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ग्वालियर में स्प्रिंग फैक्ट्री में गैस रिसाव के बाद हुआ भयंकर ब्लास्ट, 5 लोग गंभीर रूप से घायल

 ग्वालियर ग्वालियर में भारतीय रेलवे की स्प्रिंग फैक्ट्री में गैस रिसाव के कारण आग लग गई। इस हादसे में पांच कर्मचारी झुलस गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। बीती रात 10 बजे यह घटना मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुई। झांसी रोड थाना क्षेत्र की सिथौली रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री में मेंटेनेंस के दौरान गैस लीक होने से अचानक आग भड़क उठी। मौके पर मौजूद कौशल श्रीवास्तव, योगेश कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉई, शब्बीर, बुरी तरह झुलस गए। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस फैक्ट्री में ट्रेनों के लिए स्प्रिंग और अन्य पुर्जे बनाए जाते हैं। अस्पताल में घायलों का इलाज कर रहे डॉ. सोफी शकील ने बताया कि पांच लोग गंभीर जलन के साथ लाए गए थे। इनमें से तीन की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।झांसी रोड थाना के टीआई शक्ति यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस टीम मौके पर पहुंच चुकी है। विवेचक सभी सबूत जुटा रहे हैं और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। घायलों का इलाज प्राथमिकता पर जारी है। आग से झुलसे योगेश जनगांम ने बताया कि मशीन के पास वायरिंग कर रहा था तभी अचानक आग की लपटे उठी और खुद को बचाने तक का समय नहीं मिला। वहीं 60 फीसदी झुलसे मोहम्मद साबिर की हालत गंभीर है। वही इस मामले को लेकर उत्तर मध्य रेलवे सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि बंद मशीन की मेंटेनेंस के दौरान एलपीजी के रिसाव से ये हादसा हुआ है। पास में चल रहे स्प्रिंग निर्माण की वजह से गैस में आग पकड़ ली। हादसे में एक रेलवे कर्मी और चार कांटेक्ट कर्मचारी झुलसे हैं। घटना की जांच के आदेश दिए हैं। ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एमपी के इस शहर में पहली बार रेल का आगमन, खिलचीपुर से राजगढ़ तक आई उम्मीदों की रेल

 रामगंज मंडी जिला मुख्यालय पर गुरुवार शाम को पहली बार जिला मुख्यालय तक रेल पहुंची है। रामगंज मंडी से चलकर पहली मालगाड़ी शाम को राजगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंची। बहुप्रतीक्षित भोपाल-रामगंज मंडी रेल लाइन पर पहली बार ट्रेन के पहुंचते ही लोगों में उत्साह का माहौल बन गया। वर्षों से रेल सेवा का इंतजार कर रहे नगरवासी बड़ी संख्या में रेलवे पटरी के किनारे जमा हो गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इस ऐतिहासिक पल को देखा और मोबाइल से फोटो-वीडियो बनाकर खुशी जाहिर की। मालगाड़ी में लाया गया रेल निर्माण का सामान राजगढ़रेलवे स्टेशन पहुंची इस मालवाहक ट्रेन में रेलवे पटरी सहित रेल निर्माण से जुड़ी आवश्यक सामग्री लाई गई है। हालांकि फिलहाल ट्रैक अधूरा है और कई स्थानों पर काम जारी है, लेकिन पहली बार जिले में ट्रेन आने से लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने कहा कि यह राजगढ़ के विकास की दिशा में बड़ा कदम है। खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच ट्रैक को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। इसी खंड में पहले चरण में रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) का निरीक्षण प्रस्तावित है। मार्च तक सवारी रेल का ट्रायल कराने की तैयारी रेलवे के अधिकारियों के अनुसार मार्च माह तक सवारी रेल का ट्रायल कराने की तैयारी है। पहले चरण में राजगढ़-खिलचीपुर और आगे ब्यावरा तक यात्री ट्रेन चलाने की योजना है। रेल सेवा शुरू होने से राजगढ़ को भोपाल और राजस्थान से सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे व्यापार, खेती और आम लोगों की आवाजाही को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। 2026 के अंत तक पूरा होगा काम बता दें कि करीब 3050 करोड़ के रामगंज मंडी-भोपाल रेल लाइन प्रोजेक्ट का काम दिसंबर-2026 तक पूरा करना है। कोटा और भोपाल रेल मंडल में आने वाले उक्त प्रोजेक्ट में कोटा मंडल ने करीब 90 फीसदी काम पूरा करा लिया है। भोपाल मंडल में भी अब तेजी से काम जारी है। पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर तक पूरा करने का दांवा किया जा रहा है।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 33वीं मौत, बुजुर्ग ने दम तोड़ा, इलाके में फैला हड़कंप

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी हादसे में देर रात एक और मौत हो गई। मृतक का नाम अलगूराम यादव (70) है। उन्हें 9 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। उन्हें सांस संबंधी तकलीफ भी थी। इनके सहित अब तक इस हादसे में 33 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। इसके पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी।  अभी हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों की संख्या तीन है, जबकि 450 से ज्यादा मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। दरअसल, भागीरथपुरा में एक और मौत का मामला सामने आया है। हलकूप्रसाद यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे वेंटिलेटर पर थे। इससे पहले उनकी पत्नी की भी मौत हो चुकी है, जिससे शोक का माहौल है।   लोगों में डर का माहौल लगातार हो रही मौतों से क्षेत्र के लोगों में अब भी डर का माहौल है। उल्टी-दस्त से पीड़ित होने के बाद बीमारी बढ़ती है और फिर धीरे-धीरे शरीर के अंगों पर असर होना शुरू हो जाता है। पिछले दिनों हुई मौतों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा सामने आ रही है। इसके पहले अलगूराम यादव की पत्नी की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। उर्मिला यादव को भी उल्टी-दस्त की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उर्मिला यादव ने दम तोड़ा था। उनकी मौत को महीनेभर हो गए हैं। अगलूराम यादव के बेटे संजय यादव का कहना है कि पिता को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उल्टी-दस्त के चलते अस्पताल में एडमिट किया था, जहां उनकी जान चली गई। अभी हॉस्पिटल में एडमिट मरीजों की संख्या तीन है, जबकि 450 से ज्यादा मरीज एडमिट होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। इसके पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी। अनिता कुशवाह (65) एक माह से अधिक समय से अस्पताल में एडमिट थीं। अनिता का बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। वह लंबे समय से वेंटिलेटर पर थीं। बेटे नीलेश ने बताया था कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। चैंबर में ही जोड़ दी निजी ड्रेनेज लाइन वार्ड 80 के रहवासी कुछ दिनों से दूषित पानी से परेशान थे। शुरुआती 10-15 मिनट तक नर्मदा के बजाय दूषित बदबूदार पानी आता था। शिकायत की तो जांच शुरू हुई। निगम की टीम जांच करते हुए नर्मदा जल वितरण के वाल्व तक पहुंची। खोदाई की तो चौंक गए। कुछ रहवासियों ने नर्मदा के चैंबर में निजी ड्रेनेज लाइन जोड़ दी थी। पानी के लिए वाल्व खोलते ही ड्रेनेज पीने के पानी के साथ मिलकर रहवासियों के घरों तक पहुंच जाता था। निगम की टीम ने कार्रवाई कर ड्रेनेज की लाइन को अलग किया। लोगों ने की गंदगी की शिकायत निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत रंगवासा सिंदौड़ा स्थित ताप्ती परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने फेस-दो के ब्लाकों में बचे हुए काम और विद्युतीकरण के कार्य को शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश एजेंसी को दिए। फेस-एक और तीन आवासीय इकाइयों का काम पूरा हो चुका है। यहां 1500 से ज्यादा परिवार रहते हैं। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने रहवासियों से चर्चा भी की। रहवासियों ने सामुदायिक भवन (कम्युनिटी हाल) के निर्माण में देरी, साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर असंतोष जताया।  हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का दिया था आदेश 27 जनवरी को हाईकोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया था। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया था। हाईकोर्ट में ढाई घंटे सुनवाई भागीरथपुरा मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में ढाई घंटे से अधिक समय तक सुनवाई चली। सरकार की ओर से कोर्ट में 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी से होनी बताई गई। वहीं 4 मौतों को लेकर असमंजस और 3 मौतें दूषित पानी से नहीं होना बताई गईं। मौतों के आंकड़ों पर भारी विरोधाभास हाईकोर्ट ने मौतों के आंकड़ों को लेकर गंभीर असहमति दर्ज की। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतें जलजनित बीमारी से मानी गईं। वहीं याचिकाकर्ताओं ने करीब 30 मौतों का दावा किया। कोर्ट ने कहा था कि रिपोर्ट में मौतों के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हैं। पर्याप्त वैज्ञानिक और दस्तावेजी आधार का अभाव है।

रायसेन जिले में सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस निलंबित, अवैध शराब परिवहन मामले में बड़ी कार्रवाई

रायसेन   रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित सोम डिस्टलरीज को बुधवार रात आबकारी विभाग ने सील कर दिया। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सोम डिस्टलरी के खिलाफ लगभग 2 साल पहले देपालपुर के मामले को लेकर की गई है। इसमें अदालत ने फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित करते हुए सील करने के आदेश दिए थे। बुधवार शाम आबकारी कमिश्नर के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी सहित भोपाल से आए कुछ अधिकारियों ने सेहतगंज स्थित फैक्ट्री पहुंचकर सील करने की कार्रवाई की। उल्लेखनीय है कि नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब का परिवहन करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने प्रकरण 21/2021, फाइलिंग 975/2021 में 23/12/2023 को फैसला दिया था, जिसमे मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड सेहतगंज जिला रायसेन तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड रोजराचक जिला रायसेन के प्रतिनिधि उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोरा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर एवं दीनानाथ सिंह डायरेक्टर, मेसर्स सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक जिला रायसेन तथा अन्य को उक्त प्रकरण में पारित आदेश में उल्लेखित विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कारावास एवं अर्थदंड से दण्डित किया था। आरोपीगणों ने मिलकर परमिट क्रमांक 10363, ट्रक क्रमांक एमपी 09 एचएफ 5185 की बिल्टी और अनेकोनेक परमिट बुक की कूट रचना की थी। इसमें मदनसिंह द्वारा 5 फर्जी परमिट बुक, विरेन्द्र भारद्वाज द्वारा 272, रामप्रसाद मिश्रा द्वारा 25, प्रीति गायकवाड़ द्वारा 279, संजय गोहे 282, कैलाश बंगाली 29, मोहन सिंह तोमर 676, उमाशंकर 75 और दिनकरसिंह द्वारा 65 फर्जी परमिट की कूटरचना कर स्वयं को अथवा मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने का काम किया गया था।

अनूपपुर पुलिस ने छत्तीसगढ़ से अपहृत नाबालिग को आरोपी के कब्जे से मुक्त किया, परिजनों को सौंपा

छत्तीसगढ से अपहृत कर लाई नाबालिग बालिका को कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा आरोपी के कब्जे से मुक्त कराकर परिजनों और छत्तीसगढ पुलिस को सौंपा  अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर  मोती उर रहमान जी के कुशल निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगनाथ मरकाम जी एवं एसडीओपी श्री सुमित केरकेट्टा के मार्गदर्शन में कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा छत्तीसगढ के जिला सूरजपुर से अपहृत कर लाई गई 17 वर्षीय नाबालिग बालिका को आरोपी के कब्जे से मुक्त कराया जाकर परिजनो को सूचना देकर छत्तीसगढ पुलिस और परिवारजन को सौंपा गया। उक्त नाबालिग बालिका की दिनांक 31.01.2026 को अपने घर से अचानक लापता हो जाने पर पुलिस चौकी लटोरी थाना जयनगर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ में धारा 137(2) बी.एन.एस. का अपराध पंजीबद्ध है। दिनांक 04.02.2026 दिन बुधवार को टी.आई. कोतवाली अरविन्द जैन को सूचना प्राप्त हुई कि अनूपपुर नगर में एक नाबालिग बालिका के साथ संदिग्ध व्यक्ति किराये का कमरा लेने का प्रयास कर रहा है। जो उक्त सूचना पर पुलिस द्वारा तत्काल एक्शन लिया गया। टी. आई  कोतवाली अरविंद जैन के नेतृत्व में महिला उपनिरीक्षक सरिता लकड़ा, सहायक उपनिरीक्षक कमलेश तिवारी, आरक्षक अब्दुल कलीम, महिला आरक्षक अंकिता सोनी की टीम के द्वारा उक्त नाबालिग बालिका को आरोपी नवयुवक बबलू देवांगन पिता प्राचन देवांगन उम्र 19 साल निवासी सूरजपुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ के कब्जे से पकड़ा जाकर सुरक्षित थाना लाया गया। कोतवाली पुलिस के द्वारा दी गई सूचना पर पुलिस चौकी लटोरी थाना जयनगर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ से सहायक उपनिरीक्षक मानिकदास एवं नाबालिग बालिका के परिजन उपस्थित आये जिन्हें उनकी बच्ची सकुशल सौंपी जाकर पकडे गए आरोपी को भी छत्तीसगढ़ पुलिस के सुपुर्द किया गया।          पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस की सजगता और ततपरतापूर्वक पूर्वक की गई कार्रवाई से उक्त नाबालिक बालिका अपने घर सुरक्षित पहुंच सकी।  जिसके परिवारजन द्वारा कोतवाली अनूपपुर पुलिस का आभार व्यक्त किया गया है

ओंकारेश्वर में महाशिवरात्रि के दिन 24 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के पट, फूलों से किया जाएगा विशेष शृंगार

खंडवा  महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर 24 घंटे दर्शनार्थियों के लिए खुला रहेगा। इस वजह से प्रतिदिन रात साढ़े आठ बजे होने वाली शयन आरती नहीं होगी। महापर्व पर भगवान शिव भी रतजगा करेंगे। ज्योतिर्लिंग मंदिर की फूलों से सजावट की जाएगी। श्रीजी मंदिर ओंकारेश्वर ट्रस्ट द्वारा तड़के तीन बजे से मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे, जो अगले दिन रात तीन बजे कुछ समय बंद रहने के बाद फिर खुल जाएंगे। शास्त्रों के अनुसार ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती रात्रि विश्राम करते हैं। इसके चलते रात्रि में यहां भगवान के लिए सेज, झूला और चौंसर भी बिछती है। रात्रि 8:30 बजे के बाद मंदिर के पट बंद कर शयन आरती की जाती है। इसके बाद भगवान विश्राम करते हैं। महाशिवरात्रि पर शयन आरती और भगवान के लिए सेज और झूला नहीं सजेगा। मंदिर ट्रस्ट के पंडित आशीष दीक्षित और पं. डंकेश्वर दीक्षित ने बताया कि उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के समान ओंकारेश्वर में भगवान की शयन आरती का महत्व है। पट खुलने पर पहले साधु-संत करेंगे दर्शन महाशिवरात्रि पर तड़के तीन बजे पट खुलने के बाद साधु-संत और संन्यासी शोभायात्रा के साथ मंदिर पहुंचकर पूजन-दर्शन करेंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दोपहर 12:20 बजे भगवान को भोग के लिए कुछ समय के लिए पट बंद होंगे। फिर तड़के तीन बजे तक सतत दर्शनार्थ पट खुले रहेंगे। शिवरात्रि पर मंदिर में फूलों से सजावट और तीर्थनगरी तथा घाटों पर रोशनी की जाएगी।  

राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि का बड़ा कदम, फीस वृद्धि का निर्णय वापस, छात्रों को मिली राहत

 ग्वालियर  राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा प्रदेशभर के संबद्ध निजी कालेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की फीस में की गई भारी वृद्धि के मामले में छात्रों को राहत मिल गई है। निजी कालेज संचालकों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने गुरुवार को बैठक कर फीस वृद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है, जिससे आगामी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को राहत मिली है। विश्वविद्यालय द्वारा एक झटके में लगभग पांच हजार रुपये तक फीस बढ़ाने के निर्णय पर प्रदेशभर के कालेज संचालकों ने सामूहिक आपत्ति दर्ज कराते हुए पुनर्विचार की मांग की थी। उनका कहना था कि इतनी बड़ी वृद्धि अव्यावहारिक है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर भारी बोझ पड़ेगा। किस चीज को लेकर था विवाद सबसे ज्यादा विवाद ‘आकस्मिक शुल्क’ को लेकर था। विश्वविद्यालय ने स्वाध्यायी छात्रों पर 1500 से पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, जिसका स्पष्ट औचित्य प्रबंधन नहीं बता पाया। कालेज संचालकों ने कहा कि प्रदेश के किसी अन्य विश्वविद्यालय में इस तरह का आकस्मिक शुल्क नहीं लिया जाता। फीस वृद्धि के तहत पीजी में हर साल पांच हजार रुपये बढ़ाए गए थे, जिससे दो साल का कुल शुल्क 22-25 हजार रुपये तक पहुंच जाता। वहीं छह वर्षीय स्कूल स्तर के डिप्लोमा में प्रतिवर्ष 1500 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि छात्र पहले से ही अपने स्कूलों में फीस जमा करते हैं। नई दरों के अनुसार फीस जमा करने का आदेश विश्वविद्यालय ने पहले 10 फरवरी तक नई दरों के अनुसार फीस जमा करने का आदेश दिया था। बढ़ते विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक समिति गठित कर मामले की समीक्षा शुरू की थी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने फीस वृद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है।  

एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार \’मसल ट्रांसफर\’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

भोपाल  एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है, जिसमें शरीर के एक हिस्से की सक्रिय मांसपेशी को दूसरे हिस्से में लगाकर अंग की गति वापस लाई गई। 'फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर' (एफएफएमटी) नामक इस तकनीक के जरिए 55 वर्षीय एक ऐसे मरीज का हाथ सक्रिय किया गया है, जो 'पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी' के कारण पूरी तरह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका था। मरीज एक ऐसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था जिसमें कंधे से हाथ तक जाने वाली नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप उसका ऊपरी अंग पूरी तरह निष्क्रिय था और वह हाथ हिलाने तक में असमर्थ था। इस स्थिति में जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है क्योंकि मरीज दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है। कैसे हुई जटिल माइक्रोसर्जरी? इस सर्जरी में मरीज की जांघ से 'ग्रैसिलिस' नामक मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला गया। इस जीवित मांसपेशी को प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से नसों और खून की नलियों को जोड़ा गया। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब मरीज की कोहनी में सक्रिय लचीलापन बहाल हो सकेगा, जिससे वह हाथ मोड़ना और उठाना जैसे बुनियादी कार्य कर पाएगा। इन विशेषज्ञों की टीम ने रचा इतिहास इस ऐतिहासिक सर्जरी में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. राहुल दुबेपुरिया (एसोसिएट प्रोफेसर) की मुख्य भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने किया। जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध     प्रदेश में यह अपनी तरह की पहली और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इस उपलब्धि ने साबित किया है कि एम्स भोपाल अब दुनिया की सबसे उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों को अपनाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। – प्रो. डॉ. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

एम्स भोपाल में मप्र में पहली बार \’मसल ट्रांसफर\’ सर्जरी, जांघ की मांसपेशी से हाथ की गति में आई सुधार

भोपाल  एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है, जिसमें शरीर के एक हिस्से की सक्रिय मांसपेशी को दूसरे हिस्से में लगाकर अंग की गति वापस लाई गई। 'फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर' (एफएफएमटी) नामक इस तकनीक के जरिए 55 वर्षीय एक ऐसे मरीज का हाथ सक्रिय किया गया है, जो 'पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी' के कारण पूरी तरह लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका था। मरीज एक ऐसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था जिसमें कंधे से हाथ तक जाने वाली नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके परिणामस्वरूप उसका ऊपरी अंग पूरी तरह निष्क्रिय था और वह हाथ हिलाने तक में असमर्थ था। इस स्थिति में जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है क्योंकि मरीज दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाता है। कैसे हुई जटिल माइक्रोसर्जरी? इस सर्जरी में मरीज की जांघ से 'ग्रैसिलिस' नामक मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला गया। इस जीवित मांसपेशी को प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से नसों और खून की नलियों को जोड़ा गया। इस सफल प्रक्रिया के बाद अब मरीज की कोहनी में सक्रिय लचीलापन बहाल हो सकेगा, जिससे वह हाथ मोड़ना और उठाना जैसे बुनियादी कार्य कर पाएगा। इन विशेषज्ञों की टीम ने रचा इतिहास इस ऐतिहासिक सर्जरी में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा (अतिरिक्त प्रोफेसर), डॉ. राहुल दुबेपुरिया (एसोसिएट प्रोफेसर) की मुख्य भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर) ने किया। जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध     प्रदेश में यह अपनी तरह की पहली और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इस उपलब्धि ने साबित किया है कि एम्स भोपाल अब दुनिया की सबसे उन्नत माइक्रोसर्जिकल तकनीकों को अपनाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। – प्रो. डॉ. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।  

चीतों के इलाके में बाघ की एंट्री, कूनो पार्क में पहली बार आया नजर, कैमरे ने पकड़ी तस्वीर

 श्योपुर देश-दुनिया में चीतों के घर के रूप में पहचान बनाने वाले मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अब टाइगर की भी मौजूदगी है. एक दिन पहले कूनो नेशनल पार्क के टिकटोली गेट क्षेत्र के जंगल में एक बाघ नजर आया, जिसे पहली बार पर्यटकों ने देखा. इससे पहले कूनो में टाइगर की मौजूदगी के संकेत तो मिलते रहे थे, लेकिन यह पहला मौका है, जब पर्यटकों को बाघ का दीदार हुआ. गुरुवार सुबह टिकटोली गेट से निजी फ्लाइंग कैट सफारी के दौरान पर्यटक कूनो भ्रमण पर निकले थे. इसी दौरान जंगल क्षेत्र में एक टाइगर दिखाई दिया. बाघ बैठा हुआ था, लेकिन पर्यटकों की जिप्सी को देखकर चल पड़ा और कुछ ही देर में जंगल के भीतर ओझल हो गया. वन विभाग के अनुसार, यह बाघ राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व का टी-132 हो सकता है, जो करीब 6 महीने पहले रणथंभौर क्षेत्र से बाहर निकला था. इससे पहले भी कूनो में टाइगर के पगमार्क मिलने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब पहली बार उसकी प्रत्यक्ष मौजूदगी सामने आई है. कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने आजतक को फोन पर बताया कि कूनो नेशनल पार्क में एक टाइगर की मौजूदगी काफी समय से मानी जा रही थी, लेकिन हाल के दिनों में वह नजर नहीं आया था. संभव है कि वही टाइगर टिकटोली गेट के पास दिखाई दिया हो. कूनो में अब बिग कैट की तीन प्रजातियां दुनियाभर में बिग कैट की 6 प्रजातियां- शेर, बाघ, जगुआर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता मानी जाती हैं. इनमें से अब कूनो नेशनल पार्क में तीन प्रजातियां मौजूद हैं. यहां पहले से ही तेंदुओं की अच्छी संख्या है. बीते साढ़े तीन साल से कूनो चीता प्रोजेक्ट का केंद्र बना हुआ है. अब बाघ की मौजूदगी ने पार्क की जैव विविधता को और समृद्ध कर दिया है.

एमपी में ठंड का कहर, तापमान 10 डिग्री से नीचे, उज्जैन और इंदौर में धूप, 8 फरवरी से बारिश की संभावना

भोपाल  वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सिस्टम का असर खत्म होते ही मध्य प्रदेश में सर्दी ने दोबारा जोर पकड़ लिया है। उत्तरी हवाओं के तेज होने से दिन में ठिठुरन बढ़ गई है, वहीं रात का तापमान कई इलाकों में 10 डिग्री से नीचे चला गया। ओले-बारिश से मिली राहत के बाद अब ठंड और कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।मौसम विभाग के मुताबिक, बीते एक हफ्ते से सक्रिय सिस्टम के कमजोर पड़ते ही गुरुवार को प्रदेश के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार-गुरुवार की रात ग्वालियर समेत 8 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा, जबकि 30 से ज्यादा जिलों में हलके से घने कोहरे ने सुबह की रफ्तार थाम दी।  एमपी में अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने 7 फरवरी को प्रदेश में हल्का कोहरा रहने का अनुमान जताया है लेकिन बारिश की कोई चेतावनी नहीं है. इस बीच तेज ठंडी हवाओं का असर प्रदेश के ऊपर बना रहेगा. इसके साथ ही 8 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा छाने की संभावना है. इस दिन भी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है. 8 फरवरी से नया मौसम सिस्टम होगा सक्रिय, फिर गिरेगा मावठा मौसम वैज्ञानिक डॉ दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा. इसके असर से प्रदेश के मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है. 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना जताई गई है. राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार शुक्रवार को राजगढ़ में सबसे कम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. इसके बाद रीवा में 7.2 डिग्री, खजुराहो में 8.2 डिग्री, दतिया में 8.4 डिग्री, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ है. वहीं पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री रहा है. बड़े शहरों में भी ठंड का असर, गिरा न्यूनतम तापमान भोपाल और उज्जैन में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा इंदौर में 13.2 डिग्री, जबलपुर में 13.5 डिग्री और ग्वालियर में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ. न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज प्रदेश में सबसे ठंडा राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज किया गया। रीवा में 7.2, खजुराहो में 8.2, दतिया में 8.4, दमोह और सतना में 9.6 डिग्री तथा पचमढ़ी में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और उज्जैन में 13 डिग्री, इंदौर में 13.2 और जबलपुर में 13.5 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर में पारा 9 डिग्री तक लुढ़क गया। सुबह-सुबह कोहरे की चादर शुक्रवार सुबह ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में हलका से मध्यम कोहरा छाया रहा। कोहरे का असर परिवहन पर भी दिखा। दिल्ली से आने-जाने वाली कई ट्रेनों की टाइमिंग प्रभावित हुई है। मालवा, सचखंड और शताब्दी जैसी ट्रेनों के यात्री देरी से परेशान नजर आए। अगले दो दिन का मिजाज 7 फरवरी: हलका कोहरा, बारिश का अलर्ट नहीं, ठंड बनी रहेगी। 8 फरवरी: कई जिलों में हलका से मध्यम कोहरा, फिलहाल बारिश नहीं। फिर बदलेगा मौसम मौसम विभाग का कहना है कि 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा और 10 फरवरी से मावठा गिरने की संभावना है। यानी ठंड के साथ बारिश का दौर एक बार फिर लौट सकता है। 

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की सैलरी में होगी वृद्धि, शिक्षकों के पदों को भरने के लिए नया फॉर्मूला तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन इसमें डॉक्टर्स की नियुक्ति सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं. राज्य सरकार अब दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें स्पेशल अलाउंस देने की भी तेयारी कर रही है. इन डॉक्टर्स को बड़े शहरों के आसपास स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में 20 फीसदी अधिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने की तैयारी चल रही है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मापदंड तैयार कर रही है. मेडिकल कॉलेज खुले, पद खाली प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनमें फैकल्टी की कमी पूरी करने में सरकारी को पसीना आ रहा है. सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में तकरीबन 90 फीसदी फैकल्टी के पद खाली पड़े हैं. यहां स्वीकृत पदों की संख्या 116 है, लेकिन भर्ती मुश्किल से डेढ़ दर्जन पदों पर ही हो सकी है. कमोवेश यही स्थिति प्रदेश के श्योपुर जिले में बनाए गए सरकारी मेडिकल कॉलेज की है. इसमें फैकल्टी के 116 पद हैं, लेकिन यहां भी मुश्किल से 15 पदों को ही भरा जा सका है. इन कॉलेजों में पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स तो पहुंच गए, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक मौजूद नहीं हैं. इसकी वजह से ऑनलाइन क्लास के जरिए इन्हें पढ़ाया जा रहा है. फैकल्टी के मामले में सबसे ज्यादा समस्या नए मेडिकल कॉलेजों में हैं. श्योपुर, सिंगरौली, नीचम, मंदसौर और सिवनी में 50 से लेकर 90 फीसदी तक फैकल्टी के पद खाली हैं. कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव इससे निपटने के लिए राज्य सरकार अब इन दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ होने वाली फैकल्टी को स्पेशल अलाउंस देने की तैयारी कर रही है. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के पास भेजने के लिए कहा है. इन डॉक्टर्स को अलाउंस देने के लिए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं. उपमुख्यमंत्री के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सभी पदों को भरने की कार्रवाई की जाएगी. तीन नए मेडिकल कॉलेज और होने जा रहे शुरू मध्य प्रदेश में इस सत्र से तीन और नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहे हैं. ये मेडिकल कॉलेज सीहोर जिले के बुधनी, छतरपुर और दमोह में खोले जा रहे हैं. इन मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के लिए व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं. तीन नए मेडिकल कॉलेज के बाद प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी. इसके अलावा मंडल और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारियां चल रही हैं. प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या है 17 मध्य प्रदेश में अभी 17 मेडिकल कॉलेज हैं. इनमें गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज इंदौर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर, शासकीय मेडिकल कॉलेज दतिया, अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज विदिशा, शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम, नंद कुमार सिंह चौहान मेडिकल कॉलेज खंडवा शामिल हैं. इनके अलावा शासकीय मेडिकल कॉलेज शहडोल, छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज, श्रीमंत रानी लक्ष्मीबाई सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी, शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना, सुंदरलाल पटवा शासकीय मेडिकल कॉलेज मंदसौर, शासकीय मेडिकल कॉलेज सिवनी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा शासकीय मेडिकल कॉलेज नीमच शामिल हैं. 

प्रदेश सरकार का नया लक्ष्य, शराब से 21 हजार करोड़ कमाई, आबकारी नीति और 111 साल पुराने अंग्रेजी कानून में बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए आबकारी नीति 2026-27 में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. इस नई नीति का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद नीति को कैबिनेट में लाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस नीति के जरिए सरकार ने शराब बिक्री से करीब 21 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही आबकारी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. नई नीति में राजस्व बढ़ाने पर होगा फोकस नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की बिक्री से पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 3 हजार करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. पिछली नीति में 18 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान था. इस बार दुकानों के चालू वित्तीय वर्ष के मूल्य में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर आवंटन किए जाने का प्रस्ताव है. सबसे पहले दुकानों का नवीनीकरण किया जाएगा. इसके बाद लाटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और अंत में ई-टेंडर के माध्यम से ठेके दिए जाएंगे. शापिंग माल में महंगी शराब के काउंटर का प्रस्ताव नई नीति में शापिंग माल में प्रीमियम और महंगी शराब के काउंटर खोलने का प्रस्ताव भी शामिल है. इस पर भी अंतिम फैसला मुख्यमंत्री यादव लेंगे. सरकार का मानना है कि इससे उच्च वर्ग के उपभोक्ताओं को नियंत्रित और वैधानिक विकल्प मिलेगा, साथ ही राजस्व में भी इजाफा होगा. हालांकि नई आबकारी नीति में न तो कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई दुकान खोलने की योजना है. धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों से तय दूरी जरुरी पिछली आबकारी नीति 2025-26 में 17 धार्मिक नगरों में शराब दुकानों को बंद किया गया था, जिससे 47 दुकानें बंद हुई थीं. इस बार ऐसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है. यानि न तो नई शराब दुकानें खुलेंगी और प ही पुरानी दुकानों को बंद किया जाएगा. वर्तमान वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश में कुल 3,558 शराब दुकानें हैं, जो सभी कंपोजिट दुकानें हैं. नर्मदा नदी के दोनों किनारों से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानें नहीं खोलने और धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों से 100 मीटर की दूरी का नियम पहले की तरह लागू रहेगा.     राज्य की आय में आबकारी का बड़ा योगदान प्रदेश के बजट में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और राज्य के स्वयं के कर अहम भूमिका निभाते हैं. जीएसटी के जरिए पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इस वर्ष दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है. वैट, आबकारी, पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से राज्य को 32,660 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है. 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की तैयारी वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि, ''मध्य प्रदेश सरकार 1915 में लागू हुए आबकारी अधिनियम में संशोधन करने जा रही है. इसके लिए आबकारी विभाग ने अधिकारियों की विशेष टीम गठित की है, जो अधिनियम की अव्यावहारिक और अप्रासंगिक धाराओं की समीक्षा कर रही है. ऐसी धाराएं, जिनसे अब सरकार को कोई राजस्व नहीं मिलता, उन्हें हटाने का प्रस्ताव है.'' देवड़ा ने बताया कि, ''आबकारी अधिनियम से ऐसी कंडिकाएं हटाई जा रही हैं, जिनका अब औचित्य नहीं बचा है.

एमपी में बिना पर्ची के एंटीबायोटिक्स बिक रही हैं, हर महीने करोड़ों का अवैध धंधा चल रहा है

रीवा   जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का हर माह 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। इतना ही नहीं प्रतिबंध के बावजूद तमाम दवा विक्रेता एंटीबायोटिक दवाओं की ऑन द काउंटर (ओटीसी) बिक्री भी कर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल से जहां लोगों का स्वास्थ बिगड़ रहा है वहीं उनकी जेब पर भी असर पहुंच रहा है। दवा कारोबारियों व डॉक्टरों के गठजोड़ के कारण एंटीबायोटिक्स की खपत पर रोक नहीं लग पा रही है। यह गठजोड़ अवैध कमाई का जरिया बन गया है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिला भी एक बड़ा बाजार बन चुका है। रीवा एवं मऊगंज जिले को मिलाकर अरमान व रूरल एरिया में कल 1380 मेडिकल स्टोर रजिस्टर्ड है। इनमें ग्रामीण अंचलों में मकड़जाल की तरह पहले झोलाछाप डॉक्टर शामिल नहीं है, जिसमें अंधाधुंध एंटीबायोटिक्स दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है। बड़े स्तर पर चिकित्सकों ने भी अपने मरीजों को दवा लिखकर मेडिकल स्टोर से खरीदने की बजाय खुद ही बेच रहे हैं। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी, फोड़े-फुन्सी, चोट इत्यादि के उपचार के लिए मरीज सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर काउंटर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर कार्य चला रहे हैं और दवा विक्रेता भी धड़ल्ले से वायरल इंफेक्शन, मौसमी विकार व चोट घाव की दवा बिना डाक्टरों की पर्ची मांगे बेच भी रहे हैं।  एंटीबायोटिक्स के इस भयावह स्थिति को लेकर पड़ताल करने का प्रयास किया है। एक हजार से अधिक काउंटर जिले में संचालित: जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का कारोबार एक बहुत बड़ा और सक्रिय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां थोक विक्रेताओं का एक बड़ा नेटवर्क है जो निमोनिया, संक्रमण और अन्य बीमारियों के लिए एमोक्सिसिलिन, सेफलेक्सिन और डॉक्सीसाइक्लिन जैसे प्रमुख एंटीबायोटिक्स को अस्पतालों, क्लीनिकों और फार्मेसियों में वितरित करते हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की भारी मांग के कारण थोक और खुदरा कारोबार काफी बड़ा है। यही कारण है कि जहां शहरी क्षेत्र में 681 से अधिक तो ग्रामीण में लगभग 699 दवा काउंटर हैं जो फुटकर में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इन्हीं काउंटर से माह भर में 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक की सिर्फ एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री हो जाती है। मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक्स की बिक्री : ख़ुटेही निवासी अशोक पटेल तीन दिन से सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बुधवार को बुखार एवं जुकाम के बाद पास के अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर पहुंचे और अपनी समस्या बताकर दवा ले ली। न दुकान संचालक ने डाक्टर की पर्ची मांगी और न ही पीड़ित ने दी। चिकित्सक कमीशन के खेल में अपनी जेबें भर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स के माध्यम से धन कमा बना रहे हैं। जिस दवा कंपनी से इनका कमीशन अधिक मिलता है वे मरीज को वही दवा लिखते हैं। दवा विक्रेता क्या करे, जो मांग आएगी वह उसे ही तो बेचेगा। अब तो डॉक्टर दवाई भी बेचने लगे हैं। निश्चित रूप से सरकार को नियम सख्त करने की जरूरत है। तरुणेद्र सिंह, अध्यक्ष, दवा विक्रेता संघ रीवा। हमने पहले ही सरकारी चिकित्सकों को गाइड लाइन के पालन की सख्त हिदायत देकर रखी हुई है। वायरल इंफेक्शन में तो मरीज को एंटीबायोटिक्स दवा बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। इसी तरह सर्दी, जुकाम में भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक दो दिन में यह अपने आप ठीक हो जाती है। ऐसे में एंटीबायोटिक्स नुकसानदेह है। खासकर हाईडोज से बचना चाहिए। शिशु रोग के मामले में खासकर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ प्रतिभा पांडे, सिविल सर्जन, कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल बिछिया रीवा।

Indore Metro: छोटा गणपति स्टेशन बनेगा अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में सबसे छोटा

इंदौर  मेट्रो परियोजना के अंडर ग्राउंड प्रोजेक्ट में छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन पर बनी उलझन अब खत्म होने को है। मेट्रो के अंडर ग्राउंड अन्य स्टेशन के मुकाबले छोटा गणपति का स्टेशन सबसे छोटा होगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा छोटा गणपति स्टेशन निर्माण के लिए जो मृदा परीक्षण रिपोर्ट तैयार की है। उसमें बताया है कि यहां पर न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (नेटम) के माध्यम से खोदाई की जाएगी। इस प्रक्रिया में जमीन की सतह से 37 से 38 मीटर नीचे मेट्रो स्टेशन का निर्माण होगा। जबकि शहर में मेट्रो के अंडर ग्राउंड स्टेशन जमीन से 18 से 22 मीटर गहराई में बनाए जा रहे है। ऐसे में यह मेट्रो स्टेशन सबसे छोटा और सबसे ज्यादा गहराई में होगा। गार्डन के हिस्से में होगी खोदाई तो नहीं टूटेंगे मकान पूर्व में कट एंड कवर तकनीक के माध्यम से छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाना था। यह अंडर ग्राउंड स्टेशन एमजी रोड के समानांतर मल्हारगंज थाने के पास 190 मीटर की लंबाई में बनाना तय किया था। ऐसे में 142 मकान टूट रहे थे। सर्वे रिपोर्ट के बाद न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड से इसका निर्माण किया जाना तय किया है। ऐसे में एमजी रोड के समानांतर 146 मीटर लंबाई में स्टेशन बनाया जा सकेगा। इससे मकानों को तोड़ने की जरूरत नही होगी। सिर्फ इस क्षेत्र में बने गार्डन वाले हिस्से पर ही खोदाई की जाएगी। जमीन के नीचे स्टेशन का विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया से निर्माण एजेंसी को 25 से 30 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना होंगे।  

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले, प्रदेश विद्युत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना प्राथमिकता

प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णत: आत्म निर्भर : ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णतः आत्म निर्भर हो गया है। प्रदेश भविष्य में भी विद्युत के क्षेत्र में आत्म निर्भर बना रहे इसके लिये विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1806 मेगावाट की वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से 851 मेगावाट क्षमता वृद्धि हासिल की जा चुकी है। प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 10 घंटे प्रतिदिन विद्युत प्रदाय की जा रही है। रबी मौसम में मकर संक्रांति पर्व पर 19895 मेगावाट की अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक पूर्ति की गई, जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। प्रदेश में पारेषण हानियां अब मात्र 2.60 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-2030 तक की अवधि में प्रदेश की पारेषण प्रणाली के सुदृढीकरण के लिये म.प्र. पॉवर ट्राँसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 5163 करोड़ रुपये के पूंजीगत कार्यों का अनुमोदन प्रदान किया गया है। अटल गृह ज्योति योजना में जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है एवं पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिए अधिकतम 100 रुपये का बिल दिया जा रहा है एवं अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। इस योजना में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2024-25 में सब्सिडी की मद में 6495.27 करोड़ रूपये जारी किए गए थे। अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हॉर्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। शासन द्वारा 1 हैक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्स पॉवर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। योजना लगभग 9.3 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। समाधान योजना 2025-26" में अद्यतन लगभग 17 लाख 15 हजार रूपये उपभोक्ताओं का 350 करोड़ 67 लाख रूपये सरचार्ज माफ हुआ हैं तथा 852 करोड़ 76 लाख रूपये के बिल जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम-जनमन) में प्रदेश में लगभग 28 हजार घरों के विद्युतीकरण की कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वितरण कंपनियों द्वारा नवम्बर 2025 तक लगभग 26,000 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। शासन द्वारा अति उच्चदाब ट्राँसमिशन लाईनों के निर्माण से टॉवर लगने वाले और ट्राँसमिशन लाईन के प्रभावित किसानों को पहले की कलेक्टर गाईडलाईन से दोगुना मुआवजा एकमुश्त एवं डिजिटल माध्यम से दिया जाएगा।  

किसानों की सशक्तिकरण के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” समाचार किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से पारदर्शी व प्रमाणिक कृषि डेटा व्यवस्था हुई स्थापित म.प्र. बना फार्मर रजिस्ट्री के शत-प्रतिशत अनुपालन वाला पहला राज्य भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है। फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। एससीए योजना में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी और भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव बनेगी। साथ ही, जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  

इंदौर में 350 करोड़ में एलिवेटेड कॉरिडोर, इस माह से शुरू होगा काम, सॉयल टेस्टिंग के साथ 6 लेन का प्रस्ताव, मेट्रो भी जुड़ेगी

इंदौर आखिरकार फरवरी से इंदौर के एबी रोड पर नौलखा से एमआइजी चौराहे के बीच 350 करोड़ रुपए की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की कवायद हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसकी तैयारी की गई। तीन चौराहों पर भुजाएं प्रस्तावित की गई है ताकि वाहन चालकों को सुविधा हो। ब्रिज पर रोटरी भी प्रस्तावित की जा रही है। वैसे एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) के लिए सालों पहले प्लानिंग हुई थी। दो साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंदौर आने पर निर्माण के लिए भूमिपूजन भी हो गया था। इसके बाद कॉरिडोर को लेकर सवाल उठे तो सर्वे कराया गया। नौलखा से एमआइजी चौराहा (प्रेस कॉम्प्लेक्स तक) एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव था। लोगों ने आपत्ति लेते हुए सवाल उठाए कि ऐसे वाहन चालक बहुत कम होते है जो एबी रोड पर सीधे नौलखा से एमआइजी तक जाए। अधिकांश लोगों को बीच के इलाके में जाना होता है। यह रहवासी के साथ ही व्यवसायिक इलाका है। दिसंबर में की गयी थी घोषणा दिसंबर में मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए निर्देशित किया, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने फिर प्लानिंग की। वैसे गुजरात की कंपनी को पहले यह ठेका मिल चुका था, निरस्त नहीं होने से कुछ भुगतान भी बिना काम करने की बात सामने आ रही है। अब बीआरटीएस कॉरिडोर भी खत्म किया जा रहा है, ऐसे में कॉरिडोर ब्रिज का महत्व बढ़ गया है। पीडब्ल्यूडी ने कॉरिडोर पर शिवाजी प्रतिमा चौराहा, गीता भवन चौराहा एवं पलासिया चौराहे पर भुजाएं प्रस्तावित की है। भुजाएं देने से बीच के इलाके में जाने वाले वाहन चालकों को फायदा होगा और ऐसे में कॉरिडोर का ज्यादा इस्तेमाल संभव हो पाएगा।   नौलखा से एलआईजी के बीच बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर फिर नया प्रस्ताव आया है, अब इसे चार लेन से बढ़ाकर 6 लेन करने की बात कही गई है.  6 लेन करने का प्रस्ताव  इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर को 6 लेन करने का प्रस्ताव दिया गया है, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एलिवेटेड ब्रिज जरूरी है. क्योंकि इससे ही जाम कम होगा, लेकिन इसकी चौड़ाई 4 की जगह 6 लेन की होनी चाहिए, जबकि इसे नौलखा से आगे राजीव गांधी चौराहा और राऊ के साथ-साथ एलआईजी के आगे तक बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ट्रैफिक की समस्या और दूर होगी. वहीं इस ब्रिज को मेट्रो से जोड़ने का प्रावधान करने की बात भी कही है, जिसमें मुख्य चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी जैसे प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा गया है.  ट्रैफिक अलर्ट: आंशिक रुकावट, जल्द जारी होगा डायवर्जन प्लान वर्तमान में सॉयल टेस्टिंग के कारण सड़क पर अस्थायी टीन लगाए गए हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, 15 फरवरी से जब भारी मशीनें मौके पर पहुंचेंगी और खुदाई शुरू होगी, तब ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी किया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। 15 फरवरी से काम  बताया जा रहा है कि इंदौर में इस ब्रिज का काम 15 फरवरी से शुरू हो जाएगा, क्योंकि यह ब्रिज इंदौर में अगले 50 साल तक ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है, इसलिए इस पर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही गई है. इंदौर की ट्रैफिक समस्या को दूर करने के साथ-साथ ब्रिज के विस्तार पर भी काम करने की बात कही गई है. जिसमें इंदौर के सभी जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय दी है. बताया जा रहा है कि फिलहाल ब्रिज को 4 लेन में बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन अब इसे 6 लेन का करने की बात कही है.  

कृषि रथ से किसानों को उर्वरक संतुलन और नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषि रथ से किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक एवं नवीन तकनीकों की दी गई जानकारी ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक वितरण की नवीन प्रणाली से कराया अवगत भोपाल  कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत झाबुआ जिले के 6 विकासखण्ड में निरंतर कृषि रथ के माध्यम से कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों द्वारा प्रति दिन 3 ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अभी तक 296 ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर लगभग 20250 किसानों से सम्पर्क स्थापित किया गया है। किसानों को उनकी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का निराकरण करने के साथ ही कृषि एवं संबंद्ध विषयों पर नवीन एवं वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन हैं उन्हें जायद के मौसम में तिलहनी फसलों की बुवाई करने की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है, साथ ही किसानों को कृषि रथ के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित अनुशंसा अनुसार संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन, फसल बीमा तथा शासन द्वारा उर्वरक वितरण की नवीन वितरण प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन के माध्यम से पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण व्यवस्था की जानकारी से अवगत कराया जा रहा है। अब उनके रकबे के आधार पर उर्वरक उपलब्धता की जाएगी, किसानों को उर्वरक लेने के लिए अब लम्बी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा साथ ही उनके पंजीकृत मोबाईल फोन पर खाद के उपलब्धता की जानकारी प्राप्त हो जायेगी। कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों जायद मौसम की फसलों की जानकारी के साथ ही सूक्ष्म सिंचाई यंत्रो जैसे ड्रीप, स्प्रिंकलर आदि के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ ही उद्यामनिकी फसलों तथा पशु पालन विभाग अंतर्गत दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की जानकारी भी दी जा रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सके। कृषि रथ द्वारा ग्राम मानिकपुरा में कृषकों को प्राकृतिक और जैविक खेती का समझाया महत्व  टीकमगढ़ ज़िले के सभी विकासखंडों में कृषि रथ एक माह के लिए चलाये जा रहे हैं। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय के द्वारा कृषि से सम्बद्ध अन्य विभागों को भी निर्देशित किया गया है कि कृषि रथ के माध्यम से विभागों में संचालित योजनाओं का कृषकों के मध्य प्रचार-प्रसार प्रसार करें। इसी तारतम्य में कृषि रथ के माध्यम से ग्राम पंचायत गणेशगंज के ग्राम मानिकपुरा में भ्रमण कर कृषकों को प्राकृतिक खेती/जैविक खेती करने के लिये प्रोत्साहित, नरवाई नहीं जलाने और मृदा परीक्षण कराने का महत्व समझाया गया। कृषि रथ द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए तैयार की गई ई-टोकन व्यवस्था और ई-विकास पोर्टल की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशुपालन विभाग में संचालित कृषक हितेषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कृषि रथ के साथ नोडल अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, संबंधित विकासखंडों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, आत्मा योजना  एवं संबंधित विभागों का मैदानी अमला उपस्थित रहा।  

देश का सबसे बड़ा मल्टी-फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर अब जबलपुर में होगा स्थापित

जबलपुर में स्थापित होगा देश का सबसे बड़ा मल्टी फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी 14 करोड़ रूपए की लागत से करेगी स्थापित जबलपुर मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) जबलपुर के नयागांव स्थि‍त पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से देश का सबसे बड़ा मल्टी-फंक्शनल थर्मल एवं हाइड्रो ऑपरेटर ट्रेनिंग सिम्युलेटर स्थापित करने जा रही है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर के माध्यम से विद्युत उत्पादन अभियंताओं को विद्युत संयंत्रों के संचालन, नियंत्रण एवं आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन का यथार्थपरक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे प्लांट ट्रिपिंग जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह सिम्युलेटर रिमोट ऑपरेशन की सुविधा से भी युक्त होगा। इससे पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान न केवल राज्य बल्कि अन्य राज्यों की विद्युत कंपनियों के अभियंताओं एवं तकनीकी विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रमुख प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपने कार्मिकों को उच्च स्तरीय तकनीकी , वित्तीय एवं प्रबंधकीय दक्षताओं से सुसज्जित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यालय स्थि‍त नयागांव में प्रशिक्षण संस्थान को अत्याधुनिक नवाचारों के साथ विकसित कर रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह, डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम और डायरेक्टर कॉमर्श‍ियल  मिलिन्द भान्दक्कर के प्रगतिशील मार्गदर्शन में यह संस्थान देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक विशिष्ट एवं अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्य अभियंता मानव संसाधन व प्रशासन  दीपक कुमार कश्यप ने जानकारी कि प्रशिक्षण संस्थान में आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा रही है, जहाँ कंपनी के सभी कॉडर के कार्मिकों को तकनीकी, वित्तीय व प्रबंधकीय विषयों पर समग्र प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थान नवनियुक्त कार्मिकों व अभियंताओं के लिए प्रेरण प्रशिक्षण (इंडक्शन ट्रेनिंग) का प्रमुख केंद्र होगा। कंपनी की मिड-कैरियर ट्रेनिंग पॉलिसी के अंतर्गत करंट चार्ज अथवा पदोन्नति प्राप्त करने वाले सहायक अभियंता से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक के कार्मिकों को विशेष रूप से संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाएगा। निर्माणाधीन ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम एवं आईटी प्रशिक्षण केंद्र-प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 150 सीटों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम निर्माणाधीन है, जिसमें सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएँ एवं विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 21 कम्प्यूटर एवं समर्पित कार्यस्थलों से युक्त एक आधुनिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जहाँ ईआरपी, ऑटोकैड, प्राइमावेरा सहित विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बहुआयामी प्रशिक्षण परिसर-प्रशिक्षण संस्थान में एक अत्याधुनिक मॉडल रूम एवं डिजिटल पुस्तकालय का विकास भी किया जा रहा है, जहाँ हाइड्रो एवं थर्मल पॉवर प्लांटों के कार्यशील मॉडल, कोल हैंडलिंग प्लांट, टरबाइन, जनरेटर, बॉयलर, ईएसपी, कंडेंसर एवं कूलिंग टावर जैसी प्रमुख मशीनों के मॉडल स्थापित किए जाएंगे। प्रशिक्षणार्थियों के आवास हेतु लगभग 3.8 करोड़ रुपये की लागत से 16 कमरों वाला छात्रावास निर्माणाधीन है, जिसमें डाइनिंग हॉल, किचन, रिक्रिएशन हॉल एवं मिनी जिम जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, संस्थान में एक हाई-टेक स्टूडियो भी विकसित किया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण वीडियो की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग एवं एडिटिंग की जाएगी, जिनका प्रसारण विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की यह पहल न केवल मानव संसाधन विकास की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार एवं प्रशिक्षण उत्कृष्टता के माध्यम से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

चंबल नदी जलीय जीव एवं पक्षियों की वार्षिक गणना के लिए सर्वेक्षण दल हुआ रवाना

भोपाल. चंबल नदी के घाट दांतरदा क्षेत्र में जलीय जीवों तथा प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना के लिये गठित सर्वेक्षण दल को मुख्य वन संरक्षक, ग्वालियर वृत्त और वनमंडलाधिकारी, मुरैना ने गुरुवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सर्वेक्षण चंबल नदी क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण, प्रबंधन एवं वैज्ञानिक आंकड़ों के संकलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सर्वेक्षण दल में वन विभाग के फील्ड स्टाफ के साथ राजस्थान वन विभाग के प्रतिनिधि श्री भानु प्रताप सिंह एवं फील्ड स्टाफ भी शामिल हैं। सर्वेक्षण दल निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार चंबल नदी क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ सहित अन्य जलीय जीवों तथा स्थानीय, प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की गणना करेगा। इस अवसर पर अधीक्षक, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, श्योपुर श्री संदीप वास्कले, गेम रेंज ऑफिसर, सबलगढ़ श्री दीपक शर्मा सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  

समाज परिवर्तन की कुंजी सद्भावना और सेवा: राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आत्मीय सद्भावना के साथ जरूरतमंद की मदद सच्ची समाज सेवा है। सेवा का भाव सबकी अंतरात्मा में निहित है। उसे अच्छे संस्कारों और मूल्यों से उभारने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से कहा कि आपके कार्यों से लोगों को खुशी मिले। किसी को दुख नहीं हो। हर दिन के अंत में चिंतन करें, क्योंकि समाज बदलने के लिए स्वयं को बदलना आवश्यक है। सबके लिए सद्भावना और निस्वार्थ सेवा से ही आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। धन से क्षणिक सुख तो प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु वास्तविक सुख संस्कारित आचरण से ही मिलता है।राज्यपाल  पटेल गुरुवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ‘कैंपस टू कम्यूनिटी’ सफर ‘शिक्षा द्वारा समाज सेवा’ और ‘समाज सेवा द्वारा शिक्षा’ के महान लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि “स्वयं से पहले सेवा” के जीवन-मंत्र को अपनाने की साधना है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के युवा केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के समर्पित सिपाही हैं। उनका प्रत्येक कदम समाज की प्रगति, जागरूकता और संवेदनशीलता की दिशा में आगे बढ़ता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सलामी देना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली सार्थकता तब है, जब स्वयंसेवक अपनी निस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प से वंचित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाएँ। उन्होंने कहा कि समाज सेवा में सद्भाव होगा तभी वंचितों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर युवाओं की अनुशासित और प्रभावशाली कदमताल ने प्रदेशवासियों का दिल जीता है। साथ ही यह संदेश दिया कि मध्यप्रदेश का युवा हर क्षेत्र में अग्रणी है। राज्यपाल  पटेल ने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले स्वयंसेवकों और पुरस्कार प्राप्त युवाओं का लोकभवन में हार्दिक स्वागत किया। उनको उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी। राज्यपाल  पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने दिया और आभार प्रदर्शन आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय सेवा योजना सहित अधिकारी और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित थे। राज्यपाल  पटेल को MY भारत राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रा आयुषी सिन्हा और सोमित दुबे ने पुरस्कार का अवलोकन कराया। पुरस्कार के संबंध में जानकारी दी। छात्रा रिमी शर्मा और संजय कुमार रजक ने एक माह के शिविर की गतिविधियों के संबंध में छायाचित्रों के माध्यम से जानकारी प्रस्तुत की। छात्रा प्रज्ञा सक्सेना और छात्र विनोद कुमार सेन ने शिविर की गतिविधियों और अनुभवों को साझा किया। राज्यपाल  पटेल ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को पुरस्कार और मेडल प्रदान किए। पुरस्कार और पदक प्राप्त करने वालों में आयुषी सिन्हा, सोमित दुबे, प्रज्ञा सक्सेना, विनोद कुमार सेन, आशा वरकड़े, रिमी शर्मा, अंतरा चौहान, आदित्य गौर, महेश चौहान और संजय कुमार रजक शामिल थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने समवेद स्वर में गीतों की उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को सजाया। उन्होंने ‘स्वयं सजें वसुंधरा, सवार दें’ और ‘गूंजे गगन में, महकें पवन में, हर एक मन में सद्भावना’ जैसे गीतों के माध्यम से सामाजिक चेतना और देशभक्ति का संदेश सभी उपस्थित जनों तक पहुँचाया।  

ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना प्राथमिकता: मंत्री वर्मा

भोपाल. राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, जिससे लोगों को उपचार के लिये सुविधाएँ सहज और सुलभ रूप से उपलब्ध हो सकें। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और आमजन के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है। मंत्री  वर्मा सीहोर के ग्राम नापलाखेड़ी एवं ग्राम धामंदा में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  वर्मा ने ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपये की लागत से निर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रारंभ होने से क्षेत्रीय नागरिकों को प्राथमिक उपचार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण सहित विभिन्न जांच एवं परामर्श सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को बीमारियों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना भी है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल एवं साफ-सफाई की आदतें अपनाकर अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, पुराने भवनों का उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना सुनिश्चित की जा रही है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रकृति की गोद में खिवनी अभयारण्य, पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

भोपाल. विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभयारण्य मध्यप्रदेश के उभरते हुए इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिलों की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित कर रहा है। घने जंगल, पर्वत घाटियां, बहते नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे एक अनूठा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं। ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, भोजन व्यवस्था, आवास प्रबंधन तथा लघु उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है। अभयारण्य में https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx के माध्यम से बुकिंग की जा सकती है। देवास जिले में स्थित इस अभयारण्य का लगभग 89.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र देवास तथा 44.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सीहोर जिले में आता है। खिवनी अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के साथ अनेक औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इसकी प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिये सर्व-सुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस विकसित किया गया है, जिसमें कॉटेज, टेंट, वॉच टावर, पैगोडा और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। वन्यजीव और जैव विविधता की समृद्ध धरोहर खिवनी अभयारण्य में मांसाहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोनकुत्ता, जंगल कैट, गोल्डन जैकाल, एशियन पाम सिवेट सहित अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, कृष्णमृग, जंगली सूअर और खरहा प्रमुख हैं। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां तथा तितलियों की करीब 65 प्रजातियां इस अभयारण्य की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं। प्रमुख दर्शनीय स्थल अभयारण्य में बाल गंगा मंदिर, कलम तलई सनसेट पॉइंट, ईको व्यू पॉइंट, गोल कोठी, खिवनी मिडो, शंकर खो एवं भदभदा झरने, भूरी घाटी और दौलतपुर घाटी जैसे अनेक आकर्षक स्थल हैं। विशेषकर वर्षाकाल में झरनों, हरियाली और पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास खिवनी अभयारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग के साथ पर्यटकों की सुविधाओं के समुचित प्रबंधन किया जा रहा है। खिवनी अभयारण्य भोपाल–इंदौर मार्ग पर आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर–नेमावर–हरदा मार्ग से कन्नौद होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरदा तथा निकटतम हवाई अड्डे इंदौर और भोपाल हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण के कारण खिवनी अभयारण्य पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है और मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है।  

प्रदेश के सभी विद्यालयों में होगा परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण

प्रधानमंत्री  मोदी विद्यार्थियों से कल करेंगे परीक्षा पे चर्चा 6 फरवरी को होगा परीक्षा पे चर्चा का राष्ट्रीय आयोजन प्रदेश के सभी विद्यालयों में होगा परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण राजधानी भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृाष्ट विद्यालय में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा की कन्या स्कूल में होंगे शामिल भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी 6 फरवरी को देश के विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पे चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री  मोदी परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के मन में उठने वाली शंकाओं का समाधान कर सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित करेंगे। परीक्षा पे चर्चा का राष्‍ट्रीय आयोजन 6 फरवरी को होगा। शुक्रवार 6 फरवरी को प्रदेश के सभी विद्यालयों में भी कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह नरसिंहपुर जिले के चावरपाठा विकासखण्ड के ग्राम तेंदूखेड़ा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच उपस्थित रहकर कार्यक्रम के सजीव प्रसारण में सहभागिता करेंगे। प्रधानमंत्री  मोदी वर्ष 2018 से इस कार्यक्रम में परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष कार्यक्रम का यह 9वां संस्करण है। कार्यक्रम 6 फरवरी को प्रात: 10 बजे से नई दिल्‍ली में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  मोदी विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया जायेगा। दूरदर्शन, डीडी नेशनल, डीडी न्यूज, डीडी इंडिया ऑल इंडिया रेडियो के सभी चैनल, पीएमओ वेबसाइट mygov.in, यूट्यूब, एमओई, फेसबुक लाइव, स्वयंप्रभा चैनल एमओई, दीक्षा चैनल एमओई के साथ ही विभिन्‍न रेडियों चैनल्‍स, नेटफ्लिक्‍स, जीओ हॉट स्‍टार एवं अमेजन प्राइम वीडियो आदि से भी सीधा प्रसारण होगा। अन्य निजी चैनल भी कार्यकम का सीधा प्रसारण करेगें। परीक्षा पे चर्चा का राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम राजधानी भोपाल के सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विशिष्‍ट जन, वरिष्‍ठ अधिकारी एवं अभिभावकगण विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता करेंगे। प्रदेश में "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम में सहभागिता के लिए विगत 1 दिसम्‍बर से 11 जनवरी तक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा प्रदान की गई थी। इसमें मध्‍यप्रदेश से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के 22 लाख 95 हजार से अधिक विद्यार्थियों, 1 लाख 28 हजार से अधिक शिक्षकों और 17 हजार से अधिक अभिभावकों सहित 24 लाख 41 हजार 390 व्‍यक्तियों ने सहभागिता की। स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशानुसार मध्‍यप्रदेश में भी राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों में तथा प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम को समारोहपर्वूक आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की लाइव प्रसारण में सहभागिता होगी। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की जा रही है। आयोजन की सुचारू व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में समस्‍त कलेक्‍टर्स एवं मैदानी अधिकारियों को संचालक लोक शिक्षण द्वारा निर्देश भी जारी किये गये है।  

परीक्षा सीजन में साइबर ठगी का खतरा, पुलिस ने छात्रों-पालकों को किया आगाह

 भोपाल.  10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों के सामने एक नए तरह का इम्तिहान खड़ा हो गया है। यह परीक्षा क्लासरूम में नहीं, बल्कि इंटरनेट और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर होगी, जहां पेपरलीक, परीक्षा में नंबर बढ़ाने अथवा प्रवेश पत्र में सुधार कराने के नाम पर साइबर ठगों का जाल सक्रिय हो रहा है। इस खतरे को देखते हुए भोपाल पुलिस ने न केवल कार्रवाई तेज की है, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के लिए साइबर एडवाइजरी भी जारी की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हर साल बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की ठगी के मामले सामने आते हैं। ठग फर्जी टेलीग्राम चैनल बनाकर दावा करते हैं कि उनके पास 10वीं-12वीं के प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध हैं। चैनलों के नाम और प्रोफाइल इस तरह तैयार की जाती हैं, जिससे वे वास्तविक प्रतीत हों। छात्रों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि यह बोर्ड परीक्षा का पेपर है और उन्हें यह व्यक्तिगत रूप से मिल रहा है। इसके बदले उनसे 500 से 2000 रुपये तक ऑनलाइन माध्यम से वसूले जाते हैं। भोपाल पुलिस का कहना है कि यह पूरी तरह फर्जी दावा होता है। न तो कोई पेपर लीक होता है और न ही ठगों के पास प्रश्नपत्र होते हैं। भुगतान के बाद या तो छात्रों को ब्लॉक कर दिया जाता है या फिर उन्हें पुराने वर्षों के पेपर भेज देते हैं। पुलिस ने साफ कहा है कि यदि कोई व्यक्ति या चैनल प्रश्नपत्र बेचने का दावा करता है, तो उसकी तुरंत शिकायत की जाए। साइबर सेल के एसआई अंकित नायक ने बताया कि बीते दो वर्षों में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ऐसे दो बड़े मामलों का खुलासा कर चुकी है। ऐसे नेटवर्क से ठगी का जाल केस-1 छिंदवाड़ा जिले के दमुआ से गिरफ्तार किया गया दीपांशू कोरी नीट की तैयारी कर रहा था और उसने कॉलेज से ड्रॉप लिया हुआ था। उसने टेलीग्राम पर फर्जी पेपरलीक चैनल बनाया, जिसमें एक लाख से अधिक लोग जुड़े थे। जांच में सामने आया कि उसने सैकड़ों छात्रों से ठगी की और 500 से 2000 रुपये तक लेकर पेपर उपलब्ध कराने का दावा करता था। केस-2 भिंड जिले से पुलिस ने 19 वर्षीय आरोपित शिवम यादव को गिरफ्तार किया था। उसके टेलीग्राम चैनल से 20 हजार से अधिक लोग जुड़े थे। वह बोर्ड परीक्षाओं के पेपर एक हजार रुपये में बेचने का दावा करता था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बचने के लिए पुलिस की यह सलाह बचने के लिए पुलिस की यह सलाह किसी भी अनजान लिंक, ग्रुप या व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को असली न मानें। इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने वाले प्रश्नपत्र या उनके उत्तर फर्जी हो सकते हैं। रुपये लेकर प्रश्नपत्र बेचने वाले लोग ठग हैं, उनके झांसे में न आएं। ऐसे प्रकरणों में शामिल होना भी कानून अपराध है। केवल संबंधित बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। पेपरलीक के नाम पर कोई भी दावा पूरी तरह फर्जी है। छात्र और अभिभावक ऐसे चैनलों से दूर रहें, पैसे न भेजें और तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें। शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच।

इंदौर में दरिंदगी: नकली नाम से दुष्कर्म, धर्म बदलने से मना किया तो दीवार में पटका सिर

इंदौर. हीरानगर में दुष्कर्म, लव जिहाद और मारपीट का मामला सामने आया है। हिंदू संगठन की मदद से एक मुस्लिम युवक की गिरफ्तारी हुई है। सिटी वैन चलाने वाले मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर दोस्ती की और फिर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बना लिए। आरोपित द्वारा मुसलमान बनाने का दबाव बनाया गया। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। टीआई सुशील पटेल के अनुसार 31 वर्षीय पीड़िता द्वारा आरोपित यासिन उर्फ यश के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया है। यश चौहान बताकर की दोस्ती और बनाया शारीरिक संबंध पीड़िता ने कथनों में बताया वह साल 2020 में पाटनीपुरा स्थित कॉस्मेटिक की दुकान पर नौकरी करती थी। दुकान और घर आने के लिए सिटी वैन का उपयोग करती थी। इसी दौरान आरोपित यासिन से परिचय हुआ था। उसने यश चौहान नाम बताया था। दोनों ने मोबाइल नंबर साझा कर लिए और उनकी दोस्ती हो गई। आरोप है कि एक दिन यासिन मूसाखेड़ी स्थित विराट नगर में एक रूम पर ले गया और शारीरिक संबंध बनाए। शादी का झांसा और धर्म की सच्चाई का खुलासा गर्भवती होने पर पीड़िता ने यासिन को बताया तो उसने कहा कि मैं शादी करूंगा। वह कन्नौद (देवास) ले गया और शादी की तैयारी कर ली। इस दौरान मुसलमान होने की जानकारी लगी और पीड़िता ने शादी से इनकार कर दिया। उसने बच्चे को मारने की धमकी दी और पीड़िता को विराट नगर में ही रखा। 3 अप्रैल 2021 को पीड़िता ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद भी यासिन मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बनाता रहता था। मार्केट और सिर दीवार पर मारकर घायल करने का आरोप परेशान होकर पीड़िता पिछले साल अक्टूबर में रघुनंदन कॉलोनी में रहने लगी। वैन चालक ने हिंदू बनकर दोस्ती की, दुष्कर्म किया और मुसलमान बनने का दबाव बनाया। 19 जनवरी को यासिन घर आया और पीड़िता से जबरदस्ती की और मारपीट करने लगा। इस्लाम धर्म न स्वीकारने पर उसने दीवार से सिर मारा और पीड़िता को जख्मी कर दिया। बुधवार को पीड़िता की बहनों ने हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं से मदद मांगी और आरोपित के खिलाफ केस दर्ज करवाया।  

मुख्य सुरक्षा अधिकारी शर्मा को मंत्रालय में अति-उत्कृष्ट सेवा पदक से किया गया सम्मानित

मंत्रालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी  शर्मा अति-उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित भोपाल  मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में पदस्थ मुख्य सुरक्षा अधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त (सुरक्षा)  अविनाश शर्मा को वर्ष 2025 के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री का अति-उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्‍मानित किया गया है।  शर्मा को उनकी दीर्घकालीन, निष्ठावान एवं अति-उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह पदक दिया गया है। उल्‍लेखनीय है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 के लिए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनकी सराहनीय, अनुकरणीय एवं अति-उत्कृष्ट सेवाओं के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री का अति-उत्कृष्ट सेवा पदक एवं उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।  अविनाश शर्मा ने मंत्रालय की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, महत्वपूर्ण शासकीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कर्तव्यनिष्ठा के साथ उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनका यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का प्रतीक है, बल्कि मध्यप्रदेश पुलिस एवं मंत्रालय सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गौरव का विषय है।  

डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कार्यवाही में शामिल पूरी टीम को 50 हजार रूपए के पुरस्कार से पुरस्‍कृत करने की घोषणा की

भोपाल. भोपाल शहर में राह चलती युवतियों को निशाना बनाकर कटर से हमला करने वाले आदतन अपराधी को भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी सफलता प्राप्‍त की है। इस सफलता पर पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने भोपाल पुलिस टीम को 50 हजार रूपए के पुरस्‍कार से पुरस्‍कृत करने की घोषणा की है। उल्‍लेखनीय है कि आरोपी देवेन्‍द्र अहिरवार द्वारा 29 जनवरी की रात्रि सोनागिरी, पिपलानी तथा अयोध्यानगर थाना क्षेत्र में कुल चार युवतियों पर कटर से हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाई गई थीं। उक्त घटनाओं के संबंध में थाना पिपलानी एवं थाना अयोध्यानगर में पृथक-पृथक चार अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। घटनाओं की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस आयुक्त  संजय कुमार के निर्देशन में अति. पुलिस आय़ुक्त  अवधेश गोस्वामी के मार्गदर्शन में विशेष टीमों का गठन किया गया। जोन-स्तर एवं क्राइम ब्रांच की कुल 40 टीमों में लगभग 150 से अधिक पुलिस अधिकारी-कर्मचारी लगाए गए। पुलिस टीमों द्वारा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर व्यापक जांच की गई। लगभग 900 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया, 600 से अधिक पुराने बदमाशों का सत्यापन किया गया तथा करीब 100 संदिग्धों को पूछताछ हेतु राउंड-अप किया गया। आरोपी के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसका हुलिया एवं फोटो सार्वजनिक कर गिरफ्तारी हेतु 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। लगातार सघन खोज अभियान के दौरान पुलिस टीम को सूचना प्राप्त हुई, जिसके आधार पर अयोध्या बायपास, छोलामंदिर क्षेत्र के समीप जंगल क्षेत्र में दबिश देकर आरोपी देवेन्‍द्र अहिरवार पिता हरज्ञान अहिरवार, उम्र 37 वर्ष, निवासी घसेरा मोहल्ला राहतगढ़ जिला सागर, हाल निवासी पूजा कॉलोनी करोंद, भोपाल को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कटर, चोरी की गई मोटरसाइकिल, कपड़े एवं अन्य सामग्री जप्त की गई है। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने उक्त चार घटनाओं के अतिरिक्त वर्ष 2014 में सागर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में भी कटर से कई वारदातें की थीं। आरोपी द्वारा चार माह पूर्व करोंद सब्जी मंडी क्षेत्र से चोरी की गई मोटरसाइकिल का उपयोग इन घटनाओं में किया गया था। पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान, मध्यप्रदेश बनेगा पर्यटन और रोजगार का नया ग्रोथ इंजन

मध्यप्रदेश, अब पर्यटन और रोज़गार का नया ग्रोथ इंजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में 900 करोड़ की लागत से बन रहे हैं धार्मिक और सांस्कृतिक लोक भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी,विरासत भी' के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री  मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद उज्जैन में ' महाकाल लोक' के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है। प्रदेश की पावन धरा पर लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 'लोकों' का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत साक्ष्य बनेंगे। धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य संचालित है। सागर में 'संत रविदास लोक' 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में 'देवी लोक' और ओरछा में 'रामराजा लोक' जैसे भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि मंदसौर में 'भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर' का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही भोपाल में 'वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक', जानापाव में 'भगवान परशुराम लोक' और महेश्वर में 'देवी अहिल्या संग्रहालय' जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।  जन-आस्था का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा। ' महाकाल लोक' की भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में 'ममलेश्वर लोक' का निर्माण, बैतूल में ताप्ती उद्गम स्थल में 'ताप्ती लोक' और मैहर में 'माँ शारदा लोक' का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 'देवी अहिल्या लोक' और अमरकंटक में 'माँ नर्मदा लोक' के द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक 'लोक' केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए 'ग्रोथ इंजन' सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री  मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' के विज़न को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।  

गोल्ड इन्वेस्टमेंट के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: 8.90 लाख की ठगी, मोबाइल भी हड़पा

 ग्वालियर शहर के मुरार की रहने वाली महिला दुकानदार के साथ 8.90 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। महिला दुकानदार को सोने में ऑनलाइन निवेश का झांसा दिया गया। महिला से 14 बार में 8.90 लाख रुपए जमा करा लिए। महिला ने जो राशि जमा की, उसकी बढ़ी हुई राशि 30.30 लाख रुपए दिख रही थी। महिला ने जब इसे अपने खाते में ट्रांसफर करने का प्रयास किया तो रुपए नहीं आए। इसके बाद फोन पर बात की तो महिला से कूरियर के जरिए मोबाइल भी ठग ने अपने पास मंगवा लिया। फिर महिला को ठगी का पता लगा। महिला की शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। मूल रूप से भिंड की रहने वालीं किरण जैन वर्तमान में मुरार में रहती हैं। मुरार में उनकी आर्टीफिशियल ज्वेलरी की दुकान है। 20 अक्टूबर को उनके फेसबुक अकाउंट पर अम्बीराम-सत्यजीत नाम की आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। उन्होंने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की। फिर उसका मैसेज आया। मैसेज में लिखा था कि जीबीसी गोल्ड नाम से कंपनी है। इसमें सोने में ऑनलाइन निवेश किया जा सकता है। शेयर ट्रेडिंग भी की जा सकती है। महिला ने सबसे पहले 50 हजार रुपए अपने बैंक खाते से ट्रांसफर किए। चार दिन बाद ही यह रकम 64 हजार दिखने लगी। महिला ने दूसरे बैंक खाते से फिर 50 हजार जमा किए। यह राशि डेढ़ लाख दिखने लगी महिला को दिया गया था लॉगिन इसके बाद 12 बार में और रकम दूसरे खातों में भेजी। महिला को लॉगिन भी दिया गया था। लॉगिन करती थी तो वेबसाइट पर यह रकम बढ़ी हुई दिखती थी। हाल ही में महिला को अपने खाते में 30.30 लाख रुपए दिख रहे थे। महिला ने रुपए निकालने का प्रयास किया। तब रुपए नहीं निकले। महिला ने मैसेज करने वाले से बात की तो उसने कूरियर के जरिये मोबाइल ही मंगवा लिया। फिर उसका नंबर भी बंद हो गया। तब महिला को ठगी का पता लगा। महिला ने थाने में शिकायत की।  

\’घूसखोर पंडित\’ फिल्म के विरोध में भोपाल में ब्राह्मण समाज का प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग, रोक की मांग

भोपाल  भोपाल में एक OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़ की गई फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के विरोध में ब्राह्मण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। हवन-पूजन और पाठ-पूजन करने वाले धोती-कुर्ता धारी पंडितों ने फिल्म को ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज और मध्य प्रदेश ब्राह्मण समाज के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में फिल्म को तत्काल नेटफ्लिक्स OTT प्लेटफार्म से हटाने की मांग की गई। फिल्म के टाइटल को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।   प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म में ब्राह्मण समाज को घूसखोर के रूप में दिखाया गया है, जो पूरी तरह आपत्तिजनक और निंदनीय है। संगठन ने फिल्म बनाने वाले निर्माता-निर्देशक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। याचिका में कही गई ये बात फिल्म को लेकर कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म  'पंडित' शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जानबूझकर जोड़ा गया है। याचिकाकर्ता वकील विनीत जिंदल ने फिल्म के कंटेंट के सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक और मानहानिकारक होने पर गंभीर आपत्ति जताई है। साथ ही ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और प्रतिष्ठा को व्यापक रूप से नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की है।  क्या है विवाद फिल्म के जारी ट्रेलर के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। मनोज बाजपेयी फिल्म में एक सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित का रोल अदा कर रहे हैं। फिल्म में उन्हें एक बदनाम पुलिस वाले के रूप में दिखाया गया है। उनके भ्रष्ट किरदार को 'पंडित' शब्द से जोड़ा गया है, जिसको लेकर विवाद मचा हुआ है। 

\’घूसखोर पंडित\’ फिल्म के विरोध में भोपाल में ब्राह्मण समाज का प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग, रोक की मांग

भोपाल  भोपाल में एक OTT प्लेटफार्म पर रिलीज़ की गई फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के विरोध में ब्राह्मण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। हवन-पूजन और पाठ-पूजन करने वाले धोती-कुर्ता धारी पंडितों ने फिल्म को ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज और मध्य प्रदेश ब्राह्मण समाज के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में फिल्म को तत्काल नेटफ्लिक्स OTT प्लेटफार्म से हटाने की मांग की गई। फिल्म के टाइटल को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।   प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म में ब्राह्मण समाज को घूसखोर के रूप में दिखाया गया है, जो पूरी तरह आपत्तिजनक और निंदनीय है। संगठन ने फिल्म बनाने वाले निर्माता-निर्देशक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। याचिका में कही गई ये बात फिल्म को लेकर कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म  'पंडित' शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जानबूझकर जोड़ा गया है। याचिकाकर्ता वकील विनीत जिंदल ने फिल्म के कंटेंट के सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक और मानहानिकारक होने पर गंभीर आपत्ति जताई है। साथ ही ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और प्रतिष्ठा को व्यापक रूप से नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की है।  क्या है विवाद फिल्म के जारी ट्रेलर के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। मनोज बाजपेयी फिल्म में एक सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित का रोल अदा कर रहे हैं। फिल्म में उन्हें एक बदनाम पुलिस वाले के रूप में दिखाया गया है। उनके भ्रष्ट किरदार को 'पंडित' शब्द से जोड़ा गया है, जिसको लेकर विवाद मचा हुआ है। 

सावधान! MP में लिफ्ट देकर यात्रियों से ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया

सीधी. पैदल चलने वालों राहगीरों को लिफ्ट देकर लूट करने वाले आरोपित को सिटी कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित के बोलेरो एवं नकद जब्‍त किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी के निर्देशन में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली अभिषेक उपाध्याय पुलिस टीम ने किया है। शिकायतकर्ता लालबहादुर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 03 फरवरी को बैंक से 50,000 रुपये निकालकर जाते समय बोलेरो सवार बदमाशों ने उन्हें बस स्टैंड छोड़ने का झांसा देकर बैठाया। रास्ते में आरोपितों ने दरवाजा ठीक से बंद नहीं है का बहाना बनाया और गेट बंद करने के बहाने बुजुर्ग को बातों में उलझाकर बड़ी सफाई से नोट भरे बैग की चेन खोलकर 50,000 रुपये चोरी कर लिए और कुछ दूर आगे उन्हें बोलेरो से नीचे उतारकर फरार हो गए। अपराधिक रिकॉर्ड और पूर्व का इतिहास पुलिस जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि पकड़े गए आरोपित आदतन अपराधी हैं। इन अपराधियों के विरुद्ध पूर्व में भी विभिन्न जिलों के अलग-अलग थानों में चोरी, लूट और झपटमारी के कई मामले दर्ज हैं। यह गिरोह रेकी कर बैंक से निकलने वाले अधिक उम्र के बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाता था और रास्ते में झांसा देकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने ​देवेन्द्र उर्फ लाला यादव 26 वर्ष निवासी बाणगंगा, रीवा, सुधीश यादव 21 बर्ष बाणगंगा रीवा, ​दुर्गेश शर्मा 32 वर्ष निवासी रामगढ़, जिला मैहर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपितों के पास से 33,000 नकद एवं चोरी के पैसों से खरीदा गया 14,000 का मोबाइल, घटना में उपयोग की गई सफेद बोलेरो 1लाख 20 हजार कीमत आंकी गई है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की जिले की पुलिस टीम ने समस्त नागरिकों से अपील करती है कि बैंक संबंधी कार्यों के लिए अपने घर के वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) को अकेला न भेजें। उनके साथ परिवार का कोई जिम्मेदार सदस्य अनिवार्य रूप से रहे। यदि बैंक से बाहर निकलते समय आपको किसी व्यक्ति पर संदेह हो या ऐसा लगे कि कोई आपका पीछा कर रहा है। तो तुरंत बैंक के 'ब्रांच मैनेजर' को सूचित करें या तत्काल डायल-112 अथवा नजदीकी पुलिस थाने की मदद लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के वाहन में 'लिफ्ट' न लें, यह आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है।  

श्रीअन्न को बढ़ावा देकर किसान आत्मनिर्भरता की ओर, मध्यप्रदेश सरकार का फोकस : कृषि मंत्री

भोपाल. कृषक कल्याण वर्ष-2026 किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मिलेट केवल फसल नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि जिसे कभी मोटा अनाज कहा जाता था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वही अनाज “श्रीअन्न” के रूप में विश्वभर में सम्मान पा रहा है। श्रीअन्न से मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर किसान की ओर अग्रसर है। मंत्री कंषाना दशहरा मैदान, टीटी नगर भोपाल में श्रीअन्न मिलेट प्रोत्साहन एवं आत्मा योजनांतर्गत कृषि विज्ञान मेला के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि श्रीअन्न आयरन, कैल्शियम एवं फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है तथा कुपोषण के विरुद्ध हमारी लड़ाई में मजबूती से सहायक सिद्ध हो रहा है। साथ ही मिलेट कम पानी, कम खाद एवं प्रतिकूल जलवायु में भी बेहतर उत्पादन देता है। इससे जल संरक्षण के साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसान वैज्ञानिक खेती, कम लागत, अधिक उत्पादन और अधिक आय की ओर अग्रसर हों। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्रों एवं नवीन तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे श्रम की बचत होगी, उत्पादन बढ़ेगा और युवा भी खेती से जुड़ेंगे। कृषि मंत्री कंषाना ने किसानों को प्रदर्शित उन्नत कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक सलाह का लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम में उत्कृष्ट किसान भाई-बहनों को नगद पुरस्कार और प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।कृषि मंत्री कंषाना ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृषि विज्ञान एवं मिलेट मेला किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा तथा कृषक कल्याण वर्ष-2026 को ऐतिहासिक बनाएगा। उन्होंने श्रीअन्न को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। वैज्ञानिक खेती अपनाएंगे और किसान को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाएंगे। कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 9 किसान पुरस्कृत कृषि मंत्री कंषाना ने ग्राम जूनापानी के कृषक जीवन सिंह को पशुपालन के क्षेत्र में जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपए एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया। विकासखंड स्तरीय पुरस्कार के रूप में 8 किसानों को 10 -10 हजार रुपए और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इनमें ग्राम दोजयाई के किशन सिंह को पशुपालन के क्षेत्र में, ग्राम सेवनिया ओंकारा की सुनीता रैकवार एवं कोलूखेड़ी के हर्ष दांगी को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में, ग्राम भैरोंपुरा के राम मोहन मीणा को उद्यानिकी, ग्राम मुगालिया छाप के महेश मीणा एवं जमुसर कला की संगीता जाटव को कृषि अभियांत्रिकी, ग्राम टीला खेड़ी के रमेश सिंह और नामदापुरा के दीपक मीणा को कृषि के क्षेत्र में सराहनीय उत्कृष्ट योगदान के लिए विकास खंड स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट, जनपद अध्यक्ष बैरसिया कुबेर सिंह गुर्जर सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।  

भारत माता मंदिर समाज और राष्ट्र में ऊर्जा का कर रहा है संचार

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति को नए आयाम तक पहुंचाने में आदि शंकराचार्य का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मध्यप्रदेश की धरा से आदि शंकराचार्य जी का विशेष संबंध रहा है। वैचारिक स्तर पर भारत को हिंदुत्व पर गर्व है, हिंदुत्व ही राष्ट्रत्व है। सनातन की धारा शाश्वत रूप से बहती रहे, इस उद्देश्य से संतवृंद और सरकार समन्वित रूप से प्रयासरत है। हरिद्वार में समन्वय सेवा ट्रस्ट द्वारा स्थापित भारत माता मंदिर समाज और राष्ट्र में ऊर्जा का संचार कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को हरिद्वार में समन्वय सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित गुरुदेव समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना समारोह के अंतर्गत संत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। संत महात्माओं को दिया सिंहस्थ-2028 का निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य जी की परंपरा के संवाहक, वैदिक सनातन संस्कृति के उन्नायक, देश के प्रथम भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार भव्य और दिव्य सिंहस्थ के आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाओं और विकास कार्यों पर ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी संत महात्माओं को सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन पधारने के लिए निमंत्रण दिया। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि संतवृंद के आशीर्वाद से देश में पिछले वर्षों में हुआ बदलाव अद्भुत है। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गया है और तेजी से एक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, वॉटरवेज, हाई स्पीड रेल, हाईवेज से देश की युवा शक्ति और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली है। देश की बहनें, किसान, युवा सभी समावेशी विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। सांस्कृतिक समृद्धि, विरासत संरक्षण और धार्मिक पर्यटन में भी पूरे राष्ट्र में एक नई चेतना जागृत हुई है। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संसार के दुखों का शमन केवल सत्संग से ही संभव है। हमारे प्राचीन ग्रंथ और संतों का साथ व्यक्ति को नया जीवन और दृष्टि देने में सक्षम है। संतगण वे आत्माएं हैं जिनके चरित्र शांत और उदार हैं। दूसरों का भला करने के उद्देश्य से ही संतगण की सभी गतिविधियों का संचालन होता है। भारत की पहचान सनातन से है, भारतीय संस्कृति ने मानवता का दिव्यकरण और दिव्यता का मानवीयकरण किया है। उन्होंने आदि शंकराचार्य के दर्शन पर भी अपने विचार रखें। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संत, महात्मा और धर्मगुरु सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने संतवृंद का उत्तराखंड की भूमि पर स्वागत करते हुए कहा कि संत स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने देश की एकता और सांस्कृतिक समृद्धता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके विचार नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का आधार बनेंगे। मंचीय कार्यक्रम राष्ट्रगान जन-गण-मन के सामूहिक गान के साथ का सम्पन्न हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगगुरू स्वामी रामदेव जी के साथ किया योगाभ्यास मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में योगगुरु स्वामी रामदेव जी के साथ योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में योग आज भारत की प्राचीन परंपरा से निकलकर वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है। हम सभी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ, संतुलित व ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पतंजलि योगपीठ के वातावरण से प्रभावित होकर कहा कि योगपीठ का संस्कार, साधना और आत्मबल से परिपूर्ण वातावरण मन को अपार शांति प्रदान करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योगगुरु स्वामी रामदेव जी के साथ हरिद्वार में भारत माता मंदिर में दर्शन, पूजन और यज्ञ में शामिल होकर सभी के मंगल एवं कल्याण की कामना की।  

मुख्य सचिव जैन ने कहा, मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना राज्य सरकार की प्राथमिकता

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्य सचिव  जैन राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति राज्य स्वास्थ्य समिति की गवर्निंग बॉडी की हुई बैठक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की उपलब्धियों और वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना की हुई समीक्षा भोपाल मुख्य सचिव  अनुराग जैन की अध्यक्षता में मंत्रालय में  राज्य स्वास्थ्य समिति की गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव  जैन ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में विभाग द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं डिजिटल पहलों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। अनमोल 2.0 से गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी से एमएमआर और आईएमआर में हुआ है सुधार मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तिकरण के समन्वित प्रयास करें। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बताया गया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य के 51 जिलों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम क्रियाशील हैं। साथ ही गर्भवती महिलाओं की शंकाओं के समाधान हेतु सुमन सखी चैटबॉट को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराया गया है। गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी अनमोल 2.0 के माध्यम से की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एवं शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी दर्ज की गई है। बैठक में मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियों और वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। आरबीएसके के अंतर्गत 33 हज़ार से अधिक निःशुल्क सर्जरी ई-शिशु मॉडल के अंतर्गत एमजीएम इंदौर में वन-हब एवं 16 स्पोक्स के माध्यम से अब तक 947 नवजात शिशुओं को टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत 33,075 नि:शुल्क शल्य क्रियाएँ की गईं, साथ ही 1,026 नि:शुल्क जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) सर्जरी भी की गई हैं। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतें हुई टीबी-मुक्त टीबी (क्षय रोग) के नोटिफिकेशन एवं उपचार सफलता दर में सुधार के परिणामस्वरूप डीआर-टीबी मृत्यु दर 3.9 से घटकर 3.0 हुई है। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतों को टीबी-मुक्त पंचायत घोषित किया गया। सिकल सेल प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 28,541 मरीजों को नि:शुल्क उपचार प्रदान किया गया और एक करोड़ 13 लाख 59 हजार 76 नागरिकों को सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। स्वस्थ यकृत मिशन में 1 करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ (एनएएफएलडी स्क्रीनिंग अभियान) के अंतर्गत एक करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग की गई हैं। फाइब्रोस्कैन सेवाएँ 13 जिलों में प्रारंभ की गई हैं, जिनमें अब तक 2,032 स्कैन पूर्ण किए जा चुके हैं। उच्च रक्तचाप के उपचार हेतु 1.77 करोड़ नागरिक की स्क्रीनिंग एवं 10.40 लाख नागरिक उपचाराधीन, इसी प्रकार मधुमेह के लिए 1.80 करोड़ स्क्रीनिंग एवं 7.21 लाख उपचाराधीन रोगी हैं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए ‘मिशन मधुमेह’ के अंतर्गत 537 टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चे उपचाराधीन हैं। ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच करने के निर्देश राज्य में 4,03,401 मोतियाबिंद शल्य क्रियाएँ की गईं। इसमें 48,816 स्कूली बच्चों एवं 1,03,944 वृद्धजनों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 2,235 कॉर्निया नेत्रदान के माध्यम से एकत्र किए गए। होप (होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डर्ली) योजना के अंतर्गत 6 शहरी क्षेत्रों में 1,214 अशक्त वृद्धजनों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई हैं। मुख्य सचिव  जैन ने ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच कराने के निर्देश दिए। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी करें मुख्य सचिव  जैन ने उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी किए जाने के निर्देश दिए। बताया गया कि राज्य में 3,756 शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू-मुक्त प्रमाणित किया गया है। टेली-मानस सेवा (टोल-फ्री नंबर 14416 / 1800-891-4416) के माध्यम से 55,711 उपयोगकर्ताओं को नि:शुल्क मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया गया। आत्महत्या रोकथाम के लिये गेट-कीपर कार्यक्रम के अंतर्गत 2,385 आत्म-हानि एवं 1,593 आत्मघाती विचारों से संबंधित मामलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के माध्यम से परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना निर्माण प्रक्रिया में बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाया गया है और शून्य-आधारित बजटिंग सिद्धांतों पर संसाधन आवंटन किया गया है, जिससे वर्तमान स्वास्थ्य आवश्यकताओं एवं जिला-स्तरीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएँ तैयार की जा सकें। परिणाम-आधारित योजना एवं बजटिंग के अंतर्गत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण जैसे मापनीय स्वास्थ्य लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एसएनए-स्पर्श के माध्यम से निगरानी की जाएगी। जिला स्वास्थ्य कार्ययोजना की तैयारी, राज्य स्तरीय समीक्षा, कार्यकारी समिति की बैठक एवं राज्य स्वास्थ्य समिति की स्वीकृति की सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई है, जो विकेंद्रीकरण, अभिसरण, लक्ष्य निर्धारण एवं प्राथमिकता निर्धारण के सिद्धांतों पर आधारित है। यह दृष्टिकोण "विकसित मध्यप्रदेश@2047" एवं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है। बैठक में लगभग 5 हज़ार करोड़ रुपए की वार्षिक कार्य योजना भारत सरकार को प्रेषित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य आयुक्त, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय, आयुष, स्कूल शिक्षा, वित्त विभाग, आयुक्त महिला बाल विकास, मनरेगा विभाग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

28 को बोत्सवाना से भारत आ रहे चीते, एमपी में बढ़ेगा चीता कुनबा

भोपाल  40 महीने पहले देश में चीतों को बसाने का शुरू हुआ सिलसिला अब और बढऩे जा रहा है। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों के साथ शुरू हुए प्रोजेक्ट में अब 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। उन्हें कूनो नेशनल पार्क में रखा जाएगा। इससे पहले 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में 28 फरवरी को 8 चीतों को लाने की बात कही। गांधी सागर है चीतों का दूसरा घर 40 माह पहले देश में चीतों का इकलौता घर एमपी का कूनो था। 20 अप्रेल 2025 को मंदसौर जिले के गांधीसागर में चीतों का दूसरा घर बनाया गया। यहां कूनो से शिफ्ट तीन चीते हैं, इनमें नर प्रभास, पावक तो मादा धीरा है।  असम का जंगली भैंसा भी आएगा मध्यप्रदेश सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि असम से जंगली भैंसा को मध्यप्रदेश लाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तंत्रगत प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जैव विविधता को सुरक्षित करते हुए वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दी जा रही है. बोत्सवाना से 8 चीते लाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी महीने 28 फरवरी के आसपास बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। चीतों के पुनर्स्थापन के लिए केंद्रीय मंत्री यादव से आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत रूप से बात की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में यह जानकारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चीता प्रोजेक्ट , असम से गैंडे और जंगली भैंसे सहित अन्य वन्य प्राणियों को लाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहे हैं। बोत्सवाना से 8 चीते लाने की प्रक्रिया पूरी कराने सहित प्रोजेक्ट की मंजूरी सहित अन्य कार्यों को लेकर वे दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की गई है। सीएम यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में ने बताया कि कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण की अपार संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। कूनो में 27 चीते, इनमें से 19 यहीं जन्मे – 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए। – 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए।  अभी कूनो में 27 चीते हैं। – इनमें से विदेशों में जन्मे 8 चीते हैं। – भारत में जन्मे चीतों की संख्या 19 है। यह कूनो में ही हैं।

हाईकोर्ट का अहम फैसला, धारा 500 की कार्रवाई रद्द, कानूनी अधिकार से की गई शिकायत मानहानि नहीं

जबलपुर  हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि कानूनी अधिकार के तहत आपराधिक शिकायत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष करना मानहानि की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा ने अपने आदेश में कहा है कि यह धारा 498 अपवाद 8 के सुरक्षा कवच के अंदर आता है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ तलाश पूर्व पत्नी की शिकायत पर भोपाल न्यायालय द्वारा मानहानि तहत धारा 500 के तहत प्रारंभ की गयी आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने के आदेश जारी किये हैं।  भोपाल निवासी सैयद राशिद अली की तरफ से तलाकशुदा पत्नी की तरफ से दायर आवेदन पर भोपाल न्यायालय द्वारा मानहानि के तहत प्रारंभ किये गये आपराधिक प्रकरण को निरस्त किये जाने की राहत चाही गयी थी। याचिका में कहा गया था कि शादी के बाद झगड़ा होने पर पत्नी ने उसके खिलाफ धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज करवाया था। न्यायालय ने उसे एक साल की सजा से दंडित किया था परंतु अपीलीय न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्ति के खिलाफ अनावेदिका ने हाईकोर्ट के अपील की है, जो लंबित है। शिकायतकर्ता अनावेदिका का कहना है कि धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज करवाने के बाद आवेदक ने मुस्लिम कानून के तहत लिखित तलाक-ए-बैन दिया। इसके बाद आवेदन ने शिकायतकर्ता तलाकशुदा पत्नी तथा उसके रिश्तेदारों के खिलाफ धारा खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 477, 494 और 149 के तहत अपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2023 को उसकी तलाकशुदा पत्नी और अन्य को दोषमुक्त कर दिया था। तलाकशुदा पत्नी ने उसके खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत यह शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसके तथा रिश्तेदारों के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोपों लगाते हुए अपराधिक कार्रवाई प्रारंभ की थी, जिसके उसके मानसिक तकलीफ हो। इसके अलावा समाज में उसकी बदनामी करना और लंबित अपराधिक प्रकरण वापस लेने के दबाव बनाना है। तलाकशुदा पत्नी तथा उसके पिता के बयान के आधार पर भोपाल जिला न्यायालय के जेएफएमसी ने उसके खिलाफ धारा 500 के तहत अपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश जारी किये हैं, जिसमें सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने आपराधिक शिकायत कानूनी अधिकार रखने वाली प्राधिकरण के समक्ष की थी। धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत कानूनी अधिकार रखने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा अच्छी नीयत से आपराधिक शिकायत में आरोप लगाना मानहानि नहीं है। एकलपीठ ने मामला धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत आता है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता है। याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 500 के तहत भोपाल की अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया जाता है।  

जतिन ने इंदौर सांसद से मांगी माफी, दौड़ते हुए विधायक जी के किस्से थे चर्चा में

 इंदौर दौड़ते हुए 'विधायक जी संग युवा नेता के किस्से' सुनाने वाले जतिन शुक्ला के खिलाफ इंदौर में केस दर्ज होने के बाद उनका माफी मांगने का वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर ने वीडियो में कहा- "मेरे शब्दों से माननीय सांसद जी की भावना आहत हुई, इसके लिए मैं सांसद जी और आप सब से माफी मांगता हूं।" दरअसल सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जतिन का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। मैंने भूलवश माननीय सांसद जी… नए वीडियो में उन्होंने सफाई देते हुए माफी मांगी है। वीडियो में कहा- “कुछ दिन पहले मैंने इंदौर की घटना पर वीडियो बनाया था। इसमें जानकारी के अभाव में मैंने भूलवश माननीय सांसद इंदौर जी के प्रति कुछ अपशब्दों का प्रयोग कर दिया था। मेरा मकसद माननीय सांसद जी की छवि धूमिल करने या उनका अपमान करने का नहीं था। मेरे शब्दों से माननीय सांसद जी की भावना आहत हुई, इसके लिए मैं सांसद जी और आप सब से माफी मांगता हूं।” इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ था केस एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक- सांसद के प्रतिनिधि ने क्राइम ब्रांच थाने में जतिन ऑफिशियल नामक इंस्टाग्राम से एक गलत और झूठा वीडियो वायरल करने की बात कही गई थी। वीडियो में अशोभनीय, आपत्तिजनक, भ्रामक और झूठी बातें फैलाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने जतिन शुक्ला के खिलाफ बीएनएस की धारा 200, 223 और 352 के तहत केस दर्ज कर लिया गया था। इसी मामले में अब जतिन ने नई वीडियो शेयर करते हुए माफी मांगी है। इंदौर में पानी से मौत पर की थी टिपप्णी शिकायतकर्ता ने शिकायत में कहा था- जतिन ने वीडियो में इंदौर के सांसद के साथ बातचीत का दावा करते हुए उनके हवाले से कई ऐसी बातें कहीं हैं, जो पूरी तरह असत्य हैं। शिकायतकर्ता ने आगे कहा- सांसद कभी जतिन से नहीं मिले हैं। वीडियो में जतिन इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई मौतों पर भी सांसद पर कटाक्ष करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे।

भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो, राजधानी के सैटेलाइट शहरों को मिलेगा फायदा

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

चंबल में रेत माफियाओं पर भारी प्रहार, 2 दिनों में मुरैना में 4 करोड़ से ज्यादा की अवैध रेत की गई नष्ट

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन और फर्जी बिल पर कलेक्टर ने की सख्त कार्रवाई

उमरिया जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई खबरों के बाद कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला प्रबंधक (कृषि) महेन्द्र कुमार बारसकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला स्तर पर प्रदत्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के आधार पर जारी किया गया है।  कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र कुमार बारसकर पर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन्हीं कारणों से उनकी संविदा नियुक्ति को तत्काल समाप्त किया गया है। आदेश जारी होते ही प्रभावशील हो गया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब अमर उजाला ने ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए फर्जी भुगतान और गबन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में बताया गया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय की स्वीकृत राशि का एक बार भुगतान होने के बावजूद उसी दावे का दोबारा भुगतान किया गया। इस दोहरे भुगतान से 1,43,440 रुपये का गबन सामने आया। इसके अलावा बिना सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल मिलाकर 2,80,123 रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ। मामले की शिकायत जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह द्वारा की गई थी। इसके बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतरिक निरीक्षण के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ भुगतान एक ही स्वीकृति आदेश के आधार पर दो बार किए गए, जबकि कुछ भुगतान बिना किसी वैध स्वीकृति के कर दिए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर राशि निकाले जाने की पुष्टि हुई है। धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है, हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।  प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई और आखिरकार कलेक्टर ने कड़ा निर्णय लेते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। यह फैसला न केवल इस मामले में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता और पारदर्शिता कैसे सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाती है। अब सबकी निगाहें आगे की पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।  

मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने कांग्रेस को छोड़ दिया, दिया इस्तीफा

रीवा  रीवा में कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में लक्ष्मण तिवारी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी हावी हो चुकी है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। 

भोपाल में बनेगी AI और नॉलेज सिटी, 3700 एकड़ में होगा विकास, देश का सबसे उन्नत शहर बनेगा

 भोपाल  भोपाल अब देश के भविष्य के टेक–एजुकेशन मैप पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 3700 एकड़ (1500 हेक्टेयर) भूमि पर देश की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह प्रोजेक्ट केवल एक एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश को देश का बड़ा AI हब बनाने की दिशा में काम होगा। इस परियोजना के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किए हैं। एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और फरवरी के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। भौंरी में 3700 एकड़ जमीन पर भारत की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी विकसित होने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केवल एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि यह रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनेगा। बीडीए इसकी नोडल एजेंसी है, जबकि आइसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च) इसका पूरा रोडमैप तैयार करेगा। प्रोजेक्ट के लिए अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट को लेकर 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल किया है। चयन प्र्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है। नॉलेज एवं एआई सिटी के रोडमैप पर गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी रखी गई है। इसमें नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य भाग लेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने आइसर को एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए 8 सदस्यीय कोर कमेटी बनी है, जिसके कन्वीनर प्रो. सौरभ दत्ता हैं। सुपरविजन आइसर डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। बीडीए ने जमीन की पहचान के बाद ईओआई प्रक्रिया पूरी कर ली है। बीडीए सीईओ श्यामवीर सिंह ने बताया कि देश-विदेश की 20 से ज्यादा एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। डेवलपमेंट एजेंसी क्या करेगी     पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करेगी     ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर कैंपस डिजाइन     बड़े पैमाने पर ग्रीन जोन और ओपन स्पेस     ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित स्मार्ट ट्रांसपोर्ट     पीपीपी मॉडल, जॉइंट वेंचर और इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप के विकल्प भौंरी क्षेत्र में पहले से मौजूद है एजुकेशन इको-सिस्टम देश के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र एजुकेशन सिटी की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन भोपाल की नॉलेज–AI सिटी का कॉन्सेप्ट अलग होगा। भौंरी क्षेत्र में पहले से आईसर भोपाल, निफ्ट, राष्ट्रीय फॉरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, अटल बिहारी वाजपेयी पॉलिसी रिसर्च सेंटर, एमपी पुलिस अकादमी और शंकर दयाल शर्मा आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। इसी क्लस्टर में ट्रिपल आईटी (IIIT) कैंपस के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इन संस्थानों की मौजूदगी से यहां पहले से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार है, जहां AI, स्पेस टेक, फॉरेंसिक, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थ और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में साझा रिसर्च की जा सकेगी। IISER तैयार कर रहा है रोडमैप नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र शासन ने नॉलेज–AI सिटी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी IISER भोपाल को सौंपी है। IISER ने पिछले वर्ष फरवरी में एक ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन किया था, जिसके बाद इस परियोजना को सभी संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी IISER के डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। फरवरी के आखिर तक एजेंसी नियुक्त होगी भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने जमीन की पहचान के बाद EOI प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले यह परियोजना 2000 एकड़ में प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर अब 3700 एकड़ कर दिया गया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में नॉलेज–AI सिटी को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाए। प्रोजेक्ट के कन्वीनर प्रोफेसर सौरभ दत्ता ने बताया कि इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष से योजना बनाई जा रही है। नॉलेज और AI सिटी के माध्यम से ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री मिलकर काम करें। यह एक पूरी सिटी होगी, जिसे हायर एजुकेशन के साथ अर्बन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा।

बेल्जियम में दोस्ती, सिंगरौली में भारतीय रिवाज से संदीप और शेरला करेंगे विवाह, मनाई हल्दी की रस्म

सिंगरौली जिला मुख्यालय सिंगरौली बैढ़न स्थित होटल हेरिटेज पैलेस में विदेशी सैलानियों के लिए बनी पहली पसंद, जहां शाही मेहनवाजी और विश्वस्तरीय सुविधाओं को लेकर सर्वश्रेष्ठ होटलों में गिना जा रहा हैं। आए दिन सिंगरौली भ्रमण के लिए आने वाले विदेशी सैलानी इस हेरिटेज होटल में निवास करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि अब इस होटल हेरिटेज पैलेस में विदेशियों द्वारा हिन्दू रीति रिवाजों के साथ विवाह भी किया जाने लगा है। बता दें कि हेरिटेज पैलेस में सिंगरौली निवासी संदीप कुमार सिंह पुत्र स्व.रमेश प्रसाद सिंह का विवाह फ्रांस लियाना कि शेरला पुलानीया के साथ दिनांक पांच फरवरी दिन गुरुवार को सम्पन्न होगा।  विवाह रस्म के पूर्व 4 फरवरी हेरिटेज पैलेस में संदीप और शेरला पुलानीया का हल्दी रस्म हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पवित्र अवसर पर लगभग आधा सैकड़ा फ्रांसीसी नागरिकों ने पीले वस्त्र धारण कर हेरिटेज पैलेस होटल में परिवार के सदस्यों के साथ दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया, जो सौंदर्य, पवित्रता, सुरक्षा और वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद का प्रतीक है। इस दौरान फ्रांसीसियों ने भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का विशेष सम्मान करते हुए सारी रस्म हिन्दी रस्म मंत्रोचारण के साथ सम्पन्न कराया। जानकारी के लिए बता दें कि संदीप कुमार सिंह बैढ़न सिंगरौली के निवासी है जो सरस्वती शिशु मंदिर बैढ़न से 12वीं पास करने के पश्चात इंदौर से बीसीए तथा पुणे से एमसीए की उपाधि प्राप्त कर बेल्जियम में सेटल हो गए जहां उन्होंने आईटी कंसल्टेंसी में अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। इसी दौरान फ्रांसीसी शेरला पुलानीया के साथ उनकी मुलाकात हुई, फिर दोस्ती हुई, इसके बाद यह मुलाकात धीरे धीरे प्यार में तब्दील हो गया। शेरला पुलानीया सनाफ्री फार्मास्यूटिकल कंपनी में ब्रांड मैनेजर के रूप में कार्य कर रही है। जो आज वे दोनों शादी के दाम्पत्य सूत्र में बधने जा रहे हैं। हल्दी रस्म में दिखा हल्दी कलर का पहनावा हल्दी समारोह भारतीय शादी की सबसे रंगीन और खुशियों से भरी रस्मों में से एक है, जहां आज हेरिटेज पैलेस में आयोजित इस हल्दी रस्म में भारतीय परंपरा के अनुसार वैदिक रस्मों एवं मंत्रोचारण के साथ हल्दी रस्म की प्रक्रिया पूरी की गई। फ्रांसीसी नागरिकों ने पीले रंग की चमकदार कपड़े पहनकर पूरे माहौल को रोशन कर दिया। बताते हैं कि इस खास मौके पर पीले रंग की ड्रेस पहनना न सिर्फ शुभ माना जाता है, बल्कि यह दुल्हन की खूबसूरती और ब्राइडल ग्लो को और भी निखार देता है। विदेशियों ने भारतीय संस्कृति की प्रशंसा की हेरिटेज पैलेस होटल में आयोजित उक्त कार्यक्रम में आए फ्रांसीसियों ने बातचीत के दरम्यान बताया कि वह हेरिटेज पैलेस होटल में भारतीय संस्कृति की विविधता, आध्यात्मिकता, मेहमाननवाज़ी (अतिथि देवो भव) की परंपरा से काफी प्रसन्न हैं। वे हेरिटेज होटल के खान-पान, पारंपरिक पहनावे से गहराई से प्रभावित हैं, जो भारत की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने उजागर करता है। हेरिटेज होटल में पधारे फ्रांसीसी नागरिकों ने कहा कि भारत की यह एक अच्छी संस्कृति है, जहां हर जात धर्म के लोग एकजुट होकर सामाजिक समरसता का उदाहरण पेश करते है, जिसकी उन्होंने काफी प्रशंसा की। विदेशियों ने भारतीय व्यंजनों एवं होटल प्रबंधन की काफी तारीफ की फ्रांसीसियों ने हेरिटेज होटल प्रबंधन की सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली, स्मार्ट तकनीकों, स्वच्छता, कुशल परिचालन व मजबूत टीम को देख काफी सराहा। कहा होटल प्रबंधन की अपनत्वता और व्यवस्था को देख हमें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब भी हमें भारत आने का सौभाग्य हुआ तो वह यहां निश्चित रूप से प्रवास करेंगे। 

