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दिल्ली में 15 दिन में 800 बच्चे गायब, आसमान या जमीन ने उन्हें निगला? वसीम और ऋतिक के घर मातम

नई दिल्ली आधी रात का वक्त था, वसीम चैन से सोया था, पर अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण बुराड़ी की गलियों में पहुंची तो वह बिस्तरों से गायब था. दिल्ली की सड़कों पर पहरा देने वाली पुलिस की नाक के नीचे महज 15 दिनों में 800 बच्‍चे गायब हो चुके हैं. कहीं संगीत का जुनून पालने वाला वसीम अपना हारमोनियम लेकर अंधेरे में खो गया, तो कहीं JEE की तैयारी कर रहा होनहार ऋतिक एक डांट के बाद सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ गया. यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि उन बिलखती मांओं की चीख है जिनकी आंखें दरवाजे पर पथरा गई हैं. पुलिस की फाइलें लेटर लिखने में हफ्ता गुजार देती हैं और इधर मेट्रो की फुटेज से लेकर मासूमों के सुराग तक सब कुछ हमेशा के लिए मिट जाता है. क्या दिल्ली अब अपने ही बच्चों के लिए एक डरावना भूलभुलैया बन चुकी है? देश की राजधानी दिल्ली में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या ने न केवल पुलिस महकमे को बल्कि आम जनता को भी हिलाकर रख दिया है. आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में महज 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है.  दिल्ली के बुराड़ी पहुंची, तो वहां दो परिवारों का दर्द सामने आया, जिनके बेटे दिसंबर महीने से लापता हैं. केस स्टडी 1: वसीम रजा का संगीत का सपना और अधूरी तलाश बिहार के किशनगंज से आकर बुराड़ी के मौर्य एनक्लेव में रहने वाले तेमुल हक और रूबी का 19 वर्षीय बेटा वसीम रजा 28 दिसंबर की सुबह से गायब है. • विवाद की जड़: वसीम को सिंगिंग का जुनून था लेकिन परिवार चाहता था कि वह AC रिपेयरिंग का काम सीखे. • गायब होने का घटनाक्रम: 27 दिसंबर की रात वसीम घर पर ही सोया था. सुबह 9 बजे वह घर में नहीं था और अपना हारमोनियम साथ ले गया था. • पुलिस पर सवाल: वसीम के पिता का कहना है कि पुलिस ने गली या उसके बाहर की CCTV फुटेज तक नहीं निकाली. • मां का दर्द: “जिसका बच्चा जाता है, उसके दिल पर क्या गुजरती है. वोट मांगने आते हैं तो सब छान मार देते हैं, लेकिन बच्चे के वक्त सुनवाई नहीं होती.” केस स्टडी 2: ऋतिक झा और सिस्टम की लेटलतीफी बुराड़ी के संत नगर का 16 वर्षीय ऋतिक झा JEE मेंस की तैयारी कर रहा था. 17 दिसंबर को मां की डांट के बाद वह घर से निकला और फिर कभी नहीं लौटा. • खोया हुआ मौका: ऋतिक की आखिरी लोकेशन नेताजी सुभाष पैलेस (NSP) मेट्रो स्टेशन पर मिली थी. • फुटेज का संकट: पुलिस को मेट्रो को पत्र लिखने में 7 दिन लग गए. तब तक मेट्रो की पुरानी फुटेज डिलीट हो चुकी थी. • मां का डर: ऋतिक की मां बेबी झा को डर है कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है. आंकड़ों का आईना: दिल्ली में गायब होती सुरक्षा वसीम के पिता तेमुल हक का सवाल जायज है कि अगर 15 दिनों में 800 लोग गायब होंगे, तो दिल्ली खाली हो जाएगी. लापता व्यक्ति    उम्र       क्षेत्र                           लापता होने की तिथि वसीम रजा       19 साल    मौर्य एनक्लेव, बुराड़ी    28 दिसंबर ऋतिक झा       16 साल    संत नगर, बुराड़ी          17 दिसंबर सिस्टम की सुस्ती और परिवारों का इंतजार इन दोनों ही मामलों में परिवारों का सीधा आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर है. कहीं CCTV फुटेज नहीं खंगाली गई तो कहीं लेटर लिखने की कागजी कार्रवाई में अहम सबूत (मेट्रो फुटेज) मिट गए. दिल्ली जैसे महानगर में जहां चप्पे-चप्पे पर कैमरे होने का दावा किया जाता है, वहां बच्चों का इस तरह गायब हो जाना और हफ्तों तक कोई सुराग न मिलना चिंताजनक है. सवाल-जवाब दिल्ली में हाल के दिनों में लापता होने वाले लोगों के आंकड़े क्या कहते हैं? न्यूज 18 इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महज 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिसने आम नागरिकों को हैरत में डाल दिया है. बुराड़ी से लापता वसीम रजा के मामले में पुलिस पर क्या आरोप हैं? वसीम के पिता तेमुल हक का आरोप है कि पुलिस उनके इलाके में घूमती तो है, लेकिन वसीम के लापता होने के बाद न तो उनकी गली की और न ही बाहर की सीसीटीवी फुटेज निकाली गई. ऋतिक झा के मामले में सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं मिल पाई? ऋतिक की मां बेबी झा के अनुसार, पुलिस को मेट्रो को पत्र लिखने में ही 7 दिन लग गए. इस लेटलतीफी के कारण मेट्रो का पुराना फुटेज डेटा डिलीट हो गया और ऋतिक का आगे का सुराग नहीं मिल सका. लापता बच्चों के माता-पिता की मुख्य चिंता और डर क्या है? वसीम की मां को डर है कि इतने दिनों तक कोई संपर्क न होने के कारण उनके बेटे के साथ कोई अनहोनी न हो गई हो. वहीं, ऋतिक की मां को अंदेशा है कि उनके बेटे का किडनैप (अपहरण) कर लिया गया है. बुराड़ी के जनप्रतिनिधियों से इन परिवारों को क्या आश्वासन मिला है? वसीम के पिता ने बताया कि वे बुराड़ी विधायक के दफ्तर में ‘जनता दरबार’ गए थे. वहां से उन्हें आश्वासन दिया गया कि एक-दो दिन में इस बारे में एसडीएम (SDM) या पुलिस कमिश्नर से बात की जाएगी.

