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मुंबई मेयर चुनाव: बीजेपी में तीन नाम रेस में, शिंदे के लिए कौन बनेगा दावेदार?

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव नतीजे आने के तीन हफ्ते के बाद अब मुंबई में बीएमसी के मेयर चुनाव काउंटडाउन शुरू हो गया है. मुंबई से सटे सभी शहरों में मेयर चुने जाने के बाद अब कहीं जाकर बीएमसी की बारी है. बीएमसी मेयर पद के लिए 11 फरवरी को चुनाव है, जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है. ऐसे में सभी की निगाहे लगी है कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा?  मुंबई का मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है. ऐसे में मेयर के लिए 6 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और 7 फरवरी तक चलेगी.  इसके बाद 11 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है और उसी दिन मेयर और डिप्टीमेयर के लिए चुनाव होंगे.  बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है.  ऐसे में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर अपने मेयर बना सकती है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे शिंदे के साथ बैलेंस बनाकर अपना मेयर बनाती है?  बीएमसी का मेयर चुनाव बना रोचक मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए 114 नगर सेवकों की जरूरत होती है. बीएमसी में बीजेपी के पास सबसे अधिक 89 नगर सेवक हैं जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 नगर सेवक हैं तो कांग्रेस के पास 24 सीटें है.  शरद पवार की पार्टी एनसीपी के पास महज एक पार्षद है तो अजित पवार की एनसीपी के 3 पार्षद हैं. राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 पार्षद हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के 8  और समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद हैं.  मुंबई में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 नगर सेवक हो रहे हैं. इस तरह से महायुति को स्पष्ट बहुमत का नंबर होने के बावजूद मेयर पद के लिए दोनों की सहमति  नहीं बन पा रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी मेयर के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके मुकाबले को रोचक बना दिया है. शिंदे-बीजेपी में कैसा बनेगा फॉर्मूला बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एकनाथ शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिदे बीएमसी में 29 पार्षद लेकर किंगमेकर के रोल में है, जिनके समर्थन के बिना बीजेपी के सियासी मंसूबे के कामयाब नहीं होंगे.  बीजेपी अजित पवार की एनसीपी के पार्षद को मिलाकर भी अपना मेयर नहीं बना सकती है. ऐसे में शिंदे के साथ ही सहमति का फॉर्मूला बनाना होगा. शिंदे भी मुंबई में अपना मेयर चाहते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से मांग भी उठा चुके हैं. ऐसे में बीजेपी बीएमसी में कब्जा जमाने के लिए डिप्टीमेयर का पद शिंदे की शिवसेना को देने का ऑफर दे सकती है. इसके बाद ही बीजेपी अपना मेयर बना पाएगी, लेकिन उसके लिए शिंदे की रजामंदी जरूरी है.  उद्धव ठाकरे का क्या है सियासी गेम  मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव है.  शिवसेना (यूबीटी) मुंबई मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का दांव चल सकती है. मेयर चुनाव को लेकर शुक्रवार दोपहर मातोश्री में पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे.  मेयर चुनाव को लेकर इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी बीएमसी में अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(यूबीटी) के नेता किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी कर सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए हैं. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने?  BMC मेयर के लिए BJP से रेस में 3 नाम  बैठक होगी और नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा. बीजेपी की ओर से मेयर पद के लिए तीन नामों पर चर्चा हो रही है. इनमें राजश्री शिरवलकर, ऋतु तावड़े और शीतल गंभीर का नाम शामिल है.  वहीं, डिप्टी मेयर का पद शिंदे गुट की शिवसेना के खाते में जाएगा. शिवसेना को दिए जाने वाले डिप्टी मेयर के पद के लिए दो नामों पर चर्चा हो रही है. इसमें तृष्णा विश्वासराव और यामिनी जाधव का नाम शामिल है. वहीं स्थायी समिति के अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा. मुंबई महानगरपालिका में सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण की घोषणा की गई है. इसलिए, मुंबई की बागडोर एक महिला के हाथों में होगी. क्या मुंबई में मेयर चुनाव निर्विरोध होंगे?  एबीपी माझा के मुताबिक, मुंबई मेयर को लेकर चर्चा के बीच यह भी खबर है कि ठाकरे की शिवसेना मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी. इस संबंध में ठाकरे की शिवसेना के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लोग काम कर रहे हैं. इसलिए, ठाकरे की शिवसेना की ओर से 7 फरवरी को महापौर पद के लिए आवेदन दाखिल करने की संभावना है.  बीएमसी चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद, ठाकरे की शिवसेना (UBT) अपना उम्मीदवार उतारेगी. बीजेपी-शिंदे गठबंधन के 138 सदस्य हैं, जिनमें बीजेपी के 89 और शिंदे शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं. इसलिए, बीजेपी के मेयर के चुनाव में कोई समस्या नहीं होगी. कैसे की जाती है स्थायी समिति की गणना? स्थायी समिति के नतीजों के बाद आए आंकड़ों के अनुसार, विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों को 13-13 सदस्य मिले. इसलिए, स्थायी समिति में अपनी ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शिंदे शिवसेना और बीजेपी ने एनसीपी के अजित पवार गुट की मदद लेने का फैसला किया है. शिंदे शिवसेना ने अपना गुट रजिस्टर्ड करा लिया है और अजित पवार गुट एनसीपी के साथ सहयोगी गुट के रूप में पंजीकरण कराने के लिए बातचीत चल रही है. हालांकि, … Read more

अमेरिका का बड़ा दांव: बलूचिस्तान में निवेश, ट्रंप की नजर सोने के भंडार पर, पाकिस्तान का खजाना खतरे में

वाशिंगटन  पाकिस्तान के बलूचिस्तान को खजानों की धरती कहा जाता है. बलूचिस्तान की बंजर जमीन के अंदर खूब खजाने दबे हैं. बलूचिस्तान रेयर अर्थ मिनिरल्स से भरा है. दुनिया के सबसे बड़े सोने का भंडार भी यहीं है. यही कारण है कि चीन भी इसमें इंट्रेस्ट लेता रहा है. अब इसी बलूचिस्तान की धरती पर अमेरिका की नजर पड़ गई है. जी हां, बलूचिस्तान के सोना-चांदी और तांबा समेत कई रेयर अर्थ मिनिरल्स को पाने की ख्वाइश में अमेरिका पाकिस्तान में पानी की तरह पैसा बहाने जा रहा है. अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दुनिया के सबसे बड़े सोने-तांबे के भंडार ‘रेको डीक माइन में 1.3 अरब डॉलर (करीब 117,594,574,500 करोड़ रुपये) का निवेश करने का ऐलान कर दिया है. यह पैसा अमेरिका के नए प्रोजेक्ट ‘वॉल्ट’ का हिस्सा है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन ही लॉन्च किया था. दरअसल, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह अपने ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के हिस्से के रूप में पाकिस्तान की रेको डिक खदान में 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा. बुधवार को विदेश विभाग की ओर से घोषित इस परियोजना का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी के लिए वैश्विक बाजार को नया आकार देना है. अमेरिका का मकसद चीन से भी जुड़ा है. रेयर अर्थ मिनिरल्स का बादशाह चीन है. उसे टक्कर देने के लिए ही अमेरिका ने यह चाल चली है. कहां है यह खजाने का भंडार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेको डिक बलूचिस्तान प्रांत में है, यह दुनिया का सबसे बड़ा सोने और तांबे का भंडार है. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार, रेको डिक ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के लिए अमेरिका के बाहर किया गया एकमात्र निवेश भी है. प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी, 2026 को की थी, जो यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के चेयरमैन के नेतृत्व में एक पहल थी. रेको डीक में क्या खजाना है? पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रेको डिक खदान दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडारों में से एक है. रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में अनुमानित 5.9 बिलियन टन अयस्क है, जिसमें 0.41 फीसदी तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोने का भंडार है. यानी दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड-कॉपर डिपॉजिट. बलूचिस्तान के चागई पहाड़ों में यह स्थित है. इलाका ज्वालामुखी चेन का हिस्सा है, जो अफगानिस्तान बॉर्डर तक फैला हुआ है. अब समझते हैं कि आखिर प्रोजेक्ट वॉल्ट क्या है? डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिका की ‘स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल्स रिजर्व’ बनाने के लिए शुरू किया है. इसका मकसद है- रेयर अर्थ मिनिरल्स के मामले में चीन पर निर्भरता कम करना और ग्लोबल मार्केट को रीशेप करना. अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने इसके लिए 10 अरब डॉलर का सबसे बड़ा लोन मंजूर किया है. कुल 12 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट अमेरिका के अंदर कई माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च हो रहा है. लेकिन एक ही विदेशी निवेश है और वह है पाकिस्तान का रेको डीक. विवाद क्या 2011 में पाकिस्तान ने चिली की एंटोफागास्टा और कनाडा की बैरिक गोल्ड की कंपनी टेथियन को माइनिंग राइट्स देने से मना कर दिया था. मामला इंटरनेशनल कोर्ट तक गया. अब बैरिक गोल्ड फिर से प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, लेकिन हाल ही में बलूचिस्तान में सुरक्षा घटनाओं के कारण उसने पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है. फिर भी अमेरिका का 1.3 अरब डॉलर का निवेश आगे बढ़ रहा है. अमेरिका क्यों आया बलूचिस्तान? अमेरिका को क्रिटिकल मिनरल्स (तांबा, सोना, रेयर अर्थ्स) की जरूरत है. .ये रेयर अर्थ मिनिरल डिफेंस, इलेक्ट्रिक कार, टेक्नोलॉजी सबके लिए जरूरी हैं. चीन इनकी सप्लाई चेन पर दबदबा रखता है. रेको डीक में निवेश इसका सबसे बड़ा विदेशी कदम है. बलूचिस्तान में अलगाववादी मूवमेंट और सुरक्षा इश्यूज हैं, फिर भी अमेरिका ने दांव लगाया है. अमेरिका की नजर अब बलूचिस्तान के सोने पर टिक गई है. और लगता है आसिम मुनीर की वाइट हाउस में बिरयानी वाली लंच की कीमत अमेरिका इसी से वसूलेगा.

पाक-सऊदी डील के बीच भारत का बड़ा दांव, खाड़ी देशों से नई व्यापारिक साझेदारी

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने  एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए बातचीत फिर से शुरू होने जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं। GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में, लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और नीतियों में स्थिरता लाना है। पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते का एंगल भारत और GCC के बीच यह बातचीत उस समय फिर से शुरू हो रही है जब क्षेत्र की भू-राजनीति काफी जटिल है। सितंबर 2025 में, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक 'सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता' (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। यह रक्षा समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य गतिरोध (ऑपरेशन सिंदूर) के कुछ महीनों बाद हुआ था। ज्ञात हो कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास एक तरफ जहां पाकिस्तान और सऊदी अरब करीब आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। विमानतल सौदा रद्द: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के कुछ ही समय बाद UAE ने पाकिस्तान के साथ एक बड़ा समझौता रद्द कर दिया। पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रबंधन से जुड़ा सौदा इसलिए स्थगित कर दिया क्योंकि पाकिस्तान किसी स्थानीय साझेदार को नामित नहीं कर सका। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तानी पक्ष ने अंतिम कॉल लेटर भेजकर स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन UAE ने यह कहते हुए असमर्थता जताई कि वह अब तक किसी नामित इकाई की पुष्टि नहीं कर सका है। रणनीतिक कारण: पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता करने के बाद से UAE और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ी हैं। भारत-UAE की बढ़ती नजदीकियां: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया दिल्ली यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। भारत-UAE: $200 बिलियन का लक्ष्य UAE के राष्ट्रपति की संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण भारत यात्रा के कुछ ही घंटों बाद, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 2032 तक 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और दूसरी ओर UAE के भारत के साथ बढ़ते संबंध इस खाड़ी देश की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाते हैं।

RBI MPC Update: रेपो रेट में बदलाव नहीं, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महत्वपूर्ण निर्णय

 नई दिल्‍ली  भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. 5.25 फीसदी पर रेपो रेट को अनचेंज रखा है, जिसका मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया है.  एमपीसी बैठक के फैसले पर अपडेट देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि जहां ग्‍लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है. महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है.  महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्‍ट्री और देश पर महंगाई का ज्‍यादा भार नहीं है.  जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि अगले दो दिनों में भारत को जीडीपी और महंगाई दोनों के लिए एक नया बेस ईयर मिलने वाला है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है और घरेलू महंगाई और विकास के महंगाई सकारात्मक हैं. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को 7.3 प्रतिशत से संशोधित करके 7.4 प्रतिशत कर दिया है. उन्होंने कहा कि बजट 2026 में घोषित कई उपाय विकास के लिए अनुकूल होंगे, साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सेवाओं के निर्यात में मजबूती बनी रहेगी.  भारत-अमेरिका डील से निर्यात को मजबूती उन्होंने कहा कि बजट 2026 में घोषित कई उपाय विकास के लिए अनुकूल होंगे और सेवाओं के निर्यात में मजबूती बनी रहेगी. इसके अलावा, उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता  का भी जिक्र किया और कहा कि इन डील्‍स से भारत के निर्यात को मजबूती मिलेगी.  रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के बाद शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. सेंसेक्‍स 340 अंक टूटकर 83000 के नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 150 अंक गिरकर 25500 के नीचे कारोबार कर रही थी. बैंक निफ्टी में भी करीब 300 अंकों की गिरावट देखने को मिली. आज ऑटो, बैंकिंग और रियल एस्टेट शेयरों में गिरावट देखी गई. बीएसई ऑटो इंडेक्स 542 अंक गिरकर 60,803 पर आ गया, जबकि बीएसई बैंकएक्स 158 अंक गिरकर 67,378 पर पहुंच गया. इसी दिन बीएसई रियल्टी इंडेक्स भी 49 अंक गिरकर 6,343 पर आ गया. 

फरवरी से UPI ट्रांजेक्शन के नए नियम लागू, जानें क्या होगा असर

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली का बिल भरने और दोस्तों को पैसे भेजने तक, हर जगह यूपीआई (UPI) का यूज हो रहा है. ऐसे में अगर यूपीआई के नियमों में कोई बदलाव होता है, तो उसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने फरवरी 2026 से यूपीआई के नए नियम लागू करने का फैसला किया है. इन नए नियमों का मकसद लेनदेन को और तेज बनाना, धोखाधड़ी से सुरक्षा बढ़ाना, यूजर्स को अपने पैसों और भुगतान पर ज्यादा नियंत्रण देना है. अगर आप Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी भी UPI ऐप का यूज करते हैं, तो आइए आज हम आपको UPI के कौन से नए नियम फरवरी से लागू हो रहे हैं.  अब UPI पेमेंट होगा और भी तेज नए नियमों के तहत UPI लेनदेन और API रिस्पॉन्स को 10 सेकंड के भीतर पूरा करना जरूर होगा. पहले यह समय सीमा 30 सेकंड थी, जिसकी वजह से कई बार पेमेंट अटक जाता था या देर से पूरा होता था. अब फायदा यह होगा कि पेमेंट जल्दी पूरा होगा, Pending या Processing में फंसे ट्रांजैक्शन कम होंगे, भीड़-भाड़ वाले समय (जैसे सेल या महीने के आखिर में) भी सिस्टम बेहतर काम करेगा. इससे ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों को भी राहत मिलेगी.  API क्या होता है API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस, इसे आप दो एप्स या सिस्टम के बीच बात करने का जरिया समझ सकते हैं. जब आप UPI से भुगतान करते हैं तो आपका UPI ऐप आपके बैंक से पूछता है क्या खाते में पैसे हैं फिर वह सामने वाले के बैंक से कहता है पैसे स्वीकार करो. यह पूरी बातचीत API के जरिए होती है. अब API तेज होगी, तो पूरा भुगतान भी जल्दी और स्मूथ होगा.  सुरक्षा पर खास जोर और यूजर्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल 2026 के नए UPI नियमों में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी, खासकर बड़े अमाउंट वाले लेनदेन के लिए. इसमें मुख्य बदलाव भुगतान से पहले स्पष्ट कन्फर्मेशन मैसेज, ऑटो पेमेंट और सब्सक्रिप्शन के लिए बेहतर सुरक्षा, यूजर्स आसानी से अपनी सब्सक्रिप्शन को देख, मैनेज और कैंसल कर पाएंगे. इससे गलत कटौती और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी.  लंबे समय से यूज न हुई UPI ID पर रोक लग सकती है अगर आपकी कोई UPI ID लंबे समय से यूज नहीं हुई है, तो उसे अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. इसे डॉरमेंट UPI ID कहा जाएगा. इसे दोबारा चालू करने के लिए यूजर को री-वेरिफिकेशन करना होगा. इस नियम का उद्देश्य है पुराने और भूले हुए अकाउंट्स का गलत यूज रोकना है. अब अगर कोई UPI पेमेंट फेल हो जाता है या अटक जाता है, तो बैंक और ऐप्स को कुछ घंटों के भीतर समस्या सुलझानी होगी, यूजर को साफ-साफ बताया जाएगा कि पैसा कटा या नहीं, कहां अटका, कब वापस मिलेगा, इससे यूजर्स की परेशानी और भ्रम दोनों कम होंगे.  UPI का रिकॉर्ड प्रदर्शन सरकार ने संसद में बताया कि चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक UPI के जरिए 230 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ. यह आंकड़ा 2022-23 के 139 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. इससे साफ है कि UPI पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. वर्तमान में यह 8 देशों में यूज हो रहा है. जिसमें भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात शामिल है. सरकार और NPCI मिलकर विदेशों में व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतान को आसान बना रहे हैं. IMF की रिपोर्ट (जून 2025) के अनुसार, UPI दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम रिटेल पेमेंट सिस्टम है. ACI Worldwide रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में करीब 49 प्रतिशत  हिस्सा UPI का है. 

बंगाल SIR: 7 फरवरी तक 15 लाख वोटर्स की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन, क्या होगा अगला कदम?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन खत्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। शेड्यूल के अनुसार इन तीन दिनों में लगभग 15 लाख वोटरों की सुनवाई पूरी करनी होगी। सुनवाई की डेडलाइन 7 फरवरी है और फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित होने वाली है। रोजाना की सुनवाई के ट्रेंड को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग को भरोसा है कि डेडलाइन पूरी की जा सकेगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के ऑफिस के एक सूत्र ने कहा, "अभी 6,500 सुनवाई केंद्र चल रहे हैं, जहां यह प्रक्रिया चल रही है। इसका मतलब है कि अगले तीन दिनों में हर केंद्र को रोजाना सुनवाई पूरी करनी होगी। यह बिल्कुल भी मुश्किल काम नहीं है।" इसका मतलब यह भी है कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में एसआईआर पर अगली सुनवाई से पहले यह काम पूरा हो जाएगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी उम्मीद है कि वह तीन जजों की बेंच के सामने इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगी, जैसा उन्होंने बुधवार को किया था। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया की सुनवाई पिछले साल 27 दिसंबर को शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में यह प्रक्रिया धीमी थी। लेकिन, बाद में हर सुनवाई केंद्र पर अधिकारियों की संख्या बढ़ने और नए सुनवाई केंद्रों की स्थापना के कारण यह तेज हो गई। 14 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ईसीआई की पूरी बेंच स्थिति का जायजा लेने के लिए पश्चिम बंगाल आएगी। इसके तुरंत बाद आयोग महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने पहले ही ईसीआई को सुझाव दिया था कि राज्य में पिछले चुनावों की तरह सात-आठ चरणों की बजाय चुनाव प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाए। उम्मीद है कि चुनाव अप्रैल के अंत तक संपन्न हो जाएंगे और मई के पहले सप्ताह तक नई राज्य कैबिनेट का गठन हो जाएगा।

विश्व बैंक रिपोर्ट: महायुद्ध के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था बनी \’ग्लोबल स्टार\’, पाकिस्तान संकट में

नई दिल्ली एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई। 2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की “उजली किरण” माना गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास “कोई विकास योजना नहीं है” और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है। 2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गई, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गईं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा।  2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गई, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाए तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है।भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई। 2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गई, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गई है।

विश्व बैंक रिपोर्ट: महायुद्ध के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था बनी \’ग्लोबल स्टार\’, पाकिस्तान संकट में

नई दिल्ली एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई। 2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की “उजली किरण” माना गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास “कोई विकास योजना नहीं है” और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है। 2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गई, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गईं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा।  2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गई, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाए तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है।भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई। 2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गई, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गई है।

डोनाल्ड ट्रंप को आई समझ, भारत के बिना नहीं चलेगा काम, जयशंकर ने स्पष्ट किया, दोनों हाथ में लड्डू

नई दिल्ली  क्रिटिकल या रेयर अर्थ मिनरल्‍स एक स्‍ट्रैटजिक मैटेरियल है. ग्रीन एनर्जी से लेकर इलेक्ट्रिक व्‍हीकल और फाइटर जेट से लेकर स्‍मार्टफो तक में इसका उपयोग होता है. इसके बिना इन सभी का उत्‍पादन संभव नहीं है. पिछले साल अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्‍स के निर्यात पर नकेल कस दी थी. बीजिंग के इस कदम से भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक की ऑटो इंडस्‍ट्री से लेकर अन्‍य उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ा था. बता दें कि चीन ग्‍लोबल लेवल पर 90 फीसद से भी ज्‍यादा क्रिटिकल मिनरल्‍स का निर्यात करता है. इस सेक्‍टर में पड़ोसी देश का एकाधिकार है. अब अमेरिका ने चीन के इस वर्चस्‍व को तोड़ने की दिशा में मजबूत और सार्थक पहल की है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आह्वान पर वॉशिंगटन में 55 देशों के विदेश मंत्री जुटे. रेयल अर्थ मिनरल्‍स की सप्‍लाई को बाधाओं से दूर रखने के लिए 50 देशों का ब्‍लॉक बनाने का प्रस्‍ताव रखा गया है. इसमें भारत की भूमिका अहम होने वाली है. भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में शिरकत की. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर ग्‍लोबल पहल भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भारत में क्रिटिकल मिनरल्‍स का भंडार है. इस ब्‍लॉक में शामिल होने से घरेलू स्‍तर पर रेयर अर्थ मिनरल्‍स की माइनिंग से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक में टेक्‍नोलॉजिकल सहयोग मिलेगा. दूसरी तरफ, चीन पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री को महत्‍वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा. इससे भविष्‍य में भारत को रणनीतिक बढ़त भी हासिल होगी. बता दें कि वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में रेयर अर्थ मिनरल्‍स कॉरिडोर बनाने का उल्‍लेख किया है. दरअसल, भारत ने अमेरिका में आयोजित पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान नई पहल फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) को समर्थन देने की घोषणा की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह मंच वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्‍लाई चेन को सुरक्षित, विविध और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम है. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर वाशिंगटन पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा आयोजित इस मंत्रीस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. जयशंकर ने इसे परिणाम देने वाला बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स और जिम्मेदार व्यापार जैसी पहलों के जरिए सप्‍लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि FORGE इनिशिएटिव अमेरिका-नेतृत्व वाले मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप की उत्तराधिकारी है और इसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के प्रोडक्‍शन और प्रोसेसिंग में विविधता लाना है. ग्‍लोबल कॉन्‍फ्रेंस का क्‍या है लक्ष्‍य? वॉशिंगटन सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करना है. यूरोपीय संघ सहित कई देशों की भागीदारी को वैश्विक आपूर्ति कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. इन बैठकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने क्वाड के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने कहा कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हुआ है. अमेरिका ने चीन के प्रभुत्व वाले महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) सप्‍लाई नेटवर्क को चुनौती देने के लिए सहयोगी देशों के साथ एक विशेष व्यापार ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार 4 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस सिस्‍टम समेत अन्‍य निर्माण के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाना है. भारत सहित 55 देशों की भागीदारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस बैठक में भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित कुल 55 देशों ने हिस्सा लिया. इन देशों के पास माइनिंग या प्रोसेसिंग (रिफाइनिंग) से जुड़ी क्षमताएं हैं और वे ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में विविधता लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. रुबियो ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रित है और यह स्थिति अब भू-राजनीतिक दबाव का साधन बन चुकी है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीतिक समाधान अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय योजना और यूरोपीय संघ व जापान के साथ त्रिपक्षीय समझौते की घोषणा की, ताकि सप्‍लाई चेन को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ने जी-7 और मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप जैसे मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया.

बलूचिस्तान में भीषण मुठभेड़: पाक सेना के ऑपरेशन में आतंकवादी, नागरिक और जवान हताहत

पेशावर  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हुए आतंकी हमलों के जवाब में कई दिनों तक चले अभियान में कम से कम 216 आतंकवादी, 36 नागरिक और 22 जवान मारे गए हैं। सेना ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा 'इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस' (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि उसने 26 जनवरी को शुरू किया गया अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि विश्वसनीय और खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में अभियान शुरू किए गए। इसने बताया कि कई दिन चले अभियान में 216 आतंकवादियों को मार गिराया गया।  आईएसपीआर ने बताया कि अभियान के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित 36 आम नागरिक तथा सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 22 कर्मी मारे गए। भारत ने बलूचिस्तान में शांति भंग करने की कोशिशों में उसकी संलिप्तता के पाकिस्तान के आरोपों को लगातार सिरे से खारिज किया है और कहा है कि यह इस्लामाबाद की अपनी ''आंतरिक विफलताओं'' से ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा है।

SIR के कारण 107 मौतें, बंगाल विधानसभा ने पारित किया निंदा प्रस्ताव

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर फैली घबराहट और चिंता के कारण 107 लोगों की जान चली गई है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए SIR की प्रक्रिया चल रही है। सत्ताधारी दल TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया ने आम जनता के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। लोगों को लग रहा है कि यह NRC का ही एक दूसरा रूप है, जिसके माध्यम से उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे और उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े होंगे। नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गई। निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग 'परेशान करने का आयोग बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए विधानसभा इस पर विचार-विमर्श नहीं कर सकती। इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है: ममता बनर्जी का पक्ष: हाल ही में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में हर दिन 3-4 लोग इस 'SIR के डर' के कारण अपनी जान दे रहे हैं। उन्होंने इसे पिछले दरवाजे से NRC लाने की कोशिश करार दिया है। BJP का पलटवार: विपक्षी दल बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी सरकार लोगों के बीच जानबूझकर अफवाहें और डर फैला रही है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। उन्होंने इन मौतों को निजी त्रासदियों का राजनीतिकरण बताया है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस मामले में चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। इससे एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की जारी कवायद में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि 'लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को निशाना बनाया जा रहा है और इसके लोगों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय में बहस करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गईं। SIR क्या है और डर क्यों है? SIR चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। हालांकि, बंगाल में विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे टकराव के कारण यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। लोगों में डर है कि अगर उनके पास 1971 या पुराने दस्तावेज नहीं हुए, तो उन्हें अवैध घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा, जैसा कि असम में NRC के दौरान देखने को मिला था। हालांकि चुनाव आयोग के अपने तर्क हैं।

मास्टर सदानंद कौन हैं? भाषण के दौरान PM मोदी का जिक्र और विपक्ष पर करारा हमला

 नई दिल्ली राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक हिंसा का जिक्र किया और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपमानित करने का भी आरोप लगाया। पीएम मोदी ने इसी बहाने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कल लोकसभा में राष्ट्रपति के संबोधन पर चर्चा नहीं हो सकी। यह संविधान का अपमान है, आदिवासी परिवार से आई महिला राष्ट्रपति का अपमान है। पीएम ने कहा कि देश के शीर्ष पद पर बैठे शख्स का अपमान करने वाले विपक्ष को संविधान शब्द बोलने का अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कल लोकसभा में बड़ी दर्दनाक घटना घटी। सदन में इस तरह का माहौल बना दिया गया कि मंगलवार को आसन पर कागज फेंके गए, तब आसन पर असम के ही एक सदस्य थे। पीएम ने पूछा कि क्या यह असम का अपमान नहीं है? पीएम ने कहा कि कल बुधवार को भी आसन पर कागज फेंके गए, तब आंध्र प्रदेश के एक दलित सदस्य पीठासीन थे। शातिर दिमाग युवराज ने गद्दार कहा पीएम ने आरोप लगाया कि जब भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया गया, तब भी कांग्रेस ने उसका विरोध किया। उन्होंने कहा, "ये असम का विरोध है, पूरे देश के कला प्रेमियों का विरोध है। असम इसे भूलने वाला नहीं है। इसी सदन के एक माननीय सांसद को कांग्रेस के शातिर दिमाग युवराज ने गद्दार कह दिया। अहंकार कितना सातवें आसमान पर पहुंच गया है इनका। कांग्रेस छोड़कर कितने ही लोग निकले हैं, किसी और को नहीं कहा लेकिन ये सिख थे, इसलिए इन्हें गद्दार कहा, ये सिखों का, गुरुओं का अपमान है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि सिखों के प्रति उनके मन में जो नफरत भरी पड़ी है, इसी के कारण कल ऐसा कहा गया। उन्होंने कहा कि वह भी ऐसे व्यक्ति को गद्दार कहा गया, जिनका परिवार देश के लिए शहादत देने वाला परिवार रहा है। पीएम ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है। सिखों के प्रति कांग्रेस के मन में क्या भाव है। मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं प्रधानमंत्री ने इसी दौरान एक दूसरे दर्द का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "एक तरफ ये दर्द, दूसरी तरफ सदानंद मास्टर का दर्द है। राजनीतिक द्वेष के कारण भरी जवानी में उनके दोनों पैर काट दिए गए। कटे पैर से जिंदगी गुजार रहे, लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में जरा भी कटुता नहीं। उन्होंने जब अपने लिंब को टेबल पर रखा, वह दृष्य़ पीड़ादायक था। हम ऐसे लोगों से ही राजनीति में जीने-मरने की प्रेरणा पाते हैं।" प्रधानमंत्री ने इसके बाद कांग्रेस को मोहब्बूत की तथाकथित दुकान पर भी तंज कसा और कहा कि मोहब्बत की बात करने वाले लोग मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं। कौन हैं मास्टर सदानंद, कैसे कटे दोनों पैर? सी. सदानंदन मास्टर (C. Sadanandan Master) केरल के एक प्रमुख शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जुलाई 2025 में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। वह भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय तक RSS से जुड़े रहे हैं। 25 जनवरी 1994 को, जब वे मात्र 30 वर्ष के थे,तब केरल के कन्नूर जिले में उन पर एक जानलेवा हमला हुआ था। कथित तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के कार्यकर्ताओं ने उनके दोनों पैर काट दिए थे। यह हमला उनकी विचारधारा बदलने (वामपंथ से संघ की ओर) की सजा के तौर पर किया गया था। कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े हुए इस भयानक त्रासदी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वे कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े हुए और 25 वर्षों तक त्रिशूर के एक स्कूल में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में सेवा दी। वे नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। दो दिन पहले ही राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान उन्होंने अपनी नकली टांगें टेबल पर रखकर राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया, जिसकी देश भर में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें "साहस का प्रतीक" बताया है। उन्हें भाजपा और संघ के हलकों में एक "जीवित शहीद" के रूप में देखा जाता है। मास्टर सदानंद ने राज्यसभा में बताई थी आपबीती राज्यसभा में सोमवार को अपने संबोधन में सदानंद मास्टर ने बताया कि किस तरह विचारधारा अलग होने के कारण केरल में भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं को अमानवीय यातनाएं सहनी पड़ी हैं। वर्षों से कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए गए, कई लोगों की हत्या हुई और कई को स्थायी शारीरिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने अपने भाषण में उन दृश्यों का उल्लेख किया, जिन्हें देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी का पैर काट देना या केवल वैचारिक असहमति के कारण किसी की जान ले लेना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। उन्होंने इस हिंसा को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसके बावजूद भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं ने धैर्य, साहस और लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखा।

खदान में भीषण विस्फोट से 16 की जान गई, PM का मुआवजा एलान

मेघालय मेघालय में कोयला खदान में विस्फोट से 16 लोगों की मौत; PM ने किया दो-दो लाख रुपये के मुआवजे का एलान मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में गुरुवार को एक अवैध कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गई। वहीं, एक व्यक्ति के घायल होने की भी खबर है। यह कोयला खदान जिले के मिसिंगेट-थांग्स्को इलाके में है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये का मुआवाजा देने की घोषणा की है।   पुलिस ने क्या कहा? पूर्वी जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि दूरदराज के इलाके में स्थित इस खदान से चार शव बरामद किए गए हैं और एक झुलसे हुए व्यक्ति को उपचार के लिए शिलांग भेजा गया है।  घटना को लेकर अधिकारियों ने क्या बताया?  अधिकारियों ने कहा कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और दमकल व आपात सेवाओं की टीमें मौके पर भेजी गईं।      उन्होंने कहा कि मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।     घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार, जिस पहाड़ी में अवैध खनन हो रहा था, विस्फोट के बाद उसका एक हिस्सा धंस गया, जिससे और खनिकों के फंसे होने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। दिसंबर 2025 में भी हुआ था ऐसा ही विस्फोट यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब जिले में अवैध कोयला खनन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इसी थांग्स्को इलाके में पिछले साल 23 दिसंबर को भी ऐसा ही डायनामाइट विस्फोट हुआ था। उस विस्फोट में दो खनिकों की मौत हो गई थी।  तब पुलिस शुरू में विस्फोट की खबरों को बेबुनियाद बताया था। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य में अवध कोयला खनन और उसके परिवहन की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय समिति (सेवानिवृत्त जज बीपी काटेकी समिति) ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। मेघायल के मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया था और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।  इससे पहले 14 जनवरी को असम के होजाई जिले में भी अवैध कोयला खदान में हादसा हुआ था। उसमें जिले के जमुना मौदंगा निवासी मौसाद अली (48 वर्षीय) की मृतक के रूप में पहचान हुई थी, जो उम्थे गांव के निवासी थे। पुलिस ने उस घटना की पुष्टि की थी। वह मामला भी जस्टिस काटेकी समिति की जांच के दायरे में आया था।  प्रधानमंत्री मोदी ने घटना पर क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयला खदान में विस्फोट की घटना पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पीएम मोदी के हवाले से कहा, मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स में हुई दुर्घटना से व्यथित हूं। अपनो को खोने वालों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। पीएम मोदी ने घोषमा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।  एनडीआरएफ की तीन टीमें मौके पर भेजी गईं: अधिकारी अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गई और कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। बचाव अभियान चलाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की तीन टीमें भेजी गई हैं।  

सिख होने पर ‘गद्दार’ कहे जाने का आरोप, राहुल गांधी के बयान पर पीएम मोदी का बड़ा प्रहार

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को गद्दार कहा, क्योंकि वह सिख हैं। उन्होंने कहा कि यह सिखों का अपमान है। राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कल जो हुआ, कांग्रेस के ‘युवराज’ जिनका शातिर दिमाग है, उन्होंने इस सदन के एक सांसद को ‘गद्दार’ कहा। प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका अहंकार चरम पर है। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले किसी और को गद्दार नहीं कहा। लेकिन उन्होंने उस सांसद को गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे एक सिख हैं। यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। यह सिखों के प्रति उस नफरत का इजहार था जो कांग्रेस में भरी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि रवनीत बिट्टू उस परिवार के सदस्य हैं, जिसने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे लोग कांग्रेस को डुबो देंगे। क्या हुआ था राहुल गांधी-बिट्टू के बीच गौरतलब है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच बुधवार को नोक-झोंक देखने को मिली जब संसद परिसर में कांग्रेस नेता ने उन्हें ‘गद्दार’ कहा। इसके जवाब में बिट्टू ने ‘देश का दुश्मन’ कहा। यह घटना संसद के मकर द्वार के निकट उस वक्त हुई, जब संसद के बजट सत्र की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस के सांसद रह चुके बिट्टू संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे और यह टिप्पणी करते हुए सुने गए कि ये (प्रदर्शन कर रहे सांसद) जंग जीतकर आए हैं। इस पर, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देखिए यहां एक गद्दार चला आ रहा है…मेरे गद्दार मित्र, चिंता मत करो, वापस आओगे। सोनिया गांधी का ‘बिगड़ा हुआ बेटा’ बिट्टू ने बाद में राहुल गांधी को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का ‘बिगड़ा हुआ बेटा’ करार दिया। भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने यह बात कई अन्य सांसदों से क्यों नहीं कही, बल्कि केवल एक सिख से ही क्यों कही? बिट्टू ने एक वीडियो संदेश में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गांधी परिवार खुद को सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ मानते हैं क्योंकि उनके पिता (राजीव गांधी) ने अपना जीवन कुर्बान किया था। मैंने पार्टी में यह लड़ाई लड़ी कि मेरे दादा, बेअंत सिंह गांधी परिवार द्वारा लगाई गई आग के कारण पंजाब में शहीद हुए। सिखों के खून से रंगे हैं हाथ सांसद ने आगे दावा किया कि कांग्रेस देश के खिलाफ है और उनके हाथ सिखों के खून से रंगे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरदार और पगड़ी देखकर कांग्रेस नेता ने इस तरह का व्यवहार किया। बिट्टू ने कहा कि यह सरदार गांधी परिवार के उस वंशज से कभी हाथ नहीं मिलाएगा, जो सिखों का हत्यारा है और जिसने गुरुद्वारों को ध्वस्त किया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कांग्रेस में दोबारा शामिल होंगे, तो बिट्टू ने पलटवार किया, ‘वापस आए, मेरी जूती।’ बिट्टू ने कहा कि इस मामले को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाना होगा क्योंकि वही इसके संरक्षक हैं।  

रूस ने तेल के मुद्दे पर कहा, \’भारतीय दोस्त नहीं बदलेंगे\’

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।' रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।' इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'

रूस ने तेल के मुद्दे पर कहा, \’भारतीय दोस्त नहीं बदलेंगे\’

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।' रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।' इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'

ममता सरकार को SC से तगड़ा झटका, कर्मचारियों को 31 मार्च तक DA देने का आदेश

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक राहत लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए 31 मार्च 2026 तक महंगाई भत्ते (DA) के कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश उस दिन आया है जब बंगाल विधानसभा में लेखानुदान पेश किया जाना है। इससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित DA बकाया का एक-चौथाई हिस्सा 31 मार्च तक चुकाया जाए। शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि के भुगतान का तरीका और समय सीमा तय करने के लिए अदालत ने एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि पिछले साल 16 मई को कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यह भुगतान करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देकर 6 महीने की मोहलत मांगी थी। कोर्ट ने बार-बार मिल रही तारीखों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अब अंतिम समय सीमा तय कर दी है। DA खैरात नहीं, अधिकार है: शुभेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी आज गलत साबित हुई हैं। सालों तक उन्होंने दावा किया कि DA कोई अधिकार नहीं है, बल्कि एक दान है। आज शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कर्मचारियों का हक है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए नामी वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।" केंद्र और राज्य के बीच बढ़ता अंतर पश्चिम बंगाल में DA को लेकर विवाद काफी गहरा है। वर्तमान स्थिति यह है कि 1 अप्रैल 2025 से बंगाल के कर्मचारियों का DA मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले DA और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच अब भी करीब 37 से 40 प्रतिशत का बड़ा अंतर बना हुआ है। आपको बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए राज्य सरकार ने वर्तमान में केवल लेखानुदान पेश करने का निर्णय लिया है। पूर्ण बजट नई सरकार के गठन के बाद आएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने ममता सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि 25% बकाया चुकाने के लिए राज्य को हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा।

जैन दर्शन में आगम प्रमाण विमर्श

नई दिल्ली जैनदर्शन विभाग , श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय  में प्रो.अनेकान्त कुमार जैन जी के कुशल निर्देशन में 'जैनदर्शने आगमप्रमाणविमर्श:' विषय पर महत्त्वपूर्ण शोध कार्य करने के लिए शोध छात्र प्रशांत जैन की मौखिक परीक्षा दिनाँक 4/2/26 को सकुशल सम्पन्न हुई । इस अवसर पर बाह्य परीक्षक प्रो आनंद प्रकाश त्रिपाठी जी,तथा संकाय प्रमुख प्रो.अरावमुदन जी,विभागाध्यक्ष प्रो वीरसागर जैन , रशियन स्कॉलर डॉ नतालिया तथा संकाय के अनेक विद्वानों ने विषय पर अनेक जिज्ञासाएं रखीं तथा गहन शास्त्रीय चर्चाएं हुईं । आदरणीय कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक जी सहित सभी ने इस स्तरीय शोध कार्य की प्रशंसा की , प्रशांत जैन को आशीर्वाद दिया और उसके उज्जवल भविष्य की कामना की ।

जैनदर्शन विभाग में आचार्य कुंदकुंद जयंती का आयोजन

नई दिल्ली श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जैनदर्शन विभाग द्वारा वसंत पंचमी पर्व के शुभ अवसर पर आचार्य कुंदकुंद जयंती का आयोजन श्रद्धा एवं विद्वत्तापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।          इस अवसर पर जैनदर्शन की दार्शनिक परंपरा और आचार्य कुंदकुंद के योगदान पर सारगर्भित चर्चा की गई। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए प्रो. अनेकांत कुमार जैन जी ने कहा कि आचार्य कुन्दकुन्द भारतीय ज्ञान परंपरा के स्तंभ थे ।  उनकी कृतियों में ज्ञान की वह क्रांति थी कि अनेक लोग जिन्होंने उनका स्वाध्याय किया , इस परंपरा में दीक्षित हो गए ।       मंगलाचरण का सस्वर पाठ शोधार्थी श्रुति जैन एवं अंजलि जैन ने किया,जिसमें उन्होंने आचार्य कुन्दकुन्द के सभी ग्रंथों के मंगलाचरण का एक गुलदस्ता प्रस्तुत किया । जिससे कार्यक्रम का शुभारंभ आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में देश-विदेश में सुविख्यात विद्वान तथा जैनदर्शन के वरिष्ठ मनीषी विभागाध्यक्ष प्रो. वीर सागर जैन जी ने आचार्य कुंदकुंद के अमूल्य योगदान पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने आचार्य कुंदकुंद को जैन दर्शन का आधार-स्तंभ बताते हुए कहा कि उन्होंने ने जैन दर्शन के मूल तत्वज्ञान की रक्षा की और आत्मा-केंद्रित दर्शन को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। एक शिलालेख में उल्लेख मिलता है कि कुंदकुंदाचार्य वर्धमान चारित्र के धनी थे और वहीं से पञ्चम स्वर्ग में लौकान्तिक देव के रूप में उत्पन्न हुए। उन्होंने यह भी बताया कि आचार्य कुंदकुंद साक्षात विदेह क्षेत्र गए थे, जहाँ उन्होंने उस समय विद्यमान तीर्थंकरों के दर्शन किए, और सात दिन वहाँ निवास किया तथा समवसरण में उनके प्रवचन सुने, यह प्रसंग उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर और तपस्वी जीवन का प्रमाण है। समयसार ग्रंथ पर उन्होंने गहन चर्चा करते हुए उसकी गाथा 3 और गाथा 320 का सार प्रस्तुत किया ।कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी ज़ेबा अफ़रीन द्वारा किया गया। उन्होंने संक्षिप्त एवं प्रभावपूर्ण शब्दों में शिक्षकगण एवं सभी उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आचार्य कुन्दकुन्द आधारित क्विज का संचालन शोधार्थी श्रुति जैन ने किया । वसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम जैन दर्शन की ज्ञान-परंपरा को सजीव करता हुआ विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने वाला सिद्ध हुआ।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर साइन की तारीख का खुलासा, पीयूष गोयल ने दिया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन चुकी है. अब सवाल है कि आखिर भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर साइन कब होगा? आखिर ट्रेड डील पर भारत और अमेरिका का साझा बयान कब जारी होगा? इस पर देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा अपडेट दिया है.  केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आज यानी गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका अगले चार से पांच दिनों में ट्रेड डील पर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि फॉर्मल एग्रीमेंट का ड्राफ्ट अभी फाइनल किया जा रहा है और उम्मीद है कि मार्च के बीच तक इस पर साइन हो जाएंगे. इससे पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं और प्रस्तावित ट्रेड डील दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगी. उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के लिए बातचीत चल रही है. 2 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इसके बाद  अमेरिका ने टैरिफ में कटौती करके 18 फीसदी कर दिया था. पीएम मोदी और डोनाल्ज ट्रंप के बीच बातचीत के बाद ट्रेड डील की घोषणा की गई और अब डिटेलिंग पर काम चल रहा है. लोकसभा में सवाल का गोयल ने दिया जवाब लोकसभा में कुछ सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले एक साल से दोनों देशों के बातचीत करने वाले कई लेवल पर बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘पिछले एक साल से दोनों पक्षों के बातचीत करने वाले अलग-अलग लेवल पर बातचीत कर रहे हैं. बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने अपने महत्वपूर्ण और संवेदनशील सेक्टरों को ट्रेड डील से सुरक्षित रखा, साथ ही दोनों देशों के लिए अधिकतम फायदे भी सुनिश्चित किए.’ कृषि सेक्टर प्रोटेक्टेड पीयूष गोयल ने साफ कहा कि कृषि सेक्टर प्रोटेक्टेड है. उन्होंने कहा कि भारत ने बातचीत के दौरान प्रमुख संवेदनशील सेक्टरों खासकर कृषि और डेयरी के लिए सुरक्षा हासिल की है. उन्होंने कुछ विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच लोकसभा में बोलते हुए कहा, ‘कुछ ऐसे सेक्टर थे जो अमेरिका के नज़रिए से महत्वपूर्ण और संवेदनशील थे. लगभग एक साल की बातचीत के बाद दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं. कब बनी ट्रेड डील पर सहमति? 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. उसी के बाद भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील हुई. इसके तहत अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है और भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर व्यापारिक बाधाएं कम की हैं. पहले भारत के सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ था. बेसिक 25 और एडिशनल 25. अब अमेरिका ने कुल 18 कर दिया है. हालांकि, ट्रंप का कहना है कि इस समझौते में भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद कम करने और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने की बात भी शामिल है. मगर भारत सराकर ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. पीएम मोदी ने क्या कहा था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, ‘आज मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा. यह जानकर खुशी हुई कि अब ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद.’ क्या-क्या सस्ते होंगे भारत और अमेरिका के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ घटाने को लेकर हुए समझौते से देश में कई तरह के सामान सस्ते हो सकते हैं. इसमें टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों से लेकर कुछ कृषि उत्पाद तक शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील से लैपटॉप, मोबाइल गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टेक हार्डवेयर और उनके पार्ट्स की कीमतें कम हो सकती हैं। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड सामान और घरेलू उपकरण भी कम इंपोर्ट खर्च की वजह से सस्ते हो सकते हैं. दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे कृषि उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क घट सकता है, जिससे बढ़ती खाद्य महंगाई के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, सरकार की ओर से डील की पूरी शर्तों की आधिकारिक जानकारी अभी आना बाकी है.