SP जैन की नई पहल, पुलिसकर्मियों को जन्मदिन और विवाह की सालगिरह पर मिलेगा अवकाश

पुलिस अधीक्षक अगम जैन की सार्थक पहल : सभी थानों एवं कार्यालय में पदस्थ पुलिसकर्मियों को जन्मदिन एवं विवाह की सालगिरह पर प्रदान किया जाएगा अवकाश छतरपुर  स्थानीय पुलिस अधीक्षक  अगम जैन द्वारा पुलिस कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, मनोबल एवं पारिवारिक समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिसकर्मियों के जन्मदिन एवं विवाह की सालगिरह के अवसर पर आयोजनों को परिजनों के साथ मनाने की पहल की जा रही है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से पुलिस कर्मियों को अपनी व्यस्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बीच परिवार के साथ समय बिताने का अवसर प्राप्त होता है, जिससे मानसिक तनाव में कमी आती है एवं कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। परिजनों की सहभागिता से पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आती है, कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होता है।  इस हेतु पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले के सभी प्रभारी अधिकारियों, थाना चौकी प्रभारी एवं कार्यालय के मुख्य लिपिक एवं अवकाश लिपिक हेतु आदेश जारी किया गया है।

एक शाम राष्ट्र के नाम का सफल आयोजन हुआ

एक शाम राष्ट्र के नाम का सफल आयोजन हुआ  इंदौर  प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पातालपानी झरने के सामने अहिंसा पर्वत स्थित अमर जवान स्मारक पर एक शाम राष्ट्र के नाम का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम के आयोजक पर्यावरणविद् अशोक मेहता ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपने संवैधानिक अधिकार समझना चाहिए और देश एवं समाज के प्रति अपनी कर्तव्य निष्ठा को भूलना नहीं चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक राजेश बियानी ने बताया कि गायक कलाकार श्री राजा सलूजा श्री सुनील बामनिया श्रीमती मंगला जैन, श्री एवं श्रीमती जसविंदर बेस ने देशभक्ति आधारित राष्ट्र गीतों से श्रोताओं को झुमा दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में बालिका आरना मेहता, चहेती जैन, कियारा मेहता, हिरल जैन ने अपनी राष्ट्र के प्रति भावना प्रकट की साथ ही इस भावुक अवसर पर श्रीमती पायल परदेसी ने वंदे मातरम गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, एनिमल वेलफेयर, समाज सेवा, योग एवं सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग आदि क्षेत्रो में अपनी उत्कृष्ट सेवाओ के लिए श्रीमती पायल परदेसी, श्री यशवंतसिंग बिस्ट, डॉ अमित सोनी, श्री इंदरसिंग योगी, श्री आनंद यादव, श्रीमती आशा परमार, श्रीमती सुमित्रा अरोरा, श्री राधेश्याम वर्मा, डॉ अनुपम श्रीवास्तव, श्रीमती राधा तोषनवाल, डॉ लकी खंडएलवाल, श्रीमती दीक्षित, श्रीमती कांता मजदे को उत्कृष्ट सेवा सम्मान प्रदान किया गया।  कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री गोरू बियानी, श्रीमती रिवा सिंह, श्री आर एस बियानी, श्री सुमेर सिंह (गोल्डनमेन), श्री केपी सिंह,डाॅ शिवकांत वाजपेई, श्री विजय शर्मा, श्री मोहन चावडा, श्री हुकुम आंजना, श्री गनु भाई, श्रीमती नेहा जैन आदि उपस्थित थे। आभार कार्यक्रम संयोजक श्रेयांश मेहता ने प्रकट किया।

किसानों को मोहन सरकार की नई सौगात, 12 हज़ार करोड़ रुपये खाते में डालने का ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सरकार ने राहत दी है। दरअसल धान किसानों के लिए सरकार आंशिक राहत लेकर आई है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस बार धान का बंपर उत्पादन हुआ जिसके कारण रिकार्ड खरीदी भी हुई। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इस साल 51.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान उपार्जित की गई है । खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था । इससे  किसानों को इससे बड़ी राहत मिली। अब  राज्य सरकार, धान किसानों के खातों में कुल 12 हज़ार करोड़ से ज्यादा की राशि डालेगी, और सरकार अधिकतर राशि का भुगतान भी कर  चुकी है। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को इसकी राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। किसानों को जल्द ही भुगतान हो इसके लिए तकनीक आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है। समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि का किसानों को खासा लाभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, जो पिछले सत्र के एमएसपी से 69 रुपए अधिक है। पिछले खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपए प्रति क्विंटल था। न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई इस वृद्धि का किसानों को खासा लाभ हुआ है। खरीफ सत्र में प्रदेश में कुल 8 लाख 59 हज़ार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 7 लाख 89 हज़ार 757 किसानों ने स्लॉट बुक कर धान उपार्जन प्रक्रिया में भाग लिया। इन किसानों में से 7 लाख 62 हज़ार 620 किसान (89 प्रतिशत) धान विक्रेता के रूप में उपार्जन केंद्रों पर पहुंचे। इस वर्ष धान उपार्जन के लिए प्रदेश में 1,436 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए। सीजन में 51 लाख 74 हज़ार 792 मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया। उपार्जित धान में से 48 लाख 38 हज़ार 637 मीट्रिक टन से अधिक धान का परिवहन भी पूरा कर लिया गया है। परिवहन किए गए धान में से 46 लाख 30 हज़ार 21 मीट्रिक टन धान गुणवत्ता परीक्षण के बाद स्वीकार किया जा चुका है। कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस सीजन में उपार्जित धान के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित किया गया। बेची गई धान की यह पूरी राशि किसानों को दी जाएगी इस आंकलित मूल्य में से करीब 11 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे अंतरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उपार्जन मूल्य से किसानों को आर्थिक संबल मिला है। समर्थन मूल्य में बढ़ौतरी करने से किसानों को मिला है लाभ सीएम मोहन यादव ने बताया कि खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, जो पिछले सत्र के एमएसपी से 69 रुपए अधिक है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई इस वृद्धि का किसानों को खासा लाभ हुआ है। आपको बता दें कि  खरीफ सत्र में  कुल 8 लाख 59 हज़ार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 7 लाख 89 हज़ार 757 किसानों ने स्लॉट बुक कर धान उपार्जन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था मोहन यादव ने कहा कि इस सीजन में उपार्जित धान के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित किया गया। अब बेची गई धान की यह पूरी राशि किसानों को ट्रांसफर की जाएगी। वही इस आंकलित मूल्य में से करीब 11 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे अंतरित किए जा चुके हैं।  लिहाजा किसानों के लिए ये बड़ी राहत मानी जा रही है।

ग्वालियर सहित 8 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, राजगढ़ में 7 डिग्री सेल्सियस तापमान, 30 जिलों में छाया कोहरा

भोपाल   मध्य प्रदेश एक बार फिर से घने कोहरे की आगोश में है। आज सुबह प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा छाया रहा। जिससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई। एमपी में सर्द हवाओं का सिलसिला भी जारी है। बुधवार को दिन में भी ठंडी हवाएं चलती रहीं। जिसके कारण अधिकांश जिलों में दिन का पारा 25 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ। प्रदेश में फिलहाल बारिश पर ब्रेक लग गया है। आज कहीं भी बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। लेकिन जल्द ही MP में फिर से बारिश लौटने की संभावना है। MP में कब होगी बारिश मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, साथ ही साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम भी एक्टिव है। जिसका प्रभाव एमपी के मौसम पर देखने को मिलेगा। इसकी वजह से कई जिलों में बादल छाए रहने की संभावना है। पहाड़ों पर हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण प्रदेश में सर्द हवाएं आ रही हैं। जिससे सुबह-शाम के साथ ही दिन में भी सर्दी का एहसास बना हुआ है। 8 फरवरी को एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय रीजन में एक्टिव हो रहा है। जिसका प्रभाव फिर से एमपी में देखने को मिल सकता है। जिसके कारण 10 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई गई है। एमपी का सबसे ठंडा जिला एमपी में आज सुबह घने कोहरे के कारण ग्वालियर में विजिबिलिटी घट कर 50 मीटर से भी कम हो गई। वहीं दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर के बीच दृश्यता दर्ज की गई। रतलाम, उज्जैन, नौगांव, सीधी और दमोह में 500 मीटर से 1 किमी के बीच विजिबिलिटी रही। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सबसे ठंडा जिला राजगढ़ रहा, यहां का न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य सभी जिलों का न्यूनतम पारा 10 डिग्री से ऊपर दर्ज हुआ। इस दौरान सबसे कम अधिकतम तापमान नौगांव और पृथ्वीपुर में रहा, यहां का अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इस दौरान नर्मदापुर में सबसे अधिक अधिकतम पारा 31.5 डिग्री सेल्सियस रहा। 6 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहेगा। वहीं, भोपाल, गुना, अशोकनगर, इंदौर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, विदिशा, सीहोर, रायसेन समेत कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर बना रहेगा। 7 फरवरी- कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा। इस दिन बारिश का अलर्ट नहीं है। क्यों बना है ऐसा मौसम मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे। वहीं पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी के बाद मैदानी क्षेत्रों में सर्द हवाएं पहुंच रही हैं, जिससे ठंड और कोहरे की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मध्यप्रदेश में भी दिखेगा। 10 फरवरी से प्रदेश के कुछ हिस्सों में मावठा गिरने की संभावना जताई गई है।

15 दिनों के भीतर खातों में पहुंचेगी 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने दिए निर्देश

15 दिनों के भीतर खातों में पहुंचेगी 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने दिए निर्देश पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा भोपाल  पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने  भोपाल स्थित वल्लभ भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 15 दिनों में शत-प्रतिशत वितरित करना सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रकरण तत्काल निराकृत कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने विधानसभा के प्रश्नों और कैबिनेट संक्षेपिका को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  बैठक में विभाग के अपर सचिव श्री अनुराग चौधरी, विभाग आयुक्‍त श्री सौरभ कुमार सुमन समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

रेलवे की खुशखबरी: ‘उत्तरप्रदेश’ और ‘झारखंड’ जाने वाले यात्रियों के लिए अहम अपडेट

भोपाल  रेलवे ने मध्यप्रदेश में रहने वाले उत्तरप्रदेश और झारखंड के यात्रियों को बड़ी खुशखबरी दी है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर तीसरी पिट लाइन का निर्माण होने के बाद रेलवे प्रशासन ने धनबाद और चोपन के बीच दो नई एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की तैयारी तेज कर दी है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद अब संबंधित जोन को इन ट्रेनों के परिचालन, रखरखाव और प्रचारप्रसार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सेवाओं के शुरू होने से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी। विंध्य अंचल की राह होगी सुगम विंध्य क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल-चोपन एक्सप्रेस को भी स्वीकृति दे दी गई है। यह ट्रेन प्रत्येक रविवार रात भोपाल से रवाना होकर सोमवार सुबह चोपन पहुंचेगी। वापसी में सोमवार शाम चोपन से चलकर मंगलवार सुबह भोपाल वापस आएगी। इस ट्रेन का ठहराव सागर, कटनी, ब्योहारी, सिंगरौली और ओबरा डैम जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रखा गया है। भोपाल से अभी चोपन के लिए दो वीकली स्पेशन चलती हैं। इस ट्रेन के बाद वीकली स्पेशन की संख्या बढ़कर 3 हो जाएगी। ऐसा रहेगा दोनों ट्रेन का रूट सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि ट्रेन का संचालन सप्ताह में तीन दिन किया जाएगा। यह ट्रेन भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस सप्ताह में 03 दिन चलेगी। यह ट्रेन रात 8 बजकर 55 मिनिट पर भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और दूसरे दिन रात 8 बजकर 30 मिनिट पर धनबाद पहुंचेगी धनबाद से यह ट्रेन सुबह 7 बजे चलेगी और दूसरे दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। भोपाल-चोपन एक्सप्रेस रविवार को रात 8 बजकर 55 मिनिट पर चलेगी और दूसरे दिन सुबह 7 बजे चोपन पहुंचेगी. अगले दिन शाम 7 बजे चोपन से रवाना होकर दूसरे दिन सुबह 8 बजकर 35 मिनिट पर भोपाल पहुंचेगी।  

मुरैना में यूजीसी के विरोध में बाजारों की हड़ताल, 100 से अधिक पुलिस जवान तैनात, 2 बजे बाद खुलेगा व्यापार

मुरैना  यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने आज मुरैना बंद का ऐलान किया था, इसी के चलते आज मुरैना शहर के सभी प्रतिष्ठान बंद नजर आए। यह बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। शादियां होने के कारण दोपहर 2 बजे से बाजार खोलने के लिए आंदोलन कर्ताओं और प्रशासन में बनी सहमति।  सवर्ण समाज की ओर से आज यूजीसी कानून का विरोध करते हुए मुरैना शहर का बाजार बंद कराया। सदर बाजार, हनुमान चौराहा, मिर्च बजरिया, मार्कण्डेश्वर बाजार, एम एस रोड, सिकरवारी बाजार, तेलीपाड़ा, नाला नंबर एक सभी मुख्य बाजार पूर्ण रूप से बंद दिखे। व्यापारियों ने भी इस बंद में खुल कर सहयोग करते हुए बाजार को बंद रखा। दोपहर 2 बजे तक रहेगा बंद सवर्ण समाज के द्वारा यूजीसी कानून का विरोध करते हुए बाजार बंद की घोषणा के बाद पुलिस प्रशासन ने कल आंदोलन कर्ताओं से बैठक की थी, जिसमें शादियों का सीजन देखते हुए बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखने का निश्चय हुआ था। इस पर व्यापारियों ने भी सहमती दी थी। 100 से अधिक जवान अधिकारी तैनात सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार यूजीसी कानून के विरोध में मुरैना शहर बंद कराया गया है इस पर 100 पुलिस जवान अधिकारी शहर में चप्पे चप्पे पर मौजूद है । बज्र रिजर्व फोर्स किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार है । अभी यह सिर्फ संकेत सर्वण समाज सदस्य और ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश दंडोतिया ने बताया कि यूजीसी कानून के विरोध में सांकेतिक बंद है, सभी व्यापारियों का सहयोग मिल रहा है। स्वेच्छा से बंद में शामिल है। बुधवार को जिला प्रशासन की बैठक में भी हमसे और प्रशासनिक अधिकारियों से बहस हुई थी लेकिन हम अपनी बात पर अड़े थे। शादियां होने के कारण हमने दोपहर दो बजे के बाद व्यापारियों भाइयों को बाजार खोलने की सहमति भी दी है।

ग्वालियर भर्ती अपडेट: आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 65 करोड़ का टेंडर मंजूर, प्रक्रिया फिर शुरू

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के एक बड़े जिले में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब खत्म होने की कगार पर है। नगर निगम ने आउटसोर्स मैनपावर की नई टेंडर प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही एमआईसी (Mayor-in-Council) के समक्ष रखा जाएगा। एमआईसी की मंजूरी और परिषद से पास होने के बाद नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे निगम के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो जाएगा। गलत गणना बनी थी विवाद की जड़ दरअसल, वर्ष 2024 में नगर निगम द्वारा आउटसोर्स मैनपावर के लिए करीब 65 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। इसमें सर्विस चार्ज की गणना में गंभीर त्रुटि सामने आई, जिससे निगम को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति होने की आशंका थी। इसी कारण निगमायुक्त ने परिषद द्वारा पारित ठहराव पर पुनर्विचार का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन परिषद ने उसे अस्वीकार कर दिया। यदि उस समय कार्यादेश जारी होता, तो निगम पर 3.22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता। शासन ने किया हस्तक्षेप मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्च 2025 में निगमायुक्त ने शासन से मार्गदर्शन मांगा। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव शीलेंद्र सिंह ने 7 जनवरी को परिषद के सभी ठहरावों को रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद अब नगर निगम को दोबारा से सही और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाने की अनुमति मिल गई है।

किसानों के लिए राहत की खबर: गेहूं MSP 2585 रुपये, आष्टा मंडी में नीलामी शुरू

आष्टा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। बीते साल यह मूल्य 2425 रुपये था। एमएसपी की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसान अब खरीदी की तारीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  पंजीयन की जानकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत किसान ऑनलाइन नि:शुल्क पंजीयन कर सकते हैं। वहीं कियोस्क या अन्य ऑनलाइन केंद्रों से पंजीयन कराने पर 50 रुपये शुल्क देना होगा। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भू-अभिलेख, ऋण पुस्तिका और आधार से लिंक बैंक खाता अनिवार्य है। किसान एप और ई-उपार्जन पोर्टल पर घर बैठे पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध है। मौसम और उत्पादन की उम्मीद इस रबी सीजन में मौसम अब तक किसानों के अनुकूल रहा है। पर्याप्त ठंड और नमी की वजह से फसल अच्छी स्थिति में है। लोकवन, तेजस, 1544 और 322 जैसी उन्नत किस्मों की बोवनी बड़े पैमाने पर की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह बना रहा, तो इस बार गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। MSP का पिछले वर्षों का सफर पिछले वर्षों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में गेहूं का MSP 2300 रुपये था। उस पर मध्य प्रदेश सरकार ने 125 रुपये बोनस जोड़कर 2425 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी की थी। वर्ष 2025 में केंद्र ने MSP 2425 रुपये तय किया, जबकि राज्य सरकार ने 175 रुपये बोनस जोड़कर 2600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को भुगतान किया। अब 2026-27 के लिए MSP 2585 रुपये घोषित किया गया है। चुनावी वादा और किसानों की उम्मीद किसान राधेश्याम राय और कैलाश विश्वकर्मा का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदी का वादा किया था। बीते वर्ष बोनस देकर सरकार इस आंकड़े के करीब जरूर पहुंची, लेकिन वादा अधूरा रहा। इस बार MSP 2585 रुपये होने के बाद किसानों को उम्मीद है कि यदि राज्य सरकार 115 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देती है, तो भाजपा अपना चुनावी वचन पूरा कर सकती है। बोनस पर टिकी निगाहें प्रदेश में भाजपा की सरकार होने की वजह से किसानों की नजरें पूरी तरह राज्य सरकार के फैसले पर हैं। पिछले वर्ष बोनस ने किसानों को बड़ी राहत दी थी। इस बार भी किसान आशा लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी लागत, मेहनत और भरोसे की कद्र करेगी। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार उनकी उम्मीदों को हकीकत में बदलती है या 2700 रुपये का वादा फिर इंतजार में रह जाएगा। आष्टा मंडी में रबी सीजन की नीलामी शुरू सीहोर जिले की आष्टा कृषि उपज मंडी में मंगलवार से नए रबी सीजन की गेहूं की आवक और नीलामी का औपचारिक शुभारंभ हो गया। मंडी परिसर में सुबह से ही किसानों की चहल-पहल और व्यापारियों की सक्रियता ने नए सीजन की शुरुआत खास बना दी। पहली नीलामी से उत्साह सीजन की पहली नीलामी में इछावर तहसील के ग्राम डाबला राय निवासी किसान राजाराम ने चार क्विंटल गेहूं मंडी में लाया। उसकी उपज को सात्विक एग्रो फूड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड ने 2381 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा। पहले दिन मिले भाव ने न सिर्फ राजाराम का हौसला बढ़ाया, बल्कि मंडी पहुंचे अन्य किसानों में भी उत्साह भर दिया। एक दिन में 9904 क्विंटल आवक मंडी सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने बताया कि 3 फरवरी 2026 को आष्टा मंडी में कुल 9904 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में आवक और बढ़ सकती है क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में फसल की कटाई जोरों पर है। उन्नत किस्मों को बेहतर भाव मंडी में गेहूं की अलग-अलग किस्मों को गुणवत्ता के अनुसार अच्छा भाव मिला। ‘गेहूं सुजाता 3006’ किस्म का उच्चतम भाव 3440 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। वहीं लोकवन किस्म 2602 रुपये से 2834 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकी। अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं की मांग ने मंडी में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया। शरबती गेहूं की साख आष्टा मंडी शरबती और उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की फसल देश के कई हिस्सों में पसंद की जाती है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में आने वाले गेहूं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है, जिससे बाहर के खरीदार ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं और किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना मजबूत हुई है। पड़ोसी जिलों के किसानों का भरोसेमंद केंद्र सीहोर जिले की आष्टा और भैरूंदा मंडी बड़े व्यापारिक केंद्र मानी जाती हैं। यहां की साख ऐसी है कि हरदा, देवास और राजगढ़ जैसे जिलों के किसान भी अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। मंडी से खरीदा गया गेहूं महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में भेजा जाता है। बेहतर भाव और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण किसान बड़ी संख्या में आष्टा मंडी का रुख कर रहे हैं।  

10 लाख भक्तों के लिए महाशिवरात्रि दर्शन प्लान, जानिए कहां से होगा प्रवेश और क्या रहेगी व्यवस्था

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रविवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंदिर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भक्तों को सुलभ और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भस्म आरती दर्शन, लड्डू प्रसाद, पूछताछ केंद्र, पार्किंग, जूता स्टैंड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंदिर परिसर में अहम बैठक आयोजित की गईं। जिसमें कई निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर एवं मंदिर प्रशासक रौशन सिंह, प्रथम कौशिक, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, सहायक प्रशासक आशीष फलवाडीया सहित मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सामान्य श्रद्धालुओं की प्रवेश-निर्गम व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला के समीप बने द्वार से प्रवेश करेंगे। वे भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप, नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए अपने गंतव्य की ओर जाएंगे। शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की व्यवस्था शीघ्र दर्शन 250 रुपए टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए अलग से बैरिकेटिंग की गई है। ये श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे। इसके अलावा शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग, बड़ा गणेश गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग, द्वार क्रमांक-01 से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती दर्शन व्यवस्था महाशिवरात्रि पर्व पर भस्म आरती के लिए पंजीयनधारी श्रद्धालुओं का प्रवेश मानसरोवर भवन और द्वार क्रमांक-01 से निर्धारित किया गया है। पार्किंग सुविधा के लिए     पार्किंग : सामान्य श्रद्धालु के लिए कर्कराज पार्किंग, मेघदूत पार्किंग में व्यवस्था की गई है।     शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मेला ग्राउंड, राणौजी की छत्रि, शगुन गार्डन, महाकाल मंडपम् पर व्यवस्था की गई है।     जूता स्टैंड : सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ एवं हरसिद्धि पाल पर व्यवस्था की गई।     शीघ्र दर्शन काउंटर : कर्कराज पार्किंग, हरसिद्धि पाल पार्किंग पर की जाएगी।     लड्डू प्रसाद : काउंटरों की व्यवस्था नृसिंहघाट रोड पर एवं हरसिद्धि रोड पर की जाएगी। प्रशासन की अपील मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और धैर्य बनाए रखें, जिससे सभी भक्त सुचारू रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  

कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।  

सदियों पुराने वृक्षों की पहचान: पन्ना में बरगद, पीपल, नीम समेत कई पेड़ों का दस्तावेजीकरण

पन्ना   दक्षिण पन्ना वनमण्डल में 100 वर्ष से अधिक आयु के प्राचीन वृक्षों की पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से "हेरिटेज ट्री आइडेंटिफिकेशन" अभियान संचालित किया जा रहा है. इस पहल के अंतर्गत वनकर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं. उनके फोटो और विवरण संकलित किए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों से संवाद कर वृक्षों से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारियां भी संजोई जा रही है. अभियान का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को पहचान देना है. बरगद, पीपल, नीम सहित कई 100 वर्ष पेड़ों का दस्तावेजीकरण अभियान के तहत विभिन्न रेंजों में वन अमले द्वारा निरंतर सर्वे कार्य किया जा रहा है. रैपुरा रेंज में डिप्टी रेंजर रंजना नागर, मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार, पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया, शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा तथा सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल द्वारा अब तक सराहनीय प्रयास किए गए हैं. अनेक ग्रामों में बरगद, पीपल, नीम, आम, इमली और अन्य प्रजातियों के 100 से 200 वर्ष तक एवं अधिक पुराने वृक्षों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं की जानकारी रैपुरा क्षेत्र में डिप्टी रेंजर रंजना नागर द्वारा ग्रामीण बुजुर्गों से विस्तृत चर्चा कर लगभग 20 ऐसे वृक्षों की जानकारी संकलित की गई, जिनकी आयु 100 से 200 वर्ष तक आंकी जा रही है. वरिष्ठ ग्रामीणों ने बताया कि कई वृक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े होने के कारण आज भी सुरक्षित हैं, जिनके नीचे विभिन्न देवस्थलों की स्थापना की गई है. इस संवाद से वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं तथा संरक्षण की परंपराओं को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा द्वारा गुरझाई क्षेत्र एवं पतने-बघने नदी के पास लगभग 100 से 105 वर्ष पुराने सेमर और आम के वृक्ष चिन्हित किए गए. मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार ने हथकुरी, कुंवरपुर और मोहन्द्रा ग्रामों में कई हेरिटेज ट्री की पहचान कर उनके फोटोग्राफ्स संकलित किए. जिनमें अनेक वृक्ष 150 वर्ष से अधिक पुराने पाए गए. पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया द्वारा बरगद, इमली और नीम सहित विभिन्न ग्रामों में 100 से 200 वर्ष तक आयु वाले वृक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया. वहीं, सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल ने बुजुर्ग ग्रामीणों से चर्चा कर धार्मिक आस्था से जुड़े लगभग 110 से 120 वर्ष पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित की. वन मण्डल द्वारा इस अभियान को जनसहभागिता से जोड़ते हुए सभी वन क्षेत्रों में ऐसे प्राचीन वृक्षों की पहचान और संरक्षण के प्रयास तेज किए जा रहे हैं. विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता और जागरूकता से न केवल जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति और परंपरा दोनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा.

कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है। ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।  

इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य में प्रगति, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताए मप्र के विकास के संकेत

अधोसंरचना विस्तार के साथ बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों की ओर तेज गति से अग्रसर हो रहा है म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुदृढ़ हो रही हैं मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ मध्यप्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 173 से घटकर 142 तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) 41 से घटकर 37 हुई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू एवं एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में भी वृद्धि हुई है। जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 प्रदर्शनकारी राज्यों में शामिल हुआ है। सिकल सेल मिशन के अंतर्गत व्यापक स्क्रीनिंग एवं उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार कर प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। योजनांतर्गत पात्र परिवारों को 5 लाख रूपये तक नि:शुल्क उपचार दिया जा रहा है। साथ ही गंभीर रोगियों को आपात स्थिति में त्वरित रूप से उच्च स्तरीय उपचार पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा से मुहैया कराया जा रहा है। अब तक 120 से अधिक नागरिकों को आपात स्थिति में सेवा का लाभ मिला है। मानवीय संवेदनाओं के दृष्टिगत निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में आपात काल में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने वाले नागरिक को 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में प्रदेश में 33 मेडिकल कॉलेज है। विगत 2 वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 तथा निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन प्रारंभ किया गया है। आगामी 2 वर्षों में 6 शासकीय एवं पीपीपी मोड पर 13 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किया जाना योजना में शामिल है। विगत 2 वर्षों में सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हुई हैं, जबकि सरकारी एवं निजी मिलाकर कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी (एमडी/एमएस) सीटों में भी वृद्धि करते हुए सरकारी पीजी सीटें 1262 से बढ़कर 1468 तथा कुल पीजी सीटें 2862 हो गई हैं। इसके अतिरिक्त 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं से मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। पीपीपी मॉडल पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इंदौर में अस्पताल भवन, मिनी ऑडिटोरियम एवं नर्सिंग हॉस्टल जैसे अधोसंरचनात्मक कार्यों हेतु 773.07 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ रूपये तथा सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल हेतु 383.22 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर मशीनों की स्वीकृति दी गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन एवं एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं। भोपाल एवं रीवा में कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ प्रारंभ हुई हैं, वहीं इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी एवं ब्लड कैंसर उपचार हेतु अत्याधुनिक मशीन स्थापित की गई है। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  

एमपी में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा, 8 शहरों में 972 ई-बसें चलाने का आदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पीएम ई-बस सेवा का संचालन नगरीय विकास विभाग की बजाय सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित कंपनियां करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश में एक राज्य स्तरीय कंपनी के साथ 7 सहायक कंपनियां गठित की गई हैं। केन्द्र से प्रदेश के आठ शहरों के मिली 972 ई-बसों का संचालन भी यही कंपनियां करेंगी। पहले यह काम नगरीय विकास विभाग द्वारा किया जा रहा था। लेकिन सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में अंतरशहरी बस सेवा के साथ नगर वाहन सेवा का संचालन भी इन्हीं कंपनियों द्वारा किया जाएगा। 7 सहायक कंपनी बनाई गई प्रदेश में अगस्त 2025 में राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का पंजीयन हो गया है। मुख्यमंत्री इस राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष हैं। परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष हैं। राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन 7 सहायक कंपनी बनाई गई हैं। वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनियां बनाई गई हैं। कंपनियों ने ट्रैफिक सर्वे करते हुए नए सिरे से नए बस रूट निर्धारण और इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी के निर्धारण का काम शुरू कर दिया है। भोपाल में 195, इंदौर में चलेंगी 270 बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी।  इन शहरों में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि दी जा रही है। गौरतलब है कि इस परियोजना के अंतर्गत ग्वालियर, इंदौर में कुछ बसें भेजी भी जा चुकी हैं। ई-बसों के संचालन यात्री सुविधाओं के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

MP बजट 2026 में पेट्रोल-डीजल रेट्स की अहम अपडेट, जनता की निगाहें सरकार पर

भोपाल  सोने-चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव से जूझ रही मध्य प्रदेश की जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें टेंशन दे सकती हैं। जी हां सीएम मोहन ने इशारों इशारों में पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने के संकेत दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि सरकार इन कीमतों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है और धीरे-धीरे राहत देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। भोपाल में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान सीएम मोहन यादव ने स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल वाकई एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इशारों में कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान निकालने की तैयारी कर रही है। सीएम ने यह भी जानकारी दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा और 18 फरवरी को MP Budget 2026 पेश किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बजट में जनता को कई क्षेत्रों में रियायत दी जाएगी। इसका सीधा मतलब ये निकाला जा सकता है फरवरी के बाद ही पेट्रोल डीजल की कीमतें में बदलाव आएगा। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर करीब 29 फीसदी और डीजल पर लगभग 19 फीसदी वैट पर राहत मिलने के सवाल पर सीएम ने जवाब कहा—इस पर उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर भी काम कर रही है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। सीएम मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल का सीधे नाम लिए बिना कहा कि बजट के माध्यम से इस चुनौती के निराकरण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल है, लेकिन साथ ही यह राज्य कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में भी अपनी जगह बना चुका है।

हाईकोर्ट ने कहा: याचिकाओं को आधार से जोड़ने का मसला अब प्रशासनिक कमेटी के समक्ष

जबलपुर  हाईकोर्ट में दायर होने वाली याचिकाओं को आधार कार्ड से लिंक करने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इससे वर्षों से लंबित अनुपयोगी याचिकाओं का जल्द निराकरण होगा और लंबित प्रकरणों की संख्या में कमी आएगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के सुझाव को अभ्यावेदन मानकर रजिस्ट्रार जनरल प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए। याचिका जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की तरफ से दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी हाईकोर्ट को डिजिटलीकरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया कि डिजिटलीकरण के दौरान नेशनल प्रिजन पोर्टल से हाईकोर्ट को भी जोड़ा जाए, ताकि जेल में सजा काट रहे कैदियों के रिकॉर्ड देखे जा सकें। याचिका में यह भी बताया गया कि कई मामलों में कैदियों की सजा पूरी होने के बावजूद उनके द्वारा दायर अपील हाईकोर्ट में लंबित रहती है। इसी तरह जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद उच्च न्यायालय में दायर याचिका लंबित रहती है। सुझाव में यह भी कहा गया कि डिजिटलीकरण के दौरान याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। कई मामलों में याचिकाकर्ता की मृत्यु होने के बावजूद याचिका लंबित रहती है, जिससे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। इसके अलावा फाइलिंग और आवेदन पेश करने के संबंध में भी कई सुझाव दिए गए थे। युगलपीठ ने याचिका में दिए गए सभी सुझावों को उचित मानते हुए आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा।

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा

भोपाल. पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने बुधवार को वल्लभ भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 15 दिनों में शत-प्रतिशत वितरित करना सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रकरण तत्काल निराकृत कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने के अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने विधानसभा के प्रश्नों और कैबिनेट संक्षेपिका को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर सचिव श्री अनुराग चौधरी, आयुक्‍त श्री सौरभ कुमार सुमन समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  

खराब हुई फसलों के किसानों की जल्द ही मिलेगी राहत

भोपाल. उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कित्तुखेड़ी, गोपालपुरा, लोहाखेड़ा, झारड़ा एवं अड़मालिया में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदना के साथ किसानों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर राहत प्रदान की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने किसानों से कहा कि सरकार सभी प्रभावित क्षेत्रों के हर खेत पर जाकर सर्वे किया जाएगा, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिकारी खेतों तक पहुँच कर वास्तविक स्थिति का आंकलन कर रहे हैं अफीम खेती के संबंध में नारकोटिस विभाग भी मौके पर जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही केन्द्र सरकार से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। फसल बीमा के मामले में भी किसानों को फसल का पूरा लाभ प्रदान किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में सरकार किसानों की हर चिंता और दुख में इनके साथ है। निरीक्षण दौरान जिला योजना समिति के सदस्य श्री राजेश दीक्षित सहित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।  

शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा: दो संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

भोपाल. भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) के संरक्षण, संवर्धन एवं शैक्षणिक अनुसंधान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। उक्त समझौता ज्ञापन पर दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक श्री मुकेश कुमार मिश्रा तथा उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा विधिवत हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के मध्य भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अनुसंधान, अकादमिक गतिविधियों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों एवं अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन हेतु परस्पर सहयोग स्थापित किया जाएगा। समझौता ज्ञापन के अंतर्गत भारतीय दर्शन, संस्कृति, साहित्य, परंपरागत विज्ञान एवं ज्ञान-विरासत से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों से परिचित कराने हेतु संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा में समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल से प्रोफेसर एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंघई, भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रभारी एवं ग्रंथपाल डॉ. प्रज्ञा नायक, तथा सहायक प्राध्यापक अमर प्रकाश पांडेय उपस्थित रहे। वहीं दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल की सह सचिव डॉ. अल्पना त्रिवेदी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों ने इस सहयोग को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अकादमिक उन्नयन की दिशा में मील का पत्थर बताया तथा यह आशा व्यक्त की कि यह समझौता भविष्य में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करेगा।  

लूट की तीन वारदातें सुलझीं, मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं नागरिक सुरक्षा के प्रति सतत् प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों में घटित गंभीर लूट की घटनाओं का त्वरित एवं प्रभावी खुलासा किया गया है। इन कार्रवाइयों में न केवल आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई, बल्कि लूटी गई राशि भी बरामद की गई है। नरसिंहपुर — होटल में हुई लगभग 1 करोड़ रुपये की लूट का चंद घंटों मेंखुलासा 03 फरवरी की रात्रि लगभग 03:00 बजे नरसिंहपुर नगर स्थित होटलकुमुम वैलीमें 3-4 नकाबपोश व्यक्तियों द्वारा होटल में प्रवेश कर लगभग 1 करोड़ रुपये की नगद राशि की लूट का पुलिस ने खुलासा कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विवेचना के दौरान भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया। जांच में होटल के मैनेजरकी भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिससे पूछताछ करने पर उसनेअपने अन्‍य साथियों के साथ लूट की घटना करना स्वीकार किया। जांच में सामने आया कि मेनेजर को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में उसने यह जानकारी अपने साथियोंको दी, जिन्होंने मिलकर लूट की योजना बनाकर घटना को अंजाम दिया। चारों आरोपियों से कुल 60 लाख नगद राशि जब्‍त‍की गई है। राजगढ़ — नेशनल हाईवे पर लूट करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश थाना कुरावर, जिला राजगढ़ अंतर्गत नेशनल हाईवे पर चार पहिया वाहन चालक को रोककर मिर्ची डालकर बंधक बनाने एवं बैंक खाते से 1 लाख 26 हजार 400 की राशि आहरित करने की घटना का पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। पुलिस की विशेष टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य एवं मोबाइल ट्रैकिंग के आधार पर राजस्थान राज्य के तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों से पुलिस ने 1लाख 26हजार 400रूपएनगद (शत-प्रतिशत बरामद), मोबाइल फोनतथा घटना में प्रयुक्त चोरी की मोटरसाइकिल जब्‍त की है। छिंदवाड़़ा-सराफा व्यवसायी से हुई लूट का सफल खुलासा थाना देहात क्षेत्र अंतर्गत गांगीवाड़ा के एक सराफा व्यवसायी से साप्ताहिक बाजार से लौटते समय लूट की गंभीर घटना घटित हुई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना देहात पुलिस द्वारा तत्काल अलग-अलग टीमें गठित कर तकनीकी सहायता एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की गई। जांच के परिणामस्वरूप एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से लगभग 2 किलो 300 ग्राम चांदी के जेवरात तथा घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिलें बरामद की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने लगभग 9 लाख रुपये मूल्य की सामग्री जब्त की है। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों के विरुद्धत्वरित, तकनीकी एवं समन्वित कार्रवाई के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नागरिकों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा सतत् एवं कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। 

वन अपराध पर शिकंजा: अवैध खैर लकड़ी तस्करी में वन–पुलिस की बड़ी कार्रवाई

भोपाल. अवैध खैर की लकड़ी की तस्करी के विरुद्ध वन और पुलिस विभाग की बड़ी कार्रवाई मंदसौर जिले के गरोठ थाना अंतर्गत मुखबिर की सूचना पर 3 फरवरी को अवैध खैर की लकड़ी की तस्करी के विरूद्ध वन और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई। अवैध खैर की लकड़ी ट्रक में भरकर दिल्ली की ओर ले जायी जा रही थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन संरक्षक उज्जैन श्री आलोक पाठक, वन मंडलाधिकारी श्री संजय रायखेरे के मार्गदर्शन में उप वनमंडलाधिकारी गरोठ और वन परिक्षेत्र अधिकारी भानपुरा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और गरोठ पुलिस की टीम ने तत्काल संयुक्त मोर्चा संभाला। शामगढ़ नाका और फोरलेन-एटलेन चौकड़ी पर सघन घेराबंदी की गई। घेराबंदी देख ट्रक चालक ने वाहन को बर्डीया अमरा के रास्ते भगाने का प्रयास किया, लेकिन संयुक्त टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घेराबंदी कर ट्रक को रोक लिया। ट्रक की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में बेशकीमती खैर (Acacia catechu) की अवैध लकड़ी बरामद हुई। वाहन चालक के पास लकड़ी के परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। टीम ने मौके से आरोपी चालक खालिद पिता अजीम पठान (निवासी नोह, हरियाणा) को हिरासत में ले लिया। अग्रिम वैधानिक कार्रवाई लकड़ी अवैध होने के कारण वन विभाग द्वारा वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। वर्तमान में जब्त ट्रक वन विभाग की सुपुर्दगी में है। 

6 करोड़ 50 लाख रूपये से अधिक के 54 चार पहिया वाहन जब्त

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश के ग्वालियर एवं इंदौर जिलों में वाहन किराये पर लेकर उन्हें गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोहों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की है। इस में पुलिस ने विगत 10 दिनों में 06 करोड़ 50 लाख रूपए से अधिक के 54 वाहन जब्‍त किए हैं। ग्वालियर में 15 वाहन जब्‍त क्राईम ब्रांच पुलिस ने किराए पर ली गई 4 पहिया गाड़ियों को फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी द्वारा स्वयं को एक निजी कंपनी का मैनेजर बताकर ट्रेवल्स संचालकों से बड़ी संख्या में वाहन किराए पर लेता था तथा वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर अवैध रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करता था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 15 चार पहिया वाहन कीमती लगभग 01 करोड़ 50 लाख रुपये को विधिवत जब्त किया। इंदौर- 39 चार पहिया वाहन जब्‍त इंदौर जिले में भी थाना अन्नपूर्णा पुलिस ने किराए पर ली गई कारों को अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी वाहन मालिकों से 11 माह का लिखित एग्रीमेंट कर कारें किराए पर लेता था। प्रारंभ में 2–3 माह किराया देने के बाद वाहनों को अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रख देता था। आरोपी वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम हटाकर वाहन मालिकों को किराया देना बंद कर देता था। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना अन्नपूर्णा में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान थाना अन्नपूर्णा पर करीब 40 से अधिक वाहन मालिकों द्वारा आरोपी के विरुद्ध आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिससे आरोपी द्वारा संगठित एवं बड़े स्तर पर वाहन धोखाधड़ी करना उजागर हुआ।विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने 39 चार पहिया वाहन जप्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ से अधिक है। मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा ग्वालियर एवं इंदौर जिलों में की गई इन संयुक्त कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप कुल 54 चार पहिया वाहन जब्त किए गए हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 6 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक है। मध्यप्रदेश पुलिस की समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही से न केवल संगठित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, बल्कि बड़ी संख्या में वाहन मालिकों को भी आर्थिक क्षति से राहत प्राप्त हुई है।  

स्टेट फॉरेस्ट कॉल सेंटर स्थापित – शिकायतों पर होगी त्वरित कार्यवाही

भोपाल . प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन एवं वन बल प्रमुख श्री बी.एन. अम्बाडे द्वारा 26 जनवरी 2026 को वन विभाग से संबंधित शिकायतों पर क्विक एक्शन और उनके त्वरित निराकरण के लिये स्टेट फॉरेस्ट कॉल सेंटर वन मुख्यालय, वन भवन तुलसीनगर भोपाल में स्थापित किया गया। कॉल सेंटर के दूरभाष नंबर 0755-2524000, 2524200 पर नागरिक वन विभाग से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री श्री वैष्णव से की सौजन्य भेंट

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन में बुधवार को सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मध्यप्रदेश में रेल से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित एवं प्रगतिरत रेलवे परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश के विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।  

राजा रघुवंशी केस अपडेट: गार्ड व बिल्डिंग मालिक निर्दोष, पुलिस की थ्योरी साबित नहीं हो पाई

इंदौर  इंदौर के बहुचर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस केस में आरोपी बनाए गए गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। सबूतों की कमी के कारण इन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया है। पुलिस ने पहले इन्हें साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन मामले की गहन जांच में हत्याकांड से इनका कोई सीधा संबंध साबित नहीं हो पाया।  चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में कोर्ट ने गार्ड और बिल्डिंग मालिक को दोषमुक्त कर दिया है। शिलॉन्ग पुलिस द्वारा सबूत छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बलवीर सिंह अहिरवार और लोकेंद्र सिंह तोमर को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर राहत दी गई है। कोर्ट के इस फैसले से जांच एजेंसियों की शुरुआती थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरी किए गए आरोपियों में लसूड़िया क्षेत्र की एक बिल्डिंग का गार्ड बलवीर सिंह अहिरवार और भवन मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम के साथ मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी का बैग और अन्य सबूत ठिकाने लगाने में मदद की। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के शामिल होने को लेकर ठोस सबूत नहीं बिजली बिल और अन्य तकनीकी तथ्यों की जांच के बाद पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिले। शिलॉन्ग की ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने बताया कि शुरुआती परिस्थितियों और मिली जानकारियों के आधार पर गिरफ्तारी की गई थी। बाद में जांच और वेरिफिकेशन में उनकी भूमिका साबित नहीं हो सकी। इसी कारण दोनों को दोषमुक्त कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी और राज कुशवाह सहित अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में क्यों कमजोर पड़ी पुलिस की दलील? विस्तृत जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की संलिप्तता से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले। बिजली बिल, किराया एग्रीमेंट और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि गार्ड या बिल्डिंग मालिक ने जानबूझकर किसी साक्ष्य को नष्ट किया हो। शिलॉन्ग के ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिगम ने अदालत में बताया कि शुरुआती परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बाद की जांच में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। शिलॉन्ग में खाई में मिला था राजा का शव इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम के साथ शादी हुई थी। 20 मई को राजा और सोनम हनीमून के लिए इंदौर से मेघालय रवाना हुए थे। 22 मई को दोनों सोहरा की यात्रा पर निकले थे। उन्होंने एक एक्टिवा भी किराए पर ली थी। पेड़ काटने वाले हथियार से की गई राजा की हत्या 24 जून को राजा-सोनम से परिवार का संपर्क टूट गया था। 27 मई से दोनों की सर्चिंग शुरू की गई। 29 मई को तेज बारिश के कारण सर्चिंग रोकनी पड़ी थी। इसके बाद 30 मई को दोबारा सर्चिंग शुरू की गई। 2 जून को खाई में राजा का शव मिला। 3 जून को राजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले हथियार से की गई थी। सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली इसके बाद पुलिस सोनम की तलाश में जुट गई। 9 जून को सोनम यूपी के गाजीपुर स्थित एक ढाबे पर मिली थी। इसके बाद परत-दर-परत मामले में कई खुलासे हुए। इन खुलासों ने रघुवंशी परिवार सहित सभी को चौंका दिया था। इसमें मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कहां रुके थे सोनम और विशाल? पुलिस जांच में सामने आया था कि राजा की हत्या के बाद सोनम रघुवंशी और विशाल चौहान कुछ समय के लिए इंदौर के लसूड़िया क्षेत्र स्थित एक बिल्डिंग में ठहरे थे। यह बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर शिलॉम जेम्स के किराए की बताई गई थी, जिसे ब्रोकर के माध्यम से लिया गया था। कमरे का एग्रीमेंट विशाल चौहान के नाम पर हुआ था। इसी कड़ी में गार्ड और बिल्डिंग मालिक की भूमिका की जांच की गई, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की 11 मई को सोनम से शादी हुई थी। 20 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए। 22 मई को वे सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र घूमने निकले, जहां 2 जून को राजा का शव एक खाई में मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसकी हत्या पेड़ काटने वाले धारदार हथियार से की गई थी। मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी, राज कुशवाह और अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का संदेश, केंद्रीय राज्यमंत्री ने रखा देश का दृष्टिकोण और विकास संकल्प

धार   संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत की ओर से महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार जिले से सांसद सावित्री ठाकुर ने सामाजिक न्याय, समावेशन एवं सतत विकास से जुड़े वैश्विक विषयों पर भारत का सशक्त पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, भारत का विकास दृष्टिकोण 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' की भावना पर आधारित है, जिसमें समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सांसद सावित्री ठाकुर ने महिलाओं, बच्चों, वंचित वर्गों, दिव्यांगजनों और कमजोर तबकों के सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, नीतिगत पहलों और नवाचारों को साझा किया। मंत्री ठाकुर ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' का संकल्प सिर्फ आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा, समान अवसर, लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के साथ हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। महिला सशक्तिकरण, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देगा मंत्री ठाकुर ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भारतीय दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अपने समावेशी विकास के अनुभवों को विश्व समुदाय के साथ साझा कर वैश्विक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत मानता है कि सतत और समावेशी विकास ही विश्व शांति, स्थिरता और समृद्धि का आधार है। अंत में मंत्री ठाकुर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के मंच पर सामाजिक विकास के वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा और मानव कल्याण को केंद्र में रखकर वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देगा।  

फार्मर आईडी और प्राकृतिक खेती पर दिया जाए विशेष ध्यान

फार्मर आईडी और प्राकृतिक खेती पर दिया जाए विशेष ध्यान कलेक्टर की अध्यक्षता में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न बड़वानी  शासन द्वारा किसानों को समय पर एवं पारदर्शितापूर्वक उर्वरक उपलब्ध हो इस हेतु नवीन उर्वरक वितरण प्रणाली अंतर्गत ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन) लागू की गयी है। आगामी खरीफ सीजन में कृषकों को ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ई-टोकन द्वारा उर्वरक वितरण किया जाना, जिसके अनुरूप    कृषकों की फ़ॉर्मर आईडी अनिवार्य रूप से बनाई जाए । ताकि किसी भी कृषक को खाद प्राप्त करने में असुविधा न हो।      उक्त निर्देश कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह बुधवार कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं एवं कार्याे की विस्तृत समीक्षा बैठक के दौरान दिए।  बैठक में जिले के शत-प्रतिशत किसानों की फार्मर आईडी बनाने के कार्य में गति लाने के निर्देश दिए, साथ ही स्पष्ट किया कि आगामी बैठक में लक्ष्य अनुरूप कार्य न करने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी की जवाबदेहिता तय कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।     प्राकृतिक कृषि को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे किसानों को रसायनों का उपयोग कम करने और जैविक खाद अपनाने हेतु प्रेरित करें। आत्मा योजना के अंतर्गत ब्लॉक लेवल पर पदस्थ बीटीएम साथ समन्वय कर नियमित रूप से फील्ड पर जाय एवं कार्य योजना को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।पीएम कृषक सूर्य मित्र योजना के अंतर्गत किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस योजना के तहत व्यापक प्रचार-प्रसार एव नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए। सोलर पंप के माध्यम से किसान न केवल सिंचाई की लागत कम कर सकेंगे, बल्कि ऊर्जा संरक्षण में भी योगदान देंगे।      बैठक में संयुक्त कलेक्टर श्री रवि वर्मा उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विभाग श्री केसी वास्कले, एसएलआर श्रीमती शीतल सोलंकी सहित कृषि विभाग का समस्त मैदानी अमला उपस्थित रहा।

जनकपुर मण्डल में शुभम सिंह बने नए अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा में खुशी की लहर

जनकपुर  जनकपुर मण्डल के भारतीय जनता युवा मोर्चा के नवनियुक्त मण्डल अध्यक्ष शुभम सिंह जी को बनाये जाने से युवावों मे काफ़ी खुशी की लहर नजर आ रहीं हैँ समस्त युवा मोर्चा एवं मण्डल पदाधिकारियो द्वारा शुभम जी को बधाई शुभकामनायें दिया गया जिनकी सफर पूर्व मे बूथ सचिव, के दायित्व मे रहकर अपने कार्य का निर्वाहन करते आ रहे थे साथ ही बजरंग सेना के ब्लॉक अध्यक्ष एवं विश्व हिन्दू परिषद मे गौ रक्षा प्रमुख के दायित्व मे रहकर लोगो के बीच सुख दुख मे हमेशा तात्पर्य रहकर युवाओ के चहेते भी बन चुके हैँ ऐसे शुभम सिंह जी भाजपा संगठन के हर कार्य बैठक मे अपनी उपस्थिति व निष्ठाभाव से संगठन का कार्य करते नजर आ रहे थे जिन्हे देखते हुए सम्मानीय जिलाध्यक्ष श्रीमति चम्पादेवी पावले जी, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष श्री अंकित शर्मा जी, मण्डल अध्यक्ष नरेश यादव एवं मण्डल के समस्त वरिष्ठ जनो के नेतृत्व मे युवा मोर्चा मण्डल अध्यक्ष का दायित्व शुभम सिंह जी को सौंपा गया जिसके लिए शुभम सिंह जी द्वारा समस्त जिला पदाधिकारी एवं मण्डल पदाधिकारियो व समस्त वरिष्ठ कारकर्ताओ का आभार व्यक्त करते हुए कहा की जिस तरह भाजपा संगठन मुझ पर भरोसा कर मण्डल अध्यक्ष का दायित्व सौंपा हैँ मै भरोसा दिलाता हूँ की मै पूर्ण निष्ठा भाव. एवं ईमानदारी से वरिष्ठ पदाधिकारियों के मार्गदर्शन के साथ अपने युवा मोर्चा के सभी साथियो के साथ मिलकर काम करूँगा।

मोहन सरकार की नई गाइडलाइन: अफसर छुट्टी पर नहीं जा सकेंगे, मुख्यालय से दूरी पर लगेगा पाबंद

भोपाल  मध्यप्रदेश में विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त शिकंजा कस दिया है। सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय (Headquarters) नहीं छोड़ेगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा, जिसमें राज्य का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा। सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने और विधानसभा प्रश्नों के समय पर जवाब सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ा तो एक्शन तय विधानसभा सत्र को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।  आदेश के मुताबिक— अधिकारी किसी भी हाल में बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे.. अपरिहार्य स्थिति में अपर कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य,अवकाश के लिए भी पूर्व स्वीकृति जरूरी,नियम तोड़ने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। विधानसभा प्रश्नों पर खास फोकस सरकार ने विधानसभा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए — नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश, विधानसभा प्रश्नों के तत्काल और सही उत्तर भेजने की जिम्मेदारी ,जिला कार्यालयों में कंट्रोल रूम स्थापित करने के आदेश जारी किए हैं। स्पष्ट किया गया है कि प्रश्नों के जवाब में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का साफ संदेश सरकार का स्पष्ट संदेश है — बजट सत्र के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहेगा। मुख्यालय से गैरहाजिरी अब नहीं चलेगी। लापरवाही पर सीधा एक्शन होगा।

राजस्थान निकाय चुनाव अपडेट: MP से EVM किराए पर, करार पर हुई मुहर

 ग्वालियर राजस्थान राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें किराए पर लेगा. प्रदेश के चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि EVM की उपलब्धता के संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्य चुनाव आयोगों के बीच एक अतिरिक्त MoU साइन किया गया है. उन्होंने कहा कि MoU के तहत, मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में इस्तेमाल के लिए राजस्थान को किराए पर 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट देगा. उन्होंने कहा कि EVM की सप्लाई, इस्तेमाल, रखरखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तों को भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया- MOU के तहत मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावों के लिए कुल 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर उपलब्ध कराई जाएंगी। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम मशीन। (फाइल फोटो) इन्होंने कहा कि इन ईवीएम का उपयोग प्रदेश में नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा। ईवीएम की आपूर्ति, उपयोग, रख-रखाव, सुरक्षा और वापसी से संबंधित सभी शर्तें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सुनिश्चित की जाएंगी। ईवीएम के तकनीकी परीक्षण (एफ.एल.सी.), मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सहयोग का काम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद के अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा। राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों आयोगों के बीच EVM की उपलब्धता और इस्तेमाल पर पहले हुई सहमति का ही विस्तार है. चुनाव अधिकारी ने कहा कि EVM की सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और संचालन की व्यवस्था निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुनिश्चित की जाएगी और मशीनों के लिए टेक्निकल टेस्टिंग (फर्स्ट-लेवल चेकिंग), मरम्मत और जरूरी टेक्निकल सपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद के इंजीनियर करेंगे.