शहजाद पूनावाला की मां पर हमला, CCTV वीडियो से खुला मामला—जानबूझकर कार चढ़ाई गई

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला की मां हादसे का शिकार हो गईं हैं। पूनावाला ने आरोप लगाए हैं कि उनकी मां को जानबूझकर कार से टक्कर मारी गई थी। उन्होंने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने घटना का वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उनकी मां को एक सफेद कार टक्कर मारती हुई नजर आ रही है। पूनावाला ने लिखा, 'कुछ घंटे पहले एक बेहद घृणित इंसान ने जानबूझकर मेरी मां पर अपनी कार चलाई – जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और फिर वह भाग गया। माताजी की बहुत जल्द एक सर्जरी करानी पड़ेगा। कृपया उनके लिए प्रार्थना करें।' उन्होंने लिखा, 'मेरी मां सबसे दयालु और सबसे अच्छे इंसानों में से एक हैं और इस उम्र में उनके साथ यह होना मुझे अंदर तक कचोट रहा है।' उन्होंने पुणे पुलिस के साथ पोस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया है। उन्होंने लिखा, 'आशा है कि पुणे पुलिस उस व्यक्ति को त्वरित गिरफ़्तार कर यह सुनिश्चित करेगी कि उसे उचित सजा मिले।' घटना का वीडियो शहजाद पूनावाला के भाई और राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने लिखा, 'ये सब क्या हो रहा है? मेरी मां सीनियर सिटिजन हैं, जो मेरे ड्राइवर और एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के साथ गईं थीं और जब वो लोग गैस भरवा रहे थे, तब वह पास में ही खड़ी इंतजार कर रहीं थीं। तब किसी ने उन्हें टक्कर मारी (जानबूझकर लग रहा है) और भाग गया।' उन्होंने एक्स रे भी एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने भी पुणे पुलिस से आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, 'जानबूझकर किया गया या नशे में किया गया। ये जांच में सामने आ जाएगा। पर दुख होता है कि सीनियर सिटिजन मां को इस दर्द से गुजरना पड़ा।'

कह नहीं सकते क्या होगा – पूर्व सेना प्रमुख नरवणे को लेकर संजय राउत का बड़ा दावा

नई दिल्ली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता संजय राउत अपने आक्रामक अंदाज के लिए चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने एक और चौंकाने वाला बयान देते हुए पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा को ही खतरा होने की बात कह दी है। संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने संसद में पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर बात की और सरकार ने उन्हें रोक दिया। वह सही नहीं था। इस घटनाक्रम के चलते मुझे नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक ऐसा मुद्दा लाने की कोशिश की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है।   संजय राउत ने कहा कि जब देश पर संकट आता है या पड़ोसी मुल्क हमला करने की तैयारी में भारत की सीमा पर पहुंचता है तो उस वक्त राजनीतिक नेतृत्व को निर्णय लेना चाहिए। जनरल नरवणे बार-बार कोशिश कर रहे थे कि हमें आदेश दीजिए। उनका पूछना था कि चीन के इस अतिक्रमण के जवाब में हमें आदेश दीजिए। लेकिन 56 इंच का सीना रखने वाले भाग गए। उन्होंने कहा कि अब मुझे मनोज मुकुंद नरवणे की सुरक्षा की चिंता हो रही है। उनके साथ क्या होगा, यह मैं कह नहीं सकता। उनकी सिक्योरिटी बढ़ जानी चाहिए। इससे पहले ऐसे कई हादसे हो चुके हैं। इसलिए सुरक्षा दी जानी जरूरी है। संजय राउत का सवाल- आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था उन्होंने कहा कि आखिर सोनम वांगचुक के साथ क्या हुआ था। उन्होंने भी तो सीमा की सुरक्षा का मसला उठाया था। दरअसल सोमवार को लोकसभा में उस वक्त काफी हंगामा हुआ था, जब मनोज मुकुंद नरवणे की गैर-प्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी बोलने लगे थे। उन्होंने डोकलाम में भारतीय सीमा के पास चीनी टैंकों के पहुंचने का कथित प्रकरण उठाया था। इस पर विवाद तब बढ़ गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि संसद में ऐसी किसी पुस्तक को कोट नहीं किया जा सकता, जो प्रकाशित ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक तथ्य सही होते तो वह प्रकाशित ही हो जाती। उस पर किसी तरह की रोक लगाने की जरूरत नहीं थी।  

दिल्ली स्कूल फीस कानून पर स्थिति साफ, 2025-26 से पहले नहीं लागू होगा नियम: सरकार

नई दिल्ली   दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाले नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 को वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। यह कानून अब अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह जानकारी दी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कानून को शैक्षणिक सत्र के बीच में जल्दबाजी से लागू करने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करने से स्कूलों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है और यह व्यावहारिक नहीं होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने माना कि कानून का उद्देश्य अच्छा है। लेकिन, इसे सही समय पर लागू करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट ने कहा कि अब इस पर दखल देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने समझदारी दिखाई है। यह कानून प्राइवेट स्कूलों में फीस की मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत हर स्कूल को फीस तय करने के लिए एक स्कूल लेवल कमेटी बनानी होगी। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन का प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। कमेटी फीस के प्रस्ताव पर विचार करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर अपील कमेटी भी होगी। कानून कैपिटेशन फीस वसूलने पर रोक लगाता है और अतिरिक्त शुल्क पर भी नियंत्रण रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की वैधता से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। अब आगे की सुनवाई और फैसला हाई कोर्ट ही करेगा। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस कानून को चुनौती दी है। लेकिन, कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू करने के तरीके पर ही ध्यान दिया। अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फीस में अचानक बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी। अगले साल से लागू होने पर स्कूलों को भी तैयारी का समय मिलेगा। यह कदम दिल्ली में शिक्षा की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