\’भारत टैक्सी\’ ऐप ने दिल्ली में दी OLA-Uber को टक्कर, जानें कैसे करें बुकिंग

नई दिल्ली ओला, उबर और इनड्राइव जैसी मौजूदा कैब सेवाओं के बीच अब एक नई कैब सर्विस भारत टैक्सी की ऑफिशल एंट्री होने जा रही है. दरअसल, भारत की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी को दिल्ली में ऑफिशियल तौर पर लॉन्च कर दिया गया है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में इस ऐप का शुभारंभ किया. लंबे समय से दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तहत तौर पर चल रही इस सेवा को अब आम लोगों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है. लॉन्च के साथ ही कई यूजर्स ने ऐप डाउनलोड किया, लेकिन शुरुआती घंटों में कुछ लोगों को बुकिंग और ऐप एक्सेस से जुड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है. हालांकि सरकार और प्लेटफार्म से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में सिस्टम को और बेहतर किया जाएगा. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत टैक्सी ऐप पर बुकिंग का पूरा तरीका क्या है. ड्राइवर नहीं अब कहलाएंगे सारथी भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका ड्राइवर ओनरशिप मॉडल है. इस प्लेटफार्म से जुड़ने वाले ड्राइवरों को अब ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार के अनुसार, इस ऐप पर काम करने वाले सारथी ही इसके असली मालिक होंगे. वहीं हर राइड का पूरा किराया सीधे सारथी के बैंक अकाउंट में जाएगा और ओला, उबर की तरह कोई कमीशन नहीं काटा जाएगा. इसके अलावा भारत टैक्सी किसी प्राइवेट कंपनी की ओर से नहीं बल्कि को-ऑपरेटिव मॉडल पर शुरू की गई है. इसे सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई गवर्नेंस डिवीजन ने मिलकर तैयार किया है. इसका संचालन सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड करेगा. इसके लिए एक विशेष काउंसलिंग बनाई गई है, जिसकी जिम्मेदारी पूरे सिस्टम की निगरानी करना है. यूजर्स कैसे कर सकते हैं भारत टैक्सी का इस्तेमाल? भारत टैक्सी का इस्तेमाल ओला या उबर की तरह ही किया जा सकता है. इसके लिए एंड्राइड यूजर गूगल प्ले स्टोर से और आईफोन यूजर एप्पल ऐप स्टोर से भारत टैक्सी ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती और मराठी भाषा में भी उपलब्ध है. ऐप डाउनलोड करने के बाद मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद यूजर राइड बुक कर सकते हैं. ऐसे कर सकते हैं राइड बुक भारत टैक्सी ऐप से राइड बुक करने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करें. इसके बाद पिकअप और ड्रॉप लोकेशन डालें, फिर बाइक, ऑटो या कार में से ऑप्शन सेलेक्ट करें. अब दिखाई गई किराया राशि को कंफर्म करते ही राइड बुक हो जाएगी. वहीं राइट बुक होते ही लाइव ट्रैकिंग भी शुरू हो जाएगी. किराया और सर्ज प्राइसिंग से राहत भारत टैक्सी में यात्रियों को सर्ज प्राइसिंग की समस्या नहीं होगी. यानी पीक हावर्स, बारिश या ट्रैफिक के समय किराया नहीं बढ़ेगा. दावा किया जा रहा है कि इसका किराया बाजार में मौजूद दूसरी कैब सेवाओं से कम हो सकता है, जिससे आम यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा. वहीं यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐप में कई फीचर दिए गए हैं. सभी साथियों का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसके अलावा लाइव लोकेशन शेयरिंग, इमरजेंसी, एसओएस बटन और ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट जोड़ने जैसे सुविधा भी दी गई है.

\’भारत टैक्सी\’ ऐप ने दिल्ली में दी OLA-Uber को टक्कर, जानें कैसे करें बुकिंग

नई दिल्ली ओला, उबर और इनड्राइव जैसी मौजूदा कैब सेवाओं के बीच अब एक नई कैब सर्विस भारत टैक्सी की ऑफिशल एंट्री होने जा रही है. दरअसल, भारत की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी को दिल्ली में ऑफिशियल तौर पर लॉन्च कर दिया गया है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में इस ऐप का शुभारंभ किया. लंबे समय से दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तहत तौर पर चल रही इस सेवा को अब आम लोगों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है. लॉन्च के साथ ही कई यूजर्स ने ऐप डाउनलोड किया, लेकिन शुरुआती घंटों में कुछ लोगों को बुकिंग और ऐप एक्सेस से जुड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है. हालांकि सरकार और प्लेटफार्म से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में सिस्टम को और बेहतर किया जाएगा. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत टैक्सी ऐप पर बुकिंग का पूरा तरीका क्या है. ड्राइवर नहीं अब कहलाएंगे सारथी भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका ड्राइवर ओनरशिप मॉडल है. इस प्लेटफार्म से जुड़ने वाले ड्राइवरों को अब ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार के अनुसार, इस ऐप पर काम करने वाले सारथी ही इसके असली मालिक होंगे. वहीं हर राइड का पूरा किराया सीधे सारथी के बैंक अकाउंट में जाएगा और ओला, उबर की तरह कोई कमीशन नहीं काटा जाएगा. इसके अलावा भारत टैक्सी किसी प्राइवेट कंपनी की ओर से नहीं बल्कि को-ऑपरेटिव मॉडल पर शुरू की गई है. इसे सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई गवर्नेंस डिवीजन ने मिलकर तैयार किया है. इसका संचालन सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड करेगा. इसके लिए एक विशेष काउंसलिंग बनाई गई है, जिसकी जिम्मेदारी पूरे सिस्टम की निगरानी करना है. यूजर्स कैसे कर सकते हैं भारत टैक्सी का इस्तेमाल? भारत टैक्सी का इस्तेमाल ओला या उबर की तरह ही किया जा सकता है. इसके लिए एंड्राइड यूजर गूगल प्ले स्टोर से और आईफोन यूजर एप्पल ऐप स्टोर से भारत टैक्सी ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती और मराठी भाषा में भी उपलब्ध है. ऐप डाउनलोड करने के बाद मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद यूजर राइड बुक कर सकते हैं. ऐसे कर सकते हैं राइड बुक भारत टैक्सी ऐप से राइड बुक करने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करें. इसके बाद पिकअप और ड्रॉप लोकेशन डालें, फिर बाइक, ऑटो या कार में से ऑप्शन सेलेक्ट करें. अब दिखाई गई किराया राशि को कंफर्म करते ही राइड बुक हो जाएगी. वहीं राइट बुक होते ही लाइव ट्रैकिंग भी शुरू हो जाएगी. किराया और सर्ज प्राइसिंग से राहत भारत टैक्सी में यात्रियों को सर्ज प्राइसिंग की समस्या नहीं होगी. यानी पीक हावर्स, बारिश या ट्रैफिक के समय किराया नहीं बढ़ेगा. दावा किया जा रहा है कि इसका किराया बाजार में मौजूद दूसरी कैब सेवाओं से कम हो सकता है, जिससे आम यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा. वहीं यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐप में कई फीचर दिए गए हैं. सभी साथियों का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसके अलावा लाइव लोकेशन शेयरिंग, इमरजेंसी, एसओएस बटन और ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट जोड़ने जैसे सुविधा भी दी गई है.

स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान, \’मैंने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि न आएं, कुछ भी हो सकता था\’

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

पश्चिम बंगाल में महिलाओं को मिलेगा ₹500 का लाभ, गिग वर्कर्स के लिए भी ऐलान, ममता सरकार ने खोला खजाना

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान, \’मैंने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि न आएं, कुछ भी हो सकता था\’

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

मेघालय में कोयला खदान में बड़ा धमाका, 10 मजदूरों की मौत, हादसा हुआ दर्दनाक

 शिलॉन्ग मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में भीषण धमाका होने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुर्घटना में कम से कम 10 मजदूरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. जानकारी के मुताबिक, ताशखाई की कोयला खदान में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. धमाका इतना तेज था कि खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में सभी मजदूर असम के रहने वाले थे, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.   स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृत मजदूरों में से एक असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. हादसे की सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. खदान के अंदर फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेरकर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती तौर पर खदान में गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इस हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने की बात भी कही गई है.

रूस और अमेरिका की परमाणु संधि समाप्त, 50 साल में पहली बार बिना नियम; क्या विनाश की ओर बढ़ रही है दुनिया?

मॉस्को  दुनिया को हिला देने वाली एक खबर सामने आई है. अमेरिका और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे परमाणु हथियार नियंत्रण का सबसे अहम समझौता अब खत्म हो गया है. यह वही संधि थी जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु ताकतवर देशों के हथियारों की सीमा तय कर रखी थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. समझौता खत्म होने के बाद दुनिया में टेंशन बढ़ गई है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इस संधि का खत्म होना दुनिया को तबाही की ओर धकेल सकता है और ‘डूम्सडे क्लॉक’ यानी मानव विनाश का खतरा तेज हो सकता है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार शीत युद्ध के दौर के बाद से ही रूस अपनी सुपरपावर छवि को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस का वैश्विक प्रभाव कमजोर जरूर हुआ लेकिन परमाणु ताकत के कारण उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका बनी रही. साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने न्यू START संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 तैनात परमाणु हथियार रखने की अनुमति थी. यह समझौता वैश्विक शांति के लिए बेहद अहम माना गया था. लेकिन अब इसके खत्म होने के साथ ही दुनिया एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है. सबसे पहले- New START संधि क्या है? न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए 2010 में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे। यह संधि 2011 में लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होते हैं। तैनात हथियार वे माने जाते हैं जो सक्रिय सेवा में हों और तुरंत इस्तेमाल किए जा सकें। संधि कैसे बनी? पूरी कहानी परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1969 से अमेरिका और सोवियत संघ (बाद में रूस) ने कई दौर की बातें कीं।     1970 के दशक में SALT समझौते: हथियारों की संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कम नहीं किए।     1991 में START I: पहली बड़ी कटौती, जॉर्ज बुश और गोर्बाचेव के समय। हजारों हथियार कम हुए।     1993 में START II: और कटौती, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुई।     2002 में SORT (मॉस्को संधि): बुश और पुतिन ने वारहेड्स 1,700-2200 तक कम करने पर सहमति, लेकिन जांच-पड़ताल कम थी। फिर आई न्यू स्टार्ट। 2009 में बराक ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री मेदवेदेव (रूस) ने बात शुरू की। 8 अप्रैल 2010 को प्राग (चेक गणराज्य) में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी सीनेट ने 2010 में मंजूरी दे दी थी। रूसी संसद ने 2011 में दी। आखिरकार संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई। इसका मूल समय 10 साल तक ही था। हालांकि इसे एक बार 5 साल बढ़ाने का प्रावधान भी था, जो 2021 में जो बाइडेन ने इस्तेमाल किया और 2026 तक बढ़ा दिया। 2021 के बाद क्या हुआ? 2023 में रूस ने संधि में हिस्सा रोक दिया जैसे निरीक्षण बंद कर दिए, लेकिन सीमाओं का पालन करने का दावा जारी रखा। वजह बताई कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका मदद कर रहा है। आखिरकार आज (5 फरवरी 2026) संधि खत्म हो गई। अब दोनों देश स्वतंत्र हैं – जितने चाहें हथियार बढ़ा सकते हैं। रूस बोला- अब परमाणु हथियारों की सीमा से मुक्त रूस ने कहा है कि वह अब अमेरिका के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि से अब बंधा नहीं है, क्योंकि यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। इस बयान से वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें दोनों देशों से 12 महीने तक संधि के तहत मिसाइलों और तैनात परमाणु वारहेड्स की सीमाओं का पालन जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा- हम मानते हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के पक्षकार अब इसके तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं से बंधे नहीं हैं। हमारी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जो गलत और अफसोसजनक है। संधि खत्म होने के संभावित असर संधि की अवधि समाप्त होने के साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना तकनीकी और लॉजिस्टिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा और इसमें समय लगेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि वे संधि के विस्तार पर विचार कर सकते हैं, लेकिन जनवरी में उन्होंने कहा था कि अगर यह खत्म होती है तो कोई बेहतर समझौता किया जाएगा। ट्रंप ने भविष्य की किसी भी परमाणु वार्ता में चीन को शामिल करने की भी बात कही है। परमाणु हथियारों का मौजूदा संतुलन रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार रखते हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः 290 और 225 वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार माने जाते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से एक नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन के परमाणु विस्तार का भी असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार सबसे अधिकतम स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। पोप लियो ने भी चेताया संधि की समाप्ति से पहले, पोप लियो ने दोनों देशों से अपील की कि वे हथियारों पर लगी सीमाओं को न … Read more

राष्‍ट्रपति के भाषण पर PM ने नहीं दिया रिप्‍लाई, लोकसभा से पारित हुआ भाषण, 2004 के बाद पहली बार

 नई दिल्ली  लोकसभा के लिए गुरुवार 5 फरवरी 2026 का दिन अप्रत्‍याशित रहा. प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया. साल 2004 के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया है. इससे पहले जून 2004 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हंगामे की वजह से राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर जारी बहस में हिस्‍सा नहीं ले सके थे. उनको अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला था. उनकी स्‍पीच के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया था. बजट सत्र के दौरान संसद में जारी गतिरोध के बीच गुरुवार 5 फरवरी 2026 को लोकसभा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया. यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है, जब सदन ने परंपरा से हटकर बिना प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के प्रस्ताव को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही. हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. इसके बाद गुरुवार को स्‍पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, हालांकि इस दौरान भी विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी. लोकसभा में भारी हंगामे के चलते आज भी कार्यवाही स्थगित हुई है। इसके साथ ही अब तय हो गया है कि लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं होगा। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। उनके भाषण के लिए बुधवार शाम 5 बजे का समय तय था, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अब उनके भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। 2004 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। 2004 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह भी अपना भाषण नहीं दे सके थे। इस बार कुल तीन सांसद ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में अपनी स्पीच पूरी कर सके। राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया जाता है और फिर उस पर परिचर्चा होती है। इस चर्चा के अंत में पीएम के जवाब देने की परंपरा रही है, लेकिन 2004 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रधानमंत्री के बिना ही राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के सुझावों को सदन में रखा, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद स्पीकर ने धन्यवाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और उसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस बीच लोकसभा सांसदों की ओर से नारेबाजी जारी रही। हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव मंजूर, कार्य़वाही करनी पड़ी स्थगित हंगामे के चलते स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी का आज शाम को राज्यसभा में भाषण होने वाला है। जानकारी मिल रही है कि इस दौरान भी विपक्ष की ओर से हंगामा हो सकता है। दरअसल वह लोकसभा में बुधवार को ही बोलने वाले थे, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यदि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया है तो फिर पीएम को भी अवसर नहीं देंगे। राहुल गांधी को लोकसभा में भाषण से क्यों रोका गया था? गौरतलब है कि राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ एम.एम नरवणे की एक पुस्तक का हवाला देते हुए लोकसभा में बोलना चाह रहे थे। यह पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है और इसके चलते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और होम मिनिस्टर अमित शाह ने इस पर आपत्ति जताई थी। अंत में उन्हें इस पर भाषण देने से रोक दिया गया था। इसी को लेकर कांग्रेस हमलावर है और उसका कहना है कि यह विपक्ष के नेता के अधिकार का हनन है। तब से ही विपक्ष का कहना था कि हम पीएम मोदी को भी भाषण नहीं देने देंगे और अंत में प्रधानमंत्री की स्पीच के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। लोकसभा में नहीं थमा हंगामा गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसके चलते सदन को फिर स्थगित करना पड़ा. विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जबकि वह 2020 के चीन गतिरोध पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमए नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देना चाहते थे. सरकार और विपक्ष के बीच टकराव मंगलवार को उस समय और तेज हो गया, जब कांग्रेस के आठ सांसदों को अनुशासनहीन व्यवहार के चलते बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया. इसके बाद से विपक्षी दल लगातार सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हुआ है. 21 साल पुरानी याद ताजा संसदीय परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब एक अहम प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें सरकार अपनी प्राथमिकताओं और विपक्ष के सवालों का समग्र उत्तर देती है. ऐसे में प्रधानमंत्री के बिना जवाब दिए प्रस्ताव का पारित होना असाधारण माना जा रहा है. इस घटनाक्रम के बीच 2004 की यादें भी ताजा हो गई हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका गया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर 10 मार्च 2005 का एक वीडियो साझा किया, जिसमें डॉ. सिंह जून 10, 2004 की उस घटना का जिक्र करते हैं, जब उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया था.

200 KMPH का बवंडर और 95 किलोमीटर रफ्तार का तूफान, मूसलधार बारिश से पुर्तगाल में 11 लोगों की मौत

लिस्बन पुर्तगाल में लगातार आ रहे तूफानों ने जनवरी के अंत से अब तक 11 लोगों की जान ले ली है। ताजा घटना में 64 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह हादसा दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र में पियास के पास अमोरेइरा बांध के नजदीक हुआ। व्यक्ति सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी बाढ़ का तेज पानी उसकी कार को बहा ले गया। समाचार एजेंसी लूसा के मुताबिक, जिस सड़क से वह गुजर रहा था वहां पानी तेजी से भर रहा था। अचानक आई बाढ़ अपने चरम पर थी और तेज बहाव में कार बह गई। यह जानकारी राष्ट्रीय रिपब्लिकन गार्ड के एक अधिकारी के हवाले से दी गई। हाल के दिनों में पुर्तगाल लगातार कई तूफानी प्रणालियों की चपेट में रहा है। इससे देशभर में भारी नुकसान हुआ है। अब तक तूफान क्रिस्टिन सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ है। इसके बाद तूफान लियोनार्डो ने बुधवार से देश को प्रभावित करना शुरू किया। इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने तूफान क्रिस्टिन के बाद परिवारों और कारोबारियों की मदद के लिए 2.5 बिलियन यूरो के सहायता पैकेज की घोषणा की थी। इस तूफान में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी और पूरे देश में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को और आगे बढ़ाने का फैसला किया। यूरोप के कुछ देशों पर इन दिनों प्रकृति का कहर बरप रहा है. समुद्री तूफान की वजह से व्‍यापक नुकसान हुआ है. एक सप्‍ताह पहले 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली क्रिस्टिन स्‍टॉर्म ने जमक तबाही मचाई थी. अब लियानार्डो स्‍टॉर्म का खतरा मंडरा रहा है. मौसम विभाग ने पुर्तगाल और स्‍पेन के लिए अलर्ट जारी किया है. लियानार्डो तूफान की वजह से बाढ़ जैसे हालात बनने का खतरा है तो दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम के चरमराने की आशंका भी जताई गई है. मौसमी हालात को देखते हुए वेदर एक्‍सपर्ट ने लोगों से घरों में रहने और यात्रा से बचने की सलाह दी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके. पिछले कुछ दिनों में आए भयानक तूफान की वजह से पुर्तगाल में 11 लोगों की मौत होने की सूचना है, जबकि व्‍यापक पैमाने पर संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है. पुर्तगाल और स्पेन ने स्टॉर्म लियोनार्डो के चलते यात्रियों और नागरिकों के लिए आपात चेतावनी जारी की है. तूफान के कारण भारी बारिश, तेज हवाएं और तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. पुर्तगाल के मौसम विभाग आईपीएमए के अनुसार, देश के कई हिस्सों में हवा की रफ्तार 95 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि दक्षिणी तटों पर तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. स्पेन में विशेष रूप से आंदालूसिया क्षेत्र में हालात गंभीर बने हुए हैं, जहां रेड और एंबर अलर्ट जारी किए गए हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम से ट्रांसपोर्ट सर्विसेज बाधित हो सकती हैं, बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा है. हालांकि, यह तूफान पिछले सप्ताह आए स्टॉर्म क्रिस्टिन जितना शक्तिशाली नहीं है, फिर भी पहले से भरे नदी-नालों के कारण बाढ़ का जोखिम अधिक बना हुआ है. तटीय क्षेत्रों में ऊंची लहरों और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है. पुर्तगाल में 11 लोगों की मौत पुर्तगाल में लगातार आ रहे तूफानों ने जनवरी के अंत से अब तक 11 लोगों की जान ले ली है. ताजा घटना में 64 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई. यह हादसा दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र में पियास के पास अमोरेइरा बांध के नजदीक हुआ. व्यक्ति सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी बाढ़ का तेज पानी उसकी कार को बहा ले गया. न्‍यूज एजेंसी लूसा के मुताबिक, जिस सड़क से वे गुजर रहे थे, वहां पानी तेजी से भर रहा था. अचानक आई बाढ़ अपने चरम पर थी और तेज बहाव में कार बह गई. यह जानकारी राष्ट्रीय रिपब्लिकन गार्ड के एक अधिकारी के हवाले से दी गई. हाल के दिनों में पुर्तगाल लगातार कई तूफानी सिस्‍टम्‍स की चपेट में रहा है. इससे देशभर में भारी नुकसान हुआ है. अब तक तूफान क्रिस्टिन सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ है. इसके बाद तूफान लियोनार्डो ने बुधवार से देश को प्रभावित करना शुरू किया. इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने तूफान क्रिस्टिन के बाद परिवारों और कारोबारियों की मदद के लिए 2.5 बिलियन यूरो के सहायता पैकेज की घोषणा की थी. इस तूफान में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी और पूरे देश में भारी तबाही हुई थी. इसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को और आगे बढ़ाने का फैसला किया. सरकारी सहायता मंत्रिपरिषद की आपात बैठक के बाद सरकार ने यह पैकेज घोषित किया और राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को 8 फरवरी तक बढ़ा दिया. इस पैकेज में घरों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता, परिवारों को आय सहायता, कारोबारियों को नकदी मदद और कर व ऋण भुगतान में राहत शामिल है. बीमा रहित मुख्य घरों, कृषि और वानिकी कार्यों के लिए सीधे अनुदान दिए जाएंगे, जिनकी राशि अधिकतम 10 हजार यूरो तक हो सकती है. जिन परिवारों को आय का नुकसान हुआ है, उन्हें प्रति व्यक्ति 537 यूरो तक की मदद मिलेगी. एक परिवार को अधिकतम 10,075 यूरो तक सहायता दी जा सकेगी. प्रभावित इलाकों के कारोबारियों को छह महीने तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान में छूट मिलेगी. इसके अलावा तीन महीने के लिए एक सरल अस्थायी छंटनी योजना तक पहुंच का लाभ मिलेगा. कारोबार और मुख्य घरों के ऋण पर 90 दिनों की मोहलत दी जाएगी, जिसे जरूरत पड़ने पर 12 महीने तक बढ़ाया जा सकता है.

भारत के रणनीतिक \’चिकन नेक\’ पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान, 40 किमी अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण

भारत की रणनीतिक नब्ज 'चिकन नेक' पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान: जमीन के नीचे बनेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर!  सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित 'चिकन नेक' – वह संकरी भूमि पट्टी जो भारत की शिराओं में सबसे संवेदनशील धमनी की तरह काम करती है। मात्र 20 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पट्टी, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरी हुई, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी गलियारा है। वर्षों से दुश्मन ताकतें इसी की कमजोरी को निशाना बनाती रहीं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे अभेद्य किले में बदलने का मास्टरस्ट्रोक प्लान तैयार किया है। जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 'चिकन नेक' के टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाया जाएगा। यह न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अटल बना देगा!कल्पना कीजिए – पहाड़ों और जंगलों के बीच वह संकरा कॉरिडोर, जहां आज रेल लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क आपस में उलझे हुए हैं। भीड़भाड़, प्राकृतिक आपदाएं या दुश्मनी की साजिशें – सब कुछ यातायात को ठप कर सकती हैं। लेकिन अब यह सब भूमिगत हो जाएगा! नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा, "यह अंडरग्राउंड लाइन सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है।" प्राकृतिक विपत्तियों हो या मानवीय खतरों, यह टनल सबको झेल लेगी। यात्री ट्रेनें तेज रफ्तार से दौड़ेंगी, मालगाड़ियां बिना रुकावट पहुंचेंगी, और सबसे अहम – डिफेंस लॉजिस्टिक्स यानी सेना का हथियार-बारूद, सैनिकों की आवाजाही बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दुश्मन भले ही आसमान से निगाह रखे या जमीन पर साजिश रचे, लेकिन भूमिगत कॉरिडोर को छू भी न पाएंगे!यह प्लान सिर्फ टनल तक सीमित नहीं। मौजूदा रेल ट्रैक को चार-लाइन (फोर-लेन) में बदला जाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए। रेल मंत्री वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, "नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले इस 40 किमी स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने की योजना है। इससे कनेक्टिविटी मजबूत और सुरक्षित होगी।" यह भारत की लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अभेद्य बनाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो देश का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट जोन है, अब दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। भारत अब चिकन नेक को चिकन नेक नहीं, बल्कि 'स्टील नेक' बना रहा है – मजबूत, लचीला और अटल!इस ऐतिहासिक कदम से पूर्वोत्तर के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। तेज ट्रेनें, सस्ता माल ढुलाई, पर्यटन में उछाल और निवेश का दौर – सब कुछ संभव हो जाएगा। केंद्र सरकार की यह दूरदृष्टि न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के सपने को साकार करेगी। क्या आप तैयार हैं इस क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बनने को?

भारत के रणनीतिक \’चिकन नेक\’ पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान, 40 किमी अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण

भारत की रणनीतिक नब्ज 'चिकन नेक' पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान: जमीन के नीचे बनेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर!  सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित 'चिकन नेक' – वह संकरी भूमि पट्टी जो भारत की शिराओं में सबसे संवेदनशील धमनी की तरह काम करती है। मात्र 20 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पट्टी, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरी हुई, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी गलियारा है। वर्षों से दुश्मन ताकतें इसी की कमजोरी को निशाना बनाती रहीं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे अभेद्य किले में बदलने का मास्टरस्ट्रोक प्लान तैयार किया है। जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 'चिकन नेक' के टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाया जाएगा। यह न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अटल बना देगा!कल्पना कीजिए – पहाड़ों और जंगलों के बीच वह संकरा कॉरिडोर, जहां आज रेल लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क आपस में उलझे हुए हैं। भीड़भाड़, प्राकृतिक आपदाएं या दुश्मनी की साजिशें – सब कुछ यातायात को ठप कर सकती हैं। लेकिन अब यह सब भूमिगत हो जाएगा! नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा, "यह अंडरग्राउंड लाइन सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है।" प्राकृतिक विपत्तियों हो या मानवीय खतरों, यह टनल सबको झेल लेगी। यात्री ट्रेनें तेज रफ्तार से दौड़ेंगी, मालगाड़ियां बिना रुकावट पहुंचेंगी, और सबसे अहम – डिफेंस लॉजिस्टिक्स यानी सेना का हथियार-बारूद, सैनिकों की आवाजाही बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दुश्मन भले ही आसमान से निगाह रखे या जमीन पर साजिश रचे, लेकिन भूमिगत कॉरिडोर को छू भी न पाएंगे!यह प्लान सिर्फ टनल तक सीमित नहीं। मौजूदा रेल ट्रैक को चार-लाइन (फोर-लेन) में बदला जाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए। रेल मंत्री वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, "नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले इस 40 किमी स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने की योजना है। इससे कनेक्टिविटी मजबूत और सुरक्षित होगी।" यह भारत की लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अभेद्य बनाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो देश का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट जोन है, अब दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। भारत अब चिकन नेक को चिकन नेक नहीं, बल्कि 'स्टील नेक' बना रहा है – मजबूत, लचीला और अटल!इस ऐतिहासिक कदम से पूर्वोत्तर के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। तेज ट्रेनें, सस्ता माल ढुलाई, पर्यटन में उछाल और निवेश का दौर – सब कुछ संभव हो जाएगा। केंद्र सरकार की यह दूरदृष्टि न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के सपने को साकार करेगी। क्या आप तैयार हैं इस क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बनने को?

इजरायल का कड़ा जवाब: हमास और इस्लामिक जिहाद के टॉप कमांडर्स ढेर, गाजा में स्थिति गंभीर

गाजा   अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर (युद्धविराम) के बाद इजरायल ने अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है. इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने बुधवार को एक बड़े ऑपरेशन में ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ (PIJ) के टॉप कमांडर अली राजियाना को मार गिराया है. इजरायल के मुताबिक, यह सीजफायर के बाद की सबसे बड़ी कामयाबी है. कौन था अली राजियाना?   द यरूशलेम पोस्ट के अनुसार, इजरायली सेना और उनकी खुफिया एजेंसी ‘शिन बेट’ के मुताबिक, अली राजियाना ‘नार्दर्न गाजा ब्रिगेड’ का चीफ था. वह न सिर्फ इस्लामिक जिहाद की मिलिट्री काउंसिल का हिस्सा था, बल्कि हमास के साथ मिलकर इजरायली सैनिकों पर हमलों की प्लानिंग भी करता था. सेना ने बताया कि युद्ध के दौरान बंधकों को कैद में रखने में भी इसकी बड़ी भूमिका थी और सीजफायर के बाद यह अपनी ब्रिगेड को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा था. नोआ मार्सियानो के हत्यारे का भी अंत बुधवार को ही इजरायल ने एक और बड़ी जानकारी दी. उन्होंने मुहम्मद इसाम हसन अल-हबील को भी मार गिराया है. इजरायल का कहना है कि इसी शख्स ने इजरायली सैनिक नोआ मार्सियानो की हत्या की थी, जिसे 7 अक्टूबर 2023 को बंधक बनाया गया था. सेना का कहना है कि इससे नोआ के परिवार को इंसाफ मिला है. हमलों में 23 लोगों की जान गई एक तरफ इजरायल इसे आतंकियों के खिलाफ एक्शन बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में 23 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है. इनमें 7 बच्चे भी शामिल हैं. दक्षिण गाजा के खान यूनिस में एक मेडिकल वर्कर भी मारा गया, जो घायलों की मदद करने पहुंचा था. वहीं उत्तरी गाजा में एक 5 महीने के बच्चे की मौत की खबर भी सामने आई है. क्या सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है? इजरायल का कहना है कि उन्होंने ये हमले इसलिए किए क्योंकि चरमपंथियों ने इजरायली सैनिकों पर गोलीबारी की थी, जिसमें एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया था. इसे सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की. दूसरी ओर, हमास ने कहा कि इजरायल की ये हरकतें शांति की कोशिशों को खत्म कर रही हैं. हमास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बनाने की मांग की है. राफा बॉर्डर को लेकर सस्पेंस सीजफायर समझौते के तहत गाजा और मिस्र के बीच ‘राफा बॉर्डर’ को खोला गया था ताकि बीमार मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजा जा सके. हालांकि, इजरायल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मरीजों के जाने पर अस्थायी रोक लगा दी थी. मिस्र के सूत्रों का कहना है कि अब मामला सुलझ गया है और काम फिर से शुरू हो गया है. अब तक का नुकसान  सीजफायर के बाद: इजरायली हमलों में अब तक लगभग 560 लोगों की मौत हुई है (गाजा अधिकारियों के अनुसार), जबकि 4 इजरायली सैनिक मारे गए हैं. युद्ध की शुरुआत से: अक्टूबर 2023 से अब तक 71,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. इजरायल में नुकसान: 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में करीब 1,200 इजरायली मारे गए थे. जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के दूसरे फेज का एलान किया था, जिसमें गाजा के पुनर्निर्माण पर बात होनी थी. लेकिन इजरायली सेना की वापसी और हमास के हथियारों को छोड़ने जैसे बड़े मुद्दों पर अब भी पेंच फंसा हुआ है.

\’Bharat Taxi\’ का आज होगा लॉन्च, अमित शाह देंगे सर्ज प्राइसिंग और महंगे किराए को अलविदा

 नई दिल्ली Bharat Taxi Cab Service Launch: कैब सर्विस के क्षेत्र में आज एक नया आगाज होने जा रहा है. आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह देश की पहली कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ करेंगे. ये नई कैब सर्विस सीधे तौर पर प्राइवेट कैब सर्विस प्रोवाइडर्स की मोनोपोली को सीधी चुनौती देगी. क्योंकि सरकार का दावा है कि, भारत टैक्सी में कैब ड्राइवर्स को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. साथ ही यूजर्स को सर्ज प्राइसिंग और प्राइवेट कैब्स जैसी कंपनियों की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा. अमित शाह ने पिछले साल मार्च में लोकसभा में अपने भाषण में कहा था कि, “हम बहुत जल्द ही ओला और उबर जैसा एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म लाने वाले हैं. इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा.” आज देश की राजधानी दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में गृह मंत्री अमित शाह भारत टैक्सी का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन करेंगे. बता दें कि, भारत टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही शुरू हो चुका है. दिल्ली-एनसीआर में कई कैब ड्राइवर्स इस ऐप बेस्ड सर्विस का प्रयोग कर रहे हैं. अब भारत टैक्सी के सॉफ्ट लॉंच से अब तक टॉप परफॉर्मेंस करने वाले सारथियों (कैब ड्राइवर्स) को कार्यक्रम के दौरान को सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा सारथियों को प्रमाणपत्र देने के साथ-साथ 5 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि, ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न से इंस्पायर्ड भारत टैक्सी सिटिजन-सेंट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. तो आइये विस्तार से जानते हैं Bharta Taxi देश में मौजूद बाकी प्राइवेट कैब एग्रीग्रेटर्स से किस तरह से अलग होगा. ‘सारथी ही मालिक’  सबसे पहले बता दें कि, भारत टैक्सी के चालकों को ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार का कहना है कि, सारथी ही मालिक होगा. क्योंकि इस सर्विस के दौरान यूजर द्वारा दिए जाने वाले किराए का पूरा पैसा सीधे कैब चालक के खाते में जाएगा. जहां ओला-उबर जैसी कंपनियां राइड के बाद फेयर में से एक मोटा हिस्सा कमिशन के नाम पर काट लेती हैं, वहीं भारत टैक्सी सीधे तौर पर कैब चालकों को बड़ी राहत देगा. ऐसा आमतौर पर देखा जाता है कि, कैब चालक और कंपनियों के बीच फेयर और कमिशन को लेकर झंझट होती रहती है. सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा भारत टैक्सी में सर्ज प्राइसिंग से भी राहत मिलेगी. जहां प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स पीक ऑवर या खराब मौसम के समय हैवी रश के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं, वहीं भारत टैक्सी में इस समस्या से भी निजात मिलेगी. जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा. बीते 1 जुलाई से मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन (MVAG) 2025 के अनुसार, कैब एग्रीगेटर्स को अब पीक ट्रैफिक ऑवर के दौरान बेस फेयर से दोगुना तक चार्ज करने की अनुमति मिल गई है. जिसके बाद पीक-ऑवर में मोटी रकम वसूलने का खेल और बढ़ गया है. कैब, ऑटो और बाइक सर्विस भारत टैक्सी में यूजर्स को कैब, बाइक और ऑटो तीनों सुविधाओं का लाभ मिलेगा. इससे कम दूरी से लेकर लंबी यात्रा तक हर जरूरत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा. यानी ग्राहक अपने बज़ट और जरूरत के अनुसार कार, ऑटो और यहां तक की बाइक राइड का भी चुनाव कर सकेंगे. सेफ्टी और सिक्योरिटी भारत टैक्सी में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा, साथ ही ऐप में इमरजेंसी SOS बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप हिस्ट्री जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी, ताकि आप और आपके परिवार निश्चिंत होकर यात्रा कर सकें. इसके अलावा ऐप पर ही यूजर्स को किसी भी तरह की परेशानी होने पर हेल्पलाइन की भी सुविधा भी दी जा रही है. 3 लाख से ज्यादा ड्राइवर जानकारी के अनुसार भारत टैक्सी से अब तक 3 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं. और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक राइड्स पूरी की जा रही हैं. पिछले महीने ये आंकड़ा 1.4 लाख ड्राइवर्स का था. इससे साफ है कि, समय के साथ भारत टैक्सी का प्रयोग बढ़ रहा है और ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स इस सविर्स से जुड़ रहे हैं.  8 सरकारी संस्थाओं का साथ इस सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. कैसे डाउनलोड करें मोबाइल ऐप भारत टैक्सी का मोबाइल ऐप लाइव हो चुका है. इसकी बुकिंग सरकारी Bharat Taxi मोबाइल ऐप के जरिए की जा सकती है. इसका राइडर और ड्राइवर दोनों मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. यदि आपको कैब सर्विस के लिए राइड का लाभ उठाना है तो Rider App डाउनलोड करें. वहीं इस सेवा जुड़ने के इच्छुक ड्राइवरों को Driver App डाउनलोड करना होगा. यहां ध्यान रखना जरूर है कि, भारत टैक्सी वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं.

\’Bharat Taxi\’ का आज होगा लॉन्च, अमित शाह देंगे सर्ज प्राइसिंग और महंगे किराए को अलविदा

 नई दिल्ली Bharat Taxi Cab Service Launch: कैब सर्विस के क्षेत्र में आज एक नया आगाज होने जा रहा है. आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह देश की पहली कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ करेंगे. ये नई कैब सर्विस सीधे तौर पर प्राइवेट कैब सर्विस प्रोवाइडर्स की मोनोपोली को सीधी चुनौती देगी. क्योंकि सरकार का दावा है कि, भारत टैक्सी में कैब ड्राइवर्स को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. साथ ही यूजर्स को सर्ज प्राइसिंग और प्राइवेट कैब्स जैसी कंपनियों की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा. अमित शाह ने पिछले साल मार्च में लोकसभा में अपने भाषण में कहा था कि, “हम बहुत जल्द ही ओला और उबर जैसा एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म लाने वाले हैं. इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा.” आज देश की राजधानी दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में गृह मंत्री अमित शाह भारत टैक्सी का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन करेंगे. बता दें कि, भारत टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही शुरू हो चुका है. दिल्ली-एनसीआर में कई कैब ड्राइवर्स इस ऐप बेस्ड सर्विस का प्रयोग कर रहे हैं. अब भारत टैक्सी के सॉफ्ट लॉंच से अब तक टॉप परफॉर्मेंस करने वाले सारथियों (कैब ड्राइवर्स) को कार्यक्रम के दौरान को सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा सारथियों को प्रमाणपत्र देने के साथ-साथ 5 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि, ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न से इंस्पायर्ड भारत टैक्सी सिटिजन-सेंट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. तो आइये विस्तार से जानते हैं Bharta Taxi देश में मौजूद बाकी प्राइवेट कैब एग्रीग्रेटर्स से किस तरह से अलग होगा. ‘सारथी ही मालिक’  सबसे पहले बता दें कि, भारत टैक्सी के चालकों को ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार का कहना है कि, सारथी ही मालिक होगा. क्योंकि इस सर्विस के दौरान यूजर द्वारा दिए जाने वाले किराए का पूरा पैसा सीधे कैब चालक के खाते में जाएगा. जहां ओला-उबर जैसी कंपनियां राइड के बाद फेयर में से एक मोटा हिस्सा कमिशन के नाम पर काट लेती हैं, वहीं भारत टैक्सी सीधे तौर पर कैब चालकों को बड़ी राहत देगा. ऐसा आमतौर पर देखा जाता है कि, कैब चालक और कंपनियों के बीच फेयर और कमिशन को लेकर झंझट होती रहती है. सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा भारत टैक्सी में सर्ज प्राइसिंग से भी राहत मिलेगी. जहां प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स पीक ऑवर या खराब मौसम के समय हैवी रश के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं, वहीं भारत टैक्सी में इस समस्या से भी निजात मिलेगी. जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा. बीते 1 जुलाई से मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन (MVAG) 2025 के अनुसार, कैब एग्रीगेटर्स को अब पीक ट्रैफिक ऑवर के दौरान बेस फेयर से दोगुना तक चार्ज करने की अनुमति मिल गई है. जिसके बाद पीक-ऑवर में मोटी रकम वसूलने का खेल और बढ़ गया है. कैब, ऑटो और बाइक सर्विस भारत टैक्सी में यूजर्स को कैब, बाइक और ऑटो तीनों सुविधाओं का लाभ मिलेगा. इससे कम दूरी से लेकर लंबी यात्रा तक हर जरूरत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा. यानी ग्राहक अपने बज़ट और जरूरत के अनुसार कार, ऑटो और यहां तक की बाइक राइड का भी चुनाव कर सकेंगे. सेफ्टी और सिक्योरिटी भारत टैक्सी में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा, साथ ही ऐप में इमरजेंसी SOS बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप हिस्ट्री जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी, ताकि आप और आपके परिवार निश्चिंत होकर यात्रा कर सकें. इसके अलावा ऐप पर ही यूजर्स को किसी भी तरह की परेशानी होने पर हेल्पलाइन की भी सुविधा भी दी जा रही है. 3 लाख से ज्यादा ड्राइवर जानकारी के अनुसार भारत टैक्सी से अब तक 3 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं. और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक राइड्स पूरी की जा रही हैं. पिछले महीने ये आंकड़ा 1.4 लाख ड्राइवर्स का था. इससे साफ है कि, समय के साथ भारत टैक्सी का प्रयोग बढ़ रहा है और ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स इस सविर्स से जुड़ रहे हैं.  8 सरकारी संस्थाओं का साथ इस सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. कैसे डाउनलोड करें मोबाइल ऐप भारत टैक्सी का मोबाइल ऐप लाइव हो चुका है. इसकी बुकिंग सरकारी Bharat Taxi मोबाइल ऐप के जरिए की जा सकती है. इसका राइडर और ड्राइवर दोनों मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. यदि आपको कैब सर्विस के लिए राइड का लाभ उठाना है तो Rider App डाउनलोड करें. वहीं इस सेवा जुड़ने के इच्छुक ड्राइवरों को Driver App डाउनलोड करना होगा. यहां ध्यान रखना जरूर है कि, भारत टैक्सी वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट में कर्मचारियों की छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान की नौकरी भी गई

नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में से एक 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ा झटका दिया है. अखबार ने अपने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई (300 से अधिक कर्मचारियों) की छंटनी कर दी है.इस बड़ी छंटनी की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अखबार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आए हैं. उन्होंने अखबार में बिताए अपने वर्षों की सेवा और अचानक समाप्त हुए अपने कार्यकाल पर भावुक प्रतिक्रिया दी और इसे यह न्यूज़रूम और वैश्विक पत्रकारिता के लिए 'बेहद दुखद दिन' बताया. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,“आज अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के अधिकांश साथियों और कई अन्य शानदार सहकर्मियों के साथ मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से ले-ऑफ कर दिया गया है. हमारा न्यूज़रूम और खासकर वे बेहतरीन पत्रकार, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्ट की सेवा की उनके लिए दिल से बहुत दुखी हूं.” एक अलग पोस्ट में उन्होंने खाली न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए इसे बस “एक बुरा दिन” बताया. ईशान ने अख़बार में अपने काम को याद करते हुए कहा कि 2017 में ‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम की शुरुआत करना उनके लिए सम्मान की बात थी जिसका मकसद पाठकों को वैश्विक मामलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना था. उन्होंने उन लगभग पांच लाख सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने वर्षों तक उनकी रिपोर्टिंग को पढ़ा और सराहा. वॉशिंगटन पोस्ट ने बड़ी संख्या में छंटनियों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है. अखबार ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके साथ ही कई विदेशी ब्यूरो और बुक कवरेज सेक्शन पर भी ताला लग गया है. सबसे चौंकाने वाला फैसला मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की पूरी रिपोर्टिंग टीम और संपादकों को हटाना रहा. पूर्व संपादकों ने की आलोचना अखबार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस कदम को "खुद ब्रांड का खात्मा करना" करार दिया है. वहीं वर्तमान प्रबंधन का कहना है कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालने के लिए यह "दर्दनाक लेकिन जरूरी" फैसला था. काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर और युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली लिजी जॉनसन जैसी दिग्गज पत्रकारों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. वहीं पत्रकारिता के शिक्षाविदों और पूर्व कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि ये कटौतियां दुनिया के सबसे प्रभावशाली न्यूजरूम्स में से एक को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती हैं. काहिरा ब्यूरो प्रमुख क्लेयर पार्कर ने एक्स पर बताया कि उन्हें अख़बार की पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम के साथ नौकरी से निकाल दिया गया है. उन्होंने इस फैसले को “समझ से परे” बताया. वहीं लिजी जॉनसन जिन्होंने हाल ही में युद्ध क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में यूक्रेन से रिपोर्टिंग की थी ने भी पुष्टि की कि उन्हें भी नौकरी से हटा दिया गया है. पूरे पत्रकारिता जगत में इस फैसले को लेकर गुस्सा और हैरानी देखने को मिली. द अटलांटिक में लिखे एक लेख में वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐश्ले पार्कर ने चेतावनी दी कि लगभग 150 वर्षों से अमेरिकी लोकतंत्र का स्तंभ रहे इस अखबार की मौजूदा दिशा उसकी विरासत को गंभीर खतरे में डाल रही है. एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने इस फैसले को “दर्दनाक लेकिन ज़रूरी” बताया. उन्होंने स्टाफ से कहा कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार ढलने के लिए संगठन हर किसी के लिए सब कुछ नहीं बन सकता. कंपनी की बैठक के बाद कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनके भविष्य के बारे में बताया गया.   