पीड़ितों को 1 करोड़ की सहायता और निगम में नौकरी चाहिए, भागीरथपुरा में आवाज उठी

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार हुए लोगों और जान गवाने वालों के परिजन को न्याय दिलाने की मांग उठाते हुए कांग्रेस ने शहर के राजबाड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन 32 लोगों के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए, जिनकी मौत उल्टी-दस्त से ग्रस्त होने से हुई है। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि, सरकार पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजा दें। नगर निगम में परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। अगर ये मांग पूरी नहीं होती है तो 8 दिन के बाद कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जनता से निवेदन कर पूरा इंदौर बंद कराएगी। इंदौर में बनाई जाएं दो वाटर लैब शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि, दो वाटर लैब हर तैयार की जाए। कार्यकर्ता का यह दायित्व है कि घर-घर जाकर उस पानी के सैंपल लेकर जांच कराएं। भागीरथपुरा में रहने वाले छह माह के अव्यान साहू की मां ने कहा, इंदौर के दूषित पानी ने मेरे बेटे की जान ले ली। अन्य परिवारों ने भी उनकी परेशानी बताई। कई परिवारों ने कहा कि, अभी तक सहायता तक नहीं मिल सकी। धरना स्थल पर पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना सेतिया, विपिन वानखेड़े, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, उषा नायड़, अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी, शेख अलीम, पंडित कृपा शंकर शुक्ला, सत्यनारायण पटेल समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि, हर परिवार की अपनी वेदना है। शहरवासियों ये महसूस करो कि, हमारे घर ये त्रासदी आ जाती तो क्या होता? जिन्हें हमने कुर्सी दी, वोट दिया उनसे सवाल करना जरूरी है। अब पानी से किसी की मौत न हो इसके लिए सभी को जागना जरूरी है। संसद तक इस मामले कि गूंज उठ चुकी है। देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री, सुमित्रा महाजन और शिवराज सिंह चौहान ने सवाल क्यों नहीं पूछा? जिस पानी को हम जीवन देने का माध्यम मानते हैं, उस पानी का जहर इंदौर नगर निगम ने लोगों को पिला दिया। ये सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, व्यवस्था का पतन है। सवाल पूछा तो बोले- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं पटवारी ने कहा- भागीरथपुरा में जो हुआ वो पूरे इंदौर और पूरे प्रदेश के पानी की स्थिति है। जनता का जीवन इतना सस्ता है कि, दो लाख रुपए देकर सबने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर दिया। उन परिवारों को लालच दिया गया कि, आवाज मत उठाना, एक भी शब्द कहा तो सहायता नहीं मिलेगी। सज्जन सिंह वर्मा और प्रतिनिधि मंडल को काले झंडे दिखाए गए। आखिर कैसा शहर बन रहा है हमारा इंदौर ? जब हम सवाल पूछते हैं तो मंत्री कहते हैं- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं। दो हजार करोड़ रुपए की बन गई नकली फाइल जीतू पटवारी ने कहा, निगम में 2 हजार करोड़ रुपए की नकली फाइल बन गई। उनके पैसे भी निकल गए। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, लेकिन आरोपी कोई नहीं है। एक भी राजनीतिक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं। महापौर की साइन से फाइल बनती है। एमआइसी की साइन से फाइल बनती है। पार्षद फाइल पर साइन कर आगे बढ़ाते हैं। अधिकारी उसे आगे बढ़ाते हैं तो राजनीतिक लोगों की 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं? ये रुपए जनता के ही थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि, हमने इंदौर की जनता से आह्वान किया था कि, न्याय के लिए आएं। इस दौरान उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा देने की मांग की। साथ हीये भी कहा कि, कांग्रेस न्याय के लिए हमेशा लड़ती रहेगी। जिस शहर के सीएम खुद प्रभारी, वहां नहीं रुक रहीं मौतें- रीना सेतिया महिला प्रदेश अध्यक्ष रीना सेतिया ने कहा कि, 9 विधायक, 2 मंत्री, महापौर भाजपा के हैं। सीएम खुद इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, बावजूद इसके शहर को जहरीला पानी मिला। इंदौर में लगातार मौतें हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम इन पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त करते हैं और उनके न्याय के लिए लंबी लड़ाई भी लड़नी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।

सरकारी आवास नियम सख्त, तबादले के बाद 6 महीने में खाली नहीं किया तो देना होगा भारी जुर्माना

भोपाल  मध्यप्रदेश में शासकीय आवासों को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं चलेगी। राजधानी भोपाल से तबादला होने के बाद अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय तक सरकारी आवास पर कब्जा नहीं रख सकेंगे। गृह विभाग ने शासकीय आवास नियमों में संशोधन करते हुए सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है, जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी पर समान रूप से लागू होगी। 6 माह की सीमा, उसके बाद कड़ा एक्शन नए आदेश के अनुसार, भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने की स्थिति में शासकीय सेवक अधिकतम 6 माह तक ही सरकारी आवास रख सकेगा। इस अवधि में सामान्य किराया लिया जाएगा 6 माह के बाद आवास खाली नहीं करने पर दंडात्मक किराया वसूला जाएगा.. साथ ही जबरन बेदखली की कार्रवाई की जाएगी..दंडात्मक किराया 90 हजार रुपये तक हो सकता है। कैबिनेट के फैसले के बाद मचा हड़कंप यह फैसला पहले ही कैबिनेट में लिया जा चुका है। इसके बाद कई विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए। कुछ अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके बच्चे भोपाल में पढ़ रहे हैं, इसलिए समय दिया जाए, लेकिन गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सभी के लिए बराबर हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित राहत सेवानिवृत्ति की स्थिति में कर्मचारियों को कुल 6 माह की सशर्त अनुमति मिलेगी— पहले 3 माह: सामान्य किराया अगले 3 माह: सामान्य किराए का 10 गुना 6 माह बाद भी आवास नहीं छोड़ा तो दंडात्मक किराया और बेदखली इस्तीफा या सेवा से पृथक होने पर सिर्फ 3 माह यदि कोई कर्मचारी— त्यागपत्र देता है सेवा से पृथक होता है. या अनधिकृत पाया जाता है, तो उसे केवल 3 माह तक ही सरकारी आवास में रहने की अनुमति होगी। इसके बाद तत्काल बेदखली और दंडात्मक वसूली की जाएगी। सरकार का मकसद साफ गृह विभाग का कहना है कि इन संशोधित नियमों का उद्देश्य — शासकीय आवासों के दुरुपयोग को रोकना वास्तविक जरूरतमंद अधिकारियों-कर्मचारियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना.. अब मियाद खत्म होते ही सख्त कार्रवाई तय है, किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। सरकारी आवास पर अनावश्यक कब्जा अब भारी पड़ेगा। तबादला, रिटायरमेंट या सेवा समाप्त—हर स्थिति में तय समय पर आवास खाली करना अनिवार्य होगा, वरना जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

इंदौर पुलिस ने संजय कालरा को किया गिरफ्तार, लग्जरी कार रेंटल घोटाले में बरामद हुई 39 महंगी कारें

 इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में लग्जरी कारों के नाम पर की जा रही करोड़ों रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने आरोपी संजय कालरा को गिरफ्तार कर अब तक 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है. आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है. दरअसल, पिछले दिनों एक फरियादी की शिकायत पर आरोपी संजय कालरा के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया था. जब आरोपी की गिरफ्तारी हुई तो उसके बाद कई लोग एक के बाद एक थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ आवेदन दिए. इसमें बताया गया कि संजय कालरा उनकी महंगी और लग्जरी कार किराए पर ले लेता था और हर महीने उन्हें मोटा मुनाफा देने का लालच भी देता था लेकिन कई महीनों तक आरोपी द्वारा कार का किराया तक नहीं दिया गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थान से 24 लग्जरी कार बरामद कीं.  साथ ही पुलिस ने आरोपी को रिमांड में लिया जिसमें और भी खुलासे हुए. वहीं कालरा पर दो और धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसके बाद पुलिस ने कुल 39 महंगी और लग्जरी कारें बरामद कर ली हैं. फिलहाल आरोपी की रिमांड अवधि और भी बढ़ाई जाएगी जिससे मामले का खुलासा हो सके. वहीं शिकायतकर्ताओं का थाने पहुंचना अब तक जारी है. आरोपी से जब्त की गई कारों की कीमत 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है जो उसने किराए पर ली थीं और उन्हें कहीं और  गिरवी रख दिया था.

ग्वालियर में कारों की ठगी का खुलासा, युवक ने 1.5 करोड़ की 17 कारें बनाई पुलिस के हाथों निशाना

ग्वालियर  ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने विभागों में लग्जरी वाहनों के अटैचमेंट के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट कर कारें हायर करके हड़पने वाले 23 वर्षीय जालसाज को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीए पास है और दो साल पहले तक टिफिन सेंटर चलाता था। इसके बाद उसने विभागों में गाड़ियों का अटैचमेंट कराने के नाम पर ठगी शुरू की। आरोपी अभय भदौरिया खुद को अवंटेक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर बताकर लोगों पर इंप्रेशन डालता था। फर्जी दस्तावेज बनाकर कंपनियों और विभागों के नाम पर लग्जरी कार हायर करने के बाद वह इन्हें दो से पांच लाख रुपए में गिरवी रख देता था। इसके लिए वह फेक मालिक बनाकर दस्तावेज तैयार करता था। एक 7 सीटर कार का वह 85 हजार रुपए तक किराया देता था। इस तरह अब तक उसने 50 से अधिक कारें ठगने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर 17 कारें बरामद की हैं। कारों का किराया नहीं दिया तो पता चली ठगी शहर के शताब्दीपुरम फेस-1 निवासी भास्कर शर्मा ने सोमवार क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। भास्कर अपने ट्रेवल एजेंसी श्री मधुवन जी ट्रेवल्स के माध्यम से अन्य लोगों को वाहन सेवाएं देते हैं। उनके अनुसार, अभय भदौरिया ने खुद को अवंटेक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर बताकर उन्हें 7 सीटर कार के बदले 85 हजार रुपए और 5 सीटर कार के बदले 50 हजार रुपए देने का लालच दिया। भास्कर ने आरोपी को 19 कारें किराए पर दी, लेकिन अभय ने कारें सर्विस पर नहीं भेजीं और किराया भी नहीं दिया। जब भास्कर ने कंपनी में जाकर सत्यापित किया, तो पता चला कि अभय भदौरिया नाम का कोई भी व्यक्ति वहां काम नहीं करता है। बाद में भास्कर को पता हुआ कि अभय ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी कारें अन्य व्यक्तियों को गिरवी रखवा दी हैं। काफी दबाव डालने पर आरोपी ने कुछ कारें वापस की। इसी तरह रघुवीर रजक ने भी 20 कारें ठगे जाने की शिकायत की। पुलिस ने 1.5 करोड़ की कारें बरामद की है। पुलिस ने 1.5 करोड़ की कारें बरामद की है। 24 घंटे में गिरफ्तारी, 17 कारें बरामद मामला दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपी की लोकेशन और मोबाइल ट्रैकिंग के आधार पर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस मंगलवार को घटना का खुलासा किया। पहले आरोपी ने अपनी कहानी जारी रखी, लेकिन ट्रेवल एजेंसी के संचालक को सामने खड़े करने पर वह चुप हो गया। पुलिस ने जीपीएस ट्रैकिंग के माध्यम से 17 कारें बरामद की, जिनकी कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए बताई गई है। आरोपी ने कुल 39 कारें ठगी का दावा किया है, पुलिस को संदेह है कि 50 से अधिक कारों से उसने ठगी की है।     भास्कर शर्मा की कारें: मारूति अर्टिगा, टाटा अल्ट्रोज, मारूति सियाज, टोयोटा अर्बन क्रूजर, महिंद्रा बोलेरो, मारूति स्विफ्ट, महिंद्रा स्कॉर्पियो – कुल 8 वाहन     रघुवीर रजक की कारें: मारूति स्विफ्ट, रेनॉल्ट ट्रायवर, मारूति अर्टिगा, महिंद्रा बोलेरो – कुल 7 वाहन     कुल बरामद वाहन: 15, कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए कार का मालिक बताने वालों पर भी होगी कार्रवाई एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने कारें गिरवी रखीं, वे भी एक तरह से पीड़ित हैं। उनके साथ भी ठगी हुई है। कुछ लोगों ने खुद को कार का मालिक बताया था। उनके दस्तावेज जुटाकर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा कार्यालय मंडला में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती

भाजपा कार्यालय मंडला में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती   मंडला भारतीय जनता पार्टी जिला मुख्यालय में रविवार महान संत, समाज सुधारक एवं समता के प्रणेता संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्रदेश की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उईके एवं भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा संत रविदास जी के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उईके ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने विचारों और कृत्यों से समाज को समानता, बंधुत्व और मानवता का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हमें जाति, भेदभाव और असमानता से ऊपर उठकर एक समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार संत रविदास जी के विचारों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल मिश्रा ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के लिए आशा की किरण है। भारतीय जनता पार्टी उनके विचारों से प्रेरणा लेकर ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। आज की युवा पीढ़ी को संत रविदास जी के आदर्शों को अपनाकर सामाजिक समरसता को मजबूत करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने संत रविदास जी के बताए मार्ग पर चलने एवं समाज में समरसता, समानता और सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ संजय कुशराम, नगर अध्यक्ष रानू राजपूत, किसान मोर्चा अध्यक्ष श्री उमेश शुक्ला, वरिष्ठ कार्यकर्ता विनय मिश्रा, सुधीर कसार, मंडल अध्यक्ष ललित लोधी, शशि पटेल, अंशुमाली शुक्ला,सौरभ गुप्ता, मयंक विश्वकर्मा, बसंत चौधरी, दिनेश चौधरी, सचिन शर्मा,उमा यादव, बबीता अधिकारी, ज्योति मलिक,रितु भांगरे,नरेश सिंधिया, सावन चौरसिया,सत्यम मिश्रा, अंकित चौरसिया,विकास यादव, सुदीप चौरसिया,कैलाश जैन, सुरेंद्र क्षत्री ऋषभ सिन्हा सहित भाजपा कार्यकर्तागण उपस्थिति रहे ।

एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है।  बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ। राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है।

नर्मदा की सुरक्षा पर हाई अलर्ट, NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस

भोपाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने पर्यावरण के प्रधान सचिव को नर्मदा नदी को साफ रखने के लिए दिए गए निर्देशों पर एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट विभिन्न एजेंसियों, विभागों, जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों से संकलित की जाएगी। NGT ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। नर्मदा को जीवन रेखा बनाए रखने के लिए निर्देश NGT ने नर्मदा नदी के बाढ़ क्षेत्र को चिह्नित करने, उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, नदी में बिना उपचारित सीवेज और ठोस कचरा बहाने पर रोक लगाने, अवैध रेत खनन बंद करने और पूरे साल नदी के प्रवाह को स्थिर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा बनाए रखने के लिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई यह अनुपालन रिपोर्ट 1 सितंबर, 2025 को NGT द्वारा जारी आदेश के अनुसार तैयार की जानी है। यह रिपोर्ट याचिकाकर्ता कीर्ति कुमार सदाशिव भट्ट की याचिका पर आधारित है। रिपोर्ट को NGT के रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा, जो इसे ट्रिब्यूनल के सामने पेश करेंगे। इसके बाद, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निष्पादन याचिका पर सुनवाई NGT ने यह टिप्पणी जबलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पी.जी. नज्पांडे द्वारा दायर एक निष्पादन याचिका पर सुनवाई करते हुए की। NGT यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके द्वारा जारी किए गए निर्देशों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं। इसी के लिए NGT ने अब मुख्य सचिव (पर्यावरण) को इस मामले में निर्देशित किया है।  

240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही केन्द्र सरकार – डॉ. महेन्द्र सिंह

 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में समग्र भारत के चतुर्दिक विकास का बजट प्रस्तुत किया गया  केंद्रीय बजट जनता के प्रति सरकार के कर्तव्यों को पूरा करने वाला डॉक्यूमेंट   240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही केन्द्र सरकार  – डॉ. महेन्द्र सिंह भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने मंगलवार को सागर में केंद्रीय बजट को लेकर व्यापारी व प्रबुद्धजन संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया भोपाल/सागर   भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मंगलवार को सागर जिले के होटल वरदान में केंद्रीय बजट-2026 को लेकर आयोजित व्यापारी व प्रबुद्धजन संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में समग्र भारत के चतुर्दिक विकास का बजट प्रस्तुत किया है। केंद्रीय बजट 2026 देश की जनता के प्रति सरकार के कर्तव्यों को पूरा करने वाला डॉक्यूमेंट है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ केंद्र सरकार देश की 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आजाद भारत के बाद यह पहला बजट है जब कर्तव्य भवन में बैठकर तीन कर्तव्यों वाला बजट बनाया गया है। कार्यक्रम को प्रदेश शासन के मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री व विधायक श्री गोपाल भार्गव, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन एवं जिला अध्यक्ष श्री श्याम तिवारी ने भी संबोधित किया। इस दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री गौरव रणदिवे मंचासीन रहे।  प्रधानमंत्री जी भारत के पुराने वैभव को वापस दिलाने, विश्व गुरू बनाने के लिए कार्य कर रहे भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत के पुराने वैभव को वापस दिलाने, देश को विश्व गुरू बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के देश पढ़ना नहीं जानते थे, तब भारत में तक्षशिला विश्वविद्यालय था। दुनिया में सबसे पहले भारत में वेदों की रचना की गई। सनातन काल से भारत व्यापार में अग्रणी रहा है, इसीलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रिक देश भारत है। विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हमारे देश के प्रभारी श्री नरेन्द्र मोदी जी हैं। प्रधानमंत्री जी भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना चुके हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्त में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।  भारत विश्व के सबसे संपन्न देशों से विकास में सीधा मुकाबला कर रहा है भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत विश्व के सबसे आर्थिक संपन्न व विकसित राष्ट्रां का विकास में सीधा मुकाबला कर अपना स्थान वैश्विक स्तर पर बना रहा है। अमेरिका में भारत से कई गुना अधिक खेती की जमीन है। इसके साथ ही अमेरिका की जनसंख्या भी भारत से बहुत कम है। भारत की जनसंख्या लगभग 145 करोड़ है, जबकि अमेरिका की जनसंख्या लगभग 35 करोड़ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की उनकी परिकल्पना से हमारा देश आज विश्व के सबसे बड़े और विकसित देशों का विकास के मामले में सीधा मुकाबला कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में भारत का बजट 16.65 लाख करोड़ का प्रस्तुत किया गया था। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने 17.95 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत किया। इस साल 53 लाख 50 हजार करोड़ का बजट केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह बजट राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देश को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। पद्मश्री भगवानदास रैकवार के निवास पहुंचकर किया सम्मान भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मार्शल आर्ट्स के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार हेतु चयनित श्री भगवानदास रैकवार से उनके निवास पर भेंटकर उन्हें आत्मीय बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने इससे पहले प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री व विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह के निवास पहुंचकर भगवान श्री हनुमान जी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री रामकथा में शामिल होकर श्रवण किया। 

इंदौर पुलिस का नया ट्रैफिक कैंपेन: चौराहे पर 6-7 फीट ऊंचा हेलमेट, पर्यावरण और सुरक्षा का संदेश

इंदौर वाहन चालकों को हेलमेट के प्रति जागरूक करने के लिए इंदौर की ट्रैफिक पुलिस द्वारा रोजाना अलग-अलग तरह के जतन किए जा रहे हैं. जहां इंदौर के विभिन्न चौराहों पर पुलिस द्वारा हेलमेट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है. वहीं दूसरी ओर हेलमेट के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में अब इंदौर पुलिस द्वारा वेस्ट मटेरियल के माध्यम से हेलमेट बनाए गए हैं. जिसे लेकर पुलिस जनता को जागरूक कर रही है. वेस्ट मटेरियल से बनाया हेलमेट इंदौर पुलिस हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रोजाना अलग-अलग तरह के अभियान चला रही है. इसी कड़ी में इंदौर की ट्रैफिक पुलिस ने तकरीबन 6 से 7 फीट ऊंचा एक हेलमेट बनाया है. इस हेलमेट की खासियत यह है कि इसे वेस्ट मटेरियल के माध्यम से तैयार किया गया है. इसे बनाने के लिए वेस्ट मटेरियल में मुख्य रूप से कार और बाइक में से निकले हुए विभिन्न तरह के उपकरणों का प्रयोग किया गया है. इसे बनाने में तीन से चार लोगों की टीम के द्वारा दो से तीन सप्ताह में बनाया गया है. चौराहों पर लगाया जाएगा हेलमेट इसे पूरी तरीके से हेलमेट की तरह बनाया गया है, फिलहाल इस वेस्ट मटेरियल से तैयार हेलमेट को इंदौर के पलासिया चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रखा गया है. आने वाले दिनों में इसे अन्य चौराहों पर भी लगाया जाएगा. वाहन चालकों को इसके माध्यम से भी हेलमेट लगाने के प्रति जागरूक किया जाएगा. इंदौर ट्रैफिक पुलिस का अनूठा प्रयास इंदौर में पुलिस हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रोज चालानी कार्रवाई करने के साथ ही उन्हें जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है. इसी कड़ी में इंदौर की ट्रैफिक पुलिस के द्वारा इस तरह का अनूठा प्रयास किया है. इंदौर की ट्रैफिक पुलिस के इस तरह के प्रयास करने से अब वाहन चालक हेलमेट के प्रति कितने जागरूक होते हैं यह देखने लायक रहेगा.

अनोखी खोज: IIIT DM छात्र ने विकसित किया यंत्र, पसीने से स्वास्थ्य जांच संभव

जबलपुर  आजकल यूथ एक से बढ़कर एक एक्सपेरीमेंट कर रही है, जो सफल भी हो रही है. खास बात यह है कि उनका यह इनोवेशन आम लोगों के लिए भी होता है. जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में काम कर सकता है. कुछ इसी तरह का कमाल जबलपुर ट्रिपल आईटी डीएम (IIITDM) कॉलेज के एक छात्र ने कर दिखाया है. छात्र ने आम एलाइनमेंट स्वेट बैंड बनाया है. यह डिवाइस पसीने में होने वाले परिवर्तन से शरीर में होने वाली बीमारी की जानकारी दे देगा. छात्र की इस खोज को पेटेंट भी मिल गया है. पसीने से बीमारी पता लगाने वाली डिवाइस का आया ख्याल जबलपुर में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन इन मैन्युफैक्चरिंग (IIITDM) जबलपुर केंद्र सरकार के इस कॉलेज में इंजीनियरिंग के 2700 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. इसी संस्थान के एक छात्र मयूर पाटील ने एक आइडिया तैयार किया. जिसमें मयूर ने देखा कि अभी तक मानव शरीर में बीमारियों की जांच के लिए खून का इस्तेमाल किया जाता है. मयूर ने मेडिकल की कुछ पुस्तक पढ़ी थी. जिसमें उसने पाया था कि बीमारी के दौरान जिस तरह खून में परिवर्तन होता है. उसी तरह का परिवर्तन पसीने में भी आता है और पसीने के माध्यम से भी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इसके बाद मयूर पाटील ने जानकारी ली कि क्या अभी कोई ऐसी डिवाइस है, जिसे पसीने के जरिए शरीर में होने वाले परिवर्तन का पता लगाया जा सके. मयूर का आइडिया आया पसंद मयूर पाटील ने यह बात कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अविनाश रविराजन से चर्चा की. मयूर पाटील ने एक सिनॉप्सिस जमा की. जिसमें उन्होंने एक स्वेट बैंड के बारे में जानकारी दी. वह एक इस तरह का स्वेट बैंड बनाना चाहते हैं. जिसे शरीर पर लगाने के बाद वह पसीने के आधार पर एक डेटाबेस तैयार करेगा. उसके बाद यदि पसीने में कोई परिवर्तन होता है, तो उसकी जानकारी मिलेगी और शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज भी इसके जरिए देखे जा सकेंगे. मयूर पाटील का आइडिया डॉक्टर अविनाश रवि राजन को पसंद आया. उन्होंने एक टीम के जरिए तैयारी शुरू की. मयूर पाटील ने बताया कि "हमने लंबी तैयारी के बाद एक घड़ीनुमा बेल्ट और कई सेंसर लगाए, जिनमें नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन्हें शरीर के उसे हिस्से पर लगाया गया. जहां का पसीना हमें टेस्ट करना है. लंबी मेहनत के बाद स्वेट बैंड तैयार हो गया." R एलाइनमेंट बैंड डॉ अविनाशा रवि राजन ने बताया कि "हमने इस बैंड का नाम आर एलाइनमेंट बैंड रखा है. इसमें 3 लेयर तैयार की गई है, इसमें लगे कैपेसिटर पसीने से चार्ज होते हैं. फिर उससे मिले डाटा को मैग्नीफाइंग डिवाइस में डालकर पहले से प्रूवन डाटा से मैच किया जाता है. इसमें पसीने की पीएच वैल्यू भी देखी जाती है. हमने इसे आर्म के लिए तैयार किया था, लेकिन इस शरीर के किसी भी दूसरी ग्रंथि के लिए तैयार किया जा सकता है, क्योंकि हर ग्रंथि से अलग किस्म का पसीना निकलता है. बिना नुकसान पहुंचाए, शरीर की परेशानी बताएगा बैंड उन्होंने बताया कि यह एक किस्म का प्रेडिक्शन मॉडल है, लेकिन इसमें शरीर को बिना हानि पहुंचाए इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि इससे निकलने वाली किसी जानकारी से शरीर के किसी परिवर्तन का पता लगता है, तो उसकी जांच आगे की जा सकती है. सामान्य लोगों के साथ ही यह एथलीट के लिए बहुत काम का है. मयूर पाटील का कहना है कि बैंड बनाने के बाद हमने इसका मेडिकल टेस्ट भी शुरू किया. जबलपुर के कई जाने-माने डॉक्टर के साथ इसका टेस्ट किया गया. उन सभी ने हमें जो रिपोर्ट दी, उसने हमारा हौसला बढ़ाया. बैंड का मिला पेटेंट डॉ अविनाश रवि राजन ने बताया कि "बैंड तैयार होने के बाद इसे पेटेंट के लिए भेजा गया. बहुत जल्दी ही हमारी इस खोज को पेटेंट भी मिल गया." मयूर पाटील ने बताया कि "इस आर्म एलाइनमेंट बैंड की वजह से उन्हें बहुत इज्जत मिली. देश के कई जाने-माने प्रोफेसर ने उनकी खोज की सराहना की. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बेंगलुरु से इस खोज को सेकंड प्राइज मिला है. इसके साथ ही डीआरडीओ के डायरेक्टर ने भी इस खोज की सराहना की है. फिलहाल यह बैंड लगभग ₹30000 की लागत में तैयार हुआ था, लेकिन अब भी इसकी लागत कम करने वाले हैं, हालांकि अभी उनकी पढ़ाई चल रही है, लेकिन उनकी कोशिश इसे एक स्टार्टअप बनाने की है. यह बैंड स्वस्थ आदमी को पहले ही अलर्ट कर देगा कि उसके शरीर में कोई तकलीफ आने वाली है."

एमपी में नया पर्यटन प्रोजेक्ट: कच्छ की तरह टेंट सिटी, शहर में बढ़ेगी पर्यटक संख्या

उज्जैन  गुजरात के कच्छ में रण उत्सव चल रहा है। इसमें दुनिया भर के लाखों लोग शामिल हो रहे हैं, जिन्हें टेंट सिटी मॉडल खूब लुभा रहा है। वहीं टेंट सिटी मॉडल को मप्र सरकार भी उज्जैन सिंहस्थ और राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए अपनाएगी। ताकि इन स्थलों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने की सुविधा और स्थानीय लोगों, कलाकारों, युवाओं, समुदायों के लोगों को स्वरोजगार तथा रोजगार से जोड़ा जा सके। सीेम मोहन यादव ने दी सहमति मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर सहमति दे दी है। वे सोमवार को रण उत्सव में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने बाहर से आने वाले लोगों की सुविधाओं के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखा, इसके बाद राज्य के अधिकारियों से चर्चा की। गैस पीड़ितों की याद में बनाएंगे स्मारक गुजरात के भुज में भूकंप ने बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया। वहां के पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजने व मानवीय संवेदना को सहेजने के लिए स्मृति वन बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठीक उसी तरह भोपाल में भी गैस पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करेंगे।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वाटर पार्क विवाद: हाईकोर्ट ने पूछा केंद्र-राज्य का रुख, प्रदूषित पानी का मामला गरम

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में वाटर पार्क के संचालन को लेकर जवाब-तलब किया है। इस सिलसिले में केंद्र व राज्य सरकार, एनटीसीए, मुख्य वन संरक्षक बांधवगढ़ सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी। जनहित याचिकाकर्ता शास्त्री नगर, जबलपुर निवासी पर्यावरण प्रेमी अभिषेक पाठक की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील एवं प्रचुर संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विगत दो-तीन सालों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं खतरनाक ढंग से बढ़ी हैं। इस दौरान 12 हाथी, कई बाघ, तेंदुए, हिरण, सांभर, नीलगाय व बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हुई है। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व के पर्यावरण संवेदी कोर एरिया से लगे प्रतिबंधित जोन में कैलाशजी वाटर पार्क नाम से जल आधारित मनोरंजन सुविधा का संचालन आरंभ किया गया है। जहां स्विमिंग पूल हैं तथा कई वाटर स्पोर्ट्स होते हैं। वाटर पार्क से हजारों लीटर केमिकल युक्त खराब पानी समीपी वन भूमि में छोड़ा जाता है। यह पानी वन्य भूमि व भूजल को प्रदूषित कर रहा है। वन्य जीवों, पेड़ों व वनस्पतियों को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है। आसपास के परंपरागत जल स्रोत भी प्रदूषित हो गए हैं। दुर्गंध आने के कारण वन्यजीव दूर भाग रहे हैं। ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण मंडल व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से वाटर पार्क के निर्माण के पूर्व एनओसी नहीं ली गई। उक्त वाटर पार्क के संचालक पर रोक लगाने की मांग की गई। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद महानिदेशक फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रमुख सचिव, बांधवगढ़ मुख्य वन संरक्षक, बायोडायवर्सिटी बोर्ड मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर फील्ड बायोलॉजिस्ट, रेंजर एवं कैलाशजी बालाजी वाटर पार्क के संचालक कैलाश छतवानी से जवाब मांगा गया है।

चंबल में 1000 साल पुराना शिव मंदिर, खंभों की गिनती नहीं हुई पूरी, भूतों की मान्यता से जुड़ा

मुरैना देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में ऐसे कई स्मारक, महल और किले हैं, जो अपनी अद्भुद वास्तुकला के लिए विश्वविख्यात हैं। इनके अलावा भी अभी बहुत कुछ है, जो देखने के लिए बचा हुआ है। ऐसा ही एक मंदिर, जिसे भूतों का मंदिर भी कहते हैं, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया में स्थित है। इस मंदिर का प्रचलित नाम ककनमठ है और यह अपनी रहस्यमयी किवदंतियों और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। क्यों खास है यह मंदिर? ककनमठ मंदिर की स्थापत्य कला 10वीं शताब्दी के समकक्ष मानी जाती है। इसलिए माना जा सकता है कि यह लगभग एक हजार साल पुराना है। यह गुर्जर-प्रतिहार शैली का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर विशालकाय पत्थरों से बना है और इसका शिखर हवा में तैरता हुआ प्रतीत होता है। भले ही मंदिर आज भग्नावस्था में है, लेकिन यहां की मूर्तियां आज भी मंत्रमुग्ध कर देती हैं। दीवारों और छतों पर देवी-देवताओं और पौराणिक जीवों की नक्काशी की गई है। मंदिर में गर्भगृह, स्तंभयुक्त मंडप और आकर्षक मुखमंडप है, जिसमें चूना, मिट्टी या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। किसने बनवाया यह मंदिर? इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात राजवंश की रानी ककनवती के आदेश पर हुआ था और उन्हीं के नाम पर इसका नाम ककनमठ पड़ा। स्थानीय लोगों और आस पास के इलाकों में एक किवदंती यह भी प्रचलित है कि इसे भूतों ने एक रात में बनाया। एक और कहानी के अनुसार, भूत मंदिर बना रहे थे तभी एक महिला ने चक्की चलाना शुरू कर दिया, जिससे डरकर भूत अधूरा काम छोड़कर भाग गए। तभी से यह मंदिर आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी इन कहानियों को कल्पना और लोककथाएं बताते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंदिर से जुड़ी हैं दिलचस्प किवदंतियां स्थानीय लोगों का मानना है कि सूरज ढलने के बाद इस मंदिर पर भूतों का कब्जा हो जाता है और यहां अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती हैं। एक और किवदंती के अनुसार, जिस दिन इस मंदिर के सामने से नाई जाति के नौ काने दूल्हे बारात लेकर निकलेंगे, उस दिन यह मंदिर गिर जाएगा। हालांकि, ये किंवदंतियां स्थानीय मान्यताओं और अंधविश्वासों पर आधारित हैं। इस मंदिर को लेकर एक अजीबोगरीब किवदंती है कि सूर्यास्त के बाद यहां रुकने वाले को भयानक दृश्य दिखाई देते हैं, जिससे रूह कांप जाती है। इसी डर से लोग रात में यहां नहीं रुकते। मंदिर के खंभों को गिनना रहस्य मंदिर की बनावट में पत्थरों को बिना किसी मसाले के जोड़ा गया है और इसके खंभों की गिनती करना भी एक रहस्य है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस मंदिर में मौजूद खंभों की आज तक कोई गिनती नहीं कर पाया। हर बार गिनती करने पर या तो संख्या बढ़ जाती है या घट जाती है। मंदिर में कई शिवलिंग और मूर्तियां भी मौजूद हैं, जो खंडित अवस्था में हैं। कैसे पहुंचते हैं ककनमठ मंदिर? यहां पहुंचने के लिए हवाई यात्रा करने वाले ग्वालियर आ सकते हैं, जो मंदिर से करीब 65-70 किलोमीटर दूर है। रेल और सड़क मार्ग से भी मुरैना पहुंचना आसान है। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए 325 किलोमीटर दूर मुरैना पहुंचा जा सकता है। मुरैना से बस या टैक्सी द्वारा करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

सनातन धर्म पर बड़ा बयान, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा—संतों की आपसी लड़ाई से नुकसान

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संतों के विवाद पर बोलने की हैसियत हमारी नहीं है, लेकिन साधु आपस में लड़कर जो निंदा कर रहे हैं, वह सनातन के लिए घातक है। सोमवार को इंदौर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हम अब तक संत नहीं बन पाए हैं क्योंकि हम आचरण से संत बनना चाहते हैं। ऐसी बात से हमारी ही हंसी होती है। दूसरों की निंदा करने की बजाय सनातनियों को स्वयं में सुधार करने की आवश्यकता है। सनातन परंपरा अमिट रहेगी और इसे कोई मिटा नहीं सकता है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक दिवसीय प्रवचन में शामिल होने के लिए मोहनखेड़ा जैन तीर्थ पहुंचे थे। इंदौर में मीडिया के सवालों का जवाब देते कहा कि आज नए मंदिर तो खूब बनाए जा रहे, लेकिन पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार नहीं किया जा रहा। पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार कर इनका वैभव लौटाए जाने की जरूरत है। उन्होंने बलि प्रथा को दूर करने की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि हमारे तीर्थ, देवालय आस्था का केंद्र बनने के बजाये पिकनिक स्पॉट बन रहे हैं। यह उचित नहीं है।

उपभोक्ताओं को मिल रही गुणवत्तापूर्ण एवं स्थिर वोल्टेज की बिजली

पुराने फाउंडेशन पर स्थापित किया गया अधिक क्षमता का कैपेसिटर बैंक एमपी ट्रांसको के आगर 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार उपभोक्ताओं को मिल रही गुणवत्तापूर्ण एवं स्थिर वोल्टेज की बिजली भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने आगर स्थित 132 के.वी. सब स्टेशन में तकनीकी नवाचार करते हुए पुराने कैपेसिटर बैंक के फाउंडेशन पर ही अधिक क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। क्षेत्र में इंडक्टिव लोड बढ़ने के कारण पूर्व में स्थापित 5 एमवीएआर क्षमता का कैपेसिटर बैंक लोड वहन नहीं कर पा रहा था। इससे वोल्टेज प्रोफाइल प्रभावित हो रही था। सीमित स्थान के कारण नए फाउंडेशन का निर्माण संभव नहीं था। तकनीकी नवाचार से निकला समाधान वोल्टेज प्रबंधन की चुनौती का समाधान करते हुए एमपी ट्रांसको के सहायक अभियंता श्री योगेश राठौर ने तत्कालीन कार्यपालन अभियंता श्री शेखर फटाले के मार्गदर्शन में पुराने फाउंडेशन का ही उपयोग कर आवश्यक तकनीकी संशोधन किए और उसी फांउडेशन पर 12 एमवीएआर क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक स्थापित किया। इससे समय और लागत कम होने के साथ ही क्षमता संवर्धन के लिये अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं पड़ी। इन क्षेत्रों को मिल रहा है लाभ कैपेसिटर बैंक की क्षमता बढ़ने से आगर 132 के.वी. सब स्टेशन से जुड़े 33 के.वी. के 9 फीडरों के हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर, स्थिर और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल रही है। लाभान्वित क्षेत्रों में मोया खेड़ा, कानड़, नलखेड़ा, निपानिया बैजनाथ, मडकोटा, थानोदला, आगर, झरड़ा एवं आगर टाउन शामिल हैं।  

18 फरवरी को MP का बजट 2026-27, फोकस में समावेशी विकास और नई योजनाएं

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में अपना तीसरा बजट पेश करेगी, जिसे वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। यह बजट रिकॉर्ड रकम और समावेशी विकास के एजेंडा के साथ तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य का अनुमानित बजट 4.63 लाख करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। जो पिछले बजट से करीब 10 फीसदी अधिक होगा। बताते चलें कि एमपी विधानसभा बजट सत्र 16 फरवरी को शुरू होने जा रहा है और 18 फरवरी को एमपी बजट पेश किया जाएगा। बता दें कि कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मोहन यादव ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तो 18 फरवरी को MP Budget 2026-27 में पता चल जाएगा। MP Budget 2026-27 का फोकस क्या या क्या हो सकता है खास?     कृषि और ग्रामीण विकास- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने वालीे योजनाओं पर     रोजगार सृजन- अनुमान जताया जा रहा है कि लगभग 50 हजार सरकारी नौकरियां निकाली जाएंगी।     युवा और कौशल- तकनीकी कौशल, उद्यमिता और नौकरियों के अन्य अवसरों पर जोर     महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं- महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं में वृद्धि की जा सकती है। केंद्रीय बजट 2026-27 – एमपी को क्या मिला? बता दें कि हाल ही पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का असर एमपी के बजट की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि वित्त आयोग के करों को लेकर नये फॉर्मूले के कारण एमपी को केंद्रीय कर हिस्से से करीब 7,500 करोड़ का नुकसान होने की उम्मीद है। रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एमपी को करीब 15,188 करोड़ का आवंटन किया गया है। नगर निगमों के लिए हरित बॉन्ड प्रोत्साहन में कमी कुछ शहरी वित्तीय प्रोत्साहन में एमपी नगर निकाय लाभ से वंचित रह सकते हैं।  उम्मीदें! विश्लेषकों का कहना है कि MP Budget 2026-27 राज्य की विकास यात्रा को तेज करने वाला बजट हो सकता है। यदि इसमें रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर पर्याप्त निवेश होता है, खासकर उस स्थिति में जब राज्य की कर हिस्सेदारी घट चुकी है। तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी रहेगा खास बताया जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी सदन में रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ये अनुपूरक बजट करीब 10 हजार करोड़ का हो सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अनुपूरक बटज में न तो किसी नई योजना के लिए प्रावधान होगा और न ही किसी विभाग को नये वाहन खरीदने के लिए राशि दी जाएगी। ऐसा कोई भी वित्तीय प्रावधान नहीं किया जाएगा। इससे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़े।

बागेश्वरधाम में युवतियों के लिए भव्य आयोजन, नेपाल की बेटी समेत 300 शामिल, शर्तों की घोषणा

छतरपुर  हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बागेश्वर धाम में कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस बार का महोत्सव इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है। नेपाल की भी एक बेटी का विवाह धाम से हो रहा है। रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री भेंट की। वहीं उन्हें समझ्या कि अंतरराष्ट्रीय विवाह सम्मेलन में उन्हें कैसे आना है, क्या पहनकर आना है। क्या सुविधाएं मिलेंगी और क्या घर से करना होगा? सामूहिक विवाह का खर्च बागेश्वर धाम की दानपेटी से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया "यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव होगा. आयोजन में पूरा खर्च धाम की दानपेटी से करते हैं. बागेश्वर धाम पर आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए जीवन बदल देने वाला अवसर होता है, जिनके परिवार आर्थिक कारणों से विवाह नहीं कर पाते. इस बार बागेश्वर धाम की ओर से 300 बेटियों के हाथ पीले कर विदाई कराने का लक्ष्य रखा गया है. आयोजन में देशभर के वर-वधु शामिल होते हैं." बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी की इस बार होने वाले सामूहिक आयोजन में बेटियों की बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी कर नामों की घोषणा की. बाबा बागेश्वर खुद आयोजन की देखरेख करते है. लिस्ट बनाने में समिति को करीब 2 माह का समय लगा है. फार्म जमा होना, टीम का घर-घर जाना, परीक्षण होना, 30 हजार किलामीटर 40 से ज्यादा लोगों ने यात्रा कर सूची बनाई है. इस आयोजन में देशभर की बेटियों के हाथ पीली किये जा रहे हैं. मध्य प्रदेश, यूपी, बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देशभर की गरीब निर्धन बेटियों के विवाह होंगे.  समधियों को दी समझाइश उन्होंने सभी समधियों को समझाइश दी कि वे बहू को बेटी की तरह रखें, किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न आए। शास्त्री ने कुछ समधियों को बुलाकर उनसे हंसी मजाक करते उन्हें गुलाल भी लगाया। धीरेंद्र शास्त्री ने ट्वीट कर दी विवाह महोत्सव की पूरी जानकारी। यहां सुन लें आप भी… वर-वधू के नाम से होगी संयुक्त एफडी पं. शास्त्री ने बताया, इस बार वर-वधू के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार की एफडी कराई जाएगी। यह एफडी 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ी जा सकेगी। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि को सप्तम कन्या विवाह महोत्सव आयोजित हो रहा है।  300 बेटियों का गठबंधन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में होने वाले इस सामूहिक विवाह महोत्सव में 300 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाएगा। पं. शास्त्री ने कहा जो बेटियां दूर से आने वाली हैं, वे 14 फरवरी को आ जाएं। रविवार को वर और वधू पक्ष को बुलाकर शुरुआती सामग्री भेंट की गई। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले वर वधू पक्ष को बताया क्या होंगी व्यवस्थाएं, क्या हैं नियम… वर-वधु पक्ष के लिए यह रहेगी व्यवस्था वर एवं वधू पक्ष को जो महत्वपूर्ण पास दिए गए हैं, उनमें वधू पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं वधू के लिए एक कार्ड दिया गया है। इसी तरह वर पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं उपहार ले जाने के लिए एक उपहार वाहन पास दिया गया है। साथ ही वर के लिए कार्ड दिया गया है। वर तथा वधु पक्ष के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन के कूपन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे आसानी से भोजन प्राप्त कर सकें। महाराज ने वरवधु मंडप भोजन हेतु अलग से भोजन की व्यवस्था की है। पिछले साल 251 विवाह हुए थे साल 2025 में हुए कन्या विवाह में 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया था. राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने बागेश्वर धाम आकर न केवल बेटियों को आशीर्वाद दिया था बल्कि अपनी ओर से उपहार भी भेंट किये थे. इसके अलावा देशभर से साधु-संतों ने भी वर-वधू को शीर्वाद दिया था. शास्त्री बोले- बहू को अपनी बेटी की तरह रखें सामग्री वितरण के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर पक्ष के अभिभावकों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा, "घर आने वाली बहू को अपनी बेटी की तरह रखें। समाज में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए जिससे धाम की मर्यादा पर आंच आए।" उन्होंने बताया कि 500 से अधिक आवेदनों में से सर्वे टीम ने उन बेटियों को चुना है जो अत्यंत गरीब हैं या जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। मेहमानों और व्यवस्थाओं की खास तैयारी आयोजन को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन और धाम के सेवादारों ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वाहनों के लिए पास: वर और वधू पक्ष को अलग-अलग वाहन पास जारी किए गए हैं ताकि यातायात में परेशानी न हो। भोजन व्यवस्था: दोनों पक्षों के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन कूपन दिए गए हैं। साथ ही वर-वधू और मंडप में मौजूद लोगों के लिए अलग से विशेष भोजन की व्यवस्था की गई है। विशिष्ट अतिथि: इस भव्य महोत्सव में देशभर के बड़े संत, महात्मा और राजनैतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। 14 फरवरी तक पहुंचेंगी बेटियां दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली बेटियों को 14 फरवरी तक धाम पहुंचने का निर्देश दिया गया है। महाराज ने इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी सर्वे टीम और सेवादारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि धाम की वर्तमान क्षमता के अनुसार श्रेष्ठ व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  

भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई दिशा, 32 किमी विस्तार और 27 रैक मिलने का फैसला

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है।

MP में स्मार्ट पंचायतें: ग्रामीणों को मोबाइल पर 2100 सेवाओं का फायदा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

भोपाल  पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा। खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है। एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो। इन पर भी फोकस आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे  किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे। वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती।

शिव-विवाह उत्सव की तैयारियां पूरी, उज्जैन में बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में देंगे दर्शन

उज्जैन  महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी। अधिकारियों ने देखी व्यवस्था महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

होटल कर्मचारी की साजिश नाकाम, 75 लाख की लूट में 4 आरोपी गिरफ्तार

 नरसिंहपुर.  जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होटल में रखी रकम बना लालच की वजह जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची। इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।     पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।     सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई। 4 गिरफ्तार, 3 फरार पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर, राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।  

भारी ओलावृष्टि से ग्वालियर में तबाही: 4 इंच बर्फ जमी, फसलों को भारी नुकसान

ग्वालियर.  पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते ग्वालियर जिले में मंगलवार सुबह वर्षा और भारी ओलावृष्टि हुई। प्रकृति का यह प्रकोप भितरवार-चीनोर क्षेत्र के गांव कछौआ, बड़की सराय, जुझारपुर, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया और सिकरौदा समेत 12 से अधिक गांवों में देखा गया। जहां पर भीषण ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक बर्फ जम गई। बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजारा मंजर ऐसा था कि दूर-दूर तक फैली हरियाली गायब हो गई और पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजर आने लगा। किसानों के मुताबिक गेहूं, सरसों व चना आदि फसलों में 70 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए मौके पर पहुंची। कुछ गांवों में कलेक्टर रुचिका चौहान भी नुकसान को देखने के लिए पहुंची। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक आगामी 24 घंटों में गरज चमक के साथ वर्षा व ओलावृष्टि की संभावना अभी बनी हुई है। साथ ही कोहरा भी रहेगा। आसमानी बिजली से किसान की मौत शिवपुरी में आसमानी बिजली की चपेट में आने से एक किसान की मौत भी हो गई। कई खेतों में तो नुकसान का आकलन 70 से 90 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। ओलावृष्टि की सूचना के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बड़की सराय व सिकरौदा गांव में पहुंचकर ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र निरीक्षण किया और किसानों से बात की। शिवपुरी में बिजली गिरने से किसान झुलसा शिवपुरी के सिलानगर निवासी वीर सिंह पुत्र रामप्रसाद आदिवासी उम्र 25 साल गांव में बटाई से खेती करता है। रात में खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका था। इसी दौरान तेज आंधी, वर्षा आदि से बचने के लिए वह खेत में बनी झोंपड़ी के अंदर जाकर सो गया। इसी दौरान आसमानी बिजली झोपड़ी गिरी, जिससे झोंपड़ी में आग लग गई। किसान झोपड़ी में लगी आग की चपेट में आ गया, जिससे उसकी जलने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर मर्ग कायम कर लिया है।  

डकैती और चोरी के मामलों में मध्यप्रदेश पुलिस को अहम कामयाबी

भोपाल  प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत निरंतर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पिछले 48 घंटों के भीतर विदिशा और खरगोन पुलिस ने दो अलग-अलग बड़ी वारदातों का खुलासा करते हुए लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपये की संपत्ति बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। विदिशा: 1 करोड़ की डकैती का पर्दाफाश, 'डायल-112' की सतर्कता रही निर्णायक विदिशा पुलिस ने थाना त्योदा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रायखेडी में घटित सनसनीखेज डकैती का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों और एक विधि-विरुद्ध बालक को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 44 तोला सोना, 1 किलो 300 ग्राम चांदी, 10 लाख रुपये नगद, पांच मोबाइल फोन, एक मोटरसाइकिल, एक देशी कट्टा (.315 बोर) और एक तलवार बरामद की है। जिनकी कुल कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस डकैती के सुराग में सागर जिले के थाना राहतगढ़ क्षेत्र में डायल-112 पुलिस बल की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई निर्णायक साबित हुई। रात्रिकालीन गश्त और रिस्पॉन्स के दौरान गिरोह का एक आरोपी विदिशा से डकैती करके भागने का प्रयास कर रहा था और उसने अपह्त संपत्ति सड़क पर गिरा दी। डायल-112 पुलिस बल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को मौके से ही संपत्ति सहित गिरफ्तार कर लिया। इससे प्राप्त महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई को दिशा मिली और पूरे गिरोह का पता चला।विदिशा पुलिस की विशेष टीमों ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के चार सदस्‍यों और एक विधि-विरुद्ध बालक को गिरफ्तारकर उनके कब्जे से संपूर्ण संपत्ति बरामद की है। खरगोन: सूने मकानों में चोरी करने वाले गिरोह से 90 लाख का माल बरामद जिले की बड़वाह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सूने मकानों और दुकानों को निशाना बनाने वाले शातिर गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने महज48 घंटों की कड़ी मशक्कत और तकनीकी विश्लेषण के बाद 02 आरोपियों और 01 विधि-विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने चोरी का सामान कचरे के ढेर में छिपाकर रखना स्‍वीकार किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 300 ग्राम सोने के बार, 05 किलोग्राम चांदी के बार, अन्य आभूषण और नगदीसहितलगभग 90 लाख रुपये की सामग्री जब्‍त की है। ये दोनों ही कार्यवाहियां मध्यप्रदेश पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर अंतर-जिला समन्वय और आधुनिक तकनीकी विवेचना (CCTV विश्लेषण एवं साइबर सेल) के उत्कृष्ट उदाहरण को दर्शाती हैं। विदिशा में जहां 'डायल-112' और विशेष टीमों के तालमेल ने डकैतों को पकड़ा, वहीं खरगोन में स्थानीय मुखबिर तंत्र और सीसीटीवी फुटेज के सूक्ष्म परीक्षण से चोरों तक पहुँचा जा सका। मध्य प्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि वे अपने आसपास की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत डायल-112 या नजदीकी थाने पर दें। नागरिकों की सतर्कता ही सुरक्षित समाज की नींव है।  

अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज, मध्यप्रदेश पुलिस की सख्त कार्रवाई

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध निरंतर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। श्योपुर एवं कटनी जिलों में अलग-अलग मामलों में पुलिस ने अवैध शराब के विरूद्ध कार्रवाई कर 67 लाख 34 हजार रूपये की शराब एवं वाहन जब्‍त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। श्योपुर जिले में की गई कार्रवाई के तहत थाना देहात पुलिस ने राजस्थान–श्योपुर सीमा क्षेत्र में नाकाबंदी कर एक संदिग्ध ट्रक को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर ट्रक से अंग्रेजी शराब की 635 पेटियां, कुल 4863 बल्क लीटर अवैध शराब प्राप्‍त हुई, जिसे ट्रक सहित जब्‍त किया गया। जब्‍त की गई शराब और ट्रक की अनुमानित कीमत 58 लाख 90 हजार रूपए है। प्रकरण में 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। कटनी जिले में मुखबिर से सूचना प्राप्‍त हुई कि एक कार से कुछ व्‍यक्ति अवैध शराब लेकर कटनी की ओर आ रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने ग्राम देवरी टोला पर वाहन चेकिंग लगाई। इस दौरान एक संदिग्ध कार को रोकने का प्रयास करने पर चालक द्वारा वाहन को तेज गति से बायपास रोड मैहर की ओर ले गए। पुलिस टीम द्वारा पीछा करने पर आरोपी वाहन को खड़ा करके फरार हो गए। मौके पर खड़ी कार की तलाशी लेने पर उसमें देशी मदिरा की 24 पेटियां, कुल 216बल्क लीटर अवैध शराब प्राप्‍त हुई। जिसे कार सहित (अनुमानित कीमत लगभग 8 लाख 44 हजाररूपए), जब्‍त किया गया। विवेचना के दौरान 01 आरोपी को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। दोनों मामलों में अवैध शराब की आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।  

गेहूँ उपार्जन योजना: समर्थन मूल्य पंजीयन 7 फरवरी से, खाद्य मंत्री राजपूत का ऐलान

7 फरवरी से शुरू होगा समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु पंजीयन : खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये किसान पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होगा। किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। इन केन्द्रों पर पंजीयन के लिये शुल्क राशि प्राप्त करने के संबंध में कलेक्टर निर्देश जारी करेंगे। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क निर्धारित नहीं किया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान-पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। पूर्व वर्षों की किसी अपात्र संस्था में केन्द्र प्रभारी एवं ऑपरेटर को किसी अन्य संस्था में पंजीयन के लिए नहीं रखा जायेगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक का नाम खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए ताकि किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सकें। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन हेतु पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त OTP से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

मानहानि विवाद समाप्त: शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा के बीच हुआ समझौता

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट में राहत मिल गई है. शिवराज चौहान के खिलाफ मानहानि के मामले वापस लिए जाएंगे. यानी कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा चौहान के खिलाफ मानहानि के मुकदमे वापस लेंगे. तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मुद्दे पर उनका चौहान से समझौता हो गया है. इसके तहत वो शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ आपराधिक मानहानि व सिविल सूट वापस ले रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निस्तारण कर सुनवाई बंद कर दी. कांग्रेस सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान समेत तीन बीजेपी नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था.  इसी मुकदमे को रद्द कराने की मांग को लेकर शिवराज सिंह चौहान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज  समेत तीनों नेताओं को निचली अदालत मे पेशी से छूट दे दी थी. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इनकी गुहार ठुकराते हुए पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया था. कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान के अलावा वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ भी मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. तन्खा का आरोप है कि इन तीनों नेताओं ने मीडिया मे उनके खिलाफ बयान देकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विवेक तंखा ने स्पष्ट किया कि उनका चौहान के साथ समझौता हो गया है, जिसके बाद कोर्ट ने मामले का निस्तारण कर दिया. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कार्यवाही इससे पहले, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मानहानि की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि: इस चरण पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, IPC की धारा 499 के तहत सद्भावना और सार्वजनिक हित जैसे अपवादों से जुड़े प्रश्नों का निर्णय ट्रायल के दौरान ही हो सकता है, मजिस्ट्रेट को संज्ञान के स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इसके बाद, 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी जमानती वारंट से शिवराज सिंह चौहान को राहत दी थी, बशर्ते वे कार्यवाही में सहयोग करें। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली चौहान की याचिका पर नोटिस भी जारी किया था, जिसमें हाईकोर्ट ने शिकायत को रद्द करने से इनकार किया था। अब, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के चलते, सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान की याचिका का निपटारा कर दिया और आपराधिक मानहानि मामले से जुड़ी कार्यवाही समाप्त हो गई।

रायसेन अपराध केस: रेप की कोशिश के बाद हत्या, ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पीटा, अस्पताल में दम तोड़ा

रायसेन  रायसेन जिले में एक युवती से कथित तौर पर दुष्कर्म के प्रयास में विफल रहने के बाद आरोपी ने उसकी हत्या कर दी. घटना के चंद घंटों बाद ही आरोपी युवक का संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद किया गया. इसके बाद यह मामला उलझ गया, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.  जानकारी के अनुसार, यह घटना रायसेन जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर सुल्तानपुर थानांतर्गत भरतीपुर गांव में सोमवार 2 फरवरी 2026 को हुई. सुल्तानपुर थाना प्रभारी संतोष सिंह ठाकुर ने बताया कि 20 वर्षीय शिवानी रोजाना की तरह अपने पिता को खाना देने खेत पर जा रही थी. इस दौरान 25 वर्षीय आरोपी प्रकाश सिंह भिलाडा ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की.  उन्होंने बताया कि युवती के विरोध करने पर आरोपी प्रकाश ने ने धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी और फरार हो गया. युवती की हत्या की खबर मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में गुस्साए लोग आरोपी की तलाश करने लगे.  पुलिस ने भी आरोपी की तलाश शुरू की, इसी बीच शाम को संदिग्ध परिस्थितियों में आरोपी का शव घोघरा नदी के पास बरामद किया गया.  भाई के लिए खाना लेकर निकली थी युवती पुलिस के अनुसार 21 वर्षीय युवती सोमवार दोपहर अपने भाई के लिए खेत पर खाना लेकर घर से निकली थी। रास्ते में गांव का ही प्रकाश सिंह भिलाड़ा उसे मिला, जिसने उसे रोक लिया। इसके बाद आरोपी ने जबरदस्ती करने की कोशिश की। जबरदस्ती की कोशिश, विरोध पर हमला युवती ने इसका कड़ा विरोध किया तो आरोपी ने धारदार हथियार बका से उसके जबड़े और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोट लगने से पीड़िता की मौके पर ही मौत हो गई। हमले के बाद आरोपी लड़की को घसीटते हुए खेत के अंदर ले गया। मौके पर युवती के शरीर के निचले कपड़े नहीं थे, जिससे उसके साथ रेप की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस ने इस एंगल पर भी जांच कर रही है। आरोपी मौके से फरार, ग्रामीणों ने पकड़ लिया वारदात के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण आरोपी की तलाश में निकल पड़े और कुछ ही दूरी पर कमरोरा क्षेत्र की घोघरा नदी के पास आरोपी घायल हालत में मिला। ग्रामीणों ने आरोपी युवक को पकड़कर उसके साथ मारपीट की। सूचना मिलने पर सुल्तानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को घायल हालत में अस्पताल भिजवाया गया। इलाज के दौरान आरोपी की भी मौत अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात आरोपी युवक प्रकाश सिंह भिलाड़ा ने भी दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एएसपी कमलेश कुमार खरपुसे ने बताया कि मृतक युवती और आरोपी युवक के घर आमने-सामने स्थित हैं। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था, जिसे देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने इस मामले में युवती के परिजन की ओर से हत्या का केस दर्ज किया है। वहीं आरोपी युवक की मौत के मामले में भी परिजन की शिकायत पर अलग से जांच की जा रही है। 6 लोग हिरासत में, पुलिस पूछताछ कर रही पुलिस ने घटना से जुड़े मामले में 6 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनता देख पुलिस बल तैनात किया गया है। दोनों के घर आमने-सामने, पहले से पहचान थी बताया जा रहा है युवती कुछ साल पहले बाड़ी में रहकर पढ़ाई करती थी। इस दौरान युवक के संपर्क में आई थी। दोनों के घर भी आमने-सामने हैं। गांव में पुलिस बल तैनात  सुल्तानपुर थाना प्रभारी संतोष सिंह ठाकुर ने बताया कि युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर पांच लोगों को हिरासत में लिया है. गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है. मामले की जांच की जा रही है. पुलिस आरोपी युवक के बारे में भी जानकारी जुटा रही है.  

