलाश जारी है।

कोहेफिजा में 11वीं की छात्रा के साथ कार में रेप, युवक ने अश्लील वीडियो बनाया, ब्लैकमेल कर मांगे एक लाख रुपए

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी में भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। जाल में फंसाकर छात्राओं को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया है। मामले में नाबालिग से ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली की बात भी सामने आई है। आरोपी ने पहले नाबालिग छात्रा को प्रेम जाल में फंसाकर उससे कार में रेप किया और उसका अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत के बाद कोहेफिजा पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता कोहेफिजा थाना क्षेत्र की 11वीं की छात्रा है। वह शाहपुरा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ती है। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। पीड़िता ने आरोपी को 40 हजार दिए आरोपी ने पीड़िता को पता चले बिना रेप के दौरान उसका अश्लील वीडियो बना लिया था। कुछ समय बाद उसने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से 1 लाख रुपए की मांग की। बदनामी के डर से घबराई छात्रा ने किसी तरह 40 हजार रुपए का इंतजाम कर आरोपी को दिए। पैसे लेने बाद दोस्तों को दिखाया वीडियो पैसे लेने के बाद भी आरोपी की मांग जारी रही और वह बार-बार रेप करने का दबाव बनाता रहा। तंग आकर जब छात्रा ने उसे सोशल मीडिया और फोन पर ब्लॉक कर दिया, तो आरोपी ने अलग-अलग नंबरों से कॉल कर परेशान किया। जब छात्रा नहीं मानी, तो आरोपी ने वह निजी वीडियो छात्रा के दोस्तों को दिखा दिया। इसके बाद छात्रा ने अपने मौसेरे भाई की मदद से थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।  धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को हिरासत में ले लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

रायपुर में धान घोटाला: समिति प्रभारी पर 7 लाख का घोटाला करने का आरोप, FIR दर्ज

रायपुर जिला रायपुर के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत कुम्हारी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में धान खरीदी के दौरान बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। समिति प्रभारी पर 850 बोरी धान की फर्जी एंट्री कर करीब सात लाख छह हजार 909 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है। इस मामले में उरला थाने में आरोपित समिति प्रभारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित कुम्हारी (पंजीयन क्रमांक 1383) में जनवरी 2025 से पदस्थ प्राधिकृत अधिकारी जागेश्वर प्रसाद वर्मा ने उरला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि समिति में ग्राम कुम्हारी, चिखली, पठारीडीह और कन्हेरा के किसानों से धान खरीदी की जाती है। धान खरीदी के दौरान बोरी की गिनती, पावती बनाना और रजिस्टर में एंट्री करने की जिम्मेदारी समिति प्रभारी कृष्णा साहू की थी, जबकि कंप्यूटर आपरेटर आनलाइन एंट्री कर किसानों के खातों में भुगतान करता है। नोडल अधिकारी की सूचना से खुलासा 20 जनवरी 2026 को कंप्यूटर आपरेटर और शासन से नियुक्त नोडल अधिकारी श्रृंखला शर्मा (ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) ने लिखित सूचना दी कि समिति में 746 बोरी धान की हेराफेरी की गई है। इसके बाद 30 जनवरी 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक धरसींवा के प्रबंधक एवं विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में समिति के दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान धान खरीदी पंजी, कैश बुक, हमाली पंजी, टोकन पर्ची और तौल पत्रक का मिलान किया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। 104 की जगह 850 बोरी की एंट्री जांच में पाया गया कि किसान आलोक शर्मा केवल 104 बोरी धान (28 बोरी मोटा धान और 76 बोरी सरना धान) बिक्री के लिए लाया था, लेकिन समिति प्रभारी ने तौल पत्रक और रिकार्ड में 850 बोरी धान की एंट्री कर दी। इस फर्जी एंट्री के आधार पर किसान के खाते में 7,06,909.60 रुपये का भुगतान आनलाइन ट्रांसफर कर दिया गया। इससे समिति को 850 बोरी धान और सात लाख से अधिक की आर्थिक क्षति हुई। किसान और कर्मचारियों के बयान किसान आलोक शर्मा ने लिखित बयान में कहा कि उसने केवल 104 बोरी धान ही बेचा था और यदि खाते में अतिरिक्त राशि आई है तो वह राशि लौटाने को तैयार है। समिति में कार्यरत कर्मचारियों और हमालों के बयान भी हेराफेरी की पुष्टि करते हैं। समिति प्रभारी ने स्वीकार की गलती पूछताछ के दौरान आरोपित समिति प्रभारी कृष्णा साहू ने बयान में स्वीकार किया कि उससे 104 की जगह 850 बोरी की पावती दर्ज हो गई। इन धाराओं में मामला दर्ज उरला थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318 (4), 337, 338, 339 और 340 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले की जांच उप निरीक्षक रामनाथ चंद्रवंशी को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार, धान खरीदी प्रक्रिया में शामिल अन्य कर्मचारियों और बैंक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