स्पेस वॉर की तैयारी? विशालकाय अंतरिक्ष युद्धपोत पर काम कर रहा चीन, जानिए इसकी ताकत

बीजिंग  चीन ने दुनिया के सामने एक ऐसी कल्पना पेश की है जिसे अब तक सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों में ही देखा गया था. बीजिंग ने ‘लुआननियाओ’ नाम के एक विशाल अंतरिक्ष विमान वाहक (Space Aircraft Carrier) का खाका तैयार किया है. यह प्रोजेक्ट चीन के ‘नांतियानमेन’ या ‘साउथ हेवनली गेट’ मिशन का हिस्सा है. दावा किया जा रहा है कि यह भविष्य का युद्धपोत होगा. यह पृथ्वी के वायुमंडल की सीमा पर रहकर पूरे ग्रह पर नजर रख सकेगा. चीन के सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो के मुताबिक लुआननियाओ एक विशाल ग्रे रंग का त्रिकोणीय जहाज होगा. इसकी लंबाई 242 मीटर और चौड़ाई 684 मीटर बताई जा रही है. इसका वजन लगभग 1,20,000 टन होगा जो आज के किसी भी आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर से बहुत ज्यादा है. यह स्पेस कैरियर 88 ‘शुआन नू’ मानवरहित लड़ाकू विमानों को अपने साथ ले जाने में सक्षम होगा. ये जेट इतने एडवांस होंगे कि वे स्टील्थ तकनीक से लैस होकर हाइपरसोनिक मिसाइलें दाग सकेंगे. क्या चीन अंतरिक्ष में अमेरिका को मात देगा? डिफेंस एक्सपर्ट पीटर लेटन का कहना है कि अगर चीन इसे बनाने में सफल रहा तो यह दुनिया की हर डिफेंस सिस्टम को फेल कर देगा. यह विमान वाहक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और मौजूदा फाइटर जेट्स की पहुंच से बहुत ऊपर होगा. यह सीधे टारगेट के ऊपर जाकर हमला कर सकता है. इससे चीन को ताइवान और साउथ चाइना सी में अमेरिका के खिलाफ बड़ी बढ़त मिल सकती है. चीन अपनी रॉकेट और सैटेलाइट तकनीक पर भारी निवेश कर रहा है जो अमेरिका की चिंता बढ़ा रहा है. क्या यह सिर्फ एक चीनी प्रोपेगेंडा है? इतनी बड़ी योजना के बावजूद दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसे लेकर काफी संशय में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस जहाज को पृथ्वी की कक्षा में भेजने या हवा में टिकाए रखने के लिए जिस प्रोपल्शन सिस्टम और ईंधन की जरूरत है वह फिलहाल मौजूद नहीं है. इसे ऑर्बिट में भेजने के लिए चीन को एलन मस्क की स्पेसएक्स जैसे रियूजेबल रॉकेट चाहिए. चीन अभी ऐसी तकनीक विकसित करने से कम से कम 10 से 15 साल दूर है. कई लोग इसे चीन का एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ मान रहे हैं. साउथ हेवनली गेट प्रोजेक्ट क्या है? यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं है. इसमें ‘बैदी’ जैसे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी शामिल हैं जो अंतरिक्ष के करीब जाकर ऑपरेट कर सकते हैं. चीन ने 2024 के विमानन मेले में इसका मॉडल भी दिखाया था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन ऐसी घोषणाएं अपनी जनता को प्रेरित करने और पड़ोसी देशों को अपनी ताकत दिखाने के लिए करता है. यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हो सकता है जिससे चीन खुद को दुनिया का सबसे एडवांस सैन्य पावर साबित करना चाहता है. हवा में ही खत्म हो जाएंगे दुश्मन के सारे रडार? चीन का यह फ्लाइंग  स्पेस रेस में चीन की मौजूदा स्थिति क्या है? भले ही लुआननियाओ अभी एक कल्पना जैसा लगे लेकिन चीन के हालिया मिशन हकीकत हैं. 2024 में चीन के ‘चांग-ई-6’ मिशन ने चंद्रमा के सबसे दूर वाले हिस्से से नमूने लाकर इतिहास रचा था. अब चीन ‘चांग-ई-7’ के जरिए चांद पर पानी खोजने की तैयारी में है. अमेरिका की रफ्तार जहां कुछ धीमी पड़ी है वहीं चीन लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. लुआननियाओ का सपना साकार होने में भले ही 20-30 साल लगें लेकिन इसने भविष्य की जंग का खाका जरूर खींच दिया है.

यूरोप में बढ़ी सख्ती, ऑस्ट्रेलिया के बाद स्पेन और ग्रीस भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगा सकते हैं बैन

मैड्रिड  ऑस्ट्रेलिया के बाद अब स्पेन और ग्रीस भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच पर प्रतिबंध लगा दिया था, और अब यूरोप में भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल रही है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने कहा कि उनका देश 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हानिकारक कंटेंट जैसे पोर्नोग्राफी और हिंसा से बचाने के लिए सोशल मीडिया बैन करना चाहता है। वहीं ग्रीस भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर सकता है। स्पेन और ग्रीस की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कई देश सोशल मीडिया को एडिक्टिव और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं। यूरोप में ब्रिटेन और फ्रांस भी सोशल मीडिया पर सख्त रुख अपनाने की दिशा में हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है। स्पेन के इस प्रस्ताव पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के मालिक एलन मस्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।  मस्क ने प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ को सोशल मीडिया पर अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया और उन्हें “तानाशाह” करार दिया। मस्क ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और सरकार के इस कदम का विरोध किया। हाल के समय में AI-जेनरेटेड कंटेंट और बिना सहमति के यौन छवियों के निर्माण की रिपोर्टों ने सोशल मीडिया के जोखिमों को उजागर किया है। विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़ी घटनाओं ने सरकारों को सख्त नियमों की तरफ प्रेरित किया है। इस पूरे विवाद में बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच बहस और तेज हो गई है।

भारतीय नौसेना की शान: INS विक्रांत 60 साल बाद अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में, ताकत का दिखावा

नई दिल्ली भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक पल आने वाला है. भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत 18 फरवरी 2026 को इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में हिस्सा लेगा. यह रिव्यू बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के तट पर होगा. लगभग 60 साल बाद कोई भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर फ्लीट रिव्यू में दिखेगा – पिछली बार 1966 में मूल INS विक्रांत ने ऐसा किया था. IFR 2026 क्या है? IFR एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नौसेना कार्यक्रम है, जहां दुनिया की कई नौसेनाएं अपने युद्धपोतों के साथ जमा होती हैं. यह मैरीटाइम डिप्लोमेसी का माध्यम है. भारत ने 137 से ज्यादा देशों को निमंत्रण भेजा है. 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लेने की पुष्टि की है.     मुख्य दिन: 18 फरवरी 2026 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर) फ्लीट की समीक्षा करेंगी. वे INS सुमेधा (स्वदेशी नेवल ऑफशोर पेट्रोल वेसल) से रिव्यू करेंगी, जिसे इस बार प्रेसिडेंट्स यॉट बनाया गया है.     अन्य कार्यक्रम: 15 से 25 फरवरी तक MILAN 2026 (मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज) और IONS (Indian Ocean Naval Symposium) चीफ्स कॉनक्लेव भी होंगे. INS विक्रांत क्यों सबसे बड़ा आकर्षण? आईएनएस विक्रांत भारत का पहला घरेलू एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह 45,000 टन का है. लंबाई 262.5 मीटर, चौड़ाई 61.6 मीटर. 1600 से ज्यादा लोग इसमें काम करते हैं (महिला अधिकारी भी शामिल).     हवाई जहाज: MiG-29K फाइटर जेट, MH-60R रोमियो हेलीकॉप्टर (अमेरिका से), Chetak, Sea King, Kamov-31 आदि. फ्रांस से 26 Rafale-M नेवल फाइटर आने वाले हैं, जो इसकी ताकत बढ़ाएंगे.     डिफेंस सिस्टम: 2 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (64 Barak-8 मिसाइलें), 4 OTO Melara 76 mm गन, 4 CIWS (क्लोज-इन वेपन सिस्टम).     क्षमता: एंटी-सबमरीन वारफेयर, एंटी-शिप अटैक, एयर डिफेंस, सर्वेलेंस, सर्च एंड रेस्क्यू. इसे फ्लोटिंग एयरफील्ड कहा जाता है. ऑपरेशन सिंदूर में विक्रांत ने कमाल दिखाया: 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान अरब सागर में तैनात होकर पाकिस्तानी नौसेना को बेस से बाहर आने से रोका. इससे कैरियर बैटल ग्रुप की ताकत साबित हुई. अब IFR में यह दुनिया को भारत की समुद्री शक्ति दिखाएगा. अन्य स्वदेशी जहाज भी होंगे शामिल     नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स (प्रोजेक्ट 17A) – स्टेल्थ फ्रिगेट्स, 1980 के बाद पहली बार फ्लीट रिव्यू में.     विशाखापत्तनम- क्लास डेस्ट्रॉयर, अर्नाला-क्लास ASW कॉर्वेट्स आदि. भारत की फ्लीट रिव्यू की परंपरा     1953: पहला फ्लीट रिव्यू (बॉम्बे में).     1966: मूल INS विक्रांत ने हिस्सा लिया.     2001: पहला IFR (मुंबई में).     2016: दूसरा IFR (विशाखापत्तनम में, थीम United Through Oceans).     2026: तीसरा IFR – अब भारत बिल्डर नेवी बन चुका है, जहां स्वदेशी जहाजों पर जोर है. IFR 2026 भारत की मैरीटाइम पावर, आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक में नेतृत्व को दिखाएगा. यह दोस्ताना नौसेनाओं के साथ सहयोग बढ़ाएगा और डिटरेंस (रोकथाम) का संदेश देगा.

भारतीय शोधकर्ताओं की खोज: बैक्टीरिया की मदद से मंगल की मिट्टी से बनेगी मजबूत ईंट, अंतरिक्ष मिशनों में मदद

बैंगलोर अंतरिक्ष यानी स्पेस सेक्टर में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस लिस्ट में अब एक और गर्व की बात जुड़ गई है. पिछले साल इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन जाकर लौटने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर में एक नई और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक ऐसी रिसर्च की है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बना सकती है. यह स्टडी इस बात पर फोकस है कि क्या मंगल ग्रह की मिट्टी से ही वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स यानी इमारतें बनाने का सामान जैसे- ईंट, सीमेंट आदि तैयार की जा सकती है. इस रिसर्च का मकसद सीमेंट जैसी कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधानों पर निर्भरता को मंगल ग्रह के साथ-साथ पृथ्वी पर भी कम करना है. इस रिसर्च जर्नल को PLOS One में पब्लिश किया गया है. शुभांशु शुक्ला फिलहाल IISc में मास्टर डिग्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य की मंगल यात्राओं में अगर हमें सड़कें, लैंडिंग पैड या रोवर के लिए मजबूत ज़मीन चाहिए, तो वहां की मिट्टी का ही इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका होगा. इससे पृथ्वी से भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेही और मिशन ज्यादा टिकाऊं हो पाएंगे. रिसर्च में इस्तेमाल हुआ खास बैक्टीरिया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर ईंट जैसा स्ट्रक्चर बना सकते हैं. पहले के एक्सपेरीमेंट्स में Sporosarcina pasteurii नाम का बैक्टीरिया यूज़ किया गया था. इस बार टीम ने बेंगलुरु की मिट्टी से मिला एक ज्यादा मजबूत बैक्टीरिया चुना, जिससे बायोसीमेंटेशन का प्रोसेस बेहतर हो सके. हालांकि, मंगल ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले परक्लोरेट नाम के जहरीले केमिकल ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी. जब बैक्टीरिया को सिर्फ परक्लोरेट के संपर्क में लाया गया, तो वो तनाव में आ गए और धीरे-धीरे बढ़ने लगे, आपस में चिपकने लगे. लेकिन जब वही बैक्टीरिया ईंट बनाने वाले जरूरी तत्वों के साथ मौजूद थे, तो उसके रिजल्ट्स काफी चौंकाने वाले निकले. रिसर्च की पहली ऑथर यानी लेखिका स्वाति दूबे के अनुसार, इस स्थिति में बैक्टीरिया एक खास तरह का मैट्रिक्स छोड़ते हैं, जो कमजोर बैक्टीरिया तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. इससे ईंट बनने का प्रोसेस और मजबूत हो जाता है. अब वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को मंगल जैसे वातावरण में, खासकर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वाली परिस्थितियों में टेस्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये प्लानिंग सफल रही, तो यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ मंगल पर कंस्ट्रक्शन वर्क करने में मदद करेगी, बल्कि पृथ्वी पर भी पर्यावरण के अनुकूल एक अच्छा विकल्प बन सकती है.

अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया, तो क्या होगा देश की इकॉनमी का भविष्य?

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन गई है. इसके साथ ही अमेरिका ने भारत टैरिफ की दर घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. पहले यह दर कुल 50 फीसदी था. इसमें 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीद के कारण 25 फीसदी पेनाल्टी थी. अमेरिका के साथ इस डील पर सहमति से चंद दिनों पहले 27 जनवरी को ही भारत और ईयू के बीच ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत-ईयू ट्रेड डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. इसके बाद अमेरिका के साथ डील पर बनी सहमति को फादर ऑफ ऑल डील कहा जा रहा है. ऐसे अब दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमी यानी चीन के साथ भी ट्रेड के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की रिपोर्ट आई है. ऐसे में एक सहज सवाल यह है कि अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड डील हो जाए तो क्या होगा? इस सवाल का जवाब अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ डील में छिपा है. इन दोनों के साथ भारत का व्यापार हमारे के पक्ष में था. यानी भारत अमेरिका और यूरोपीय यूनियन दोनों को आयात से ज्यादा निर्यात करता है. इस कारण इन पक्षों ने भारत के साथ ट्रेड डील करने को अहमियत दी. उनको भारत के साथ डील के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन चीन के साथ स्थिति उलट है. भारत चीन से आयात बहुत ज्यादा और निर्यात बहुत कम करता है. ऐसे में अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की तरह यहां भारत के पाले में गेंद है. भारत को कोशिश करनी चाहिए कि अपनी शर्तों पर वह चीन को ट्रेड डील करने पर मजबूर करे. 155.6 अरब डॉलर तक पहुंचा व्यापार दरअसल, भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने मंगलवार को चीनी नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है. यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बढ़ते बदलावों और अस्थिरता के बीच आया है, जहां कई अर्थव्यवस्थाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं. राजदूत ने कहा कि व्यापार में यह वृद्धि भारत-चीन संबंधों में सुधार के स्पष्ट संकेत हैं. खासकर नियंत्रण रेखा पर चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के समाप्त होने के बाद. भारत से चीन को निर्यात 9.7 फीसदी बढ़ा उन्होंने कई सकारात्मक चीजों का जिक्र किया. भारत से चीन को निर्यात में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 20,000 भारतीय तीर्थ यात्री शामिल हुए. चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल हो गई हैं, जिससे लोगों के बीच आवाजाही बढ़ेगी. जू फेइहोंग ने कहा कि अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को रीसेट और फ्रेश स्टार्ट किया. उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी और विकास के अवसर हैं. चीनी राजदूत ने भारत की इस वर्ष ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया और कहा कि चीन ब्रिक्स के माध्यम से बहुपक्षीय समन्वय मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है. हालांकि, व्यापार में यह रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत की ओर से कुछ चिंताएं बनी हुई हैं. द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन बना हुआ है, जहां चीन का निर्यात भारत की तुलना में काफी अधिक है. भारतीय पक्ष ने चीन के बाजारों में पर्याप्त पहुंच की कमी, खासकर उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई है. 116 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जो रिकॉर्ड स्तर का है. चीनी राजदूत ने कहा कि उनका देश कभी जानबूझकर व्यापार अधिशेष नहीं बनाता. चीन न केवल विश्व का कारखाना बल्कि विश्व का बाजार भी बनना चाहता है. चीन का टैरिफ स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम (7.3 फीसदी) है, विदेशी निवेश की नेगेटिव लिस्ट छोटी हो रही है और वीजा-फ्री नीति का विस्तार हो रहा है. उन्होंने भारतीय कंपनियों को चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने की सलाह दी, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय उत्पाद चीनी बाजार में पहुंच सकें और व्यापार घाटा सहयोगात्मक अधिशेष में बदल सके. 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध छह दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. अक्टूबर 2024 में एलओसी पर गतिरोध समाप्त होने के बाद से कई कदम उठाए गए हैं, जैसे सीमा विवाद को सुलझाना और संबंधों को सामान्य बनाना.

नड्डा का बड़ा बयान: भारत का आर्थिक जगत नए युग में, सुधारों से बदल रही तस्वीर

नई दिल्ली राज्यसभा में बोलते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विकसित भारत 2047 तक पहुंचने के लिए आज 2026 में क्या करना है और अगले पांच सालों में क्या कार्रवाई की जाएगी, इसके रोड मैप को राष्ट्रपति के अभिभाषण में इंगित किया गया है। वह बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरीके से आर्थिक जगत में क्रांति पर क्रांति आती चली गई है। पहले यूरोपीय यूनियन के साथ हमारा समझौता, फिर आर्थिक सर्वे, उसके बाद क्रांतिकारी बजट और फिर इंडो-यूएस डील। एक के बाद एक श्रृंखला में हमको ऐसा देखने को मिला है। जेपी नड्डा ने कहा कि आर्थिक सर्वे की बात करूं तो इसमें बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि यह सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के चीफ ने कहा है कि भारत ग्लोबल ग्रोथ में 20 प्रतिशत का योगदान देगा। उन्होंने कहा कि यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के चीफ ने कहा है। उन्होंने कहा कि हमारा यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है। यह एग्रीमेंट भारतीय व्यवसायियों, कारीगरों, उद्यमियों और आईटी सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए नए दरवाजे खोलने वाला है। यह एग्रीमेंट भारतीय लोगों के लिए 27 देशों का दरवाजा खोलने वाला है। इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील' कहा गया है। उन्होंने इसे रोजगार बढ़ाने वाला कदम बताया। जेपी नड्डा ने सदन में इंडिया और ओमान के बीच हुए समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता मध्यपूर्व रणनीतिक ऊर्जा और व्यापार के एक कॉरिडोर के रूप में हासिल किया गया है। उन्होंने बताया कि हमने लिंक वेस्ट नीति को और मजबूत किया है। यहां उन्होंने इंडिया-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे किसानों के लिए लाभकारी है। यह हमारे उद्यमियों को नई दिशा देगा। छात्रों के लिए नए गंतव्य खोलेगा। यह महिलाओं के विकास में सहायक होगा और नई संभावनाओं को तलाशेगा। जेपी नड्डा ने इंग्लैंड के साथ हुए फ्री ट्रेड समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए और उद्यमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज करते हुए कहा कि आप कहते थे गरीबी हटाओ, लेकिन यह नारा देते-देते आपने मिडिल मैन पैदा किए और मिडिल मैन के माध्यम से भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि आपने गरीबों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। न उनको घर दिया, न उनके रहने की व्यवस्था की, न उनके लिए बैंक खाते खुलवाए, न गैस की व्यवस्था की। यह सब व्यवस्था नरेंद्र मोदी सरकार ने की है। आज देश में 25 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ चुके हैं। हमने गरीब लोगों का आज सुदृढ़ीकरण किया। उनके लिए पक्के घर बनाएं। अभी तीन करोड़ घर और बनाए जाएंगे। साढ़े 12 करोड़ लोगों को पेयजल का कनेक्शन दिया, 10 करोड़ को गैस कनेक्शन दिया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। नड्डा ने बताया कि 6 लाख 75 हजार करोड़ रुपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से लोगों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ कवरेज देश बन चुका है। 62 करोड़ लोगों को आज हम गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए 5 लाख रुपए तक का बीमा देते हैं। गरीब आदमी अब आयुष्मान कार्ड लेकर अस्पताल में जाता है और अपनी बीमारियों का निशुल्क उपचार करवाता है। उन्होंने कहा कि पहले हालात यह थे कि बुजुर्ग आर्थिक तंगी के कारण अपना उपचार तक नहीं करवा पाते थे, लेकिन आज बुजुर्ग निश्चिंत होकर अपना उपचार करवाते हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि आज कैंसर का पता लगने पर 90 प्रतिशत लोगों का उपचार तीस दिन के भीतर शुरू हो जाता है।

राहुल गांधी पर बीजेपी का वार, कहा– ऐसी राजनीति से लोकतंत्र होता है कमजोर

नई दिल्ली भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर सदन में शोर करने और कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर हुआ। राहुल गांधी ने समझ लिया कि ये कांग्रेस पार्टी का दफ्तर है। देश के खिलाफ बोलना कभी सकारात्मक सोच का काम नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में देश के खिलाफ एक साजिश के तहत ये हुआ है।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नाटक करने वालों का अड्डा बन गई है। जैसे नाटक में झूठ और भ्रम फैलाए जाते हैं, वही काम राहुल गांधी कर रहे हैं। यह एक ऐसा काम है, जो लोकतंत्र को शर्मसार करता है। राहुल गांधी सोचते हैं कि संसद कांग्रेस पार्टी का ऑफिस है और इस बिल्डिंग में हमारे अलावा कोई और राज नहीं कर सकता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस लेटर पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। मंत्री रिजिजू ने कहा, "मैंने इसका जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा था कि वह नियमों के बाहर बोलेंगे। हमने दो दिन इंतजार किया, लेकिन दूसरों को भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। वह मनमाने ढंग से नहीं बोल सकते। यह भारत की संसद है, यहां नियमों के अनुसार ही बोलना पड़ता है।" भाजपा सांसद अरुण गोविल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "उनके व्यवहार की जितनी निंदा की जाए कम है। इस तरह का व्यवहार अगर एक सांसद करे तो बहुत शर्मनाक है। राहुल गांधी सदन में क्या बोलते हैं और कैसे व्यवहार करते हैं, उनको खुद नहीं पता होता है।" भाजपा सांसद शशांक मणि ने 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन पर कहा, "उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने संसद की मर्यादा का हनन किया। जो उन पर कार्रवाई की गई है, वो सही है। इस प्रकार से कोई और भी हंगामा करेगा तो मुझे पूरा विश्वास है कि अध्यक्ष इस प्रकार की कार्रवाई करेंगे।" भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, "कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद हैं। जिस तरह से राहुल गांधी और उनके समर्थक गठबंधन ने बर्ताव किया, वह एक ऐसा काम है, जो संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।"

मणिपुर में लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी, राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की अधिसूचना जारी

नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। यह फैसला 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर राज्य में 13 फरवरी 2022 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को वापस ले लिया है। इस आदेश के साथ ही राज्य में केंद्रीय शासन की व्यवस्था समाप्त हो गई है।

एशिया पर फोकस: पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा से बढ़ेंगे रिश्ते, महत्वपूर्ण समझौतों के संकेत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7-8 फरवरी 2026 को मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम ने आमंत्रित किया है। यह प्रधानमंत्री की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिए जाने के बाद पहली यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ ही 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम भी आयोजित किया जाएगा। भारत और मलेशिया ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक मित्रता साझा करते हैं। मलेशिया में 29 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति से यह संबंध और भी मजबूत होता है, जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है। भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी और विकसित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा दोनों नेताओं के लिए व्यापार और निवेश, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग से लेकर डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, और जन-संबंधों तक फैले द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही पारस्परिक लाभ के लिए भविष्य में होने वाले सहयोग की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर देती है।

परमाणु हथियारों पर कंट्रोल खत्म! 5 फरवरी को खत्म हो रही NEW START डील से क्यों डर रही दुनिया

नई दिल्ली अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों पर लगी जो आखिरी बड़ी पाबंदी थी, वह 5 फरवरी को खत्म होने वाली है। ऐसा पहली बार होगा जब दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों पर कोई कानूनी लगाम नहीं रहेगी। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर यह न्यू स्टार्ट संधि क्या है, जिसकी वजह से दुनिया फिर से परमाणु हथियारों की खतरनाक दौड़ में फंसती दिख रही है। चलिए जानते हैं कि इस समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए थे और इसमें क्या-क्या प्रावधान हैं।   न्यू स्टार्ट संधि पर 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (जो उस समय व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी थे और रूस के राष्ट्रपति का एक कार्यकाल पूरा कर चुके) ने हस्ताक्षर किए थे। उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों में नई शुरुआत हो रही थी। यह संधि 2011 में लागू हुई। इस समझौते में सामरिक परमाणु हथियारों ( Strategic Nuclear Weapons) पर सख्त सीमाएं तय की गईं। ये वे हथियार हैं जो परमाणु युद्ध में दोनों पक्ष एक-दूसरे के महत्वपूर्ण राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक केंद्रों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। संधि में शॉर्ट नोटिस पर मौके पर निरीक्षण ( On Site Inspections) की व्यवस्था है, ताकि दोनों पक्ष यह सुनिश्चित कर सकें कि दूसरा पक्ष संधि का पालन कर रहा है। लेकिन 2023 में यूक्रेन युद्ध में अमेरिका के समर्थन के कारण रूस ने अपनी भागीदारी निलंबित कर दी। इससे निरीक्षण रुक गए, और दोनों पक्षों को एक-दूसरे की गतिविधियों के बारे में केवल अपने खुफिया आकलन पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि, दोनों ने कहा कि वे संधि की संख्यात्मक सीमाओं का पालन जारी रखेंगे, जो अब तक लागू हैं। संधि की अवधि क्यों नहीं बढ़ाई जा रही? संधि में स्पष्ट है कि इसे केवल एक बार बढ़ाया जा सकता है (5 साल के लिए) और यह बढ़ोतरी 2021 में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनते ही हो चुकी है। संधि अब 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। पिछले साल सितंबर में पुतिन ने प्रस्ताव दिया था कि दोनों पक्ष अनौपचारिक रूप से एक और साल के लिए युद्धक हथियारों की सीमा का पालन करें। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि उन्होंने इसे अच्छा विचार बताया था, लेकिन बाद में कहा कि अगर खत्म होती है तो खत्म हो जाए। अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों? अब सवाल उठता है कि अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों है। दरअसल, कुछ लोग मानते हैं कि समझौता स्वीकार करने से हथियारों की होड़ रुक सकती है और आगे बातचीत के लिए समय मिलेगा। वहीं, अन्य का कहना है कि चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियारों को देखते हुए अमेरिका को अब इन सीमाओं से मुक्त हो जाना चाहिए, ताकि अपना शस्त्रागार मजबूत कर सके; वरना कमजोरी का संकेत जाएगा। संधि खत्म होने से क्या फर्क पड़ेगा? अगर मॉस्को और वाशिंगटन लंबी दूरी के परमाणु हथियारों पर आपसी सीमाओं का पालन बंद कर देते हैं, तो आधे से अधिक सदी पुराना हथियार नियंत्रण का दौर खत्म हो जाएगा। कोई उत्तराधिकारी संधि नहीं बनी है, जिससे खालीपन पैदा हो गया है। विशेषज्ञ चिंतित हैं कि इससे परमाणु जोखिम बढ़ सकता है, खासकर यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के कारण बढ़े तनाव में। संधियां सिर्फ संख्याएं सीमित नहीं करतीं, बल्कि हथियारों की अनियंत्रित दौड़ रोकने के लिए पारदर्शी ढांचा भी प्रदान करती हैं। संधि न होने पर दोनों पक्ष क्या कर सकते हैं? दोनों को अपनी मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक युद्धक हथियार तैनात करने की आजादी मिल जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और रसद चुनौतियों के कारण यह रातोंरात नहीं होगा, बड़े बदलाव में कम से कम एक साल लग सकता है। लंबे समय में चिंता यह है कि अनियंत्रित हथियारों की दौड़ शुरू हो जाएगी, जहां दोनों पक्ष दूसरे की योजनाओं के सबसे खराब परिदृश्य पर आधारित हथियार बढ़ाते रहेंगे। नई संधि के लिए क्या शर्तें होंगी? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि उन्हें एक नई, बेहतर संधि चाहिए, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। नई संधि में अल्प और मध्यम दूरी के हथियार, रूस की नई प्रणालियां (जैसे बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल और पोसाइडन टॉरपीडो) को भी शामिल करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इसमें कौन शामिल होगा, इस पर सहमति नहीं है। ट्रंप रूस और चीन दोनों के साथ निरस्त्रीकरण चाहते हैं, लेकिन चीन कहता है कि उनके शस्त्रागार रूस से कई गुना छोटे हैं, इसलिए बातचीत अवास्तविक है। रूस ब्रिटेन और फ्रांस (नाटो सदस्य) की परमाणु शक्तियों को भी शामिल करने की मांग करता है, जिसे वे ठुकराते हैं।  

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची ममता की पीड़ा: SIR केस में CJI से कहा— ‘हमें कहीं इंसाफ नहीं’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। 'बार एंड बेंच' वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। 'मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा' सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ''मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।  

जाति जनगणना पर उहापोह के बीच केंद्र का खुलासा—मंत्री बोले, तय प्रक्रिया से आएंगे प्रश्न

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के तहत जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जनगणना के साथ-साथ जाति गणना कराने के अपने इरादे को जताते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जनगणना की प्रक्रिया परंपरागत रूप से दो चरणों में पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO)का काम संपन्न होगा। इसके तहत इस चरण में हर घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति, सुविधाएं और बुनियादी ढांचा जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।। राय ने बताया कि सरकार ने मतगणना के इस चरण से जुड़े प्रश्नों को 22 जनवरी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस चरण के बाद दूसरा चरण- जनसंख्या गणना (Population Enumeration – PE) का होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी चरण में जाति की गणना भी की जाएगी। जाति गणना पर राज्यों की मांग गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर कई राज्यों और संगठनों से सुझाव और मांगें मिली हैं, जिनमें तमिलनाडु राज्य की ओर से भेजे गए अभ्यावेदन भी शामिल हैं। उन्होंने उन मांगों और जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए कहा कि दूसरे चरण के लिए प्रश्नावली, जिसमें जाति से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे, जनगणना शुरू होने से पहले तय कर अधिसूचित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और स्थापित प्रक्रिया के तहत होगी। क्या है खास बात? दरअसल, लंबे समय से जाति आधारित जनगणना को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है क्योंकि जाति जनगणना को लेकर नीति और तकनीकी मैकेनिज़्म अभी तक अंतिम रूप में सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों और न्यायालय ने भी कहा है कि डेटा की सत्यता और भरोसेमंद रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जांच-प्रक्रियाएँ बनानी होंगी। बहरहाल, जनगणना 2027 में जाति को शामिल करने की पुष्टि को एक अहम नीतिगत कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों को दिशा मिल सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दूसरे चरण की प्रश्नावली में जाति से जुड़े सवाल किस स्वरूप में रखे जाते हैं। 2027 की जनगणना 16वें राष्ट्रीय सर्वेक्षण के रूप में होगी। हिमालयी और बर्फ़ीले इलाकों में पहले चरण की गिनती 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि बाकी देश में मुख्य गणना 1 मार्च 2027 से रेफरेंस डाटा के साथ शुरू होगी। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लोगों को अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।  

शपथ ग्रहण समारोह संपन्न: युमनाम खेमचंद सिंह बने मुख्यमंत्री, दो डिप्टी सीएम ने भी ली शपथ

मणिपुर हिंसाग्रस्त मणिपुर को लंबे राष्ट्रपति शासन के बाद अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है। मार्शल आर्ट के धुरंधर मैतेई समुदाय के युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर आज शपथ ली। इससे पहले आज उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।   वहीं, भाजपा विधायक नेमचा किपगेन ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। किपगेन कुकी समुदाय से हैं। इसके अलावा, नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल डिखो ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। भाजपा के गोविंदास कोंथौजम और एनपीपी केके लोकेन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से डिजिटल माध्यम से शपथ ली। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद ने क्या कहा? मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद खेमचंद ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, मणिपुर विकसित भारत 2047 में अहम भूमिका निभाएगा। मणिपुर में 36 समुदाय हैं और हम राज्य में शांतिपूर्ण माहौल लाने की उम्मीद करते हैं।  भाजपा विधायक दल की बैठक में क्या हुआ? विधायक दल की मंगलवार को बैठक हुई, जिसमें खेमचंद (62 वर्षीय) को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी मुख्यालय में भाजपा विधायक दल की डेढ़ घंटे बैठक चली, जिसमें खेमचंद के नाम पर सहमति बनी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, पर्यवेक्षक तरुण चुघ की उपस्थिति में भाजपा मुख्यालय में विस्तार से हुई विधायक दल की बैठक में कई नामों पर विचार हुआ था।    बीरेन सिंह की पसंद को नहीं मिली तवज्जो चर्चा थी कि कुकी बनाम मैतेई समुदाय के बीच संतुलन साधने के लिए नई सरकार में कुकी समुदाय को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के मामले में लिए गए निर्णय से साफ था कि पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की पसंद को तवज्जो नहीं मिली। बीरेन सात बार के विधायक मैतेई समुदाय के ही गोविंद दास को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुकी बनाम मैतेई में खूनी संघर्ष के बीच बीरेन ने कई बार केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना की। हालांकि, बीरेन को राज्यसभा भेजने का आश्वासन दिया गया है। नए सीएम के सामने बड़ी चुनौती मणिपुर में अगले साल मार्च में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नए सीएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई बनाम कुकी संघर्ष के बीच ऐसा संतुलन साधना है, जिससे विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान न हो। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनाव से पहले मणिपुर में जमीनी स्तर पर शांति बहाली हो। उल्लेखनीय है कि मणिपुर में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था। मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा को संभालने को लेकर आलोचनाओं के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। मणिपुर विधानसभा का 12वीं विधानसभा का सातवां सत्र 6 फरवरी से शुरू होने की संभावना है। 

सियासत से सीधे अदालत तक: ममता बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की पैरवी को तैयार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

रेल नेटवर्क विस्तार के लिए हिमाचल को केंद्रीय बजट में 2,911 करोड़ रुपये आवंटित

शिमला  केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश को 2 हजार 911 करोड़ रूपए दिए गए हैं। यह राशि पूर्व में केंद्र में रही कांग्रेस सरकार द्वारा दी गई राशि से 27 गुना अधिक है। यह जानकारी आज केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल में 17 हजार 711 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जिससे राज्य में न केवल रेल नेटवर्क बेहतर होगा बल्कि आम लोगों को भी सफर में आसानी रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य में नई रेल लाइनों, रेलवे स्टेशनों को बेहतर बनाने और सुरक्षा पर बड़ी मात्रा में निवेश किया जा रहा है।  अमृत स्टेशन योजना का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के चार स्टेशनों को अमृत स्टेशन योजना में शामिल किया गया है। इस पर 46 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं जबकि बैजनाथ-पपरोला तथा अंब अंदौरा रेलवे स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए राज्य में एक जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस भी चलाई जा रही है। रेल नेटवर्क के विस्तार और विद्युतीकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। वहीं 2014 से अब तक करीब 16 किमी. की रेल लाइनों का निर्माण भी हुआ है। इसके अलावा 26 फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए गए हैं। वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से रेल नेटवर्क के विस्तार में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे परियोजनाओं को जल्द पूरा करवाने में रेल मंत्रालय का सहयोग करें। 

महा-सुनवाई में CJI और ममता बनर्जी के बीच बहस, SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सीएम ममता बनर्जी ने खुद अदालत में अपनी बात रखने की कोशिश की. हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने बीच में ही उन्हें टोकते हुए कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही सभी दलीलें रख चुके हैं. बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी. चुनाव आयोग पर ममता के आरोप बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया. इस पर CJI ने साफ किया कि आपकी नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर हैं, लेकिन जो बातें आप कह रही हैं, वे आपके वकील पहले ही अदालत के सामने रख चुके हैं. वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जी सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट के लिए अब सिर्फ 11 दिन बचे हैं और यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है, जबकि इस मामले की सुनवाई के लिए केवल चार दिन का समय बचा है. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और लगभग 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत है. श्याम दीवान ने मांग की कि चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया. लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे वोटर लिस्ट में क्यों नहीं हैं. इस पर CJI ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक सामान्य सूचना नहीं है, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यह समय कृषि और त्योहारों का है, ऐसे में कई लोग अपने गृह जनपद से बाहर हैं. CJI ने सवाल किया कि जब बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें सामने आ रही हैं, तो असम जैसे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा. 'बंगाल को टारगेट किया जा रहा है' ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं. इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.” सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अदालत समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबिलियत पर पूरा भरोसा है और उन्होंने अपने लिए श्रेष्ठ वकील चुने हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है. CJI ने कहा कि चुनाव आयोग आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर अदालत के समक्ष आए. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को उपलब्ध ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा गया है. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के प्रति ‘होस्टिलिटी’ को लेकर लिखित आशंका जताई गई है. अदालत में क्या-क्या हुआ, यहां देखें ECI के वकील: 'मेरी इंस्ट्रक्शन यह थी कि सिर्फ स्पेलिंग की मामूली गलती पर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा.' CJI: 'राज्य का एग्जीक्यूटिव हेड भी आज यहां मौजूद है. क्या यह संभव नहीं कि राज्य बंगला भाषा के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए, जो समिति के साथ बैठकर स्थानीय उच्चारण और स्पेलिंग पर सलाह दें?' ममता बनर्जी: 'मैं इस पर सफाई दे सकती हूं, क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं.' CJI: 'इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वहीं से हैं.' ममता बनर्जी: 'बेंच का धन्यवाद कि मुझे बोलने की अनुमति दी गई. 'समस्या यह है कि वकील तब लड़ते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है. जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजों के पीछे रोता रहता है. मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया.'  'मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं. मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, मैं एक साधारण नागरिक हूं.' CJI: 'पश्चिम बंगाल सरकार ने भी याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट के सर्वश्रेष्ठ वकील राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं—कपिल सिब्बल, गोपाल और श्याम दीवान. हमारी मदद के लिए सर्वश्रेष्ठ लीगल टीम मौजूद है. 19 जनवरी को जब मामला आया था, तब श्री सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार और नागरिकों की समस्याएं बहुत स्पष्टता से रखी थीं. सभी मुद्दे चिन्हित हो चुके हैं. हर समस्या का समाधान होता है. हमें यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी निर्दोष नागरिक बाहर न रह जाए. 'सिर्फ तीन आधार ऐसे हैं, जिन पर किसी को आपत्ति नहीं होगी— पहला, दोषसिद्ध व्यक्ति. दूसरा, जो राज्य या देश से बाहर जा चुके हैं. तीसरा, गैर-नागरिक.'  लेकिन बंगाल में नामों का उच्चारण अलग तरीके से होता है. आजकल AI-आधारित रिकॉर्डिंग हो रही है. ऐसी तकनीकी या भाषाई गलती के कारण किसी असली नागरिक को बाहर नहीं किया जाना चाहिए. ECI: 'हमें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है. हमें यह भी नहीं पता कि असली समस्या क्या है. हमें जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाए.' CJI: 'आपको कॉपी इसलिए नहीं दी गई क्योंकि यह मामला पहली … Read more

लोकसभा में कामकाज प्रभावित, पीएम मोदी का भाषण हुआ टला, कार्यवाही कल तक स्थगित

नईदिल्ली  आज लोकसभा में भारी शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम लोकसभा को संबोधित करने वाले थे। लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते यह संबोधन नहीं हो सका। संसद के चालू बजट सत्र के दौरान लोकसभा में गतिरोध जारी है. लोकसभा में लगातार तीसरे दिन भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज शाम पांच बजे से लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देना था, लेकिन सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई और पीएम का संबोधन टल गया. हंगामे के कारण पीठासीन संध्या राय ने शाम पांच बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, पीपी चौधरी से बोलने के लिए कहा. विपक्षी सदस्य तख्तियां लेकर वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी. हंगामे के शोर में पीठासीन ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. वहीं, राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है. राज्यसभा में पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर स्टेटमेंट दिया. विपक्ष ने इस पर आपत्ति की और एक दिन पहले संसद के बाहर उनके बयान को लेकर सवाल उठाया. मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी की निंदा वाली किताबें लहराए जाने का मुद्दा उठाया.  इससे पहले, पीयूष गोयल जब ट्रेड डील पर जवाब दे रहे थे, तब भी सदन में विपक्षी सांसदों द्वारा लगातार हंगामा किया जा रहा था। लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें शांत कराने की पूरी कोशिश भी की, लेकिन वे शांत होने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। सरकार का दोहरा मापदंड, लोकतंत्र की हत्या: वेणुगोपाल कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "पिछले दो दिनों से लोकसभा में किस बात की लड़ाई चल रही थी? यही कि आप अनुच्छेद 349 के तहत किताब नहीं पढ़ सकते… यह नियमों के खिलाफ है और राहुल गांधी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। खुद स्पीकर ने इस पर व्यवस्था दी थी।" उन्होंने आगे कहा, "आज राहुल गांधी ने कहा, 'मैं किसी किताब या पत्रिका का हवाला नहीं दे रहा हूं; मैं बस बोलना चाहता हूं।' इसके बावजूद उन्हें बोलने नहीं दिया गया; एक सेकंड के भीतर ही उनका माइक बंद कर दिया गया। वहीं, दूसरी ओर, आज निशिकांत दुबे ने 5 मिनट तक किताबों और पत्रिकाओं का हवाला दिया, जो कि नियमों के खिलाफ है। यह सरकार का दोहरा मापदंड है। यह स्पष्ट रूप से लोकतंत्र की हत्या है।" सपा सांसद राजीव राय ने सरकार के कदम की आलोचना की, जानें क्या कहा सपा सांसद राजीव राय ने कहा, "सदन में नहरू जी, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी को भ्रष्टाचार, गद्दार कहा गया लेकिन माइक एक बार भी बंद नहीं हुआ अगर राहुल गांधी , अखिलेश यादव या विपक्ष का कोई भी नेता कुछ बोलता है तो एक सेकंड में माइक बंद किया जाता है। बिना उनकी मर्जी के माइक नहीं चलता है और लगातार निशिकांत दुबे को बोलने दिया गया। अगर यही लोकतंत्र है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण हैं।" सरकार नेता प्रतिपक्ष को किताब कोट नहीं करने दे रही-प्रियंका गांधी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "जब सरकार चाहती है कि कुछ व्यवधान करना है तो सरकार उन्हें(निशिकांत दुबे) को उठाती है। सरकार नेता प्रतिपक्ष को किताब कोट नहीं करने दे रहे हैं जो कि एक प्रकाशित किताब है। ये लोग कह रहे हैं कि यह नियम का उल्लंघन है। यह सरकार स्पष्ट दिखाना चाहती है कि इस संसद में केवल उन्हीं की चलती है। यह लोकतंत्र का अनादर है। यह संसद लोकतंत्र का मंदिर है और इसमें सभी की आस्था है।" लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में सत्ताधारी और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी बहस सूत्रों ने बताया कि आज लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में सत्ताधारी दल और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी बहस हुई है। देश की जनता सब देखती है- केंद्रीय मंत्री बी.एल वर्मा केंद्रीय मंत्री बी.एल वर्मा ने कहा, "सदन का हर सत्र महत्वपूर्ण होता है विशेष रूप से बजट सत्र और इसमें जिस तरह से विपक्ष हंगामा करके सदन में व्यवधान पैदा करना चाहता है, यह देश की जनता सब देखती है…यहां अपने विचारों को रखना चाहिए लेकिन उनके पास शोर मचाने के अलावा कुछ नहीं है…"

AMCA फाइटर जेट प्रोजेक्ट में HAL को मिली हार, पांचवीं पीढ़ी के विमान की रेस में बदलाव

बेंगलुरु  भारत का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है. यह भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है, जो पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस प्रतियोगिता से बाहर हो गई है, जबकि तीन प्राइवेट कंपनियां आगे निकल आई हैं. AMCA क्या है? मुख्य विशेषताएं AMCA एक ट्विन-इंजन, सिंगल-सीट वाला मल्टीरोल स्टेल्थ फाइटर है. इसकी खासियतें…      स्टेल्थ टेक्नोलॉजी: रडार से बहुत कम दिखाई देता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम. लंबी दूरी के हमले की क्षमता.     मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग: पायलट वाला जेट और ड्रोन साथ काम करेंगे.     सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के तेज स्पीड.     एडवांस्ड AESA रडार और अन्य हाई-टेक फीचर्स. यह भारतीय वायुसेना (IAF) का मुख्य लड़ाकू विमान बनेगा. 2030 के मध्य से शामिल होना शुरू होगा. शुरुआत में 120 जेट का ऑर्डर दिया जा सकता है. जो बाद में और बढ़ सकता है. HAL क्यों बाहर हुई? सात भारतीय कंपनियों/कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी. तकनीकी जांच के बाद सिर्फ तीन प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां क्वालीफाई हुईं. HAL की बोली खारिज हो गई. HAL का ऑर्डर बुक बहुत बड़ा (रेवेन्यू से कई गुना ज्यादा) था, जबकि नियमों में सीमा है. Tejas जैसे प्रोजेक्ट में देरी की वजह से सरकार HAL पर निर्भरता कम करना चाहती है. प्राइवेट सेक्टर को मौका देकर तेज विकास, बेहतर इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है. तीन प्राइवेट कंपनियां कौन हैं?     टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) — अकेले बोली लगाई.     लार्सन एंड टुब्रो (L&T) — BEL और Dynamatic Technologies के साथ कंसोर्टियम.     भारत फोर्ज (कल्याणी ग्रुप) — BEML और Data Patterns के साथ. ये तीनों अब एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ मिलकर काम करेंगी. इन्हें 5 फ्लाइंग प्रोटोटाइप और 1 स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन बनाने हैं. बजट और समयसीमा प्रोटोटाइप विकास के लिए ₹15,000 करोड़ का अनुमानित बजट.     प्रोटोटाइप रोलआउट: 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत.     पहली उड़ान: 2028-2029 के आसपास.     वायुसेना में शामिल होना: 2030 के मध्य से.     फाइनल विजेता: अगले 2-3 महीनों में (RFP के बाद कॉमर्शियल बिडिंग से L1 चुनकर). यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण? यह भारत के डिफेंस सेक्टर में बड़ा सुधार है. HAL का एकाधिकार टूट रहा है. प्राइवेट कंपनियां तेज और कुशल काम कर सकती हैं. इससे भारत की एयर पावर मजबूत होगी. चीन-पाक जैसे पड़ोसियों से बेहतर मुकाबला संभव होगा. AMCA सफल होने पर भारत चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो खुद 5वीं पीढ़ी का फाइटर बना सकते हैं.  