युवाओं के दम पर बनेगा विकसित भारत: मंत्री सारंग

भोपाल. सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को एक निजी यूनिवर्सिटी में आयोजित युवा संवाद- बजट 2026 कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित होकर युवाओं से संवाद किया। मंत्रीसारंग ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया एवं केंद्रीय बजट वर्ष 2026–27 के प्रमुख प्रावधानों, सरकार की दूरदृष्टि और विकसित भारत के संकल्प पर विस्तार से प्रकाश डाला। मंत्री सारंग ने कहा कि यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की सशक्त आधारशिला है। इसमें 'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास' की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार समाज के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है। यह बजट GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर केंद्रित है जो युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला, किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाला तथा मध्यम और गरीब वर्ग को सशक्त करने वाला है। संवाद कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्षश्याम टेलर, जिला अध्यक्षरविंद्र यति, जेएलयू के वॉइस चांसलर डॉ. विवेक खरे सहित बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति रही। युवाओं के लिए अवसर सृजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मंत्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं के लिए नए अवसरों का सृजन सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। बजट 2026 में विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता और नेतृत्व को केंद्रित किया गया है। स्किल इंडिया, डिजिटल स्किल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को दक्ष बनाकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला बजट मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी का मानना है कि महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं बल्कि भारत की ग्रोथ इंजन है। यही कारण है कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे नीति और नीयत दोनों का हिस्सा बनाया। यह बजट इसी स्पष्ट नीयत का प्रमाण है, जहां हर योजना, हर निवेश और हर सुधार के केंद्र में महिला की गरिमा, सुरक्षा, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को रखा गया है। इस बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए जो रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। वह सामाजिक न्याय से आगे बढ़कर आर्थिक भागीदारी, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक महिलाओं की भूमिका को विस्तार देता है। हर वर्ग के सपनों को साकार करने वाला बजट मंत्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना और हर वर्ग के सपनों को साकार करने वाला बजट है। यह बजट न केवल अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित है बल्कि गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण के लिए भी केंद्रित है। केंद्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए एक प्रगतिशील, दूरगामी और प्रभावकारी बजट प्रस्तुत किया गया है। मंत्री सारंग ने युवाओं से आह्वान किया कि इस बजट को एक सशक्त भारत, समृद्ध भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के एक अवसर के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि आइए हम सब मिलकर इस बजट की भावना को जन-जन तक पहुंचाएं और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाएं।  

न्‍यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंटरबरी के डेलीगेट़स से किया वन-टू-वन संवाद

भोपाल. गोवा में आयोजित क्यूएस इंडिया समिट-2026 में मध्यप्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को मजबूती से रखा। अपर मुख्य सचिव (एसीएस), उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने इस समिट न्यूजीलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के डेलीगेट्स से वन-टू-वन संवाद कर शोध, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक सहयोग पर सार्थक चर्चा की। एसीएस राजन ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मध्यप्रदेश को उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक आदान-प्रदान बेहद आवश्यक हैं। समिट में सस्टेनेबिलिटी, रिसर्च-ओरिएंटेड लर्निंग और नवोन्मेषी शिक्षण पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया। वर्ष 1873 में स्थापित यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी न्यूजीलैंड की अग्रणी रिसर्च यूनिवर्सिटी है। यह विश्व की शीर्ष 300 यूनिवर्सिटियों में शामिल है। कला, वाणिज्य, कानून, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विषयों में इसकी वैश्विक पहचान है। तीन दिवसीय क्यूएस इंडिया समिट-2026 में एसीएस राजन की सक्रिय सहभागिता से मध्यप्रदेश ने फॉरेन यूनिवर्सिटीस के साथ सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण को लेकर अपनी ठोस रणनीति प्रस्तुत की। यह पहल प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। समिट में आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, विशेष कर्तव्‍यस्‍थ अधिकारी डॉ. सुनील सिंह, राकेशवास्तव, मनोज अग्निहोत्री सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। 

स्टेट टास्क फोर्स कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति और कार्ययोजना की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्टेट टास्क फ़ोर्स की बैठक में निर्देश दिए कि सभी विभाग अंतर्विभागीय समन्वय और जागरूकता से फायलेरिया को जड़ से ख़त्म करने हेतु अपने दायित्वों का निर्वहन करें। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल कर आमजन को दवाओं के सेवन के प्रति जागरूक करने में सहयोग लें। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न विभाग मैदानी अमलों से 10 फ़रवरी से प्रारंभ हो रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) जमीनी कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण सुनिश्चित करें साथ ही अभियान में आम जन की सहभागिता सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, जनसंपर्क, वन, नगरीय निकाय, महिला एवं बाल विकास और आवास सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। नागरिक वितरित दवाओं का अवश्य करें सेवन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्टेट टास्क फ़ोर्स की बैठक में वर्तमान में प्रदेश में लिम्फेटिक फायलेरियासिस बीमारी की स्थिति, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एम.डी.ए) चक्र-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक्शन प्लान और फायलेरिया उन्मूलन गतिविधियों के संचालन हेतु अन्य विभागों से अपेक्षायें एवं सहयोग के विषयों की वृहद् समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर से प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि एमडीए अभियान में वितरित दवाओं का अवश्य सेवन करें। फायलेरिया के उन्मूलन में सहयोग करें। मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि एमडीए 2026 में मध्यप्रदेश के 8 जिलों छतरपुर, पन्ना, उमरिया, मउगंज, टीकमगढ़, निवाड़ी, शहडोल और भिंड के 12 ब्लॉक में एम.डी.ए अभियान का संचालन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एमडीए 2025 में मध्य प्रदेश के 9 जिलों के 23 ब्लॉक में एमडीए का क्रियान्वयन किया गया था। एमडीए 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की योजना प्रदेश में 10 फरवरी से 8 जिलों के 12 चिन्हित विकासखण्डों में प्रशिक्षित दवा सेवकों के माध्यम से बूथ डे एवं घर-घर भ्रमण के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन समस्त पात्र हितग्राहियों को कराया जाएगा। एमडीए के सघन और सफल क्रियान्वयन करने हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 दिन का माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके तहत 4 दिन बूथ स्तर पर, 7 दिन घर-घर अभियान और 4 दिन में शेष रह गई जनता के लिए मॉप-अप गतिविधि की जायेंगी। शत-प्रतिशत दवा सेवन के लिए उच्च/वर्तमान संचरण क्षेत्रों में आमजन को जागरूक और प्रेरित किया जाएगा। विभिन्न विभागों से ज़मीनी सहयोग प्राप्त करने के लिए विभागवार अपेक्षाओं को कार्ययोजना में शामिल किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त धनराजु एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। फायलेरिया लक्षण और बचाव फायलेरिया संक्रमित मच्छर (क्यूलेक्स) के द्वारा फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी एक धागे के समान कृमि वुचरेरिया बेनक्रफ्टाई से होती है। प्रदेश में फायलेरिया बीमारी संक्रमण हेतु क्यूलेक्स क्वींक्वीफेसियेटस प्रमुख वाहक मच्छर है। यह मच्छर सामान्यतः गंदे एवं रूके हुए पानी में प्रजनन करता है। फायलेरिया बीमारी के प्रमुख लक्षण प्रारंभिक अवस्था में लगातार बुखार, प्रभावित अंगों (पैरों/हाथ/अण्डकोष/स्तन) में दर्द एवं सूजन है, जो कि धीरे-धीरे हाथी पांव के समान हो जाती है। संक्रमण के 8 से 10 वर्षों के बाद भी उपरोक्त लक्षण प्रकट हो सकते है। राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन हेतु मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए), मोर्बिडिटी मैनेजमेंट ऐंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) गतिविधियाँ की जा रही हैं। एमडीए में प्रत्येक वर्ष में 1 बार 2 साल से अधिक उम्र (2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर) के जनसमुदाय को निर्धारित मात्रा में डी.ई.सी (डाय इथाईल कार्बामैज़ीन) एवं एल्बेण्डाजोल दवा का सेवन कराया जाता है। खाली पेट दवा का सेवन नहीं कराया जाना है। नवीन नीति अनुसार चिन्हित जिलों में इन दो दवाओं के साथ आईवरमेक्टिन दवा का भी उपयोग किया जा रहा है जिसे आईडीए का नाम दिया गया है।  

मंत्री परमार ने, शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय भोपाल द्वारा प्रकाशित शोध जर्नल का किया विमोचन

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, भोपाल स्थित निवास कार्यालय में मंगलवार को शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा संकलित शोध पत्रों पर प्रकाशित शोध जर्नल (RJMLB) का विमोचन किया। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों एवं उनकी गुणवत्ता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य महाविद्यालयों द्वारा भी इस प्रकार के शोध प्रकाशन किए जाना चाहिये। मंत्री परमार ने छात्र-छात्राओं को भी शोध पत्र लेखन के लिये प्रोत्साहित किये जाने को कहा। परमार ने भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित आलेख का भी समुचित समावेश किये जाने पर जोर दिया ताकि नयी पीढी भारतीय समृद्ध पुरातन ज्ञान एवं संस्कृति से परिचित हो सकें। ज्ञातव्य है कि शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय भोपाल द्वारा पर्यावरण से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का वेबीनार का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 250 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुये थे। प्रतिभागियों की ओर से दिये गये शोध पत्रों की समीक्षा उपरांत चयनित शोध पत्र एवं महाविद्यालय द्वारा आमंत्रित अन्य शोध पत्रों का संकलन कर, महाविद्यालय द्वारा शोध जर्नल (RJMLB) प्रकाशित किया गया है। इस अवसर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. प्रवीण तामोट, विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र डॉ. मीनल फडनीस एवं डॉ. संजय सिंह उपस्थित थे।  

राज्य सरकार सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने पर कर रही है विचार

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जहां-जहां भी ओला-पाला से फसलें प्रभावित हुई हैं, उन जिलों के कलेक्टर्स, सर्वे कराकर तत्काल सहायता राशि किसानों को उपलब्ध कराएं। किसानों के सभी प्रकार के हित सुनिश्चित करने और उनकी आय दोगुना करने के उद्देश्य से ही वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषक कल्याण कृषि वर्ष में मालवा, निमाड़, चंबल और विंध्य अंचलों में कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। कृषि के साथ उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां अपनाने के लिए कृषकों को प्रेरित किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश में पहली बार राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव आयोजित किया गया। पुष्प उत्पादन और देश-विदेश में फूलों की बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश में नरवाई प्रबंधन और पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। भावांतर योजना में सरसों और अन्य तिलहन फसलों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। मूंग के स्थान पर उड़द को प्रोत्साहित करने के लिए नीति बनाई जा रही है। इसके लिए किसानों को प्रेरित करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रि-परिषद सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रदेश में राज्य स्तरीय एमपी यूथ गेम्स-2026 के भव्य आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रतिष्ठित आयोजनों में देशज खेलों को भी शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा मेडिकल कॉलेज में 750 बेड की क्षमता वृद्धि की गई है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज की क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीपशुपतिनाथ लोक में विकसित की गई सुविधाओं और प्रतिमा के क्षरण को रोकने के लिए किए गए उपाय को अनुकरणीय बताया। उन्होंने बताया कि मंदसौर के मल्हारगढ़ में आयोजित "अन्नदाता सम्मान समारोह" में भावांतर योजना में सोयाबीन उत्पादक एक लाख 17 हजार किसानों के खातें में 200 करोड़ रुपए की भावांतर राशि अंतरित की गई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रस्तुत केंद्रीय बजट विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धि की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। राजनैतिक विषयों के स्थान पर वित्त आयोग के सुझावों को महत्व देना बजट की विशेषता है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने मंत्रि-परिषद सदस्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में केंद्रीय बजट की विशेषताओं से जनसामान्य को अवगत कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कच्छ में आयोजित 'रण उत्सव' में टेंट सिटी के माध्यम से की गई ईको-सेंसेटिव आवास व्यवस्था और रोजगार के अवसर सृजित करने के नवाचार सराहनीय हैं। उन्होंने गिर राष्ट्रीय उद्यान में सफारी और रेस्क्यू सेंटर में सिंहों को देखने के लिए किए गए प्रयोगों से प्रेरणा लेते हुए उन्हें प्रदेश में लागू करने की दिशा में गतिविधियां संचालित करने की आवश्यकता बताई। 

राजस्व मंत्री वर्मा का ऐलान: प्रदेश के प्रभावित किसानों को नुकसान का पूरा भुगतान

प्रदेश के ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को मिलेगा पूरा मुआवजा – राजस्व मंत्री  वर्मा राजस्व मंत्री ने देवास के ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण भोपाल  राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ है। सरकार अत्यंत संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों, मकानों एवं मवेशियों की क्षतिपूर्ति के लिए सर्वे कार्य निरंतर किया जा रहा है। सर्वे पूर्ण होने के बाद सभी पात्र ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को उनकी क्षति का पूरा मुआवजा प्रदान किया जाएगा। राजस्व मंत्री  वर्मा ने देवास जिले में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का निरीक्षण कर किसानों से चर्चा के दौरान यह बात कही। राजस्व मंत्री  वर्मा ने देवास जिले के ओलावृष्टि प्रभावित ग्राम रमलखेड़ी, खजुरिया बीना एवं करनावद का निरीक्षण कर किसानों से चर्चा की। निरीक्षण के दौरान किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण उनकी फसलों को नुकसान हुआ है। मंत्री  वर्मा ने निर्देश दिए कि सर्वे कार्य में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी किसान छूटने ना पाए। प्रत्येक प्रभावित किसान को राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। निरीक्षण के दौरान हाटपीपल्या विधायक  मनोज चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती लीला अटारिया, अपर कलेक्टर  संजीव जैन, बागली एसडीएम  शिवम यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का निर्देश: मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में आधुनिक सुविधाओं को प्राथमिकता दें

चिकित्सकीय अधोसंरचनात्मक विकास में स्टेट ऑफ़ द आर्ट सुविधाओं को करें शामिल: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल एवं सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, रीवा के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्यों की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल एवं सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, रीवा के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में प्रस्तावित निर्माण कार्यों, उपलब्ध अधोसंरचना और भविष्य की आवश्यकताओं पर गहन चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि अस्पतालों के विस्तार एवं उन्नयन कार्यों में चिकित्सकीय सुविधाओं का गुणवत्तापूर्ण, सुगम एवं समयबद्ध प्रदाय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों की सुविधा, सुरक्षा और सहज आवागमन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, जिससे अस्पतालों में बेहतर उपचार के साdथ मानवीय संवेदनशीलता भी परिलक्षित हो। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधोसंरचना विकास के दौरान स्टेट ऑफ़ द आर्ट सुविधाओं को शामिल करने पर बल देते हुए कहा कि भवन निर्माण, वार्ड व्यवस्था, ओपीडी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और अन्य सहायक सेवाओं में आधुनिक मानकों का पालन किया जाए। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की स्थापना के लिए आवश्यक प्रावधानों को योजना में सम्मिलित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समय-सीमा और तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि रीवा संभाग सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत एवं विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजु एस, विभागीय अधिकारी और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

सरदार सरोवर प्रभावितों के लिए राहत: आवासीय भूखंडों का पंजीकरण अब बिना शुल्क

सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय 6 विभागों की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मैहर एवं कटनी जिले की 620 करोड़ रूपये से अधिक की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित किये गए आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क कराये जाने का निर्णय लिया गया। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अनुसार देय पंजीयन शुल्क एवं स्टॉम्य ड्यूटी की प्रतिपूर्ति नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की जायेगी। इससे 25,600 से अधिक परिवारों को लाभ होगा। इस निर्णय से राज्य शासन पर 600 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आयेगा। मैहर एवं कटनी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मैहर एवं कटनी जिलें में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार मैहर एवं कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना लागत 53 करोड़ 73 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। इससे 3500 हेक्टयर में सिंचाई की सुविधा प्राप्त होंगी और मैहर एवं कटनी जिले के 9 ग्राम के 2810 कृषक लाभान्वित होंगे। कटनी जिलें की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 566 करोड 92 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे, कटनी जिले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसील के 27 ग्राम के 11,500 कृषक लाभान्वित होंगे और 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होंगी। 10 योजनाओं की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा 6 विभागों की 10 योजनाओं की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार वित्त विभाग की लोक वित्त पोषित 500 करोड़ से कम की 8 योजनाओं के लिए 115 करोड़ 6 लाख रुपये, श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के लिए 5 हजार करोड़ रुपये, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की विधानसभा क्षेत्र निर्वाचन योजना और स्थापना एवं कार्यालयीन योजनाओं के लिए 3 हजार 376 करोड़ 66 लाख रूपये, पशु पालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर ब्लॉकग्रांट योजना एवं पशुपालन, पशु विकास और गौ संवर्धन योजना के लिए 6 हजार 472 करोड़ 18 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास की किशोर कल्याण निधि योजना और घरेलू हिंसा पीड़िता के लिए सहायता योजना के लिए 24 करोड़ 70 लाख रूपये और पिछड़ा वर्ग एवं अन्य कल्याण की अल्पसंख्यक स्वरोजगार/उद्यम योजना के लिए 21 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने की स्वीकृति प्रदान की गई।  

आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा बयान, इन्सेंटिव वितरण को पारदर्शी बनाने के निर्देश

आयुष्मान भारत योजना की इन्सेंटिव वितरण प्रणाली को बनायें पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों एवं सहायक चिकित्सकीय स्टॉफ को आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली इन्सेंटिव व्यवस्था की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि इंसेंटिव वितरण प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध बनाया जाए, ताकि पात्र चिकित्सकों एवं स्टॉफ को समय पर प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो सके। उन्होंने डेटा एंट्री प्रक्रिया को सरलीकृत एवं सुगम बनाने तथा समयबद्ध डेटा एंट्री सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मैन पॉवर की व्यवस्था किए जाने के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपलब्ध कुशल एवं दक्ष मैनपावर को प्रोत्साहन देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उनका मनोबल बना रहे और वे पूर्ण ऊर्जा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय कर सकें। इससे आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। बैठक में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजु एस एवं आयुष्मान भारत योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. योगेश भरसट उपस्थित रहे।  

नागलवाड़ी में राज्यपाल दौरे की तैयारियों की समीक्षा, कलेक्टर जयति सिंह ने किया स्थल निरीक्षण

बड़वानी. महामहिम राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने राजपुर के नागलवाड़ी स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, पेयजल, बिजली, साफ-सफाई एवं पार्किंग व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं ताकि राज्यपाल के आगमन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सुरक्षा व्यवस्था विशेष रूप से मजबूत रखने तथा आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी एवं संबंधित विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

CM मोहन यादव की प्रतिक्रिया: Union Budget भविष्यदर्शी, रेलवे में बड़े सुधार की तैयारी

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के यूनियन बजट को लेकर कहा है कि यह बजट केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश और राज्यों को दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती देने वाला है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के रिन्यूएशन को इस बजट में आधार बनाया गया है ताकि चालू उद्योगों को संरक्षण दिया जा सके। समय और नई तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जा सके। यह बात सीएम मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ सेंटर में आयोजित लाइव चर्चा में कही। बता दें कि वे यहां केंद्रीय बजट पर विस्तार से चर्चा कर रहे थे। अधोसंरचना सुधार, औद्योगिक भूमि, लघु सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर सीएम ने कहा कि बजट में अधोसंरचना सुधार, औद्योगिक भूमि और लघु सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। वित्तीय स्थिरता और सरकारी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए सेवा क्षेत्र को प्रमुखता दी गई है, जिससे भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा। महिला सशक्तिकरण पर रहा फोकस महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है। नारी सशक्तिकरण के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक जिले में हॉस्टल निर्माण, बहनों को सीधा लाभ और ग्रामीण महिलाओं के लिए 'लखपति दीदी' जैसी योजनाएं आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखेंगी। टियर-2 और 3 शहरों के विकास को मिलेगी रफ्तार सीएम मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो सिटी प्लान मध्यप्रदेश में पहले से चल रहे हैं और प्रधानमंत्री के सहयोग से इन्हें पूरा विस्तार दिया जा रहा है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल स्पष्ट होता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए दी गई राशि से संतुलित विकास होगा और मध्यप्रदेशआर्थिक रूप से समृद्ध बनेगा। कृषि को नहीं किया नजरअंदाज सीएम ने कहा कि ग्रीन एनर्जी के दौर में कृषि को नजरअंदाज नहीं किया गया है। कार्बन कैप्चर, हरित पहल और पर्यावरणीय संतुलन के साथ यह बजट भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। सीएम ने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का यह नया मॉडल देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है। बजट से रेलवे में क्रांति मुख्यमंत्री ने रेलवे क्षेत्र को मिले बजट को लेकर कहा की रेलवे में क्रांति आई है। मध्यप्रदेश और देश में रेल पटरी बिछाने की गति आठ गुना तक बढ़ी है। भुसावल-खंडवा रेल खंड से जुड़ी तीन परियोजनाओं को 18,500 करोड़ रुपए की मंजूरी रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ना किसानों और राज्य के विकास के लिए बड़ी उपलब्धि है। राहुल को खुद नहीं पता कि वो क्या कहते हैं- सीएम मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद उस पर सवाल उठाना समझ से परे है। राहुल गांधी को लेकर पूछे गए एक प्रश्न को लेकर उन्होंने कहा कि यह बजट भारत के मजबूत नेतृत्व और आत्मविश्वास को दर्शाता है। लेकिन फिर भी राहुल गांधी कुछ भी बोल देते हैं। सीएम ने कहा कि राहुल को खुद नहीं पता कि वे क्या कहते हैं। 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख मजबूत

प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वैश्विक मंच पर सशक्त हुआ भारत : उप मुख्यमंत्री शुक्ल भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका का व्यापार समझौता भरोसेमंद और दूरदर्शी साझेदारी संबंधों का सशक्त प्रतिबिंब भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी और प्रभावशाली शक्ति बना है। आर्थिक सुधारों, वैश्विक सहयोग और सतत विकास के प्रति प्रधानमंत्री  मोदी की प्रतिबद्धता ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संपन्न हुआ व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच गहरे, भरोसेमंद और दूरदर्शी साझेदारी संबंधों का सशक्त प्रतिबिंब है। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नई गति प्रदान करेगा तथा निवेश, नवाचार और औद्योगिक सहयोग के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहभागिता को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी। यह व्यापार समझौता भारत की विकास यात्रा को और तेज करेगा, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करेगा तथा दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि में सार्थक योगदान देगा। यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और भारत के समग्र विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील, मेक इन इंडिया को देगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ . मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। भारत-अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील अभिनन्दनीय है। यह ट्रेड डील, मेक इन इंडिया को नई गति देगी। इससे देश को प्रगति के नए अवसर प्राप्त होंगे। यह डील भारत के सशक्त नेतृत्व और विकास में साझा विश्वास को दर्शाता है। 

आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में विदेशी मदिरा बरामद

आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में विदेशी मदिरा बरामद भोपाल  कलेक्टर भोपाल कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशन पर,सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ के मार्गदर्शन और नियंत्रण कक्ष प्रभारी रामगोपाल भदौरिया के नेतृत्व में भोपाल जिले की आबकारी विभाग की टीम ने की  रात्रि में मुखबिर की सूचना के आधार पर  विदिशा रोड पर  एक एरटिगा वाहन सहित 06 पेटी में 72 बॉटल कुल 54बल्क लीटर अवैध विदेशी मदिरा परिवहन का  प्रकरण दर्ज़ कियाl

केन्द्रीय बजट: डॉ. मोहन यादव का मानना, नई आर्थिक संभावनाओं का मार्गदर्शन करेगा

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट •    डॉ. मोहन यादव  भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता के सहयोग से भारत ने आगे बढ़ने जो संकल्प लिया है वह कई अर्थों में अदभुत है। आज जब भारत औदयोगिक निवेश और निर्माण क्षेत्र का हब बनने जा रहा है, उसमें मध्यप्रदेश भी अपनी पूरी शक्ति के साथ योगदान देने के लिए तैयार है। हमने औदयोगिक निवेश के लिये अनूकूल वातावरण तैयार किया, जिससे निरंतर निवेश आ रहा है। नये बजट से पूरे इको-सिस्टम को नई ऊर्जा मिली है। बजट में हरित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया गया है। इससे मध्यप्रदेश को दीर्घकालिक लाभ होने वाला है। कृषक कल्याण और कृषि विकास को मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया है। इसी प्रकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीक के विकास पर बजट में ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन तीनों क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। इन क्षेत्रों के लिये नीतियां बनाने का काम पूरा कर लिया है। निवेश आकर्षित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।  केन्द्रीय बजट गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है। यह सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट है। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में तेजी से शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है, नया बजट युवाओं के कौशल विकास और रोज़गार के लिए व्यापक अवसर लेकर आया है। शिक्षा से रोजगार एवं उदयम स्थायी समिति का गठन और 15 हजार माध्यमिक विदयालयों एवं 500 महाविदयालयों में एपीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना रचनात्मकता को बढ़ावा देगी। पर्यटन क्षेत्र में आईआईएम के सहयोग से 10 हजार गाइड्स के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेलों के परिदृश्य में बदलाव लाने का लक्ष्य युवाओं को नई दिशा देगा। महिलाओं के लिये एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10 हजार करोड़ रूपये का आवंटन लाभदायी होगा। युवा भारत के लिये सेवा क्षेत्र का विस्तार संभावनाओं के नये द्वार खोलेगा और रोज़गार और उदयम के अवसर बढ़ेंगे।  महिला उदयमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना में महिला उदयमियों को क्रेडिट लिंक आजीविका से उद्म स्वामित्व से जोड़ने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश ने पहले ही इस दिशा में ठोस प्रयास किये हैं।      सिटी ईकॉनामिक रीजन बनाने की नीति मध्यप्रदेश के शहरी विकास के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। शहरों को संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने में यह सहायक सिद्ध होगी। शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इससे मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे और निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। यह निवेश मॉडल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स तथा व्यापारिक सुगमता को व्यापक रूप से मजबूत बनायेगा।  बजट में सामाजिक समावेश पर पूरा ध्यान दिया गया है। आर्थिक विकास की ये पहल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। समावेशी विकास के साथ मानव-पूंजी निर्माण को भी मजबूती मिलेगी। शी-मार्ट्स, दिव्यांगजन कौशल योजना, सभी जिलों में गर्ल्स हॉस्टल और शिक्षा कौशल आधारित पहल से सामाजिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक विकास को समावेशी स्वरूप मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव पूंजी का सृजन होगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को विकास के केन्द्र में रखते हुए यह बजट प्रशासनिक सरलीकरण, निवेश-अनुकूल नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और वित्तीय स्थिरता के माध्यम से मध्यप्रदेश को तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की ठोस आधारशिला रखता है। मध्यप्रदेश के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 केवल एक नीति-दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का एक ऐतिहासिक अवसर है, जो मध्यप्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।   (लेखक मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन हैं)  

नया बजट 2026: MP को 4.63 लाख करोड़ का अनुमान, मोहन सरकार ने बताया समावेशी विकास की रणनीति

भोपाल  केंद्र सरकार के बजट के बाद अब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार भी अपने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियों में जुट गई है। वित्त मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस बार का बजट 'सर्वस्पर्शी' होगा, जिसमें समाज के हर वर्ग को राहत देने की कोशिश की जाएगी। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसमें सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप विकास और समावेशी विकास का रोडमैप पेश करेगी। इस बार का बजट पूरी तरह डिजिटल होगा और इसमें 'कृषि कल्याण वर्ष' के तहत किसानों, युवाओं और कर्मचारियों पर विशेष फोकस रखा गया है। समावेशी विकास और राहत पर फोकस मध्यप्रदेश विधानसभा में इस बार का बजट सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया है कि बजट तैयार करते समय उन चार स्तंभों (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति) पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनकी बात प्रधानमंत्री अक्सर करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट का आकार पिछले वर्ष के 4.21 लाख करोड़ से करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 4.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। किसानों के लिए बड़ी योजनाओं की उम्मीद राज्य सरकार ने साल 2026 को 'कृषि कल्याण वर्ष' घोषित किया है, जिसका सीधा असर बजट प्रावधानों में देखने को मिलेगा। इस बार कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों जैसे डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता और उद्यानिकी के लिए बजट में भारी वृद्धि की संभावना है। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों के फंड में पिछले साल के मुकाबले इस बार बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले। पूरी तरह 'डिजिटल' होगा बजट मध्यप्रदेश के संसदीय इतिहास में पहली बार पूरी तरह 'ई-बजट' पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कागजी दस्तावेजों के बजाय टैबलेट के माध्यम से बजट भाषण पढ़ेंगे। इसके साथ ही सरकार अगले तीन वर्षों का विजन बताने वाला 'रोलिंग बजट' भी तैयार कर रही है, जो प्रदेश के भविष्य का रोडमैप तय करेगा।  बजट में बड़ी घोषणाएं संभव बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा हो सकती है। साथ ही, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए नए प्रावधान किए जा रहे हैं। सरकार का विशेष फोकस मेट्रोपॉलिटन रीजन और बड़े शहरों के अधोसंरचना विकास (Infrastructure) पर भी रहने वाला है। जैविक खेती और ग्रामीण विकास को बढ़ावा सरकार जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाओं का ऐलान कर सकती है। चूँकि 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, इसलिए खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों की स्थापना के लिए विशेष रियायतों की घोषणा की जा सकती है।

UGC गाइडलाइन से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर, उच्च शिक्षा विभाग ने दिया आदेश जारी

भोपाल  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन को लेकर उठे विवाद और सुप्रीम कोर्ट से रोक लगाए जाने के बाद अब पुरानी गाइडलाइन लागू रहेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा कि पुरानी गाइडलाइन लागू रहेगी। छात्रों की शिकायतों का निवारण यूजीसी विनियम, 2023 को सख्ती से लागू कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त विभाग ने मध्यप्रदेश की सभी शासकीय- अशासकीय विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग तथा संबद्ध कॉलेजों को नियमों पालन करने के आदेश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश संस्थानों में लोकपाल की नियुक्ति तो कर दी गई है, लेकिन यूजीसी 2023 के प्रावधानों के अनुरूप अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे छात्रों की शिकायतें लंबित रहती हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। अब इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों को बताएं शिकायत कहां करना है जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज को अपनी वेबसाइट और प्रोस्पेक्टस में एसजीआरसी के सदस्यों के नाम, पदनाम, संपर्क विवरण और लोकपाल का नाम, पता, ई-मेल आईडी तथा कार्यकाल स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर छात्र को यह जानकारी हो कि शिकायत कहां और किस प्रक्रिया से दर्ज करनी है। हर संस्थान को छात्रों के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करना होगा। शिकायत प्राह्रश्वत होने के 15 दिनों के भीतर उसे स्क्रिप्ट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रवेश से 60 दिन पहले प्रोस्पेक्टस जारी करना होगा प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पूर्व प्रोस्पेक्टस का ऑनलाइन प्रकाशन अनिवार्य किया गया है। प्रोस्पेक्टस में पाठ्यक्रमों का विवरण, सीटों की संख्या, योग्यता मानदंड, चयन प्रक्रिया, पूरी फीस संरचना, रिफंड नीति, जुर्माना, संकाय की योग्यता, बुनियादी ढांचा, हॉस्टल, लाइब्रेरी और रैगिंग-रोधी नियमों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर छात्र सीधे एसजीआरसी और लोकपाल से शिकायत कर सकेंगे।

पांढुर्णा में बड़ी कार्रवाई: SDM और तहसीलदार ने मिलकर अवैध कॉलोनियों को किया ध्वस्त

पांढुर्णा  शहर में अवैध निर्माण पर प्रशासन एक्शन ले रहा है। अवैध लेआउट और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चला दिया। कलेक्टर के निर्देश पर वरुड मार्ग, अमरावती रोड और वानखड़े सभागृह के पीछे विकसित किए जा रहे अवैध लेआउट को जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान कॉलोनियों की सड़कें, बाउंड्री वॉल, बिजली के खंभे और अन्य निर्माण तोड़े गए। उपजाऊ जमीन पर काटे जा रहे थे प्लॉट प्रशासनिक जांच में सामने आया कि अमरावती रोड स्थित उपजाऊ कृषि भूमि को अवैध रूप से प्लॉटिंग में बदलकर बेचा जा रहा था। सौसर निवासी प्रदीप नेहारे पर बिना शासकीय अनुमति सड़क निर्माण कर लेआउट विकसित करने के आरोप हैं। शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग ने जांच की और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। एसडीएम ने संभाली जेसीबी की कमान कार्रवाई के दौरान एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब एसडीएम अलका इक्का ने खुद जेसीबी मशीन चलाकर अवैध निर्माण ढहाया। तहसीलदार विनय प्रकाश ठाकुर ने भी ट्रैक्टर चलाकर मौके पर पड़ी निर्माण सामग्री जब्त करवाई और उसे प्रशासनिक वाहन में भरवाया। इसी अभियान के तहत गुरु नानक वार्ड में संजय भांगे द्वारा बनाई गई अवैध बाउंड्री वॉल को भी तोड़ा गया। माप-जोख में यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में पाया गया था। आगे भी जारी रहेगा अभियान अधिकारियों ने साफ किया कि शहर में अवैध लेआउट के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। संतोषी माता वार्ड, नागपुर रोड, भोपाल रोड और अमरावती रोड सहित अन्य इलाकों में बने अवैध कॉलोनियों पर भी चरणबद्ध तरीके से सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान नगर पालिका की टीम, राजस्व अमला और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। प्रशासन की सख्ती से अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप की स्थिति है।

राज्य की वित्तीय सेहत पर सवाल? MP सरकार 2026 में दोबारा लेगी ₹5200 करोड़ का कर्ज

  भोपाल मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेगी। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका हैं। अब यह लोन 62,300 करोड़ रुपए का हो गया है। एमपी सरकार साल 2026 में दूसरी बार कर्ज ले रही हैं। 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी। जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है, जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार लगातार कर्ज के बढ़ते बोझ तले दबती जा रही है। राज्य सरकार ने एक बार फिर 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का निर्णय लिया है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार लिया जा रहा है।सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कर्ज का भुगतान ब्याज सहित 4 फरवरी 2033 तक किया जाएगा। इसमें से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज 17 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान 4 फरवरी 2043 तक होगा। वहीं, 2000 करोड़ रुपये की तीसरी किस्त 22 साल की अवधि के लिए ली गई है, जिसे ब्याज सहित चुकाया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में कुल कर्ज 62,300 करोड़ तक पहुँचा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक मध्य प्रदेश सरकार कुल 57,100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। ताजा 5200 करोड़ रुपये के कर्ज के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 62,300 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। जानिए मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज? वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक लिए गए कर्ज का विवरण इस प्रकार है: 7 जनवरी 2026 – 400 करोड़ 30 दिसंबर 2025 – 3500 करोड़ 2 दिसंबर 2025 – 3000 करोड़ 11 नवंबर 2025 – 4000 करोड़ 28 अक्टूबर 2025 – 5200 करोड़ 30 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 23 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 9 सितंबर 2025 – 4000 करोड़ 26 अगस्त 2025 – 4800 करोड़ 5 अगस्त 2025 – 4000 करोड़ 30 जुलाई 2025 – 4300 करोड़ 8 जुलाई 2025 – 4800 करोड़ 4 जून 2025 – 4500 करोड़ 7 मई 2025 – 5000 करोड़ इस तरह लगातार कर्ज लेने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष के निशाने पर मोहन सरकार मध्य प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों की सही योजना न होने के कारण सरकार बार-बार कर्ज लेने को मजबूर हो रही है।  

कर्नल सोफिया पर आपत्तिजनक बयान के मामले में विजय शाह पर दिल्ली करेगी सुनवाई, राहत नदारद

भोपाल  कर्नल सोफिया को लेकर बेशर्म बयान देने वाले मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा। माना जा रहा है कि सरकार फैसले के बाद 6 फरवरी तक कोर्ट को अपने निर्णय से अवगत कराएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 9 फरवरी को उक्त मामले में सुनवाई होनी है। पूर्व में यह माना जा रहा था कि शाह के खिलाफ हुई एसआइटी जांच पर स़त्ता व संगठन द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई दो हफ्ते की अवधि में निर्णय ले लिया जाएगा। मंत्री सांसत में, कहीं से नहीं मिली राहत मामला बुरी तरह फंसा है। उधर मंत्री शाह की जान सांसत में है, वे भोपाल से लेकर दिल्ली तक सभी स्तर पर अपना पक्ष रख चुके हैं। बताया जा रहा है कि  देर रात तक उन्हें किसी भी स्तर से कोई राहत नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दो टूक कह दिया है कि जो कुछ होगा, वह दिल्ली नेतृत्व ही तय करेगा। उसके आधार पर अवगत कराया जाएगा।  वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है। क्यों फंसे मंत्री शाह चुनौती देकर फंसे मंत्री शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर में कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेशर्म टिप्पणी(Minister Vijay Shah Statement Controversy) की। इस पर हाईकोर्ट के एफआइआर के आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां राहत तो नहीं, उलटा एसआइटी गठित करने के आदेश हुए। कोर्ट ने सरकार से अभियोजन की स्वीकृति पर दो हफ्ते में निर्णय लेने को कहा है।

भ्रष्टाचार की शिकायत: इमली टोला पंचायत में सड़क निर्माण में अनियमितताएं, जिम्मेदारों की खामोशी

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी CC सड़क, बोल्डर डाल कर दी ढलाई गुणवत्ताविहीन सामग्री का किया उपयोग, ग्रामीणों ने सरपंच सचिव पर लगाए गंभीर आरोप घुघरी जनपद आने वाली पंचायत इमली टोला में सीसी सड़क निर्माण में जमकर हो रहा भ्रष्टाचार… जवाबदार मौन घुघरी आदिवासी बाहुल्य जिले में लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर हो रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं फिर चाहे भवन, पुलिया निर्माण के मामले हो, या फिर सीसी सड़क निर्माण किए जाने के मामले हो लेकिन जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और  सुस्त रवैया के चलते भ्रष्टाचार्यों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैंऔर सरपंच सचिव एवं जनपद में बैठे जवाबदारों की मिली भगत से जम कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है  जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पढ़ रहा है ऐसा ही मामला जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलीटोला के पोषक ग्राम भोका देवरी का सामने आया है जहां पांचवा वित्त मद से 3 लाख 21 हजार रूपये की लागत से मेनरोड से मुरली के घर तक सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें बिना समतलीकरण के बोल्डर  डाल कर सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है वहीं ग्रामीणों का कहना है . सरपंच, सचिव के द्वारा बोल्डर के ऊपर सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया गया है जिसमें नियमों को ताक में रखकर भ्रष्टाचार के उद्देश्य से पूरी तरह गुणवत्ताहीन सी सी सड़क  बनाई जा रही है वही ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जहां बड़े-बड़े बोल्डर के ऊपर से ही सीसी रोड की ढलाई करा दी गई है जिससे सीसी रोड का समय से पूर्व ही टूटने की संभावना बनी हुई है जो की ग्राम विकास में क्षति है अगर गुणवत्तापूर्ण सीसी रोड बनाया जाता तो रोड अपने समय सीमा तक चल सकता था।अगर सी सी सड़क समय से पूर्व ही क्षतिग्रस्त हो जाएगा ऐसे में ग्रामीणों को आवाजाही में समस्या होगी।वही ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ऐसा लगता है की विकासखंड घुघरी के इंजीनियर एसडीओपी सीईओ साहब पंचायत को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि परसेंट मिल सके अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे रहता है।

शिकायतकर्ता शिक्षक पर गिरी गाज, दो वेतनवृद्धियाँ रोकी

बड़वानी   नरेश रायक मिली जानकारी बताया कि जिस शिक्षक ने खुद को “न्याय का योद्धा” बताकर मोर्चा खोला था, वही अब प्रशासन की फाइलों में आरोपी बनकर दर्ज हो चुका है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक-01 बड़वानी में छात्र से मारपीट का आरोप लगाने वाले शिक्षक जगदीश गुजराती अब खुद फर्जी पत्राचार, दबाव बनाने और अधिकारों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं। कहते हैं — जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही पहले उसमें गिरता है। बड़वानी में यह कहावत अब सरकारी कागज़ों में दर्ज हो चुकी है।  शिकायत से शुरू हुआ खेल शिक्षक जगदीश गुजराती ने सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग में शिकायत दर्ज कराई कि 18 जुलाई को कक्षा 9वीं ‘सी’ में अतिथि शिक्षक पंकज गुर्जवार ने छात्रों सहित उनकी पुत्री को लकड़ी के डंडे से पीटा, जिससे हाथ में “फ्रैक्चर” हो गया। मामला सुर्खियों में आया, पर जब जांच शुरू हुई तो कहानी की परतें खुद ही उखड़ने लगीं।  जांच में फिसली शिकायत की ज़मीन सहायक आयुक्त द्वारा गठित जांच दल ने विद्यार्थियों, स्टाफ, तत्कालीन प्राचार्य आर.एस. जाधव सहित सभी पक्षों के बयान लिए। प्रतिवेदन दिनांक 06 नवंबर 2025 में साफ लिखा गया — घटना उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई गई। रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि हाथ में फ्रैक्चर होता तो छात्रा नियमित रूप से विद्यालय नहीं आती, हाथ में प्लास्टर होता और चिकित्सकीय प्रमाण सामने आते। यानि शिकायत की नींव ही कमजोर निकली।  फर्जी आदेश बनवाकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच बंद होते ही शिक्षक जगदीश गुजराती पर सबसे बड़ा आरोप लगा — सहायक आयुक्त के नाम से फर्जी पत्र जारी करवा कर जावक तक कराने का। सहायक आयुक्त बड़वानी ने पत्र क्रमांक 11755 दिनांक 10 दिसंबर 2025 में साफ लिखा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्रभाव से कूट रचित पत्र क्रमांक 11555 दिनांक 08 दिसंबर 2025 जारी कराया, जिसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया। यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा प्रशासनिक विश्वासघात है।  निलंबन की तलवार, नोटिस की चोट फर्जीवाड़ा सामने आते ही संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग इंदौर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि प्रकरण के आधार पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है और शिक्षक को इंदौर तलब किया गया। अब शिक्षक की कुर्सी डगमगा रही है और फाइलें तेजी से ऊपर बढ़ रही हैं।  पर्दे के पीछे संरक्षण का खेल सूत्र बताते हैं कि जैसे ही कार्रवाई की आहट हुई, कुछ नेता और अफसर शिक्षक के बचाव में मैदान में उतर आए। जिले के एक बीईओ तक इंदौर पहुँच गए। यानी सवाल उठता है — क्या नियम सबके लिए समान हैं या सिफारिश से गुनाह धुल जाते हैं? उत्कृष्ट स्कूल की चमक पर दाग शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय-01 बड़वानी जिले का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल है, जहाँ प्रवेश परीक्षा से चयन होता है। यहाँ “क्रीमी लेयर” विद्यार्थी आते हैं, इसलिए परिणाम भी चमकदार रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि यहाँ के शिक्षक इतने ही काबिल हैं, तो उन्हें सामान्य स्कूलों में भेजकर क्यों नहीं परखा जाता? कागज़ों की तारीफ और ज़मीन की हकीकत में फर्क साफ दिख रहा है।  गिरी सज़ा —  दो वेतनवृद्धियाँ जब्त सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में शिक्षक जगदीश गुजराती की दो वेतनवृद्धियाँ रोकने का आदेश जारी हो चुका है। यह कार्रवाई फर्जी पत्राचार और विभागीय अनुशासनहीनता के आधार पर की गई। यह सिर्फ शुरुआत है या अंतिम फैसला — अब सबकी निगाहें प्रशासन पर हैं।   अब असली सवाल क्या शिक्षक कानून से ऊपर हैं? क्या फर्जी पत्र बनवाना “न्याय” कहलाता है? क्या संरक्षण से सच्चाई दबाई जा सकती है? बड़वानी का यह मामला अब सिर्फ स्कूल का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की खुली परीक्षा बन चुका है।

साइबर सहायता से पुलिस कार्रवाई: ChatGPT ने बताया दुष्कर्म की घटना, रैपिडो चालक फंसा

इंदौर   इंदौर शहर से डराने वाली खबर सामने आई है। रावजी बाजार थाना क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म मामले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि एक रैपिडो चालक ने बातों के जाल में फंसाकर किशोरी को अपने कमरे पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़ता ने सूझबूझ दिखाते हुए मोबाइल पर चैट जीपीटी के माध्यम से चाइल्ड हेल्पलाइन और थाने का नंबर निकाला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी अंकित नागर (22) निवासी राजगढ़ को गिरफ्तार कर लिया है। बातों के जाल में फंसाया, फिर ले गया रूम पर रविवार को किशोरी सामान खरीदने निकली थी। रैपिडो चालक अंकित से उसकी बातचीत हुई। अंकित ने उसे झांसा दिया कि उसे भी अपने भांजे के लिए कपड़े खरीदने हैं। दोनों के साथ में खरीदारी करने के बाद किशोरी ने पैसे खत्म होने की बात कही तो आरोपी झांसे में लेकर उसे नेहरू नगर स्थित अपने कमरे पर ले गया। चैट जीपीटी से मांगी मदद वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। हैरानी की बात यह है कि वहां से थाना कुछ कदम दूर है, लेकिन घबराहट में पीड़ता सीधे थाने नहीं गई। उसने अपने मोबाइल पर 'चैट जीपीटी' का उपयोग किया और चाइल्ड हेल्प लाइन के नंबर निकाले। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और किशोरी को समझा-बुझाकर थाने लाया गया। 8 दिन पहले ही शुरू किया था काम थाना प्रभारी के मुताबिक, आरोपी अंकित नागर (22) मूलत: राजगढ़ का रहने वाला है और इंदौर में पढ़ाई के साथ रैपिडो चलाता है। पूछताछ में बताया कि 8 दिन पहले ही उसने रैपिडो का काम शुरू किया है। अब रैपिडो कंपनी को नोटिस जारी किया है। जांच की जा रही है कि आरोपी का पुलिस वेरिफिकेशन करवाया गया था या नहीं। मामले में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बलात्कार की गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज की है। बयानों के उलझन में जांच जारी शुरुआती पूछताछ में पीड़ता और आरोपी के बयानों में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं। थाना प्रभारी के मुताबिक, घटनाक्रम की कडिय़ों को जोड़ा जा रहा है। महिला पुलिस की मौजूदगी में पीडि़ता के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें उसने बलात्कार की पुष्टि की है। चूंकि मामला किशोरी से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसे अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से ले रही है।

बजट की खूबियों पर सीएम की प्रस्तुति, फंड से 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहर होंगे विकसित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आज राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट की खूबियां बताएंगे। बीजेपी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा रहेंगे शामिल।  रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कह चुके हैं कि केंद्रीय बजट में गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं और महिलाओं पर विशेष फोकस है। इसमें 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के विकास और सभी शहरी आर्थिक क्षेत्रों पर 5 साल में 5000 करोड रुपए खर्च करने, छोटे शहरों में तीर्थ स्थल विकसित करने, हर जिले में एक महिला छात्रावास के निर्माण और जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने की व्यवस्था से प्रदेश को बहुत लाभ प्राप्त होगा। क्लिनिकल ट्रायल स्थलों का भी विकास होगा। केंद्रीय बजट में केयर इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान किए गए हैं। इससे बुजुर्गों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था होगी। गंभीर बीमारियों की दवाऐं भी सस्ती होंगी, जिससे सभी वर्गों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा है कि केंद्रीय बजट में वस्त्र उद्योग सेक्टर में रिफॉर्म पर बल दिया गया है, इससे मध्य प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने मध्य प्रदेश को पीएम मित्र पार्क के रूप में टेक्सटाइल क्षेत्र की बड़ी सौगात दी है, इससे तीन लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिलने के साथ ही 6 लाख किसानों को लाभ होगा। इस पार्क से प्रदेश का मालवा निमाड़ अंचल नई उड़ान के लिए तैयार है। बजट में देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट और एआई के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया है, इसका आने वाले दिनों में प्रदेश और देश को तरक्की में बड़ा योगदान होगा। दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने बजट के बाद कहा था कि केंद्रीय बजट आने वाले 10 वर्षों में भारत के विकास की दिशा तय करेगा। जिन क्षेत्रों में दुनिया के केवल दो-तीन देशों का दबदबा है, उन रणनीतिक उत्पादों के निर्माण पर बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में पहली बार अलग मालगाड़ी कॉरिडोर बनाने की बात की गई है, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा और व्यापार बढ़ेगा। खण्डेलवाल ने कहा है यह बजट डर से मुक्त टैक्स व्यवस्था की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बजट हर वर्ग को राहत देने वाला बजट है।

मौसम अलर्ट: MP के कई शहरों में बारिश और ओले, कोहरे ने घटाई विजिबिलिटी 30-50 मीटर तक

भोपाल  मध्य प्रदेश में घने कोहरे के साथ बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। इसी के साथ आज भी कई जिलों में मावठा गिरने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अगले तीन दिन कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छा सकता है। जबकि, कहीं-कहीं हल्की बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के चलते एमपी में ओले और बारिश का दौर जारी है। जबकि 5 फरवरी को पश्चिम-उत्तरी भारत में एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा, जिससे 10 फरवरी तक प्रदेश में बारिश और ओलों का दौर फिर से शुरू हो सकता है। इन जिलों में बारिश के आसार मंगलवार को ग्वालियर, राजगढ़, रीवा विदिशा, गुना, मुरैना, भिंड, आगर मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, सतना, सागर, दमोह, दतिया, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी में गरज चमक के साथ पानी गिरने की संभावना है। जबकि, भोपाल समेत कई जिलों में सुबह मध्यम कोहरा भी देखने को मिला। आफत बनी बारिश और ओलावृष्टि मौसम विभाग ने 3 फरवरी के लिए 19 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक 6 फरवरी के बाद ही बारिश से राहत मिलेगी. पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने से मौसम में अचानक से बदलाव हुआ है. रविवार और सोमवार को निमाड़ क्षेत्र में तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है, जबकि ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में आंधी के साथ बरसात हुई है. इससे प्रदेश में फसलों को भारी नुकसान हुआ है. इन जिलों के लिए जारी की गई चेतावनी मौसम वैज्ञानिक ई दिव्या बताती हैं, "वेस्टर्न डिस्टरबेंस पंजाब और इससे लगे हरियाणा के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसकी वजह से मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की स्थिति बनी हुई है. इसके अलावा 5 फरवरी की रात को नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा. इसकी वजह से प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश की संभावना बन सकती है. हालांकि, अब ओलावृष्टि की संभावना तो नहीं है, लेकिन कई जिलों में गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है." इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक 3 फरवरी को आगर मालवा, राजगढ़ गुना, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, भिंड, सागर, दमोह, टीकमगढ़ निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा जिले में बारिश हो सकती है. जबकि 4 फरवरी को श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना जिले में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. 5 और 6 फरवरी को यहां बरसेगा पानी 5 फरवरी को राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा जिले में बारिश हो सकती है. 6 फरवरी को गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली में बारिश हो सकती है. एक साथ सक्रिय है 3 सिस्टम आईएमडी के अनुसार वर्तमान में 3 सिस्टम एक साथ एक्टिव है, जिस वजह से रविवार और सोमवार को ओरछा, निवाड़ी, टीकमगढ़, आगर, उज्जैन, दतिया जिलों में बारिश रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा नीमच और मंदसौर में ओले गिरे हैं, जबकि आगर में तेज हवाएं चली. छतरपुर में घना कोहरा छाया रहा, वहीं ग्वालियर, उज्जैन रीवा में हल्का कोहरा छाया रहा.  टेम्प्रेचर में कोई बदलाव नहीं मौसम विभाग के मुताबिक तापमान में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है. प्रदेश में अधिकतम तापमान खरगौन में 30.2 रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे न्यूनतम तापमान पचमढ़ी में 8.4 रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग के मुताबिक फरवरी माह में धीरे-धीरे तापमान बढ़ेगा. खासतौर से ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा संभाग में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा.  एमपी के इन जिलों में 3 दिन मौसम का हाल 4 फरवरी बुधवार को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, सतना, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर और पन्ना में मध्यम कोहरा रहेगा। -5 फरवरी गुरुवार को ग्वालियर, गुना, रीवा, राजगढ़, मऊगंज, मुरैना, भिंड, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, सतना, दतिया, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर में कोहरे का असर देखने को मिलेगा। -6 फरवरी शुक्रवार को ग्वालियर, गुना, रीवा, शिवपुरी, श्योपुर, सिंगरौली, सतना, सीधी, अशोकनगर, मऊगंज, मुरैना, भिंड, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में कोहरा रहेगा।

महाकाल के दर्शन पर अलका लांबा, बोलीं—हमारी पहचान नाम से नहीं, काम से है

उज्जैन  अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचीं। उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। अलका लांबा ने महाकाल मंदिर में पहले नंदी हाल और फिर देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने नंदी मंडपम में बैठकर ध्यान लगाया। धार्मिक वातावरण के बीच उनका दौरा आध्यात्मिक दिखा, लेकिन बाहर निकलते ही सुर सियासी हो गए। मीडिया से चर्चा में लांबा ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम में “भगवान” जोड़ लेना काफी नहीं, असली पहचान काम से होती है। उनके मुताबिक, आज प्रदेश में कुछ नेताओं के काम समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाले नजर आ रहे हैं। उन्होंने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव ने सृष्टि बचाने के लिए विष पिया था, लेकिन आज के कुछ सत्ताधारी समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि इस तरह की भाषा और राजनीति लोगों के बीच नफरत बढ़ा रही है। लांबा ने यात्रा के दौरान देखी एक घटना का जिक्र करते हुए और गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इंदौर से उज्जैन आते समय उन्होंने एक ऑटो पर ऐसा प्रचार देखा जिसमें एक ऐसे दोषी अपराधी का महिमामंडन किया गया था, जिसे नाबालिग बेटियों से जुड़े जघन्य अपराधों में सजा हो चुकी है। इसे उन्होंने बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपराधियों को हीरो बनाकर पेश करना महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरनाक सोच है। महिला कांग्रेस की नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी ऐसी मानसिकता के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी और समाज में अपराधियों की छवि चमकाने की कोशिशों का विरोध करेगी। धार्मिक यात्रा के बहाने शुरू हुआ यह दौरा, आखिरकार प्रदेश की सियासत में तीखा संदेश छोड़ गया।  

धक्कादायक मामला: महिला पटवारी से दुष्कर्म के लिए डिप्टी कलेक्टर को मिली दस साल की सजा

बड़वानी बड़वानी की तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना के गंभीर मामले में तत्कालीन एसडीएम (सेंधवा) और वर्तमान उज्जैन डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अफसर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में एफआईआर के बाद फरार होने पर 4 मई 2024 को बड़वानी पुलिस ने खराड़ी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें सस्पेंड किया था। तभी से वह सस्पेंड थे। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अभय सिंह खराड़ी वर्ष 2016 से 2024 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद का रसूख दिखाकर 4 से 5 बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी थी। ब्लैकमेलिंग और सिंदूर भरकर तस्वीरें लीं न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अफसर महिला को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। वह महिला के आने वाले रिश्तों को तुड़वा देता था और फोन पर तेजाब डालने और अपहरण करने की धमकी देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे बेहोश कर उसकी मांग में सिंदूर भर फोटो खींची थी, ताकि समाज में उसे अपनी पत्नी बताकर बदनाम और ब्लैकमेल कर सके। पत्नी को जान से मारने के आरोप भी लग चुके 31 अक्तूबर 2017 में खराड़ी पर पत्नी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर जान से मारने के आरोप भी लगे थे। खराड़ी उस वक्त झाबुआ डिप्टी कलेक्टर थे और पत्नी सुनीता खराड़ी धार जिले के दीनदयालपुरम में रहती थीं। कोतवाली पुलिस ने खराड़ी को बेहोशी की हालत में मिलने पर इलाज करवाया था। सुनीता खराड़ी ने पुलिस को बताया उनके पति ने गुंडे बुलाकर उनके साथ मारपीट की और उसको बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। घटना के दिन रात 3 बजे उनके पति ने उनकी दूसरी पत्नी के तीन भाइयों के साथ दो और लोगों को बुलाया। दूसरी पत्नी का मुंह दबा दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद जान से मारने की कोशिश की। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।  

मेडिकल ब्रिलियंस! एम्स भोपाल ने मरीज के लिए अंजाम दी दुर्लभ और जटिल ‘होल लंग्स लैवेज’ सर्जरी

 भोपाल  पत्थर, सीमेंट और निर्माण से जुड़ी दुनिया जितनी मजबूत दिखती है, उतनी ही कमजोर जिंदगियां उसके पीछे काम कर रही होती हैं। इन्हीं जिंदगियों को धीरे-धीरे निगल लेने वाली एक खामोश और जानलेवा बीमारी है सिलिकोसिस। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें फेफड़े धीरे-धीरे पत्थर जम जाता है।  एम्स भोपाल में मध्य भारत की पहल एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने इस मरीज के इलाज के लिए ‘होल लंग्स लैवेज’ नाम की अत्यंत जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस प्रक्रिया में फेफड़ों के अंदर जमा प्रोटीन और धूल को सलाइन वाटर से धोकर बाहर निकाला जाता है। एम्स प्रबंधन के अनुसार, मध्य भारत में यह पहला मौका है, जब सिलिकोसिस से प्रभावित फेफड़ों में जमे प्रोटीन को इस तकनीक से सफलतापूर्वक साफ किया गया हो। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ एक मरीज का इलाज नहीं, बल्कि उन हजारों मजदूरों के लिए उम्मीद की किरण है, जो रोजाना पत्थरों और धूल के बीच काम करते हुए अपनी सांसें दांव पर लगा देते हैं। स्टोन क्रशर की धूल ने बिगाड़ी हालत एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अल्केश खुराना और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव खुराना ने बताया कि मरीज लंबे समय से स्टोन क्रशर में काम कर रहा था। वहां उड़ने वाली बारीक सिलिका धूल सांस के साथ उसके फेफड़ों में पहुंचती रही और धीरे-धीरे वहां जमती चली गई। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में डिफ्यूज एल्वियोलर प्रोटीनोसिस कहा जाता है। इसमें फेफड़ों की हवा वाली थैलियों में प्रोटीन भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान रुकने लगता है। यही कारण था कि मरीज को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी और उसका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। 6 घंटे चली बेहद जोखिमभरी प्रक्रिया डॉ. खुराना के अनुसार, होल लंग्स लैवेज एक बेहद जटिल और जोखिमभरी प्रक्रिया है। इसमें फेफड़ों के अंदर 6 से 8 लीटर तक सलाइन वाटर डाला जाता है और फिर उसे बाहर निकाला जाता है, ताकि जमा प्रोटीन साफ हो सके। यह प्रक्रिया इसलिए भी खतरनाक होती है क्योंकि ज्यादा मात्रा में पानी फेफड़ों में जाने से मरीज की जान को सीधा खतरा हो सकता है। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी के साथ करीब 6 घंटे में पूरा किया गया। डॉक्टरों की एक पूरी टीम लगातार मरीज के ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति और ब्लड प्रेशर पर नजर रखे हुए थी। कार्डियक ओटी में हुआ ऑपरेशन इस जटिल प्रक्रिया को कार्डियक ओटी में किया गया, जिसमें कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. योगेश निवारिया भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस इलाज की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब एक फेफड़े को साफ किया जा रहा होता है, तब मरीज को दूसरे फेफड़े के सहारे ही सांस लेनी पड़ती है। इस मरीज के मामले में मुश्किल और बढ़ गई थी, क्योंकि दूसरा फेफड़ा भी काफी कमजोर हो चुका था। ऐसे हालात में कई बार मरीज को हार्ट-लंग मशीन यानी आर्टिफिशियल लंग्स पर रखना पड़ता है। हालांकि, डॉक्टरों की सतर्कता और सही रणनीति के चलते इस मरीज को मशीन पर डालने की जरूरत नहीं पड़ी और प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो गई। क्या है सिलिकोसिस और क्यों है यह जानलेवा सिलिकोसिस सिलिका नामक बेहद बारीक धूल के कणों से होने वाली बीमारी है। ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और वहां जमा होकर फेफड़ों की कोमल झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे फेफड़े स्पंज जैसे नरम रहने के बजाय पत्थर की तरह सख्त हो जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, थकान और ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। अंतिम चरण में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज की मौत तक हो सकती है। मजदूर सबसे ज्यादा चपेट में सिलिकोसिस का सबसे बड़ा शिकार वे मजदूर होते हैं, जो खदानों, स्टोन क्रशर, पत्थर की पाउडर मिलों, सीमेंट फैक्ट्रियों और कांच-सिरेमिक उद्योगों में काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर मजदूर गरीब तबके से आते हैं और सुरक्षा उपकरणों की कमी या जानकारी के अभाव में इस जानलेवा धूल के संपर्क में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिलिकोसिस से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। इसके लिए कार्यस्थलों पर धूल नियंत्रण, मास्क और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

भव्य शैला महोत्सव में उमड़ा उत्साह, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने लोगों को किया प्रेरित

शैला महोत्सव का भव्य आयोजन, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने बढ़ाया उत्साह ख़मतरा में शैला महोत्सव की धूम, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने दिखाई सहभागिता भव्य शैला महोत्सव में उमड़ा उत्साह, विधायक नारायण सिंह पट्टा ने लोगों को किया प्रेरित     ख़मतरा  आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत और परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से 1 फरवरी को पैतृक ग्राम ख़मतरा (घुघरी) में 'शैला महोत्सव' का गरिमामय आयोजन किया गया। रात्रि 9 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक श्री नारायण सिंह पट्टा उपस्थित रहे। संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम महोत्सव के दौरान पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। ढोल और मांदर की थाप पर थिरकते नर्तक दलों ने अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विधायक पट्टा ने समाज के लोगों के साथ मिलकर अपनी जड़ों और रीति-रिवाजों का उत्सव मनाया। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत सौंपने का पर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया गया कि हमारी नृत्य कलाएं, उत्सव और परंपराएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। बल्कि, ये वे अनमोल क्षण हैं जब हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपते हैं। यह महोत्सव हमारी पहचान को जीवित रखने और युवाओं को अपने मूल से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।  * पारंपरिक शैला नृत्य: नर्तक दलों द्वारा अनुशासन और तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन।  * रीति-रिवाज का संरक्षणसमाज की प्राचीन परंपराओं का जीवंत चित्रण।  * एकता का संदेश: 'जय सेवा' और 'जय जोहार' के उद्घोष से गूंजा आयोजन स्थल।

स्वास्थ्य चेतावनी: मासूम की मौत, कफ सिरप ने दोनों किडनियों को प्रभावित किया

 बैतूल  कथित जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़ा मामला लगातार भयावह होता जा रहा है। पहले ही बच्चों सहित 12 से अधिक लोगों की जान लेने के आरोपों से घिरे इस सिरप ने अब बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की भी जिंदगी छीन ली। 120 दिन तक नागपुर एम्स में चले लंबे इलाज के बाद मासूम ने बीती रात अंतिम सांस ली। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब हर्ष का शव उसके गांव टीकाबरी (बोरदेही) पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक साधारण सर्दी-जुकाम से शुरू हुआ दर्दनाक सफर हर्ष यदुवंशी (4 वर्ष) पिता गोकुल यदुवंशी, जो की  ग्राम टिकाबर्री, तहसील आमला, जिला बैतूल का रहने वाला था। परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में हर्ष को सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत हुई थी। 26 सितंबर को छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक डॉ. एस.एस. ठाकुर से उसका इलाज कराया गया। आरोप है कि इसी दौरान उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। दवा लेने के कुछ समय बाद ही बच्चे की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उल्टी, कमजोरी और पेशाब की दिक्कत के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल, फिर बड़े मेडिकल सेंटर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर किया गया, जहां अक्टूबर से एम्स में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया था कि बच्चे की दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं। 120 दिन तक डायलिसिस और गहन उपचार के बावजूद आखिरकार मासूम जिंदगी की जंग हार गया। शिकायत के बाद भी धीमी रही कार्रवाई हर्ष के चाचा श्याम देवा यदुवंशी ने पहले ही प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आशंका जताई थी कि बच्चे की किडनी फेल होने के पीछे संदिग्ध कफ सिरप हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया था कि डॉक्टर को दवा के संभावित दुष्परिणामों की जानकारी होने के बावजूद सिरप दिया गया। 22 नवंबर 2025 को एसडीओपी ने परासिया थाने में दर्ज जहरीले कफ सिरप प्रकरण में इस शिकायत को शामिल करने के निर्देश दिए थे। पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश केस डायरी में क्रमांक 39 पर हर्ष का मामला दर्ज बताया गया है। साथ ही श्रीसन फार्मा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप की जब्त बोतल का उल्लेख भी है। गिरफ्तारी हुई, पर सवाल अब भी बाकी अब तक इस मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दवा कंपनी से जुड़े लोग, केमिकल सप्लायर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। कुंडीपुरा पुलिस ने भी अलग प्रकरण में दो और गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है। परासिया के स्टेशन रोड स्थित उस निजी क्लीनिक पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जहां इलाज के बाद कई बच्चों में किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे? पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि पुलिस डायरी में डॉ. एस.एस. ठाकुर और डॉ. अमित ठाकुर (पिता-पुत्र) के नाम दर्ज हैं, फिर भी क्लीनिक न तो सील किया गया और न ही उनके खिलाफ वैसी सख्ती दिखाई गई जैसी अन्य आरोपियों पर की गई। गांव में मातम, परिजनों की एक ही मांग “दोषियों को सजा” हर्ष की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। गांव में मातम पसरा है। परिजन बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं “अगर समय पर कार्रवाई होती, तो क्या हमारा बच्चा बच सकता था?” परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद, निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदारों चाहे वे डॉक्टर हों, दवा निर्माता या सप्लाई चेन से जुड़े लोग, सभी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल यह मामला केवल एक दवा या एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। यह दवा गुणवत्ता जांच, लाइसेंसिंग, निजी क्लीनिकों की निगरानी और मेडिकल स्टोर्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती और जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलती, तब तक लोगों के मन से यह डर खत्म होना मुश्किल है कि एक साधारण सर्दी-जुकाम की दवा भी जानलेवा साबित हो सकती है।  

शिवराज ने रायसेन के लिए सुनाई उम्मीद की खबर, भारत सरकार से मिली रोप-वे मंजूरी

भोपाल मध्य प्रदेश के विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में पिछले 100 दिनों से जारी सांसद खेल महोत्सव का समापन हो गया। इस मौके पर स्थानीय सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे रायसेन में स्थित किले तक रोप-वे बनाने की अनुमति लेकर आए हैं। साथ ही उन्होंने इस बारे में जारी आदेश को समारोह में मौजूद रायसेन के विधायक प्रभुराम चौधरी को सौंप दिया। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि रोप-वे बनने के साथ ही किले पर एक म्यूजियम भी बनाया जाएगा, जिसमें इलाके के गौरवशाली इतिहास को बताते हुए इससे जुड़ी धरोहरों को वहां संजोया जाएगा। साथ ही इलाके के किसानों की भलाई के लिए लगने वाले मेले की जानकारी देते हुए शिवराज ने कहा कि यहां पर अप्रैल महीने में तीन दिनों के लिए किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें उन्हें खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अप्रैल महीने में तीन दिन लगेगा किसान कुंभ और मेला कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा, 'रायसेन वालों, अभी डॉ प्रभुराम चौधरी जी कह रहे थे कि किला बहुत ऊपर है, तो प्रभुरामजी आज आप ये आदेश ले लीजिए, जो हमारा रायसेन के किले में रोपवे की अनुमति भारत सरकार से मैं लेकर आया हूं रायसेन वालों। मैं आपको आदेश की कॉपी दे रहा हूं, अब रायसेन रोप-वे जाएगा और किले के ऊपर एक शानदार म्यूजियम भी बनाया जाएगा। ऊपर वाले किले को भी शानदार बनाया जाएगा। रायसेन में मेडिकल कॉलेज तो खुलेगा ही, उसकी घोषणा माननीय मुख्यमंत्री कर चुके हैं और किसानों के लिए 12, 13 और 14 अप्रैल को किसान कुंभ और किसानों का मेला लगेगा। जिसमें खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। रायसेन अब हिंदुस्तान में आइडियल बनेगा।' इसके आगे शिवराज ने कहा, 'मैं फिर आपको वचन देता हूं कि आपकी मुस्कुराहत ही मेरी जिंदगी है, आपके चेहरे पर खुशी लाने के लिए मामा कोई कसर नहीं छोड़ेगा।' MLA बोले- नई ऊंचाई तक ले जाना हमारा संकल्प वहीं कार्यक्रम में मौजूद रायसेन के विधायक व पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘रायसेन के मेरे प्रिय भाई-बहनों, आज हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है। माननीय केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान जी के प्रयासों से रायसेन किले में रोप-वे निर्माण की अनुमति भारत सरकार से प्राप्त हुई है। यह आदेश पत्र प्राप्त कर मैं आप सभी के साथ इस सुखद समाचार को साझा कर रहा हूं। अब श्रद्धालु और पर्यटक रोप-वे के माध्यम से किले तक सहज और सुरक्षित रूप से पहुंच सकेंगे। साथ ही, किले में एक भव्य संग्रहालय (म्यूजियम) का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे रायसेन की गौरवशाली विरासत को नई पहचान मिलेगी। रायसेन के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का हमारा संकल्प निरंतर जारी रहेगा।’ बहुत ऊंची पहाड़ी पर बना है 11वीं शताब्दी का किला रायसेन के जिस किले तक पहुंचने के लिए शिवराज ने रोपवे बनाने की अनुमति मिलने की जानकारी दी है, वह किला राजधानी भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूर है और एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख किलों में से एक है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में किया गया था और यह पहले हिंदू राजाओं का गढ़ था। बाद में यह किला अफगान और मुग़ल शासकों के अधीन रहा। इस किले में हिंदू और मुगल वास्तुकला का मिश्रण दिखा देता है। इस किले के अंदर बादल और रानी महल, जलाशय, मंदिर, और हजरत पीर फतेह उल्लाह शाह बाबा की दरगाह स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष उर्स के मौके पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। बता दें कि पिछले सौ दिनों से विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव चल रहा था। जिसका समापन सोमवार को हो गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में यहां पर भारतीय टीम के स्टार क्रिकेटर रविंद्र जडेजा पहुंचे थे और उन्होंने रोड शो में हिस्सा लेते हुए खेल महोत्सव में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को संबोधित भी किया।

बाइक स्टंट का वीडियो वायरल: गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड ने ट्रैफिक नियमों को ठेंगा दिखाया

सागर  मध्य प्रदेश के सागर जिले में बाइक चलाते हुए युवक और युवती की स्टंट का वीडियो इंटरनेट पर हॉट केक बना हुआ है. वायरल वीडियो में बाइक की सीट पर पीछे बैठने के बजाय युवती आगे बैठी हुई है और उसका मुंह पीछे की तरफ घूमा हुआ है. सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ यह वीडियो लोगों द्वारा खूब पंसद किया जा रहा है.   आमतौर पर बाइक पर बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड बाइक की सीट पर आगे-पीछे के बैठकर राइड करते हैं. समय बदला युवतियां पर दोनों पैर एक साइड रखने के बजाय क्रॉस बैठने लगी, लेकिन सागर जिले के अतरंगी जोड़े बाइक पर ऐसी मुद्रा में सवार हुआ कि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड पर झप्पी डाल कर बैठी है गर्लफ्रेंड वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि युवती बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड को बाइक पर झप्पी डाल कर बैठी है. बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के स्टंट को सड़क पर साथ चल रहे राहगीरों ने अपने मोबाइल पर कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. देखते ही देखते यह अतरंगी बाइक राइड का वीडियो वायरल हो गया.     बाइक पर गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का हैरतअंगेज स्टंट     मध्य प्रदेश के सागर जिले में बाइक चलाते हुए युवक और युवती की स्टंट का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. युवती बाइक चला रहे बॉय फ्रेंड को बाइक पर झप्पी डाल कर बैठी है. बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड के स्टंट को सड़क पर साथ चल रहे…  युवती ने मुंह ढक रखा है, ताकि पहचान सार्वजनिक न हो सके वीडियो जरुआखेड़ा–जलंधर रोड का है, जहां किसी ने अतरंगी जोड़े को अजीबोगरीब मुद्रा में बाइक राइड करते हुए कैमरे में कैद कर लिया. वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक ने युवती को आगे उल्टा बैठाकर बाइक चला रहा है. युवती ने अपना मुंह कपड़े से ढक रखा है, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो सके. खतरनाक और अतरंगी तरीके से बाइक राइड कर रहे युवा जोड़े को सड़क पर चल रहे कई राहगीरों ने ऐसा करने से रोका, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया. सवाल है कि ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा नियमों की धज्जी उड़ाने वाले जोड़े के वायरल वीडियो को पुलिस संज्ञान में कब लेगी? सड़क पर स्टंटबाजी करने को लेकर क्या है ट्रैफिक कानून? गौरतलब है प्रदेश में सड़क पर स्टंटबाजी के खिलाफ सख्त प्रावधान हैं, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दोषी पर भारी जुर्माना, ड्राइविंग लाइसेंस रद्दीकरण और गिरफ्तारी शामिल है. पुलिस IPC की धाराओं के तहत भी कार्रवाई कर सकती है. 1 जनवरी 2026 से नए नियमों के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है.

सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया…

सीआईआई मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष और आईसेक्ट समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया…  भोपाल  केंद्रीय बजट 2026–27 ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप एक दूरदर्शी और विकासोन्मुख रोडमैप प्रस्तुत करता है। एमएसएमई, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर ऋण उपलब्धता पर दिया गया विशेष जोर उद्यमिता और रोज़गार के नए अवसरों को मजबूती देगा, विशेष रूप से मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जहाँ एमएसएमई का मजबूत आधार मौजूद है। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों में निरंतर निवेश से उत्पादकता और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। साथ ही, महिलाओं की भागीदारी, स्किलिंग और उभरते क्षेत्रों को समर्थन देने वाली पहलें सतत और समावेशी विकास की समग्र सोच को दर्शाती हैं। कुल मिलाकर यह बजट एक सशक्त, भविष्य-तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखता है। डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी उपाध्यक्ष, सीआईआई मध्य प्रदेश कार्यकारी उपाध्यक्ष, आईसेक्ट समूह कुलाधिपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी

Get Set Parent की फाउंडर एवं AISECT समूह की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पल्लवी राव सी. चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया:

Get Set Parent की फाउंडर एवं AISECT समूह की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पल्लवी राव सी. चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया: स्कूलों में कंटेंट क्रिएटर और एवीजीसी (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) लैब कार्यक्रम लागू करने का प्रस्ताव एक प्रगतिशील कदम है, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल कंटेंट अब बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है। एनीमेशन, गेमिंग और विज़ुअल स्टोरीटेलिंग से संरचित परिचय न केवल रचनात्मकता को बढ़ावा देगा, बल्कि एकाग्रता, सहयोग और स्क्रीन के सजग उपयोग जैसे आवश्यक कौशल भी विकसित करेगा। ये भविष्य के लिए तैयार करने वाली क्षमताएँ हैं, जो बच्चों की पूरी शैक्षणिक यात्रा में सहायक होंगी और उभरते रचनात्मक करियर के लिए नए अवसर खोलेंगी। उतनी ही महत्वपूर्ण है सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) मार्ट्स की शुरुआत। महिलाओं उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट्स बनाकर, बजट बच्चों को ऐसे परिवेश से जोड़ता है जहाँ वे वास्तविक जीवन में महिलाओं को नेतृत्व करते, उद्यम संचालित करते और बदलाव लाते हुए देख सकते हैं। इससे उन्हें सार्थक सामाजिक और आर्थिक रोल मॉडल मिलते हैं, साथ ही शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक आत्मविश्वास के बीच मजबूत संबंध भी स्थापित होता है। मिलकर, ये पहलें ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करती हैं जो रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और आकांक्षा को प्रोत्साहित करता है।

3.72 करोड़ का शिक्षा विभाग घोटाला मैहर में, स्कूल निर्माण के लिए किए गए वित्तीय कुप्रबंधन का पर्दाफाश

मैहर  मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्कूलों में लघु निर्माण कार्य जैसे पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड बनाने के नाम पर हुए 3.72 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है. दरअसल खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया. जांच में सामने आया कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर कोई ठोस निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया. जांच टीम को क्या मिला? एसडीएम एस.पी. मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया. टीम में संदीपनी विद्यालय मैहर के प्राचार्य दिनेश गोस्वामी, तहसीलदार ललित धार्वे, बीईओ राजेश द्विवेदी, बीआरसीसी चंद्र प्रताप शुक्ला, सहायक लेखपाल विनय सिंह और पटवारी आनंद पांडेय शामिल थे. टीम ने पाया कि अधिकांश स्कूलों में सिर्फ रंगाई-पुताई दिखाई दी, जबकि पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला. किन फर्मों को हुआ भुगतान जांच में सामने आया कि भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैहर की श्री रुद्र इंटरप्राइजेज और सतना की श्री महाकाल ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया. विभिन्न स्कूलों से 21 लाख से 24 लाख रुपये तक के बिलों का भुगतान दर्शाया गया है. कुल मिलाकर 17 स्कूलों में लगभग 3 करोड़ 72 लाख रुपये के बिल पास किए गए.  फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका कई प्राचार्यों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया और न ही ऐसे किसी बिल को मंजूरी दी. इससे फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजी हेराफेरी की आशंका गहरा गई है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. रिपोर्ट में संबंधित फर्मों के साथ-साथ लगभग 14 प्राचार्यों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि जल्द ही निलंबन, एफआईआर और वित्तीय वसूली जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, मामला संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.

भोपाल मंडल का बड़ा कदम: 9 महीनों में ट्रैक कायाकल्प से सुरक्षित सफर की तैयारी

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

MP Weather Alert: 25 जिलों में बारिश और ठंडी हवाएं, अगले 3 दिनों में बढ़ेगी ठिठुरन

भोपाल  मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम और ठंड में बदलाव देखने को मिल रहा है. अधिकतर जिलों में बादल छाए रहने से तापमान में गिरावट आई है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि, अगले 3 दिनों में मध्य प्रदेश के 25 जिलों में मावठा की बारिश हो सकती है. जिससे तापमान में और गिरावट आएगी. बारिश की आशंका ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. बीते दिनों कई जिलों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से ठंड बढ़ गई थी. हालांकि कई जिलों में बारिश का दौर रुक गया है लेकिन ठंडक बनी हुई है. पूरे प्रदेश में सुबह के समय कोहरा छाया रहता है. मौसम में बदलाव के संकेत, मौसमी प्रणालियां सक्रिय मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ''वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में सक्रिय है. इसके साथ एक द्रोणिका भी जुड़ी हुई है, जो मौसम में बदलाव के संकेत दे रही है.'' उन्होंने बताया कि, ''दक्षिणी हरियाणा और उससे लगे उत्तरी राजस्थान के क्षेत्र में एक प्रेरित चक्रवात बना हुआ है. इस चक्रवात से लेकर मध्य महाराष्ट्र तक एक लंबी द्रोणिका विकसित हुई है, जो गुजरात होते हुए आगे बढ़ रही है. इस मौसमी प्रणाली के कारण संबंधित क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा सकती है.'' मध्य प्रदेश में बारिश का अनुमान मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, ''पूर्वोत्तर भारत के ऊपर लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी जेट स्ट्रीम की हवाएं सक्रिय हैं. जिनकी रफ्तार करीब 232 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई है. इन तेज हवाओं का प्रभाव आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज को और प्रभावित कर सकता है.'' दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ''5 फरवरी से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है. इसके असर से कुछ इलाकों में बादल, हल्की से मध्यम वर्षा और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है.'' नीमच-मंदसौर में गिरे ओले  नीमच और मंदसौर जिले में तेज हवाएं चलीं, इस दौरान ओले भी गिरे. कई गांव सफेद बर्फ की चादर से ढंक गए. इसके अलावा ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में भी हल्की बारिश हुई. बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि बीते दिनों हुई बारिश से किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं. गेहूं की फसल, जो अभी फूलने की स्टेज में है, खराब हो सकती है. बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में रुक-रुककर बारिश हो रही है. जिससे किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है. खंडवा सहित कई जिलों में खेतों में खड़ी लगभग 50 से 60 फीसदी तक फसल नष्ट हो गई है. जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. रविवार को नीमच और मंदसौर जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. नीमच के जीरन क्षेत्र में नींबू के आकार के ओले गिरे, जिससे सड़कें बर्फ जैसी दिखाई दीं. इससे अफीम, गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल फूलों की अवस्था में है, इसलिए बारिश और ओलावृष्टि से पैदावार पर असर पड़ सकता है.

शम्भूलाल का संघर्ष और सफलता: दृष्टिहीन होते हुए भी हासिल किया पोस्ट मास्टर का पद

 आगर मालवा जीवन में जब मुसीबतें आती हे तो कई हिम्मत वाले इंसान भी अपना हौसला खो देते हैं. मगर हम आज आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों से ना सिर्फ लड़ाई की बल्कि वो सब कर दिखाया. जिसे देखकर हर कोई दंग है. युवक के इस हिम्मत की आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा हो रही है.  दरअसल हम बात कर रहे हैं आगर मालवा जिले के ग्राम महुड़िया निवासी युवक शम्भूलाल विश्वकर्मा की. शम्भूलाल दृष्टिहीन हैं. उन्हें केवल एक या दो इंच की दूरी से ही दिखाई देता है. बस शम्भूलाल इसी से अपना काम चलाता है. शम्भूलाल इतनी दूरी से देखकर ही पोस्ट ऑफिस के सारे काम कर लेते हैं. मां भी दृष्टिहीन और पिता भी लकवाग्रस्त मोबाइल चलाना भी इनके लिए जैसे बाए हाथ का खेल है. इतनी ही दूरी से मोबाइल में लॉगिन करना, पासवर्ड डालना आदि सभी काम शम्भूलाल कर लेते हैं. शम्भूलाल बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता भी लकवाग्रस्त हैं. जिसके कारण वे पलंग पर लेटे-लेटे अपना जीवन गुजार रहे हैं. शम्भूलाल की मां भी जन्म से दृष्टिहीन हैं और वो भी अपने घर का काम किसी तरह करती हैं. शम्भूलाल को जितना भी समय मिलता है वे अपने पिता के पास बैठकर पिता का हौसला बढ़ाते हैं और मां के काम में भी थोड़ा हाथ बढ़ाते हैं. शम्भूलाल गांव में ही पढ़ाई करते थे. मगर परिवार की स्थिति के चलते उन्होंने जिला मुख्यालय पर आकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया. पहले शम्भूलाल एक स्कूल में पढ़ने गए, मगर वहां उनके अनुरूप पढ़ाई नहीं थी. फिर शम्भूलाल आगर मालवा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने गए. 10वीं में मिले 87 प्रतिशत अंक और फिर लगी नौकरी यहां उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई की. आश्चर्य की बात यह थी की शम्भूलाल ने दसवीं की परीक्षा में 87% अंक अर्जित किए. इसी दौरान स्कूल के अध्यापक ने शम्भूलाल को बताया कि दृष्टिहीन लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस में भर्ती निकली है. जिसके बाद शम्भूलाल ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया और उनका चयन हो गया. शम्भूलाल जिले के बाहर नौकरी करते थे. वहां अन्य सहयोगियों की मदद से एक गरीब कन्या से उनका विवाह भी हो गया और अब शम्भूलाल के घर एक छोटा सा बच्चा भी है. शम्भूलाल ने अपनी सोच और मेहनत से अपनी जिंदगी बदल दी व पोस्ट मास्टर बन गए.

MP हाईवे पर 21 करोड़ खर्च, फिर भी हर दिन 33 दुर्घटनाएं और 10 जानें जाती हैं, हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?  

Budget 2026 में एमपी के रेलवे नेटवर्क को 7500 करोड़ का समर्थन, इस मंडल को मिलेगा विशेष गिफ्ट

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 

उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति पर एनजीटी का सख्त रुख, पर्यावरणीय संकट को लेकर उठाई आवाज

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।  

जबलपुर में 300 करोड़ का फ्लाईओवर बनेगा, MP बजट में जाम को कम करने की दिशा में बड़ा कदम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा।

गुजरात की धरा ने दिया है, मानव कल्याण और सनातन का संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जन्म उत्सव में एक साथ श्लोक पाठ का बना नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव वडोदरा में महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव में हुए शामिल मध्यप्रदेश से जुड़ी हैं स्वामी जी की जीवन यात्रा की जड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात की धरती भारत सहित अनेक राष्ट्रों में धर्म, आध्यात्म, सनातनी परम्परा, मानव कल्याण और सेवा मूल्यों को चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है। इस धरा से कभी महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसी विभूतियों ने राष्ट्र को योगदान दिया, वहीं अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। आज सऊदी अरब सहित अबूधाबी और अमेरिका में स्वामी नारायण अक्षर धाम के पारम्परिक हिन्दू मंदिर और विश्व के अनेक देशों में 600 से अधिक मंदिरों का निर्माण उल्लेखनीय है। सत्संगदीक्षा जैसे शास्त्रसम्मत ग्रंथ की रचना और हजारों सेवाभावी नवयुवान संतों का निर्माण सनातन की परम्परा को ऊंचाइयां दे रहा है। यह गर्व की बात है कि महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें मध्यप्रदेश से भी जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को गुजरात के वडोदरा में पूज्य महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्म वर्षगांठ पर उनके दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी को जन्म दिवस की बधाई देते हुए उनके शतायु होने की कामना की और आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में स्वामी जी का जन्म शताब्दी समारोह अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वडोदरा एक नगर नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है जहां भक्ति के साथ सेवा की सुदीर्घ परम्परा है। इस धरती से गुरू के उस संदेश का प्रसार हो रहा है, जो भगवान स्वामी नारायण से लेकर पूज्य महंत स्वामीजी के जीवन में अभिव्यक्त होता है। अमृत बरसाने वाली यह धारा निरंतर प्रवाहित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत वृंद ईश्वर के रूप में विराजमान रहते हैं। उनकी सामूहिक उपस्थिति बगिया में अनेक पुष्पों के एक साथ खिलने की तरह होती है। अपनी शिक्षाओं से वे बच्चों को आलोकित करते हैं। निश्चित ही यह बच्चे भारतीय संस्कृति को जीवंत करने का कार्य करेंगे। दीक्षित हो रहे बच्चे भी वंदन अभिनंदन के पात्र हैं। संस्कृत श्लोकों के सामूहिक पाठ का बना नया रिकार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव में 15 हजार 666 बच्चों को एक साथ स्वामी जी द्वारा रचित 'सत्संग दीक्षा' ग्रंथ के 315 श्लोकों का पाठ किए जाने को एक उपलब्धि बताया। इस गतिविधि का नया गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड भी बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री पटेल ने महंत स्वामी महाराज से जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने दोनों मुख्यमंत्रियों का पुष्पमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में श्री गुणातितानंद स्वामी की अद्भुत महिमा एवं जीवन पर केंद्रित नाटक का मंचन किया गया। इसमें गौंड साम्राज्य के राजा श्री भगवत सिंह के चरित्र के माध्यम से गुणातितानंद स्वामी के सामाजिक और धार्मिक कार्यों की जानकारी दी गई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वडोदरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री पटेल ने आत्मीय स्वागत किया।

ऊर्जा बचत का संदेश, जिम्मेदारी का आह्वान — कृष्णा गौर ने किया सक्षम महोत्सव का उद्घाटन

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बच्चे भी बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवन शैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।  

किसान समृद्ध होंगे तो प्रदेश होगा मजबूत : सीएम डॉ. यादव का बड़ा बयान

कृषि वर्ष आयोजन के लिए सरकार ने तय की रूपरेखा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आय में हर तरीके से वृद्धि करना ही हमारा मूल लक्ष्य है और यह उनकी फसल का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने से ही संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों के हित में 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' के समावेशी मॉडल/थीम पर हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष (कृषि वर्ष) के रूप में मना रहे हैं। इस दौरान कृषि उत्पादों का मजबूत विपणन तंत्र स्थापित किया जाएगा, साथ ही खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों/बीजों का वितरण, डिजिटलीकृत एवं नवीन कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन, कृषि स्टार्टअप एवं एफपीओ जैसी कृषि आधारित रोजगार श्रृंखला को बढ़ावा, कृषि से संबद्ध सभी क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर्स का विकास तथा खेती-किसानी में फसल चक्र में बदलाव (विविधीकरण) को प्रोत्साहन देना कृषि वर्ष के प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस किसान कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन की रूपरेखा के संबंध में हुई बैठक में यह जानकारी दी। कृषि केबिनेट की जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों का कल्याण हमारे लिए एक मिशन है। इनके समग्रहित में इसके लिए कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कृषि केबिनेट भी की जाएगी। कृषि केबिनेट की शुरूआत निमाड़ अंचल से की जाएगी। किसान हित के सभी जरूरी निर्णय फील्ड में होने वाली कृषि केबिनेट में ही लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खेती-किसानी से पर्यावरण में भी व्यापक सुधार आता है। उन्होंने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में खेती-किसानी से बढ़ते लाभ और दिनों-दिन सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से दूसरे किसान भी खेती की तरफ बढ़े हैं। इससे निमाड़ अंचल में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है और इस हरियाली का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि पूरे निमाड़ अंचल का तापमान पहले से चार डिग्री कम हो गया है। यह उपलब्धि हमें किसानों की बेहतरी के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। कृषि में तकनीक के उपयोग पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के किसानों के लिए कृषि तकनीक के उपयोग पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह तय किया जाएगा कि किसानों को उनके सभी प्रकार के हितलाभ एग्री स्टैक के जरिए ही दिए जाएं। इसके लिए किसानों के बैंक खातों को समग्र आई.डी. के साथ जोड़ दिया जाएगा। साथ ही मोबाईल एवं क्यू.आर कोड आधारित तकनीक के उपयोग से कृषि आदानों की उपलब्धता (ट्रेसबिलिटी) भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्नत पशुपालन तकनीक सीखने के लिए ब्राजील जाएंगे मप्र के पशुपालक कृषि वर्ष के दौरान सरकार का एक लक्ष्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर इसे वर्तमान से दुगना करना भी है। इसके लिए प्रदेश के पशुपालकों को उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीकें सीखने के लिए ब्राजील भेजा जाएगा। राज्य के पशुपालक उन्नत तकनीक से पशुपालन करेंगे तथा नई विधियों और पद्धतियों से उन्नत नस्लों के पशुओं से दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार करेंगे। नई तकनीक से पशुपालकों के दुग्ध उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। पैक्स समितियों के जरिए किसानों को दिलाएंगे अधिकतम सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान किसानों को अधिकतम सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्ष के दौरान राजस्व विभाग द्वारा ऐसे किसान, जो किसी वजह से अबतक केसीसी धारक नहीं हैं, उनकी सूची निकटतम प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उपलब्ध कराई जाएगी। पैक्स समितियां किसानों से सम्पर्क कर पात्र किसानों से तय प्रारूप में आवेदन लेंगी और बैंक स्तर पर केसीसी मंजूर कराने की कार्यवाही भी करेंगी। मंजूरी वाले प्रकरणों को एकत्रित कर कैम्प लगाकर किसानों को केसीसी वितरित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 4500 से अधिक पैक्स समितियां कार्यरत हैं और करीब 23 लाख से अधिक किसान इन पैक्स समितियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। भोपाल में होगा 'आम महोत्सव' किसान कल्याण वर्ष आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के संबंध में हुई इस बैठक में बताया गया कि आगामी मई माह में भोपाल में आम महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में आम उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों की सहभागिता होगी। महोत्सव के दौरान आम की खेती से संबंधित नई तकनीक पर मार्गदर्शन और प्रेजेन्टेशन दिया जाएगा। साथ ही आम की सभी किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का होगा लोकार्पण मध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) द्वारा भोपाल में तैयार की जा रही राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का लोकार्पण भी कृषि वर्ष के दौरान किया जाएगा। लगभग 12.65 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हो रही इस बड़ी प्रयोगशाला की सुविधा मिल जाने से पेस्टीसाइड, रसायन, भारी खनिज, वेजीटेबल आइल, शर्करा तथा दुग्ध उत्पादों और दूध में मिलावट की गहन जांच अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इससे दीर्घ अवधि में मिलावटी दूध एवं दूध से बने उत्पादों पर अंकुश लगेगा। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से उपभोक्ताओं में सांची ब्रांड से बने उत्पादों की साख भी बढ़ेगी। सितम्बर में बालाघाट में होगा 'सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव' किसान कल्याण वर्ष में सितम्बर के संभवत: पहले सप्ताह में बालाघाट जिले में 'सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव' आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में सिंघाड़ा उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों एवं फसल विशेषज्ञों द्वारा सहभागिता की जाएगी। सिंघाड़ा और मखाना कैश क्राप की तरह हैं। इनका सेवन स्वाथ्यवर्धक होता है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

‘सक्षम’ महोत्सव का आगाज़, राज्य मंत्री गौर रहे उपस्थित

भोपाल.  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर बच्चे भी सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।

समाधान योजना में 852 करोड़ 76 लाख मूल राशि हुई जमा : ऊर्जा मंत्री तोमर

350 करोड़ 67 लाख सरचार्ज हुआ माफ भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना 2025-26 के प्रथम चरण में 852 करोड़ 76 लाख रूपये मूल राशि जमा हुई है। साथ ही 350 करोड़ 67 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। योजना में 17 लाख 15 हजार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। पिछले साल 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में शामिल होकर लाखों बकायादार उपभोक्ताओं ने सौ फीसदी तक छूट का लाभ लिया। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के शेष बकायादार उपभोक्ता  योजना के द्वितीय चरण में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा कर 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठायें। द्वितीय चरण 28 फरवरी तक चलेगा।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 5 लाख 27 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 534 करोड़ 16 लाख की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 263 करोड़ 94 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 6 लाख 8 हजार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। मूल राशि 174 करोड़ 94 लाख रूपये जमा हुई है तथा 62 करोड़ 11 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत 5 लाख 80 हजार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। कुल मूल राशि 143 करोड़ 66 लाख रूपये जमा हुई है। साथ ही 24 करोड़ 62 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में द्वितीय और अंतिम चरण 01 फरवरी से शुरू हो चुका है जो कि 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। दूसरे चरण में एक मुश्‍त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्‍तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के ऐप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा-परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है

लोकभवन में हुआ एन.सी.सी. एट होम समारोह भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है। हर देशवासी को देशभक्ति और ऊर्जा से भर देती है। हम सभी को देश सेवा की प्रेरणा देती है। गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल प्रत्येक एन.सी.सी. कैडेट्स अनुशासन और प्रेरणा का प्रतीक है। राजधानी के कर्तव्य पथ पर आपकी अनुशासित, प्रभावी और गरिमामयी सहभागिता ने प्रदेशवासियों का मान बढ़ाया है। आप सभी हमारा गौरव हैं। राज्यपाल  पटेल सोमवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में एन.सी.सी. एट होम समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड और विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक एवं उपलब्धियां प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ निदेशालय के एन.सी.सी. कैडेट्स को सम्मानित किया। राज्यपाल  पटेल ने राष्ट्रीय स्तर पर ओवरऑल तीसरा स्थान प्राप्त करने पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय को बधाई दी। भविष्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने की शुभकामनाएं दी। समारोह में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स शिक्षित और अनुशासित होने के साथ संस्कारवान भी बने। आदर्श जीवन मूल्यों को धारण करें। माता-पिता, गुरुजनों, प्रशिक्षकों और वरिष्ठों का हमेशा सम्मान करें। उन्होंने कहा कि युवा संविधान के मूल्यों, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को जीवन में उतार कर  गरीब,  वंचित,  और  ज़रूरतमंदों के कल्याण में उपयोग करें। स्वच्छता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण,  डिजिटल साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्रों में ध्वज वाहक के रूप में समाज का नेतृत्व करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि हर युवा “हम दिन चार रहे न रहे, माँ तेरा वैभव सदा रहे” के भाव के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। संकल्प लें कि जीवन  का  प्रत्येक  क्षण  राष्ट्र  प्रेम  और  भक्ति  के  साथ  अपने  कर्तव्यों, अधिकारों, नियमों और सामाजिक दायित्वों का आदर्श रूप में पालन करेंगे। राज्यपाल  पटेल ने समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जोश-जज्‍़बे और जुनून का उदाहरण है। यह भारत की विविधता में एकता को प्रस्तुत कर रही थी। राज्यपाल  पटेल के समक्ष एन.सी.सी. कैडेट्स ने “ऐ मेरे भारत की नारी, तू है महान” से नारी की महानता और “नव भारतम्-श्रेष्ठ भारतम्” पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से नए भारत को दिखाया। राज्यपाल  पटेल का मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल जे.पी. सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह-भेंट कर अभिनंदन किया। मेजर जनरल सिंह ने स्वागत उद्बोधन और रिपब्लिक डे कैम्प-2026 में प्रदेश की सहभागिता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सीनियर अंडर ऑफिसर सु प्रथा सिंह उमठ ने रिपब्लिक डे कैम्प- 2026 के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारी, एन.सी.सी. कैडेट्स और उनके परिजन मौजूद थे।  

रण उत्सव की तर्ज पर सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में विकसित होगी टेंट सिटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में कच्छ का रण उत्सव बना भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रण उत्सव में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ गुजरात में रण ऑफ कच्छ का 'रण उत्सव' आज भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भव्य 'रण उत्सव' में सहभागिता कर विश्व स्तरीय टेंट सिटी की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद कहा कि जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज किसानों की सहभागिता से पर्यटन, आजीविका और विकास का मॉडल खड़ा हुआ है, जिसे दुनिया देख रही है। लोक कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां और गुजरात की समृद्ध संस्कृति, इस उत्सव को विशिष्ट पहचान देती हैं। यह प्रेरक उदाहरण है। उज्जैन में वर्ष-2028 में आयोजित होने वाले 'सिंहस्थ' में 'रण उत्सव' की तर्ज पर टेंट सिटी विकसित की जाएगी। साथ ही, मध्यप्रदेश में जहां पर्यटकों की संख्या अधिक है, वहां भी टेंट सिटी की योजना पर कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भुज में स्थित 'स्मृति वन', जो भूकंप पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजता है, वह संवेदना और संकल्प का प्रतीक है। इसी भावना के साथ भोपाल में भी यूनियन कार्बाइड त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का विजन ही नए भारत की सशक्त पहचान है।  

7 साल में 6 नौकरियों में सफल, लेकिन शिक्षक बनना ही चुना

रतलाम मेहनत और लगन से नामुमकिन को मुमकिन बनाने वाली कहानी सैलाना के अनुराग जैन की है। मध्यप्रदेश में छोटे कस्बे के इस युवा ने 7 साल में राज्य और केन्द्र सरकार की 6 अलग-अलग परीक्षाओं में सफलता हासिल की। इस अनोखे रेकॉर्ड को इंडिया बुक ऑफ में स्थान मिला है। अनुराग भारतीय डाक विभाग में सॉर्टिंग असिस्टेंट (2018), मप्र जनजातीय विभाग में उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षक (2021), सीजीएसटी में कर सहायक (2022), एकलव्य मॉडल स्कूल में पीजीटी गणित (2025) और मप्र स्कूल शिक्षा विभाग में उच्च माध्यमिक शिक्षक गणित (2025) पदों पर चयनित हुए। लेकिन उन्होंने डाक और वित्त विभाग की नौकरियां छोड़कर शिक्षक बनना चुना। अनुराग ने कहा, 'मेरी सेवानिवृत शिक्षिका मां से मिले संस्कार और मार्गदर्शन ने मुझे शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया।' वे वर्तमान पीएमश्री शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रिंगनोद में उच्च माध्यमिक शिक्षक (गणित) के रूप में कार्यरत हैं।

वाहन रैली और कृषि रथ के माध्यम से किसानों को किया जा रहा है जागरूक

भोपाल राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके लिए किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में वाहन रैली के माध्यम से किसानों को खेती की नवीन तकनीकों को अपनाकर फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जागरूक किया गया। इसके तहत विभिन्न जिलों में वाहन रैली आयोजित की गईं। धार जिला मुख्यालय पर विधायक श्रीमती नीना वर्मा एवं कलेक्टर श्री प्रिंयक मिश्रा द्वारा हरी झण्डी दिखाकर किसान जागरूकता वाहन रैली को रवाना किया गया। जिले में किसानों के लिए कृषि एवं कृषि से संबंधित विभागों की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कृषि रथ के माध्यम से निंरतर प्रत्येक ग्राम पंचायत में किया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि रथ के मुख्य आधार स्तंभ:- जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का प्रचार-प्रसार, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, विभागीय कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था, पराली प्रबंधन आदि विभागीय योजनाओं से जागरूक किया जा रहा है। सिवनी जिला मुख्यालय पर किसानों को जागरूक करने के लिए मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली का उद्देश्य किसानों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें शासन की विभिन्न कृषक हितैषी योजनाओं से जोड़ना रहा। मोटरसाइकिल रैली में सिवनी विधायक श्री दिनेश राय ने स्वयं मोटरसाइकिल चलाकर सहभागिता की और किसानों का उत्साहवर्धन किया। बैतूल जिले में किसानों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय वाहन रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर अधिकारियों ने किसानों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, नवाचारों और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने का संदेश दिया। रैली में मोटरसाइकिल, चार पहिया वाहन एवं विभागीय वाहनों के माध्यम से आकर्षक बैनर-पोस्टर लगाकर किसान कल्याण से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। इसी तरह पांढुर्णा जिले में भी किसान मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया।  

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री पटेल ने माँ नर्मदा का किया पूजन

अनूपपुर  मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा मंदिर में माँ नर्मदा का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने माँ नर्मदा से प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस दौरान उप संचालक पशु पालन डॉ बी बी चौधरी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार, मां नर्मदा मंदिर के पुजारी तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट: डॉ. मोहन यादव

भोपाल भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता के सहयोग से भारत ने आगे बढ़ने जो संकल्प लिया है वह कई अर्थों में अदभुत है। आज जब भारत औदयोगिक निवेश और निर्माण क्षेत्र का हब बनने जा रहा है, उसमें मध्यप्रदेश भी अपनी पूरी शक्ति के साथ योगदान देने के लिए तैयार है। हमने औदयोगिक निवेश के लिये अनूकूल वातावरण तैयार किया, जिससे निरंतर निवेश आ रहा है। नये बजट से पूरे इको-सिस्टम को नई ऊर्जा मिली है। बजट में हरित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया गया है। इससे मध्यप्रदेश को दीर्घकालिक लाभ होने वाला है। कृषक कल्याण और कृषि विकास को मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया है। इसी प्रकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीक के विकास पर बजट में ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन तीनों क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को हाई‑टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। इन क्षेत्रों के लिये नीतियां बनाने का काम पूरा कर लिया है। निवेश आकर्षित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। केन्द्रीय बजट गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है। यह सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट है। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में तेजी से शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है, नया बजट युवाओं के कौशल विकास और रोज़गार के लिए व्यापक अवसर लेकर आया है। शिक्षा से रोजगार एवं उदयम स्थायी समिति का गठन और 15 हजार माध्यमिक विदयालयों एवं 500 महाविदयालयों में एपीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना रचनात्मकता को बढ़ावा देगी। पर्यटन क्षेत्र में आईआईएम के सहयोग से 10 हजार गाइड्स के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेलों के परिदृश्य में बदलाव लाने का लक्ष्य युवाओं को नई दिशा देगा। महिलाओं के लिये एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10 हजार करोड़ रूपये का आवंटन लाभदायी होगा। युवा भारत के लिये सेवा क्षेत्र का विस्तार संभावनाओं के नये द्वार खोलेगा और रोज़गार और उदयम के अवसर बढ़ेंगे। महिला उदयमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना में महिला उदयमियों को क्रेडिट लिंक आजीविका से उद्म स्वामित्व से जोड़ने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश ने पहले ही इस दिशा में ठोस प्रयास किये हैं। सिटी ईकॉनामिक रीजन बनाने की नीति मध्यप्रदेश के शहरी विकास के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। शहरों को संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने में यह सहायक सिद्ध होगी। शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक‑व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इससे मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे और निवेश‑अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। यह निवेश मॉडल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स तथा व्यापारिक सुगमता को व्यापक रूप से मजबूत बनायेगा। बजट में सामाजिक समावेश पर पूरा ध्यान दिया गया है। आर्थिक विकास की ये पहल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। समावेशी विकास के साथ मानव-पूंजी निर्माण को भी मजबूती मिलेगी। शी-मार्ट्स, दिव्यांगजन कौशल योजना, सभी जिलों में गर्ल्स हॉस्टल और शिक्षा‑कौशल आधारित पहल से सामाजिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक विकास को समावेशी स्वरूप मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव‑पूंजी का सृजन होगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को विकास के केन्द्र में रखते हुए यह बजट प्रशासनिक सरलीकरण, निवेश-अनुकूल नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और वित्तीय स्थिरता के माध्यम से मध्यप्रदेश को तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की ठोस आधारशिला रखता है। मध्यप्रदेश के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 केवल एक नीति-दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का एक ऐतिहासिक अवसर है, जो मध्यप्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।  

