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SC-ST एक्ट को लेकर उबाल, अलंकार अग्निहोत्री ने आंदोलन की तारीख घोषित की

वाराणसी नौकरशाही से इस्तीफा देकर वैचारिक संघर्ष के रास्ते पर उतरे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर अपने बड़े ऐलान को लेकर सुर्खियों में हैं. रविवार देर शाम वह वाराणसी स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विद्यामठ आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने शंकराचार्य से विधिवत आशीर्वाद लिया. मंत्रोच्चार, श्लोक-पाठ और वैदिक परंपरा के बीच हुई इस मुलाकात को अलंकार अग्निहोत्री अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं. आशीर्वाद लेने के बाद आजतक से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अगर 6 फरवरी तक केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने का फैसला नहीं करती है, तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली कूच करेंगे. उन्होंने इसे केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की शुरुआत बताया. इस्तीफे से आंदोलन तक की यात्रा अलंकार अग्निहोत्री बीते दिनों उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके वेदपाठी बटुकों के साथ हुई कथित घटना और नए यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्हें निलंबित भी किया गया. नौकरशाही की एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित कुर्सी छोड़कर सड़क पर उतरने का उनका फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यह निर्णय भावनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक था. उनका कहना है कि वह 35 वर्षों से एससी-एसटी एक्ट की विभीषिका को समाज में देख रहे हैं और अब यह कानून देश को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक विभाजनकारी कानून है, जिसे सोच-समझकर लागू किया गया था और इसका दुरुपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है.   शंकराचार्य ने लिखकर पूछा हालचाल  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई मुलाकात को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि महाराज जी इस समय मौन व्रत पर हैं, इसलिए अधिक बातचीत नहीं हो पाई. उन्होंने लिखकर उनका हाल-चाल पूछा और आशीर्वाद दिया. अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि किसी भी बड़े और अच्छे कार्य से पहले गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा है, और इसी भावना के तहत वह वाराणसी पहुंचे थे. उनके मुताबिक, शंकराचार्य से मिला आशीर्वाद उनके आंदोलन को नैतिक और आध्यात्मिक बल देगा. उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और समाज को अलग-अलग खांचों में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि दोनों का उद्देश्य समाज का कल्याण होना चाहिए. 6 फरवरी की डेडलाइन, 7 फरवरी का ऐलान अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त नहीं किया गया, तो 7 फरवरी से देशभर से लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे. उनका दावा है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इसके लिए माहौल बन चुका है. उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में इस समय वेस्ट इंडिया कंपनी की सरकार चल रही है, जिसके सीईओ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एमडी गृह मंत्री अमित शाह हैं. उनके मुताबिक, अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो जनता सत्ता परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतर आएगी. सत्ता परिवर्तन के दावे और बयान अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि 7 फरवरी को देश में ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जो पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि अगर एससी-एसटी एक्ट नहीं हटाया गया, तो देश की जनता मौजूदा सत्ता को बेदखल करने का मन बना चुकी है. उनके बयान में भावनात्मक आक्रोश के साथ-साथ व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष झलकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी द्वारा लाया गया नया रेगुलेशन सरकार के लिए आत्मघाती साबित होगा. उनका आरोप है कि इस फैसले से सरकार ने अपना कोर वोटर ही नाराज कर दिया है और अगर मौजूदा हालात में चुनाव हुए तो सत्ताधारी दल को देशभर में शून्य सीटें मिल सकती हैं. यूजीसी रेगुलेशन और सामाजिक तनाव अलंकार अग्निहोत्री का मानना है कि यूजीसी का नया रेगुलेशन देश में सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला है. उन्होंने दावा किया कि अगर यह रेगुलेशन पूरी तरह लागू हो गया होता, तो देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती थी. उनके अनुसार, सरकार ने बिना जमीनी हकीकत समझे ऐसे नियम बना दिए, जिनसे समाज में वर्गों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई. उन्होंने कहा कि मूल लड़ाई एससी-एसटी एक्ट की है.  सामान्य और ओबीसी वर्ग का अलगाव की बात    पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का दावा है कि केंद्र सरकार से सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग पूरी तरह अलग हो चुका है. उन्होंने मौजूदा सरकार को अल्पमत की सरकार बताते हुए कहा कि जनता का भरोसा अब इस व्यवस्था से उठ चुका है. उनके मुताबिक, सरकार समाज के बड़े हिस्से की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है. राजनीतिक आकांक्षाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. उनका उद्देश्य केवल देश का कल्याण है. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राजनीति करनी होती, तो वह अब तक कई दलों के नेताओं से संपर्क में होते और बंद कमरों में बातचीत कर रहे होते. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरी में लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उनके अनुसार, अभी देश और समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर काम करना जरूरी है. योगी आदित्यनाथ और केंद्र-राज्य के संबंध पर भी बोले  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी थी और आज भी उसी पर खड़े हैं. हालांकि उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि दिल्ली के तंत्र के सामने इस तरह की घटनाओं पर खुलकर बात क्यों नहीं हो पा रही है. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि देश में इस समय दो तरह की सरकारें चल रही हैं एक केंद्र की और दूसरी राज्यों की. उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी भी देश की समस्याओं को बढ़ा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि बटुकों के मान-हनन के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी … Read more

एलन मस्क का अगला बड़ा दांव: SpaceX चाहती है अंतरिक्ष में डेटा सेंटर, सरकार से मांगी इजाज़त

लॉस एंजिल्स एलन मस्क ने अंतरिक्ष पर राज करने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल अंतरिक्ष से इंटरनेट उपलब्ध कराने के बाद अब SpaceX अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स का जाल बिछाने की तैयारी में है। इसके लिए मस्क ने अमेरिकी रेगुलेटर FCC से अनुमति मांगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार मस्क 10 लाख सैटेलाइट्स का एक ऐसा समूह लॉन्च करना चाहते हैं, जो सीधे सूरज की रौशनी से ऊर्जा लेकर AI डेटा सेंटर्स को चलाएंगे। इस कदम के साथ मस्क Google, Meta और OpenAI जैसी कंपनियों को बड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहे हैं। यह मिशन सफल होता है, तो डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की दुनिया पूरी तरह से बदल सकती है। सर्वर के लिए बिजली नहीं बनेगी संकट जमीन पर डेटा सेंटर चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए ही एक चुनौती बन जाते हैं। हालांकि स्पेस में बनने वाले डेटा सेंटर को इन दोनों ही चीजों की जरूरत नहीं होगी। दरअसल अंतरिक्ष में बनने वाले डेटा सेंटर की उर्जा खपत सौर ऊर्जा से पूरी हो जाएगी। बता दें कि अंतरिक्ष में सूरज की रौशनी हमेशा उपलब्ध रहती है, ऐसे में स्पेसएक्स के डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में उर्जा की कमी नहीं होगी। मस्क की ओर से मांगी गई अनुमति के मुताबिक इससे न सिर्फ बिजली का खर्च कम होगा, बल्कि रखरखाव की लागत भी लगभग शून्य हो जाएगी। ऐसे में यह पारंपरिक डेटा सेंटर्स की तुलना में काफी सस्ते और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाला ऑप्शन साबित होगा। 10 लाख सैटेलाइट्स का लक्ष्य और स्टारशिप का सहारा रिपोर्ट के मुताबिक,(REF.) अंतरिक्ष में इस समय 15,000 सैटेलाइट एक्टिव हैं, ऐसे में मस्क की ओर से 10 लाख सैटेलाइट के आवेदन ने सभी को चौंका दिया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संख्या डिजाइन के लचीलापन के लिए तय की गई है। मस्क के सपने को सच करने का जिम्मा स्टारशिप रॉकेट पर होगा। मस्क का मानना है कि स्टारशिप जैसे पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट लाखों टन वजन अंतरिक्ष में ले जा सकते हैं। अगर मस्क का स्टारशिप सफल होता है, तो इससे डेटा प्रोसेसिंग उस उच्च स्तर पर पहुंच जाएगी, जिसकी तुलना किसी मौजूदा सिस्टम से नहीं की जा सकती। xAI और SpaceX आ सकते हैं साथ इस बीच यह खबर भी आ रही है कि मस्क अपनी दो कंपनियों xAI और SpaceX का विलय कर सकते हैं। इसके साथ-साथ इस साल के आखिर तक एक बड़े पब्लिक ऑफरिंग यानी कि IPO लाने की तैयारी भी चल रही है। दरअसल मस्क अपनी दो कंपनियों को मिलाकर खुद का सैटेलाइट नेटवर्क और अपना खुद का AI सिस्टम पाना चाहते हैं। इससे उन टेक कंपनियों को सीधी टक्कर मिलेगी जो फिलहाल AI की रेस में आगे हैं। अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग से डेटा ट्रांसफर की स्पीड बढ़ जाएगी। इसका फायदा मस्क के बाकी के प्रोजेक्ट्स को भी मिलेगा।

मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से चीन-वियतनाम को चुनौती, भारत की ग्लोबल चिप हब बनने की तैयारी

नई दिल्ली भारत सरकार ने बजट 2026 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इस मिशन के लिए बजट में 40,000 करोड़ की भारी-भरकम राशि का बंदोबस्त किया गया है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत को एक चिप बनाने वाले हब के तौर पर स्थापित करेगा। इस मिशन की खास बात है कि सरकार सिर्फ देश में चिप नहीं बनाना चाहती बल्कि सरकार का ध्यान युवाओं को इस काबिल बनाने पर है कि वह देश में खुद चिप डिजाइन कर सकें। चलिए डिटेल में समझते हैं कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में और क्या कुछ है और टेक जगत को यह बजट किस तरह से प्रभावित करता है। भारत बनेगा चिप बनाने का हब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के बाद अब 2.0 का टार्गेट और भी बड़ा कर दिया गया है। इसके लिए 40,000 करोड़ की राशि का इस्तेमाल देश में सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनों, कच्चे माल और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस मिशन की वजह से संभव है कि आने वाले समय में भारत में बने स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस न सिर्फ सस्ते होंगे बल्कि दूसरे देशों में एक्सपोर्ट भी किए जाएंगे। यह मिशन UPI और डिजिलॉकर की तरह हर भारतीय के लिए तकनीक को आसान और सुलभ बनाएगा। यूनिवर्सिटीज में बनेंगी चिप, AI की होगी पढ़ाई रिपोर्ट्स के मुताबिक,(REF.) मौजूदा 315 यूनिवर्सिटीज के छात्र पहले ही चिप डिजाइन कर रहे हैं। अब इस मॉडल को AI पर लागू करने की भी तैयारी है। देशभर की 500 यूनिवर्सिटीज में AI के खास कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे भारत की कोशिश टैलेंट पूल तैयार करने की है। रिपोर्ट्स की मानें, तो सरकार का मुख्य उद्देश्य 'कॉमन कंप्यूट स्टैक' तैयार करना है, ताकि तकनीक पर मुट्ठी भर कंपनियों का कब्जा न रहे और यह सबके लिए समान हो। बैटरी और माइक्रोवेव ओवन होंगे सस्ते रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट 2026 के बाद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी सस्ती हो जाएंगी। इससे आने वाले समय में मोबाइल फोन के दाम घटने की उम्मीद है। ऐसे में रैम के बढ़ते दामों की वजह से महंगे होने वाले स्मार्टफोन्स की कीमत यूजर्स को कुछ राहत जरूर दे सकती है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इस साल बड़ी बैटरी वाले ज्यादा स्मार्टफोन हमें देखने को मिलेंदे। इसके साथ ही माइक्रोवेव ओवन भी सस्ते होने वाले सामानों की सूची में शामिल है।

अब AI करेगा किसानों की मदद: बजट में लॉन्च हुआ Bharat Vistaar AI प्लेटफॉर्म, खेती को मिलेगा नया सहारा

नई दिल्ली खेती-किसानी को AI से लैस बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में 'भारत विस्तार' नाम से एक एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है। इसे आप खास किसानों के लिए लॉन्च होने वाला एआई या डिजिटल साथी समझ सकते हैं, जो उन्हें मौसम, मिट्टी की सेहत और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी उनकी अपनी भाषा में देगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से किसानों की पैदावार बढ़ेगी और वह तकनीकी रूप से कुशल भी होंगे। अपनी भाषा में मिलेगी एक्सपर्ट सलाह भारत विस्तार का पूरा नाम 'वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज' है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म कई भाषाओं में काम करेगा और सीधे एग्री-स्टैक पोर्टल और आईसीएआर के डेटा से जुड़ा होगा। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को मौसम के बारे में उनकी खुद की समझ में आने वाली भाषा में डिटेल में जानकारी मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में 4,000 कर्मचारी एआई चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा ताकि किसान डेटा के आधार पर बुवाई से लेकर कटाई तक का फैसला ले सकें। योजनाओं तक आसान पहुंच भी रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) इस AI से लैस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब किसानों को एक्सपर्ट की सलाह के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वाधवानी एआई एक ऐसा चैटबॉट बना रहा है, जो कि सीधे किसान कॉल सेंटर से जुड़ा होगा। इस बॉट से एक साथ लाखों सवालों के जवाब पाए जा सकते हैं। इसके साथ ही यह प्लेटफॉर्म किसानों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी भी देगा। इसी प्लेटफॉर्म से किसान अपने लिए सही योजनाओं के लिए आवेदम भी कर सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म की वजह से किसान और सरकार का सीधा रिश्ता बनेगा और बीच में किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं रहेगी। इमेज-रिकग्निशन करेगा कीटों की पहचान भारत विस्तार की खास बात है कि यह सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि लोकल अनुभव के बारे में डिटेल में जानकारी रखेगा। इस प्लेटफॉर्म में तमिलनाडु जैसे राज्यों के हजारों किसानों के व्यवहारिक एक्सपीरियंस को जोड़ा गया है। इस प्लेटफॉर्म में समग्र जैसी संस्थाएं इमेज-रिकग्निशन फीचर जोड़ रही हैं। इसकी मदद से किसान अपने फसल की फोटो खीचकर पता लगा पाएगा कि उसमें कौन सा कीड़ा लगा है और उसे छीक कैसे करना है। यह एआई सिस्टम आवाज और टेक्स्ट दोनों तरीकों से किसानों की मदद करने का काम करेगा।

बिना रुके कटेगा टोल टैक्स! देश को मिला पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा

 सूरत हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश में पहली बार पूरी तरह बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम तैयार किया गया है, जिसका ट्रायल आज से शुरू होने जा रहा है। यह नया सिस्टम गुजरात में लगाया गया है और इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा शुरू किया जा रहा है। गुजरात में तैयार हुआ पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्लाजा गुजरात के सूरत जिले के कामरेज इलाके में स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर बनाया गया है। यह मौजूदा पारंपरिक टोल बूथ की जगह लेगा, जहां अब तक वाहन चालकों को टोल देने के लिए रुकना पड़ता था। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और भीड़ को खत्म करने की बात कर रहे थे। इसी दिशा में इस प्रोजेक्ट को पायलट आधार पर लागू किया गया है। ड्राइवरों को क्या फायदा होगा? बैरियर-फ्री टोल सिस्टम लागू होने के बाद वाहन बिना रुके टोल क्षेत्र से गुजर सकेंगे। न तो ब्रेक लगाने की जरूरत होगी और न ही कतार में लगने की परेशानी रहेगी। इससे यात्रा का समय कम होगा और हाईवे पर ट्रैफिक का बहाव पहले से ज्यादा बेहतर हो जाएगा। कैसे काम करेगा नया टोल सिस्टम? इस नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।     हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ेंगे     सिस्टम FASTag से लिंक होकर अपने आप टोल की राशि काट लेगा     पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के होगी     खास बात यह है कि वाहन लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे।     विदेशी तकनीक से देश को बड़ा फायदा     इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ताइवान की FETC एजेंसी के 25 से अधिक विशेषज्ञ पिछले कई महीनों से काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस नई तकनीक के लागू होने से हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। साथ ही, टोल कलेक्शन में पारदर्शिता बढ़ने से करीब 6000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।     आगे की योजना क्या है?     सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की योजना है कि वर्ष 2026 के अंत तक देशभर के 1050 से ज्यादा टोल प्लाजा को AI आधारित मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम में बदला जाए। यदि गुजरात में शुरू किया गया यह ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के सभी नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।    

Gold की चमक से चमकेगा दुबई! रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के बीच UAE के शेख का अनोखा कारनामा

एक तरफ जहां सोने की कीमत लगातार नए-नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ दुबई ने इन्फ्लुएंसर हॉटस्पॉट में अपने लेटेस्ट शानदार आकर्षण के तौर पर, दुनिया की पहली सोने से बनी सड़क बनाने की योजना का एलान किया है। ये शानदार और बड़ा प्लान अमीरात की ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए खास तौर पर बनाए गए एक डेवलपमेंट का हिस्सा हैं, जिसे ‘द गोल्ड डिस्ट्रिक्ट’ कहा जाता है। टूरिस्ट, शॉपर्स और प्रोफेशनल्स को लुभाने के लिए डिजाइन की जाने वाली यह ग्लैमरस जगह एक मुख्य आकर्षण बनने वाली है, क्योंकि यहां सोने से बनी सड़क तैयार होगी। दुनिया की पहली गोल्ड स्ट्रीट मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई में सोने से बनने वाली सड़क अपनी तरह की दुनिया में पहली होगी। इस सड़क का मकसद दुबई को सोने और ज्वैलरी के कारोबार में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनाना है। गोल्ड स्ट्रीट की घोषणा प्रॉपर्टी डेवलपर इथरा दुबई द्वारा दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट के ऑफिशियल लॉन्च के हिस्से के तौर पर की गई। इस खास तौर पर बनाए गए डिस्ट्रिक्ट में गोल्ड, ज्वेलरी, परफ्यूमरी, कॉस्मेटिक्स और लाइफस्टाइल कैटेगरी में 1,000 से ज्यादा रिटेल शॉप्स शामिल होंगी। भारतीय रिटेलर भी होंगे शामिल रिटेलर्स में जवहारा ज्वेलरी, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, अल रोमाइजन और तनिष्क ज्वेलरी शामिल होंगे, और जोयलुक्कास ने 24,000 स्क्वायर फुट के अपने सबसे बड़े फ्लैगशिप स्टोर की योजना की घोषणा की है, जो मिडिल ईस्ट में उसका सबसे बड़ा स्टोर होगा। यहां पर छह होटल में 1,000 से ज्यादा गेस्ट रूम भी बनाए जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों, खरीदारों और ट्रेड पार्टनर्स को आसानी से आने-जाने की सुविधा मिलेगी। कहां होगी ये स्ट्रीट? गोल्ड से तैयार होने वाली स्ट्रीट दुबई के डेरा इलाके में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई डिपार्टमेंट ऑफ इकॉनमी एंड टूरिज्म (DET) के अंडर आने वाले दुबई फेस्टिवल्स एंड रिटेल एस्टैब्लिशमेंट (DFRE) के CEO अहमद अल खाजा के मुताबिक, “सोना दुबई की सांस्कृतिक और कमर्शियल पहचान का एक अहम हिस्सा है, जो हमारी विरासत, समृद्धि और एंटरप्राइज की स्थायी भावना का प्रतीक है।” खाजा ने कहा है कि इस खास जगह के जरिए, हम न सिर्फ उस विरासत का जश्न मनाएंगे, बल्कि क्रिएटिविटी और सस्टेनेबिलिटी से बने एक नए युग के लिए इसे फिर से नया रूप भी देंगे। घूमने, रहने और काम करने के लिए बेस्ट खाजा के अनुसार, “जैसे-जैसे हम अपने टूरिज्म और रिटेल सेक्टर को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं, दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट इंटरनेशनल विजिटर्स को आकर्षित करने, इन्वेस्टमेंट लाने और दुनिया के सबसे अच्छे शहर के तौर पर हमारी पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा, जहाँ घूमने, रहने और काम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है।”

खेल महाकुंभ बना मेगा शो: रविंद्र जडेजा–शिवराज सिंह की एंट्री, रोमांचक मुकाबलों के लिए तैयार हजारों दर्शक

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में खेल बार भव्य 'सांसद खेल महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत 1 फरवरी से हो चुकी है। इस खेल महाकुंभ में 600 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय टीम से स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा मुख्य अतिथि होंगे। ग्राउंड में लगभग 10 हजार से दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। प्राप्त जानकारी अनुसार, 2 फरवरी को दोपहर तीन बजे भोपाल से रवींद्र जडेजा का काफिला गोपालपुर से रायसेन पहुंचेगा। स्टेडियम में बनाए गए 8 अस्थायी स्टैंड दर्शकों के बैठने की सुविधा के लिए 8 अस्थायी स्टैंड बनाए गए हैं। हर स्टैंड में 5 कतारें हैं। एक स्टैंड में लगभग 250 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही मैदान के अलग-अलग दिशाओं में स्टैंड बनाए गए हैं। जिसमें दर्शक आराम से बैठकर मैच देख सकेंगे। वीवीआईपी के लिए अलग व्यवस्था स्टेडियम की उत्तर दिशा में एक मुख्य डोम तैयार किया गया है। जिसके दोनों ओर दो छोटे-छोटे डोम बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य अतिथि और वीवीआईपी लोगों के व्यवस्था रहेगी।   428 खिलाड़ी पहुंचे आज खेल महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान ने शिरकत की और खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन करते हुए क्रिकेट खेला। इस दौरान विदिशा संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा की टीमों के 428 खिलाड़ी पहुंचे। इस शिवराज के पुत्र कार्तिकेय चौहान भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि समापन समारोह में भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा बतौर मुख्य अतिथि होंगे। खेल महाकुंभ के आगाज के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रभु राम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, विदिशा विधायक मुकेश टंडन समेत कई अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए।

सर्विस लेन पर अव्यवस्था: भारी वाहन खड़े होने से सड़क पर ट्रैफिक जाम

धौलपुर  शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या44 पर दोनों तरफ सर्विस लेन की हालत खराब है। ग्वालियर और आगरा रोड की सर्विस लेन पर सुबह से ही भारी वाहन आकर खड़े हो जाते हैं। यह वाहन दिनभर यहां सर्विस लेन पर खड़े रहते हैं जिससे यातायात बाधित रहता है और हादसे का खतरा बना रहता है। यहां गुलाब बाग चौराहे से वाटरवक्र्स की तरफ की जा रही सर्विस लेन पर इन दिनों खासा ट्रेफिक है। वाटरवक्र्स चौराहे पर हाइवे क्रॉसिंग को बंद करने से सामने की तरफ से लांग साइड से वाहन आने से और समस्या खड़ी हो गई है। रही सही कसर यहां सर्विस लेन पर खड़े हो रहे भारी वाहनों ने कर रखी है। जिससे यहां पर जाम की स्थिति बन रही है। शुरुआत में इन वाहनों को हटाया गया लेकिन फिर से जस की तस स्थिति बनी हुई है। ग्वालियर रोड की सर्विस लेन की स्थिति अधिक खराब है। गुलाब बाग चौराहे से वाटरवक्र्स चौराहे के बीच भारी वाहन खड़े रहते हैं। यहां पर मिस्त्रियों की दुकानें हैं और वाहन यहां दिनभर खड़े रहते हैं। जिससे सर्विस लेन पर जगह कम पड़ जाती है। मिस्त्रियों की दुकानें हाइवे की सर्विस लेन किनारे बनी हुई हैं। यहां दुकानों होने से साइड से गुजर रहे नाली की भी सफाई नहीं हो पाती है। इसी तरह आगे वाटरवक्र्स चौराहे से सागरपाडा तक अनाधिकृत रूप से कब्जा बना हुआ है। आगे की तरफ तो सर्विस लेन पर गड्ढे हो रहे हैं। जिससे निकलना भी दूभर हो रहा है। शहर में कृषि उपज मंडी, चोपड़ा मंदिर कट और आगे राजाखेड़ा बाइपास की तरफ हालात खराब है। यहां पर वाहन रेंग रेंग कर आगे निकल पा रहे हैं। वहीं, केन्द्रीय बस स्टैंड की तरफ भी अव्यवस्था है। यहां आरएसी लाइन से बस स्टैंड तक दुपहिया वाहन चालक मुश्किल से २० किमी प्रति किलोमीटर से भी कम रफ्तार में चल पा रहा है। शहर के सबसे व्यस्त चौराहा गुलाब बाग का भी हाल बेहाल है। यहां जगदीश तिराहे से चौराहे की तरफ आने वाले ट्रेफिक रेंगता हुआ बढ़ता है। चौराहे के पास अनाधिकृत रूप से पार्किंग हो रही है। गत दिनों सफाई के लिए नगर परिषद ने दुकानों के सामने से अतिक्रमण हटाया और सफाई की। जिसके बाद फिर से नाले पर ही कब्जा कर लिया। दुकानों की पार्किंग भी सडक़ पर हो रही है। जिससे जाम की स्थिति बन रही है।  