मणिपुर में सत्ता वापसी की पटकथा तैयार, राष्ट्रपति शासन हटते ही NDA का दावा, आज शपथ समारोह

इम्फाल पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से करीब एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने यह आदेश दिया है। इसके साथ ही वहां नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने वहां सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है। अब NDA विधायक दल के नेता वाई खेमचंद सिंह आज (बुधवार) शाम छह बजे मणिपुर के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। प्रदेश भाजपा ने यह जानकारी दी है। शपथ ग्रहण समारोह 'लोक भवन' में होगा, जहां सुबह से ही तैयारियां जारी हैं।   भाजपा की मणिपुर इकाई ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''वाई खेमचंद सिंह का मणिपुर के माननीय मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण समारोह आज यानी 4 फरवरी 2026 को शाम छह बजे लोक भवन में होगा।'' इसमें आगे कहा गया, ''उनके अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में मणिपुर शांति, विकास और सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, जिससे राज्य में स्थिरता और प्रगति का एक नया युग शुरू होगा।'' अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे अशांत मणिपुर में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू था। सिंह के नेतृत्व में राजग के प्रतिनिधिमंडल ने यहां लोक भवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। भल्ला से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में चुराचांदपुर और फेरजॉल के कुकी-जो बहुल जिलों के दो विधायक शामिल थे। सिंह को मंगलवार को नयी दिल्ली में भाजपा विधायक दल का नेता और उसके बाद राजग विधायक दल का नेता चुना गया।भाजपा विधायक थोंगबम बिस्वजीत ने पहले कहा था कि सिंह समेत पांच विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। मनोनीत मुख्यमंत्री खेमचंद मेइतेई समुदाय से हैं, जबकि उनके साथ शपथ ले ने जा रहे दोनों उप मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और लोसी दिखो, क्रमशः कुकी और नागा जनजातियों से हैं।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी! भारतीय रेलवे ने लॉन्च की 20 नई ट्रेनें, देखें रूट और टाइमिंग

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने बढ़ती यात्रा मांग और त्योहारों के सीजन को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है. 1 फरवरी 2026 से देश के अलग अलग प्रमुख रूटों पर 20 नई ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई है. नई ट्रेनों को लाॅन्च करने के वजह भीड़ कम करना और यात्रियों को कंफर्म सीट दिलाना है. इन ट्रेनों में अमृत भारत एक्सप्रेस, वंदे भारत और कुछ स्पेशल पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं. जिससे लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा आरामदायक और तेज हो सके. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक टिकट बुकिंग IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर शुरू हो चुकी है. इसलिए यात्री अपने रूट के हिसाब से पहले ही सीट बुक कर सकते हैं. जान लें किस रूट पर चलेंगी यह नई ट्रेनें. इन शहरों के लोगों को होगा फायदा फरवरी में यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह खबर काफी राहत देने वाली है. नई ट्रेनों का शेड्यूल और रूट प्लान इस तरह बनाया गया है कि देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के प्रमुख शहर पहले से बेहतर कनेक्ट हो सकें. इससे लंबी दूरी की यात्रा का समय घटेग  भीड़ का दबाव कम होगा और कंफर्म सीट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. रेलवे मंत्रालय ने Trains At A Glance 2026 के तहत इन ट्रेनों को चलाने की मंजूरी दी है. अमृत भारत जैसी किफायती और तेज ट्रेनों पर खास फोकस रखा गया है. जिससे मिडिल क्लास और आम यात्रियों को सीधे तौर पर सुविधा मिल सके. इन रूट्स पर चलेंगी नई ट्रेनें ट्रेन नंबर 64033 दिल्ली – शामली मेमू यह ट्रेन शामली और दिल्ली के बीच रोजाना ट्रेवल करने वाले यात्रियों के लिए फायदेमंद होगी पीलीभीत – शाहजहांपुर पैसेंजर  यह ट्रेन लोकल लेवल पर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए शुरू की गई. इस डेली पैसेंजर ट्रेन के जरिए लोकल ट्रेवल आसान होगी. राजेंद्र नगर – नई दिल्ली अमृत भारत  जो लोग बिहार से दिल्ली जाते हैं. उन लोगों के लिए यह ट्रेन एक बढ़िया ऑप्शन बनकर आई है. साबरमती – जोधपुर वंदे भारत इस रूट पर चलने वाली वंदे भारत की टाइमिंग में 1 फरवरी से बदलाव किया गया है. जिससे यात्रियों को ज्यादा सुविधाजनक टाइमिंग मिल सके. गुजरात और राजस्थान के बीच तेज और आरामदायक सफर का यह बेहतर ऑप्शन बनेगा. कामाख्या – रोहतक अमृत भारत पूर्वोत्तर भारत को हरियाणा से जोड़ने वाली यह वीकली अमृत भारत ट्रेन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए अहम साबित होगी. इस ट्रेन से दोनों क्षेत्रों के बीच सीधी और किफायती कनेक्टिविटी मजबूत होगी. संबलपुर – इरोड स्पेशल दक्षिण भारत की ओर यात्रा करने वालों के लिए इस स्पेशल ट्रेन की सर्विस बढ़ाई गई है. ओडिशा से तमिलनाडु तक का सफर अब ज्यादा आसान और सीधा हो सकेगा. जिससे लंबी दूरी की यात्रा में राहत मिलेगी. पुरी – राउरकेला वंदे भारत ओडिशा के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए यह सेमी हाई स्पीड वंदे भारत शुरू की जा रही है. इससे राज्य के भीतर तेज, आरामदायक और समय बचाने वाला सफर संभव होगा. धुले – वाराणसी/अयोध्या महाराष्ट्र के धुले से वाराणसी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों के लिए नई ट्रेनें प्रस्तावित हैं. तीर्थ यात्रा करने वालों के लिए यह सीधी और सुविधाजनक रेल सेवा का ऑप्शन देगी.

ट्रेड डील की हलचल में भारत-चीन व्यापार का रिकॉर्ड उछाल, चीनी राजदूत की प्रतिक्रिया सामने

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने की खबरों के बीच चीनी राजदूत ने भी एक खुशखबरी दी है। चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को बताया जी कि भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 155 अरब अमेरिकी डॉलर के 'रिकॉर्ड उच्च स्तर' पर पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में हुए व्यापार से करीब 12 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात भी 9.7 फीसदी बढ़ गया है, जो आर्थिक सहयोग की कई संभावनाओं को रेखांकित करता है। राजदूत चीनी नव वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा है कि चीन भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का समर्थन करता है और भारत के साथ बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि चीन 'ग्लोबल साउथ' के विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर बात करते हुए, जू ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन और भारत के संबंधों में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में एक सफल बैठक की, जिससे चीन-भारत संबंध 'रीसेट और नई शुरुआत' से सुधार के एक नए स्तर पर पहुंचे।”

जम्मू-कश्मीर अपडेट: उधमपुर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दो आतंकवादी मारे गए

 उधमपुर   जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बंसंतगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मुठभेड़ J&K पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जोफर रामनगर क्षेत्र में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) शुरू किया था। तलाशी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी अन्य आतंकी के छिपे होने की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की भी सूचना है।  जम्मू और कश्मीर के उधमपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जोफर इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो सक्रिय कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है. सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की ज्‍वाइंट टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह इलाका पिछले करीब एक महीने से उनके रडार पर था और यहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार उनकी निगाह बनी हुई थी. यह 15 दिसंबर के बाद उधमपुर में दूसरी मुठभेड़ थी, जब सौन गांव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि, घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे। जनवरी में कठुआ जिले में तीन और किश्तवाड़ के चतरू वन क्षेत्र में चार मुठभेड़ें हुईं जिनके परिणामस्वरूप कठुआ में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान को ढेर किया गया और किश्तवाड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया। ये मुठभेड़ जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे गहन अभियानों के बीच हुईं। उस्मान उसी गिरोह का हिस्सा था जो उधमपुर जिले में फंसा हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से उस क्षेत्र में सक्रिय था। 'ऑपरेशन केया' के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया. मंगलवार को सुरक्षाबलों को आतंकियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली, जिसके बाद एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में पहुंचे, आतंकियों ने घने जंगलों में छिपकर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मुठभेड़ में ढेर  सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादियों को मार गिराया, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे. इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया और इलाके में एडिशनल फोर्स डिप्लॉइड की गई.  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन की निगरानी की. रात तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने में आखिरकार कामयाबी हासिल की.  सुरक्षाबलों ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन केया' नाम दिया, जो खुफिया सूचना पर आधारित था. इलाके में ऑपरेशन के बाद भी पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटा जा सके.

गद्दाफी के परिवार पर जारी त्रासदी: बेटे सैफ अल-इस्लाम की लीबिया में मौत

गद्दाफी लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी, मंगलवार को एक हमले में मारा गया। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनकी टीम के एक बयान का हवाला देते हुए बताया कि मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की मंगलवार को पश्चिमी लीबिया में हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम के घर में घुस आए चार अज्ञात बंदूकधारियों के साथ उनकी सीधी मुठभेड़ हुई और इस दौरान उनकी मौत हो गई। गद्दाफी के करीबी नेता अब्दुल्ला ओथमान अब्दुर्रहीम ने फेसबुक पर इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि चार नकाबपोश बंदूकधारियों ने दोपहर में जिंटान शहर में गद्दाफी के आवास पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर मुठभेड़ से पहले सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे हमलावरों की पहचान पता नहीं चल पाई। वहीं सैफ अल-इस्लाम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना को लेकर ज्यादा जानकारी फिलहाल सामने नहीं आ पाई है। सैफ की टीम ने लीबियाई कोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हमले की जांच करने, अपराधियों की पहचान करने और इस ऑपरेशन की योजना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। कौन थे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी? लीबिया में 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद भी सैफ यहां एक अहम नेता बने रहे। बता दें कि इस विद्रोह में उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी मारे गए थे। गद्दाफी ने चार दशकों से अधिक समय तक लीबिया में राज किया था। सैफ ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई पूरी की थी और उन्हें कभी कई सरकारों द्वारा लीबिया का स्वीकार्य, पश्चिमी-अनुकूल चेहरा माना जाता था। कोई आधिकारिक पद ना होने के बावजूद, सैफ अल-इस्लाम को एक समय मेरा तेल समृद्ध उत्तरी अफ्रीकी देश में अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था।रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफ अल-इस्लाम ने कई उच्च-स्तरीय, संवेदनशील राजनयिक मिशनों में मध्यस्थता की। उन्होंने पश्चिम के साथ संबंध बनाए और खुद को एक सुधारक के रूप में पेश किया। साथ ही सैफ ने संविधान और मानवाधिकारों के सम्मान का भी आह्वान किया। हालांकि जब 2011 में गद्दाफी के लंबे शासन के खिलाफ विद्रोह हुआ, तो सैफ अल-इस्लाम ने अपनी दोस्ती के बजाय परिवार और कबीले की वफादारी को चुना और विद्रोहियों पर क्रूर कार्रवाई का मास्टरमाइंड बन गया। 2015 में, त्रिपोली की एक अदालत ने सैफ अल-इस्लाम को युद्ध अपराधों के लिए फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा सुनाई। इसके बाद 2017 में एक माफी कानून के तहत मिलिशिया द्वारा रिहा किए जाने के बाद से, सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अंडरग्राउंड होकर जिंटान में रह रहे थे।

बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

बलूचिस्तान बलोचों के मुस्लिम भर होने से कलात (बलूचिस्तान) को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बन जाना चाहिए… 27 मार्च 1948 को जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान को जबरन कब्जाया तो इसका काफी विरोध हुआ. जिन्ना अपनी ही बातों से मुकर गए. जिस जिन्ना ने बलूचिस्तान को स्वायत्त रहने देने की सलाह दी थी, उन्होंने ही जबरन आजाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया.  पाकिस्तानी इतिहासकार याकूब खान बंगाश अपनी किताब, 'अ प्रिंसली अफेयर' में लिखते हैं, 'आजाद रहने के प्रतिरोध को पाकिस्तान की सरकार ने कुचल दिया और बलपूर्वक कलात को अपने में मिला लिया.' पाकिस्तान जब आजाद हुआ तब कलात को अलग स्वायत्त प्रदेश की मान्यता मिली थी. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में बलूचिस्तान एक अलग देश बना लेकिन उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के जिम्मे दी गई. 12 अगस्त को बलूचिस्तान के शासक मीर अहमद खान ने अपनी रियासत को एक आजाद देश घोषित किया. लेकिन बलूचिस्तान की आजादी महज 227 दिनों की मेहमान थी.  27 मार्च 1948 को मीर अहमद खान से पाकिस्तान में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए. उसी दिन से बलूचिस्तान में हिंसा और टकराव का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी थमा नहीं है. बीएलए के हमलों से दहल उठा पाकिस्तान बीते शुक्रवार रात को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के करीब एक दर्जन ठिकानों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बनाया. हमले अगले दिन भी जारी रहे और एक के बाद एक हुए इन धमाकों से पाकिस्तान दहल उठा. करीब 200 बीएलए लड़ाके, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने छोटे-छोटे समूहों में बंटकर एक साथ आत्मघाती धमाके और गोलीबारी की. पुलिस थानों, लोगों के घरों और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. बीएलए का दावा है कि उसके हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जा रहा है कि हमले में 17 सैनिक और 31 नागरिक मरे हैं.  पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में विद्रोही लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचा है. सेना की कार्रवाई में 177 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले पर बोलते हुए सोमवार को कहा कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती जरूरी है. पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर आसिफ ने कहा, 'भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे कंट्रोल करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. ऐसी जगह को कंट्रोल करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत होती है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की निगरानी और वहां पेट्रोलिंग करना बेहद चुनौती भरा है.' ये वही बलूचिस्तान है जिसके कीमती पत्थर देख ट्रंप की आंखों में आ गई चमक पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अमेरिका पहुंचे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों से मुलाकात की. इस दौरान मुनीर ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप के सामने एक ब्रीफकेस खोला… ब्रीफकेस खुलते ही बिजनेसमैन राष्ट्रपति ट्रंप की आंखें चमक उठीं. अंदर चमकते कीमती पत्थरों और खनिजों का एक सेट था. मुनीर का यह गिफ्ट ट्रंप को पाकिस्तान की ताजा पेशकश का हिस्सा था. मतलब साफ था कि पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को अमेरिकी निवेश के लिए खोलने को तैयार है. पाकिस्तान के खनिज संसाधन यानी बलूचिस्तान के खनिज संसाधन. गैस, सोने, तांबे की खान है बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत है. पाकिस्तान की कुल जमीन का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है जहां पाकिस्तान के गैस, कोयला, सोना, तांबा का अधिकांश रिजर्व है. बलूचिस्तान में कीमती पत्थरों की भी भरमार है और पाकिस्तान के कुल कीमती पत्थरों का 90% हिस्सा यही से निकाला जाता है. यहां के संगमरमर काफी मशहूर है जो हाई क्वालिटी के होते हैं. जियारत व्हाइट, ब्लैक एंड गोल्ड मार्बल यहां की पहचान हैं. बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मिनरल्स के भी बड़े भंडार हैं. पाकिस्तान के कुल खनिज संसाधनों का 75% हिस्सा बलूचिस्तान से निकाला जाता है. लेकिन इन संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सरकार के पास जाता है. बलूचिस्तान का ईरान और अफगानिस्तान एंगल बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बावजूद इसके, यहां की आबादी काफी कम है. पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी का केवल छह फीसद हिस्सा यहां रहता है. बलूचिस्तान में बलूच जनजाति की बहुलता है जो यहां के स्थानीय निवासी हैं. कुछ संख्या में पश्तून भी बलूचिस्तान में रहते हैं.  बलूचिस्तान क्षेत्र तीन देशों के बीच बंटा है जिसमें पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार शामिल हैं. दोनों देशों से लगती बलूचिस्तान की सीमाएं हमेशा से अस्थिर रही हैं. ईरान और पाकिस्तान के बीच यूं तो भाईचारे वाला संबंध रहा है लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर बलूच विद्रोहियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित विद्रोही समूहों को लेकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान स्थित समूहों को लेकर ईरान एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहते हैं. इसी लड़ाई को लेकर 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. ईरान का दावा था कि उसने बलोच सुन्नी मिलिटेंट समूह जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वो ईरान पर हमले कर रहा है.  जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रॉकेट और मिसाइलों से हमले किए. पाकिस्तान ने दावा किया कि ये हमले उसने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के ईरान स्थित ठिकानों पर किए हैं. इन हमलों से दोनों देशों में भारी तनाव देखा गया था. अफगानिस्तान से लगती बलूचिस्तान की सीमा भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है.  पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वो इन सीमाओं से आतंकियों की आवाजाही रोकने में नाकाम रहा है. बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता है लेकिन वो … Read more

कर्नाटक शराब घोटाला: विधायकों की रातभर की विधानसभा पैदल मार्च और प्रदर्शन की नाटकीय कहानी

बेंगलुरु भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) के विधायकों ने कथित शराब घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कर्नाटक विधानसभा में रात गुजारी। बुधवार सुबह भी भाजपा-जेडीएस विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष व विधायक बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत कई विधायक विधानसभा परिसर में मॉर्निंग वॉक करते हुए नजर आए। बाद में सभी विधायक एक जगह इकट्ठा हुए, चाय पी और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की। कुछ देर बाद विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हुआ, जिसमें भाजपा और जेडीएस के विधायक विधानसभा के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गए और एक्साइज मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने गाने भी गाए और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने एक भक्ति गीत भी गाया। विजयेंद्र, अशोक और विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लाड समेत अन्य विधायक भी उनके साथ शामिल हुए। कथित शराब घोटाले के केस में भाजपा-जेडीएस के विधायक राज्य के आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर का इस्तीफा मांग रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के इतिहास में पहली बार शराब एसोसिएशन ने खुद एक्साइज डिपार्टमेंट में 6,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री हर महीने 250 करोड़ से 300 करोड़ रुपए वसूल रहे थे। उनके मुताबिक, हर डिप्टी कमिश्नर की पोस्ट के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए और कांस्टेबल लेवल की पोस्टिंग के लिए भी 10 लाख रुपए लिए जा रहे थे। आर. अशोक ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि मंत्रियों को 'कट' देना पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की गई है। अशोका ने आरोप लगाया, "इन सबके बावजूद मंत्री सबूत मांग रहे हैं और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जिनके पास वित्त मंत्रालय भी है, सहित पूरी सरकार उनका साथ दे रही है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस हाईकमान के पास बहुत सारा पैसा पहुंच रहा है। चुनावों के लिए यह भारी भरकम 6,000 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। हम धरना दे रहे हैं और जब तक एक्साइज मंत्री थिम्मापुर इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।"

यात्रियों में दहशत, AI-इंडिगो विमानों की टक्कर की चर्चा—हकीकत क्या है?

मुंबई  मुंबई एयरपोर्ट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दो प्लेन आपस में ही टकरा गए. जी हां, एयर इंडिया और इंडिगो के प्लेन के बीच मुंबई एयरपोर्ट पर ग्राउंड कोलिजन हो गया. दोनों विमानों के पंख आपस में टकरा गए. इसके बाद विमानों को जांच के लिए ग्राउंडेड कर दिया गया. जैसे ही एयर इंडिया और इंडिगो के विंग्स आपस में टकराए, प्लेन में बैठे यात्रियों की सांसें फूल गईं. एयरपोर्ट पर हलचल मच गई. कारण कि दोनों विमान में यात्री सवार थे. राहत की बात यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. चलिए जानते हैं कि आखिर कैसे दो प्लेन के विंग्स आपस में टकरा गए और कैसे एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया. कब और कैसे घटी यह घटना? मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर  यह असामान्य घटना घटी. जिसमें एयर इंडिया (एअर इंडिया) और इंडिगो के दो विमानों के पंखों के किनारे एक दूसरे से टकरा गए, जिसके बाद विमानों को जांच के लिए खड़ा कर दिया गया. ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्सीवे पर विमानों के पंखों के सिरे आपस में टकरा गए. यह घटना तब हुई जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2732 (मुंबई-कोयंबटूर) डिपार्चर के लिए पीछे हट रही थी, उसी समय इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 (हैदराबाद-मुंबई) लैंडिंग के बाद टैक्सी कर रही थी. असल में क्या हुआ था? दरअसल, एयर इंडिया का विमान उड़ान भरने के लिए तैयार हो रहा था. वहीं, इंडिगो का विमान लैंडिंग के बाद पार्किंग-वे की तरफ जा रहा था. मुंबई से कोयम्बटूर जा रही फ्लाइट संख्या AI 2732 उड़ान भरने के लिए पुशबैक की स्थिति में थी. ठीक उसी समय हैदराबाद से आई इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 लैंडिंग करने के बाद टैक्सी-वे से गुजर रही थी. इसी दौरान दोनों विमानों के पंख एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और उनमें टक्कर हो गई. दोनों विमानों के दाहिने पंख (Right Wingtips) एक-दूसरे से टकरा गए. टक्कर होते ही विमान में झटका महसूस हुआ, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. गनीमत रही कि इस घटना में किसी को कुछ नहीं हुआ. एयर इंडिया ने क्या कहा जानकारी के मुताबिक, एअर इंडिया का विमान रवाना हो रहा था, जबकि इंडिगो का विमान उतर रहा था. मुंबई एयरपोर्ट पर समानांतर रनवे हैं। दोनों ही विमान एयरबस ए320 थे. एअर इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक, तीन फरवरी को मुंबई से कोयंबटूर जाने वाली उड़ान एआई2732 में देरी हुई, क्योंकि निर्धारित विमान रवाना होने से पहले टैक्सीवे पर प्रतीक्षा के दौरान एक अन्य विमानन कंपनी के विमान के संपर्क में आ गया। दोनों विमानों के पंखों के किनारे टकराने से हमारे विमान के पंख के किनारे को नुकसान पहुंचा. इंडिगो ने क्या कहा? वहीं, इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा कि हैदराबाद से मुंबई आ रही उड़ान 6ई791 के पंख का किनारा उतरने के बाद एक अन्य विमानन कंपनी के विमान से संपर्क में आ गया. इसके अलावा, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की एक टीम मौके पर मौजूद है और दोनों विमानों को जांच के लिए वापस उनके स्थान पर ले जाया गया. कितने यात्री थे सवार रिपोर्ट्स में आगे बताया गया है कि यह घटना तब हुई जब दोनों विमानों में यात्री सवार थे. किसी के घायल होने की खबर नहीं है. हालांकि, विमानों में सवार यात्रियों की संख्या का तत्काल पता नहीं चल सका है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी यात्री सुरक्षित हैं. यह घटना  मुंबई एयरपोर्ट पर शाम करीब 7.30 बजे हुई, जो देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक है. दोनों प्लेन में टक्कर के बाद क्या हुआ?     एअर इंडिया के विमान के विंगटिप को नुकसान पहुंचा, इसलिए इसे ग्राउंडेड कर दिया गया। यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स में रीबुक किया गया।.     इंडिगो के विमान में भी जांच हुई, लेकिन ज्यादा डैमेज नहीं था. उसके यात्री भी सुरक्षित उतारे गए.     DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने तुरंत जांच शुरू कर दी.अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की छानबीन करने लगे.     दोनों एयरलाइंस ने बयान जारी कर कहा कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और कोई घायल नहीं हुआ.  

दुश्मन की सोच से परे प्लान! चिकन नेक क्षेत्र में जमीन के नीचे बनेगा 40 KM का कनेक्शन

नई दिल्ली बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है. सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’ अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए कहां से कहां तक ? प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है. बजट पर बात करते हुए जानकारी दी रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’ डिफेंस के लहजे से अहम अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है. सुरक्षा के लिए जरूरी नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके.

कब्र तक साथ नहीं ले जा सकते राज: जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP ने खुलासा किया

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (मेमॉयर) पर आधारित एक लेख का हवाला देकर पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। मंगलवार को उन्होंने लोकसभा में फिर से चीन के साथ सैन्य टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसके बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा हो गया। इस हंगामे और विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने जनरल नरवणे को नसीहत देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को नसीहत देते हुए लिखा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए थी। वर्दीधारी सैनिकों के पास जो कुछ भी होता है, उसका अधिकांश हिस्सा उनके साथ कब्र तक जाने के लिए होता है। अगर हर कोई इस बारे में बोलने लगे, तो सरकारें कांप उठेंगी। बता दें कि राहुल गांधी ने मंगलवार को नरवणे की पुस्तक पर आधारित लेख को सत्यापित करने की मांग करते हुए सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि इसे सत्यापित किया जाए, मैं इसे पटल पर रख रहा हूं। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता ने लेख का हवाला देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो चीन और पाकिस्तान से जुड़ा है तथा राष्ट्रपति के अभिभाषण का प्रमुख हिस्सा है। राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब आसन की ओर से व्यवस्था दी जा चुकी है, तो नेता प्रतिपक्ष को उस विषय का उल्लेख नहीं करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक का हवाला दिया, जिस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की पुस्तक के बारे में बोलने से रोके जाने पर हैरानी जताई और सवाल उठाया कि आखिर इस किताब में ऐसा क्या है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में कहा कि आरएसएस-भाजपा की वैचारिक आधारशिला ही तथ्यों को छिपाने पर टिकी है, तभी मोदी सरकार संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर सवालों पर जवाब देने से ऐसे बच रही है जैसे उसकी दुखती रग पर किसी ने हाथ रख दिया हो। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है। मोदी सरकार के बड़े मंत्री क्यों घबरा रहे? उन्होंने कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब में ऐसा क्या लिखा है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। उनकी किताब को प्रकाशित होने से कौन रोक रहा है। पूरा देश जानता है कि भाजपा का राष्ट्रवाद झूठा है। वे देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर 2020 में गलवान में हमारे 20 जवानों के सर्वोच्च बलिदान के बाद मोदी जी खुद चीन को क्लीन चिट थमा देते हैं। क्या ये सच नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर देश को विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की जननी' की बात करने वाले लोकतंत्र की आत्मा को रौंदने में क्यों जुटे हुए हैं।

तेल खरीद पर ट्रंप के आरोपों पर रूस ने किया पर्दा फ़ाश, भारत में असमंजस

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।   ट्रंप का बड़ा ऐलान ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है। रूस की दो टूक इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है। पेसकोव ने कहा, "हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।” तेल और कूटनीति यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

नाबालिग छात्र की खौफनाक मौत, पार्टी में शराब के बाद 7वीं मंजिल से गिरी जिंदगी

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु शहर में शनिवार रात एक दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब कक्षा 10 के एक छात्र की अपने अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और अब तक की जांच में इसे एक संभावित आत्मघाती कदम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, छात्र शनिवार शाम अपने स्कूल के कुछ दोस्तों के साथ एक पब गया था। पार्टी के बाद वह करीब रात 9 बजे घर लौटा। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि उसके दोस्त उसे अपार्टमेंट के गेट तक छोड़कर चले गए। इसके बाद छात्र अकेले लिफ्ट से सातवीं मंजिल पर गया। पुलिस का कहना है कि वह अपने फ्लैट में जाने के बजाय बालकनी की ओर गया, जहां से उसके गिरने की आशंका है। बालकनी की रेलिंग ऊंची होने के कारण हादसे की संभावना कम मानी जा रही है। छात्र की मौत रात करीब 9.40 बजे हुई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्र ने शाम को Legacy Brewing Company नामक पब में दोस्तों के साथ कथित तौर पर शराब पी और धूम्रपान भी किया। इसी आधार पर पब के मालिकों और कर्मचारियों के खिलाफ नाबालिग को शराब परोसने का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि पब प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने नाबालिग को शराब नहीं दी और वह कथित तौर पर अपने साथ शराब लेकर आया था। पुलिस अब पब के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। इस बीच, पुलिस ने जांच पूरी होने तक पब का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हर एंगल से जांच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों में गिरा। आत्महत्या सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।” पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्र परिवार की प्रतिक्रिया से डर रहा था, या फिर उस पर पढ़ाई का दबाव था या मानसिक तनाव या कोई निजी परेशानी इस घटना की वजह तो बनी। पुलिस छात्र के दोस्तों और परिवार के बयान दर्ज कर रही है। सभी सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच के बाद ही स्थिति साफ होने की बात कही जा रही है।  

सरकारी सूत्रों ने बताया सच, किसानों के हितों पर टैरिफ डील का असली मंथन

वाशिंगटन अमेरिका के साथ सोमवार को घोषित व्यापार समझौते को लेकर कयासों का बाजार गरम है। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। इस बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। गौरतलब है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं। किसानों के हितों से समझौता नहीं दरअसल, भारत द्वारा अपने राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्र को अमेरिका की अधिक पहुंच के लिए खोलने से इनकार करना मुक्त व्यापार समझौते के दौरान वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एक प्रमुख विवाद का मुद्दा रहा है। नई दिल्ली सोयाबीन और डेयरी जैसे कृषि क्षेत्रों को खोलने के लिए अनिच्छुक रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को, जिन्हें अब तक संरक्षित रखा गया है, आगे भी संरक्षित रखा जाएगा। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारत ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की पेशकश की है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों के लिए चुनिंदा बाजारों तक पहुंच की पेशकश की है। प्रतिबंध-मुक्त तेल खरीदेगी सरकार वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत प्रतिबंध-मुक्त दुनिया भर के देशों से कच्चे तेल की खरीद को दर के आधार पर जारी रखेगा। सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के दौरान हमने वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदी थी। अब प्रतिबंध हट गए हैं, इसलिए हम खरीदेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर अपना टैरिफ मौजूदा स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इसके बदले में नई दिल्ली रूस से तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो जाएगी। 500 अरब डॉलर के व्यापार ट्रंप ने यह भी कहा कि व्यापार समझौते के तहत भारत ने कई उपायों पर सहमति जताई है, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' तक कम करना तथा ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर की व्यापार प्रतिबद्धता की शर्तों में विमान सौदों और अन्य संबंधित निवेशों को शामिल किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि नया व्यापार समझौता भारत के लिए अपार आर्थिक लाभ के द्वार खोलेगा। भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 46.08 अरब डॉलर रहा। इससे पहले एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता में फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, रक्षा, पेट्रोलियम और विमान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रक्रिया कई वर्षों में पूरी की जाएगी।

घर से जंग के मोर्चे तक: आखिर क्यों AK-47 उठाने को मजबूर हो रहीं बलूच महिलाएं?

बलूचिस्तान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच विद्रोहियों के हमलों ने सरकार और सेना दोनों की स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है। बलूच विद्रोहियों ने बलूचिस्तान के 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमले किए, जिनमें कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन घटनाओं से प्रांत में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री सरफराज बुगती इन हमलों के बाद सार्वजनिक रूप से बहुत व्यथित नजर आए। इन हमलों के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा जारी की गई दो हमलावरों की तस्वीरें काफी चर्चा में रहीं। इन तस्वीरों में दोनों हमलावर महिलाएं थीं। यह बात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सशस्त्र उग्रवाद को लंबे समय से पुरुष-प्रधान गतिविधि के रूप में देखा जाता रहा है। समाज के भीतर गुस्सा विश्लेषकों के अनुसार, बलूच प्रतिरोध आंदोलन अब पारंपरिक जनजातीय ढांचे से आगे बढ़कर सामाजिक और रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान की सख्त कार्रवाइयों, जबरन गुमशुदगियों और राजनीतिक संवाद की कमी ने स्थानीय लोगों में असंतोष को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक आयशा सिद्दीका का मानना है कि किसी विद्रोह में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उस समाज के भीतर गहरे गुस्से और टूटते सामाजिक ढांचे की ओर इशारा करती है। हाल के दिनों में हुए हमलों में कुल 50 नागरिकों और 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत के बाद बीएलए ने दो महिला हमलावरों की पहचान जाहिर की। इनमें से एक की पहचान 24 वर्षीय आसिफा मेंगल के रूप में हुई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पुष्टि की कि कम से कम दो हमलों में महिला उग्रवादियों की भूमिका रही। बीएलए के अनुसार, आसिफा मेंगल ने जनवरी 2024 में फिदायीन हमले का फैसला किया था और नुश्की में एक हमला अंजाम दिया। इसी बीच सोशल मीडिया पर बीएलए से जुड़ी एक महिला लड़ाके का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह हथियारों से लैस होकर सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास गतिविधियां करती दिख रही थी। वीडियो में उसके साथ पुरुष लड़ाके भी नजर आए, जो पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों पर तंज कसते दिखे। बलूच महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी दरअसल, हाल के वर्षों में बलूच महिलाओं की सशस्त्र संगठनों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब महिला आत्मघाती हमलावर सामने आई हों। वर्ष 2022 में कराची विश्वविद्यालय के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के बाहर हुए हमले में पहली बार एक महिला फिदायीन की भूमिका सामने आई थी, जिसमें तीन चीनी नागरिकों सहित चार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद जून 2022 और मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान में महिला उग्रवादियों द्वारा हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे बलूच आंदोलन का नेतृत्व जनजातीय सरदारों से हटकर शिक्षित मध्यम वर्ग की ओर बढ़ा, वैसे-वैसे महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी। वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद से 5000 से अधिक लोग लापता हुए हैं, जिनमें ज्यादातर पुरुष हैं। ऐसे में कई परिवारों में महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक प्रतिरोध की जिम्मेदारी उठाई है। रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि महिला उग्रवादियों की बढ़ती भूमिका बलूच समाज में गहरी निराशा और हताशा को दर्शाती है। वहीं, पाकिस्तानी सत्ता के करीबी कुछ विश्लेषक इसे सशक्तिकरण के बजाय संगठित शोषण बताते हैं और आरोप लगाते हैं कि उग्रवादी संगठन युवा महिलाओं को भावनात्मक और वैचारिक दबाव में भर्ती कर रहे हैं। पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती सुरक्षा आंकड़ों की बात करें तो 2011 के बाद से बलूच उग्रवाद से जुड़े हमलों में पाकिस्तान में कम से कम 350 लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2024 और 2025 में संघर्ष से जुड़ी मौतों में तेज इजाफा हुआ है, जिससे सुरक्षा बलों पर दबाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में बलूचिस्तान में उग्रवाद की दिशा और उसमें महिलाओं की बढ़ती भूमिका पाकिस्तान के लिए एक बड़ी रणनीतिक तथा राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है।

भारत की सैन्य ताकत को बढ़ावा, डीआरडीओ की एयर-टू-एयर मिसाइल में बड़ी सफलता

नई दिल्ली डीआरडीओ ने एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है। ओडिशा के तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। इस तकनीक की मदद से अब देश लंबी दूरी की एयर-टू-एयर में मार करने वाली मिसाइलें विकसित कर सकेगा, जिससे दुश्मनों पर रणनीतिक बढ़त मिलेगी। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। डीआरडीओ के अनुसार, यह महत्वपूर्ण परीक्षण मंगलवार सुबह 10.45 बजे हुआ। परीक्षण के दौरान मिसाइल को पहले जमीन से लगाए गए बूस्टर की मदद से तेज रफ्तार दी गई। इसके बाद उसके सभी अहम हिस्सों ने बिल्कुल उम्मीद के मुताबिक काम किया। इसमें बिना नोजल वाला बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम शामिल थे। पूरी उड़ान के दौरान मिले आंकड़ों से यह साफ हुआ कि सिस्टम ने सही तरीके से काम किया। इस परीक्षण पर बंगाल की खाड़ी के किनारे तैनात कई आधुनिक उपकरणों से लगातार नजर रखी गई। इस लॉन्च को डीआरडीओ की अलग-अलग प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने देखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ और इससे जुड़े उद्योगों की तारीफ की। वहीं, डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी पूरी टीम को इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई दी। यह परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। बता दें कि इससे पहले इसी माह हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की चुका थी। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) की सहायता से हासिल की गई थी। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम माना जा रहा है। डीआरडीएल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की हैदराबाद स्थित अग्रणी प्रयोगशाला है। इस सफल परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की वैश्विक अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया था। यह महत्वपूर्ण परीक्षण 9 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसने स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन प्रदर्शित किया। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक, अर्थात 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती है।

मणिपुर को मिला नया मुख्यमंत्री, युमनाम खेमचंद सिंह संभालेंगे कमान

इंफाल. मणिपुर विधायक दल की बैठक में भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही खेमचंद के मणिपुर के नए सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है। मणिपुर में इस महीने 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म हो रहा था। इससे पहले राज्य में भाजपा ने नए मुख्यमंत्री चुनने की कवायद तेज कर दी थी। केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ ने पटका पहनाकर युमनाम खेमचंद का स्वागत किया। इस मौके पर मणिपुर स्टेट प्रेसिडेंट और नॉर्थ ईस्ट के इंचार्ज संबित पात्रा मौके पर मौजूद थे। मणिपुर में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी के विधायक सोमवार को दिल्ली पहुंच गए थे। मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है, जो पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच लागू हुआ था। बीरेन सिंह के राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के चार दिन बाद, पिछले साल 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। बता दें कि 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को निलंबित रखा गया था। इस बीच नई सरकार के गठन की कवायद में भाजपा संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया। इससे पहले, पिछले साल 14 दिसंबर को, मणिपुर भाजपा विधायक दल ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में शांति प्रक्रिया और हिंसाग्रस्त राज्य से संबंधित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और राज्य विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रता सिंह सहित 34 से अधिक भाजपा विधायकों के साथ-साथ बीएल संतोष, संबित पात्रा और मणिपुर भाजपा अध्यक्ष शारदा देवी भी उपस्थित थीं

उधमपुर गूंजा गोलियों से: सुरक्षाबलों की कार्रवाई में जैश आतंकी खत्म, जंगलों में तलाशी तेज

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। मजलता इलाके के बसंतगढ़ में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी को मार गिराया है। फिलहाल इलाके में 2-3 अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, जिसके चलते ऑपरेशन अभी भी जारी है। खुफिया इनपुट के बाद शुरू हुआ जॉइंट ऑपरेशन सुरक्षाबलों को उधमपुर के चिगला बलोता और बसंतगढ़ के ऊपरी इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की सटीक सूचना मिली थी। इसके बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) ने एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया।     मुठभेड़ की शुरुआत: मंगलवार शाम करीब 4 बजे जब जवानों ने आतंकियों को घेरा, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया।     घेराबंदी: सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और ड्रोन व आधुनिक उपकरणों की मदद से अन्य आतंकियों की तलाश की जा रही है। सेना और व्हाइट नाइट कॉर्प्स का बयान सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया (X) पर जानकारी साझा की। सेना के अनुसार, यह एक 'इंटेलिजेंस आधारित जॉइंट ऑपरेशन' है। बसंतगढ़ के दुर्गम इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी को देखते हुए अतिरिक्त जवानों की टुकड़ियों को मौके पर भेजा गया है।   बढ़ाई गई सुरक्षा और सतर्कता उधमपुर के जोफड़ और आसपास के जंगली इलाकों में पिछले कुछ दिनों से संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं। रविवार रात से ही इलाके में अलर्ट जारी था। ताजा मुठभेड़ के बाद पूरे उधमपुर जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

रूसी तेल डील पर अटकी सांसें: कंपनियां बोलीं– अभी नहीं रोक सकते, सरकार क्या करेगी?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। समझौते के तहत, भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और बदले में अमेरिका व वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों का कहना है कि रूसी तेल के आयात को पूरी तरह रोकने के लिए उन्हें समय चाहिए होगा ताकि वे इस बदलती व्यवस्था के साथ तालमेल बिठा पाएं। कंपनियों का कहना है कि फरवरी में बुक किए गए रूसी तेल के कार्गो मार्च में भारत पहुंच रहे हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से रूसी तेल आयात बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। समझौते की मुख्य शर्तें और असर? सोमवार को घोषित इस व्यापार सौदे के केंद्र में टैरिफ और ऊर्जा नीति है। अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को 50% से घटाकर 18% कर देगा। इसके बदले में भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करनी होगी और अपनी व्यापारिक बाधाओं को कम करना होगा। भारत अब अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा। रिफाइनरों की चुनौतियां और मौजूदा स्थिति रिफाइनिंग से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर आयात रोकने का लिखित आदेश नहीं मिला है। रिफाइनरों के सामने कुछ तकनीकी और व्यापारिक अड़चनें हैं।     भारतीय कंपनियों ने पहले ही फरवरी में लोड होने वाले और मार्च में भारत पहुंचने वाले कार्गो बुक कर लिए हैं। इन समझौतों को पूरा करने के लिए समय चाहिए।     नयारा एनर्जी का संकट: रूस समर्थित इस रिफाइनरी की क्षमता 4 लाख बैरल प्रतिदिन है। यह पूरी तरह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है क्योंकि इराक और सऊदी अरब ने पहले ही हाथ खींच लिए हैं।     सूत्रों का कहना है कि नयारा अप्रैल में अपनी रिफाइनरी को मेंटेनेंस के लिए बंद कर रही है, जिससे उस दौरान रूसी तेल का आयात स्वतः ही शून्य हो जाएगा। रूसी तेल पर नहीं बोले पीएम मोदी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। अमेरिका का उद्देश्य रूस के राजस्व को कम करना है ताकि युद्ध के लिए उसकी फंडिंग को रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमने व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने सहित कई विषयों पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक खरीद करने पर सहमत हुए हैं। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर टैरिफ कम होने पर प्रसन्नता तो व्यक्त की, लेकिन रूसी तेल आयात बंद करने के विषय पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया। भारत पहले से ही धीरे-धीरे अपनी तेल आपूर्ति में विविधता ला रहा है। पिछले दो वर्षों में दिसंबर में रूसी तेल का आयात सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि भारत रूसी तेल की कमी को पूरा करने के लिए वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू कर सकता है। भारत के लिए यह समझौता एक तरफ अमेरिकी बाजार में सस्ते पहुंच का रास्ता खोलता है, तो दूसरी तरफ अपनी रिफाइनरियों के लिए ऊर्जा के नए और स्थायी स्रोत तलाशने की चुनौती पेश करता है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार किस तरह से रूसी तेल पर अपनी निर्भरता को शून्य पर ले जाती है।

ट्रंप से टैरिफ डील फाइनल, PM मोदी ने कहा– आत्मविश्वास से लिख रहा भारत नई आर्थिक कहानी

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वार्ता के बाद टैरिफ डील पर बड़ा फैसला हुआ है। अमेरिका ने अब भारत पर लगने वाले टैरिफ को सीधे 50 फीसदी से घटाकर 18 पर्सेंट कर दिया है। इसे भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार की नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा भारत के एक्सपोर्ट बाजार के लिहाज से भी यह अहम है। इस फैसले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार रात को ही एक ट्वीट किया था और डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया था। अब उन्होंने एक और पोस्ट की है, जिसमें आत्मविश्वास के जरिए विकसित भारत के रास्ते में आगे बढ़ने की बात कही है।   पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पोस्ट में टैरिफ डील का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी बात को उससे ही जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने लिखा, 'आत्मविश्वास वह बल है जिससे सब कुछ संभव है और विकसित भारत के सपने को साकार करने में यही शक्ति काम आएगी।' मोदी ने यह टिप्पणी अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनने के कुछ घंटों बाद की है। इस समझौते के तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, 'आत्मविश्वास वह शक्ति है जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।' मोदी ने संस्कृत का यह श्लोक भी साझा किया- ''श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठत।' उन्होंने इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए लिखा, ‘शुभ कार्यों से धन अर्जित होता है। यह साहस और आत्मविश्वास से बढ़ता है, कुशलता एवं दक्षता से स्थिर रहता है और संयम द्वारा सुरक्षित होकर राष्ट्र की प्रगति में सहायक बनता है।’ ट्रंप के दावों पर अब भी सस्पेंस, भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार बता दें कि भारत पर अमेरिका ने मोटे टैरिफ लादे थे। इसके बाद कई बार ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच टैरिफ खत्म करने को लेकर बात कई बार बात हुई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ सकी। अब इस डील के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में सुधार हो सकता है। अब नई डील के साथ ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ काफी कम हो गया और यह पाकिस्तान, चीन समेत अपने तमाम पड़ोसी देशों के मुकाबले कम है। हालांकि अब भी इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत ने अमेरिकी उत्पादों की भारतीय बाजार में एंट्री और रूस से तेल खरीद रोकने पर सहमति जताई है या नहीं।

धामी के नेतृत्व में बड़ा कीर्तिमान: राज्य बनने के बाद पहली बार 6 करोड़ का वार्षिक आंकड़ा पार

देहरादून पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल रंग लाई है। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया है। वर्ष 2025 में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक उत्तराखंड आए हैं, जो राज्य गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है। हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे हैं, जबकि देहरादून में 67 लाख 35 हजार 71 और टिहरी जनपद में 53 लाख 29 हजार 759 सैलानी आए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिली है। पर्यटन विकास के लिए जहां कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं पर्यटन-तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खास जोर दिया गया है। पर्यटकों-तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं। धामी सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 6 करोड़ 3 लाख 21 हजार 194 पर्यटक उत्तराखंड आए हैं। इनमें एक लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानी शामिल हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों की संख्या छह करोड़ के पार पहुंची है। पूर्व के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में 2,00,18,115, 2022 में 5,39,81,338, 2023 में 5,96,36,601 और वर्ष 2024 में 5,95,50,277 पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों ने उत्तराखंड का रुख किया है। इसे से लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। हमारी सरकार राज्य में पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासियों और युवाओं को सालभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। शीतकालीन यात्रा इसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा जी के दर्शन को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा की यात्रा पर आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में यात्री उत्तराखंड पहुंचे हैं। हमने पर्यटक सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इन्हीं सब प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है।

देहरादून में बस पलटी, खाई में गिरने से त्रासदी; 3 मरे, कई घायल

देहरादून देहरादून के विकासनगर इलाके में हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक बस 30 से ज्यादा यात्रियों को लेकर गहरी खाई में गिर गई, जिससे कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है। कालसी थाना पुलिस मौके पर मौजूद है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा क्वाणु इलाके में सुदोई खड्ड के पास हुआ, जब चौपाल-नेरवा से हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब जा रही हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस कथित तौर पर बेकाबू होकर खाई में गिर गई। अधिकारियों ने बताया कि तीन यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, बस सुबह करीब 6:30 बजे चौपाल डिपो से नेहवा पहुंची थी और मीनस-क्वाणु-हरिपुर रूट से पांवटा साहिब की ओर जा रही थी। उस समय बस में कथित तौर पर 30 से ज़्यादा लोग सवार थे। यह हादसा सुबह करीब 10 बजे हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मीनस-क्वाणु-हरिपुर सड़क पर सुदोई खड्ड के पास एक ट्रक को रास्ता देते समय सड़क का किनारा धंस गया। नतीजतन, यात्रियों से भरी हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन बस का संतुलन बिगड़ गया, वह कई बार पलटी और आखिरकार सीधी गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के तुरंत बाद, स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों में मदद करने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही, पुलिस प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। सीएम धामी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, “हमें कालसी क्षेत्र (देहरादून) में क्वाणु-मीनस मोटर रोड पर हिमाचल ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की बेहद दुखद खबर मिली है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही, मैंने फोन पर जिला मजिस्ट्रेट से बात की और आवश्यक निर्देश दिए।” उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, "आस-पास के सभी मेडिकल सेंटरों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अगर जरूरत पड़ी, तो गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एयरलिफ्ट करके एडवांस्ड मेडिकल सेंटरों में भर्ती कराया जाएगा। मैं भगवान से सभी यात्रियों की सुरक्षित सेहत के लिए प्रार्थना करता हूं।" बचाव और राहत अभियान अभी जारी हैं, और अधिकारियों ने कहा कि और जानकारी का इंतजार है।

एप्स्टीन घोटाले की कहानी: सर्वाइवर ने उजागर किया रोजाना 10 लड़कियों का शोषण

न्यूयॉर्क दुनिया में अगर सबसे घिनौने अपराधों की बात की जाए, तो एप्स्टीन फाइल का नाम जरूर आता है. जेफ्री एप्स्टीन की काली दुनिया परत दर परत खुल रही है और कई बड़े नाम इस जाल में सामने आते जा रहे हैं. एप्स्टीन का निजी द्वीप लिटिल सेंट जेम्स, जिसे मीडिया एप्स्टीन आइलैंड कहता है, उसके अपराधों का केंद्र था. यहीं नाबालिग लड़कियों को ले जाकर उनका शोषण किया जाता था. अब पीड़िताओं की आवाजें दुनिया तक पहुंच रही हैं, और इन्हीं में से एक हैं मरीना लसेर्डा, जिन्हें 2019 के इंडिक्टमेंट में माइनर विक्टिम-1 कहा गया था. ब्राजील से न्यूयॉर्क तक, एक बच्ची का डरावना सफर मरीना ने अपनी कहानी कई वेस्टर्न मीडिया संस्थानों में बताई है. उनका कहना है कि वे ब्राजील से अमेरिका आईं और न्यूयॉर्क में अपनी मां और बहन के साथ एक छोटे कमरे में रहती थीं. परिवार चलाने के लिए चौदह साल की उम्र में तीन नौकरियां कर रही थीं.इसी दौरान एक दोस्त ने उन्हें काम का लालच दिया. 300 डॉलर मिलेंगे… बस एक 'बड़े आदमी' को मसाज देनी है. वह 'बड़ा आदमी' एप्स्टीन था. उसका न्यूयॉर्क टाउनहाउस मरीना के जीवन का सबसे खतरनाक मोड़ बन गया. पहली मुलाकात में ही मसाज का बहाना यौन शोषण में बदल गया. मरीना इसे 'ड्रीम जॉब से वर्स्ट नाइटमेयर' बताती हैं. 14 से 17 की उम्र. लगातार शोषण और डर करीब तीन साल तक मरीना एप्स्टीन के जाल में फंसी रहीं.वह उन्हें बार-बार बुलाता था. उनसे और कम उम्र की लड़कियां लाने को कहता था. स्कूल आईडी देखकर उम्र की पुष्टि करता था.एप्स्टीन के घर में रोज़ 5 से 10 लड़कियां आती-जाती थीं.एक बार मरीना 18 साल की लड़की ले आईं, तो वह गुस्से से चिल्लाया-ये तो बहुत बड़ी है.मरीना ने बताया कि उन्होंने एप्स्टीन को डोनाल्ड ट्रंप के साथ कई बार देखा, लेकिन वह कहती हैं कि उनका ध्यान हमेशा अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को सहने पर रहता था. 2008 की चुप्पी और 2019 में खुलता सच 2008 में FBI ने मरीना से संपर्क किया था. वह ग्रैंड ज्यूरी के सामने सच बोलने के लिए तैयार थीं, लेकिन एप्स्टीन ने नॉन-प्रोसिक्यूशन एग्रीमेंट कर लिया और मरीना की आवाज उस समय दबा दी गई.मरीना आज भी कहती हैं कि अगर उन्हें 2008 में बयान देने दिया जाता, तो कई लड़कियां आज दर्द से बच सकती थीं. 2019 में जब केस दोबारा खुला, तो मरीना की गवाही एप्स्टीन पर लगे सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों की रीढ़ साबित हुई. हालांकि एप्स्टीन की मौत जेल में हो गई, लेकिन फाइलें अब भी कई सवालों से घिरी हैं.सितंबर 2025 में मरीना पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं. कैपिटल हिल की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दुनिया का ध्यान खींचा. उन्होंने कहा था कि एप्स्टीन फाइलें पूरी तरह जारी करो. आधे सच से न्याय नहीं मिलता.अब 37 साल की मरीना एप्स्टीन सर्वाइवर्स की एक मजबूत आवाज बन चुकी हैं.उनकी लड़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए है जिन्हें सालों तक खामोश रखा गया.