लैंडफिल से लग्जरी बस अड्डा तक: कूड़े के पहाड़ खत्म कर नई पहचान देने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली सरकार की योजना के मुताबिक भलस्वा में बनने वाले नए अंतरराज्यीय बस अड्डे से हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। वर्तमान में इन सभी राज्यों की बसें कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे से चलती हैं, जहां पहले से ही यात्रियों और बसों का भारी दबाव है। भलस्वा में नया बस अड्डा शुरू होने के बाद कश्मीरी गेट ISBT पर भीड़ और ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। नए बस अड्डे के बनने से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलने की संभावना है। अभी कश्मीरी गेट से रोजाना सैकड़ों बसें इन राज्यों के लिए रवाना होती हैं, जिससे वहां अक्सर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। भलस्वा में बस अड्डा तैयार होने के बाद बसों को बाहरी दिल्ली के भारी ट्रैफिक से गुजरकर कश्मीरी गेट तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बस संचालन अधिक सुचारू होगा और यात्रियों का समय भी बचेगा। भलस्वा बस अड्डे से होंगे कई तरह के फायदे भलस्वा बस अड्डे की एक बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति होगी। यह इलाका दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में यहां से चलने वाली बसें कम समय में ही दिल्ली की सीमा पार कर सकेंगी। इसके विपरीत कश्मीरी गेट से निकलने वाली बसों को दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचने में कई बार घंटों लग जाते हैं। नए बस अड्डे के बनने से इन राज्यों की ओर जाने वाली बसों का सफर न सिर्फ छोटा होगा, बल्कि ज्यादा आसान और आरामदायक भी हो जाएगा। बायो-माइनिंग के जरिए साफ की जा रही है लैंडफिल साइट दिल्ली नगर निगम ने भलस्वा लैंडफिल साइट को पूरी तरह साफ करने के लिए इस साल के अंत तक का लक्ष्य तय किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस परियोजना को लेकर हाल ही में दिल्ली सरकार और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अहम बैठक भी हुई है। बाहरी दिल्ली में स्थित यह लैंडफिल साइट करीब 70 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी ऊंचाई 60 मीटर से ज्यादा हो चुकी है। नगर निगम इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए बायो-माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इस प्रक्रिया के जरिए पुराने कचरे को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि लैंडफिल साइट के खत्म होने से न केवल आसपास के इलाकों का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि भलस्वा में बनने वाला नया अंतरराज्यीय बस अड्डा दिल्ली के यातायात ढांचे को भी बड़ी राहत प्रदान करेगा।

Union Budget 2026: दिल्ली पुलिस को मिली बड़ी राशि, ट्रैफिक नियंत्रण के लिए नए उपायों की घोषणा

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस को 12,503 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. यह राशि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुकाबले करीब पांच फीसदी अधिक है. पिछले बजट में दिल्ली पुलिस को 11931 करोड़ रुपए दिए गए थे, जिसे नए वित्तीय वर्ष में बढ़ा दिया गया है. बजट से मिलने वाली इस राशि का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस के रोजमर्रा के खर्चों और विभिन्न योजनाओं के लिए किया जाएगा. इसमें दिल्ली में एक मॉडल ट्रैफिक सिस्टम का विकास, ट्रैफिक सिग्नल्स की स्थापना और ट्रैफिक प्रबंधन को और बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर भी फोकस रहेगा. बेहतर संचार नेटवर्क, आधुनिक उपकरण और पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग को भी इस बजट का अहम हिस्सा बताया गया है. दिल्ली पुलिस ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी संभालती है.  ऐसे में यह बढ़ा हुआ बजट पुलिसिंग सिस्टम को और प्रभावी बनाने में मददगार माना जा रहा है. इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन की दिशा में एक अहम कदम बताया. उन्होंने कहा कि इस बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है.  उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिया गया है.