हर मंगलवार जनसुनवाई, देश में मिसाल बने अकेले विधायक

सिवनी.  दिनेश राय मुनमुन मध्यप्रदेश के अकेले ऐसे विधायक हे जो हर मंगलवार जनता की समस्याओं को सुनकर तुरंत हल करते हे या हल कराने की कोशिश करते हैं। यदि किसी को छोटी मोटी बीमारी के लिए आर्थिक मदद की आवश्यकता होती हैं तो ये अपनी जेब से उसे तुरंत मदद करते है। इसी कारण इनकी लोकप्रियता जनता में अलग छाई हुई हैं। आज तक इनके ऊपर दलाली और कमीशन का दाग नहीं है।  बेबाक बिना भय के इनकी बोलने की शैली इनकी पहचान हे। कोई भी कार्यक्रम चाहे सामाजिक विकास की बात हो हो या राजनीतिक कार्यक्रम हो इसके लिए वे सबसे आगे होते हैं। इसी कड़ी में पिछले  मंगलवार को,सिवनी स्थित अपने बारापत्थर  कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई मे अनेकों आवेदनों पर सुनवाई कर समस्याओं का निराकरण किये जाने निर्देश दिया। ​प्रातः 11:00 बजे विधायक * दिनेश राय मुनमुन जी द्वारा अपने कार्यालय मे आयोजित जनसुनवाई आरंभ की गयी। इस जनसुनवाई में विधानसभा क्षेत्र के दूर-दराज से आए नागरिकों द्वारा अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं से संबंधित अनेकों आवेदन प्रस्तुत किये गये। जिसमें विधायक  दिनेश मुनमुन जी ने प्रत्येक आवेदकों की बात को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनता की सेवा ही हमारा मुख्य ध्येय है समस्याओं का शीघ्र और प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने ग्राम पंचायत अलोनिया द्वारा गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम मे सहभागिता किया। जहां पर बालिकाओं द्वारा कलश लेकर आपकी आगवानी की गयी। इसके तदोपरांत सर्वप्रथम विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने मां भारती का पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम आरंभ कराया। तत्पश्चात पंचायत प्रतिनिधियों ने साफा पहनाकर फूलमालाओं आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने छात्र-छात्राओं एवं उपस्थितों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते कहा कि कला और संस्कृति हमारे समाज की आत्मा होती है। अभी मंच पर जो प्रस्तुतियां मैंने देखीं,वे यह दर्शाती हैं कि हमारे क्षेत्र की प्रतिभा किसी से कम नहीं है। ​ राय ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबों से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास से है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने आगे कहा कि मैं आयोजकों को बधाई देता हूं कि उन्होंने छात्र- छात्राओं को मंच प्रदान किया। सभी विद्यार्थियों से यही कहूंगा कि आप अपनी कला को जीवित रखें, खूब मेहनत करें और अपने माता-पिता व क्षेत्र का नाम रोशन करें। आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। इस अवसर पर सर्व जयदीप ठाकुर जी अध्यक्ष भाजपा मंडल बंडोल, राकेश बैस (काकू), विशाल साहू जी सरपंच, नीरज यादव जी उपसरपंच, राकेश यादव जी, टेकराम बरकडे जी, रामनाथ यादव जी, जयवंती यादव जी, अमरीश डहेरिया जी, निखिल राय जी, संजू बंजारा जी, तीरन ठाकुर जी, पवन साहू जी, नीलू बघेल जी सहित अभिभावक, शिक्षक,  शिक्षिकाऐं एवं बड़ी संख्या मे छात्र-छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही।  

बयान बना बवाल: ‘दौड़ते विधायक’ कहानी सुनाने वाले जतिन सांसद पर कानूनी शिकंजा

इंदौर दौड़ते हुए 'विधायक जी संग युवा नेता के किस्से' सुनाकर लाखों लोगों को अपना फैन बना चुके जतिन शुक्ला बुरी तरह घिर गए हैं। सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर जतिन शुक्ला के खिलाफ मध्य प्रदेश के इंदौर में केस दर्ज किया गया है। सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जतिन का एक वीडियो वायरल होने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई है। क्राइम ब्रांच ने प्राथमिक जांच के बाद जतिन शुक्ला के खिलाफ आईटी ऐक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।   एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि सांसद के प्रतिनिधि विशाल गदवानी ने क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत देकर बताया था कि 'जतिन ऑफिशियल' नामक इंस्टाग्राम से एक वीडियो वायरल किया गया है जिसमें सांसद का नाम लेकर अशोभनीय, आपत्तिजनक, भ्रामक और झूठी बातें कहीं गईं हैं। जतिन शुक्ला के खिलाफ बीनएस की धारा 200, 223 और 352 के तहत केस दर्ज किया गया है। डीसीपी ने बताया कि एक पेन ड्राइव में वीडियो और लिंक शेयर किया गया है। किसी प्रकार की असत्य और अशोभनीय और भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित करना एक अपराध है। वहीं, शिकायतकर्ता विशाल गिदवानी ने कहा कि कुछ दिनों पहले उन्हें जानकारी मिली कि इंदौर शहर और जनप्रतिनिधियों के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए वीडियो बनाया गया। शिकायतकर्ता ने क्या कहा? गिदवानी ने कहा कि जतिन ने वीडियो में इंदौर के सांसद के साथ बातचीत का दावा करते हुए उनके हवाले से कई ऐसी बातें कहीं है जो पूरी तरह असत्य हैं। गिदवानी ने कहा कि सांसद कभी जतिन से मिले भी नहीं हैं। वीडियो में जतिन इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई लोगों की मौत को लेकर कटाक्ष करते हुए सांसद पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल जतिन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आह्वान: स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करें

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, योजनाओं का करें प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता एवं चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक एवं चिकित्सकीय मैनपावर की नियुक्ति तथा स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की गहन समीक्षा की। उन्होंने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अतिरिक्त इंसेंटिव प्रदान करने के प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन हेतु शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में योग्य शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय शिक्षा के लिए अहम है। बैठक में अंतर्विभागीय विषयों पर चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर औपचारिकताओं की पूर्ति प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो। सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ आवश्यक मैनपावर की नियुक्ति के प्रस्तावों को प्राथमिकता से अग्रेषित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के उपचार हेतु टर्शरी केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के हर क्षेत्र में उपलब्ध हों। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने दमोह, छतरपुर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र में संचालन शुरू करने के लिए प्राथमिकता से समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति की जाये। बैठक में केंद्रीय बजट के प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उपलब्ध बजटीय संसाधनों के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, आयुक्त  धनराज एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्री पटेल का ऐलान, नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों में बड़े पैमाने पर होगा पेड़ लगाना

नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण : मंत्री  पटेल  राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल ने नर्मदा परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आश्रय स्थलों पर व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिये है।  पटेल सोमवार को जीवनदायिनी माँ नर्मदा के जल को निर्मल बनाए रखने, उनके प्रवाह को अविरल सुनिश्चित करने तथा नर्मदा से जुड़े समग्र विकास कार्यों के संबंध में राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सर्व छोटे सिेंह, दिनेश जैन, मती हर्षिका सिंह,  अविप्रसाद एवं  दीपक आर्य उपस्थित थे। मंत्री  पटेल ने अधिकारियों को परिक्रमा पथ पर प्रस्तावित पुल, पुलिया एवं ब्रिज के सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूर्ण कर सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। बैठक में विधानसभा से संबंधित लंबित प्रकरणों की विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। मंत्री  पटेल ने सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जनहित से जुड़े विषयों का शीघ्र समाधान हो सके। बैठक में माँ नर्मदा के संरक्षण एवं विकास को जनभागीदारी से जोड़ने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।  

बरगी बांध में लीक से 6 गांवों और खेतों में पानी फैलने से स्थिति बिगड़ी, जबलपुर में मचा हड़कंप

 जबलपुर/बरगी नगर  बरगी बांध से रीवा की ओर जाने वाली दाईं तट मुख्य नहर रविवार दोपहर करीब 12 बजे सगड़ा-झपनी ग्राम पंचायत के पास अचानक फूट गई। नहर फूटते ही हजारों क्यूसेक पानी तेज रफ्तार से बाहर निकलते हुए खेतों से लेकर आसपास की बस्तियों और निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। देखते ही देखते क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। नहर में लंबे समय से पानी का दबाव अधिक बना हुआ था। नहर की दीवार कमजोर होने से ध्वस्त हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में खेत जलमग्न हो गए और छह गांवों में जगह-जगह पानी भर गया। गनीमत रही कि नहर का पानी घरों में प्रवेश नहीं कर पाया। जिन गांवों तक नहर का पानी पहुंचा, वहां के लोगों का आरोप है कि नहर की दीवारें लंबे समय से जर्जर थीं। जहां नहर फूटी है वहां एक साल से पानी का रिसाव हो रहा था। सिंचाई विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। किसान नीरज उपाध्याय ने बताया कि नहर से पानी के रिसाव की शिकायत ग्रामीणों ने की थी, अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, परंतु सुनवाई नहीं हुई। किसान अजय पटेल ने बताया कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि विभागीय लापरवाही का नतीजा है। गनीमत रही कि, केनाल के पास ही नरई नाला है, नाला नहीं होता, तो खेत ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के घरों में पानी घुस जाता। विभाग द्वारा नहर की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की गई, जिसका नतीजा सामने है। तत्काल कराई मुनादी प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मुनादी कराई, ताकि ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर रहें। क्षतिग्रस्त नहर से सगड़ाझपनी, बम्हनोदा, रोसरा, चारघाट, पिपरियाकला और घाना गांव प्रभावित हुए। नहर का अधिकतम बहाव नरई नाला की ओर गया और इसके आगे का पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित हुआ। चारघाट क्षेत्र का रिपटा जलमग्न हो गया है। निरीक्षण के दौरान पता चला है कि प्रभावित गांवों में गेहूं, चना और सब्जियों की फसल जलमग्न हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशन पर एसडीएम जबलपुर अभिषेक सिंह और बरगी बांध दाईं तट नहर के कार्यपालन यंत्री, सिंचाई विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद नहर का पानी की निकासी पूरी तरह रोकते हुए टूटे हिस्से के आगे के सभी गेट खोल दिए गए, जिसके बाद हालात सामान्य हो पाए। वहीं खेतों में पानी भरने से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहत राशि दी जाएगी। बाईं तट नहर से भी हो रहा रिसाव बरगी बांध से निकली बाईं तट नहर में भी रिसाव हो रहा है। विभाग का कहना है कि इस एक्वाडक्ट में रिसाव को सुधारने के लिए जल्द शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। बरगी बांध में भी सीपेज बरगी बांध के ब्लाक नंबर 3/10 में सीपेज हो रहा है। भोपाल और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम जांच कर चुकी है। पानी का रिसाव सामान्य स्तर से अधिक पाया गया, लेकिन टेंडर और काम देने की प्रक्रिया में ही मामला उलझा है। 2021 में भी हुई थी घटना इधर, 2021 में पाटन और मझौली ब्लाक में बरगी बांध की नहरें फूटी थी। पाटन के पास जिनवाणी कलां में नहर फूटने से लगभग ढाई सौ एकड़ में धान की फसल को नुकसान हुआ था। वहीं चरगंवा में नहर फूटने से कोहा नाले में पानी भर गया था।

नर्मदा नदी में भव्य नाव रैली, मेधा पाटकर ने बीच पानी में मछुआरों के अधिकारों का मुद्दा उठाया

बड़वानी  नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने सोमवार को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नर्मदा नदी में 30 से अधिक नावों के साथ भव्य नाव रैली निकाली. यह नाव रैली सरकार और प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित मछुआरा समुदाय की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई. मेधा पाटकर ने मछुआरों के साथ निकाली नाव रैली नाव रैली के समापन के बाद मछुआरा संगठनों द्वारा बड़वानी कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा. ज्ञापन में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुरूप अधिकार देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई है. इसमें प्रस्तावित नर्मदा मत्स्य सहकारी उत्पादन व विपणन संघ के पंजीकरण, विस्थापित मछुआरों को पुनर्वास लाभ, आवास और आजीविका उपलब्ध कराने मत्स्य व्यवसाय को ठेकेदारी से मुक्त कर सहकारी समितियों को सौंपने की मांग शामिल है. आंदोलनकारियों ने रखी 10 मांग इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन, जलस्तर में लगातार गिरावट से मत्स्याखेट पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव, मछुआरों को किसान का दर्जा, केसीसी कार्ड, बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाने और पुलिस-प्रशासन द्वारा कथित उत्पीड़न के मामलों पर त्वरित कार्रवाई की भी मांग की. कुल मिलाकर ज्ञापन में 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं. इस मौके पर मेधा पाटकर ने कहा कि "नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र किया जाएगा." कई जिलों के मछुआरा परिवार हुए शामिल इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगौन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए. आंदोलनकारियों ने बताया कि सरदार सरोवर परियोजना एक अंतरराज्यीय परियोजना है. इससे जुड़े लाभ, हानि और पुनर्वास से संबंधित सभी विषयों पर नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार ही कार्रवाई की जानी चाहिए. यह फैसला 18 अक्टूबर 2000 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत कानूनन मान्य है, जिसका पालन करना शासन की जिम्मेदारी है. सरदार सरोवर में मतस्य पालन का अधिकार सरकार के पास नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले की धारा XI, उपधारा V(8) के अनुसार सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन के पास है. इसी संदर्भ में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पूर्व में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र भी लिखा जा चुका है, बावजूद इसके मछुआरों को उनके अधिकार अब तक नहीं मिल पाए हैं.

छिंदवाड़ा: NHM डाटा मैनेजर रिश्वत लेते गिरफ्तार, लोकायुक्त की कार्रवाई में हुआ खुलासा

छिंदवाड़ा  भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को छिंदवाड़ा में एक बड़ी कार्रवाई की। CMHO कार्यालय खजरी में पदस्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डाटा मैनेजर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह रिश्वत एक नर्सिंग ऑफिसर के स्थानांतरण के बदले मांगी गई थी। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। CMHO कार्यालय में लोकायुक्त की दबिश छिंदवाड़ा में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में कार्रवाई करते हुए CMHO कार्यालय खजरी में पदस्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के डाटा मैनेजर जितेन्द्र यदुवंशी को गिरफ्तार किया। आरोपी को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। स्थानांतरण के बदले मांगी थी रिश्वत जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहनाकला (ब्लॉक पिण्डरईकला) में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा वडघरे अपना स्थानांतरण नजदीकी संजीवनी क्लीनिक में करवाना चाहती थीं। इस कार्य के लिए डाटा मैनेजर जितेन्द्र यदुवंशी ने उनसे 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त में की गई शिकायत रिश्वत की मांग से परेशान नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा वडघरे ने इसकी शिकायत लोकायुक्त जबलपुर में की। शिकायत सत्य पाए जाने पर लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति बनाई। रंगे हाथों गिरफ्तारी सोमवार को जैसे ही आवेदिका ने रिश्वत की राशि आरोपी जितेन्द्र यदुवंशी को सौंपी, पहले से घात लगाए लोकायुक्त दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। आरोपी के हाथ धुलाने पर वे गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। कानूनी कार्रवाई शुरू आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(b) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई यह सफल कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख के निर्देश और डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। टीम में निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया, राहुल गजभिये, उप निरीक्षक शिशिर पांडेय सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।  

नक्सल मोर्चे पर सख्ती के बाद भोपाल में नई जिम्मेदारी, संजय कुमार ने संभाला पुलिस कमिश्नर का पद

भोपाल  राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के पांचवे साल में तीसरे नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति की गई है. मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी संजय कुमार को भोपाल का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है. उन्होंने सोमवार 2 फरवरी को चार्ज ले लिया. इससे पहले वे बालाघाट जोन में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ थे. नए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र से औपचारिक रूप से पुलिस कमिश्नर का कार्यभार ग्रहण किया. नए कमिश्नर संजय कुमार ने लिया चार्ज आईपीएस संजय कुमार को एक सख्त, अनुशासित और मजबूत फील्ड एक्सपीरियंस वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है. वह प्रदेश के कई जिलों में बतौर पुलिस अधीक्षक अपनी सेवाएं दे चुके हैं. संजय कुमार बालाघाट को नक्सल मुक्त करने के लिए जवानों के साथ जंगलों में लाल लड़ाकों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की. संजय कुमार करीब 12 साल पहले भोपाल में एसपी पुलिस मुख्यालय के पद पर भी रह चुके हैं. ऐसे में लंबे अंतराल के बाद राजधानी की कमान संभालना उनके लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन उनके अनुभव और कार्यशैली से भोपाल पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को मजबूती मिलेगी. बीट सिस्टम को बनाएंगे प्रभावी ईटीवी भारत से बातचीत में नए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने अपनी प्राथमिकताओं और कार्य योजना को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, "12 साल बाद भोपाल लौटना एक अलग अनुभव है. मेरा फोकस टीम वर्क और बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था पर रहेगा. इसके लिए बीट सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और फील्ड स्तर पर पुलिस की मौजूदगी मजबूत हो. शहरी पुलिसिंग अपने आप में कई चुनौतियां लेकर आती है. बदमाशों को नहीं मिलेगी रियायत कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता में रखते हुए पुलिसिंग के सभी पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जाएगा. पहले से लागू व्यवस्थाओं की समीक्षा कर उन्हें और बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा. बदमाशों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी. चाहे चाकूबाजी हो या कोई अन्य गंभीर अपराध, सभी मामलों में सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी. साइबर क्राइम आज का गंभीर मुद्दा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि "अपराधियों में पुलिस का डर बनाए रखना जरूरी है, ताकि कानून व्यवस्था कायम रह सके. भोपाल जैसे शहर के लिए ट्रैफिक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है. इसे प्राथमिकता पर लिया जाएगा. इसके लिए संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर ठोस योजना बनाई जाएगी. पुरानी ट्रैफिक पॉलिसी को प्रभावी ढंग से इंप्लीमेंट किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उसमें सुधार करेंगे, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके. साइबर अपराधों के बढ़ते मामले चिंताजनक है. साइबर क्राइम आज के समय में एक गंभीर अपराध बन चुका है. इसे रोकने के लिए सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जन जागरूकता भी बेहद जरूरी है. 

जतिन सांसद के बयान से बढ़ा बवाल, ‘दौड़ते विधायक’ टिप्पणी पर MP में FIR दर्ज

इंदौर दौड़ते हुए 'विधायक जी संग युवा नेता के किस्से' सुनाकर लाखों लोगों को अपना फैन बना चुके जतिन शुक्ला बुरी तरह घिर गए हैं। सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर जतिन शुक्ला के खिलाफ मध्य प्रदेश के इंदौर में केस दर्ज किया गया है। सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जतिन का एक वीडियो वायरल होने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई है। क्राइम ब्रांच ने प्राथमिक जांच के बाद जतिन शुक्ला के खिलाफ आईटी ऐक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि सांसद के प्रतिनिधि विशाल गदवानी ने क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत देकर बताया था कि 'जतिन ऑफिशियल' नामक इंस्टाग्राम से एक वीडियो वायरल किया गया है जिसमें सांसद का नाम लेकर अशोभनीय, आपत्तिजनक, भ्रामक और झूठी बातें कहीं गईं हैं। जतिन शुक्ला के खिलाफ बीनएस की धारा 200, 223 और 352 के तहत केस दर्ज किया गया है। डीसीपी ने बताया कि एक पेन ड्राइव में वीडियो और लिंक शेयर किया गया है। किसी प्रकार की असत्य और अशोभनीय और भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित करना एक अपराध है। वहीं, शिकायतकर्ता विशाल गिदवानी ने कहा कि कुछ दिनों पहले उन्हें जानकारी मिली कि इंदौर शहर और जनप्रतिनिधियों के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए वीडियो बनाया गया। शिकायतकर्ता ने क्या कहा? गिदवानी ने कहा कि जतिन ने वीडियो में इंदौर के सांसद के साथ बातचीत का दावा करते हुए उनके हवाले से कई ऐसी बातें कहीं है जो पूरी तरह असत्य हैं। गिदवानी ने कहा कि सांसद कभी जतिन से मिले भी नहीं हैं। वीडियो में जतिन इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई लोगों की मौत को लेकर कटाक्ष करते हुए सांसद पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल जतिन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शूटिंग बॉल वर्ल्ड कप में विदिशा की इशिका मीणा, भारतीय टीम में चयन से जिले में खुशी की लहर

विदिशा  विदिशा जिले की होनहार खिलाड़ी इशिका मीणा ने खेल जगत में एक नई पहचान बनाते हुए जिले के साथ-साथ पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। इशिका का चयन भारतीय शूटिंग बॉल टीम में हुआ है और वे दूसरे शूटिंग बॉल वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खास बात यह है कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए मध्य प्रदेश से चुनी गई वे एकमात्र खिलाड़ी हैं। शूटिंग बॉल वर्ल्ड कप का आयोजन 1 से 3 फरवरी 2026 तक राजधानी नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में किया जाएगा। शूटिंग बॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 18 देशों की टीमें हिस्सा लेंगी। भारतीय टीम में इशिका मीणा को मुख्य अटैकर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इशिका मीणा की शैक्षणिक और खेल यात्रा भी प्रेरणादायक रही है। वे विदिशा स्थित महारानी लक्ष्मी बाई गर्ल्स स्कूल की पूर्व छात्रा रही हैं। उन्होंने बीपीईएस में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से बीपीएड की पढ़ाई कर रही हैं। खेल के क्षेत्र में इशिका लगातार सक्रिय रही हैं और अब तक सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर वर्ग की छह राष्ट्रीय शूटिंग बॉल प्रतियोगिताओं में सहभागिता कर चुकी हैं। उनकी इस सफलता के पीछे शूटिंग बॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के कोषाध्यक्ष एवं अनुभवी कोच जितेंद्र सिंह बघेल का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है, जिन्होंने इशिका की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई। इशिका के चयन की खबर मिलते ही उनके स्कूल, खेल जगत और पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। वी टीच स्कूल प्रबंधन, खेल प्रेमी पंकज भार्गव, रविकांत नामदेव सहित अनेक गणमान्य नागरिकों और खेल प्रेमियों ने इशिका को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और देश के लिए पदक जीतने की शुभकामनाएं दी हैं। विदिशा की यह बेटी आज युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। 

बड़वानी नगर पालिका बनी मूकदर्शक, सिवरेज लाइन ने शहर को बनाया छलनी

बड़वानी नगर पालिका बनी मूकदर्शक, सिवरेज लाइन ने शहर को बनाया छलनी  गड्ढों में तब्दील सड़कें, उड़ती धूल–कीचड़ से जनता त्रस्त, हादसों का डर बड़वानी शहर में चल रहा सिवरेज लाइन का काम अब विकास कम और परेशानी ज़्यादा बन चुका है। नगर के प्रमुख मार्गों से लेकर वार्डों की गलियों तक सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है, लेकिन बहाली के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। हालात यह हैं कि नगर पालिका सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बनी बैठी है। कई इलाकों में महीनों पहले खुदाई हो चुकी है, पर सड़कें आज तक ठीक नहीं की गईं। गड्ढों में भरा पानी, बिखरी मिट्टी और उड़ती धूल से राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालक रोज़ फिसल रहे हैं, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिवरेज लाइन डालने के बाद गुणवत्ता के अनुसार सड़क बहाली नहीं हो रही। कहीं आधा-अधूरा डामर, तो कहीं केवल मिट्टी डालकर काम चला दिया गया। कुछ ही दिनों में सड़क फिर उखड़ जाती है। इससे साफ जाहिर है कि ठेकेदारों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं है। नागरिकों का कहना है कि कई बार नगर पालिका में शिकायतें की गईं, मगर न निरीक्षण हुआ और न कार्रवाई। बारिश में गड्ढे तालाब बन जाते हैं और आसपास बदबू फैलने लगती है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर पालिका और संबंधित अधिकारी नींद से जागेंगे या जनता यूं ही बदहाल सड़कों पर हादसों का इंतजार करती रहेगी। जरूरत है कि जिम्मेदार अफसर मौके पर उतरें, ठेकेदारों पर सख्ती करें और सिवरेज कार्य के बाद तुरंत स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सड़क बहाली कराई जाए।

कर्नाटक की बड़ी जीत, 16वें वित्त आयोग में मध्य प्रदेश के लिए फंड जुटाना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली/ भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा करों के बंटवारे के लिए अपनाए गए नए फार्मूले (2026-31) ने राज्यों के बीच राजस्व वितरण के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. इस नए बदलाव का सबसे बड़ा लाभ कर्नाटक को मिला है, जिसका कर बंटवारे में हिस्सा 3.65% से बढ़कर 4.13% हो गया है. इसके परिणामस्वरूप कर्नाटक को अतिरिक्त ₹7,387 करोड़ प्राप्त होंगे, जिससे उसका कुल आवंटन बढ़कर ₹63,050 करोड़ हो जाएगा. इस ऐतिहासिक लाभ के पीछे सबसे मुख्य कारण फार्मूले में "जीडीपी (GDP) में योगदान" को दिया गया 10% वजन है. विनिर्माण, सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी होने के कारण कर्नाटक को उसके आर्थिक प्रदर्शन के लिए यह विशेष 'इनाम' मिला है. कर्नाटक के बाद केरल दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जिसके आवंटन में ₹6,975 करोड़ की वृद्धि हुई है. अधिक प्रति व्यक्ति आय और मजबूत आर्थिक योगदान के चलते गुजरात (₹4,228 करोड़) और हरियाणा (₹4,090 करोड़) को भी महत्वपूर्ण बढ़त मिली है, जबकि महाराष्ट्र का हिस्सा बढ़कर 6.44% हो गया है. यह नया फार्मूला स्पष्ट रूप से उन राज्यों को पुरस्कृत कर रहा है जो राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. दूसरी ओर, नए दक्षता मानकों पर खरा न उतर पाने वाले राज्यों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है. मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा झटका लगा है, जिसका आवंटन ₹7,677 करोड़ घट गया है. जनसंख्या-प्रधान राज्यों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव दिखा है; उत्तर प्रदेश को ₹4,884 करोड़ और पश्चिम बंगाल को ₹4,701 करोड़ की कमी झेलनी पड़ी है. बिहार को भी ₹1,679 करोड़ का नुकसान हुआ है, हालांकि वह अभी भी कुल आवंटन प्राप्त करने के मामले में देश में दूसरे स्थान पर बना हुआ है. यह आवंटन नीति अब केवल जनसंख्या के बजाय 'आर्थिक प्रदर्शन और दक्षता' की ओर झुकती नजर आ रही है.

सीएम यादव का ऐतिहासिक निर्णय, सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार’ कक्ष की अनिवार्यता, 13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे

इंदौर   सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। यह पहल 'दिव्य संतान प्रकल्प' के तहत 'गर्भ संस्कार' को बढ़ावा देगी। इसका मकसद बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को मजबूत बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताए फायदे सीएम यादव ने इंदौर में 'दिव्य संतान प्रकल्प' कार्यक्रम में कहा कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जो आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि यह आधुनिक विज्ञान और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का एक मेल है। इसे राष्ट्र निर्माण में एक लंबे समय का निवेश माना जाना चाहिए। अस्पतालों में बनेंगे अलग कमरे मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य के सरकारी अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार के लिए विशेष कमरे बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि एलोपैथी के डॉक्टर भी अब व्यापक प्रसव पूर्व देखभाल के फायदों को स्वीकार कर रहे हैं। 13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए, यादव ने कहा कि राज्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा दे रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जाएंगे। यह आजादी के बाद पहली बार है जब इतने सारे आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जा रहे हैं। इनमें से आठ कॉलेज एक साल के भीतर चालू हो जाएंगे। अभिमन्यु और अष्टावक्र का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने गर्भ संस्कार की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में अभिमन्यु और अष्टावक्र जैसे उदाहरण हैं। इनसे पता चलता है कि गर्भ में ही मूल्यों, सीखने और संस्कारों को ग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण की प्रभावशीलता को दिखाया है, जहां आयुर्वेद और एलोपैथी एक दूसरे के पूरक थे। उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण जीवन शैली, भारतीय रसोई और स्वदेशी आहार के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

केंद्र में शिवराज सिंह चौहान की सफलता, मध्यप्रदेश के लिए घोषित हुआ सबसे बड़ा बजट

भोपाल   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 9वां बजट पेश किया। इस बजट में कई राज्यों को बड़ी सौगातें दी गई हैं। इसमें के टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मध्यप्रदेश के 10 शहरों को फायदा मिल सकता है। वहीं, मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल प्रदेश के 6 मंत्रियों में सबसे अधिक बजट शिवराज सिंह चौहान के विभाग को मिला है। केंद्र में शिवराज का जलवा कायम मध्यप्रदेश कोटे से मोदी सरकार की कैबिनेट में 6 मंत्री शामिल हैं। जिसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, डीडी उइके, वीरेंद्र कुमार खटीक और सावित्री ठाकुर लोकसभा सदस्य हैं। वहीं, एल मुरुगन एमपी से राज्यसभा के सदस्य हैं। सभी मंत्रियों के विभाग की तुलना करें तो उसमें शिवराज के कृषि और ग्रामीण को सबसे ज्यादा बजट मिला है। शिवराज के दो विभागों को इतना बजट केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं किसान कल्याण के लिए 130561.38 करोड़ और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग को 9967.40 करोड़। यानी कुल मिलाकर देखें तो कृषि विभाग 140528.78 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट 197023.14 करोड़ है। जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को 194368.81 करोड़ और भूमि संसाधन विभाग को 2654.33 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। सिंधिया के विभाग पर मेहरबान हुई केंद्र सरकार केंद्रीय संचार और नार्थ ईस्ट मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के डाक और संचार विभाग को 102267.02 करोड़ रूपये दिए गए हैं। जिसमें डाक विभाग को 130561.38 करोड़ और दूरसंचार विभाग को 73990.94 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, पूर्वोतर क्षेत्र विकास मंत्रालय को 6812.30 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। वीरेंद्र कुमार खटीक के विभाग को मिला इतना बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक के विभागों को कुल 15357.31 करोड़ दिए गए हैं। जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को 13687.59 करोड़ रूपये मिले और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को 1669.72 करोड़ की राशि दी गई है। यह भी पीछे नहीं एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के विभाग को कुल 4551.94 करोड़ का बजट मिला। जनजातीय कार्य मंत्रालय डीडी उइके को कुल 15421.97 करोड़ का बजट मिला। वहीं, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर को 28183.06 करोड़ का बजट मिला है।

जबलपुर में रैकेट का खुलासा: उज़्बेकिस्तान की महिला और उसके पति को हिरासत में लिया, मुख्य आरोपी फरार

जबलपुर  शहर में एक घर में पुलिस ने दबिश दी. यहां उज़्बेकिस्तान की एक महिला मिली. उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था. पुलिस की दबिश के दौरान मुख्य आरोपी फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी को हिरासत में लिया है. पुलिस जांच में जुटी है. जांच में पता चला कि उज्बेकिस्तान की इस महिला की शादी मुंबई में हुई थी. वह दिल्ली में ब्यूटी पार्लर की एक लड़की के माध्यम से जबलपुर पहुंची. जबलपुर में इसके पहले भी विदेशी महिलाओं से देह व्यापार करवाने के मामले सामने आ चुके हैं. मुखबिर ने 11 महिलाओं की दी सूचना महिला अपराध शाखा की नगर पुलिस अधीक्षक आशीष जैन ने बताया "जबलपुर के माढोताल थाने में पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि शिव चौधरी नाम का व्यक्ति देह व्यापार का अड्डा चला रहा है और इस बार उसने विदेशी महिलाओं को बुलाया है. जबलपुर में 11 महिलाओं की पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने जब शिव चौधरी के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां उज़्बेकिस्तान की रहने वाली महिला मिली." मुख्य आरोपी की पत्नी हिरासत में देह व्यापार चलाने का आरोपी शिव चौधरी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी और विदेशी महिला को हिरासत में ले लिया. सीएसपी आशीष जैन ने बताया "उज़्बेकिस्तान की महिला ने पूछताछ में जानकारी दी है कि 2011 में उसकी शादी मुंबई में हुई थी. 2023 में उसके पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद से ही वह दिल्ली में एक पार्लर में काम करती थी." स्पा सेंटर के नाम पर देह व्यापार उज्बेकिस्तान की महिला ने पुलिस को बताया "दिल्ली में एक लड़की ने शिव चौधरी से मेरी मुलाकात करवाई थी और उसी के माध्यम से मैं जबलपुर आई." सीएसपी आशीष जैन का कहना "उज़्बेकिस्तान की महिला पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इसकी जांच की जा रही है." जबलपुर में इसकी पहले भी विजयनगर में इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां कुछ विदेशी महिलाएं मिली थीं. जबलपुर में देह व्यापार कराने वाले लोग इन महिलाओं को रहने की जगह उपलब्ध करवाते हैं. मोबाइल पर ग्राहकों को फोटो और नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं. स्पा सेंटर की आड़ में भी कई जगहों पर इसी तरह के गलत काम चल रहे हैं. 

MP को केंद्रीय बजट में 7500 करोड़ का झटका, सिंहस्थ पैकेज की उम्मीदें टूटीं, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू 'महिला अमृत मित्र' की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 'महिला अमृत मित्र' को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है।

कोहेफिजा में 11वीं की छात्रा के साथ कार में रेप, युवक ने अश्लील वीडियो बनाया, ब्लैकमेल कर मांगे एक लाख रुपए

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी में भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। जाल में फंसाकर छात्राओं को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया है। मामले में नाबालिग से ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली की बात भी सामने आई है। आरोपी ने पहले नाबालिग छात्रा को प्रेम जाल में फंसाकर उससे कार में रेप किया और उसका अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत के बाद कोहेफिजा पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता कोहेफिजा थाना क्षेत्र की 11वीं की छात्रा है। वह शाहपुरा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ती है। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। पीड़िता ने आरोपी को 40 हजार दिए आरोपी ने पीड़िता को पता चले बिना रेप के दौरान उसका अश्लील वीडियो बना लिया था। कुछ समय बाद उसने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से 1 लाख रुपए की मांग की। बदनामी के डर से घबराई छात्रा ने किसी तरह 40 हजार रुपए का इंतजाम कर आरोपी को दिए। पैसे लेने बाद दोस्तों को दिखाया वीडियो पैसे लेने के बाद भी आरोपी की मांग जारी रही और वह बार-बार रेप करने का दबाव बनाता रहा। तंग आकर जब छात्रा ने उसे सोशल मीडिया और फोन पर ब्लॉक कर दिया, तो आरोपी ने अलग-अलग नंबरों से कॉल कर परेशान किया। जब छात्रा नहीं मानी, तो आरोपी ने वह निजी वीडियो छात्रा के दोस्तों को दिखा दिया। इसके बाद छात्रा ने अपने मौसेरे भाई की मदद से थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।  धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को हिरासत में ले लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

कागज़ों में सुधार, ज़मीन पर भ्रष्टाचार?

मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले अफसर की दबंगई, RTI आदेशों की खुलेआम अवहेलना बड़वानी मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग कागज़ों में भले ही सुधारों के दावे करता हो, नई-नई योजनाओं का ढोल पीटता हो, मगर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है। योजनाएँ बनती हैं, मॉनिटरिंग के दावे होते हैं, पीठ थपथपाई जाती है, पर स्कूलों और दफ्तरों की सच्चाई बदहाल ही बनी हुई है। सरकार अपनी ही योजनाओं की जमीनी सच्चाई देखने में नाकाम साबित हो रही है। इसका ताज़ा उदाहरण बड़वानी जिले में पदस्थ जिला परियोजना समन्वयक प्रमोद शर्मा हैं, जो स्वयं को मंत्री का रिश्तेदार बताकर पत्रकारों,जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों पर रोब जमाते फिरते हैं। मामला सिर्फ दबंगई तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून की खुली अवहेलना का है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी आज तक आवेदक को नहीं दी गई, जबकि उसी कार्यालय से राशि जमा कराने के पत्र भी जारी हुए और आवेदक द्वारा राशि जमा भी कर दी गई। इसके बावजूद जानकारी रोकना साफ तौर पर कानून का मज़ाक उड़ाना है। जब आईटीआई के कार्यकर्ता ने मजबूर होकर प्रथम अपील जिला पंचायत बड़वानी में की, तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को भी जिला परियोजना अधिकारी प्रमोद शर्मा ने हवा में उड़ा दिया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी काजल चावला के आदेश कि आपको 30/1 /2026 को जिला पंचायत कार्यालय मे मेरे समक्ष 4:00 बजेजानकारी लेकर प्रस्तुत होवे उसके बावजूदउनके आदेशों कि धजिया उड़ा दी गई और उपस्थिति भी नहीं हुए! हद तो तब हो गई जब आवेदक स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यालय पहुँचा, वहाँ भी सिर्फ अगली तारीख का झुनझुना थमाकर मामला टाल दिया गया। जिला पंचायत सीईओ काजल चावला सवालों के घेरे में बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिला पंचायत सीईओ काजल चावला आवेदक को निशुल्क जानकारी दिला पाएंगी? क्या जमा किया गया शुल्क वापस करने का आदेश जारी होगा? यदि आदेश जारी हुआ, तो क्या उसका पालन भी कराया जाएगा या वह भी फाइलों में दफन हो जाएगा? अगर जिला प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला सिर्फ RTI उल्लंघन नहीं बल्कि अफसरशाही की तानाशाही का उदाहरण बन जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला पंचायत प्रशासन अपने ही आदेशों की इज्जत बचा पाता है या फिर दबंग अफसरों के सामने व्यवस्था फिर बेबस नजर आएगी।  

मध्यप्रदेश में बारिश और कोहरे का प्रभाव, 25 जिलों में अलर्ट, ग्वालियर में बूंदाबांदी, सीहोर-मुरैना में 50 मीटर विजिबिलिटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले तीन दिन तक मावठे की बारिश सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को ग्वालियर से लेकर विंध्य क्षेत्र तक 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय कई इलाकों में घना कोहरा भी देखने को मिला, जिससे ठंड और बढ़ गई है। रविवार को भी मौसम ने जमकर रंग दिखाया। नीमच और मंदसौर में तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे, वहीं ग्वालियर, धार, मुरैना और उज्जैन सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में एक बार फिर से आंधी, ओले और बारिश वाला मौसम है। सोमवार सुबह अशोकनगर, आगर-मालवा, टीकमगढ़ में बारिश हुई। वहीं, कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। हालांकि, ठंड का असर कम है और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर ही चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर, मुरैना, भिंड, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इससे पहले दतिया, ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, खजुराहो, रीवा, सतना, भोपाल, गुना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, श्योपुर, जबलपुर, दमोह, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, मलाजखंड, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया। अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम     3 फरवरी– ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में बारिश होने के आसार है।     4 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।     5 फरवरी- आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं है। ठंड का असर बढ़ सकता है। कई जिलों में बारिश का दौर, कोहरा भी छाया इससे पहले रविवार को प्रदेश में बारिश, आंधी और घने कोहरे वाला मौसम रहा। ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में रात और सुबह बारिश हुई। वहीं, सुबह कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा। दतिया और खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रही। खजुराहो, राजगढ़ और नौगांव में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में सुबह 9 बजे तक कोहरे का असर देखा गया। शाम को नीमच और मंदसौर में मौसम बदल गया। तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरने लगे। इससे कई गांवों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बारिश की वजह से गेहूं की फसलें आड़ी हो गई। इससे नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, दतिया, खजुराहो, ग्वालियर, नौगांव, सतना, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन, श्योपुर, राजगढ़, रतलाम, गुना, दमोह, मंडला, टीकमगढ़, मलाजखंड में कोहरे का असर अधिक रहा। बड़े शहरों में रात का तापमान 12 डिग्री से ऊपर ही रहा।  

इंदौर: दूषित पानी से 32वीं मौत, भागीरथपुरा की महिला पहले से थी दूसरी बीमारियों से पीड़ित

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे।

विकसित भारत की ओर केंद्रीय बजट 2026-27: क्या हैं सरकार की नई रणनीतियां?

केंद्रीय बजट 2026–27: ‘विकसित भारत’ की ओर एक रणनीतिक कदम केंद्रीय बजट 2026–27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि Ease of Doing Business और Tax Simplification की दिशा में एक संरचनात्मक सुधार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट “कर्तव्य” की भावना से प्रेरित है, जिसमें राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए मध्यम वर्ग और उद्योग जगत को संतुलित राहत देने का प्रयास किया गया है। प्रत्यक्ष कर: अनुपालन में सुगमता की दिशा में बड़ा कदम सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट का सबसे बड़ा आकर्षण नया आयकर अधिनियम, 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। उनके अनुसार, इस नए कानून का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, संक्षिप्त और करदाता-अनुकूल बनाना है। उन्होंने बताया कि नई कर व्यवस्था के तहत ₹4 लाख तक की आय को कर-मुक्त रखा गया है, जबकि स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित ₹12.75 लाख तक की आय पर कर देयता शून्य होगी, जिससे मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी। सीए गर्ग ने यह भी कहा कि संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च किया जाना करदाताओं और प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दोनों के लिए एक व्यावहारिक राहत है, हालांकि विलंब शुल्क की व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने विदेश यात्रा (LRS), शिक्षा एवं चिकित्सा खर्च पर टीसीएस की दर को 5%/20% से घटाकर 2% किए जाने को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे करदाताओं के नकदी प्रवाह पर दबाव कम होगा। इसके अलावा, शेयर बायबैक से प्राप्त आय को अब शेयरधारकों के हाथों कैपिटल गेन के रूप में करयोग्य बनाना कर ढांचे को अधिक तार्किक बनाता है। एमएसएमई और कॉर्पोरेट सेक्टर: विकास को नई गति एमएसएमई सेक्टर पर बोलते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि सरकार ने छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘कॉर्पोरेट मित्र’ योजना के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएसएमई को मार्गदर्शन देने हेतु पैरा-प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएंगे, जिनके प्रशिक्षण में आईसीएआई की प्रमुख भूमिका होगी। सीए गर्ग के अनुसार, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2000 करोड़ करना बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुपालन को सरल बनाएगा। उन्होंने बुनियादी ढांचे के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय आवंटन को स्टील, सीमेंट और कोर सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी बताया। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार की प्रतिबद्धता राजकोषीय स्थिति पर टिप्पणी करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखना सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शेयर बाजार और निवेशक शेयर बाजार पर बजट के प्रभाव को लेकर सीए गर्ग ने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि से अल्पकालिक और अत्यधिक सट्टा गतिविधियों पर कुछ नियंत्रण आएगा। उन्होंने बताया कि फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% तथा ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है। निष्कर्ष अंत में सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट 2026–27 Simplification और Standardization की स्पष्ट दिशा तय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि कर कानूनों की जटिलताओं को कम कर डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना सरकार की Trust-based Compliance नीति को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह बजट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक अवसर है, जिसमें उनकी भूमिका केवल कर अनुपालन तक सीमित न रहकर रणनीतिक सलाहकार के रूप में विकसित हो सकती है। विशेषज्ञ राय सीए आयुष गर्ग (FCA, CS, CMA, M.Com)

खेल महाकुंभ बना मेगा शो: रविंद्र जडेजा–शिवराज सिंह की एंट्री, रोमांचक मुकाबलों के लिए तैयार हजारों दर्शक

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में खेल बार भव्य 'सांसद खेल महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत 1 फरवरी से हो चुकी है। इस खेल महाकुंभ में 600 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय टीम से स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा मुख्य अतिथि होंगे। ग्राउंड में लगभग 10 हजार से दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। प्राप्त जानकारी अनुसार, 2 फरवरी को दोपहर तीन बजे भोपाल से रवींद्र जडेजा का काफिला गोपालपुर से रायसेन पहुंचेगा। स्टेडियम में बनाए गए 8 अस्थायी स्टैंड दर्शकों के बैठने की सुविधा के लिए 8 अस्थायी स्टैंड बनाए गए हैं। हर स्टैंड में 5 कतारें हैं। एक स्टैंड में लगभग 250 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही मैदान के अलग-अलग दिशाओं में स्टैंड बनाए गए हैं। जिसमें दर्शक आराम से बैठकर मैच देख सकेंगे। वीवीआईपी के लिए अलग व्यवस्था स्टेडियम की उत्तर दिशा में एक मुख्य डोम तैयार किया गया है। जिसके दोनों ओर दो छोटे-छोटे डोम बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य अतिथि और वीवीआईपी लोगों के व्यवस्था रहेगी।   428 खिलाड़ी पहुंचे आज खेल महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान ने शिरकत की और खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन करते हुए क्रिकेट खेला। इस दौरान विदिशा संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा की टीमों के 428 खिलाड़ी पहुंचे। इस शिवराज के पुत्र कार्तिकेय चौहान भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि समापन समारोह में भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा बतौर मुख्य अतिथि होंगे। खेल महाकुंभ के आगाज के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रभु राम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, विदिशा विधायक मुकेश टंडन समेत कई अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए।

MP HC का बड़ा आदेश: सरकारी दफ्तरों में अब खुद सुलझेंगे कर्मचारियों के सर्विस विवाद, सीधे लाभ में आएंगे 6 लाख कर्मचारी

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को 'इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम' (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजने के निर्देश दिए हैं।     याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी को अपना आवेदन दें।     सरकार और संबंधित विभाग इस पर 45 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला लें। 6 लाख कर्मचारियों के लिए 'राहत' का फॉर्मूला यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कोर्ट के सुझाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…     डेजिग्नेटेड ऑफिसर: हर विभाग में एक नामित अधिकारी हो जो विवादों को सुने।     निष्पक्षता: पारदर्शिता के लिए जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।     बचत: इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों का समय व पैसा भी बचेगा। 'अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़' सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।" कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।

मतदाता डेटा में चौंकाने वाली विसंगतियाँ: कभी पिता से छोटा बेटा, कभी 6 संतानों का रिकॉर्ड!

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान डेटा में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जिले में करीब 7 लाख मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड में तार्किक त्रुटियां (Logical Errors) पाई गई हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाले मामले वे हैं जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण माता-पिता की उम्र उनकी संतान से भी कम दर्ज हो गई है। डेटा में मिलीं ये 6 बड़ी विसंगतियां बीएलओ (BLO) एप के जरिए की गई छंटनी में भोपाल और मध्यप्रदेश स्तर पर लाखों गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं:     उम्र का गणित फेल: भोपाल में 1.19 लाख और प्रदेश में 39 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से महज 15 साल कम या उससे भी कम दर्ज है।     असंभव आयु अंतर: करीब 18 हजार मामलों में माता-पिता की उम्र मतदाता से 50 साल से भी ज्यादा बड़ी दिखाई गई है।     रिश्तों में उलझन: दादा-दादी की उम्र पोते-पोतियों से 40 साल कम दर्ज होने के 15 हजार से ज्यादा मामले भोपाल में मिले हैं।     संतानों का रिकॉर्ड: जिले के 46 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में 6 या उससे अधिक संतानें दर्ज पाई गई हैं।     नाम और जेंडर: पिता के नाम में मिसमैच और जेंडर की गड़बड़ी के भी लाखों मामले सामने आए हैं। क्यों हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी? डिजिटलाइजेशन के दौरान पुराने रिकॉर्ड को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने पर ये चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:     शॉर्ट नाम का उपयोग: पुराने रिकॉर्ड में 'डीके' लिखा था, जिसे सॉफ्टवेयर ने नए नाम 'देवेंद्र कुमार' से मैच नहीं किया।     उपनाम (सरनेम) का छूटना: सरनेम न होने पर एप ने उसे अलग व्यक्ति मानकर सूची से बाहर कर दिया।     लिंक की समस्या: एक मामले में पिता ने बेटों का लिंक खुद से और बेटियों का लिंक दादा के रिकॉर्ड से जोड़ दिया, जिससे डेटा मिसमैच हो गया।     अधूरा डेटा: पिता या माता का नाम गलत टाइप होने से सॉफ्टवेयर ने रिकॉर्ड रिजेक्ट कर दिया। अब क्या होगा? 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम     इन विसंगतियों के कारण चुनाव आयोग को डेटा जमा करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी है। अब भोपाल कलेक्टर ने 14 फरवरी तक सभी त्रुटियों को सुधारने का लक्ष्य दिया है।     2 लाख मतदाताओं को नोटिस: जिले के 181 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शेष बचे 2 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।     घर बैठे सुधार: यदि बीएलओ आपके घर आता है और मौके पर ही दस्तावेजों के आधार पर सुधार हो जाता है, तो आपको दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।

एमपी का बड़ा कदम, 300 एकड़ में होगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण

उज्जैन मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अब इंटरनेशनल लेवल का एयरपोर्ट बनेगा। अभी तक यहां पर एटीआर 72 सीटर विमान के हिसाब से निर्माण की तैयारी चल रही थी, लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा शासन को रिवाइज प्रस्ताव भेजा है। जिसे अगर स्वीकृति मिलती है तो जल्द काम शुरू किया जा सकेगा। इस एयरपोर्ट को सिंहस्थ के पहले शुरू करने की तैयारी है। दरअसल, उज्जैन-देवास मार्ग पर स्थित दताना-मताना की हवाई पट्टी को सरकार एयरपोर्ट की तर्ज पर निर्माण कर रही है। साल 2025 को 1 नवंबर को मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर मध्यप्रदेश सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एयरपोर्ट निर्माण के लिए एमओयू साइन हुए थे। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया में तेजी आई। जिसके बाद मिट्टी का परीक्षण किया गया। तब एटीआर-72 श्रेणी के विमानों के संचालन के प्रंबधन के हिसाब से निर्माण की योजना था, लेकिन इसे अब नया विस्तार दिया जाएगा। शासन क द्वारा बोइंग सी-20 के संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है। सिंहस्थ के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाने की तैयारी सिंहस्थ-2028 को देखते हुए एयरपोर्ट का विस्तार करने की योजना है। जिससे आने वाले समय से इस क्षेत्र को व्यावसायिक स्तर पर भी फायदा होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनने के बाद इंदौर से निर्भरता खत्म होगी। अधिग्रहण में होगा बदलाव वर्तमान में उज्जैन एयरपोर्ट के लिए 241 एकड़ जमीन की जरूरत थी। जिसका दायरा बढ़ाकर अब 300 से अधिक किया जा सकता है। वहीं, पहले रनवे 1800 मीटर में बनाने की योजना थी। अब इसे 3600 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। रनवे को मिलाकर कुल 4100 मीटर जमीन चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से 45 करोड़ रूपये की प्रारंभिक राशि स्वीकृत की गई थी। इस लागत को बढ़ाया जा सकता है।

अब इलाज के लिए नहीं करनी पड़ेगी लंबी यात्रा, 184 करोड़ से होंगे अस्पतालों का नवीनीकरण

ग्वालियर स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 184 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया है। यह प्रस्ताव वर्ष 2026-27 के एन्युअल प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसके लागू होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर के शहरों दिल्ली-मुबंई की यात्रा काफी हद तक कम हो जाएगी। डिजिटल क्रांति से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता प्रस्ताव में डिजिटल गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिला अस्पताल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक कंम्प्यूटर लैब स्थापित की जाएंगी। मरीजों का पंजीकरण, इलाज का रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग और रेफरल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी।   डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीक- आधारित प्रशिक्षण भी मिलेगा। सीएमएचओ कार्यालय में 20 कंम्प्यूटरों वाली विशेष कंम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी, जहां स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एंट्री होगी। जननी सुरक्षा योजना और प्रसूता सहायता जैसी योजनाओं के भुगतान में गति और पारदर्शिता आएगी। बुनियादी ढांचे का मजबूत उन्नयन प्रस्ताव में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, वार्डों का विस्तार, साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार और मरीजों की अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर ने बताया कि यह प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे जिले की स्वास्थ्य तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।   नए एनआरसी केंद्र स्थापित होंगे जिले में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष फोकस किया गया है। भितरवार और बरई में दो नए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ देखरेख, पोषण आहार और उचित इलाज मिलेगा। यह पहल ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होगी।

MP कॉलेजों में परीक्षा सुरक्षा बढ़ेगी, CCTV न होने पर शिक्षण संस्थानों को चेतावनी

भोपाल मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सरकारी और निजी कॉलेजों में होने वाली बी.कॉम, बी.एससी, एम.कॉम और एम.एससी की परीक्षाएं सीसीटीवी की निगरानी में कराने के निर्देश दिए हैं। जिससे नकल और अनियमितताओं पर रोक लग सके। विभाग के इस फैसले ने कॉलेज प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश के 70 फीसद कॉलेजों में सीसीटीवी लगे ही नहीं है, जबकि फरवरी से परीक्षाएं शुरू होनी है। ऐसे में सीसीटीवी में परीक्षाएं कराने की संभावना कम ही है। बीयू ने भी संबंध कॉलेजों में सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कहीं भी व्यवस्था नहीं है।   राजधानी के कॉलेजों का हाल राजधानी में 13 पारंपरिक सरकारी कॉलेज है। इसके अलावा 50 से अधिक निजी कॉलेज भी हैं। इनमें से कई सरकारी कॉलेजों में सीमित संख्या में कैमरे लगे हैं, जो केवल मुख्य प्रवेश द्वार या कार्यालय तक ही सीमित है। वहीं, निजी प्राइवेट कॉलेजों में सीसीटीवी की व्यवस्था नहीं है। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 1300 से अधिक सरकारी एवं निजी कॉलेज में 14 लाख से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थी पढ़ते हैं। कॉलेज प्रबंधन का तर्क है कि जल्द ही सीसीटीवी की व्यवस्था की जाएगी। सीसीटीवी की करनी होगी व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि सीसीटीवी निगरानी से परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी होगी और विद्यार्थियों में अनुशासन बढ़ेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कालेजों को जल्द कैमरे लगाने के निर्देश निर्देश दिए गए है और इसकी निगरानी भी की जाएगी।

चंबल का सर्वे कराएगी सरकार, घड़ियालों के घोंसलों को संरक्षण का संदेश

भोपाल राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियालों के घोंसलों की सुरक्षा और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकार चंबल नदी का विशेष सर्वेक्षण शुरू करने जा रही है। चंबल नदी में 2,462 घड़ियाल हैं और कई दुर्लभ प्रजातियों के कछुए भी पाए जाते हैं। घड़ियालों के घोंसलों को संरक्षित करने के लिए वन विभाग फरवरी से चंबल नदी में सर्वे शुरु कराएगा। नदी की बाढ़ के कारण केवल तीन प्रतिशत बच्चे जीवित बच पाते हैं, जिसे देखते हुए यह सर्वे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   घड़ियाल भी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं बता दें कि घड़ियाल भी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं। इसके लिए वह नदी के किनारे रेत में गहरा गड्डा खोदते हैं। खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से घड़ियालों के घोंसलों को हमेशा खतरा बना रहता है। नदी में बाढ़ आने पर भी घोंसले नष्ट हो जाते हैं। इनकी रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए वन विभाग सर्वेक्षण का कार्य करेगा। चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य हो रहा है इसमें घड़ियालों की नए सिरे से गणना के साथ उनके घोंसलों को चिह्नित कर उनकी रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य हो रहा है। चंबल नदी में डॉल्फिन भी हैं। इनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य जारी है। त्रिराज्यीय निगम बनाने का भी प्रयास त्रिराज्यीय निगम बनाने का भी प्रयास है ताकि पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर घड़ियालों का संरक्षण किया जा सके। घड़ियालों की नेस्टिंग साइट को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। चंबल नदी के तटीय इलाकों में सर्वेक्षण कर घड़ियालों के घोंसलों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके।   चंबल नदी दुनिया के 80 % से अधिक घड़ियालों का घर घड़ियालों के बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रतिवर्ष लगभग 200 अंडे एकत्र कर देवरी पुनर्वास केंद्र में लाए जाते हैं, जहां उन्हें तीन साल तक सुरक्षित पालने के बाद नदी में छोड़ दिया जाता है। चंबल नदी दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक वयस्क घड़ियालों का घर है। सरकार ने घड़ियालों की घटती संख्या को देखते हुए 10 नए घड़ियाल भी हाल ही में छोड़े हैं और नई घड़ियाल संरक्षण परियोजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

टेक्नोलॉजी ने बदल दिया पुलिसकर्मियों का दिन, छुट्टी होगी बस एक क्लिक में

भोपाल प्रदेश के एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों के लिए अच्छी खबर है। छुट्टी और डेपुटेशन आदि के लिए अब उन्हें आवेदन लेकर नहीं घूमना होगा, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट इन्फॉरमेशन सिस्टम (एचआरएमआइएस) के माध्यम से वह कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसकी प्रगति देख सकेंगे। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने एचआरएमआइएस बनाया है, जिसके पहले चरण का काम इस माह पूरा हो जाएगा। इसमें उनकी सेवा पुस्तिका भी स्कैन करके ऑनलाइन की जा रही है। इसके कई मॉड्यूल हैं। इसमें पुलिसकर्मियों को कई सुविधाएं हो जाएंगी। जैसे वे अपनी सालाना गोपनीय रिपोर्ट ऑनलाइन देख सकेंगे। बता दें कि इसके पहले पुलिस में वर्ष 2015 से पर्सनल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) चलता था, लेकिन इसे अपडेट नहीं किया गया। नई आवश्यकताओं की दृष्टि से तकनीकी तौर पर बहुत अच्छा साबित नहीं हो रहा था, जिससे बंद कर दिया गया।   पीआईएस की कमियों को किया गया दूर इस कारण उसकी जगह एचआरएमआईएस लाया गया है। पीआईएस में जो कमियां थीं, उन्हें इसमें दूर किया है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। लगभग दो लाख का शेष है। सर्विस रिकॉर्ड में वह अपने पुरस्कार, सजा, ली गईं और बकाया छुट्टियों का विवरण ऑनलाइन देख सकेंगे। बता दें स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सहित कई विभागों में पहले से ही एचआरएमआईएस लागू है। कर्मचारियों की उपस्थिति को भी इससे जोड़ा गया है। पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों में लगभग 70 हजार मैदानी पदस्थापना वाले हैं। उनके लिए एचआरएमआईएस से बड़ी सुविधा हो जाएगी।

औद्योगिक क्षेत्र बगरोदा भोपाल के लिये एमपी ट्रांसको ने उर्जीकृत किया अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि भोपाल के औद्योगिक इकाइयों को विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 132 के.व्ही. सबस्टेशन बगरोदा भोपाल में एक अतिरिक्त 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर उर्जीकृत किया है। इससे जहाँ अब बगरोदा (भोपाल) क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के लिये एक अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर की व्यवस्था हो गई है, वही अब दो ट्रांसफार्मर होने से मेनटेनेन्स के लिये शटडाउन लेने आदि की समस्या से भी निजात मिली है। इन क्षेत्रों को भी होगा फायदा एम पी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  प्रदीप राघव ने बताया कि बगरोदा में दूसरे पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना से औद्योगिक केंद्र विकास निगम रामाखेड़ी, उमरावगंज, सोलर इनर्जी, दुर्गास्टील 33 के.व्ही. फीडरो से जुड़े उपभोक्ताओं को लाभ होगा। अब उन्हें बेहतर गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उचित वोल्टेज पर प्राप्त हो जाऐगी। इस क्षमता वृद्धि से बगरोदा सबस्टेशन की क्षमता बढ़कर 90 एम.व्ही.ए. की हो गई है। भोपाल की ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी में वृद्धि  राघव ने जानकारी दी कि भोपाल जिले में एमपी ट्रांसको अपने कुल 18 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है, इसमें 400 के.व्ही. का एक, 220 के.व्ही के 4, 132 के.व्ही. के 13 सबस्टेशन शामिल हैं। इनकी कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर अब 4603 एम.व्ही.ए. की हो गई है।  

केंद्रीय बजट में महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के लिए समावेशी दृष्टिकोण : सुश्री निर्मला भूरिया

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट का स्वागत करते हुए कहा कि यह बजट महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और वंचित वर्गों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। बजट में महिला सशक्तिकरण, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देना सरकार की संवेदनशील एवं दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी, पोषण अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बाल संरक्षण से जुड़ी पहलों को मजबूती मिलने से जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन आएगा। इससे न केवल महिलाओं की सामाजिक–आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव भी मजबूत होगी। मंत्री सुश्री भूरिया ने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट ‘सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास’ के संकल्प को साकार करेगा, साथ ही राज्यों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में प्रभावी क्रियान्वयन का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार केंद्रीय बजट के प्रावधानों को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।  

विकास और जनकल्याण को समर्पित बजट : जल संसाधन मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत करते हुए कहा है कि यह बजट विकास और जनकल्याण को समर्पित है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय वित्त मंत्री मती सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का यह बजट देश के समग्र विकास, ग्रामीण सशक्तिकरण, कृषि एवं जल संसाधन प्रबंधन और आधारभूत संरचना के विस्तार की दिशा में सकारात्मक पहल है। बजट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों को लाभ पहुँचाने का स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाई देता है, जिससे मध्यप्रदेश को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के विकास में यह बजट मील का पत्थर साबित होगा। मंत्री  सिलावट ने कहा कि जल संरक्षण, सिंचाई, कृषि, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर केंद्र सरकार का विशेष फोकस प्रदेश के किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इससे जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों को नई गति प्राप्त होगी। मंत्री  सिलावट ने प्रधानमंत्री  मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री मती सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और सशक्त करता है।  सिलावट ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वय से केंद्रीय बजट के प्रावधानों का मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा।  

खेलकूद शारीरिक स्वास्थ्य एवं सकारात्मक ऊर्जा को देते हैं बढ़ावा : प्रधान मुख्य वन संरक्षक अम्बाडे

आईएफएस मीट–2026 के अंतर्गत खेलकूद प्रतियोगिताएँ हुईं उत्साहपूर्वक भोपाल आईएफएस मीट–2026 में शनिवार 31 जनवरी 2026 को एक दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन सफलतापूर्वक हुआ। खेल प्रतियोगिताएँ अत्यंत उत्साहपूर्ण, अनुशासित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुईं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अम्बाडे ने कहा कि खेलकूद आयोजन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य एवं सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आपसी सौहार्द, सहयोग और संगठनात्मक एकता को भी सुदृढ़ करते हैं। श्री अम्बाडे ने सभी प्रतिभागियों को खेल भावना, अनुशासन एवं निष्पक्षता की शपथ दिलाई। खेलकूद कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती डॉ. कल्पना अम्बाडे द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। शपथ के दौरान प्रतिभागियों ने पूर्ण ईमानदारी, अनुशासन एवं खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लेने, सभी नियमों का पालन करने, निर्णायकों एवं आयोजकों का सम्मान करने तथा जीत–हार को समान भाव से स्वीकार करते हुए आपसी सौहार्द, एकता एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने का संकल्प लिया। खेल प्रतियोगिता में वॉलीबॉल, क्रिकेट, रस्साकशी, पतंगबाजी सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त महिलाओं एवं बच्चों के लिए विशेष खेल गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं, जिनमें लेमन रेस, बोरा रेस, फ्रॉग रेस, म्यूजिकल चेयर, ट्रेजर हंट आदि शामिल रहीं। प्रतियोगिताओं में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों एवं उनके परिजन ने अत्यंत उत्साह एवं खेल भावना के साथ सहभागिता की। प्रतिभागियों के जोश और पारिवारिक सहभागिता ने पूरे आयोजन को जीवंत एवं स्मरणीय बना दिया। खेलकूद प्रतियोगिता में आईएफएस अधिकारी एवं उनके परिजन शामिल हुए  

जनता के हित का बजट, छात्राओं की सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और शहरों के विकास का बजट : खाद्य मंत्री राजपूत

खाद्य मंत्री ने कहा, केंद्रीय बजट में एमपी को बड़ी राहत, बेटियों से लेकर शहरों तक विकास की सौगात भोपाल केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट को मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने जनता को समर्पित, विकासोन्मुख और समावेशी बजट बताया है। मंत्री  राजपूत ने कहा कि बजट में मध्यप्रदेश को मिली सौगातें राज्य के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी विकास और रोजगार के नए द्वार खोलेंगी। हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल निर्माण की घोषणा से विशेषकर जनजातीय और ग्रामीण अंचलों की छात्राओं को सुरक्षित आवास मिलेगा, जिससे वे बिना किसी बाधा के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। यह निर्णय बेटियों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास हेतु किए गए बड़े आवंटन से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर जैसे शहरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे आम नागरिकों को बेहतर जीवन सुविधाएं, रोजगार और व्यापार के अवसर मिलेंगे।  राजपूत ने एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में स्कूलों एवं कॉलेजों में लैब स्थापना के निर्णय को युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह बजट नई पीढ़ी को तकनीक और नवाचार से जोड़ने वाला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग, सभी को राहत देने वाला है और “विकसित भारत” के संकल्प को और मजबूत करता है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर दी प्रतिक्रिया

विकास को मिलेगी और अधिक गति गरीब, युवा, अन्नदाता और महिलओं पर विशेष फोकस शहरी विकास, तीर्थ स्थल सुधार, महिला छात्रावास निर्माण, अस्पतालों के अपग्रेडेशन और टेक्सटाईल्स क्षेत्र की सौगातों से प्रदेश को मिलेगा विशेष लाभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में प्रभावी कदम है। बजट में गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं और महिलाओं पर विशेष फोकस है। यह बजट विकास को और अधिक गति देगा तथा भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था में उच्च स्थान दिलवाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आर्थिक प्रगति को बढ़ाना, जन सामान्य की उम्मीदों को पूरा करना और सबका साथ सबका विकास बजट की मुख्य विशेषता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के विकास और सभी शहरी आर्थिक क्षेत्रों पर 5 साल में 5000 करोड़ रुपए खर्च करने, छोटे शहरों में तीर्थ स्थल विकसित करने, प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास के निर्माण और जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने की व्यवस्था से प्रदेश को बहुत लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेली कॉलेज इंदौर में केंद्रीय बजट पर विषय-विशेषज्ञों से संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के बाद केन्द्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय बजट की सभी क्षेत्रों में सराहना हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय बजट में वस्त्र उद्योग सेक्टर में रिफॉर्म पर बल दिया गया है, इससे मध्य प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री  मोदी ने मध्यप्रदेश को पीएम मित्र पार्क के रूप में टैक्सटाइल क्षेत्र की बड़ी सौगात दी है। इससे तीन लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिलने के साथ ही 6 लाख किसानों को लाभ होगा। इस पार्क से प्रदेश का मालवा निमाड़ अंचल नई उड़ान के लिए तैयार है। केंद्र सरकार की वस्त्र उद्योग सेक्टर की दूरगामी नीतियों से संपूर्ण राष्ट्र के साथ मध्यप्रदेश को भी विशेष लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी तथा केंद्रीय वित्त मंत्री का अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बजट में इनकम टैक्स में छोटे करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान करने की व्यवस्था है। राजकोषीय घाटे का 4.3% का लक्ष्य रखा गया है। राज्यों के लिए एक लाख 40 हजार करोड़ रुपए का अनुदान रखा गया है, जिससे मध्यप्रदेश को भी लाभ प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत को बायोफार्मा हब बनाया जाएगा। क्लिनिकल ट्रायल स्थलों का भी विकास होगा। केंद्रीय बजट में केयर इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान किए गए हैं। इससे बुजुर्गों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था होगी। गंभीर बीमारियों की दवाएँ भी सस्ती होंगी, जिससे सभी वर्गों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय बजट में विनिर्माण क्षेत्रों का रणनीतिक विकास करने को प्राथमिकता दी गई है, इससे भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट और ए.आई. के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त गाइड उपलब्ध कराने की व्यवस्था से पर्यटन क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पुरातत्व की दृष्टि से संरक्षित स्थलों को खोलने के निर्णय से देश-विदेश के लोग हमारी समृद्ध प्राचीन विरासत से परिचित और प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों को टैक्स में दी गई राहत से वैश्विक स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में भारत का महत्व बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मोदी सरकार 3.0 का तीसरा बजट सबका साथ- सबका विकास की भावना के अनुरूप है।  

केंद्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत की दिशा में होगा महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री  मोदी का माना आभार और केंद्रीय वित्त मंत्री मती सीतारमण को दी बधाई भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को नई गति देगा। बजट में समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण और पंच प्राण के सिद्धांत को मूर्त रूप दिया गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण को इस ऐतिहासिक बजट के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बजट का उद्देश्य समग्र और सर्वस्पर्शी विकास को सुनिश्चित करना है, ताकि देश के हर क्षेत्र और नागरिक तक विकास की लहर पहुँच सके। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल संपर्क को मजबूती मिलेगी तथा रोजगार के अवसरों और उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही, सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत के करीब रखा है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्वास्थ्य के क्षेत्र को बजट में विशेष प्राथमिकता देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बायोफार्मा शक्ति पहल के तहत अगले पांच वर्षों में 10 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत बायोलॉजिक और बायोसिमिलर दवाओं में आत्मनिर्भर बनेगा। साथ ही, आयुष और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए पांच क्षेत्रीय आयुष मेडिकल हब और तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे स्वास्थ्य शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के लिये बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये हैं। स्वास्थ्य शिक्षा और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल क्षेत्र में प्रशिक्षण देने, 1.5 लाख केयरगिवर्स प्रशिक्षित करने और 1 हज़ार से अधिक क्लिनिकल ट्रायल साइटस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दक्ष कर्मचारियों की पूर्ति होगी और स्वास्थ्य अनुसंधान की क्षमता बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मध्यम वर्ग और करदाताओं के लिए बजट में दिये गये संकेतों से आर्थिक गतिविधियों में सुगमता और पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल संपर्क, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के लिए ब्रॉडबैंड, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश को प्राथमिकता देने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्यमिता में बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इस बजट में यह स्पष्ट है कि “सबका साथ, सबका विकास” नीति निर्माण का आधार है। यह बजट आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक समावेशन और तकनीकी प्रगति को एकसाथ जोड़कर देश के सभी नागरिकों तक विकास की लहर पहुँचाने का प्रयास करता है।

देश के सर्वांगीण विकास का बजट : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को प्रस्तुत केंद्रीय बजट को ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने देश के सर्वांगीण विकास का बजट कहा है। उन्होंने जनता को समर्पित, विकासोन्मुख और समावेशी बजट बताया है। मंत्री श्री तोमर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग, सभी को राहत देने वाला है। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि बजट में मध्यप्रदेश को मिली सौगातें रोजगार के नए द्वार खोलेंगी। उन्होंने कहा कि शहरों के विकास के लिए किए गए बजट प्रावधान से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन जैसे शहरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा।  

संतों की वाणी आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने का कर रही है कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में संत रविदास जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल स्वच्छता दीदीयों का किया सम्मान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संतों की वाणी आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर प्रवास के दौरान संत रविदास जयंती के अवसर पर नगर निगम के झोन कार्यालय क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत रविदास महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की। इस अवसर पर उन्होंने संत रविदास जी के सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के संदेश को स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान से जुड़ी ‘स्वच्छता दीदियों’ का पुष्पहार से स्वागत किया और उनके योगदान की सराहना करते हुए अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इंदौर की स्वच्छता पहचान पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है और इसमें स्वच्छता कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नागरिकों से संत रविदास के विचारों को आत्मसात करते हुए स्वच्छ, समरस और जागरूक समाज के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल, श्री सुमित मिश्रा आदि भी विशेष रूप से मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेली कॉलेज इंदौर में कार्यक्रम को किया संबोधित

शासकीय चिकित्सालयों में बनाए जाएंगे गर्भ संस्कार कक्ष चिकित्सा विश्वविद्यालयों में की जाएगी गर्भ संस्कार के अध्ययन- अध्यापन की व्यवस्था पुस्तक "गर्भ संस्कार" का किया विमोचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग-अलग नहीं रहे। सनातन व्यवस्था के संस्कार केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति है। गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संस्कारित करना ही गर्भ संस्कार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में बनने वाले शासकीय चिकित्सालयों के भवनों में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे। प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन अध्यापन की व्यवस्था की जाएगी, शीघ्र ही इससे संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के डेली कॉलेज में गर्भ संस्कार पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अंग वस्त्रम तथा श्रीफल भेंट कर उनका अभिवादन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुस्तक "गर्भ संस्कार" का विमोचन किया। पुस्तक के लेखक डॉ. अनिल गर्ग और डॉ. सीमा गर्ग हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जन समुदाय को गर्भ संस्कार का प्रचार- प्रसार करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का संकल्प भी दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं है, गर्भ शरीर निर्माण के साथ संस्कार की पहली पाठशाला भी है। आधुनिक विज्ञान ने सिद्ध किया है कि 5-6 महीने से ही बच्चे पर माँ की भावनाओं और बाह्य वातावरण का प्रभाव पढ़ने लगता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाभारत में अभिमन्यु तथा अन्य पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद की सामर्थ्य सर्वविदित है। कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोविड से बचाव के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों ने आयुर्वेद की प्रक्रियाओं अपनाया। आयुर्वेद में गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकारा गया है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकार कर रहा है। अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य श्री भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत का चिंतन विश्व को संचालित करने का नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने का है। भारत “सुपर राष्ट्र” बनेगा, जो जीवन के विविध क्षेत्रों में दुनिया को सही दिशा दिखाएगा। उन्होंने कहा कि सृष्टि के चक्र में भारत ने उत्थान और पतन दोनों देखे हैं, लेकिन उसकी आत्मिक शक्ति और बीज रूप में सामर्थ्य इतनी मजबूत है कि वह फिर उठ खड़ा होने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण केवल शिक्षा या भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से ही संभव है। मानव संपदा के बिना राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं। श्री जोशी ने कहा कि पश्चिमी दृष्टि मनुष्य को मशीन मानती है, जबकि भारतीय चिंतन मनुष्य को पूर्ण विकसित मनुष्य बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि जब शस्त्र अयोग्य हाथों में चले जाते हैं तो दुष्परिणाम होते हैं, इसलिए शक्ति के साथ संस्कार अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर पुण्य सलिला देवी अहिल्याबाई की श्रेष्ठ परंपरा वाली नगरी है। इंदौर से इस आयोजन का होना प्रतीकात्मक है, क्योंकि विचारों का प्रस्फुटन प्रायः मध्य से होता है। श्री जोशी ने युवाओं और दंपत्तियों से आग्रह किया कि शास्त्रों में निहित मूल्यों को केवल प्रस्तुति तक सीमित न रखें, बल्कि आचरण में उतारें। इसके लिए जनजागरण और व्यापक आंदोलन आवश्यक है, ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी व्यक्ति सही मार्ग पर चल सके और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बने। उन्होंने कार्यक्रम के शोधकर्ताओं, प्रयोगकर्ताओं और आयोजकों से कहा कि इस पहल की सार्थकता तभी है जब समाज इसे गंभीरता से अपनाए और अनुभवों को साझा कर आगे बढ़े। कार्यक्रम को डॉ. अनिल कुमार गर्ग और डॉ. हितेश भाई जानी ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया और श्री गोलू शुक्ला, जनप्रतिनिधि, आरोग्य भारती के श्री अशोक वार्ष्णेय, श्री योगेंद्र महंत, श्री गुणवंत कोठारी, श्री विनोद अग्रवाल, श्री विक्रम सिंह पवार, डॉ. हितेश भाई जानी, श्री राधेश्याम शर्मा गुरु जी और डॉ. अनिल कुमार गर्ग सहित आध्यात्मिक-धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

राज्यपाल पटेल ने नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का लोकार्पण किया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भक्तिभाव और विधि-विधान के साथ नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का शुभ लोकार्पण किया। यह पावन समारोह रविवार को श्रद्धा, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच संपन्न हुआ। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ हुए समारोह में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह भी मौजूद थे। राज्यपाल श्री  पटेल का मंदिर परिसर आगमन पर पारंपरिक सनातन रीति से स्वागत किया गया। उन्होंने कलश के साथ मंदिर में मंगल प्रवेश कर विधि-विधान से कलश एवं ध्वज का पूजन किया। उन्होंने भगवान के श्री चरणों में पूजा-अर्चना कर प्रदेश के विकास के लिए प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के मध्य माँ सरस्वती की पावन प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा और भक्तिभाव से दीप प्रज्ज्वलित किया और प्रदेशवासियों के मंगल की कामना की। उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राज्यपाल ने मंदिर में हुए नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों का अवलोकन किया। इसे आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि समग्र विकास कार्य मंदिर परिसर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है। नवीनीकरण की संपूर्ण परियोजना 84 लाख 13 हजार 100 रुपये की लागत से संपन्न हुई है। इस कार्य में करीब 76 लाख 96 हजार रुपये के सिविल निर्माण तथा लगभग 7 लाख 16 हजार रुपये के विद्युत संबंधी कार्य कराए गए है। मंदिर परिसर में लगभग 2,700 वर्गफुट क्षेत्रफल का विशाल हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 1,120 वर्गफुट क्षेत्र में भोजनशाला एवं भंडारा कक्ष और 560 वर्गफुट क्षेत्र में सुसज्जित रसोईघर भी तैयार किया गया है। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, मुख्य अभियंता लोक निर्माण श्री संजय मस्के, अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण श्री हरी शंकर जयसवाल, नियंत्रक हाऊसहोल्ड लोकभवन श्रीमती शिल्पी दिवाकर, लोक निर्माण विभाग की सिविल, इलेक्ट्रिकल शाखा और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

ट्रक से कार की टक्कर के बाद सड़क पर फैले शव, आगर-मालवा के तीन लोगों की गुजरात में मौत

आगर-मालवा. मध्य प्रदेश में आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में पनाला गांव के रहने वाले तीन लोगों की गुजरात में सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक हादसा बोटाद जिले के रानपुर इलाके में हुआ, जहां ट्रक से टकराने की वजह से कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादस में चार लोग गंभीर घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ईको कार में सवार सभी लोग खेती के काम से रानपुर इलाके के कुंडली गांव जा रहे थे। इसी दौरान देर रात धुंधका जा रहे हाईवे से आगे यह एक तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार में सवार कुछ लोगों के शव निकलकर सड़क पर आ गए थे। तेज आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों को कार से निकालकर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सभी को बोटाद के अस्पताल में भर्ती करवायाग या है।

\’पत्नी की व्यक्तिगत इनकम को पति से नहीं जुड़ेगी\’, आय से अधिक संपत्ति पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

जबलपुर. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी पत्नी की व्यक्तिगत आय को सरकारी विभाग में पदस्थ पति की आय में जोड़कर असेसमेंट नहीं कर सकती है। कोर्ट से इस आदेश के साथ अभियोजन स्वीकृति के आदेश व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता रीवा निवासी अधिवक्ता मीनाक्षी खरे व उनके पति आलोक खरे की ओर से दायर याचिका में आय से अधिक संपत्ति का गलत असेसमेंट करने व उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता आलोक खरे वर्तमान में आबकारी विभाग में डिप्टी कमिश्नर में पद पर रीवा में पदस्थ है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी पेशे से अधिवक्ता हैं और शादी के पहले से आयकर रिटर्न फाइल कर रही हैं। वर्ष 2018 में लोकायुक्त ने आलोक खरे के घर और कार्यालय में दबिश दी थी। लोकायुक्त ने जांच में चार सितम्बर, 1998 से 15 अक्टूबर, 2019 तक याचिकाकर्ता की संपत्ति और खर्च से जुड़ा डेटा एकत्र किया था। लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास वैध आय स्त्रोत से लगभग 88.20 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया था और सरकार की ओर से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। याचिका में कही गई यह बात याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास से 10 करोड़ 71 लाख रुपये की संपत्ति मिली थी। जबकि उनकी वैध आय 5 करोड़ 69 लाख रुपये थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अधिवक्ता होने के कारण मीनाक्षी की अच्छी-खासी आय थी और वह अपने परिवार की आर्थिक मदद करती थी। उन्होने अपनी आय से खेती की जमीन खरीदी और उससे इस अवधि के दौरान 4 करोड़ 81 लाख रुपये की आय हुई थी। दोनों याचिकाकर्ताओं की वैध आय को जोड़कर देखा जाए तो 10 करोड़ 50 लाख रुपये हैं। जो लोकायुक्त द्वारा किए गए असेसमेंट से 21 लाख रुपये अधिक है। जो लगभग आय के वैध स्त्रोत से दो प्रतिशत अधिक है। आय के वैध स्त्रोत से 10 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पाए जाने पर अभियोजन की अनुमत्ति प्रदान नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अधिवक्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न के साथ-साथ खेती से हुई इनकम को ध्यान में रखा जाए, तो मंज़ूरी देने वाली ऑथरिटी को मंज़ूरी नहीं देनी चाहिए थी। प्रकरण को प्रारंभ में ही खत्म कर देना चाहिए था। इनकम के जाने-पहचाने सोर्स का आशय ऐसी इनकम से है जो मध्य प्रदेश सिविल सर्विस रूल्स, 1965 के रूल 19 के अनुसार सही तरीके से बनाई गई हो। कानूनी टैक्स फाइलिंग से साबित हुई इनकम कानून की नजर में जानी-पहचानी और वैध इनकम है। युगलपीठ ने अभियोजन स्वीकृति के विवादित मंज़ूरी आर्डर व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

\’पत्नी की व्यक्तिगत इनकम को पति से नहीं जुड़ेगी\’, आय से अधिक संपत्ति पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

जबलपुर. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी पत्नी की व्यक्तिगत आय को सरकारी विभाग में पदस्थ पति की आय में जोड़कर असेसमेंट नहीं कर सकती है। कोर्ट से इस आदेश के साथ अभियोजन स्वीकृति के आदेश व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता रीवा निवासी अधिवक्ता मीनाक्षी खरे व उनके पति आलोक खरे की ओर से दायर याचिका में आय से अधिक संपत्ति का गलत असेसमेंट करने व उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता आलोक खरे वर्तमान में आबकारी विभाग में डिप्टी कमिश्नर में पद पर रीवा में पदस्थ है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी पेशे से अधिवक्ता हैं और शादी के पहले से आयकर रिटर्न फाइल कर रही हैं। वर्ष 2018 में लोकायुक्त ने आलोक खरे के घर और कार्यालय में दबिश दी थी। लोकायुक्त ने जांच में चार सितम्बर, 1998 से 15 अक्टूबर, 2019 तक याचिकाकर्ता की संपत्ति और खर्च से जुड़ा डेटा एकत्र किया था। लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास वैध आय स्त्रोत से लगभग 88.20 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया था और सरकार की ओर से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। याचिका में कही गई यह बात याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास से 10 करोड़ 71 लाख रुपये की संपत्ति मिली थी। जबकि उनकी वैध आय 5 करोड़ 69 लाख रुपये थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अधिवक्ता होने के कारण मीनाक्षी की अच्छी-खासी आय थी और वह अपने परिवार की आर्थिक मदद करती थी। उन्होने अपनी आय से खेती की जमीन खरीदी और उससे इस अवधि के दौरान 4 करोड़ 81 लाख रुपये की आय हुई थी। दोनों याचिकाकर्ताओं की वैध आय को जोड़कर देखा जाए तो 10 करोड़ 50 लाख रुपये हैं। जो लोकायुक्त द्वारा किए गए असेसमेंट से 21 लाख रुपये अधिक है। जो लगभग आय के वैध स्त्रोत से दो प्रतिशत अधिक है। आय के वैध स्त्रोत से 10 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पाए जाने पर अभियोजन की अनुमत्ति प्रदान नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अधिवक्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न के साथ-साथ खेती से हुई इनकम को ध्यान में रखा जाए, तो मंज़ूरी देने वाली ऑथरिटी को मंज़ूरी नहीं देनी चाहिए थी। प्रकरण को प्रारंभ में ही खत्म कर देना चाहिए था। इनकम के जाने-पहचाने सोर्स का आशय ऐसी इनकम से है जो मध्य प्रदेश सिविल सर्विस रूल्स, 1965 के रूल 19 के अनुसार सही तरीके से बनाई गई हो। कानूनी टैक्स फाइलिंग से साबित हुई इनकम कानून की नजर में जानी-पहचानी और वैध इनकम है। युगलपीठ ने अभियोजन स्वीकृति के विवादित मंज़ूरी आर्डर व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

जबलपुर में पुलिस के छापा मारते ही भाग गया दलाल, सेक्स रैकेट के अड्डे पर मिली विदेशी महिला

जबलपुर. जबलपुर माढ़ोताल थाना अंतर्गत ग्रीन सिटी में संचालित देह व्यापार के अड्डे पर शनिवार को पुलिस ने दबिश देते हुए एक उज्बेकिस्तान की महिला सहित एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। वहीं छापे की भनक लगते ही अड्डे का संचालक मौके से फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है। माढ़ोताल पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बाबा टोला हनुमानताल निवासी शिवा चौधरी ग्रीन सिटी स्थित एक घर में एक विदेशी महिला को बुलाकर देह व्यापार का संचालन कर रहा है। माढ़ोताल थाना पुलिस ने तत्काल एक विशेष टीम गठित कर बताए गए पते पर दबिश दी गई। छापे के दौरान पुलिस ने मौके से हनुमानताल के बाबा टोला निवासी शिव चौधरी की 25 वर्षीय पत्नी तथा एक विदेशी महिला (उज्बेकिस्तान) को गिरफ्तार किया है। वहीं कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपित शिवा चौधरी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि फरार आरोपित की तलाश में टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भोपाल में मतदाताओं को देने होंगे दस्तावेज, SIR में 2.96 लाख पत्रकों में मिली तार्किक विसंगतियां

भोपाल. जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में दो लाख 96 हजार पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। ऐसे में अब इन मतदाताओं को नाम, पता व उम्र से संबंधित एक दस्तावेज पेश करना होगा। हालांकि इनमें से 79 हजार पत्रकों की विसंगतियां बीएलओ ने अपने स्तर पर ही दूर कर ली हैं, जबकि दो लाख 17 हजार को अब नोटिस जारी किए जाएंगे। इनकी सुनवाई नो मैपिंग मतदाताओं के साथ-साथ 85 हेल्प डेस्क पर की जाएंगी, जिसके लिए 91 अतिरिक्त एईआरओ पदस्थ कर दिए गए हैं। सात विधानसभा का SIR के दौरान सत्यापन किया गया था बता दें कि डिजिटाइज किए गए पत्रकों की तकनीकी रूप से जांच की जा रही है। इस दौरान तर्किक विसंगतियां मिलने के बाद सुनवाई वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ गई हैं। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं का एसआइआर के दौरान सत्यापन किया गया था। स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था जिनमें से कुल 16 लाख 87 हजार 33 मतदाताओं के पत्रक डिजिटाइज किए गए थे, जबकि चार लाख 38 हजार 317 मतदाताओं को एएसडीआर (अनुपस्थित, शिफ्टिंग, मृत्यु और दोहरी प्रवृष्टि) श्रेणी में रखते हुए विलोपित किया गया है। जिन मतदाताओं और उनके स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था, ऐसे एक लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में रखे गए हैं। इनकी सुनवाई 85 हेल्प डेस्क पर 90 एईआरओ द्वारा की जा रही है। इनमें से अब तक 49 हजार 965 की सुनवाई हो चुकी है। दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए इसी बीच तकनीकी परीक्षण के दौरान दो लाख 96 हजार 317 पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। यानी किसी के नाम, उपनाम, पिता के नाम, माता के नाम आदि में अंतर होना शामिल हैं। इनमें से 79 हजार मतदाताओं के पत्रकों का बीएलओ ने अपने स्तर पर सुधार कर लिया है, जबकि दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी मतदाताओं को सुनवाई के दौरान विसंगतियों को दूर करने संबंधी दस्तावेज पेश करना होगा। 181 एईआरओ 14 फरवरी तक पूरी करेंगे सुनवाई एक लाख 16 हजार 925 नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई के लिए 85 हेल्पडेस्क बनाई गई हैं, जिन पर 90 एईआरओ सुनवाई के लिए नियुक्त किए गए थे। अब दो लाख 17 हजार तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं की सुनवाई भी की जानी है, जिसके लिए अतिरिक्त 91 एईआरओ नियुक्त कर दिए गए हैं। इस तरह कुल 181 एईआरओ नो मैपिंग और विसंगति वाले मतदाताओं की 14 फरवरी तक सुनवाई पूरी करेंगे, जिससे कि अंतिम मतदाता सूची में किसका नाम रखना है और किसका विलोपित करना है, यह तय किया जा सके। ऐसे समझें तार्किक विसंगति उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि तकनीकी परीक्षण के दौरान तार्किक विसंगति वाले कुल दो लाख 96 हजार 317 मतदाताओं के पत्रक चिह्नित किए गए थे। तार्किक विसंगति का मतलब यह है कि किसी मतदाता का नाम मोहनलाल एक साथ लिखा था मतदाता सूची में, लेकिन पत्रक में उसका नाम मोहन और लाल अलग-अलग लिखा गया है। इसलिए अब इस अशुद्धि को दूर करने के लिए मतदाता को एक दस्तावेज सुनवाई के दौरान पेश करना होगा।

इंदौर में समय पर सीपीआर मिलने से बची जान, भाषण दे रही डॉक्टर को आया कॉर्डियक अरेस्ट

इंदौर. ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यूरोलॉजी कांफ्रेंस के दौरान एक गंभीर घटना घटित होने से बच गई। मैंगलोर से आई 40 वर्षीय डॉ. श्रीन भूटिया को भाषण देते समय अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। वे मंच पर बोलते-बोलते बेहोश होकर गिर पड़ीं। उस समय हाल में लगभग 200 विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थित थे। स्थिति को समझते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तुरंत सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में डॉक्टर की सांस और नब्ज में सुधार दिखने लगा। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण उनकी जान बच सकी। डॉक्टर को राजश्री अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। कार्डियक अरेस्ट से बचाव के उपाय     नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।     ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें।     धूमपान और शराब से दूरी बनाएं।     रोजाना व्यायाम और योग करें।     तनाव कम करें व पर्याप्त नींद लें।     आमजन तक भी सीपीआर देने की प्रक्रिया के लिए शिविर लगाए जाना चाहिए।

अब घर बैठे आसान होगा रजिस्ट्री का काम, संपदा-2.0 पोर्टल और ऐप से पाएं सर्टिफाइड कॉपी

भोपाल   मध्यप्रदेश में पुरानी रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी लेने के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। इसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है। पंजीयन विभाग ने संपदा-2.0 पोर्टल और मोबाइल ऐप पर यह सुविधा शुरू की है। जिन रजिस्ट्री का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ, उनकी सर्टिफाइड कॉपी के लिए भी इस माध्यम से आवेदन किया जा सकेगा। पंजीयन विभाग उसे डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इसके लिए 300 रुपए फीस तय की गई है। मंदसौर पहला जिला जहां के 100 फीसदी डिजिटाइज्ड आइजी (पंजीयन) अमित तोमर के अनुसार वर्ष 2000 तक के दस्तावेज डिजिटाइज किए जा चुके हैं। मंदसौरएमपी का पहला जिला है जहां के 100 फीसदी रजिस्ट्री दस्तावेज डिजिटाइज हो चुके हैं। यहां 1908 तक की रजिस्ट्री डिजिटाइज हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रयास के लिए मध्यप्रदेश सरकार को 24 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान भी दिया है। क्या करना होगा: स्टेप-बाय-स्टेप समझिए -1- एमपीआइजीआर के संपदा पोर्टल पर जाएं। मांगी गई जानकारियां देकर लॉगिन आइडी बनाएं। -2- दस्तावेज प्रमाणित प्रति पर क्लिक कर ओपन करें।  3- पुरानी रजिस्ट्री का डॉक्यूमेंट नंबर डालकर सर्च करें। -4- डॉक्यूमेंट नंबर नहीं है तो किन वर्षों के बीच रजिस्ट्री कराई, वह अवधि और नाम से रजिस्ट्री सर्च करें। मिलने पर एड टू कार्ट करें। -5- अब तय शुल्क जमा करें। -6- संबंधित सब रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त सर्टिफाइड कॉपी ई-मेल और व्हाट्सऐप पर भेजी जाएगी। जो रजिस्ट्री डिजिटाइज नहीं हैं, उनकी कॉपी के लिए यहीं से आवेदन किया जा सकता है।

रेड जोन अलर्ट: 18 जिलों में 11.23 लाख लोगों को नहीं मिलेगा सरकारी राशन, जानें लिस्ट

सतना   प्रदेश में गरीबी रेखा में पात्रता के बावजूद लाखों परिवार आज भी सरकारी खाद्यान्न से वंचित हैं। वजह कोई नई नहीं, बल्कि ई-केवाइसी की धीमी रफ्तार है। ई-केवाइसी पूरी न होने के कारण पात्र सदस्यों के नाम से खाद्यान्न पात्रता पर्ची जारी नहीं हो सकी। प्रदेश के 55 जिलों में 5.79 लाख नए सदस्यों को खाद्यान पात्रता में शामिल तो किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 26 हजार के ही ई-केवाइसी पूरी हो सकी। वहीं पुराने कार्डधारियों में 5.44 लाख परिवारों के सदस्यों के नाम बढ़ाए गए। इनमें से भी केवल 24 हजार की ई-केवाइसी हो सकी है। प्रदेश में कुल 11.23 लाख सदस्य बढ़ें, जिनमें 50 हजार सदस्यों की ही ई-केवाइसी हो सकी है। इन जिलों का प्रदर्शन खराब प्रदेशभर के 18 जिले रेड जोन में रखे हैं। इनमें अनूपपुर, आलीराजपुर, डिंडोरी, पांढुर्णा, उमरिया, निवाड़ी, मऊगंज, मंडला, बड़वानी, आगर मालवा, हरदा, नीमच, नरसिंहपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम, सिंगरौली, रतलाम और सीधी शामिल हैं। यहां 200 या इससे कम ही ई-केवाइसी हो सकी। ई-केवाइसी में शिवपुरी जिला प्रदेश में अव्वल ई-केवाइसी के मामले में शिवपुरी जिला प्रदेश में सबसे आगे है। यहां 35,679 नए पात्र सदस्यों में से 3,407 की ई-केवाइसी हो चुकी है। वहीं पुराने कार्डों में जुड़े 23 हजार सदस्यों में से 2,923 की ई-केवाइसी पूरी कर ली गई है। हालांकि इसके बाद अन्य जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर ही बनी हुई है। वेरिफिकेशन प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के चलते प्रदेश के लाखों गरीब राशन से वंचित हैं सतना-मैहर में स्थिति चिंताजनक सतना में हालात और भी गंभीर हैं। यहां 13 हजार नए पात्र सदस्यों को राशन(Government Ration) का लाभ मिलना है, लेकिन अब तक 390 सदस्यों की ई-केवाइसी हो पाई है। वहीं पुराने कार्डधारियों में 11.50 हजार सदस्यों में से मात्र 417 के सत्यापन हुए। मैहर में 7,945 नए सदस्य खाद्यान्न के पात्र हैं, पर केवल 342 की ई-केवाइसी हो सकी है। पुराने परिवारों में 5,867 सदस्यों की वृद्धि की, लेकिन इनमें से सिर्फ 271 सदस्यों का ही सत्यापन हो पाया।

तेजस एक्सप्रेस की बढ़ी राहत, इंदौर-मुंबई रूट पर अतिरिक्त फेरे 28 फरवरी तक चलेंगे

इंदौर  इंदौर-मुबंई रुट के यात्रियों के बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने इंदौर मुंबई ट्रेन के फेरे एक माह के लिए और बढ़ा दिए है। अब यह ट्रेन 28 फरवरी तक चलेगी। माना जा रहा है कि इस ट्रेन को आने वाले समय के लिए स्थाई किया जा सकता है, क्योंकि इंदौर से मुंबई के बीच चलने वाली अवंतिका एक्सप्रेस में यात्रियों को आसानी से टिकट नहीं मिलते हैं। इस कारण तेजस ट्रेन को भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, हालांकि इसका किराया महंगा है। आने और जाने का समय भी ठीक नहीं है। इसके बावजूद यात्री इसमें सफर कर रहे हैं। अभी यात्रियों का दबाव इस रूट पर इतना ज्यादा है कि बसों में भी कई बार आसानी से सीट नहीं मिलती है। मुम्बई सेंट्रल से इंदौर के मध्य चलने वाली ट्रेन (संख्या 09085/09086) मुम्बई सेंट्रल इंदौर तेजस सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन के फेरे फिर विस्तारित किए गए हैं। पश्चिम रेलवे रतलाम मण्डल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि गाड़ी संख्या 09085 मुम्बई सेंट्रल इंदौर तेजस स्पेशल, जिसका अंतिम फेरा 30 जनवरी 2026 तक था। उसे 27 फरवरी 2026 तक मुम्बई सेंट्रल से प्रति सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चलाया जाएगा। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09086 इंदौर मुम्बई सेंट्रल तेजस स्पेशल, जिसका अंतिम फेरा 31 जनवरी 2026 निर्धारित है। उसे 28 फरवरी तक इंदौर से प्रति मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को चलाया जाएगा। यह ट्रेन पहले से निर्धारित मार्ग, कोच कंपोजिशन, दिन एवं ठहराव के साथ ही चलेगी। इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी बुकिंग भी रेलवे ने शुरू कर दी है। इस ट्रेन का किराया तीन श्रेणी में है। पहली श्रेणी एसी 3 टीयर की है। जिसका किराया 1 हजार 805 रुपये है। इसमें 1 हजार 634 रुपये बेस फेयर, 40 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपये सुपर फास्ट चार्ज और 86 रुपये जीएसटी शामिल है। दूसरी श्रेणी में एसी टू टीयर का किराया 2 हजार 430 रुपये है। इसमें 2 हजार 219 रुपये बेस फेयर और 50 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपये सुपर फास्ट चार्ज है। इसके अलावा 116 रुपये जीएसटी शामिल है। तीसरी श्रेणी एसी फर्स्ट क्लास है। जिसका किराया 3 हजार 800 रुपये है। इसमें 3 हजार 484 रुपये बेस फेयर, 60 रुपये रिजर्वेशन चार्ज, 75 रुपये सुपर फास्ट चार्ज और 181 रुपये जीएसटी शामिल है।  

पेंशन विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी कार्रवाई, CMPF आयुक्त को चेतावनी, हाजिरी न देने पर गिरफ्तारी तय

जबलपुर  हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने कोल माइंस प्राविडेंट फंड (सीएमपीएफ) के क्षेत्रीय आयुक्त, जबलपुर को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। यदि वे हाजिर नहीं हुए तो उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने की चेतावनी दी गई है। मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार से जुड़ा है, जो 14 साल से लंबित पेंशन मामले का दंश भोग रहा है। प्रकरण मूलतरू लिपिकीय त्रुटि से दोहरे प्राविडेंट फंड खाते से जुड़ा है। शहडोल जिला अंतर्गत धनपुरी निवासी 57 वर्षीय विमला बाई के पति स्व. संपत द्वारा मूल रूप से याचिका दायर की गई थी, जिनका निधन याचिका की सुनवाई दौरान हो गया था। विमला बाई अब उनकी कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में मामला लड़ रही हैं। याचिका के अनुसार मृतक संपत ने वर्ष 1972 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में शहडोल जिले के धनपुरी खदान में स्वीपर के पद पर नियुक्ति पाई थी और वर्ष 2012 को 40 वर्ष से अधिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। किन्तु याचिकाकर्ता को वर्ष 1972 से 1981 के दौरान का प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ नहीं दिए गए। मामले का मूल कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की एक लिपिकीय त्रुटि बताई गई है। कर्मचारी संपत के लिए गलती से दो सीएमपीएफ खाते (1972 और 1981) खोल दिए गए। 1981 वाले खाते को मुख्य मान लिए जाने के कारण 1974 से 1981 तक के उनके सीएमपीएफ अंशदान योगदान की गणना नहीं की गई। इस मामले में 23 फरवरी, 2022 को भी हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी। उस समय सीएमपीएफ ने कोर्ट को बताया था कि उनका जवाब तो 2013 में ही दाखिल हो गया था, जबकि अन्य पक्षों (एसईसीएल आदि) के 2019 में जवाब दाखिल करने के बाद ही उन्हें पता चला कि याचिकाकर्ता के दो पीएफ खाते हैं। मार्च 1974 से मार्च 1981 की अवधि के दौरान कटने वाला सीएमपीएफ अंशदान, जो मूल खाता संख्या से संबद्ध था, अद्यतन नहीं हो सका। इस कारण इसी त्रुटि के कारण 1972 से 1982 की अवधि के लाभ का भुगतान नहीं हो पाया था। याचिकाकर्ता के अनुसार इस त्रुटि के कारण न केवल भविष्य निधि का पूर्ण भुगतान बाधित हुआ, बल्कि पेंशन की गणना भी अधूरी रह गई, जिससे याचिकाकर्ता को भारी आर्थिक क्षति हुई। तब कोर्ट ने सीएमपीएफ को चार सप्ताह का समय देते हुए आदेश दिया था कि वह याचिकाकर्ता को बकाया लाभ का भुगतान करे और यह दर्शाता हलफनामा दाखिल करे। हाई कोर्ट ने ताजा सुनवाई में पाया कि 2022 का आदेश आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।  

RC अपडेट: लोन खत्म होने के बाद बैंक का नाम हटाना अब सरल, देखें पूरा प्रोसेस

भोपाल अब तक वाहन का लोन पूरा चुकाने के बाद वाहन मालिक को संबंधित बैंक से फॉर्म-35  के तहत एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होती थी. इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर 75 रुपए शुल्क जमा करना पड़ता था और आरसी को कार्यालय में जमा करमा होता था. बैंक से जारी NOC  की जांच में काफी समय लगता था. वहीं आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण हर मामले की सही तरीके से जांच भी नहीं हो पाती थी. इससे फर्जी NOC के आधार पर हायपोथीकेशन हटाए जाने की संभावना बनी रहती थी, जिससे बैंक और वाहन मालिक दोनों को नुकसान हो सकता था. मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन लोन (हाइपोथेक्शन) पूरा कर चुके लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है।अब लोन चुकाने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से बैंक का नाम हटवाने के लिए न तो बैंक के चक्कर लगाने होंगे और न ही आरटीओ कार्यालय जाना पड़ेगा। विभाग ने यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस, डिजिटल और पूरी तरह निःशुल्क कर दी है। पहले क्या था झंझट? अब तक वाहन लोन समाप्त होने के बाद बैंक से फॉर्म-35 और एनओसी लेना जरूरी होता था। इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ₹75 की फीस जमा कर आरटीओ में फाइल लगानी पड़ती थी। बैंक की एनओसी के सत्यापन में कई बार हफ्तों या महीनों लग जाते थे, साथ ही फर्जी एनओसी का खतरा भी बना रहता था। नई स्मार्ट व्यवस्था कैसे करेगी काम? परिवहन विभाग की नई व्यवस्था में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। शून्य शुल्क – अब इस सेवा के लिए कोई सरकारी फीस नहीं लगेगी। ऑटो वेरिफिकेशन – parivahan.gov.in पर आवेदन करते ही पोर्टल सीधे बैंक के सेंट्रल सर्वर से लोन की जानकारी का मिलान करेगा। किसी भी फिजिकल दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। 7 दिन की समय-सीमा आवेदन के बाद आरटीओ अधिकारी को अधिकतम 7 दिन में निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती और वाहन पर कोई न्यायालयीन मामला नहीं है, तो सिस्टम आवेदन को ऑटो अप्रूव कर देगा। डिजिटल आरसी प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन मालिक घर बैठे अपडेटेड डिजिटल आरसी डाउनलोड कर सकेंगे। कुछ मामलों में लग सकता है समय परिवहन विभाग के अनुसार, केवल 1–2 प्रतिशत मामलों में देरी हो सकती है। यह समस्या उन बैंकों के ग्राहकों को आ सकती है, जिनका सर्वर अभी परिवहन पोर्टल से लिंक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रक्रिया फिलहाल पुराने मैनुअल तरीके से ही पूरी की जाएगी। प्रमुख बदलाव एक नजर में पहले जहां यह प्रक्रिया समय लेने वाली और झंझट भरी थी, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ लोगों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।  

Budget :फ्लाईओवर से जाम होगा कम! जबलपुर पश्चिम में 300 करोड़ में बनेगा, त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक सुविधा

जबलपुर  यातायात को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक और फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई जा रही है। गढ़ा त्रिपुरी चौक से मेडिकल के बीच बनने वाले इस फ्लाईओवर का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है। दो किलोमीटर लंबा होगा फ्लाईओवर प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग दो किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से बायपास, मेडिकल कॉलेज, तिलवारा और धनवंतरी नगर की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। आवासीय और चिकित्सा क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग त्रिपुरी चौक से मेडिकल तक का हिस्सा आवासीय, शैक्षणिक क्षेत्रों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को जोड़ता है। यहां निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं की आवाजाही अधिक रहती है। सीमित सड़क चौड़ाई और अवैध कब्जों के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई लेग बनाने पर भी विचार इस फ्लाईओवर को बहुउपयोगी बनाने के लिए इसके कई लेग तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इससे आसपास के विभिन्न क्षेत्रों को सीधे जोड़ा जा सकेगा और मुख्य मार्ग के साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी ट्रैफिक का बेहतर वितरण संभव होगा। 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित फ्लाईओवर की अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तकनीकी सर्वेक्षण और डिजाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि इसी विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर पहले से मौजूद है। साथ ही सगड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर फ्लाईओवर निर्माणाधीन है और बंदरिया तिराहे पर भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है।  

हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी, पेंडिंग मामलों की संख्या 4,80,592; समाधान में 40 साल लग सकते हैं

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 11 जजों की कमी, बढ़ते मामलों से बढ़ेगी मुश्किल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 42 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यानी 11 पद रिक्त, जो कुल स्वीकृत संख्या का करीब 20.75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इसलिए और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि मध्य प्रदेश पहले से ही लंबित मामलों के मामले में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। हाईकोर्ट में जजों की यह कमी न केवल मामलों की सुनवाई को धीमा करती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करती है। वकीलों और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जजों की कमी के कारण नियमित सुनवाई संभव नहीं हो पाती और तारीख पर तारीख न्याय व्यवस्था की पहचान बनती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। वहीं, करीब 51 प्रतिशत न्यायिक अधिकारी अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने संसद में जिला-वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा पेश नहीं किया। इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद, जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर कोई सार्वजनिक और पारदर्शी आकलन सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि अगर जिला-वार आंकड़े सामने आएं, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आ सकती है। देशभर की स्थिति: कई हाईकोर्ट में हालात बेहद गंभीर अगर देशभर की तस्वीर पर नजर डालें, तो हालात केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली हैं, यानी करीब 14.9 प्रतिशत। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6 प्रतिशत) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3 प्रतिशत) रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 स्वीकृत पदों में से एक पद खाली है, जो भले ही प्रतिशत में कम लगे, लेकिन शीर्ष अदालत में हर एक जज की भूमिका बेहद अहम होती है। इलाहाबाद, कलकत्ता और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संकट आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी सबसे ज्यादा है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25 प्रतिशत। कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 72 में से 29 पद रिक्त हैं, जो 40.3 प्रतिशत बैठता है। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, जहां 44 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में न्यायपालिका संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है। मध्य प्रदेश की निचली अदालतों में वर्गवार प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का वर्गवार विवरण भी संसद में पेश किया गया। इसके अनुसार:     अनुसूचित जाति (SC): 263 जज – लगभग 16.05%     अनुसूचित जनजाति (ST): 232 जज – लगभग 14.15%     अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 308 जज – लगभग 18.79%     अन्य वर्ग: 836 जज – लगभग 51.01% कुल मिलाकर 1639 कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से लगभग आधे SC, ST और OBC वर्ग से हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पद ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्रतिनिधित्व के ये आंकड़े न्यायिक बोझ को कितना कम कर पा रहे हैं। भोपाल के एडवोकेट सुनील आदिवासी ने द मूकनायक से बातचीत में न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों में जजों की कमी तो पहले से ही एक बड़ी समस्या है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दलित और आदिवासी वर्ग से आने वाले जज केवल नाम मात्र के बराबर रह गए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की जिस अवधारणा की बात संविधान करता है, वह तब तक अधूरी रहेगी, जब तक न्याय देने वाली व्यवस्था में ही वंचित तबकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती। एडवोकेट सुनील आदिवासी ने आगे कहा कि जब न्यायपालिका में दलित-आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित होता है, तो इसका असर फैसलों की संवेदनशीलता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायपालिका से आम जनता का भरोसा कमजोर होना तय है। न्याय में देरी और न्याय से वंचित? विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी सीधे-सीधे न्याय में देरी से जुड़ी हुई है। जब एक-एक जज पर हजारों मामलों का बोझ हो, तो त्वरित और प्रभावी न्याय की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर … Read more