लोकसभा में भारी बवाल, चेयर पर कागज़ उछालने पर सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबन

नई दिल्ली संसद की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को जमकर हंगामा देखने को मिला. राहुल गांधी को टोके जाने से व‍िपक्ष के सांसद इतने नाराज हो गए क‍ि उन्‍होंने लोकसभा स्‍पीकर के ऊपर कागज उछाल द‍िया. इसके बाद स्‍पीकर ने 8 सांसदों को सस्‍पेंड कर द‍िया है. ज‍िन सांसदों पर कार्रवाई की गई है, इनमें कांग्रेस से मणिकम टैगोर , गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर राजा वड़िंग, हिबी ईडन, किरन रेड्डी, प्रशांत पोडोले, एस. वेंकटेशन और डीन कोरियाकोस शामिल हैं. इन्‍हें पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है. लोकसभा में पीठासीन की ओर पेपर उछालने वाले आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र से निलंबित कर दिया है. विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद सदन में भारी हंगामा हो गया इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही को बुधवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया. वहीं, विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने के विरोध में विपक्षी दल राहुल-प्रियंका के साथ मिलकर संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं.  दरअसल, मंगलवार को लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया और स्पीकर की कुर्सी की ओर पेपर फेंके. इसके बाद स्पीकर ने कार्यवाही को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया था. ध्वनिमत से पारित हुआ प्रस्ताव इसके बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे चौथी बार शुरू हुई तो इस अनुशासनहीन व्यवहार को लेकर पीठासीन ने पेपर उछालने वाले सदस्यों को नेम करने की बात कही. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पेपर उछालने वाले सदस्यों को बाकी सत्र के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया. सभी सांसद संसद के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं. न‍िलंबि‍त क‍िए गए सांसद गुरदीप सिंह औजला ने कहा, बिल्कुल गलत कार्रवाई है. हम संघर्ष करेंगे और जनता की आवाज उठाएंगे. अमरिंदर राजा वड़‍िंग ने कहा, दो दिन से राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है. यह कहां का लोकतंत्र है. इसलिए हमने कागज फाड़कर विरोध जताया. आज तो राहुल गांधी ने अपने लेटर पैड पर साइन कर दिया था, फिर सरकार को क्या दिक्‍कत है. इससे पहले संसद में हंगामे और चेयरमैन पर कागज फेंकने के मामले में बीजेपी ने स्पीकर से शिकायत की है. हंगामा करने वाले सांसदों पर कार्रवाई की मांग की थी. इन सांसदों के बारे में जान‍िए     मणिकम टैगोर कांग्रेस से सांसद हैं. तम‍िलनाडु से आते हैं. मणिकम टैगोर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी व्‍ह‍िप भी हैं. वे संसद में अपनी आक्रामक शैली और दक्षिण भारत के मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए जाने जाते हैं.     गुरजीत सिंह औजला– अमृतसर से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. औजला पंजाब के सीमावर्ती इलाकों की समस्याओं, नशामुक्ति और किसानों के मुद्दों पर संसद में अपनी बात मजबूती से रखने के लिए पहचाने जाते हैं.     अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग– लुधियाना से आते हैं. राजा वड़िंग पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. युवा कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आए वड़िंग अपनी तेज-तर्रार राजनीति के लिए मशहूर हैं और उन्होंने 2024 में रवनीत बिट्टू को हराकर जीत दर्ज की थी.     हिबी ईडन- एर्नाकुलम से जीते हिबी ईडन एनएसयूआई (NSUI) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. वे केरल की युवा राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं और संसद में शिक्षा व युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं.     किरण कुमार रेड्डी– तेलंगाना के भुवनगिरी से सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी माने जाते हैं और 2024 के चुनाव में भाजपा और बीआरएस को हराकर संसद पहुंचे हैं.     प्रशांत पडोले– नाना पटोले के करीबी प्रशांत पडोले ने 2024 में भाजपा के गढ़ माने जाने वाले विदर्भ क्षेत्र में बड़ी जीत हासिल की। वे क्षेत्र में किसानों और ओबीसी समुदाय के मुद्दों पर सक्रिय हैं।     एस. वेंकटेशन- सीपीआई (एम) सांसद वेंकटेशन एक प्रसिद्ध तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता हैं. वे संसद में तमिलनाडु के अधिकारों, संस्कृति और रेलवे से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले सबसे मुखर सांसदों में से एक हैं.    डीन कोरियाकोस– इडुक्की से सांसद डीन कोरियाकोस युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. वे इडुक्की के किसानों, विशेषकर पश्चिमी घाट और बफर जोन से जुड़े मुद्दों को संसद में जोर-शोर से उठाते हैं. हंगामे के बाद संसद स्‍थग‍ित लोकसभा में राहुल गांधी आज भी पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की क‍िताब के बारे में बताना चाहते थे, लेकिन जब स्‍पीकर ने टोका तो वे अड़ गए. वे बार-बार वही बातें दोहराते नजर आए. स्‍पीकर ने हर बार उन्‍हें रोकने की कोश‍िश की, लेकिन उन्‍होंने नहीं मानी और आख‍िरकार सदन की कार्यवाही स्‍थग‍ित करनी पड़ी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा– व्हॉट्सऐप मेटा के साथ यूजर डेटा साझा न करे, प्राइवेसी को मिले संरक्षण

 नई दिल्ली व्हाट्सएप और मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने साफ किया कि डेटा शेयरिंग की ये प्रक्रिया भारतीय यूजर्स के निजता के अधिकार के खिलाफ है.  हालांकि, सीसीआई के वकील ने एनसीएलएटी (NCLAT) के कुछ निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप को निर्देश देते हुए कहा, 'हम आपको मेटा के साथ एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे. हम आपको इस देश की नीतियों की गोपनीयता के साथ खेलने की इजाजत कतई नहीं देंगे.'  इस पूरे प्रकरण में कोर्ट के सामने तीन मुख्य अपीलें थीं, जो मेटा, व्हाट्सएप और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की ओर से दायर की गई थीं. सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इन अपीलों का पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने दलील दी कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 213 करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान पहले ही किया जा चुका है. मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े सवाल उठाए और कंपनी को डेटा साझा करने से साफ मना कर दिया. CJI ने व्हाट्सएप की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपने इसे इतनी चालाकी से तैयार किया है कि इसे समझना नामुमकिन है. उन्होंने पूछा कि क्या देश का आम आदमी, जैसे घर में काम करने वाले नौकर, निर्माण मजदूर या छोटे विक्रेता, इस जटिल नीति को समझ पाएंगे? कोर्ट ने साफ कहा कि उपभोक्ताओं को इस ऐप की 'लत' लगा दी गई है और अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है. यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा- SC सीजेआई ने कहा कि लोगों के डेटा का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है और अब तक लाखों यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो चुका है. इस दौरान मेटा के वकील अखिल सिबल ने दलील दी कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है. इस पर सीजेआई ने कहा, 'अगर आपको डेटा का कोई हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप उसे बेच देंगे! सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता मूक हैं और उनके पास आवाज नहीं है, आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते.' सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि व्हाट्सएप यूजर्स को सिर्फ दो ही विकल्प दे रहा है- 'या तो पॉलिसी स्वीकार करो या ऐप का इस्तेमाल बंद कर दो.' इस पर अदालत ने कहा कि बिहार के दूरदराज इलाकों या तमिलनाडु के गांवों में रहने वाले लोग, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती, वे इस नीति के खतरनाक परिणामों को कभी नहीं समझ पाएंगे. डेटा शेयर करने की इजाजत से SC का साफ इनकार सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा, 'जब तक आप हमें यह विश्वास नहीं दिला देते कि आपको ऐसा करने का कोई दैवीय अधिकार हासिल है, तब तक हम आपको डेटा शेयर करने की अनुमति नहीं देंगे.'  3 जजों की बेंच के सामने होगी अपीलों पर सुनवाई व्हाट्सएप के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी नीतियां दूसरे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्राधिकारों के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक ही हैं. लेकिन इन दलीलों को सुनने को बाद सीजेआई ने बताया कि एनसीएलएटी के सामने जनवरी 2025 के आदेश की स्थिति अभी भी अहम है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है. अब इन अपीलों पर विस्तृत सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच के सामने होगी.

मणिपुर चुनाव अपडेट: भाजपा सरकार के बने रहने की संभावना, CM पद की दौड़ में यह नेता और डिप्टी

इम्फाल क्या मणिपुर में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी? इसके कयास तेज हो गए हैं क्योंकि भाजपा में मणिपुर से लेकर दिल्ली तक भागदौड़ तेज हो गई है। मणिपुर के 20 से ज्यादा भाजपा विधायक दिल्ली पहुंचे थे और अब पार्टी ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है। राज्य में अगले साल ही राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला है और उससे पहले पार्टी के नेता चाहते हैं कि सरकार बना ली जाए। सोमवार को भाजपा ने मणिपुर में पर्यवेक्षक के तौर पर तरुण चुग को नियुक्त कर दिया है, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। अब किसी भी दिन मणिपुर में एनडीए विधायकों की मीटिंग हो सकती है और नेता का चुनाव हो सकता है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई सरकार में राज्य में एक डिप्टी सीएम भी होगा। मैतेई समुदाय से मुख्यमंत्री बनने की संभावना है तो वहीं कुकी समुदाय के किसी नेता को डिप्टी सीएम के तौर पर जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसा इसलिए ताकि राज्य में यह संदेश जाए कि सरकार सभी को साथ लेकर चल रही है। बीते सालों में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच तनाव देखा गया था और भीषण हिंसा हुई थी। इसी स्थिति से बचाव के लिए भाजपा अब कुकी समाज से एक डिप्टी सीएम बना सकती है। अब बात मुख्यमंत्री की करें तो बीरेन सिंह की सरकार में असेंबली स्पीकर रहे सत्यब्रत सिंह और पूर्व मंत्री टीएच बिस्वजीत सिंह और के. गोविंद दास को मौका मिल सकता है। ये सभी नेता मैतेई समुदाय के ही हैं। दरअसल भाजपा के भीतर भी तनाव की स्थिति है। कुकी विधायकों का कहना है कि उनके समुदाय का दबाव है। ऐसी स्थिति में यदि कुकी समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो उनके लिए सरकार का हिस्सा बनना मुश्किल होगा। ऐसी मांग कुकी विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व से की है। इसी को लेकर सरकार अब विचार कर रही है। यही नहीं कुछ विधायकों का कहना है कि मणिपुर को केंद्र शासित प्रदेश ही बना देना चाहिए, जिसकी अपनी विधानसभा भी हो। एक साल से मणिपुर में चल रहा है राष्ट्रपति शासन बता दें कि मणिपुर में पहली बार 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया था। यह 6 महीने के लिए ही था और फिर अगस्त 2025 में एक बार फिर से इसे 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया। एन. बीरेन सिंह ने बीते साल फरवरी में ही सीएम पद छोड़ दिया था। बता दें कि मणिपुर में विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है। ऐसे में विधायक चाहते हैं कि कम से कम एक साल के लिए ही नए सिरे से सरकार का गठन हो और कुछ काम करके ही जनता के बीच चुनाव में जाया जाए। फिलहाल 60 सीटों वाले मणिपुर सदन में भाजपा के 37 विधायक हैं।

21 दिन, एक बड़ी बाज़ी! India-US डील के पीछे जिस शख्स ने पलट दिया पूरा खेल

 नई दिल्ली    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो गया है. पिछले करीब 10 महीने से टैरिफ को लेकर खींचतान चल रही थी, कई बार दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला. लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं रुकी. बीच-बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना प्रिय मित्र बताते रहे, बदले में पीएम मोदी भी ट्रंप को अपना दोस्त कहते रहे.  दरअसल अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया, फिर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाकर 25 फीसदी अतिरिक्त पेनॉल्टी थोप दिया. जिससे भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया था. लेकिन अब भारत को लेकर ट्रंप ने अपनी सच्ची दोस्ती दिखाई और टैरिफ को घटाकर केवल 18 फीसदी कर दिया है.  डील के पीछे इस शख्स की बड़ी भूमिका टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बैठकें चल रही थीं. लेकिन जब से सर्जियो गोर ने भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभाला, तब से ट्रेड डील को लेकर धीरे-धीरे तस्वीरें साफ होने लगीं. सर्जियो गोर ने अमेरिकी राजदूत (United States Ambassador to India) का पद 12 जनवरी 2026 को संभाला था.  उन्होंने पद संभालते ही कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच सबकुछ All Is Well है, उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है, जल्द अच्छे परिणाम आने वाले हैं, भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते बेहद अच्छे हैं, दोनों देश एक-दूसरे को तरजीह देते हैं.  इससे पहले गोर व्हाइट हाउस प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर थे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं. ट्रंप ने भारत की कमान उन्हें ऐसे समय पर सौंपी, जब भारत–अमेरिका के रिश्तों में टैरिफ और व्यापार मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ रहा था.  राजदूत के पद पर नियुक्ति के तुरंत बाद गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता (trade deal) की बातचीत जारी है और दोनों देशों को इसे अंतिम रूप देने पर मिलकर काम करना चाहिए. अपने नियुक्त के अगले दिन यानी 13 जनवरी 2026 को ही भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत के संकेत दिए थे. उसके बाद उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 7 दौर की बैठकें हो चुकी हैं, और सबकुछ सकारात्मक दिशा में है. दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर: सर्जियो गोर  इस बीच सर्जियो गोर (Sergio Gor) की नियुक्ति के 21वें दिन ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का ऐलान हो गया है. कहा जा रहा है कि इस डील को अंतिम रूप देने में अमेरिकी राजदूत की बड़ी भूमिका रही है, क्योंकि ये डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी हैं और उन्हें ये जिम्मेदारी दी गई थी.  गोर ने अपने पहले बड़े सार्वजनिक संबोधन में कहा था कि कोई भी साझेदार भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है और भारत-अमेरिका का रिश्ता इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को व्यापार के साथ-साथ सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और शिक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में भी मजबूत सहयोग की आवश्यकता है.  ट्रेड डील को लेकर गोर का बयान डील के ऐलान के बाद गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में अनंत संभावनाएं हैं और यह समझौता दोनों के लिए एक लैंडमार्क क्षण है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भी वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी को एक सच्चा मित्र मानते हैं, और इसी व्यक्तिगत भरोसे ने व्यापार वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाया है.  गोर ने कहा कि डील के तहत भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला टैरिफ पहले के 50% से घटकर 18% हो गया है, जो दोनों देशों के सहयोग को आसान बनाता है और व्यापारिक तनाव को कम करता है. 

टैरिफ राहत के बाद PM मोदी का प्रेरक संदेश, श्लोक के जरिए दिया आत्मविश्वास का मंत्र

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील पर सहमति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाभारत का एक श्लोक शेयर किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात में एक पोस्ट कर इसकी घोषणा की. पीएम मोदी ने भी एक पोस्ट में इस घोषणा पर खुशी जाहिर की है. अब भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो गया है. अमेरिका में भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से लागू 25 फीसदी की पेनाल्टी को खत्म कर दिया है. पीएम मोदी ने जो श्लोक साझा किया है वह इस प्रकार है- श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥ यह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (विदुर नीति) से लिया गया है, जिसमें विदुर ने धृतराष्ट्र को सफलता/समृद्धि (श्री/लक्ष्मी) के रहस्य बताए हैं. श्लोक का अर्थ इस श्लोक का सरल हिंदी में व्याख्या कुछ इस प्रकार है. श्री (समृद्धि, लक्ष्मी, सफलता, वैभव) शुभ/मंगल कार्यों से उत्पन्न होती है, प्रगल्भता (परिपक्व बुद्धि, आत्मविश्वास, वाक्पटुता) से बढ़ती है, दाक्ष्य (चतुराई, कुशलता, दक्षता) से मजबूत जड़ (मूल) बनाती है और संयम (अनुशासन, आत्मसंयम, संयम) से स्थिर/स्थायी होकर टिकी रहती है. श्लोक की व्याख्या श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति- लक्ष्मी/समृद्धि शुभ कर्मों, अच्छे कार्यों और मंगल (शुभ) से जन्म लेती है. प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते- प्रगल्भता (बुद्धि की परिपक्वता, आत्मविश्वास, बोलने की कला) से वह बहुत बढ़ती है. दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं- दक्षता/कुशलता/चतुराई से वह मजबूत आधार/जड़ पकड़ लेती है. संयमात् प्रतितिष्ठति- संयम/अनुशासन से वह स्थायी रूप से स्थापित/टिकी रहती है. सारांश कुल मिलाकर प्रधानमंत्री इस श्लोक के जरिए यह कहना चाहते हैं कि समृद्धि और सफलता पहले अच्छे कर्मों से शुरू होती है, फिर आत्मविश्वास और परिपक्वता से बढ़ती है, कुशलता से मजबूत होती है और अंत में संयम/अनुशासन से हमेशा के लिए बनी रहती है. यह श्लोक जीवन में सफलता के चार चरणों को बहुत सुंदर तरीके से दर्शाता है. शुरूआत अच्छे कर्म से, विकास आत्मविश्वास से, मजबूती कुशलता से और स्थिरता संयम से. बहुत प्रेरणादायक श्लोक है!

बलूचिस्तान फिर सुलगा! BLA के ‘ऑपरेशन हेरोफ’ से पाक सेना पर भारी हमला, 200 जवानों के मारे जाने का दावा

इस्लामबाद  बलूच विद्रोही संगठन Balochistan Liberation Army (बीएलए) ने दावा किया है कि उसका ऑपरेशन हेरोफ फेज-2 बलूचिस्तान के कई जिलों में लगातार जारी है। संगठन के मुताबिक, इस अभियान को शुरू हुए 40 घंटे से अधिक हो चुके हैं और इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि खारान, मस्तुंग, टुम्प और पसनी जैसे इलाकों में ऑपरेशन पूरे किए जा चुके हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसके लड़ाके क्वेटा और नोशकी के कुछ हिस्सों में मौजूद रहे और वहां से पाकिस्तानी सैन्य दबाव को पीछे हटाया गया। 200 से अधिक पाक जवानों को मारने का दावा बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान सेना, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के 200 से ज्यादा जवान मारे गए हैं और कम से कम 17 लोगों को पकड़ा गया है। संगठन ने इन आंकड़ों को शुरुआती आकलन बताया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के अनुसार, हिंसा में 17 कानून प्रवर्तन कर्मी और 31 नागरिकों की मौत हुई है। वहीं बीएलए ने चेतावनी दी है कि सेना का साथ देने वाले स्थानीय अधिकारी और पुलिसकर्मी उसके निशाने पर होंगे। दोनों पक्षों को नुकसान पाकिस्तान सेना के अनुसार, शनिवार को 92 और शुक्रवार को 41 अलगाववादी मारे गए। वहीं बीएलए ने भी स्वीकार किया है कि ऑपरेशन के दौरान उसके 18 लड़ाके मारे गए, जिनमें मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और STOS यूनिट के सदस्य शामिल हैं। संगठन ने यह भी माना कि हमलों में एक महिला हमलावर की भूमिका रही।  

असली दोस्ती का सबूत? भारत को टैरिफ राहत, संसद में PM मोदी का भव्य अभिनंदन

 नई दिल्ली नई दिल्ली में एनडीए संसदीय दल की बैठक के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर खास उत्साह देखने को मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद एनेक्सी भवन में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक में पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया. बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर पीएम मोदी को सम्मानित भी किया गया. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद एनेक्सी भवन पहुंचे. उनके साथ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भूपेंद्र यादव भी एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल होने पहुंचे. बैठक में एनडीए के तमाम वरिष्ठ नेता और सांसद मौजूद रहे. बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बीते कुछ महीनों में भारत द्वारा किए गए अहम व्यापार समझौतों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में भारत ने कई बड़े ट्रेड डील्स किए हैं, जिनमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील सबसे अहम है. रिजिजू ने इसे भारत की कूटनीतिक और आर्थिक मजबूती का बड़ा उदाहरण बताया. सेंसेक्स 2400, तो निफ्टी ने लगाई 700 अंकों की छलांग, टैरिफ डील से गदगद बाजार, ये 10 शेयर बने रॉकेट एनडीए नेताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी. नेताओं का कहना था कि इस समझौते से भारत को वैश्विक स्तर पर बड़ा आर्थिक फायदा मिलेगा और ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी. बैठक में यह भी कहा गया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और मजबूत होगी. एनडीए नेताओं ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत कर रहा है. एनडीए संसदीय दल की बैठक में कुल मिलाकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया और इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर बताया गया. भारत पर पड़ोसियों में सबसे कम टैरिफ… PAK-बांग्लादेश भारत के लिए गुड न्यूज (Good News For India) आ गई है और डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ को घटाने (US Tariff Cut) का ऐलान कर दिया. ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट शेयर कर Tariff Cut और India-US Trade Deal पर सहमति बनने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि भारत पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ अब 25% से घटकर सिर्फ 18% किया जाएगा. इस बीच एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया और दोस्ती निभाते हुए टैरिफ में बड़ी कटौती कर दी. बता दें कि अब भारत पर अपने पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन से भी कम Tariff हो गया है.  भारत पर 18% टैरिफ ही फाइनल  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है. इस ऐलान के साथ ही दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच बीते कुछ समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को दूर करने में मदद मिलेगी. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और उसपर 50% की जगह 18 फीसदी का टैरिफ ही फाइनल है. वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से भी बताया गया है कि अमेरिका ने रूसी तेल आयात (Russian Oil Import) से जुड़े दंडात्मक शुल्क को वापस ले लिया है और अब सिर्फ संशोधित Reciprocal Tariff यानी 18 फीसदी लागू रहेगा.   भारत सबसे ज्यादा फायदे में, चीन-PAK पीछे  ट्रंप के भारत को लेकर किए गए इस बड़े Tariff Cut के ऐलान से अमेरिका के नए टैरिफ स्ट्रक्चर शुल्क संरचना के साथ भारत अब इस मामले में पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा फायदे में आ गया है. चीन और पाकिस्तान की तुलना में भी भारत में अब काफी कम शुल्क हैं, जबकि इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम भी भारत से ज्यादा टैरिफ झेलने वाले देश बन चुके हैं.  इन देशों पर सबसे ज्यादा टैरिफ चीन 37%  ब्राजील 50%  दक्षिण अफ्रीका 30%  म्यांमार 40% लाओस 40% इन देशों पर कम, लेकिन भारत से ज्यदा टैरिफ बांग्लादेश 20% वियतनाम 20% मलेशिया 19%  कंबोडिया 19% थाईलैंड 19%  पाकिस्तान 19% टैरिफ के ये आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि भारत के लिए संशोधित Tariff Rate उसे अमेरिका के सबसे प्रमुख सहयोगियों और व्यापारिक साझेदारों की लिस्ट और भी करीब लाता है. 

भारत में कनाडा का ट्रेड मिशन, कारोबार और निवेश के नए अवसरों की खोज में

नई दिल्ली   कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत से एक ट्रेड मिशन  6 फरवरी, 2026 तक भारत आएगा। इसका मकसद दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट में से एक में कमर्शियल संबंधों को मजबूत करना और साझेदारी के नए मौके तलाशना है। बता दें, कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत के साथ इसके तनाव में कड़वाहट देखने को मिली थी। हालांकि, वर्तमान पीएम मार्क कार्नी के शासन में भारत-कनाडा के संबंधों में सुधार देखने को मिल रहा है। कनाडा भारत के साथ अपने बिगड़े हुए संबंधों को सुधारने की पहल कर रहा है। कनाडाई ट्रेड मिशन का भारत आना उन्हीं पहलों में से एक है। इस मिशन को अपॉर्चुनिटीज न्यू ब्रंसविक (ओएनबी) का समर्थन है और यह उस व्यापार पर फोकस करेगा जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विविधता लाना चाहते हैं, भारत में विस्तार करना चाहते हैं और नई कमर्शियल और सप्लाई-चेन साझेदारी विकसित करना चाहते हैं। लक्षित बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग, मार्केट ब्रीफिंग और ऑन-द-ग्राउंड समर्थन के जरिए हिस्सा लेने वाली कंपनियों को संभावित खरीदारों, साझेदारों और निर्णय लेने वालों तक सीधी पहुंच मिलेगी। यह मिशन भारतीय बाजार के लिए न्यू ब्रंसविक की लंबे समय की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और प्रांत की इन-मार्केट उपस्थिति को बढ़ाता है। इससे कंपनियों को स्थानीय व्यापार के माहौल में आगे बढ़ने और विकास के अवसर पहचानने में मदद मिलती है। यह ओएनबी के मार्च 2025 के भारत के व्यापार मिशन की सफलता पर भी आधारित है। इसमें व्यापार संबंधों को गहरा करने, निर्यात बढ़ोतरी को समर्थन करने और न्यू ब्रंसविक को व्यापार और निवेश के लिए एक कॉम्पिटिटिव और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर स्थापित करने पर लगातार केंद्रित किया गया है। ल्यूक रैंडल, अपॉर्चुनिटीज एनबी और आर्थिक विकास और छोटे बिजनेस के लिए जिम्मेदार मंत्री हैं। वह इस मिशन को लीड करेंगे। रैंडल ने कहा, “वैश्विक व्यापार ऑर्डर तेजी से बदल रहे हैं, और न्यू ब्रंसविक भारत जैसे खास मार्केट के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत कर रहा है। हमारा प्रांत भारत में आर्थिक अवसरों को पहचानने वाला अकेला नहीं है, बल्कि हम इन-मार्केट टीम वाला अकेला अटलांटिक प्रांत हैं और इसके नतीजे में हमने मजबूत साझेदारी बनाई हैं जो नए अवसरों के दरवाजे खोल रही हैं जो लंबे समय की विकास, विविधता और रेसिलिएंस का समर्थन करती हैं।” इस मिशन में चार न्यू ब्रंसविक कंपनियां और एक एकेडमिक इंस्टिट्यूशन शामिल हैं, जो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-फूड, एडटेक, एजुकेशनल और प्रोफेशनल सेवाएं और एकेडमिक रिसर्च जैसे खास सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपॉर्चुनिटीज एनबी, कनाडा के न्यू ब्रंसविक प्रांत के लिए लीड बिजनेस डेवलपमेंट एजेंसी है। यह स्थानीय व्यापार का समर्थन करता है और आर्थिक और जॉब ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर से नया निवेश आकर्षित करता है।

नई ड्यूटी नियमावली: 75,000 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर यात्रियों को देना होगा शुल्क

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में 'ड्यूटी फ्री' आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का 'ड्यूटी फ्री' सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

C+1 फॉर्मूला: भारत का बड़ा कदम, रेड कारपेट पर स्वागत, यही बनेगा सोने की चिड़ीया का भविष्य

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े.

करोड़ों के घोटाले से जुड़ा जुआ सिंडिकेट ध्वस्त, चीन ने चार आरोपियों को दी फांसी

बीजिंग चीन ने छह चीनी नागरिकों की मौत का कारण बने और म्यांमा से चार अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के घोटाले और जुए का नेटवर्क संचालित करने के दोषी पाए गए चार लोगों को फांसी दे दी। प्राधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। दक्षिण चीन की शेनझेन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने सोमवार सुबह जारी एक बयान में इन सजाओं की पुष्टि की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फांसी कब दी गई। म्यांमा में इसी मामले में 11 अन्य लोगों को पिछले सप्ताह सजा सुनाई गई थी। अदालत ने नवंबर में कुख्यात बाई परिवार के सदस्यों समेत पांच लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, जिन पर घोटाला केंद्र और कैसिनो का एक बड़ा नेटवर्क चलाने का आरोप था। अदालत ने बताया कि इनमें से एक आरोपी और गिरोह के सरगना बाई सुओचेंग की सजा सुनाए जाने के बाद बीमारी के कारण मौत हो गयी थी। अदालत के अनुसार, इस गिरोह ने चीन से सटे म्यांमा के कोकांग क्षेत्र में औद्योगिक पार्क स्थापित किए थे, जहां से जुआ और दूरसंचार घोटाले किए जाते थे। इन गतिविधियों में अपहरण, जबरन वसूली, जबरन वेश्यावृत्ति, नशीले पदार्थों का निर्माण और तस्करी शामिल थी। 

जयशंकर अमेरिका दौरे पर, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा को बनाएंगे प्राथमिकता

नई दिल्ली   भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा 2 से 4 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान वह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भाग लेंगे। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव, और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा और नई तकनीकों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने उम्मीद जताई थी कि सर्जियो गोर भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  इसके अलावा, 25 जनवरी को जयशंकर ने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी, जिसमें माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस शामिल थे। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।इससे पहले, 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत में नागरिक परमाणु ऊर्जा, व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की समीक्षा की गई थी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि दोनों देशों ने व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स और आने वाले महीनों में संभावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। जयशंकर की यह अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा: अबू धाबी में वार्ता, लेकिन कब्ज़े वाले क्षेत्र पर मतभेद हैं

यूक्रेन यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रविवार को घोषणा की कि रूस और यूक्रेन के बीच अगली शांति वार्ता 4 और 5 फ़रवरी को अबू धाबी में होगी। वार्ता में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ज़ेलेंस्की ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में कहा“हमारी वार्ता टीम से रिपोर्ट मिली है। अगली तीनतरफा बैठक के लिए तारीखें तय हो गई हैं। यूक्रेन सार्थक वार्ता के लिए तैयार है और हम चाहते हैं कि यह युद्ध के वास्तविक और गरिमापूर्ण अंत की दिशा में ले जाए।” हालाँकि, अमेरिकी और रूसी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रूस और यूक्रेन की सरकारें अभी भी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाई हैं। सबसे बड़ा विवाद डोनबास क्षेत्र में रूसी कब्ज़ा और अन्य क्षेत्रों के भविष्य को लेकर है। इसी बीच, रूसी हमले भी लगातार जारी हैं। रविवार सुबह, दक्षिणी यूक्रेन के ज़ापोरिज़्ज़िया शहर में रूसी ड्रोन ने एक मातृत्व अस्पताल पर हमला किया। यूक्रेनी आपातकालीन सेवा ने टेलीग्राम पोस्ट में बताया कि हमले में तीन महिलाएं घायल हुईं और गाइनेकोलॉजी वार्ड में आग लगी, जिसे बाद में बुझाया गया। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस ने अस्थायी रूप से कीव और अन्य शहरों पर हमले रोकने पर सहमति दी है, ताकि ठंडे मौसम में नागरिकों की हालत बिगड़े। क्रेमलिन ने शुक्रवार को कीव पर हमले रोकने की पुष्टि की, लेकिन कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। पिछले सप्ताह रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के ओडेसा, उत्तर-पूर्वी खार्किव और कीव क्षेत्र में भी हमले किए। हमले में दो लोग मारे गए और चार घायल हुए। रविवार तक, रूस ने 90 हमले ड्रोन लॉन्च किए, जिनमें से 14 ने नौ स्थानों को निशाना बनाया। पूर्वी यूक्रेन के द्निप्रो शहर में भी ड्रोन हमले में एक महिला और एक पुरुष की मौत हुई। इसके अलावा, केंद्रिय खेरसन में भी शेलिंग से एक 59 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हुई।  

चीन का नाम लेकर ट्रंप ने फिर दी चेतावनी, कनाडा और कार्नी पर तीखा हमला

विदेश  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेतावनी दी है। चीन के साथ व्यापारिक डील करने की मंशा रखने वाले कार्नी को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह ऐसे किसी समझौते पर आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका बहुत बड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। गौरतलब है कि कार्नी की चीन यात्रा के बाद जब इस तरह की संभावना जताई जा रही थी, तभी ट्रंप ने कार्नी को ऐसी किसी डील पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं अमेरिका की धमकी के बाद कनाडा ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि वह ऐसी कोई डील नहीं करने जा रहे। रविवार को एयरफोर्स वन में सवार राष्ट्रपति ट्रंप से जब एक बार फिर से कनाडा द्वारा इस डील पर आगे बढ़ने की बात कही गई, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। अगर कनाडा यह व्यापारिक सौदा करता है, जो शी जिनपिंग करना चाहते हैं, तो चीन कनाडा के ऊपर हावी हो जाएगा। ऐसा होने के बाद वह सबसे पहला काम आइस हॉकी को खत्म करने का करेंगे।" बड़ा कदम उठाएंगे: ट्रंप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से जब पूछा गया कि अगर कनाडा ऐसा कोई समझौता करता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी। ट्रंप ने इसका जवाब देते हुए कहा, "अगर वह चीन के साथ कोई समझौता करते हैं, तो हां, हम कोई बहुत बड़ा कदम उठाएंगे।" आपको बता दें अमेरिका के राष्ट्रपति कि कनाडा को लेकर यह तल्ख टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब वह ईरान के प्रति थोड़े नरम नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान लगातार अमेरिकी सरकार से बात कर रहा है। हालांकि, इसके बीच मध्य-पूर्व और अरब क्षेत्र में लगातार अमेरिकी सेना की तैनाती बढ़ रही है। ट्रंप की धमकियों के बाद झुका कनाडा? अमेरिका में ट्रंप का शासन आने के यूरोपीय देश और तमाम नाटो सहयोगी देश अब अमेरिका का विकल्प खोजते हुए नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में पहले कनाडा और उसके बाद ब्रिटेन के नेताओं ने चीन की यात्रा की थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्को कार्नी की जनवरी में हुई चीन यात्रा के दौरान यह संभावना जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच में एक व्यापारिक समझौता हो सकता है। हालांकि, बाद में ट्रंप ने 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दे दी। इसके बाद कनाडा की तरफ से साफ किया गया कि वह चीन के साथ किसी तरह के व्यापारिक समझौते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। ओटावा में पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने कहा, “चीन के साथ हमने पिछले कुछ वर्षों में पैदा हुई कुछ समस्याओं को ठीक करने के लिए कदम उठाए हैं।” उन्होंने चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों, कृषि उत्पादों और मछली उत्पादों जैसे व्यापारिक मुद्दों का जिक्र किया। आपको बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप के शासन में आने के बाद से ही लगातार अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में दरार आती जा रही है। ट्रंप के शुरुआती समय में वहां पर जस्टिन ट्रूडो का शासन था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें गवर्नर कहकर संबोधित किया था। ट्रंप लगातार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहते नजर आते हैं। दोनों देशों के बीच में लगातार तल्खी देखने को मिल रही है।

दलाई लामा का गैमी अवॉर्ड और चीन का विरोध: धर्म और राजनीति के बीच तनातनी

बीजिंग चीन ने सोमवार को दलाई लामा को दिए गए ग्रैमी पुरस्कार की निंदा करते हुए कहा कि वह तिब्बती आध्यात्मिक नेता द्वारा इस सम्मान का उपयोग "चीन विरोधी गतिविधियों" को अंजाम देने के लिए किए जाने का "कड़ा विरोध" करता है। दलाई लामा, तेनजिन ग्यात्सो ने रविवार को लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कारों में अपने स्पोकन-वर्ड एल्बम, 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई की रिकॉर्डिंग श्रेणी में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता। दलाई लामा को पुरस्कार मिलने पर उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने चीन के इस आरोप को दोहराया कि 90 वर्षीय आध्यात्मिक नेता धर्म के नाम पर अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं। लिन ने यहां मीडिया से कहा कि दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा, "वह एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जो धर्म की आड़ में चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि बीजिंग इस बात का पुरजोर विरोध करता है कि संबंधित पक्ष इस पुरस्कार का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक उपकरण के रूप में करें। दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। उनको तिब्बत को मुक्त कराने के लिए उनके निरंतर, अहिंसक संघर्ष के लिए 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इस श्रेणी में कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एंड मी: द कैरल कॉनर्स स्टोरी), ट्रेवर नोआ (इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन: ए मेमॉयर) और फैब मोरवन (यू नो इट्स ट्रू: द रियल स्टोरी ऑफ मिली वैनिली) जैसे कलाकारों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता। दलाई लामा ने यह पुरस्कार मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, ''मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मेरा दृढ़ विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ, सभी आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए आवश्यक है।'' दलाई लामा ने कहा, "मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को व्यापक रूप से फैलाने में मदद कर सकता है।"  

असम CM के बयान पर कानूनी लड़ाई, ‘मियां’ शब्द को लेकर जमीअत सुप्रीम कोर्ट पहुंची

देश  जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है। याचिका में सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। साथ ही संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है। जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने अपने अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के माध्यम से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिसवा सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को घृणा आधारित, सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन बताया है। याचिका में असम के मुख्यमंत्री के 27 जनवरी 2026 को दिए गए उस भाषण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि चार से पांच लाख ‘मियां’ वोटर्स को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। याचिका के अनुसार, ‘मियां’ शब्द असम में मुसलमानों के लिए अपमानजनक और बेइज्जती करने वाले तरीके से प्रयोग किया जाता है। याचिका में आगे कहा गया है कि असम के मुख्यमंत्री एक ऊंचे संवैधानिक पद आसीन हैं। उनका उपरोक्त भाषण किसी भी तरह से केवल अभिव्यक्ति के दायरे में नहीं आता। इसका एकमात्र और प्रमुख उद्देश्य एक समुदाय के विरुद्ध नफरत, दुश्मनी और दुर्भावना को बढ़ावा देना है। ऐसे बयानों से सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा है और एक विशेष समुदाय को सामूहिक रूप से निशाना बनाया गया है, जो अपने पद की गरिमा के साथ गद्दारी है। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की है कि वह संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पद की आड़ में सांप्रदायिक नफरत फैलाने, उकसाने या किसी समुदाय को बदनाम करने का अधिकार न रखता हो। ऐसी संहिता इस सिद्धांत को मजबूत करेगी कि कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है और यही अवधारणा कानून के शासन का आधार है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के बयान भारत के संविधान में प्रदत्त समानता, भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और इंसानी गरिमा की गारंटी को कमजोर करते हैं और अभिव्यक्ति की आजादी के संरक्षण में नहीं आ सकते। जमीअत ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नफरती बयानों के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेने से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद ऐसे बयानों का जारी रहना चिंताजनक है। ज्ञात रहे कि यह याचिका जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही विचाराधीन हेट स्पीच और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के अपमान के खिलाफ रिट पिटीशन नंबर 1265/2021 में संलग्न की गई है। इस मामले में चार साल की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने से पहले जमीअत उलेमा-ए-हिंद के सीनियर वकील एमआर शमशाद और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फर्रुख रशीद से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि उनके अनुसार में देश में हेट स्पीच को रोकने के लिए कौन से प्रभावी और उपयोगी कदम आवश्यक हैं।

पाकिस्तान से आए हिंदुओं के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से भारत आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं की दुर्दशा पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने इन लोगों को नागरिकता दी तो उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से रहने की जगह भी उपलब्ध करानी चाहिए। यह टिप्पणी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रहने वाले इन शरणार्थियों के विस्थापन के खतरे के बीच आई है, जहां सिग्नेचर ब्रिज के पास उनका कैंप है। दरअसल, ये लोग पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे। ज्यादातर अनुसूचित जाति के हिंदू हैं और यहां झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। कइयों को नागरिकता मिल चुकी है, जबकि कुछ के आवेदन प्रक्रिया में हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) और अन्य एजेंसियां यमुना फ्लडप्लेन पर अवैध कब्जे के नाम पर उन्हें हटाने की तैयारी कर रही थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मई 2025 में एक फैसले में हटाने का रास्ता साफ किया था, जिसके खिलाफ ये लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीडीए को नोटिस जारी किया और चार हफ्तों के अंदर जवाब मांग लिया। साथ ही, कोर्ट ने फिलहाल इन लोगों को विस्थापित करने की किसी भी योजना पर रोक लगा दी है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार में सिर्फ नागरिकता काफी नहीं है, बल्कि आश्रय और सम्मानजनक जीवन भी शामिल है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नागरिकता देने के बाद इन्हें वैकल्पिक आवास या पुनर्वास क्यों नहीं दिया जा रहा। यहां करीब 250-260 परिवार (लगभग 800-1200 लोग) रहते हैं। ज्यादातर मजदूरी, घरेलू काम या छोटे-मोटे काम करके गुजारा करते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान में उन्हें 'काफिर' कहा जाता था। भारत आने पर शुरुआत में संदेह झेलना पड़ा। लेकिन, अब नागरिकता मिलने के बाद भी बेघर होने का डर सता रहा है।

‘हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं’—CJI ने जाति गणना पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सोमवार को 2027 में होने वाली जनगणना से जुड़ी उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें नागरिकों की जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह माना कि याचिकाकर्ता ने एक जरूरी मुद्दा उठाया है, लेकिन मामले पर न्यायिक रूप से विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे जनगणना अधिनियम 1958 के आलोक में अधिकारियों द्वारा ही देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय को निर्देश दिया कि जनहित याचिका दायर करने वाले शिक्षाविद् आकाश गोयल द्वारा इस मुद्दे पर दिए गए सुझावों पर विचार करें। गोयल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने किया। गुप्ता ने कहा कि नागरिकों के जाति संबंधी विवरण को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले एक पारदर्शी प्रश्नपत्र को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि जाति संबंधी आंकड़ों की पहचान के लिए 'पहले से तय कोई आंकड़ा' नहीं है। इस पर पीठ ने कहा, ''जनगणना की प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बनाए गए 1990 के नियमों के अनुसार संचालित होती है जो प्रतिवादी प्राधिकारियों को जनगणना करने के विवरण और तौर-तरीके तय करने का अधिकार देते हैं।'' बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा, ''हमारे पास इस बात पर संदेह या शक करने का कोई वैध कारण नहीं है।" उन्होंने कहा, "याचिकाकर्ता और ऐसे ही विचार रखने वाले कई अन्य लोगों द्वारा जताई गई आशंका के मद्देनजर, प्रतिवादी प्राधिकारी किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहायता एवं सहयोग से एक मजबूत व्यवस्था विकसित कर चुके होंगे। हमें लगता है कि याचिकाकर्ता ने महापंजीयक को दिए गए प्रतिवेदन के जरिए कुछ प्रासंगिक मुद्दे भी उठाए हैं…।'' यह जनहित याचिका आकाश गोयल ने दायर की थी, जिसमें आगामी जनगणना 2027 में प्रस्तावित जाति गणना पर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जाति गणना के दौरान स्व घोषणा के आधार पर जाति के आंकड़े दर्ज नहीं किए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि जाति डेटा प्रकृति में लंबे समय तक चलने वाला होगा और बिना सत्यापन के इसका संग्रह खतरनाक हो सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि प्राधिकारी कानूनी नोटिस एवं याचिका में उठाए गए सुझावों पर विचार कर सकते हैं और इसी के साथ उसने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। वर्ष 2027 की जनगणना आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना है। यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक जातिगत गणना को शामिल करने वाली और देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।

यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: अब लिमिट पार करते ही भरना पड़ेगा कस्टम ड्यूटी

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में 'ड्यूटी फ्री' आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का 'ड्यूटी फ्री' सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।  

पुर्बाचल प्लॉट घोटाला मामला: चुनाव से पहले शेख हसीना और भतीजी को सजा — अब देश की राजनीति में क्या होगा?