कागज़ों में सुधार, ज़मीन पर भ्रष्टाचार?

मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले अफसर की दबंगई, RTI आदेशों की खुलेआम अवहेलना बड़वानी मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग कागज़ों में भले ही सुधारों के दावे करता हो, नई-नई योजनाओं का ढोल पीटता हो, मगर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है। योजनाएँ बनती हैं, मॉनिटरिंग के दावे होते हैं, पीठ थपथपाई जाती है, पर स्कूलों और दफ्तरों की सच्चाई बदहाल ही बनी हुई है। सरकार अपनी ही योजनाओं की जमीनी सच्चाई देखने में नाकाम साबित हो रही है। इसका ताज़ा उदाहरण बड़वानी जिले में पदस्थ जिला परियोजना समन्वयक प्रमोद शर्मा हैं, जो स्वयं को मंत्री का रिश्तेदार बताकर पत्रकारों,जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों पर रोब जमाते फिरते हैं। मामला सिर्फ दबंगई तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून की खुली अवहेलना का है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी आज तक आवेदक को नहीं दी गई, जबकि उसी कार्यालय से राशि जमा कराने के पत्र भी जारी हुए और आवेदक द्वारा राशि जमा भी कर दी गई। इसके बावजूद जानकारी रोकना साफ तौर पर कानून का मज़ाक उड़ाना है। जब आईटीआई के कार्यकर्ता ने मजबूर होकर प्रथम अपील जिला पंचायत बड़वानी में की, तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को भी जिला परियोजना अधिकारी प्रमोद शर्मा ने हवा में उड़ा दिया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी काजल चावला के आदेश कि आपको 30/1 /2026 को जिला पंचायत कार्यालय मे मेरे समक्ष 4:00 बजेजानकारी लेकर प्रस्तुत होवे उसके बावजूदउनके आदेशों कि धजिया उड़ा दी गई और उपस्थिति भी नहीं हुए! हद तो तब हो गई जब आवेदक स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यालय पहुँचा, वहाँ भी सिर्फ अगली तारीख का झुनझुना थमाकर मामला टाल दिया गया। जिला पंचायत सीईओ काजल चावला सवालों के घेरे में बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिला पंचायत सीईओ काजल चावला आवेदक को निशुल्क जानकारी दिला पाएंगी? क्या जमा किया गया शुल्क वापस करने का आदेश जारी होगा? यदि आदेश जारी हुआ, तो क्या उसका पालन भी कराया जाएगा या वह भी फाइलों में दफन हो जाएगा? अगर जिला प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला सिर्फ RTI उल्लंघन नहीं बल्कि अफसरशाही की तानाशाही का उदाहरण बन जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला पंचायत प्रशासन अपने ही आदेशों की इज्जत बचा पाता है या फिर दबंग अफसरों के सामने व्यवस्था फिर बेबस नजर आएगी।