MP HC का बड़ा आदेश: सरकारी दफ्तरों में अब खुद सुलझेंगे कर्मचारियों के सर्विस विवाद, सीधे लाभ में आएंगे 6 लाख कर्मचारी

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को 'इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम' (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजने के निर्देश दिए हैं।     याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी को अपना आवेदन दें।     सरकार और संबंधित विभाग इस पर 45 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला लें। 6 लाख कर्मचारियों के लिए 'राहत' का फॉर्मूला यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कोर्ट के सुझाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…     डेजिग्नेटेड ऑफिसर: हर विभाग में एक नामित अधिकारी हो जो विवादों को सुने।     निष्पक्षता: पारदर्शिता के लिए जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।     बचत: इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों का समय व पैसा भी बचेगा। 'अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़' सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।" कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।

मतदाता डेटा में चौंकाने वाली विसंगतियाँ: कभी पिता से छोटा बेटा, कभी 6 संतानों का रिकॉर्ड!

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान डेटा में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जिले में करीब 7 लाख मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड में तार्किक त्रुटियां (Logical Errors) पाई गई हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाले मामले वे हैं जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण माता-पिता की उम्र उनकी संतान से भी कम दर्ज हो गई है। डेटा में मिलीं ये 6 बड़ी विसंगतियां बीएलओ (BLO) एप के जरिए की गई छंटनी में भोपाल और मध्यप्रदेश स्तर पर लाखों गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं:     उम्र का गणित फेल: भोपाल में 1.19 लाख और प्रदेश में 39 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से महज 15 साल कम या उससे भी कम दर्ज है।     असंभव आयु अंतर: करीब 18 हजार मामलों में माता-पिता की उम्र मतदाता से 50 साल से भी ज्यादा बड़ी दिखाई गई है।     रिश्तों में उलझन: दादा-दादी की उम्र पोते-पोतियों से 40 साल कम दर्ज होने के 15 हजार से ज्यादा मामले भोपाल में मिले हैं।     संतानों का रिकॉर्ड: जिले के 46 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में 6 या उससे अधिक संतानें दर्ज पाई गई हैं।     नाम और जेंडर: पिता के नाम में मिसमैच और जेंडर की गड़बड़ी के भी लाखों मामले सामने आए हैं। क्यों हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी? डिजिटलाइजेशन के दौरान पुराने रिकॉर्ड को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने पर ये चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:     शॉर्ट नाम का उपयोग: पुराने रिकॉर्ड में 'डीके' लिखा था, जिसे सॉफ्टवेयर ने नए नाम 'देवेंद्र कुमार' से मैच नहीं किया।     उपनाम (सरनेम) का छूटना: सरनेम न होने पर एप ने उसे अलग व्यक्ति मानकर सूची से बाहर कर दिया।     लिंक की समस्या: एक मामले में पिता ने बेटों का लिंक खुद से और बेटियों का लिंक दादा के रिकॉर्ड से जोड़ दिया, जिससे डेटा मिसमैच हो गया।     अधूरा डेटा: पिता या माता का नाम गलत टाइप होने से सॉफ्टवेयर ने रिकॉर्ड रिजेक्ट कर दिया। अब क्या होगा? 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम     इन विसंगतियों के कारण चुनाव आयोग को डेटा जमा करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी है। अब भोपाल कलेक्टर ने 14 फरवरी तक सभी त्रुटियों को सुधारने का लक्ष्य दिया है।     2 लाख मतदाताओं को नोटिस: जिले के 181 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शेष बचे 2 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।     घर बैठे सुधार: यदि बीएलओ आपके घर आता है और मौके पर ही दस्तावेजों के आधार पर सुधार हो जाता है, तो आपको दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।