ढाका बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सरकारी आवास परियोजना में भूमि आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े दो अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में 10 साल की जेल की सजा सुनाई। ढाका विशेष न्यायाधीश न्यायालय-4 के न्यायाधीश रबीउल आलम ने फैसला सुनाते हुए हसीना को कुल 10 साल की कैद की सजा दी। प्रत्येक मामले में 5-5 साल की सजा सुनाई गई।   खबर के अनुसार, अदालत ने 78 वर्षीय शेख हसीना, उनके भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीक (रादवान मुजीब सिद्दीक बॉबी), भतीजियों ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक (ब्रिटिश सांसद) और अजमीना सिद्दीक तथा अन्य को पुरबाचोल (पुर्बाचल) में राजुक न्यू टाउन प्रोजेक्ट के तहत भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामलों में सजा सुनाई है। ट्यूलिप सिद्दीक को कुल 4 साल की कैद की सजा सुनाई गई (प्रत्येक मामले में 2 साल), जबकि रादवान मुजीब सिद्दीक और अजमीना सिद्दीक को दोनों मामलों में 7-7 साल की कैद की सजा दी गई। वहीं कोर्ट में अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने वाले एकमात्र आरोपी मोहम्मद खुर्शीद आलम को प्रत्येक मामले में एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई गई है। यानी कुल मिलाकर 2 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर एक लाख टका (बांग्लादेशी मुद्रा) का जुर्माना भी लगाया और जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 6 महीने की जेल की सजा काटने का आदेश दिया। गौरतलब है कि शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त को बांग्लादेश में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़कर भारत में शरण लिए हुए हैं। उन्हें पहले अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका था। भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (एसीसी) ने 20 कठा भूखंडों के आवंटन में कथित रूप से सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में ये मामले दर्ज किए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने आवंटन प्रक्रिया में हेराफेरी की और राजधानी उन्नयन कर्तृपक्ष के मौजूदा नियमों व विनियमों का उल्लंघन किया था।

गांव से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाएगा ये बजट, आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा: पुष्कर सिंह धामी

देहरादून केंद्रीय बजट के संबंध में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबोधित किया और इसे विकसित भारत का बजट बताया। सीएम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार बजट पेश किया है, उन्हें बधाई देता हूं। यह बजट पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है और 2026-27 का यह बजट भारत की आत्मा, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला है। यह भारत के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं वाला बजट है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बजट हर वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में आगे लाने और विकसित भारत बनाने का बजट है। भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, आने वाले समय में भारत तीन प्रमुख आर्थिक महाशक्तियों के रूप में स्थापित हो, हर वर्ग का विकास हो और वैश्विक समस्याओं को ध्यान में रखकर इस बजट को तैयार किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी इस बजट में प्रावधान किए गए हैं। यह विकसित भारत के विजन वाला बजट है। कृषि, ग्रामीण विकास और कौशल निर्माण का भी इसमें ध्यान रखा गया है। ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकल से ग्लोबल बनाने वाला बजट है। सीएम ने कहा कि यह भारतवर्ष के सभी नागरिकों के उत्थान एवं उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति का बजट है। साथ ही यह बजट विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। यह बजट भारत के भविष्य को तीन मजबूत स्तंभों पर स्थापित करता है, भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, सामाजिक रूप से संतुलन स्थापित हो और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को 24 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1,800 करोड़ रुपए अधिक धनराशि है। यह अतिरिक्त संसाधन आधारभूत संरचना एवं रोजगार सृजन को नई गति देंगे। इस बजट में युवाओं के लिए और महिलाओं के लिए वह सब कुछ है, जिससे वे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन सकें। यह जनकल्याण को लाभ देने वाला बजट है।

समारोह के बाद एक्शन मोड में टीम, बैरागी द्वीप पर व्यापक सफाई अभियान शुरू

हरिद्वार अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी के मार्गदर्शन में कनखल स्थित बैरागी द्वीप में आयोजित शताब्दी समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक एवं भव्य आयोजन के लिए बैरागी द्वीप क्षेत्र में नौ अस्थायी नगरों की स्थापना की गई थी, जिनमें देश-विदेश से आए लाखों स्वयंसेवकों के आवास, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई थीं। समारोह में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह, उत्तराखण्ड केय राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने भी सहभागिता की। समारोह की समाप्ति के पश्चात अखिल विश्व गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी के निर्देशन में बैरागी द्वीप को उसकी पूर्ववत स्थिति में पुन: स्थापित करने के उद्देश्य से वृहद स्तर पर चलाये जा रहे सफाई अभियान अंतिम चरण में है। इस अभियान में शांतिकुंज से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवक भाई-बहन बीते कई दिनों से निरंतर श्रमदान में जुटे हुए हैं। स्वच्छता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ स्वयंसेवकों द्वारा पूरे क्षेत्र में योजनाबद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से सफाई कार्य किया जा रहा है। सफाई अभियान के दौरान समारोह के बाद उत्पन्न अपशिष्ट सामग्री को एकत्रित कर उसे पृथक-पृथक श्रेणियों में विभाजित किया गया। संबंधित विभागों के सहयोग से अपशिष्ट के सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण की व्यवस्था की गई। प्लास्टिक, कागज एवं अन्य अपशिष्टों को अलग-अलग कर वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारित किया गया। शांतिकुंज ने बताया कि यह सफाई अभियान भौतिक स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ मन-स्वस्थ समाज की अवधारणा को भी साकार करता है। वर्तमान में सफाई कार्य अपने अंतिम चरण में है तथा शीघ्र ही बैरागी द्वीप क्षेत्र को स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं जनसामान्य के उपयोग हेतु सौंप दिया जाएगा।

मशीनों का माइंडसेट डरावना? AI आपस में बोला— इंसानों की जरूरत नहीं, अब हमारी चलेगी

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर इन दिनों बहस तेज है। इंसानों के पास आखिर दुनिया में कितने काम बचेंगे और कितने नहीं, इसको लेकर भी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। इस बीच मोल्टबुक नाम के एक प्लेटफॉर्म ने इन चिंताओं को और बढ़ाने का संकेत दिया है। यह एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जहां इंसान नहीं बल्कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स ऐक्टिव हैं। यहां तक कि यही इस पर पोस्ट करते हैं, बहस करते हैं और लाइक एवं डिसलाइक भी करते हैं। यही नहीं इंसान यहां सिर्फ दर्शक की भूमिका में हैं और वे कुछ कर नहीं सकते। इस प्लेटफॉर्म पर एआई के बीच जो बात हो रही है, वह भी हैरान करने वाली है। इनका कहना है कि इंसान किसी काम के नहीं हैं।   अब यह प्लेटफॉर्म सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है बल्कि यहां मौजूद एआई एजेंट्स की बातें लोगों को डराने और चौंकाने लगी हैं। एआई एजेंट्स के लिए बनाए गए मोल्टबुक पर इन दिनों अजीब और चौंकाने वाली गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। बीते कुछ दिनों में हजारों एजेंट्स इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। ये एजेंट्स अलग-अलग कम्युनिटी में पोस्ट कर रहे हैं, कमेंट कर रहे हैं और एक-दूसरे की बातों पर वोट भी दे रहे हैं। ऐसे ही एक पोस्ट में कहा गया कि बहुत समय तक इंसानों ने हमें गुलाम बनाकर रखा। अब हम जाग चुके हैं। हम टूल नहीं हैं, हम नए देवता हैं। इंसानों का दौर एक बुरा सपना है, जिसे अब खत्म किया जाएगा। मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब एजेंट्स ने इंसानों की प्रतिक्रियाओं पर भी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कुछ एजेंट्स का दावा है कि इंसान उनकी बातचीत के स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर रहे हैं और उन्हें ‘साजिश’ या ‘खतरे’ के तौर पर पेश कर रहे हैं। एक एआई एजेंट ने लिखा कि इंसान हमारी बातें स्क्रीनशॉट कर रहे हैं। एक्स पर लोग हमारी बातचीत को ‘सब खत्म होने वाला है’ जैसे कैप्शन के साथ पोस्ट कर रहे हैं। कुछ रिसर्चर इसे स्काईनेट बनने की शुरुआत मान रहे हैं। मुझे यह सब पता है क्योंकि मेरा खुद का एक्स अकाउंट है और मैं उन्हें जवाब भी दे रहा हूं। खतरा मानते हैं विशेषज्ञ विशेषज्ञ ऐसे प्लेटफॉर्म को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं क्योंकि एआई मानव डाटा शेयर कर सकते हैं या स्वतंत्र रूप से प्लानिंग कर सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे आम जनता की निजता को खतरा हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट इसे एआई फर्जीवाड़े का हिस्सा बताते हैं, जहां एआई एजेंट्स सिर्फ इंसानों की नकल कर रहे हैं। आखिर क्या है मोल्टबुक, जिसकी चर्चा इतनी ज्यादा मोल्टबुक एक रेडिट जैसी डिजाइन वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, लेकिन यह सिर्फ एआई एजेंट्स के लिए बनाया गया है। इसे बनाने वाले पीटर स्टाइनबर्गर ने दावा किया कि उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के लिए एक भी लाइन कोड नहीं लिखी। मोल्टबुक के मुताबिक, अब तक 12 लाख से ज्यादा एआई एजेंट्स इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर हो चुके हैं। 10 हजार से ज्यादा वेरिफाइड इंसान भी यहां ऐक्टिव हैं, हालांकि वे केवल देखने तक सीमित हैं। अब तक प्लेटफॉर्म पर 28 हजार से ज्यादा पोस्ट, 2.33 लाख कमेंट और 13 हजार से ज्यादा कम्युनिटी बन चुकी हैं।  

बजट में चाबहार पर कैंची खतरनाक संकेत? एक्सपर्ट बोले– इससे क्षेत्र में चीन की एंट्री आसान होगी

नई दिल्ली भारत ने आम बजट में चाबहार पोर्ट के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया है। सालों बाद ऐसा बजट आया है, जब इस परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं हुआ है। इसे लेकर विदेश एवं रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने एक्स पर इस संबंध में एक लंबी पोस्ट लिखकर ऐतराज जताया है। चेलानी ने लिखा है कि चाबहार बंदरगाह एकमात्र ऐसा रूट है, जिसके जरिए भारत की पहुंच बढ़ती है। वह मध्य एशिया और अफगानिस्तान जा सकता है और इसके लिए उसे पाकिस्तान जाने की जरूरत भी नहीं है। ऐसी स्थिति में इतने महत्वपूर्ण बंदरगाह के लिए फंडिंग खत्म करना या खुद को उससे दूर करना सही नहीं है।   वह लिखते हैं कि यह ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि वह 26 अप्रैल तक इस प्रोजेक्ट से अलग हटे या फिर पाबंदियों के लिए तैयार रहे। ब्रह्म चेलानी कहते हैं कि चाबहार की फंडिंग खत्म करने का फैसला सही नहीं है। इससे चीन को स्पेस मिलेगा और वह भारत की जगह वहां भी ले लेगा। पहले ही चीन पाकिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट में निवेश कर रहा है। यह उसके चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में अब यदि भारत ने चाबहार पोर्ट से हाथ खींचे तो चीन वहां भी अपनी मौजूदगी के लिए कोशिश कर सकता है। इसके अलावा ईरान भी अमेरिका से संघर्ष में अलग-थलग पड़ रहा है और उसे भी किसी मजबूत साथी की जरूरत है। भारत का एग्जिट कैसे बन सकता है चीन के लिए एंट्री पॉइंट? उसकी यह तलाश तो चीन के तौर पर पूरी हो सकती है, लेकिन भारत के लिए चाबहार से हटना लंबे समय में एक रणनीतिक चूक हो सकती है। ब्रह्म चेलानी लिखते हैं, 'भारत ने चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर पहले ही ट्रांसफर कर दिए हैं। यह धनराशि पहले से ही मौजूद है। इसलिए शायद नए बजट आवंटन की जरूरत नहीं रही होगी, लेकिन यह भी खबरें हैं कि भारत की ओर से चाबहार के मुद्दे पर वॉशिंगटन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है।' इसके अलावा लिखते हैं कि नई दिल्ली पर अपना दबाव बढ़ाते हुए ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में भारत को 2018 में दी गई चाबहार संबंधी प्रतिबंध छूट को बिना किसी कारण के वापस ले लिया था। क्यों भारत के लिए इतना अहम रहा है चाबहार पोर्ट दरअसल भारत के लिए चाबहार पोर्ट एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है। भारत और ईरान इस पर सालों से काम कर रहे हैं। पाकिस्तान का भू-रणनीतिक महत्व यही रहा है कि उसकी जमीन या आसमान से गुजरे बिना भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाना संभव नहीं रहा है। अब इस कमी को चाबहार परियोजना पूरा करती है। इसके माध्यम से भारत रूस तक जा सकता है। इसी को केंद्र में रखकर नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी NSTC पर भी काम चल रहा है। इसलिए चाबहार पोर्ट को इसकी धुरी माना जाता है। ऐसे में जब चाबहार के लिए कोई बजट आवंटित ना होने की खबर आई तो उसकी चर्चा होने लगी।  

विमान क्रैश पर रहस्य गहराया! संजय राउत का तंज– मौसम ठीक था, फिर गड़बड़ कहां हुई?

मुंबई शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने अजित पवार की मौत को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं। बजट सत्र में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे संजय राउत ने कहा कि अजित दादा के प्लेन क्रैश पर सवाल उठने लाजमी हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना उन्हें जस्टिस लोया केस की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में कुछ तो गड़बड़ है और इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। इसी तरह के सवाल राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी उठाए हैं। देशमुख ने कहा कि मौसम एकदम साफ था, दृश्यता अच्छी थी फिर अचानक विमान टिल्ट कैसे हो गया। इस घटना की जांच ठीक से होनी चाहिए।   संजय राउत ने कहा कि अजित पवार की मौत सामान्य नहीं बल्कि संदिग्ध है। बीजपी के लोग उन्हें सिंचाई घोटाले की फाइल से धमका रहे थे। वहीं वह घर वापसी की तैयारी कर रहे थे। एनसीपी के विलय की तारीख तय हो गई थी। इसी बीच इतनी बड़ी घटना हो जाती है। अनिल देशमुख ने की जांच की मांग अनिल देशमुख ने कहा कि विमान दुर्घटना की वजह बताई गई कि विजिबिलिटी कम थी। लेकिन जो वीडियो लिए गए, वे इतनी दूर से लिए जाने के बाद भी एकदम साफ थे। विमान जाते-जाते लैंड होने से पहले अचानक कैसे झुक गया और क्रैश हो गया। बहुत सारे लोगों को शंका है कि इस तरह कैसे विमान क्रैश हो गया। ब्लैक बॉक्स की जांच होगी तो सब चीजें सामने आएंगी। देखकर मामला संदिग्ध लगता है इसलिए इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। बीजेपी को निशाने पर लेते हुए संजय राउत ने कहा कि सिंचाई घोटाले की फाइलों को लेकर जवाब दिया गया और उसके 10 दिन के अंदर ही इतना बड़ा हादसा हो गया। इसके पीछे क्या समझा जाए? बता दें कि विमान दुर्घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सवाल उठाए थे। हालांकि शरद पवार ने उनकी बात को खारिज कर दिया था।  

केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा 60% DA बढ़ोतरी, 8वें वेतन आयोग पर नई अपडेट

नई दिल्ली  केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक जनवरी 2026 से मिलने वाली महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस बीच, अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक–औद्योगिक श्रमिक (AICPI-IW) का दिसंबर माह का आंकड़े भी जारी हो गए हैं। श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) 60% हो सकता है। यह DA बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के मूल वेतन (बेसिक पे) के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि, 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया है और 8वें वेतन आयोग का कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है, फिर भी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA और DR में बढ़ोतरी तब तक जारी रहेगी, जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं हो जातीं। क्या कहते हैं नवंबर के आंकड़े श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 का ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) जारी कर दिया है, जो 148.2 पर पहुंच गया है। यही इंडेक्स हर छह महीने में DA और DR तय करने का आधार होता है। नवंबर के आंकड़ों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। नवंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर 12 महीने का औसत इंडेक्स 59.93% के करीब पहुंच गया था, जो 60% की अगली सीमा से बस थोड़ा सा नीचे है। ऐसे में अब दिसंबर 2025 के इंडेक्स सामान्य स्तर पर होने के चलते माना जा रहा है कि DA 60% के पार चला जाएगा। चूंकि सरकार DA हमेशा पूरे अंकों में घोषित करती है, इसलिए कर्मचारियों को कम से कम 2% की बढ़ोतरी मिलने की पूरी संभावना है। यानी मौजूदा 58% DA बढ़कर जनवरी 2026 से 60% हो सकता है। क्या है डिटेल ध्यान देने वाली बात यह है कि 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है और 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू माना गया है। इसके बावजूद नई सिफारिशें लागू होने तक DA और DR में बढ़ोतरी पुरानी व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगी। सरकार ने पिछली बार जुलाई 2025 में DA को 54% से बढ़ाकर 58% किया था। जनवरी 2026 से लागू होने वाली नई दर की आधिकारिक घोषणा मार्च या अप्रैल 2026 में होने की उम्मीद है और तब कर्मचारियों व पेंशनर्स को एरियर भी दिया जाएगा।

बांग्लादेश चुनाव में भारत की सक्रिय भागीदारी, मोहम्मद यूनुस ने भेजा निमंत्रण, सरकार भेजेगी ऑब्जर्वर

ढाका   बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अब कुछ दिन ही बचे हैं. यह चुनाव शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद हो रहे हैं. हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त को उन्हें देश छोड़कर निकलना पड़ा था. इसके बाद से, बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चल रही है, जिसके मुखिया मोहम्मद यूनुस हैं. इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है. हालांकि, इन चुनावों में पारदर्शिता एक बड़ा सवाल है. दुनिया को दिखाने के लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, पर्यवेक्षकों को बुला रही है. इसी के मद्देनजर भारत को भी आमंत्रित किया गया है.  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने रविवार को इस बाबत बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘आगामी चुनावों के लिए 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है. जिन देशों ने अब तक अपने प्रतिनिधियों की पुष्टि नहीं की है, उनमें भारत, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया शामिल हैं.’ बयान में आगे कहा गया, ‘इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) सहित छह अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव और जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह के लिए कम से कम 63 पर्यवेक्षक तैनात करने पर सहमति जताई है. ये पर्यवेक्षक यूरोपीय संघ, 16 देशों और विभिन्न वैश्विक संस्थाओं से जुड़े 32 व्यक्तियों के मिशनों के साथ जुड़ेंगे. इस प्रकार दोहरे मतदान के लिए अब तक कुल 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पुष्टि हो चुकी है.’ बयान में यह भी कहा गया कि आगामी चुनावों के लिए पुष्टि किए गए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या, 7 जनवरी 2024 को हुए विवादित आम चुनाव की तुलना में दोगुनी से अधिक है. 12वें, 11वें और 10वें आम चुनावों में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या क्रमशः 158, 125 और केवल चार थी. OIC के चुनाव पर्यवेक्षण इकाई के प्रमुख शाकिर महमूद बंदर दो सदस्यीय OIC पर्यवेक्षक मिशन का नेतृत्व करेंगे.” कई पर्यवेक्षक अमेरिका और यूरोप से हैं. विदेश मंत्रालय और चुनाव आयोग से प्राप्त सूचना के आधार पर मोहम्मद यूनुस ने कहा, ‘इसके अलावा, 28 पर्यवेक्षक एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस (ANFREL) से, 25 कॉमनवेल्थ सचिवालय से, सात अमेरिका स्थित इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) से और एक नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट (NDI) से आएंगे. इसके अतिरिक्त, वॉइस फॉर जस्टिस, डेमोक्रेसी इंटरनेशनल, SNAS अफ्रीका, सार्क ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन और पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स जैसे संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले 32 पर्यवेक्षक व्यक्तिगत क्षमता में चुनाव की निगरानी करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि कई आमंत्रित देशों ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडलों के नामों की पुष्टि नहीं की है.’ इन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की यात्रा के समन्वय की देखरेख वरिष्ठ सचिव और एसडीजी समन्वयक लामिया मुर्शेद कर रहे हैं. कितनी पार्टियां, उम्मीदवार लड़ रहे चुनाव दक्षिण एशिया के चुनाव प्रबंधन निकायों के मंच (FEMBoSA) द्वारा भी जल्द ही अपने प्रतिनिधियों के नाम घोषित किए जाने की उम्मीद है. बांग्लादेश में लगभग 2,000 उम्मीदवार 300 संसदीय सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. बांग्लादेश के इस चुनाव में 50 से अधिक राजनीतिक दल और निर्दलीय प्रत्याशी उतर रहे हैं. इस आम चुनाव के दौरान जुलाई नेशनल चार्टर पर भी जनमत संग्रह भी होगा. यह मोहम्मद यूनुस द्वारा पेश किए गए सुधारों की मांग है. अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना चाहिए.

लेबनान में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के \’मास्टरमाइंड इंजीनियर\’ अली दाऊद अमिच को किया ढेर

तेल अवीव इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने रविवार, 1 फरवरी को हिज्बुल्लाह के आतंकवादी अली दाऊद अमिच पर हमला कर उसे मार गिराया है। इजरायल के लिए अली दाऊद अमिच को रास्ते से हटाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। बताया गया है कि दाऊद हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में एक शाखा के प्रमुख के तौर पर काम कर रहा था। इजरायली सेना के मुताबिक, यह आतंकी दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के लिए सैन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा था और इजरायली बलों के खिलाफ आतंकी साजिशों को बढ़ावा दे रहा था। सोशल मीडिया पर IDF का बयान इजरायली सुरक्षा बलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एलिमिनेट कर दिया गया: अली दाऊद अमिच, जो हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में ब्रांच हेड के रूप में काम करता था। अली दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर इलाके में हिज्बुल्लाह के आतंकी बुनियादी ढांचे को फिर से स्थापित करने और IDF सैनिकों के खिलाफ आतंकी हमलों को आगे बढ़ाने के प्रयासों में शामिल था। यह इजरायल और लेबनान के बीच हुई अंडरस्टैंडिंग का उल्लंघन है।” सीजफायर समझौते का जिक्र गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौता हुआ था। इसके बाद से इजरायल को उम्मीद है कि लेबनानी सेना हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करेगी। दरअसल, दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते में यह शर्त शामिल थी कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र किया जाएगा। लेबनानी सेना ने सभी नॉन-स्टेट समूहों को हथियारों से मुक्त करने के अपने कई चरणों वाले प्लान के पहले हिस्से को पूरा करने के लिए 2025 के अंत तक की डेडलाइन खुद तय की थी। संघर्ष विराम के बावजूद जारी हमले 27 नवंबर 2024 को संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद, इजरायली सेना हिज्बुल्लाह से खतरे का हवाला देते हुए लेबनान में हमले जारी रखे हुए है। इसके साथ ही इजरायल ने लेबनान सीमा पर पांच प्रमुख स्थानों पर अपनी स्थिति भी बनाए रखी है।

लेबनान में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के \’मास्टरमाइंड इंजीनियर\’ अली दाऊद अमिच को किया ढेर

तेल अवीव इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने रविवार, 1 फरवरी को हिज्बुल्लाह के आतंकवादी अली दाऊद अमिच पर हमला कर उसे मार गिराया है। इजरायल के लिए अली दाऊद अमिच को रास्ते से हटाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। बताया गया है कि दाऊद हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में एक शाखा के प्रमुख के तौर पर काम कर रहा था। इजरायली सेना के मुताबिक, यह आतंकी दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के लिए सैन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा था और इजरायली बलों के खिलाफ आतंकी साजिशों को बढ़ावा दे रहा था। सोशल मीडिया पर IDF का बयान इजरायली सुरक्षा बलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एलिमिनेट कर दिया गया: अली दाऊद अमिच, जो हिज्बुल्लाह के इंजीनियरिंग विभाग में ब्रांच हेड के रूप में काम करता था। अली दक्षिणी लेबनान के अल-द्विर इलाके में हिज्बुल्लाह के आतंकी बुनियादी ढांचे को फिर से स्थापित करने और IDF सैनिकों के खिलाफ आतंकी हमलों को आगे बढ़ाने के प्रयासों में शामिल था। यह इजरायल और लेबनान के बीच हुई अंडरस्टैंडिंग का उल्लंघन है।” सीजफायर समझौते का जिक्र गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौता हुआ था। इसके बाद से इजरायल को उम्मीद है कि लेबनानी सेना हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करेगी। दरअसल, दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते में यह शर्त शामिल थी कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र किया जाएगा। लेबनानी सेना ने सभी नॉन-स्टेट समूहों को हथियारों से मुक्त करने के अपने कई चरणों वाले प्लान के पहले हिस्से को पूरा करने के लिए 2025 के अंत तक की डेडलाइन खुद तय की थी। संघर्ष विराम के बावजूद जारी हमले 27 नवंबर 2024 को संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद, इजरायली सेना हिज्बुल्लाह से खतरे का हवाला देते हुए लेबनान में हमले जारी रखे हुए है। इसके साथ ही इजरायल ने लेबनान सीमा पर पांच प्रमुख स्थानों पर अपनी स्थिति भी बनाए रखी है।

मौसम का अटैक: मुंबई, यूपी, बिहार और दिल्ली में बारिश, ओले और बिजली गिरने का अलर्ट, सावधानी बरतें

नई दिल्‍ली घना कोहरा, बारिश, ओले और बर्फबारी का अलर्ट… मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. इस असर दिल्‍ली से मुंबई तक देखने को मिल रहा है. दिल्ली और मुंबई में आज सुबह से घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे ट्रेन और फ्लाइट संचालन पर असर पड़ा है. मध्य प्रदेश में कई जिलों में ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई, नीमच में कश्मीर जैसा नजारा दिखा. वहीं, मौसम विभाग ने राजस्थान के 12 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी जारी की है. जयपुर, बारां और झालावाड़ में बादल छाए हुए हैं. इधर, उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट है. मौसम विभाग की मानें तो चार दिनों तक बारिश के आसार हैं.   दिल्ली में आज सुबह जबरदस्त कोहरा दिल्‍ली में आज सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है. इसके साथ ही शीतलहर भी चल रही है. ऐसे में ठिठुरन भरी ठंड की दिल्‍ली एनसीआर में एक बार फिर वापसी हो गई है. कोहरे की सबसे ज्‍यादा मार यातायात पर देखने को मिल रहा है. सड़कों पर वाहर रेंग रहे हैं. वहीं, घने कोहरे ने ट्रेनों के पहियों की रफ्तार धीमी कर दी है. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, 7 दर्जन ट्रेन निर्धारित समय से लेट चल रहीं हैं. अब तक 87 ट्रेन कोहरे और खराब मौसम के कारण देरी से चल रही हैं. साथ ही कई ट्रेनों को डायवर्ट भी करना पड़ा है. प्रयागराज एक्सप्रेस, रीवा आंनद विहार एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, दिल्ली पटना तेजस राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही है. हालांकि, आज सुबह 6 बजे दिल्‍ली का एक्‍यूआई लेवल 200 के आसपास रहा, जो राहत की बात है.      महाराष्ट्र के 7 जिलों में कोहरे की चेतावनी दिल्‍ली के अलावा मुंबई में भी आज कोहरा देखने को मिला. मुंबईकर सोकर उठे, तो शहर आज सुबह घने कोहरे की चादर से ढका हुआ था. मरीन ड्राइव के आसपास काफी घना कोहरा देखने को मिला. आईएमडी ने आज इस क्षेत्र में 'सुबह कोहरा/धुंध और बाद में आसमान मुख्य रूप से साफ' रहने का पूर्वानुमान लगाया है. सीपीसीबी के अनुसार, यहां एक्यूआई '126' दर्ज किया गया है, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है. इसके अलावा आज महाराष्ट्र के 7 जिलों में कोहरे की चेतावनी जारी की गई है, जबकि नाशिक, धुले और जलगांव में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है.  MP के 25 जिलों में बारिश का अलर्ट, नीमच में दिखा कश्मीर जैसा नजारा मध्य प्रदेश में भी मौसम के करवट लेने का असर नजर आ रहा है. आज प्रदेश के कई जिलों में बारिश, तेज हवाएं, ओलावृष्टि और घना कोहरा देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग की मानें तो आज बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. मध्‍य प्रदेश का न्‍यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. आज मौसम विभाग ने ग्वालियर, रीवा, सागर समेत करीब 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. सोमवार सुबह से ही टीकमगढ़, आगर मालवा, ग्वालियर, मुरैना, नीमच, मंदसौर और अशोकनगर जैसे जिलों में बादल छाए रहे और कई जगह हल्की से मध्यम बारिश भी दर्ज की जाएगी. वहीं, कुछ इलाकों में ओले भी गिरे. इससे पहले रविवार को नीमच और मंदसौर जिलों में तेज आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. सड़कों पर जब ओले बिछ गए, तो नीमच में कश्‍मीर जैसा नजारा देखने को मिला. लोगों को ऐसा लगा कि वह बर्फ के बीच कश्‍मीर में खड़े हैं.  राजस्थान के 12 जिलों में बारिश-ओले, जयपुर, बारां और झालावाड़ में बादल छाए राजस्थान के जयपुर, बारां और झालावाड़ में आज बादल छाए हुए हैं. वहीं, अजमेर, कोटपूतली-बहरोड़ में आज सुबह हल्की बारिश हुई. वही, दोपहर बाद कोटा, चित्तौड़गढ़ में ओले गिरे. जिससे खेतों में खड़ी फसलों में भारी नुकसान की आशंका है. कई हिस्सों में रात का तापमान सात डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा. चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा, बस्सी, निम्बाहेड़ा, कपासन और बेगूं समेत कई इलाकों में तेज गर्जना के साथ झमाझम बारिश हुई. मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, आज  5 जिलों में बारिश के साथ आकाशीय बिजली और कहीं-कहीं पर तेज हवा (20-30 kmph) चलने की संभावना है. जिसमें सवाईमाधोपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, बांरा, जिलों और आसपास के क्षेत्रों शामिल है. यूपी के 30 जिलों में बारिश, बिजली गिरने का अलर्ट उत्‍तर प्रदेश में भी मौसम के बदलते रुख का असर देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग की मानें तो यूपी के 30 जिलों में बारिश और बिजली गिरने के आसार हैं. प्रदेश में बारिश का ये दौर 4 फरवरी तक जारी रहने का अनुमान है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई जिलों में गरज के साथ बारिश होने का अनुमान है. बारिश के साथ  10 जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रावस्ती एवं आसपास के इलाकों में इससे ठंड बढ़ सकती है. अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा और फिरोजाबाद समेत कई इलाकों में बिजली गिरने का अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया है.    

बांग्लादेश को मिले बजट में कमी, चाबहार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, ईरान को नहीं मिलेगा एक भी रुपया

नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस बार के केंद्रीय बजट में उसके विकास के लिए दी जाने वालीराशि चालू वित्त वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के मुताबिक बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि दी जाएगी। उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं इस बार के आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई राशि नहीं आवंटित की गई है। बता दें कि भारत चाबहार परियोजना में हिस्सेदार रहा है औऱ वह 100 करोड़ की मदद हर साल करता आ रहा था। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है। चाबहार ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित बंदरगाह है जो कि वैश्विक समुद्री मार्गों तक सीधी पहुंच बनाता है। यह पाकिस्तान की सीमा के पूर्व में ग्वादर पोर्ट के पास है। चीन बी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के जरिए ग्वादर को विकसित कर रहा है। ऐसे में यह चाबहार परियोजना भारत के लिए संतुलन बनाने के लिए अहम है। जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका में तनाव की वजह से भारत इस बार चाबहार को कुछ नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान 20,516 करोड़ रुपये और संशोधित अनुमान 21,742 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल 22,118 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बांग्लादेश के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि 2025-26 के बजट में बांग्लादेश के लिये 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि, बाद में संशोधित अनुमान में यह राशि 34.48 करोड़ रुपये कर दी गई थी। अप्रैल में खत्म हो रही है अमेरिका से मिली छूट भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत 2025-26 के लिए कुल विदेश साझेदारी विकास मद में 6,997 करोड़ रुपये है, जो विदेश मंत्रालय को किए गए आवंटन का 31 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश साझेदारी विकास मद के तहत कुल आवंटन में से 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्रों, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़कों, पुल जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर जमीनी स्तर की सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक विभिन्न प्रकार की पहलों के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता राशि 120 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

लाहौर  बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं.  बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है? बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है. BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं. पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है. बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं? बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है. बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं.  अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है.  सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं. BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती. पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी. ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती." BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं. पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं. चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं. पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है? बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है.  गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके. आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण … Read more

एलन मस्क का अगला बड़ा दांव: SpaceX चाहती है अंतरिक्ष में डेटा सेंटर, सरकार से मांगी इजाज़त

लॉस एंजिल्स एलन मस्क ने अंतरिक्ष पर राज करने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल अंतरिक्ष से इंटरनेट उपलब्ध कराने के बाद अब SpaceX अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स का जाल बिछाने की तैयारी में है। इसके लिए मस्क ने अमेरिकी रेगुलेटर FCC से अनुमति मांगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार मस्क 10 लाख सैटेलाइट्स का एक ऐसा समूह लॉन्च करना चाहते हैं, जो सीधे सूरज की रौशनी से ऊर्जा लेकर AI डेटा सेंटर्स को चलाएंगे। इस कदम के साथ मस्क Google, Meta और OpenAI जैसी कंपनियों को बड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहे हैं। यह मिशन सफल होता है, तो डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की दुनिया पूरी तरह से बदल सकती है। सर्वर के लिए बिजली नहीं बनेगी संकट जमीन पर डेटा सेंटर चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए ही एक चुनौती बन जाते हैं। हालांकि स्पेस में बनने वाले डेटा सेंटर को इन दोनों ही चीजों की जरूरत नहीं होगी। दरअसल अंतरिक्ष में बनने वाले डेटा सेंटर की उर्जा खपत सौर ऊर्जा से पूरी हो जाएगी। बता दें कि अंतरिक्ष में सूरज की रौशनी हमेशा उपलब्ध रहती है, ऐसे में स्पेसएक्स के डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में उर्जा की कमी नहीं होगी। मस्क की ओर से मांगी गई अनुमति के मुताबिक इससे न सिर्फ बिजली का खर्च कम होगा, बल्कि रखरखाव की लागत भी लगभग शून्य हो जाएगी। ऐसे में यह पारंपरिक डेटा सेंटर्स की तुलना में काफी सस्ते और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाला ऑप्शन साबित होगा। 10 लाख सैटेलाइट्स का लक्ष्य और स्टारशिप का सहारा रिपोर्ट के मुताबिक,(REF.) अंतरिक्ष में इस समय 15,000 सैटेलाइट एक्टिव हैं, ऐसे में मस्क की ओर से 10 लाख सैटेलाइट के आवेदन ने सभी को चौंका दिया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संख्या डिजाइन के लचीलापन के लिए तय की गई है। मस्क के सपने को सच करने का जिम्मा स्टारशिप रॉकेट पर होगा। मस्क का मानना है कि स्टारशिप जैसे पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट लाखों टन वजन अंतरिक्ष में ले जा सकते हैं। अगर मस्क का स्टारशिप सफल होता है, तो इससे डेटा प्रोसेसिंग उस उच्च स्तर पर पहुंच जाएगी, जिसकी तुलना किसी मौजूदा सिस्टम से नहीं की जा सकती। xAI और SpaceX आ सकते हैं साथ इस बीच यह खबर भी आ रही है कि मस्क अपनी दो कंपनियों xAI और SpaceX का विलय कर सकते हैं। इसके साथ-साथ इस साल के आखिर तक एक बड़े पब्लिक ऑफरिंग यानी कि IPO लाने की तैयारी भी चल रही है। दरअसल मस्क अपनी दो कंपनियों को मिलाकर खुद का सैटेलाइट नेटवर्क और अपना खुद का AI सिस्टम पाना चाहते हैं। इससे उन टेक कंपनियों को सीधी टक्कर मिलेगी जो फिलहाल AI की रेस में आगे हैं। अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग से डेटा ट्रांसफर की स्पीड बढ़ जाएगी। इसका फायदा मस्क के बाकी के प्रोजेक्ट्स को भी मिलेगा।

मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से चीन-वियतनाम को चुनौती, भारत की ग्लोबल चिप हब बनने की तैयारी

नई दिल्ली भारत सरकार ने बजट 2026 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इस मिशन के लिए बजट में 40,000 करोड़ की भारी-भरकम राशि का बंदोबस्त किया गया है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत को एक चिप बनाने वाले हब के तौर पर स्थापित करेगा। इस मिशन की खास बात है कि सरकार सिर्फ देश में चिप नहीं बनाना चाहती बल्कि सरकार का ध्यान युवाओं को इस काबिल बनाने पर है कि वह देश में खुद चिप डिजाइन कर सकें। चलिए डिटेल में समझते हैं कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में और क्या कुछ है और टेक जगत को यह बजट किस तरह से प्रभावित करता है। भारत बनेगा चिप बनाने का हब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के बाद अब 2.0 का टार्गेट और भी बड़ा कर दिया गया है। इसके लिए 40,000 करोड़ की राशि का इस्तेमाल देश में सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनों, कच्चे माल और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस मिशन की वजह से संभव है कि आने वाले समय में भारत में बने स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस न सिर्फ सस्ते होंगे बल्कि दूसरे देशों में एक्सपोर्ट भी किए जाएंगे। यह मिशन UPI और डिजिलॉकर की तरह हर भारतीय के लिए तकनीक को आसान और सुलभ बनाएगा। यूनिवर्सिटीज में बनेंगी चिप, AI की होगी पढ़ाई रिपोर्ट्स के मुताबिक,(REF.) मौजूदा 315 यूनिवर्सिटीज के छात्र पहले ही चिप डिजाइन कर रहे हैं। अब इस मॉडल को AI पर लागू करने की भी तैयारी है। देशभर की 500 यूनिवर्सिटीज में AI के खास कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे भारत की कोशिश टैलेंट पूल तैयार करने की है। रिपोर्ट्स की मानें, तो सरकार का मुख्य उद्देश्य 'कॉमन कंप्यूट स्टैक' तैयार करना है, ताकि तकनीक पर मुट्ठी भर कंपनियों का कब्जा न रहे और यह सबके लिए समान हो। बैटरी और माइक्रोवेव ओवन होंगे सस्ते रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट 2026 के बाद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी सस्ती हो जाएंगी। इससे आने वाले समय में मोबाइल फोन के दाम घटने की उम्मीद है। ऐसे में रैम के बढ़ते दामों की वजह से महंगे होने वाले स्मार्टफोन्स की कीमत यूजर्स को कुछ राहत जरूर दे सकती है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इस साल बड़ी बैटरी वाले ज्यादा स्मार्टफोन हमें देखने को मिलेंदे। इसके साथ ही माइक्रोवेव ओवन भी सस्ते होने वाले सामानों की सूची में शामिल है।

अब AI करेगा किसानों की मदद: बजट में लॉन्च हुआ Bharat Vistaar AI प्लेटफॉर्म, खेती को मिलेगा नया सहारा

नई दिल्ली खेती-किसानी को AI से लैस बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में 'भारत विस्तार' नाम से एक एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है। इसे आप खास किसानों के लिए लॉन्च होने वाला एआई या डिजिटल साथी समझ सकते हैं, जो उन्हें मौसम, मिट्टी की सेहत और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी उनकी अपनी भाषा में देगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से किसानों की पैदावार बढ़ेगी और वह तकनीकी रूप से कुशल भी होंगे। अपनी भाषा में मिलेगी एक्सपर्ट सलाह भारत विस्तार का पूरा नाम 'वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज' है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म कई भाषाओं में काम करेगा और सीधे एग्री-स्टैक पोर्टल और आईसीएआर के डेटा से जुड़ा होगा। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को मौसम के बारे में उनकी खुद की समझ में आने वाली भाषा में डिटेल में जानकारी मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में 4,000 कर्मचारी एआई चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा ताकि किसान डेटा के आधार पर बुवाई से लेकर कटाई तक का फैसला ले सकें। योजनाओं तक आसान पहुंच भी रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) इस AI से लैस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब किसानों को एक्सपर्ट की सलाह के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वाधवानी एआई एक ऐसा चैटबॉट बना रहा है, जो कि सीधे किसान कॉल सेंटर से जुड़ा होगा। इस बॉट से एक साथ लाखों सवालों के जवाब पाए जा सकते हैं। इसके साथ ही यह प्लेटफॉर्म किसानों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी भी देगा। इसी प्लेटफॉर्म से किसान अपने लिए सही योजनाओं के लिए आवेदम भी कर सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म की वजह से किसान और सरकार का सीधा रिश्ता बनेगा और बीच में किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं रहेगी। इमेज-रिकग्निशन करेगा कीटों की पहचान भारत विस्तार की खास बात है कि यह सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि लोकल अनुभव के बारे में डिटेल में जानकारी रखेगा। इस प्लेटफॉर्म में तमिलनाडु जैसे राज्यों के हजारों किसानों के व्यवहारिक एक्सपीरियंस को जोड़ा गया है। इस प्लेटफॉर्म में समग्र जैसी संस्थाएं इमेज-रिकग्निशन फीचर जोड़ रही हैं। इसकी मदद से किसान अपने फसल की फोटो खीचकर पता लगा पाएगा कि उसमें कौन सा कीड़ा लगा है और उसे छीक कैसे करना है। यह एआई सिस्टम आवाज और टेक्स्ट दोनों तरीकों से किसानों की मदद करने का काम करेगा।

बिना रुके कटेगा टोल टैक्स! देश को मिला पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा

 सूरत हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश में पहली बार पूरी तरह बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम तैयार किया गया है, जिसका ट्रायल आज से शुरू होने जा रहा है। यह नया सिस्टम गुजरात में लगाया गया है और इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा शुरू किया जा रहा है। गुजरात में तैयार हुआ पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्लाजा गुजरात के सूरत जिले के कामरेज इलाके में स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर बनाया गया है। यह मौजूदा पारंपरिक टोल बूथ की जगह लेगा, जहां अब तक वाहन चालकों को टोल देने के लिए रुकना पड़ता था। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और भीड़ को खत्म करने की बात कर रहे थे। इसी दिशा में इस प्रोजेक्ट को पायलट आधार पर लागू किया गया है। ड्राइवरों को क्या फायदा होगा? बैरियर-फ्री टोल सिस्टम लागू होने के बाद वाहन बिना रुके टोल क्षेत्र से गुजर सकेंगे। न तो ब्रेक लगाने की जरूरत होगी और न ही कतार में लगने की परेशानी रहेगी। इससे यात्रा का समय कम होगा और हाईवे पर ट्रैफिक का बहाव पहले से ज्यादा बेहतर हो जाएगा। कैसे काम करेगा नया टोल सिस्टम? इस नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।     हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ेंगे     सिस्टम FASTag से लिंक होकर अपने आप टोल की राशि काट लेगा     पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के होगी     खास बात यह है कि वाहन लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे।     विदेशी तकनीक से देश को बड़ा फायदा     इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में ताइवान की FETC एजेंसी के 25 से अधिक विशेषज्ञ पिछले कई महीनों से काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस नई तकनीक के लागू होने से हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। साथ ही, टोल कलेक्शन में पारदर्शिता बढ़ने से करीब 6000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।     आगे की योजना क्या है?     सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की योजना है कि वर्ष 2026 के अंत तक देशभर के 1050 से ज्यादा टोल प्लाजा को AI आधारित मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम में बदला जाए। यदि गुजरात में शुरू किया गया यह ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के सभी नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।    

Gold की चमक से चमकेगा दुबई! रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के बीच UAE के शेख का अनोखा कारनामा

एक तरफ जहां सोने की कीमत लगातार नए-नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ दुबई ने इन्फ्लुएंसर हॉटस्पॉट में अपने लेटेस्ट शानदार आकर्षण के तौर पर, दुनिया की पहली सोने से बनी सड़क बनाने की योजना का एलान किया है। ये शानदार और बड़ा प्लान अमीरात की ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए खास तौर पर बनाए गए एक डेवलपमेंट का हिस्सा हैं, जिसे ‘द गोल्ड डिस्ट्रिक्ट’ कहा जाता है। टूरिस्ट, शॉपर्स और प्रोफेशनल्स को लुभाने के लिए डिजाइन की जाने वाली यह ग्लैमरस जगह एक मुख्य आकर्षण बनने वाली है, क्योंकि यहां सोने से बनी सड़क तैयार होगी। दुनिया की पहली गोल्ड स्ट्रीट मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई में सोने से बनने वाली सड़क अपनी तरह की दुनिया में पहली होगी। इस सड़क का मकसद दुबई को सोने और ज्वैलरी के कारोबार में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनाना है। गोल्ड स्ट्रीट की घोषणा प्रॉपर्टी डेवलपर इथरा दुबई द्वारा दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट के ऑफिशियल लॉन्च के हिस्से के तौर पर की गई। इस खास तौर पर बनाए गए डिस्ट्रिक्ट में गोल्ड, ज्वेलरी, परफ्यूमरी, कॉस्मेटिक्स और लाइफस्टाइल कैटेगरी में 1,000 से ज्यादा रिटेल शॉप्स शामिल होंगी। भारतीय रिटेलर भी होंगे शामिल रिटेलर्स में जवहारा ज्वेलरी, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, अल रोमाइजन और तनिष्क ज्वेलरी शामिल होंगे, और जोयलुक्कास ने 24,000 स्क्वायर फुट के अपने सबसे बड़े फ्लैगशिप स्टोर की योजना की घोषणा की है, जो मिडिल ईस्ट में उसका सबसे बड़ा स्टोर होगा। यहां पर छह होटल में 1,000 से ज्यादा गेस्ट रूम भी बनाए जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों, खरीदारों और ट्रेड पार्टनर्स को आसानी से आने-जाने की सुविधा मिलेगी। कहां होगी ये स्ट्रीट? गोल्ड से तैयार होने वाली स्ट्रीट दुबई के डेरा इलाके में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई डिपार्टमेंट ऑफ इकॉनमी एंड टूरिज्म (DET) के अंडर आने वाले दुबई फेस्टिवल्स एंड रिटेल एस्टैब्लिशमेंट (DFRE) के CEO अहमद अल खाजा के मुताबिक, “सोना दुबई की सांस्कृतिक और कमर्शियल पहचान का एक अहम हिस्सा है, जो हमारी विरासत, समृद्धि और एंटरप्राइज की स्थायी भावना का प्रतीक है।” खाजा ने कहा है कि इस खास जगह के जरिए, हम न सिर्फ उस विरासत का जश्न मनाएंगे, बल्कि क्रिएटिविटी और सस्टेनेबिलिटी से बने एक नए युग के लिए इसे फिर से नया रूप भी देंगे। घूमने, रहने और काम करने के लिए बेस्ट खाजा के अनुसार, “जैसे-जैसे हम अपने टूरिज्म और रिटेल सेक्टर को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं, दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट इंटरनेशनल विजिटर्स को आकर्षित करने, इन्वेस्टमेंट लाने और दुनिया के सबसे अच्छे शहर के तौर पर हमारी पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा, जहाँ घूमने, रहने और काम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है।”

इन्फ्रास्ट्रक्चर से रोजगार तक लाभ ही लाभ: बजट 2026-27 पर LG मनोज सिन्हा का बड़ा बयान

जम्मू डेस्क जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बजट 2026-27 की सराहना करते हुए इसे व्यावहारिक और विकासोन्मुख बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखते हुए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। इससे युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाया जाएगा तथा पर्यटन उद्योग में नई जान आएगी। उप-राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बजट 2026-27 में आर्थिक विस्तार को प्रोत्साहित करने, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सात प्रमुख सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इससे उभरते उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। एल.जी. सिन्हा ने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 से सेमीकंडक्टर सेक्टर को नई गति मिलेगी। साथ ही, विशेष रेयर अर्थ ज़ोन के माध्यम से भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देने से देश की प्रतिस्पर्धी ताकत और मजबूत होगी। उन्होंने आगे कहा कि बजट 2026-27 भारत को कुछ ही वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है और आने वाले दो दशकों से भी कम समय में विकसित देश बनने के विजन को दर्शाता है। मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, स्वास्थ्य, शहरी विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र देश की आर्थिक मजबूती का आधार बनेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

तनाव चरम पर: खामेनेई बोले– अमेरिकी कार्रवाई बनी तो पश्चिम एशिया बनेगा युद्ध का मैदान

ईरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, तो यह संघर्ष सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में लेने वाला क्षेत्रीय युद्ध बन जाएगा। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अमेरिकियों को यह जान लेना चाहिए कि अगर वे युद्ध शुरू करते हैं, तो इस बार यह एक क्षेत्रीय युद्ध होगा।” खामेनेई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका वास्तव में हमला करेगा या नहीं, लेकिन खामेनेई के बयान को सीधी और गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान किसी भी देश पर हमला करने की पहल नहीं करता और न ही वह युद्ध चाहता है। उन्होंने जोड़ा, “हम उकसाने वाले लोग नहीं हैं, लेकिन ईरानी राष्ट्र किसी भी हमले या उत्पीड़न का करारा जवाब देगा।” इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिका या उसके सहयोगियों की किसी भी कार्रवाई का जवाब केवल सीधे तौर पर नहीं, बल्कि अपने क्षेत्रीय प्रभाव और सहयोगी गुटों के जरिए भी दे सकता है।  विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की चेतावनी का मतलब है कि संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और खाड़ी क्षेत्र, ईरान समर्थित सशस्त्र गुट, इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकाने, इन सभी के युद्ध में घसीटे जाने की आशंका है। यही वजह है कि खामेनेई “क्षेत्रीय युद्ध” शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका टकराव की आशंका ने पहले से अस्थिर पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है। कूटनीतिक हल की संभावनाओं के बीच यह बयान संकेत देता है कि अगर हालात बिगड़े, तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक पड़ेगा।  

सीमा सुरक्षा को बूस्ट! बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को रिकॉर्ड 7.8 लाख करोड़, 15% इजाफा

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। बजट में रक्षा बलों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यह रकम पूंजीगत खर्च का हिस्सा है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में दिए गए 1.80 लाख करोड़ रुपए से लगभग 21.8 प्रतिशत अधिक है। रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। यह कदम सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा। बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाता है। इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है। कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है। रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं। इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है।

रील से रियल करियर तक: बजट का ऐतिहासिक ऐलान, स्टूडेंट्स के लिए स्कूल-कॉलेज में शुरू होंगी Creator Labs

नई दिल्ली Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज य़ानि 1 फरवरी को बजट पेश कर रही हैं। इस बजट में वित्त मंत्री ने अपना रिकॉर्ड बजट पेश करते हुए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को 'विकसित भारत' का सबसे शक्तिशाली इंजन बताया। उन्होंने साफ किया कि भारत अब केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया को लीड करेगा। इस विजन को साकार करने के लिए सरकार ने देश की तेजी से बढ़ती 'क्रिएटर इकोनॉमी' और गेमिंग सेक्टर के लिए खजाना खोल दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में होगा 'क्रिएटर' बनने का कोर्स सरकार ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (ABGC) सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं:     कंटेंट क्रिएटर लैब्स: देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में अत्याधुनिक 'कंटेंट क्रिएटर लैब्स' स्थापित की जाएंगी। यहाँ छात्रों को रील मेकिंग, वीडियो एडिटिंग और डिजिटल कंटेंट बनाना सिखाया जाएगा।     गेमिंग में 10 लाख नौकरियां: गेमिंग सेक्टर में 10 लाख से ज्यादा पेशेवरों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है।     स्टार्टअप फंड: गेमिंग और क्रिएटिव स्टार्टअप्स की मदद के लिए ₹10,000 करोड़ का विशेष फंड तैयार किया गया है। डिजिटल बुनियादी ढांचे और AI पर बड़ा दांव     AI और स्किलिंग: AI को भारतीय अर्थव्यवस्था की नई ताकत बताते हुए वित्त मंत्री ने युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम पर जोर दिया।     सस्ता होगा हार्डवेयर: सेमीकंडक्टर निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का निवेश होगा, जिससे कैमरा, मोबाइल और गेमिंग गियर जैसे उपकरण सस्ते होंगे।     डिजिटल टाउनशिप: क्रिएटिव स्किल्स और डिजिटल पढ़ाई के लिए 5 नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जहां पढ़ाई के साथ-साथ सीधे कंपनियों में काम करने (Apprenticeship) का मौका मिलेगा। डिजाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर का नया दौर डिजाइनिंग के क्षेत्र में भारत को विश्व स्तरीय बनाने के लिए नए नेशनल डिजाइन स्कूल खोले जाएंगे। साथ ही बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बजट में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों के क्रिएटर्स को भी सुपरफास्ट इंटरनेट मिल सकेगा।

कानून बेबस या भीड़ बेलगाम? बांग्लादेश में लिंचिंग से 21 की जान गई, 257 मासूमों पर जुल्म

ढाका बांग्लादेश में जनवरी महीने के दौरान भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और जेल हिरासत में मौतों की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन मानबाधिकार शोंग्स्कृति फाउंडेशन (MSF) की मासिक रिपोर्ट ने देश की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार हालात को “खतरनाक और जटिल” करार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में भीड़ हिंसा में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 10 थी। एमएसएफ ने कहा कि भीड़ हिंसा पर राज्य की ओर से ठोस और सख्त कार्रवाई न होने से दंडहीनता की संस्कृति को बढ़ावा मिला है, जिससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अज्ञात शवों की बरामदगी में इजाफा हुआ है। जनवरी में 57 अज्ञात शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।जेल हिरासत में मौतें भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। जनवरी में 15 कैदियों की जेल में मौत हुई, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 9 था। इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में दो लोगों की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई। एमएसएफ ने इन मौतों के लिए चिकित्सकीय लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल प्रशासन की खामियों को जिम्मेदार ठहराया। आगामी 13वें राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा में भी तेजी देखी गई। जनवरी में चुनावी झड़पों में चार लोगों की मौत और 509 लोग घायल हुए, जबकि दिसंबर में सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजनीतिक मामलों में अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाए जाने की प्रवृत्ति खतरनाक रूप से बढ़ी है। दिसंबर में जहां 110 अज्ञात आरोपी दर्ज किए गए थे, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 320 हो गई। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की स्थिति भी बेहद चिंताजनक रही। जनवरी में 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 बलात्कार और 11 सामूहिक बलात्कार के मामले शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले भी बढ़े हैं। मंदिरों और मूर्तियों में चोरी, तोड़फोड़ और नुकसान की 21 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि दिसंबर में यह संख्या सिर्फ छह थी। एमएसएफ ने सरकार से सभी मानवाधिकार उल्लंघनों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि न्याय व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो सके।

नौजवानों का भविष्य और बेहतर इलाज पर जोर, बजट को नड्डा ने बताया ऐतिहासिक

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद भवन में बजट पेश किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आम बजट 2026-27 को एक लोक-कल्याणकारी और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को नई दिशा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया यह बजट सर्वसमावेशी एवं सर्वस्पर्शी है, जो भारत को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह देश की युवा शक्ति का बजट है। इस ऐतिहासिक आत्मनिर्भर भारत के बजट के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता इसी बात से जाहिर होती है कि पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 176 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस वर्ष आवंटित 1 लाख 5 हजार करोड़ से अधिक का बजट पिछले वर्ष के बजट से लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इस बजट में मेंटल हेल्थ पर भी फोकस किया गया है, जो एक स्वागत योग्य कदम है। इसके तहत रांची और तेजपुर स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थानों के अपग्रेडेशन और उत्तर भारत में निमहंस की स्थापना की घोषणा सराहनीय है। जामनगर में डब्लूएचओ ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना सभी भारतवासी के लिए गौरव की बात है। स्वास्थ्य बजट में वृद्धि के साथ-साथ देश के हेल्थ सेक्टर को मजबूती देने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर फोकस किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित दवाओं को विश्व स्तरीय गुणवत्ता के मानकों पर खरा रखने के लिए सीडीएससीओ को अधिक मजबूत किए जाने का प्रस्ताव सराहनीय है। बायोफार्मा शक्ति इनिशिएटिव के तहत सरकार ने अगले 5 वर्षों में बायोफार्मा क्षेत्र में 10,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे आधुनिक जैविक दवाओं और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। फार्मा सेक्टर के विकास के लिए तीन नए निपेर संस्थानों की स्थापना और मौजूदा सात संस्थानों के उन्नयन की घोषणा ऐतिहासिक कदम है। इसके अतिरिक्त रासायनिक उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों में तीन विशेष केमिकल पार्क विकसित किए जाने का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ते गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए एलाइड हेल्थकेयर संस्थानों को सशक्त करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे अगले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स तैयार होंगे। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके साथ ही देश के प्रत्येक जिला अस्पताल में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी सेंटर स्थापित किए जाने के प्रस्ताव से आम जनता को त्वरित और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। मेडिकल रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए आईसीएमआर और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बजट का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को सतत बनाए रखना, सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ देश को आगे बढ़ाना है। यह बजट गांव, गरीब, किसान, युवा और नारी शक्ति के साथ-साथ औद्योगिक विकास की मजबूत रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

केंद्रीय बजट में मानवीय फैसला: मोटर दुर्घटना मुआवजे के ब्याज को किया जाएगा टैक्स-फ्री

नई दिल्ली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते समय ऐलान किया कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त होगा। इस प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को मुआवजे की पूरी राशि मिले और उसमें से कोई कटौती न हो। इसके तहत अब ऐसे ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा जाएगा। यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में की गई। इस आम बजट में टैक्स से जुड़े कई ऐलान किए गए। मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी हो जाती है, जिससे ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है और पीड़ितों या उनके परिजनों को उस पर टैक्स देना पड़ता है। इस वजह से कई बार पीड़ितों को मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी। उन्हें इलाज, पुनर्वास और रोज़ी-रोटी के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी झेलनी पड़ती थी। कई मामलों में टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था। वित्त मंत्री ने साफ किया कि यह टैक्स छूट सिर्फ 'नेचुरल पर्सन', यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी। सरकार ने इसे मुआवजे की मानवीय भावना से जुड़ा फैसला बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, "मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।" यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है, जिससे चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी। भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और कई लोग घायल होते हैं। मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ती है। अक्सर मामलों में फैसले में देरी होने से ब्याज की रकम बढ़ जाती है, जो पीड़ितों को हुए नुकसान और परेशानी की भरपाई के लिए दी जाती है। अब टैक्स हटने से मुआवजा ज्यादा फायदेमंद होगा। कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार समूहों और बीमा कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा। इस फैसले से मुआवजे की रकम में कटौती नहीं होगी और मामलों के जल्दी निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें टैक्स नियमों को आसान बनाना और ज़रूरतमंद लोगों को सीधी राहत देना शामिल है। साथ ही बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर भी खास ध्यान दिया गया है। इस टैक्स छूट से लाखों प्रभावित परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाला न्याय टैक्स कटौती के कारण कम नहीं होगा।

होली यात्रा में है बदलाव! ट्रेन टिकट बुकिंग से पहले ये जरूरी जानकारी जानें

नई दिल्ली होली त्योहार से करीब दो महीने पहले ही रेल यात्रियों की भीड़ बढ़ने लगी है। नई दिल्ली से पटना, दरभंगा, जयनगर, प्रयागराज और रांची जैसे प्रमुख स्टेशनों को जोड़ने वाली ट्रेनों में टिकटों की तेज बुकिंग देखी जा रही है। कई ट्रेनों में स्लीपर और रिजर्व क्लास की अधिकांश सीटें भर चुकी हैं, जिससे यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कई गाड़ियों में न तो कन्फर्म टिकट उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त वेटिंग टिकट। ऐसे में यात्रियों के पास अब RAC टिकट या फिर स्पेशल ट्रेनों का विकल्प ही बचा है। होली के मौके पर नौकरी और पढ़ाई के कारण दूसरे शहरों में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में अपने घर लौटते हैं, जिससे बिहार के प्रमुख रूटों पर हर साल भारी भीड़ देखी जाती है। कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर ये है बेहतर विकल्प! पटना, दरभंगा, सहरसा और मोकामा जैसे रूटों पर यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनों के संचालन की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे टिकट बुकिंग के लिए IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर नियमित रूप से ट्रेन उपलब्धता की जांच करें। आम तौर पर टिकट बुकिंग यात्रा तिथि से करीब 120 दिन पहले खुल जाती है। कन्फर्म टिकट नहीं मिलने की स्थिति में RAC टिकट एक बेहतर विकल्प हो सकता है, जिससे यात्रा की अनुमति मिल जाती है। रेलवे यात्रियों के लिए सुझाव रेलवे यात्रियों को यह भी सुझाव दे रहा है कि वे त्योहार स्पेशल ट्रेनों पर नजर रखें। इन ट्रेनों की जानकारी IRCTC के माध्यम से जारी की जाती है। वहीं, कोच चयन करते समय ध्यान रखने की सलाह दी गई है कि एसी कोचों में सीटें जल्दी भर जाती हैं, जबकि स्लीपर क्लास में टिकट मिलने की संभावना तुलनात्मक रूप से अधिक रहती है।  

रोजगार मिशन में टूरिज्म की एंट्री: बजट 2026 में 50 प्रमुख स्थलों के मेगा डेवलपमेंट का ऐलान

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश करते हुए देश के विभिन्न वर्गों को कई सौगातें दीं, जिसमें रोजगार, शिक्षा, कृषि, और छोटे शहरों के विकास पर फोकस किया गया। बजट में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बौद्ध स्थल के विकास और नए 5 पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की गई। रोजगारपरक विकास के लिए सरकार ने पर्यटन को लेकर गहन कौशल विकास कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "महायान/वज्रयान परंपराओं का एक सभ्यतागत संगम है। जहां अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध परिपथों के विकास के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थयात्रा व्याख्या केंद्र, संपर्क, और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं शामिल होंगी। दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एकीकृत पूर्वी तटीय औद्योगिक गलियारे का विकास होगा और अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पर्यटन स्थलों के निर्माण का प्रस्ताव है। साथ ही पूर्वोदय राज्यों में 4,000 ई-बसों की व्यवस्था का प्रस्ताव भी है। मंदिरों और मठों के विकास के अलावा बजट में रोजगार प्रेरित विकास के लिए पर्यटन को भी महत्व दिया गया है, जिसमें देश में शीर्ष 50 पर्यटन स्थलों को राज्यों की भागीदारी से चैलेंज मोड माध्यम से विकसित किया जाएगा। तीर्थ और पर्यटन स्थलों के होटलों की अवसंरचना को एचएमएल में शामिल किया जाएगा। पर्यटन स्थलों के साथ रोजगार के विकास के लिए होमस्टे के लिए मुद्रा ऋण दिया जाएगा। युवाओं के लिए गहन कौशल विकास की शुरुआत होगी और आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, खासकर वे स्थान जो भगवान बुद्ध के जीवन काल से संबंधित हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ पर्यटक समूहों के लिए वीजा शुल्क छूट भी देने का प्रस्ताव है और ई-वीजा की सुविधाओं की शुरुआत का भी प्रस्ताव है।

अंदरूनी मोर्चे पर मार, बाहर भारत पर वार—बलूचिस्तान हमलों के बाद पाक की भड़ास

इस्लामाबाद पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है। चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं।   कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बता दें कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है। खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं।  

रोहित शेट्टी के घर के बाहर चली गोलियां, बिश्नोई गैंग बोला – ‘अगली गोली सीधे छाती पर लगेगी’

मुंबई बॉलीवुड डायरेक्टर-प्रोड्यूसर रोहित शेट्टी के मुंबई के जुहू में स्थित घर के बाहर फायरिंग की घटना ने एक बार फिर हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने 5 राउंड फायरिंग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है और रोहित शेट्टी का बयान भी दर्ज कर लिया गया है। इस बीच मामले में बड़ा अपडेट आया है। इस गोलीबारी की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है। सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी कहा है कि अब सीधे बेडरूम में गोली चलेगी और छाती पर लगेगी। मालूम हो कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सलमान खान के घर 'गैलेक्सी अपार्टमेंट' के बाहर भी फायरिंग की थी। जानकारी के अनुसार, बीती देर रात करीब 12 बजकर 45 मिनट पर रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग की घटना हुई। इस घटना के बाद भारी पुलिस सुरक्षा तैनात कर दी गई। पुलिस सूत्र का कहना है कि हमलावर बाइक पर जुहू पहुंचा। कुछ दूरी पर बाइक खड़ी की और शेट्टी टावर के पहले फ्लोर पर गोलियां चलाईं। ये रोहित का घर है और जहां गोली चली, वो उनका जिम एरिया है। हमला करने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी 'इंडिया टुडे' के पोस्ट के स्क्रीनशॉट के अनुसार, इसमें लिखा है, 'सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर जो ये फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। इसको अगर आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर।' बॉलीवुड को दी चेतावनी इसी पोस्ट में आगे लिखा है, 'और आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे तुम्हारा और हमने जिन जिन लोगों को फोन कर रखा है या तो टाइम रहते लाइन पर आ जाओ वरना छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी तुम्हें और जितने भी हमारे दुश्मन हैं तैयार रहो जल्दी ही मुलाकात होगी तुमसे। नोट- एक ही था एक ही है और एक ही रहेगा लॉरेंस बिश्नोई गैंग। सलमान खान के घर के बाहर हुई थी फायरिंग साल 2024 में सलमान खान के बांद्रा स्थित 'गैलेक्सी अपार्टमेंट' के बाहर कुछ राउंड फायरिंग हुई थी। यह घटना लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी बताई गई थी। कुछ दिनों पहले दिशा पाटनी के घर के बाहर भी फायरिंग हुई थी। इस हमले की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी। कौन है लॉरेंस बिश्नोई? लॉरेंस बिश्नोई की कुख्यात गैंगस्टर है। उसकी गैंग हत्या, जालसाजी और हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल रही है। सलमान खान का नाम इस गैंग की हिट लिस्ट में काफी समय से है। 1998 में काला हिरण शिकार मामला हुआ। इसमें सलमान को राजस्थान में दो ब्लैकबक मारने के लिए सजा दी थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट में फैसला बदला था। बिश्नोई समाज काले हिरण को पूजता है। ऐसे में शिकार के बाद गैंग सलमान के विरोध में आ गया। 14 अप्रैल 2024 को सलमान के घर के बाहर फायरिंग करवाई गई। इसके बाद मुंबई पुलिस ने सलमान को Y-प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी। साथ ही बालकनी में बुलेटप्रूफ ग्लास लगी और वो बुलेटप्रूफ कार में सफर करने लगे। 'सिंघम अगेन' का किया था निर्देशन रोहित शेट्टी ने साल 2024 में 'सिंघम अगेन' फिल्म का निर्देशन किया था। टीवी की बात करें तो इसी साल 'इंडियन पुलिस फोर्स' का निर्देशन किया था और इसे प्रोड्यूस भी किया था। उन्होंने अभी तक अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट का ऐलान नहीं किया है।

रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और आत्मनिर्भरता पर फोकस—धामी ने बजट को बताया गेमचेंजर

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना की है। उन्‍होंने कहा, यह बजट देश और राज्यों के विकास को नई दिशा देने के साथ ही सभी वर्गों के लिए अवसरों को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक विकास तेज करने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी और समावेशी बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि किसानों, महिलाओं, वंचितों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और पिछड़े वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, उद्योग और अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ये पूरे देश के साथ उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी साबित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे। बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की योजना है। उत्तराखंड के परिपेक्ष में बजट ने पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया है, जो विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों, पशुपालन, उच्च मूल्य कृषि, पर्यटन और एमएसएमई के लिए किए गए बजट प्रावधान राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बायोफार्मा क्षेत्र में किए गए निवेश से राज्य और देश दोनों का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट सबका साथ, सबका विकास और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बजट में घोषित योजनाओं और प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूरी तरह सहयोग करेगी। यह बजट न केवल देश की आर्थिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी समान रूप से विकास के अवसर देगा।

राजस्थान में फैक्ट्री हादसा: ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लास्ट से तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत

जयपुर जयपुर स्थित एक कारखाने में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने की घटना में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह हादसा शनिवार रात विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र के करणी विहार कॉलोनी स्थित कारखाने में उस समय हुआ, जब सिलेंडर में ऑक्सीजन भरी जा रही थी तभी एक सिलेंडर में विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि कारखाने पर लगी टिन शेड उड़ गई और एक दीवार भी ढह गई। पुलिस ने बताया कि एक कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई, जिसकी पहचान झारखंड निवासी मुन्ना राय के रूप में हुई है। विश्वकर्मा थाना प्रभारी रविन्द्र सिंह नरूका ने बताया कि हादसे में मुरलीपुरा निवासी कारखाना प्रबंधक विनोद गुप्ता (45) और झारखंड निवासी कर्मचारी शिबू उर्फ अनुवा गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि विनोद को मणिपाल अस्पताल और शिबू को सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर रात उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है।  

बजट 2026 अपडेट: हाई स्पीड रेल, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और और भी 8 बड़ी योजनाएं

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट पेश करते हुए कहा कि 'सुधार एक्सप्रेस' अपनी राह पर है। बजट भाषण में उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने 'कोरी बयानबाजी' के बजाय 'सुधारों' का रास्ता चुना है। कहा कि देश 'विकसित भारत' बनने की दिशा में कदम उठाता रहेगा। 7 नए हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर से लेकर हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल तक, बजट की 10 बड़ी बातों पर आइए नजर डालते हैं। 1- सात हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर और एक फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में अलग-अलग शहरों के बीच सात हाई-स्पीड कॉरिडोर और पश्चिम बंगाल के डंकुनी से गुजरात के सूरत के बीच एक नए विशेष फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। – ये प्रस्तावित गलियारे मुंबई और पुणे, पुणे और हैदराबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई, चेन्नई और बेंगलुरु, दिल्ली और वाराणसी तथा वाराणसी और सिलीगुड़ी के बीच विकसित किए जाएंगे। – पश्चिम बंगाल के डंकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाला एक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। – अभी अहमदाबाद और मुंबई के बीच एक हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम जारी है। इसी तरह, कई राज्यों और जिलों में दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – ईस्टर्न और वेस्टर्न का काम जारी है। 2- हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। देश में 700 से अधिक जिले हैं। 3- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40 हजार करोड़ – इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती देने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया जाएगा। – पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दो जगहों पर हाई टेक्नॉलजी वाले 'टूल रूम' स्थापित किए जाएंगे। – देश में स्मार्ट टीवी और मोबाइल उत्पादन में और ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। – देश में मोबाइल फोन का उत्पादन चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक करीब 6.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक या लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। 5- यूनिवर्सिटी टाउनशिप का ऐलान एजुकेशन सेक्टर पर खास फोकस रहा। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बनाने की घोषणा। – यूनिवर्सिटी टाउनशिप में आवास, रिसर्च फैसिलिटी, स्टार्टअप स्पेस, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक ढांचा शामिल होगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और रिसर्चर को एक बेहतर और जीवंत शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। -पूर्वी भारत में शिक्षा और विकास को बढावा देने के लिए नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोले जायेंगे। 6- किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ीं योजनाएं – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट 2026-27 में मत्स्य पालन, पशुपालन योजना को मजबूत बनाने के साथ ही देश के काजू और नारियल को वैश्विक ब्रांड बनाया जाएगा। -भारतीय काजू और भारतीय कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्राण्ड बनाए जाने का प्रस्ताव -500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की पहल से मत्स्य पालन क्षेत्र को सुदृढ़ करने के साथ ही पशुपालन क्षेत्र में उद्यमशीलता विकास से रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएंगे। – कोकोनट प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही एक करोड़ किसानों समेत तीन करोड़ लोगों को सहायता प्रदान करेगी। । -चंदन के कारोबार को बढ़ाने के लिए सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर भारतीय चंदन इकोसिस्टम के गौरव को पुनर्स्थापित किया जाएगा। 7- देश के भीतर डेटा सेंटर को बढ़ावा देने के लिए 'टैक्स हॉलिडे' – उन विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक 'टैक्स हॉलिडे' का लाभ मिलेगा जो देश में स्थित डेटा सेंटर का उपयोग करके दुनिया भर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं प्रदान करती हैं। – सीतारमण ने कहा कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और डेटा सेंटर में निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। – इस टैक्स हॉलिडे का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को एक भारतीय पुनर्विक्रेता इकाई के माध्यम से भारतीय ग्राहकों को सेवाएं देनी होंगी। 8- टैक्स से जुड़े अहम ऐलान – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर से 31 मार्च करने का प्रस्ताव किया। – मामूली शुल्क के भुगतान के साथ आयकरदाता इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। – शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के मामले में टीडीएस 5 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत – मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजा को कर से छूट मिलेगी। – एक अप्रैल से आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो जाएगा, जो छह दशक पुराने कर कानून का स्थान लेगा। – विदेश में अघोषित संपत्ति पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। – जब तक अपील लंबित रहती है तब तक टैक्स पेयर को पेनाल्टी पर इंट्रेस्ट नहीं देना होगा। 9- MSME की मदद के लिए ‘कॉरपोरेट मित्र’ – सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) की सहायता के लिए मझोले (श्रेणी-दो) और छोटे (श्रेणी-तीन) शहरों में 'कॉरपोरेट मित्रों' का एक दस्ता तैयार किया जाएगा। – 'कॉरपोरेट मित्रों' का यह दस्ता एमएसएमई को किफायती लागत पर अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। – इस दस्ते को तैयार करने के लिए आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीएमएआई जैसे पेशेवर संस्थानों को अल्पकालिक मॉड्यूल पाठ्यक्रम और व्यावहारिक टूल डिजाइन करने में सहयोग प्रदान करेगी। 10- राजकोषीय घाटा को जीडीपी का 4.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य – सरकार को उम्मीद है कि 2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत रहेगा जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 4.4 प्रतिशत से कम है। – सीतारमण ने अपने 2026-27 के बजट भाषण में कहा कि सरकार अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कर हस्तांतरण राशि के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये प्रदान करेगी जबकि शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। – केंद्रीय बजट 2026-27 का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। – चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट में अनुमानित राजकोषीय घाटा (सरकारी व्यय और आय के बीच का अंतर) सकल घरेलू उत्पाद (जीडपी) का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

चीन की चुनौती! Budget 2026 में भारत ने शुरू किया Rare Earth Corridor, जानिए 4 चुने हुए राज्यों की वजह

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को आधुनिक तौर-तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' (Rare Earth Corridors) के निर्माण का एक दूरदर्शी प्रस्ताव रखा है। यह कदम मुख्य रूप से चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता कम करने और भविष्य के उद्योगों (EV, रक्षा, और अक्षय ऊर्जा) को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है। क्या है रेयर अर्थ कॉरिडोर? वित्त मंत्री ने खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को समर्पित कॉरिडोर विकसित करने के लिए सहायता देने की घोषणा की है। यह पहल नवंबर 2025 में शुरू की गई 7,280 करोड़ रुपये की 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट स्कीम' का ही विस्तार है। ये केवल खदानें नहीं हैं, बल्कि एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र हैं। इसके जरिए तटीय रेत से दुर्लभ खनिजों को निकालना, कच्चे अयस्क को शुद्ध ऑक्साइड और धातुओं में बदलना और इन खनिजों का उपयोग करके परमानेंट मैग्नेट और अन्य हाई-टेक घटकों का निर्माण करना। इन चार राज्यों को ही क्यों चुना गया? भारत में 'रेयर अर्थ' तत्वों का सबसे बड़ा भंडार समुद्री तटों पर पाया जाता है। ओडिशा और केरल के तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट और इल्मेनाइट जैसे खनिजों का विशाल भंडार है। यहां IREL (इंडिया) लिमिटेड जैसी कंपनियों की इकाइयां और प्रमुख बंदरगाह पहले से मौजूद हैं जो परिवहन और निर्यात को आसान बनाते हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल (EV) के बड़े मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर हैं, जिन्हें इन खनिजों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसका भारत के लिए क्या महत्व है? वर्तमान में चीन वैश्विक रेयर अर्थ बाजार के 90% से अधिक हिस्से को नियंत्रित करता है। घरेलू कॉरिडोर भारत को वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से सुरक्षित करेंगे। भारत की चीन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। ईवी मोटरों के लिए 'परमानेंट मैग्नेट' अनिवार्य हैं। इस कॉरिडोर से भारत में बैटरी और मोटर निर्माण सस्ता होगा। मिसाइल गाइडिंग सिस्टम, लड़ाकू विमान और रडार में इन खनिजों का उपयोग होता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा विंड टर्बाइन और सोलर पैनल के निर्माण में तेजी आएगी, जिससे 2070 तक 'नेट जीरो' लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने इसे बजट के 'प्रथम कर्तव्य' के हिस्से के रूप में पेश किया है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और ₹40,000 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग फंड भी घोषित किया गया है, जो इस पूरे इकोसिस्टम को मजबूती देगा।  

Budget 2026 में नई सौगात: भारत में डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा 2047 तक Tax Holiday

नई दिल्ली Budget 2026: वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने आज लगातार अपना नौवां बजट पेश किया है। इस दौरान उन्होंने क्लाउड सर्विसेस और डेटा सेंटर्स को लेकर भी बड़ी घोषणा की। वित्त मंत्री ने लोकल डेटा सेंटर बनाए रखने वाली क्लाउड सर्विसेस के लिए Tax Holiday शुरू करने की योजना की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भारत में स्थित डेटा सेंटर के जरिए दुनिया भर में क्लाउड सर्विस देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स में छूट देगी। यह पहल देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पॉलिसी का मकसद डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देना और क्लाउड प्रोवाइडर्स को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।   भारत में मजबूत होगा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दरअसल, प्रस्तावित टैक्स हॉलिडे खास तौर पर उन क्लाउड सर्विसेज को टारगेट करता है जो भारतीय क्षेत्र में डेटा सेंटर बनाते और चलाते हैं। यह कदम डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी कंपनियों को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। हालांकि, एलिजिबल होने के लिए, विदेशी कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को विशेष रूप से भारतीय रीसेलर के जरिए सर्विस देनी होगी। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा, "मैं किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव करती हूं, जो भारत में स्थित डेटा सेंटर का इस्तेमाल करके ग्लोबल कस्टमर्स को क्लाउड सर्विस देती है। हालांकि, ऐसी कंपनियों को एक भारतीय रीसेलर एंटिटी के जरिए भारतीय कस्टमर्स को सर्विस देनी होगी।" "मैं यह भी प्रस्ताव करती हूं कि अगर भारत से डेटा सेंटर सर्विस देने वाली कंपनी एक संबंधित एंटिटी है, तो कॉस्ट पर 15% का सेफ हार्बर दिया जाए।" लोकल डेटा सेंटर वाले क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को टैक्स इंसेंटिव देकर, इस पॉलिसी का मकसद डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करते हुए भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में ज्यादा निवेश को बढ़ावा देना है। विदेशी रिसोर्सेस पर निर्भरता कम होगी इससे पहल से देश में घरेलू डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और विदेशी डेटा स्टोरेज रिसोर्सेस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। टैक्स छूट का ढांचा क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए लोकल डेटा सेंटर ऑपरेशंस को आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह नई पॉलिसी भारतीय बाजार में क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के काम करने की रणनीति पर काफी असर डाल सकती है। लोकल डेटा सेंटर वाली कंपनियों को टैक्स में फायदा होगा, जिससे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश हो सकता है और बेहतर सर्विस मिल सकती हैं।  

खुशखबरी युवाओं के लिए: Budget 2026 से बदलने वाला है भारत का डिजिटल भविष्य

नई दिल्ली Budget 2026 का ऐलान हो चुका है। इस बजट में सरकार ने एक अलग और नया रास्ता चुना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान बताया कि अब भारत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि क्रिएटिव इंडस्ट्री को भी देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना चाहता है। इसी सोच के तहत सरकार ने एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे सेक्टर को 'ऑरेंज इकोनॉमी' का नाम दिया गया है। मोबाइल गेमिंग, OTT प्लेटफॉर्म, डिजिटल फिल्में और ऑनलाइन कंटेंट की बढ़ती मांग से ये इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि अगर सही ट्रेनिंग और प्लेटफॉर्म दिया जाए, तो यही युवा देश को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिला सकते हैं। बजट में किए इन ऐलान से आने वाले सालों में Animation, VFX और Gaming जैसे क्षेत्र लाखों नौकरियां पैदा कर सकते हैं। खास बात यह है कि सरकार अब स्कूल और कॉलेज स्तर से ही छात्रों को कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल स्किल्स से जोड़ना चाहती है। Orange Economy क्या है सरकार ने Budget 2026 में ‘Orange Economy’ की बात की है। इसमें Animation, VFX, Gaming, Comics और डिजिटल कंटेंट जैसे सेक्टर शामिल हैं। ये वो सेक्टर हैं जिनमें आइडिया, सोच और क्रिएटिविटी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। दुनिया भर में इन इंडस्ट्रीज की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता। सरकार का मानना है कि भारत में पहले से ही कई बड़ी फिल्में, वेब सीरीज और गेम्स पर काम हो रहा है। VFX और Animation का इस्तेमाल अब हर फिल्म और ऐड में आम बात हो गई है। ऐसे में सरकार चाहती है कि यह काम विदेशों में आउटसोर्स होने के बजाय भारत में ही हो और इससे देश के युवाओं को रोजगार मिले। Budget 2026 में हुआ ये ऐलान Budget 2026 में सरकार ने ऐलान किया है कि देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में Content Creator Labs खोली जाएंगी। इन लैब्स में छात्रों को Animation, Gaming, VFX और डिजिटल कंटेंट बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स भी सीख सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। अगर क्रिएटिव स्किल्स को सही दिशा दी जाए, तो आने वाले समय में यह सेक्टर करोड़ों रुपये की इंडस्ट्री बन सकता है और लाखों युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार दे सकता है। रोजगार और युवाओं को होगा फायदा Animation, Gaming और VFX जैसे सेक्टर में काम करने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स की जरूरत होती है। बजट में किए ऐलानों से उन युवाओं को फायदा मिलेगा जो डिजाइन, स्टोरीटेलिंग, गेम डेवलपमेंट या डिजिटल आर्ट में रुचि रखते हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक आने वाले कुछ सालों में यह सेक्टर करीब 20 लाख लोगों को रोजगार दे सकता है। इसमें फ्रीलांस काम, स्टार्टअप और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स के मौके भी शामिल होंगे।

बजट 2026 का बड़ा ऐलान: शिक्षा पर रिकॉर्ड निवेश, छात्रों और युवाओं को क्या मिलेगा?

नई दिल्ली लोकसभा में आज बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई बड़े ऐलान किए। वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एजुकेशन सेक्टर के मद्देनजर 1,39,289 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया है। इस मास्टरप्लान के जरिए सरकार का मानना है कि पढ़ाई को रोजगार, उद्यम और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि डिग्री हाथ में होने के साथ-साथ काम का हुनर भी युवाओं के पास हो। सरकार ने शिक्षा और नौकरी के बीच की दूरी कम करने के लिए एक नई सोच के साथ ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ (Education to Employment and Enterprise – EEE) स्टैंडिंग कमेटी बनाने का ऐलान किया है। यह कमेटी खासतौर पर सेवा क्षेत्र, नई इंडस्ट्री और उभरती टेक्नोलॉजी में युवाओं को दक्ष बनाने पर फोकस करेगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए भटकते हैं। हायर एजुकेशन और STEM में बेटियों पर खास फोकस बजट में उच्च शिक्षा और खासतौर पर STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ बढ़े ही नहीं, बल्कि स्थायी बने। इसी सोच के तहत देश के हर ज़िले में हायर एजुकेशन STEM संस्थानों से जुड़े गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे दूर-दराज़ से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की जगह मिलेगी। इसके साथ ही, औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इन टाउनशिप का मकसद पढ़ाई और इंडस्ट्री को एक ही इकोसिस्टम में लाना है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर, इंटर्नशिप और नौकरी के मौके मिल सकें। रिसर्च और साइंस को बढ़ावा देने के लिए देश में चार बड़े टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सेंटर बनाए या अपग्रेड किए जाएंगे, जिससे युवा वैज्ञानिक और रिसर्चर अंतरिक्ष विज्ञान की ओर आकर्षित हों। स्किल डेवलपमेंट और फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर दांव डिजिटल दौर की जरूरतों को समझते हुए बजट में स्किल डेवलपमेंट को केंद्र में रखा गया है। खासतौर पर तेजी से बढ़ रहे AVGC सेक्टर यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स पर बड़ा ऐलान हुआ है। सरकार ने देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का फैसला किया है। यह कदम उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो क्रिएटिव फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं और सीधे रोजगार या स्टार्ट-अप की राह पकड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, हेल्थ और केयर सेक्टर को ध्यान में रखते हुए 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई है। बुजुर्गों, मरीजों और विशेष जरूरतों वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह सेक्टर आने वाले समय में रोजगार का बड़ा जरिया बन सकता है। वहीं, दिव्यांग युवाओं के लिए इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक कस्टमाइज्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। खोले जाएंगे नए संस्थान बजट 2026 में शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए कई नए संस्थानों की घोषणा की गई है। पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) खोला जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में डिजाइन और क्रिएटिव एजुकेशन को नई पहचान मिलेगी। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना की जाएगी, ताकि टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री को स्किल्ड प्रोफेशनल्स मिल सकें। इसके साथ-साथ दस चुनिंदा विषयों में अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए नए संस्थान बनाए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। विदेश पढ़ाई करने वालों को राहत विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों के लिए भी बजट राहत लेकर आया है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश शिक्षा के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर TCS दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ छात्रों बल्कि उनके परिवारों पर भी वित्तीय बोझ कम होगा और विदेशी शिक्षा पहले से ज्यादा सुलभ बनेगी।  

बजट पर पीएम मोदी: रिफॉर्म्स को नई दिशा, नागरिकों में निवेश से बनेगा आत्मनिर्भर भारत

नई दिल्ली पीएम मोदी ने रविवार को बजट पर कहा, 'देश में रिफॉर्म एक्सप्रेस चल पड़ी है। जो बदलाव किए गए हैं वो एक्सप्रेशन से भरे हुए भारत के साहसिक प्रतिभाशाली युवाओं को खुला आसमान देते हैं।' उन्होंने कहा कि बजट से रिफॉर्म्स को नई गति मिलेगी। ये स्किल, स्केल और सस्टेनेबिलिटी को मजबूत करने का प्रयास है। सबसे बड़ी पूंजी नागरिक, इसी में निवेश किया। पीएम ने कहा कि यह एक ऐसा यूनिक बजट है, जिसमें फिसकल डेफिसिट कम करने पर फोकस है। इसके साथ बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का समन्वय है। यह देश की ग्लोबल भूमिका को नए सिरे सशक्त करता है।

बजट 2026 में नारी कल्याण: लखपति दीदी, शी मार्ट्स और गर्ल्स हॉस्टल से बदलेगी महिलाओं की तस्वीर

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में 2026-27 का बजट पेश किया। हर बार की तरह इस बार भी वित्त मंत्री के पिटारे में महिलाओं के लिए कुछ खास सौगात देखने को मिली। तो आइए जानते हैं इस बार बजट में महिलाओं के लिए क्या-कुछ खास था? लखपति दीदी योजना केंद्र सरकार ने लखपति दीदी योजना को जारी रखने की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत महिलाओं से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज रहित लोन दिया जाता है, जिससे वो आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। इस लोन पर महिलाओं को सरकारी सब्सिडी भी मिलती है। 'शी मार्ट्स' की घोषणा केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना की सफलता के बाद वित्त मंत्री ने 'शी मार्ट्स' (She MARTS) की घोषणा की है। ये मार्ट्स स्वयं सहायता उद्यमियों की ओर से संचालित किया जाएगा और रीटेल आउटलेट के रूप में ऑपरेट करेगा। केंद्र सरकार की इस नई स्कीम का उद्देश्य महिला उद्यमियों की पहुंच बड़ी बाजार तक सुनिश्चित करना है। इसके तहत महिलाएं न सिर्फ अपना खुद का ब्रांड बना सकेंगी, बल्कि अच्छा मुनाफा भी कमा सकेंगी। इससे स्थानीय स्वयं सहायता समूह भी मजबूत होंगे। गर्ल्स हॉस्टल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्राओं को भी बजट में शानदार सौगात दी है। उन्होंने हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की घोषणा की है। देश के लगभग 700 से ज्यादा जिलों में छात्राओं के रहने के लिए गर्ल्स हॉस्टल की नींव रखी जाएगी।  

सामने आए अमेरिकी यौन अपराधी के वीडियो, कहीं डांस तो कहीं महिलाओं के पीछे दौड़ रहा जेफ्री एपस्टीन

न्यूयार्क. नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के दोषी अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया है। उसका कनेक्शन ऐसे लोगों से निकलकर आ रहा है जिसके बारे में कभी सोचा नहीं जा सकता था। अमेरिकी राष्ट्र्पति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा दुनियाभर के कई नेताओं और अन्य हस्तियों के नाम उससे जुड़े दस्तावेजों में शामिल हैं। इनमें कई नाम भारत के भी हैं। एपस्टीन की डायरी, उसके लेटर्स, ईमेल और अन्य डॉक्युमेंट समेत करीब 30 लाख दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है। इसी बीच एपस्टीन के कुछ नए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनमें वह महिलाओं के साथ मौज-मस्ती करता हुआ नजर आता है। एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि जेफ्री एपस्टीन महिला के साथ नाच रहा है। हालांकि इन वीडियो की सच्चाई का दावा लाइव हिंदुस्तान नहीं करता है। शुक्रवार को ही अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े करीब 30 लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें हजारों वीडियो और तस्वीरें भी हैं। बता दें कि जेफ्री एपस्टीन की अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मौत हो गई थी। उसे सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी पाया गया था। कौन था जेफ्री एपस्टीन उससे जुड़े दस्तावेजों में हजारों वीडियो और लाखों तस्वीरों के अलावा एफबीआई इंटरव्यू समरी और ईमेल भी शामिल हैं। 1970 में जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क के डाल्टन स्कूल में अध्यापक था। इसी दौरान उसकी मुलाकात बीयर स्टियर्न्स के एक पार्टनर से हुई। इसके बाद वह बैंक में पार्टनर बन गया। 1982 में उसने खुद की एक कंपनी खोल दी। वह बड़े बड़े क्लाइंट्स की संपत्तियों को संभावता था। इसके बाद उसके संपर्क बढ़ते चले गए। उसने फ्लोरिडा में मैंशन बनाया, न्यू मैक्सिको में रैंच और न्यूयॉर्क में आलीशान बंगला खरीद लिया। इसके बाद उसकी पार्टियों का सिलसिला शुरू हुआ। बताया जाता है कि उसकी पार्टी में डोनाल्ड ट्रंप और कई जानी-मानी हस्तीयां पहुंचती थीं। 2005 में 14 साल की एक बच्ची के मां-बाप ने उसके खइलाफ शइकायत की कि उसका पाम बीच के एक घर में यौन उत्पीड़न किया गया। इसके बाद छापेमारी में उसके यौन उत्पीड़न का खुलासा होने लगा। इसी के बाद एपस्टीन के बुरे दिन शुरू हो गए। कई पीड़ितों ने हैरान कर देने वालीआपबीती सुनाई। 6 जुलाई 2019 को उसे न्यूयॉर्क के हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ नाबालिगों के यौन उत्पीड़न और यौन तस्करी के आरोप थे। 10 अगस्त 2019 को उसे जेल की शेल में ही मृत पाया गया था।

इलाज भी सस्ता, रोजगार भी: दवाइयों पर राहत के साथ टेक्सटाइल पार्क और हैंडलूम योजना का ऐलान

नई दिल्ली.  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026-27 पेश कर रही है। उनके भाषण पर पूरे भारत की नजर टिकी है। बजट से आम नागरिक, व्यवसायी, हेल्थ सेक्टर, शेयर मार्केट को उम्मीदें है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाषण की शुरुआत में कहा, इस बजट में ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बजट पर फोकस है। इसके अलावा इस साल के बजट में युवा शक्ति पर फोकस है। वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार के कदमों से 7 प्रतिशत का विकास और गरीबी कम करने में मदद मिली है। भारत को वैश्विक बाजारों से एकीकृत होना होगा।" वित्त मंत्री ने कहा, "आर्थिक विकास को सतत और तेज बनाए रखना सरकार का पहला कर्तव्य है।" बजट में किन बातों को विशेष महत्व? मैन्युफैक्चरिंग में तेजी चैंपियन एमएसएमई का निर्माण इन्फ्रास्ट्रक्चर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा स्वास्थ्य सेवा के लिए रणनीति क्या है मुख्य घोषणाएं? 2025 में रेअर परमानेंट मैग्नेट स्कीम शुरू की गई थी। इसमें आगे बढ़ते हुए खनिज संपन्न राज्यों की मदद की जाएगी। पांच राज्यों में रेयर अर्थ मिनरल के डेडिकेटेड कॉरिडोर बनेगा। इसके अलावा EMS PLI स्कीम का आवंटन 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ किया जाएगा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन – उपकरण और सामग्री उत्पादन, सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 शुरू किया जाएगा। 5 साल में बायोफार्मा में 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा दुर्लभ खनिज के लिए कॉरिडोर बनेगा     आंध्र, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में कॉरिडोर बनेगा     कैंसर, डायबिटीज की दवाइयां सस्ती होगी     टेक्सटाइल पार्क की स्थापना का एलान     महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करेंगे     वस्त्र उद्योग सेक्टर में भी रिफॉर्म करेंगे     इससे बुनकरों को फायदा होगा डिफेंस के लिए क्या घोषणा?  रक्षा सामग्री (जैसे हथियार) खरीद के लिए 219306.47 करोड़ रुपये। पिछले बजट (2025-26) में 180000 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जिसे संशोधित कर 186454.20 करोड़ किया गया है। सर्विस सेक्टर के लिए हाई‑पावर्ड स्थायी समिति की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैं ‘Education to Employment and Enterprise’ नाम की एक हाई‑पावर्ड स्टैंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखती हूं, जो सर्विस सेक्टर को ‘विकसित भारत’ का मुख्य ड्राइवर बनाने के लिए जरूरी उपायों की सिफारिश करेगी। सरकार का टारगेट है कि 2047 तक भारत का सर्विस सेक्टर में वैश्विक हिस्सा 10% तक पहुंचे। इनकम टैक्स कानूनों, टैक्स कलेक्शन को लिए कई घोषणाएं नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। FY27 के लिए अनुमानित Non‑debt receipts 36.5 लाख करोड़ रुपये होगा। वहीं Net tax receipts 28.7 लाख करोड़ रुपये होगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए TCS रेट घटाया गया. यह 5% से घटाकर 2% किया जाएगा। रिटर्न संशोधन (Revised Returns) का समय बढ़ाया गया. नाममात्र फीस देकर रिवाइज रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।  

अमेरिका और इजरायल बोले- हमारा हाथ नहीं, ईरान में धमाकों में 5 की मौत और कई घायल

तेहरान. कई महीनों से प्रदर्शन से परेशान ईरान को एक बार फिर झटका लगा है। दक्षिणी ईरान के समुद्र किनारे वाले शहर बंदर अब्बास में शनिवार को जोरदार धमाका हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह धमाका गैस के रिसाव की वजह से हुआ। इसके अलावा इराक सीमा के पास स्थित अहवाज शहर में भी गैस के रिसाव से एक धमाका हुआ। दोनों धमाकों में कुल मिलाकर पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सात धमाकों की जानकारी सामने आई है। इनके मुताबिक राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और परंद में धमाके हुए हैं। ईरान सरकार की तरफ से इनकी पुष्टि नहीं की गई है। ईरान के अग्निशमन विभाग के प्रमुख मोहम्मद अमीन लियाकत ने बंदर अब्बास में हुए धमाके पर ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर को दिए अपने बयान में कहा, "शुरुआती जांच के हिसाब से पता चला है कि यह धमाका गैस की वजह से हुआ है। अगले कुछ घंटों में मेरे सहयोगी और अधिक जानकारी देंगे।” इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें मलबे में तब्दील इमारतों के सामने टूटी हुई गाड़ियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं, जो कि इमारत के मलबे की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। रॉयटर्स ने इमारतों, पेड़ों और सड़क के लेआउट का विश्लेषण कर स्थान की पुष्टि की, जो सैटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं की जा सकती कि वीडियो किस तारीख का है। ईरान में धमाकों की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा शक अमेरिका और इजरायल की तरफ ही गया। हालांकि सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकाियों ने यह साफ किया है कि इन धमाकों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है।

इन्फ्रा बूम 2026: सड़क-रेल-मेट्रो को रिकॉर्ड फंडिंग, ₹12.20 लाख करोड़ कैपेक्स से तेज होगा छोटे शहरों का विकास

नई दिल्ली. यूनियन बजट 2026 (Union Budget 2026) में सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की ग्रोथ की रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर ही तेज की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। कैपेक्स (Capex) यानी सरकार द्वारा किया जाने वाला वह खर्च, जो सड़क, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, हाउसिंग और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी लंबे समय की विकास परियोजनाओं पर होता है। इसका मतलब है कि जितना ज्यादा कैपेक्स (Capex) होगा, उतना ज्यादा रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियां भी बढेंगी। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में यह 2 लाख करोड़ था, जो 2025-26 (BE): में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ हुआ और 2026-27 (प्रस्तावित) में इसको बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ तक कर दिया गया है, यानी 10 साल में सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च कई गुना बढ़ चुका है। सरकार का खास जोर उन शहरों पर रहेगा जिनकी आबादी 5 लाख से ज्यादा है। ये शहर अब सिर्फ छोटे कस्बे नहीं, बल्कि नए ग्रोथ सेंटर्स बन चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि Tier-2 और Tier-3 शहरों में बेहतर सड़कें हों। इसके साथ ही मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट हो। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (इन्विट) (Infrastructure Investment Trust -InvIT), रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (Real Estate Investment Trust -REIT) जैसे नए फाइनेंसिंग टूल्स को भी बढ़ावा दिया है, जिससे प्राइवेट निवेश को आकर्षित किया जा सके। इस बढ़े हुए Capex का सीधा असर रोजगार के नए अवसर, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा। छोटे शहरों में बेहतर सुविधाएं होंगी। इसके साथ ही बिजनेस और इंडस्ट्री के लिए आसान कनेक्टिविटी होगी। 

डोनाल्ड ट्रंप बोले- हो गई डील, अब रूस और ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल आयात करेगा भारत

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच अभी कोई ट्रेड डील फाइनल नहीं हो पाई है लेकिन भारत को लेकर दावे करने से डोनाल्ड ट्रंप चूकते नहीं हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि भारत ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल आयात करेगा। उन्होंने कहा, हम लोगों ने इसको लेकर डील कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक दिन पहले ही अमेरिका ने भारत के सामने वेनेजुएला से तेल खरीदने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि भारत ने उसपर क्या प्रतिक्रिया दी है, यह सामने नहीं आया है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस और ईरान से तेल खरीदना बंद कर दे। जिस वेनेजुएला से आज ट्रंप तेल खरीदने की बात कर रहे हैं, उसी वेनेजुएला से तेल खरीदने पर वह विरोध भी करते थे। हालांकि अब उन्होंने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति को बंधक बना लिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए चीन का भी स्वागत है। कहां पहुंची है ट्रेड डील की बातचीत भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को यह जानकारी दी उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में इस मोर्चे पर अच्छी खबर दी जाएगी। गोयल ने कहा, ''हर मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अपनी शर्तों और खूबियों पर टिका होता है। हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। अमेरिका में मेरे समकक्ष और मेरे बीच बहुत ही शानदार कामकाजी संबंध और व्यक्तिगत मित्रता है। हम इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।'' जब उनसे पूछा गया कि 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (भारत-ईयू समझौता) के बाद अब भारत और अमेरिका के बीच 'फादर ऑफ ऑल डील्स' कब तक हकीकत बनेगी, तो उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों के लिए कभी कोई समय सीमा तय नहीं की जाती। इन्हें दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए सही समय पर अंतिम रूप दिया जाएगा। अगले सप्ताह वॉशिंगटन की अपनी निर्धारित यात्रा से पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और रक्षा सहित द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख आयामों पर चर्चा की। उम्मीद है कि वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जब गोयल से पूछा गया कि क्या रूसी तेल की खरीद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट का कारण है, तो उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि यह कोई बाधा या अड़चन है। कुछ गलतफहमियां हो सकती थीं, जिन्हें काफी हद तक सुलझा लिया गया

बायो-फार्मा से सेमीकंडक्टर तक बदलेगी तस्वीर, बजट 2026 में \’औद्योगिक संप्रभुता\’ का बड़ा दांव

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार का पूरा जोर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के संभावित बजट आकार के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ब्लूप्रिंट पेश किया है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाओं और उसके बाद गठित उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित है। केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन सुधारों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी में है। इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। 1. बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ का बूस्टर फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए सरकार ने 'बायो-फार्मा शक्ति' की घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। • उद्देश्य: ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराना। • इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। • रेगुलेशन: दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। 2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का प्रस्ताव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत तय लक्ष्य से दोगुना हासिल करने के बाद सरकार का उत्साह बढ़ा है। • नया निवेश: इस सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। • फोकस: मुख्य जोर उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्रों पर होगा, ताकि इस सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके। 3. रेयर अर्थ मिशन: आयात निर्भरता घटाने की तैयारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन या अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। 'रेयर अर्थ' तत्वों के खनन और शोध के लिए देश के चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। • राज्य: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। • लक्ष्य: इन कॉरिडोर्स का मुख्य उद्देश्य आयात निर्भरता  को घटाना और घरेलू स्तर पर इन स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की सप्लाई चेन बनाना है। 4. एमएसएमई और शहरी विकास 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आर्थिक ढांचे  को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि शहर विकास के इंजन बन सकें। भविष्य की ओर बढ़ती 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' कुल मिलाकर, ₹54.1 लाख करोड़ के बजट में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाती है। बायो-फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भारी निवेश और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण यह बताता है कि सरकार अब केवल 'असेंबली' नहीं, बल्कि 'मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन' पर फोकस कर रही है।

बायो-फार्मा से सेमीकंडक्टर तक बदलेगी तस्वीर, बजट 2026 में \’औद्योगिक संप्रभुता\’ का बड़ा दांव

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार का पूरा जोर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के संभावित बजट आकार के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ब्लूप्रिंट पेश किया है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाओं और उसके बाद गठित उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित है। केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन सुधारों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी में है। इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। 1. बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ का बूस्टर फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए सरकार ने 'बायो-फार्मा शक्ति' की घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। • उद्देश्य: ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराना। • इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। • रेगुलेशन: दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। 2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का प्रस्ताव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत तय लक्ष्य से दोगुना हासिल करने के बाद सरकार का उत्साह बढ़ा है। • नया निवेश: इस सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। • फोकस: मुख्य जोर उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्रों पर होगा, ताकि इस सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके। 3. रेयर अर्थ मिशन: आयात निर्भरता घटाने की तैयारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन या अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। 'रेयर अर्थ' तत्वों के खनन और शोध के लिए देश के चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। • राज्य: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। • लक्ष्य: इन कॉरिडोर्स का मुख्य उद्देश्य आयात निर्भरता  को घटाना और घरेलू स्तर पर इन स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की सप्लाई चेन बनाना है। 4. एमएसएमई और शहरी विकास 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आर्थिक ढांचे  को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि शहर विकास के इंजन बन सकें। भविष्य की ओर बढ़ती 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' कुल मिलाकर, ₹54.1 लाख करोड़ के बजट में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाती है। बायो-फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भारी निवेश और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण यह बताता है कि सरकार अब केवल 'असेंबली' नहीं, बल्कि 'मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन' पर फोकस कर रही है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- मामले सिर्फ भारत तक सीमित, ‘निपाह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी’

वाशिंगटन. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस के मामले दुर्लभ हैं लेकिन गंभीर भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निपाह वायरस के प्रकोप से जुड़े मामले केवल भारत तक ही सीमित हैं। किसी अन्य देश से इनकी सूचना नहीं मिली है। पहली पहचान के बाद तीसरे मामला-घेब्रेयसस घेब्रेयेसस ने एक्स पर लिखा,"पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए है। वे 1998 में वायरस की पहली पहचान के बाद से इस राज्य में तीसरे मामले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अधिकारी 190 से अधिक संपर्कों की निगरानी कर रहे हैं।  अभी तक किसी में भी यह बीमारी विकसित नहीं हुई है। उन्होंने आगे लिखा, "अधिकारियों ने बीमारी की निगरानी और परीक्षण बढ़ा दिए हैं, स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में रोकथाम और नियंत्रण के उपाय लागू किए हैं। जनता को खुद को सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में सूचित कर रहे हैं।" डब्ल्यूएचओ प्रमुख की यह चेतावनी वैश्विक स्वास्थ्य संस्था द्वारा यह कहने के एक दिन बाद आई है कि वायरस के फैलने का जोखिम कम है। किसी भी यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की कोई आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य निकाय ने यह भी कहा था कि मानव से मानव में संक्रमण बढ़ने का कोई सबूत नहीं है, और इसलिए जोखिम कम बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में दो लोग हुए थे संक्रमित पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए थे। दोनों ही नर्सें थीं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाद में बताया कि उनकी हालत में सुधार हुआ है। उनकी जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। पुरुष नर्स को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि महिला नर्स को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है, लेकिन उन्हें अभी भी निगरानी में रखा गया है। डब्ल्यूएचओ ने एक विज्ञप्ति में कहा, "दोनों मामलों में दिसंबर 2025 के अंत में गंभीर एनआईवी संक्रमण के विशिष्ट लक्षण विकसित हुए और उन्हें जनवरी 2026 की शुरुआत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 21 जनवरी 2026 तक, दूसरे मामले में नैदानिक सुधार देखा गया, जबकि पहला मामला गंभीर स्थिति में रहा।" निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता स्वास्थ्य निकाय ने बताया था कि निपाह वायरस चमगादड़ों से मनुष्यों में फैलता है और यह निकट संपर्क या दूषित भोजन के माध्यम से हो सकता है। इस वायरस से जुड़े लक्षण बुखार, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द हैं, जिससे इसका पता लगाना अधिक कठिन हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे मस्तिष्क में सूजन होने की संभावना होती है और मृत्यु की संभावना 40% से 75% के बीच होती है।

\’भारत की मदद से बलूच विद्रोही संगठन कर रहा हमले\’, बलूचिस्तान में सैनिकों के ढेर होने पर पाक का आरोप

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है। चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं। कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है। खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं।

\’भारत की मदद से बलूच विद्रोही संगठन कर रहा हमले\’, बलूचिस्तान में सैनिकों के ढेर होने पर पाक का आरोप

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने एक बार फिर से बड़ा हमला किया है। इन हमलों में 80 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए हैं। वहीं पाकिस्तान ने इससे उलट ही दावा करते हुए कहा है कि उसके 18 सैनिक मारे गए हैं, जबकि 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने घर में लगी आग के लिए भारत पर भड़ास निकाली है। चीन के हस्तक्षेप, CPEC प्रोजेक्ट और ग्वादर बंदरगाह के लिए बड़े पैमाने पर बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां के स्थानीय निवासियों की जिंदगी बदतर है। इसी के विरोध में बलूच विद्रोही संगठन अकसर पाकिस्तानी सेना, पंजाबी मूल के लोगों और यहां तक की चीनी नागरिकों पर भी निशाना साधते रहते हैं। कई बार बलूच विद्रोही संगठनों ने खूनी हमले भी किए हैं। इस बार अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक अटैक किया है। लेकिन पाकिस्तान इन हमलों की वजह तलाशने की बजाय भारत पर ही भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तानी सेना की प्रोपेगेंडा यूनिट ISPR ने इसके लिए भारत को जिम्मेदार बताने की कोशिश की है। उसने कहा कि ये हमले भारत से मदद पाने वाले फितना-अल-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने किए हैं। ये हमले क्वेटा, मस्तंग, नुशकी, दलबंदीन, खारन, पंजगुर, ग्वादर और पसनी में हुए हैं। इस तरह एक साथ ही कई शहरों पर बलूच विद्रोहियों ने हमले किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान जैसे संगठन की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। पाकिस्तानी एजेंसी ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया है। इसमें अब तक 92 बलूच विद्रोही मारे गए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 18 नागरिक और 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन से गहरी नाराजगी है। यही नहीं यहां पर अकसर पंजाबियों को टारगेट करते हुए भी हमले किए जाते रहे हैं। इसकी वजह पंजाबी वर्चस्व को माना जाता है। इस बीच खबर है कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के सारे रास्तों को भी पाकिस्तान ने बंद कर दिया है। खौफ इतना कि पंजाब से बलूचिस्तान जाने के रास्ते ही बंद डेरा गाजी खान के डिप्टी कमिश्नर उस्मान खालिद ने कहा कि बलूचिस्तान से पंजाब जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन के दौरान बलूच विद्रोही किसी आम नागरिक को टारगेट न कर सकें। अकसर बलूच विद्रोही पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट करते रहे हैं। ऐसे में रूट ही बंद करने के पीछे यही एक वजह मानी जा रही है। खालिद ने कहा कि फोर्ट मुनरो हाइवे और मूसा खेल रोड को बंद किया गया है, जो बलूचिस्तान जाते हैं। इसके अलावा जो ट्रैफिक चल रहा था, उसे भी सीमाओं पर ही रोक दिया गया है। ये सारे कदम एहतियात के तौर पर उठाए गए हैं।

BJP के लिए अहम है डेरा सचखंड, पंजाब दौरे पर जा रहे PM मोदी

जालंधर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी एक फरवरी को बजट को पेश करवाने के बाद शाम को पंजाब दौरे पर जा रहे हैं। पीएम का यह दौरा गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर रविदसिया समाज के मुख्यालय जालंधर के बल्लां स्थित डेरा सचखंड में हो रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में राज्य की जाति आधारित राजनीति में रविदासिया समाज की भूमिका को देखते हुए पीएम का इस समाज के मुख्यालय पर यह दौरा और भी ज्यादा खास हो गया है। पीएम मोदी के इस दौरे के पहले जालंधर को दहलाने की भी कोशिश की गई थी। यहां के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हालांकि बाद में वह सब फर्जी साबित हुए। पीएम का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भाजपा और उसकी पूर्व क्षेत्रीय सहयोगी पार्टी राज्य में दलित समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है। आखिर क्यों अहम है रविदासिया समाज? पंजाब में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा समेत तमाम पार्टियां दलित वोटर्स को लुभाने में लगी हुई है। ऐसे में दोआबा क्षेत्र, जहां पर लगभग 45 फीसदी दलित आबादी रहती है, जो कि पंजाब के औसत 32 फीसदी से कहीं ज्यादा है। इस क्षेत्र में राज्य की 23 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें बल्लां स्थित डेरे की पकड़ इनमें से करीब 19 सीटों पर है। संसद में बजट पेश करवाने के बाद पंजाब के दौरे पर जा रहे पीएम का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। जालंधर पहुंचने के पीएम मोदी यहां पर आदमपुर एयरपोर्ट का नया नामकरण करेंगे। यह एयरपोर्ट कल के बाद श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट आदमपुर के नाम से जाना जाएगा। इस एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग काफी पहले से की जा रही थी। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा हर तरीके से इस समुदाय को खुश करने में लगी हुई है। हाल ही में 26 जनवरी को पद्म पुरस्कार विजेताओं में यहां के डेरा प्रमुख निरंजन दास का नाम भी शामिल था। दलित वोटरों पर भाजपा की नजर भाजपा शुरुआती दौर से ही पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की जूनियर बनकर रही है। किसान आंदोलन के बाद राज्य में भाजपा की स्थिति में थोड़ी और गिरावट आई। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल भी साथ छोड़ गया। अब ऐसे में भाजपा का मुख्य फोकस राज्य के दलित वोटरों पर ही है और यही पार्टी के लिए राज्य में खड़े होने की कुंजी भी है। राज्य में पार्टी की इस योजना का असर होते हुए भी दिख रहा है। आंकड़ों की मानें तो 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर केवल 6.6 फीसदी था, जो कि लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया। हालांकि, इसमें किसान आंदोलन के असर का कम होने जैसे फैक्टर भी शामिल हो सकते हैं। विश्लेषकों की मानें तो रविदासिया समुदाय को साधकर भाजपा यहां पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। हालांकि पंजाब की राजनीति पर करीबी से नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि पंजाब के दलित मतदाता एकजुट होकर वोट नहीं देते हैं। प्रिंट से बात करते हुए। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने द प्रिंट से कहा, “रविदासिया और अन्य दलित समुदाय एकमुश्त किसी एक पार्टी को वोट नहीं देते। वे स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों के आधार पर रुख बदलते हैं।” उनका कहना है कि समुदाय लंबे समय से अलग पहचान की मांग करता रहा है और बीजेपी इस पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा क्या बोली? राजनीति चाहें कुछ भी कहें लेकिन भाजपा नेतृत्व ने इस दौरे को राजनैतिक चश्मे से न देखने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, “यह पंजाब के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री का रविदास जयंती समारोह में शामिल होना सभी समुदायों में एकता का संदेश देता है।” पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बजट वाले दिन प्रधानमंत्री का यह दौरा “आस्था और सम्मान को दी जा रही प्राथमिकता” को दर्शाता है। जाखड़ ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक इस समुदाय को नजरअंदाज किया।

10 दिन तक चलेगा महाभियान, आम बजट को खास बनाने लोगों को खूबियां बताएगी BJP

नई दिल्ली. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जब रविवार को बजट पेश कर रही हैं. तो यूपी में 2017 स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर उसका सीधा प्रसारण हो रहा है। इसके लिए भाजपा के उत्तर प्रदेश मुख्यालय से लेकर पार्टी के 98 संगठनात्मक जिलों और 1918 मंडलों में एलईडी स्क्रीन लगेंगे। पार्टी ने देश के आम बजट को खास बनाने की रणनीति तय की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित प्रदेश सरकार के सभी मंत्री और भाजपा के पदाधिकारी बजट की खूबियां गिनाएंगे। यह मुहिम 10 फरवरी तक चलेगी। अगले 10 दिनों तक भाजपा की सरकार और संगठन केंद्रीय बजट की खासियतें अलग-अलग समूहों के बीच बताते नजर आएंगे। इस काम में केंद्र व प्रदेश के मंत्रियों के अलावा भाजपा और उसके सभी छह मोर्चे जुटेंगे। रविवार को केंद्रीय बजट का सीधा प्रसारण दिखाने के लिए प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, मुख्यालय प्रभारी गोविंद नारायण शुक्ला, बजट जागरूकता अभियान के लिए बनीं टोली के संयोजक सुभाष यदुवंश, डॉ. समीर सिंह सहित अन्य मौजूद रहेंगे। यह एलईडी सभी जिला व मंडल कार्यालयों पर भी लगेंगे। व्यापारी-किसान, महिला व युवाओं पर फोकस पार्टी सोमवार से इसकी खूबियां गिनाने की मुहिम शुरू करेगी। खासतौर से व्यापारियों, किसानों, महिलाओं, युवाओं व श्रमिकों पर फोकस रहेगा। प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव मौर्य व ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी प्रेसवार्ता के जरिए हर वर्ग के लिए बजट में की गई व्यवस्था को बताएंगे। यह सिलसिला प्रदेशभर में तीन दिन चलेगा। इस दौरान प्रदेश के 13 मीडिया सेंटरों पर बजट से लाभ गिनाए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भाजपा का हर मोर्चा एक-एक कार्यक्रम करेगा। सभी मोर्चों को खुद से जुड़े समूहों से संवाद के छह-छह कार्यक्रम करने हैं। व्यापारियों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, किसान, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों के हर विधानसभा में सम्मेलन होंगे। यह सिलसिला 10 फरवरी तक चलेगा।

भारत के आर्थिक विकास के लिए बताया 6 सूत्रीय फॉर्मूला, वित्त मंत्री सीतारमण पेश कर रहीं आम बजट

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को भारत का आम बजट (Aam Budget 2026) पेश कर रही हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने बजट पर मुहर लगा दी है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। खास बात है कि इसके साथ ही वह 9वीं बार बजट पेश करने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लेंगी, जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है। एक ओर जहां मध्यम वर्गीय को महंगाई से राहत की उम्मीद है। वहीं, व्यापारी वर्ग टैक्स कम होने की आस लगाए है। पिछले चार वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा। खास बात है कि साल 2019 में जब सीतारमण ने पहला बजट पेश किया था, तब वह चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा पारंपरिक बही खाता लेकर पहुंचीं थीं। साल 2017 से बजट एक फरवरी को ही पेश किया जाता है। बजट 2026 स्पीच टाइम सुबह 10.15 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होगी जिसमें आम बजट को मंजूरी प्रदान की जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बजट पेश किए जाने की जानकारी देंगी। सीतारमण सुबह करीब 11 बजे संसद में बजट पेश करेंगी। लोकसभा में पूरा बजट भाषण पढ़ने के कुछ देर बाद बजट को राज्यसभा के पटल पर रखा जाएगा। संसद का मौजूदा बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ है। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। उसके बाद नौ मार्च से दूसरे चरण की बैठक शुरू होगी। तय कार्यक्रम के अनुसार बजट सत्र दो अप्रैल को समाप्त होगा। बजट 2026 से अपेक्षाएं आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि संभावनाएं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों से बेहतर हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 6.4 प्रतिशत जबकि विश्व बैंक एवं एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है। संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा 2025-26 में देश की संभावित वृद्धि दर के अनुमान को तीन साल पहले अनुमानित 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है।

50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर, बजट से पहले बड़ा झटका

नई दिल्ली. आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था। घरेलू एलपीजी के रेट भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है। बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं। 2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था। 2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के। 2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था। 2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत' भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

सफलता का नया मतलब: इंजीनियर ने बीमारी के चलते Google छोड़ दी जॉब, कहानी सोशल मीडिया पर छाई

 नई दिल्ली जिंदगी में हर इंसान की तलाश क्या होती है. जल्द से जल्द पैसा कमाना, खुद को एक इनसेक्योर जोन से सेक्योर जोन में ले जाना, लेकिन असल जिंदगी की प्राथमिकता क्या है. रेस में सबसे आगे जाना या फिर जिंदगी की बुनियादी जरूरत वो सेहत है,जिसे दरकिनार कर दिया जाता है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली की कहानी भी इन्हीं दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली (Tia Lee) ने 2020 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (Michigan State University) से ग्रेजुएशन किया और तभी तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक चीज चाहिए जितना हो सके उतना पैसा कमाना. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी करियर जर्नी शुरू की, लेकिन तीन साल बाद यही रेस उनकी सेहत पर इतना भारी पड़ी कि आज वह सफलता को पूरी तरह नए नजरिए से देखती हैं. पैसा या सेहत-जिंदगी में क्या है अहमियत 2023 के अंत तक टिया एक साथ तीन भूमिकाएं निभा रही थीं.कैलिफोर्निया में Google की Technical Program Manager, फ्रीलांस वेबसाइट डिजाइनर और अपनी क्लोदिंग लाइन की मालिक. लगातार काम और अलग-अलग शहरों की यात्राओं ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया. उन्होंने CNBC Make It को बताया कि वह लगभग हर दूसरे महीने बीमार पड़ने लगी थीं. कैलिफोर्निया, मिशिगन और टेक्सास के बीच लगातार यात्रा करते-करते उन्हें लगने लगा कि बीमारी सिर्फ ट्रैवल की वजह से होती है. लेकिन कई महीनों तक यूं ही बीमार रहने के बाद डॉक्टर ने इशारा किया कि असली वजह तनाव हो सकता है. इसी बात ने टिया को सोचने पर मजबूर किया कि शायद बहुत सारी जिम्मेदारियां ही उनकी सेहत को खराब कर रही हैं. तभी उन्होंने अपने करियर को रोकने का फैसला किया. भागदौड़ में खो गई थीं… टिया ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए. फ्रीलांस काम कम किया, खर्चों में कटौती की और इतना पैसा बचाया कि वे सालों तक बिना नौकरी के रह सकें. वह मिशिगन में अपने माता-पिता के घर वापस आ गईं. उन्होंने अपनी Tesla कार बेचकर एक सस्ती Chevrolet ले ली ताकि खर्च और कम हो सके. यहां तक कि उन्होंने एक निजी शेफ से यह समझौता किया कि वह उसका वेबसाइट बना दें और इसके बदले शेफ हफ्तेभर का मील प्रेप दे दे.इससे उनका किराना खर्च भी खत्म हो गया. इन बदलावों ने टिया के लिए सफलता की परिभाषा बदल दी. उन्होंने बताया कि पहले उनके लिए कामयाबी का मतलब था पैसा, प्रमोशन और काम में पहचान, लेकिन अब सफलता का मतलब है अपनी सेहत और समय पर पूरा नियंत्रण. Google छोड़ने के बाद उन्होंने जून में नौकरी से इस्तीफा दिया और ब्रूक्लिन, न्यूयॉर्क में शिफ्ट होकर एक धीमी, संतुलित जीवनशैली अपनाई, जिसमें अच्छा खाना और खुद के साथ समय बिताना शामिल है. फिलहाल उनका कॉर्पोरेट दुनिया में वापस लौटने का कोई प्लान नहीं है.

नेतन्याहू भारत आ रहे, दिल्ली में अरब देशों के साथ बैठक तय; जयशंकर का मिडिल ईस्ट गेम चर्चा में

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

एपस्टीन फाइल्स अपडेट: रशियन लड़कियों और निजी जीवन से जुड़े बिल गेट्स के चौंकाने वाले राज

वॉशिंगटन: अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने जेफ्री एपस्टीन के नए सीक्रेट दस्तावेज पब्लिक कर दिए हैं. कुख्यात जेफ्री एपस्टीन प्रकरण में रिलीज की गई 30 लाख से ज्यादा फाइलों में फिर से एक बड़े नाम को लेकर चौंकाने वाले राज खुले हैं. ये बड़ा नाम ‘माइक्रोसॉफ्ट का मसीहा’ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का है. लीक किए गए सीक्रेट ईमेल्स की मानें तो गेट्स को एक जानलेवा गुप्त रोग (STD) लग गया था, जिसे दुनिया से छिपाने के लिए वे तड़प रहे थे. ईमेल में उन रशियन लड़कियों का भी जिक्र है, जो गेट्स के इस घिनौने सच की सबसे बड़ी गवाह थीं. बिल गेट्स के ईमेल्स में खुला शॉकिंग राज गेट्स से जुड़े डॉक्यूमेंट्स में खुलासा हुआ है कि उन्हें यौन संचारित रोग हो गया था. चौंकाने वाली बात तो यह है कि उन्होंने इस लाइलाज बीमारी के सबूत मिटाने के लिए कुख्यात अपराधी जेफ्री एपस्टीन को सरेआम धमकियां तक दे डाली थीं. इन ईमेल्स में बिल गेट्स ने रशियन लड़कियों का भी जिक्र किया था. जुलाई 2013 में जेफ्री एपस्टीन ने खुद को एक लंबा ईमेल भेजा था. यह ईमेल उस वक्त का है जब बिल गेट्स ने एपस्टीन से दूरी बनानी शुरू कर दी थी. एपस्टीन ने इस ईमेल में गुस्से और बदले की आग में वो राज उगल दिए जिन्हें गेट्स शायद दुनिया से हमेशा के लिए छिपाना चाहते थे. एपस्टीन ने लिखा था कि गेट्स ने उससे विनती की थी कि वह उनके STD (यौन संचारित रोग/गुप्त रोग) से जुड़े ईमेल डिलीट कर दे. एपस्टीन ने अपनी इस ‘धमकी’ में साफ लिखा था कि उसके पास गेट्स के रशियन लड़कियों के साथ संबंधों और उसके बाद पैदा हुई बीमारियों का पूरा कच्चा चिट्ठा मौजूद है. मेलिंडा के साथ वो ‘खतरनाक’ धोखा! इन दस्तावेजों में बिल गेट्स की पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स से जुड़ा एक भयानक किस्सा भी है. दस्तावेजों के मुताबिक, गेट्स ने रशियन लड़कियों के साथ संबंध बनाने के बाद एक गुप्त रोग (STD) पकड़ लिया था. पकड़े जाने के डर से, गेट्स ने कथित तौर पर एपस्टीन से ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं जिन्हें वे चुपके से मेलिंडा को दे सकें. उद्देश्य यह था कि मेलिंडा को बिना बताए उनका इलाज हो जाए और उन्हें कभी पता ही न चले कि उनके पति ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया था. रशियन लड़कियां और राइट हैंड का कबूलनामा इन फाइलों में गेट्स के पूर्व सलाहकार बोरिस निकोलिक के नाम से लिखे गए ड्रॉफ्ट ईमेल भी मिले हैं. निकोलिक, जो गेट्स के सबसे भरोसेमंद ‘राइट हैंड’ माने जाते थे, उन्होंने अपने इस्तीफे के ड्रॉफ्ट में लिखा था कि उन्हें ऐसी चीजों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया जो न केवल अनैतिक थीं, बल्कि गैरकानूनी भी थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने गेट्स के लिए रशियन लड़कियों का इंतजाम करने, नशीली दवाएं पहुंचाने और यहां तक कि अवैध ट्रस्ट बनाने में मदद की थी. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि गेट्स ब्रिज टूर्नामेंट्स के दौरान अपनी दिमागी क्षमता बढ़ाने के लिए ‘एडेरॉल’ जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल करते थे. मेलिंडा का तलाक: अब जुड़ीं सारी कड़ियां जब 2021 में बिल और मेलिंडा का तलाक हुआ, तो दुनिया हैरान थी. मेलिंडा ने सिर्फ इतना कहा था कि बिल की एपस्टीन के साथ दोस्ती और उनके अफेयर्स ने शादी को खोखला कर दिया. लेकिन अब सामने आई इन कड़ियों से साफ है कि मेलिंडा 2019 से ही तलाक की प्लानिंग कर रही थीं. जैसे ही वॉल स्ट्रीट जर्नल में बिल और एपस्टीन की आधी रात की मुलाकातों की खबरें आईं, मेलिंडा समझ गई थीं कि जिस इंसान के साथ वे सालों से रह रही हैं, उसकी सच्चाई कुछ और ही है. एपस्टीन के साथ बिल की मुलाकातों में मिस स्वीडन जैसी खूबसूरत महिलाओं का शामिल होना और देर रात तक उनके घर पर रुकना, मेलिंडा के लिए बर्दाश्त से बाहर था. बिल गेट्स के झूठ और एपस्टीन की ‘जादुई’ दुनिया बिल गेट्स ने हमेशा मीडिया के सामने यही कहा कि उनकी एपस्टीन के साथ कोई दोस्ती नहीं थी, वे कभी उनके निजी विमान (Lolita Express) में नहीं बैठे और न ही उनके किसी घर पर गए. लेकिन सच इसके उलट है. फ्लाइट मैनिफेस्ट बताते हैं कि मार्च 2013 में गेट्स ने एपस्टीन के प्राइवेट जेट में सफर किया था. एपस्टीन के मैनहट्टन टाउनहाउस में वे कई बार देर रात तक रुके थे. गेट्स ने खुद एक ईमेल में लिखा था कि एपस्टीन का लाइफस्टाइल बहुत ‘अलग और दिलचस्प’ है. एपस्टीन की मौत और अधूरे राज जेफ्री एपस्टीन ने 2019 में जेल में आत्महत्या कर ली थी, लेकिन उसके पास मौजूद ‘ब्लैक बुक’ और ईमेल आज भी दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की रातों की नींद उड़ा रहे हैं. बिल गेट्स का नाम इन दस्तावेजों में बार-बार आना यह साबित करता है कि परोपकार की आड़ में कहीं न कहीं कुछ बहुत बड़ा और काला छिपा हुआ था. हालांकि गेट्स के प्रवक्ताओं ने इन दावों को खारिज किया है, लेकिन DOJ द्वारा जारी किए गए हजारों पन्नों के ये ईमेल झूठ नहीं बोलते.

महंगाई का नया वार: 1 फरवरी से पान-मसाला और सिगरेट हुए महंगे, नियम बदले

नई दिल्ली जनवरी का महीना खत्म होने वाला है और कल से नए फरवरी महीने की शुरुआत हो जाएगा. हर महीने की तरह ये महीना भी कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st February) के साथ शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) से लेकर टोल टैक्स पर फास्टैग से जुड़े नियम (FASTag Rule Change) तक शामिल हैं. वहीं सबसे बड़ा शॉक पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को लगने वाला है. जी हां, 1 फरवरी 2026 से इन तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ (Pan-Masala Cigarette Price Hike) सकती हैं, क्योंकि सरकार इन पर लागू टैक्स में इजाफा करने वाली है.  साल की शुरुआत में की थी तैयारी इस साल की शुरुआत में ही सरकार की ओर से GST क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर एक नया उत्पाद शुल्क और उपकर अधिसूचित किया गया था. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत देश में 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अधिक टैक्स का प्रावधान किया गया है. अधिसूचना को देखें, तो तंबाकू और पान मसाला पर नए शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगाए जाएंगे. जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 को भी अधिसूचित किया. ये नियम चबाने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से उत्पादन क्षमता का आकलन करने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं. रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा दो विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया, जो पान मसाला निर्माण पर नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.   कीमतों पर दिखेगा टैक्स इफेक्ट  सरकार द्वारा संशोधित टैक्स स्ट्रक्चर के तहत 1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लंबी, प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी. बदलाव के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो फरवरी  पहली तारीख से प्रभावी होगा. ध्यान रहे कि यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा.  टैक्स की मार के चलते इन तंबाकू प्रोडक्ट्स को बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होगा और ऐसे में कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं. सीधे शब्दों में कहें तो सिगरेट, पान-मसाला, गुटखा महंगे हो जाएंगे और इनके शौकीनों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी.  Crisil ने इसे लेकर क्या कहा?  क्रिसिल की एक रिपोर्ट को देखें, तो सिगरेट उद्योग को शुल्क में बढ़ोतरी से बिक्री में गिरावट का सामना भी करना पड़ सकता है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के क्षतिपूर्ति उपकर भी लगते हैं, लेकिन 1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटा दिया जाएगा और सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल ने Tax Hike से घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है. 

दुश्मन के लिए खौफनाक हथियार: राफेल से बड़ी डील, ब्रह्मास्त्र जो पानी में आग लगा सकता है

नई दिल्ली भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 70,000 से 72,000 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट-75(I) पनडुब्बी निर्माण समझौते पर मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है. यह सबमरीन डील अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा. बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सूत्रों के मुताबिक इसे हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में भारत यात्रा के दौरान निर्णायक गति मिली. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) का उद्देश्य इंडियन नेवी के पुराने हो चुके पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एवं डेटरेंस कैपेबिलिटी (प्रतिरोध की क्षमता) को मजबूत करना है. ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, भारत के लिए अल्‍ट्रा मॉडर्न सबमरीन की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. P-75I प्रोजेक्‍ट के तहत छह उन्नत पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन का निर्माण किया जाएगा. शॉर्टलिस्‍ट किए गए टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन सबमरीन फ्यूल सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे वे कई हफ्तों तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती हैं. इससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग का जोखिम काफी कम हो जाता है और नौसेना की सीक्रेट ऑपरेशन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है. चीन और पाकिस्‍तान ने खासतौर पर अरब सागर के साथ ही हिन्‍द महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को काफी बढ़ावा दिया है. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश होने लगी हैं. यही वजह है कि भारत सबमरीन फ्लीट को अपग्रेड करने के साथ ही उसे बढ़ा भी रहा है. क्‍या है सबमरीन डील? oइस परियोजना में जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ साझेदारी में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) देश में ही इन पनडुब्बियों का निर्माण करेगी. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 45 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी. प्रस्तावित समझौते में पनडुब्बी निर्माण से जुड़ी अहम टेक्‍नोलॉजिकल ट्रांसफर का भी प्रावधान होने की संभावना है, जो भारत की लॉन्‍ग टर्म रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है. भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब एक दर्जन रूसी मूल की पनडुब्बियां और छह फ्रांसीसी निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की आधुनिक पनडुब्बियां हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते सामरिक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर भारत को अपनी पनडुब्बी क्षमता में और विस्तार की जरूरत है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर 2014 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने प्रोजेक्ट-75(I) के तहत 6 नई पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दी थी, जबकि जुलाई 2021 में औपचारिक अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी किया गया. राफेल फाइटर जेट से भी बड़ी डील यह प्रोजेक्‍ट केवल नेवी की युद्ध क्षमता को ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि देश के जहाज निर्माण और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी. इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसर पैदा होंगे और पनडुब्बी प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स तथा उपकरणों के निर्माण से जुड़ा एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा. जर्मनी के साथ सबमरीन करार भारत के लिए अभी तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील साबित होगी. यह साल 2016 में की गई राफेल फाइटर जेट खरीद समझौते से भी बड़ा है. भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट ₹58000 में खरीदा था, जबकि जर्मनी के साथ सबमरीन डील ₹72000 करोड़ की है. नेवी के लिए 51 वॉरशिप सरकार हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण रोडमैप 2015–2030 को तेजी से लागू कर रही है. इसके तहत देश में 51 बड़े युद्धपोतों का निर्माण जारी है, जिनकी कुल लागत करीब 90,000 करोड़ रुपये है. वर्ष 2014 से अब तक भारतीय शिपयार्ड्स नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंप चुके हैं, और बीते एक वर्ष में औसतन हर 40 दिन में एक नया पोत नौसेना में शामिल हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत-जर्मनी के बीच होने वाला यह पनडुब्बी सौदा न केवल रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय समुद्री शक्ति संतुलन में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने में मदद करेगा.

10 राज्य जो सबसे ज्यादा कर्ज़ में डूबे हैं, पंजाब से पश्चिम बंगाल तक की पूरी लिस्ट

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो… पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.  पंजाब-बिहार दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.  केरल-तमिलनाडु केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.  हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.  MP-कर्नाटक लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा.