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RSS पर टिप्पणी से दिग्विजय सिंह के लिए मुसीबत, मानहानि मामला खारिज करने से कोर्ट ने किया इनकार

भोपाल  कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर से जुड़ी एक टिप्पणी के चक्कर में फंसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है। 8 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया साइट पर किए गए एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर की एक तस्वीर साझा करके उसके कैप्शन में लोगों से सवाल पूछा था कि क्या वह दलितों, पिछड़े वर्गों, मुसलमानों और भूमि, जल व जंगल से जुड़े मुद्दों पर गोलवलकर के विचारों से परिचित हैं? इस पोस्ट को लेकर ठाणे निवासी और संघ के स्वयंसेवक शशिकांत चंपानेकर ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दायर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघ की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। याचिका के दाखिल होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी। राज्यसभा सांसद ने इस याचिका को खारिज करने की अपील करते हुए तर्क दिया कि यह मामला कानूनन विचारणीय नहीं है। इस पर सिविल जज राजेश बी. खंडारे ने कहा कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि याचिका में वैध कारण बनता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस नेता की तरफ से दलील दी गई कि याचिका कर्ता को यह मुकदमा दायर करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि संघ न तो कोई पंजीकृत संस्था है और न ही कानूनी व्यक्ति है। ऐसे में वह मुकदमा दायर नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कोई व्यक्तिगत सदस्य संघ और गोलवलकर की ओर से हर्जाना कैसे मांग सकता है? इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि आपराधिक मानहानि कानून के तहत किसी पहचाने जाने योग्य समूह की मानहानि की जा सकती है और उस समूह का कोई आहत सदस्य कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े गंभीर और विचारणीय मुद्दे हैं, जिनका फैसला केवल साक्ष्य दर्ज होने के बाद ही किया जा सकता है, न कि वाद खारिज करने के चरण पर। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस वाद को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिका में कारण बनता है, संघ सदस्य के मुकदमा दायर करने के अधिकार को इस चरण पर कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं कहा जा सकता और वाद के मूल्यांकन या कोर्ट फीस की पर्याप्तता जैसे मुद्दे बिना सुधार का अवसर दिए वाद खारिज करने का आधार नहीं बन सकते।

सिद्धारमैया और DK के बीच खींचतान के बीच कांग्रेस में तीसरा मोर्चा उभरने की संभावना, विधायक जुटे बैठकें करने

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमों के बीच रस्साकशी करीब एक साल से चल रही है। शिवकुमार गुट का कहना है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने से पहले आधे कार्यकाल को लेकर वादा किया था और बाद में वह कुर्सी छोड़ने वाले थे। लेकिन सिद्धारमैया गुट इससे इनकार करता रहा है। इसे लेकर मामला हाईकमान तक भी पहुंच चुका है और हालात संभालने के कई बार प्रयास हो चुके हैं। यही नहीं कई बार ऐसी चर्चाएं भी छिड़ी हैं कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर हट सकते हैं। इस बीच कांग्रेस में सत्ता के लिए तीसरा मोर्चा खुलता दिख रहा है। बेंगलुरु में एससी, एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की बैठकें हुई हैं। इन लोगों की इच्छा है कि उनके समुदाय के किसी नेता को सीएम का पद मिले या फिर कैबिनेट में फेरबदल की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मंत्री पद मिल जाएं। लिंगायत विधायकों की बैठक सोमवार रात को उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की लीडरशिप में हुई। इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग के विधायकों की बैठक होम मिनिस्टर जी. परमेश्वर के घर पर मंगलवार की शाम को हुई। नवंबर और दिसंबर में सिद्धारमैया एवं शिवकुमार खेमे के बीच कई बैठकें हुई थीं। तब से फिलहाल स्थिति जस की तस थी, लेकिन विधायकों की फिर से शुरू हुई बैठकों ने हलचल मचा दी है। कुछ सूत्रों का कहना है कि ये मीटिंगें इसलिए हुई हैं ताकि अपने समुदाय की ताकत दिखाकर हाईकमान को दबाव में लाया जा सके। वहीं कांग्रेस के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि एमबी पाटिल और जी. परमेश्वर दोनों ही सिद्धारमैया खेमे के ही हैं। ऐसी स्थिति में यह बैठकें शायद शिवकुमार खेमे को जवाब के तौर पर भी हो सकती हैं ताकि उनके दबाव को कम किया जा सके। दरअसल शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। लेकिन सबसे बड़ी संख्या लिंगायतों की है और एक समूह के तौर पर देखा जाए तो एससी और एसटी समुदाय की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में इन दोनों वर्गों के विधायकों की बैठकें करके शिवकुमार को बैकफुट पर लाने की कोशिश है। एमबी पाटिल ने कहा कि हमारी यह बैठक किसी मकसद से नहीं थी बल्कि रूटीन बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मतलब सत्ता परिवर्तन या फिर पर्सनल एजेंडा नहीं था। उन्होंने कहा कि लिंगायत तो राज्य का सबसे बड़ा वर्ग हैं। उनके 34 विधायक हैं। विधायकों का कहना था कि सरकार में लिंगायत समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। चर्चाएं इस बात की भी तेज हैं कि सिद्धारमैया खुद हटने की स्थिति में अपने किसी करीबी को कमान देना चाहते हैं। ऐसे में ये बैठकें उसके लिए शक्ति प्रदर्शन या फिर सहमति बनाने की कोशिश है।

कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, MP में जंबो कार्यकारिणी खत्म, संगठन ने जारी किया सख्त आदेश

भोपाल  कांग्रेस संगठन के ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के सख्त आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस में टेंशन का माहौल बन गया है। अब जिलों में मनमाने तरीके से बड़ी कार्यकारिणी बनाने पर रोक लगा दी गई है। जिला अध्यक्षों को मिला सीधा आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि — बड़े जिलों में अधिकतम 55 सदस्य छोटे जिलों में सिर्फ 35 सदस्य ही जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाएंगे। यह फैसला AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। 15 दिन में कार्यकारिणी गठन के निर्देश वेणुगोपाल ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी जिलों को 15 दिन के भीतर नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी का गठन करना होगा। MP में पहले ही तोड़ी जा चुकी है गाइडलाइन मध्य प्रदेश में गुटबाजी को साधने के लिए लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी बनाने की परंपरा रही है। लेकिन नए निर्देश आने से पहले ही 30 जनवरी को कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी कर दी, जिनमें तय सीमा से कहीं ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। आंकड़े जो बढ़ा रहे हैं संगठन की मुश्किल छिंदवाड़ा: 240 सदस्य सागर: 150 से ज्यादा पदाधिकारी मऊगंज (छोटा जिला): 40 सदस्य भोपाल शहर: 106 नामों की सूची भोपाल ग्रामीण: 85 सदस्यों की सूची तैयार इन आंकड़ों ने अब कांग्रेस संगठन को असमंजस में डाल दिया है।  अब क्या बदलेगी MP कांग्रेस की रणनीति? राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त रुख के बाद सवाल यह है कि— क्या जारी की गई जम्बो कार्यकारिणियों में कटौती होगी? या फिर संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ेगा? फिलहाल, कांग्रेस के नए फरमान ने मध्य प्रदेश की सियासत में नई बेचैनी और सियासी हलचल जरूर पैदा कर दी है।

थाली से सेहत तक खतरा! राज्यसभा में राघव चड्ढा ने खोली मिलावटखोरों की पोल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को सदन में देश में खाने में मिलावट जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया। उन्होंने इसे एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया जो खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा करता जा रहा है। आप सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बोलते हुए कंपनियों पर सेहतमंद और एनर्जी बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे रोजमर्रा की जरूरी चीजों में खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि दूध खरीदिए, उसमें यूरिया मिलता है, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन है, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा होता है, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर मिलता है, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग होते हैं, खाने के तेल में मशीन का तेल मिलाया जाता है, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा होता है, चाय में सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक ​​कि देशी घी में जो मिठाइयां बनानी चाहिए, वो भी वनस्पति तेल और डालडा से बनाया जाता है। आप सांसद राघव चड्ढा ने आगे बताया कि एक मां अपने बच्चे को दूध का गिलास देती है, ये सोचकर कि उसके सेहत के लिए कैल्शियम और प्रोटीन मिलेगा और मेरा बच्चा दुरुस्त बनेगा। लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वह अपने बच्चे को यूरिया और डिटर्जेंट मिला हुआ दूध पिला रही है। उन्होंने एक रिसर्च स्टडी का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया कि दूध के सैंपल में 71 प्रतिशत यूरिया और 64 प्रतिशत में न्यूट्रलाइजर जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट पाए गए। उन्होंने कहा कि देश में दूध का इतना उत्पादन नहीं है, जितना बेचा जा रहा है। सब्जियां जिन्हें हम सेहत का खजाना समझकर खरीदते हैं, उनमें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर फ्रेश करके बेचा जाता है। ऑक्सीटोसिन वह खतरनाक केमिकल है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, हार्ट फेलियर, बांझपन और कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। उन्होंने बताया कि 2014-15 और 2025-26 के बीच जितने भी सैंपल की जांच हुई, उनमें से 25 प्रतिशत सैंपल में मिलावट पाई गई, जिसका मतलब है कि हर चार में से एक सैंपल में मिलावट पाई गई। उन्होंने आगे कहा कि जो प्रोडक्ट भारत में बनते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन हो गए हैं, दो बड़ी भारतीय मसाला कंपनियों के उत्पादों पर कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के कारण यूके और पूरे यूरोप में बैन लगा दिया गया था, फिर भी वही उत्पाद भारत में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। उन्होंने दुख जताया कि जो चीजें विदेशों में पालतू जानवरों के लिए भी ठीक नहीं हैं, उनका यहां बिना सोचे-समझे सेवन किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पर्याप्त कर्मचारियों और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ मजबूत करने, उल्लंघन करने वालों पर वित्तीय जुर्माना बढ़ाने, मिलावटी उत्पादों का नाम बताने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए एक सार्वजनिक रिकॉल सिस्टम शुरू करने और विज्ञापनों में गुमराह करने वाले स्वास्थ्य दावों पर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया।

‘हाथ मिलाना तो दूर…’ राहुल के तंज पर भड़के बिट्टू, कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 'गद्दार' टिप्पणी पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद को ही सबसे देशभक्त समझते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर पंजाब में हिंसा कराने और कत्ल कराने के आरोप लगाए हैं। बिट्टू ने कहा कि वह कभी भी गांधी परिवार के वारिस से हाथ नहीं मिलाएंगे। बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान राहुल ने कई सांसदों के बीच बिट्टू को गद्दार दोस्त कह दिया था। 'गांधी परिवार ने पंजाब में आग लगाई' बिट्टू ने कहा, 'वह समझते हैं कि सबसे बड़े देशभक्त हम ही हैं। पिताजी ने शहादत दी। तो मेरी पार्टी में यही लड़ाई थी कि मेरे दादाजी सरदार बेअंत सिंह। जो आपने आग लगाई थी पंजाब में, ये कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने ही आग लगाई। हमारे सबसे बड़े गुरुद्वारा, स्वर्ण मंदिर में गोली लगी। हजारों सिखों को पंजाबियों को इन्होंने निशाना बना बना के कत्ल करवाया। मर्डर कराया।' उन्होंने कहा, 'अगर राजीव गांधी जी का नाम शहीद लेना पड़ता है, तो शहीद-ए-आजम सरदार बेअंत सिंह भी कहना चाहिए। मैं भी उस परिवार से आता हूं, ये तकलीफ है।' केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ने कहा, 'जितनी देर मैं आपके साथ था तो ठीक था। अब अगर मैं बीजेपी में हूं तो आप मेरे लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। और उसके बाद देखो ये अपने आप को समझते क्या हैं। ये चीज कहकर मुझे हाथ आगे कर रहे हैं। जैसे कोई शहंशाह हों। वह समझते हैं कि मैं मालिक ही हूं इस दुनिया देश का।' हाथ नहीं मिलाऊंगा, बिट्टू बोले उन्होंने कहा, ' मैं गांधी परिवार का न हूं, लेकिन मेरे सिर पर पगड़ी है सरदार की। तो हाथ मिलाने जब बढ़ाया, तो मैंने कहा कि आप देश के गद्दार हो, देश के दुश्मन हो। जो रोज देश और सेना के खिलाफ बात करते हो। पंजाब का हाथ, गांधी परिवार जो सिखों को कातिल है। उस गांधी परिवार के वारिस के साथ मेरा हाथ नहीं मिलेगा।' भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर पूरे सिख समुदाय का अपमान करने के आरोप लगाए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लिखा कि जिस तरह राहुल गांधी ने सम्मानित सिख नेता रवनीत सिंह बिट्टू को संबोधित किया, वो शालीनता और सभ्यता की सारी हदें पार करता है।  

राहुल के आरोपों पर रिजिजू ने ली चुटकी, बोले— हम थक गए, उनकी चुप्पी नहीं टूटी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर लिखे गए पत्र के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि संसद नियमों से चलती है, किसी की मनमर्जी से नहीं।   संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते समय उन्हें रोका जा रहा है या पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी का तर्क है कि विपक्ष के नेता के नाते उन्हें अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे दबाया जा रहा है। किरेन रिजिजू का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उनके पत्र का उत्तर दे दिया है। रिजिजू ने राहुल गांधी के रवैये पर सवाल उठाते हुए करारा तंज कसा। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- 'हम लोग भी रुक-रुक के थक गए हैं। वो बोलते ही नहीं हैं। वे नियम से बाहर बोलते हैं। हम लोगों ने दो दिन इंतजार किया। बाकी लोगों को भी तो बोलने का मौका मिलना चाहिए न। वे (राहुल गांधी) अपनी मर्जी से थोड़ी न बोलेंगे…ये भारत की संसद है। यहां नियम से बोलना पड़ता है।' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी 'थेथरोलॉजी' का जमात हो गया है। राहुल गांधी और उनके लोग झूठ और गलत जानकारी फैलाते हैं। वे लोकतंत्र को शर्मसार करते हैं। वे संसद को कांग्रेस पार्टी का ऑफिस समझते हैं। वे संसद के खिलाफ बोलते हैं और कभी भी सकारात्मक नहीं सोचते। राहुल गांधी के नेतृत्व में, वे एक साज़िश के तहत देश के खिलाफ काम करते हैं… राहुल गांधी झूठ बोलते हैं।   प्रियंका का रिएक्शन, सांसदों का प्रदर्शन इससे पहले जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा गया कि क्या विपक्ष आज संसद में PM को बोलने देगा तो उन्होंने कहा- देखते हैं क्या होता है।' इस बीच कांग्रेस सांसदों ने 'PM समझौता कर चुके हैं' वाला पोस्टर लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। कल, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए यही आरोप लगाया था। लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन को कल सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा उठाने के दौरान सदन के नियमों का उल्लंघन करने के लिए संसद के बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी का बड़ा आरोप इससे पहले राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को जिस तथ्य को प्रमाणित करने के बहाने उन्हें बोलने से रोका गया है उसकी प्रमाणिकता के संदर्भ में उन्होंने सदन के पटल पर दस्तावेज पेश कर दिया है। उन्होंने लिखा- आपने जिस दस्तावेज को प्रमाणित करने का निर्देश दिया था आज मैंने अपनी बातचीत को पुनः शुरू करते हुए उस को प्रमाणित कर दिया। सदन की लंबी परंपरा में पूर्ववर्ती अध्यक्षों के ऐसे मामलों में समय समय पर दिए गए निर्णय भी शामिल हैं। सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करने वाला सदस्य प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए बाध्य होता है और इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अध्यक्ष उस सदस्य को दस्तावेज का उद्धरण देने या उसका उल्लेख करने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस दस्तावेज पर प्रतिक्रिया देने का काम सरकार का हो जाता है और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। राहुल गांधी ने आगे लिखा- आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोका जाना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर चिंता भी पैदा करता है कि विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना उचित होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा थी, जिस पर संसद में चर्चा आवश्यक है।  

राहुल गांधी का तीखा हमला: देखो गद्दार आ रहा है, पूर्व कांग्रेसी अब BJP में मंत्री

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू में नोक झोंक की स्थिति बन गई। मामला का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि एक ओर जहां राहुल ने बिट्टू को गद्दार कहा। वहीं, बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन करार दिया। खास बात है कि बिट्टू कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि सत्र से पहले विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं। इस बीच वह बिट्टू को देखते हुए कहते हैं, 'यहां एक गद्दार चला आ रहा है। इसके चेहरे को देखिए।' इसपर वहां मौजूद सांसद हंसने लगते हैं और बिट्टू उनके सामने जाकर रुक जाते हैं। वह राहुल समेत सभी की ओर इशारा कर कहते हैं, 'देश के दुश्मन' और आगे बढ़ जाते हैं। हाथ मिलाने से इनकार किया गद्दार कहने के बाद राहुल ने बिट्टू से हाथ मिलाने की कोशिश की। उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है, 'हैलो ब्रदर। मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो। यहीं वापस आओगे।' वीडियो में नजर आ रहा है कि केंद्रीय मंत्री ने उनके साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। राहुल के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल भी मौजूद हैं। यह मामला संसद के मकर द्वार के पास का है। वहां बजट सत्र से की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष लगातार अमेरिका के साथ डील को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। यह मामला संसद के मकर द्वार के पास का है। वहां बजट सत्र से की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष लगातार अमेरिका के साथ डील को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी में विवाद का किया था दावा दिसंबर में बिट्टू ने दावा किया था कि राहुल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा में विवाद चल रहा है। एनडीटीवी से बातचीत में बिट्टू ने वीबी जी राम जी बिल पर कांग्रेस के प्रदर्शन की तैयारी पर सवाल पूछा गया। इसपर उन्होंने कहा, 'उनके पास लोग हैं प्रदर्शन करने के लिए? उनको महात्मा गांधी से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें जो उनका गांधी है, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, उनको उस गांधी से दिक्कत है कि वो कहां जा रहा है।' उन्होंने कहा था, 'दूसरी तरफ दोनों गांधी में लड़ाई चल रही है, बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। जो मुझे पता लगा है… सदन में जो दो तीन बार जो भाषण हुआ है, उसे भी लोगों ने प्रियंका गांधी का जो भाषण है, उसकी तुलना की है। और राहुल गांधी इस चीज से नाराज होकर परिवार और पार्टी से लड़कर यहां से चले गए हैं।' उन्होंने कहा, 'उनकी पार्टी और फैमिली में जो प्रॉब्लम है। इसलिए राहुल गांधी छोड़कर चले गए हैं।'  

शरद पवार की अंतिम इच्छा पर उठे सवाल, प्रफुल्ल पटेल की चाल से मची हलचल

मुंबई  महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की पिछले दिनों एक विमान हादसे में हुई मौत के बाद एनसीपी की राजनीति पूरी तरह बदल गई है. उनके निधन के चौथे दिन ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य के डिप्टी सीएम पद की शपथ दिला दी गई. उनके निधन को अभी केवल सात दिन हुए हैं लेकिन, ऐसा लगता है कि राज्य और एनसीपी की राजनीति में व्यापक बदलाव आ गया है. अजित पवार ने राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान अपनी इच्छा जताई थी कि एनसीपी के दोनों गुटों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं. इसको लेकर उनकी और उनके चाचा शरद पवार के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है. दोनों पक्षों और शरद पवार के परिवार से भी कई ऐसे बयान आए थे जिससे लगता था कि अब फिर से परिवार एकजुट हो गया है. अजित पवार के निधन के बाद परिवार ने एकजुट होकर इस दर्द को भी झेला. सुनेत्रा पवार और उनके बेटों के साथ हर कदम पर परिवार का सदस्य दिखा. 85 वर्षीय वयोवृद्ध नेता शरद पवार ने भी मीडिया से बातचीत में यह कहा कि अजित की इच्छा एनसीपी को फिर से एकजुट करने की थी. लेकिन, उसके कुछ ही घंटों के भीतर एनसीपी की राजनीति ने करवट ले ली. सुनेत्रा पवार ने उनके निधन के महज चौथे दिन डिप्टी सीएम की शपथ ली. हद तो तब हो गई जब शरद पवार ने यह कह दिया कि उनको इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. तमाम रिपोर्ट में दावा किया गया कि एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और अजित पवार के करीबी दोस्त रहे प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश एनसीपी के सुनील तटकरे इस पूरे मामले को हैंडल कर रहे हैं. सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान देने की तैयारी दरअसल, डिप्टी सीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष बनाने की तैयारी चल रही है. निधन से पहले अजित पवार के पास ही पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी थी. प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. प्रफुल्ल पटेल ने खुद को इस रेस से बाहर करने के फैसला किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पटेल ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि अध्यक्ष का पद सुनेत्रा पवार संभालें. इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पुणे और बीड़ के पालक मंत्री की जिम्मेदारी भी सुनेत्रा पवार को दे दी है. ये जिम्मेदारी भी दिवंगत अजित पवार के पास थी. प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार पार्टी अध्यक्ष का पद संभालें. हम सभी पार्टी को आगे बढ़ाने में उनके साथ हैं. यह दिवंगत अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हमें पार्टी की एक बैठक बुलानी पड़ेगी और पार्टी व जनता की भावनाओं के अनुरूप फैसला लेना पड़ेगा. प्रुफल्ला पटेल ने विलय से किया इनकार प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया कि इस वक्त एनसीपी और शरद पवार के गुट वाली एनसीपी के विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. हमारा फोकस पार्टी के मसले सुलझाने पर है. विलय की बात को खारिज करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अजित दादा ने कम से कम दो बार टीवी चैनलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दोनों दलों के बीच कॉऑर्डिनेशन केवल स्थानीय निकाय चुनाव तक सीमित थे. पटेल ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में एनसीपी ने अहिल्यानगर में भाजपा और नासिक में शिव सेना के साथ भी गठबंधन किया था. पटेल ने कहा कि अजित दादा ने यह कहा था कि कुछ लोग चाहते है कि दोनों पार्टियों को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन इसको लेकर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई थी. उन्होंने उस वीडियो को भी खारिज किया जिसमें एनसीपी और शरद गुट के नेताओं के मिलने को दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि हम मिलते रहते हैं क्योंकि हम एक समय एक ही परिवार के हिस्से थे. शरद पवार को झटका अब सवाल यह है कि एनसीपी के इस इनकार के बाद क्या 85 वर्षीय शरद पवार को पार्टी और परिवार को एकजुट करने की उनकी संभवतः अंतिम इच्छा अधूरी रह जाएगी. शरद पवार बुजुर्ग हो चुके है. शरद पवार के लिए अजित पवार बेटे जैसे थे. वह महाराष्ट्र में शरद पवार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी माने जाते थे. उनके निधन से शरद पवार को गहरा झटका लगा है. लेकिन, एनसीपी का नया नेतृत्व जिस तरह से शरद पवार से दूरी बना रहा है उससे लगता है कि महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले वयोवृद्ध शरद पवार का सपना अधूरा रहा जाएगा.

ट्रेड डील पर सरकार घिरी? शशि थरूर बोले—खुश होने से पहले शर्तें देश के सामने रखिए

नई दिल्ली मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की। थरूर ने कहा कि भले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ (शुल्क) को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसद करना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को इसके सभी पहलुओं और विवरणों को सार्वजनिक करना चाहिए। थरूर ने कहा कि वे इस डील को लेकर जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन पहले सरकार बताए तो कि मसला क्या है? शशि थरूर की मुख्य आपत्तियां एएनआई से बात करते हुए थरूर ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट हैं; क्या संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है? क्या भारत सरकार को देश की जनता को यह नहीं समझाना चाहिए कि इस सौदे में वास्तव में क्या है? उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर समझौते के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि यदि अमेरिका भारत को अपने कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बनाना चाहता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिका 500 अरब डॉलर के व्यापार की बात कर रहा है, जबकि भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर है, तो क्या भारत को अन्य देशों से आयात कम करना पड़ेगा। थरूर ने कहा- विपक्ष सिर्फ इतना जानना चाहता है कि इस समझौते में है क्या। अगर यह अच्छी खबर है तो हम खुशी-खुशी इसका स्वागत करेंगे, लेकिन सरकार को देश को बताना चाहिए कि इसमें कौन-सी शर्तें शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के तीखे सवाल कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर कर सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं- घोषणा का तरीका: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि युद्धविराम की तरह इस व्यापार समझौते की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई। यह भी कहा गया कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर हुआ है। 'जीरो' टैरिफ का डर: ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' करने पर सहमत हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि इससे भारतीय बाजार पूरी तरह अमेरिका के लिए खुल जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। रूसी तेल पर पाबंदी: सबसे बड़ा सवाल रूसी तेल को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार ने ट्रंप के दावे के अनुसार रूस से मिलने वाले रियायती तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जता दी है? विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल सोशल मीडिया घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता के सामने इस सौदे का पूरा कच्चा चिट्ठा रखे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

लोकसभा में जोरदार हंगामा, राहुल गांधी के बयान पर भड़के सांसद, स्पीकर की ओर उछले कागज

नई दिल्ली लोकसभा में आज लगातार दूसरे दिन राहुल गांधी की स्पीच पर हंगामा खड़ा हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। हुआ यूं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए नेता विपक्ष राहुल गांधी जैसे ही खड़े हुए और उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की, उन्होंने फिर से राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाना चाहा और कल की बात फिर से दोहराते हुए कहा कि यह चीन और पाकिस्तान के साथ जुड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नेता विपक्ष सदन को गुमराह कर रहे हैं। स्पीकर की बैठक में हूई बातचीत का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि हम यहां सुनने के लिए बैठे हैं लेकिन उन्हें विषय को छोड़ना चाहिए। राहुल गांधी इस पर रुके नहीं और उन्होंने फिर से नरवणे के संस्मरण का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष का नेता हूं, मुझे बोलने दिया जाए।" इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल पर ऐतराज है, तो नहीं बोलूंगा। इसके बाद राहुल गांधी ने चीन का जिक्र किया और कहा कि ईस्टर्न लद्दाख में भारतीय सैनिक मारे गए। इसी दौरान किसी सदस्य ने चेयर को संबोधित करते हुए यार बोल दिया। इस पर चेयर ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह संसद है। उस समय आसन पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी बैठे थे। इस यार के मुद्दे पर लोकसभा में हंगामा होने लगा। दूसरी तरफ विपक्षी सांसद भी इस बात से भड़क उठे कि नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। इसी दौरान आसन की तरफ पेपर भी फेंके गए।

संघ और दिल्ली से मंथन के बाद MP में नियुक्तियों की बड़ी सूची, निगम-मंडलों में होगी जल्द बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निगम–मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सत्ता और संगठन ने दिल्ली के निर्देश पर नामों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है, जिस पर संघ से भी मंथन किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक सूची दिल्ली भेज दी गई है और वहां से हरी झंडी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इस असंतोष को देखते हुए जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 12 प्रमुख निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की योजना बनाई गई थी। नाम भी तय हो गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के चलते प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। दिल्ली का साफ संदेश—छोटी नहीं, बड़ी सूची लाओ सूत्र बताते हैं कि नियुक्तियों में हो रही देरी की शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली से साफ संदेश आया कि अब 10–12 नामों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एकमुश्त बड़ी सूची भेजी जाए ताकि अधिकतर निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में एक साथ नियुक्तियां की जा सकें। सीएम हाउस में हुई मैराथन बैठक राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मैराथन बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में निगम–मंडलों और प्राधिकरणों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित नामों पर गहन चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।अब सबकी निगाहें दिल्ली से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा और सत्ता–संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा।  

संसद में नया विवाद: नियम 349 क्या, और क्यों राहुल गांधी घिरे आरोपों में?

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के एक संस्मरण के मसौदे के कुछ अंश का जिक्र किया तो सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने भी नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने का विरोध किया। इसके बाद सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। सदन में गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोबारा जब कार्यवाही शुरू हुई तो राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे की बात कहनी शुरू कर दी। इसके बाद फिर सदन में हंगामा हुआ। इसे देखते हुए स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा के नियम संख्या 349 का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता से कई बार यह अपील की कि वह पुस्तक या किसी पत्रिका को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते, हालांकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। लोकसभा में गतिरोध के समय प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे। अब सवाल उठता है कि नियम 349 क्या है, जो राहुल गांधी को जनरल नरवणे का संस्मरण पढ़ने से रोक रहा है। क्या है लोकसभा का नियम 349? लोकसभा की नियम पुस्तिका (Rulebook) का नियम 349 सदन के भीतर सदस्यों के आचरण और मर्यादा से संबंधित है। यह नियम उन शिष्टाचारों को निर्धारित करता है जिनका पालन प्रत्येक सांसद को सदन की कार्यवाही के दौरान करना अनिवार्य होता है। यह नियम कहता है कि सदस्य सदन में नारे नहीं लगा सकते और न ही किसी तरह का प्रदर्शन कर सकते हैं। इस नियम की उपधारा एक में कहा गया है कि कोई भी सदस्य किसी अखबार की क्लिपिंग या मैगजीन में प्रकाशित अंश, कोई पुस्तक के अंश सदन में नहीं पढ़ सकते। इसके अलावा सदन के भीतर झंडे, प्रतीक चिन्ह, पोस्टर, तख्तियां या धार्मिक चित्र दिखाना वर्जित है। स्पीकर का निर्देश मानना बाध्यकारी लोकसभा का नियम 349 यह भी कहता है कि सदस्य सदन में जोर-जोर से बात नहीं कर सकते, हंस नहीं सकते और न ही ऐसी कोई हरकत कर सकते हैं जिससे कार्यवाही में बाधा आए। इसके अलावा जब कोई अन्य सदस्य बोल रहा हो, तो उसे टोकना या उसके भाषण के बीच में बाधा डालना नियम का उल्लंघन माना जाता है। नियम कहता है कि सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की बातों और निर्देशों का पालन करना होता है और उनकी अनुमति के बिना कोई भी मुद्दा नहीं उठा सकता। तेजस्वी सूर्या के बयान पर पलटवार बता दें कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने जैसे ही इसे पढ़ने का प्रयास किया तो राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं। पहले तीन, फिर 4 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए। बिरला ने राहुल गांधी से कई बार कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें। जब राहुल गांधी इस संस्मरण के कुछ अंश सदन के पटल पर रखने पर अड़े रहे तो बिरला ने कहा, ''आप लगातार आसन की वमानना कर रहे हैं…।'' राहुल गांधी ने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं। सदन में लगातार गतिरोध बने रहने पर बिरला ने लोकसभा की बैठक पहले तीन बजे तक फिर 4 बजे तक स्थगित कर दी।  

सदन में सियासी संग्राम: देश की छवि पर बयान को लेकर राहुल गांधी घिरे, मंत्री ने लगाई फटकार

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में चीन पर दिए गए बयानों से लगातार हंगामा जारी है। लोकसभा स्पीकर द्वारा बार-बार रोके जाने के बाद भी नेता विपक्ष लगातार एक ही मुद्दे पर बोलते रहे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने एक बार फिर से वही बात शुरू कर दी। इस पर नाराज होते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह अपुष्ट जानकारी है। उनसे यही कहूंगा कि कोई ऐसी बात मत बोलिए, जिससे देश का और सेना का मनोबल टूटे। देश को नीचा दिखाकर क्या मिलेगा। हालांकि इसके बाद भी राहल गांधी नहीं रुके और फिर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।   यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए उठे कांग्रेस नेता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के लेखों का हवाला देकर चीन पर बात रखते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सैनिक मौजूद थे। राहुल के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आखिर राहुल गांधी किसी ऐसी किताब का जिक्र सदन के पटल पर कैसे कर सकते हैं, जो कि छपी ही नहीं है। राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी लोकसभा नेता विपक्ष के बयान की निंदा की। हालांकि, इसके बाद भी वह नहीं रुके और लगातार वही बात कहते रहे। राहुल की इस हठधर्मिता पर स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को नसीहत भी दी। इस पर नेता विपक्ष ने कहा कि फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। इस पर नाराज होते हुए स्पीकर ने कहा कि मैं यहां आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बोलना चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है और जिसके बारे में आपने सदन को जानकारी दी थी।

अजित दादा के जाने के बाद NCP में भूचाल, बीजेपी की रणनीति से सुनेत्रा पवार बने उपमुख्यमंत्री, उद्धव सेना ने कहा \’मास्टरमाइंड\’

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्‍ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने स्‍पष्‍ट किया कि उनकी पार्टी का एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह मजबूत और कायम है. उन्होंने कहा कि जो नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने फैसले लें. उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी की ओर इशारा माना जा रहा है. तटकरे के इस बयान को एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय के खिलाफ भी माना जा रहा है. अजित पवार ने एनसीपी के दो धड़ों के मर्जर को लेकर महत्‍वपूर्ण बयान देते हुए कहा था कि दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं की भावना है कि एकजुट हो जाया जाए. प्‍लेन क्रैश में निधन के बाद अजित पवार के गुट का मूड लगता है अब बदल चुका है. बता दें कि विलय पर शरद पवार ने कहा था कि अजित पवार की इच्‍छा को पूरा करना चाहिए. दूसरी तरफ, मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि एनसीपी के मर्जर की बात फाइनल स्‍टेज तक पहुंच चुकी थी तो अजित दादा उन्‍हें जरूर बताते. एनसीपी नेता सुनील तटकरे का यह बयान उस सवाल के जवाब में आया जिसमें दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चा की जा रही थी. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों दलों के एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की राजनीतिक लाइन स्वीकार करनी होगी. हालांकि, तटकरे ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जिन्होंने अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही विलय की बातें शुरू कर दी थीं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को बताना चाहिए कि यह चर्चा इतनी जल्द क्यों शुरू की गई. हाल ही में सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. उधर, एनसीपी-एसपी के विधायक रोहित पवार ने कहा कि पवार परिवार में 13 दिनों तक कोई राजनीतिक बातचीत नहीं होगी और इसके बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिवार की ओर से कोई भी कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा.   सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने के पीछे बीजेपी की बड़ी चाल.. शिवसेना (UBT) ने कहा है कि अजित पवार की मौत के चौथे ही दिन सुनेत्रा पवार को उपमुख्मयमंत्री बनाने के पीछे मुख्य रूप से बीजेपी का ही दिमाग था। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' में दावा किया गया कि इसके पीछे बीजेपी 'मास्टरमाइंड' थी। वहीं बीजेपी नेतृत्व के साथ ही एनसीपी नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल नहीं चाहते थे कि एक बार फिर एनसीपी की एकीकरण हो। बता दें कि 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे एनसीपी नेता अजित पवार की मौत हो गई थी। इसके बाद शनिवार को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एनसीपी (SP) चीफ शरद पवार ने कहा कि उन्हें तो पता भी नहीं था कि सुनेत्रा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं। सामना में दावा किया गया कि शरद पवार और सुप्रिया सुले समेत परिवार के किसी सदस्य को उनके शपथ ग्रहण के बारे में जानकारी नहीं थी। वह चुपचाप बारामती से मुंबई के लिए रवाना हो गईं और किसी से कुछ नहीं बताया। 12 फरवरी को होने वाला था विलय? अजित पवार के रहते चर्चा होने लगी थी कि अलग होकर बनीं दो पार्टियां एक बार फिर एक हो जाएंगी। वहीं अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा था कि 12 फरवरी को दोनों पार्टियों के विलय की तारीख भी निश्चित हो गई थी। हालांकि अब इस तारीख पर कोई कुछ भी दावा करने को तैयार नहीं है। शिवसेना ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में कुछ लोगों की महत्वाकांक्षाएं और ज्यादा बढ़ गई हैं। उनकी पार्टी में भी उपमुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हो गई थी। वहीं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में आनन-फानन में सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री बना दिया गया ताकि पाटिल और पवार परिवार की एकता को भी दिखाया जाए। शिवसेना ने कहा कि सुनेत्रा पवार को भले ही सरकार की अगली सीट पर जगह दे दी गई है लेकिन स्टीयरिंग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ही हाथ में है। फडणवीस की दया पर ही सुनेतेरा पवार और एकनाथ शिंदे अपना अस्तित्व बचा पा रहे हैं। शिवसेना (UBT) ने यह भी कहा कि हो सकता कि सुनेत्रा पवार गूंगी गुड़िया ना साबित हों और कुछ दिनों में वह खुलकर सामने आएं। एक तरफ सुनेत्रा पवार 'सनातनी मिजाज' वाली बीजेपी के साथ है तो दूसरी तरफ अपने पति की अंतिम क्रियाएं संपन्न किए बिना ही वह राजनीति में सक्रिय होकर हिंदू रीति-रिवाजों को नजरअंदाज कर रही हैं। अपनी शर्तों पर विलय तटकरे के बयान से साफ है कि अजित पवार गुट फिलहाल एनडीए के साथ अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और किसी भी संभावित विलय की स्थिति में वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ना चाहता है. वहीं, शरद पवार गुट की ओर से अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच संवाद की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन मौजूदा बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दूरी कम होने के बजाय रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं. सीएम फडणवीस के बयान से नई बहस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अगर इस पर कोई गंभीर बातचीत चल रही होती तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार उन्हें जरूर बताते. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को न तो किसी चर्चा की जानकारी है और न ही विलय की किसी तारीख की. फडणवीस का बयान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की घोषणा … Read more

अजित दादा के जाने के बाद NCP में भूचाल, बीजेपी की रणनीति से सुनेत्रा पवार बने उपमुख्यमंत्री, उद्धव सेना ने कहा \’मास्टरमाइंड\’

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्‍ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने स्‍पष्‍ट किया कि उनकी पार्टी का एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह मजबूत और कायम है. उन्होंने कहा कि जो नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने फैसले लें. उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी की ओर इशारा माना जा रहा है. तटकरे के इस बयान को एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय के खिलाफ भी माना जा रहा है. अजित पवार ने एनसीपी के दो धड़ों के मर्जर को लेकर महत्‍वपूर्ण बयान देते हुए कहा था कि दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं की भावना है कि एकजुट हो जाया जाए. प्‍लेन क्रैश में निधन के बाद अजित पवार के गुट का मूड लगता है अब बदल चुका है. बता दें कि विलय पर शरद पवार ने कहा था कि अजित पवार की इच्‍छा को पूरा करना चाहिए. दूसरी तरफ, मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि एनसीपी के मर्जर की बात फाइनल स्‍टेज तक पहुंच चुकी थी तो अजित दादा उन्‍हें जरूर बताते. एनसीपी नेता सुनील तटकरे का यह बयान उस सवाल के जवाब में आया जिसमें दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चा की जा रही थी. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों दलों के एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की राजनीतिक लाइन स्वीकार करनी होगी. हालांकि, तटकरे ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जिन्होंने अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही विलय की बातें शुरू कर दी थीं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को बताना चाहिए कि यह चर्चा इतनी जल्द क्यों शुरू की गई. हाल ही में सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. उधर, एनसीपी-एसपी के विधायक रोहित पवार ने कहा कि पवार परिवार में 13 दिनों तक कोई राजनीतिक बातचीत नहीं होगी और इसके बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिवार की ओर से कोई भी कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा.   सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने के पीछे बीजेपी की बड़ी चाल.. शिवसेना (UBT) ने कहा है कि अजित पवार की मौत के चौथे ही दिन सुनेत्रा पवार को उपमुख्मयमंत्री बनाने के पीछे मुख्य रूप से बीजेपी का ही दिमाग था। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' में दावा किया गया कि इसके पीछे बीजेपी 'मास्टरमाइंड' थी। वहीं बीजेपी नेतृत्व के साथ ही एनसीपी नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल नहीं चाहते थे कि एक बार फिर एनसीपी की एकीकरण हो। बता दें कि 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे एनसीपी नेता अजित पवार की मौत हो गई थी। इसके बाद शनिवार को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एनसीपी (SP) चीफ शरद पवार ने कहा कि उन्हें तो पता भी नहीं था कि सुनेत्रा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं। सामना में दावा किया गया कि शरद पवार और सुप्रिया सुले समेत परिवार के किसी सदस्य को उनके शपथ ग्रहण के बारे में जानकारी नहीं थी। वह चुपचाप बारामती से मुंबई के लिए रवाना हो गईं और किसी से कुछ नहीं बताया। 12 फरवरी को होने वाला था विलय? अजित पवार के रहते चर्चा होने लगी थी कि अलग होकर बनीं दो पार्टियां एक बार फिर एक हो जाएंगी। वहीं अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा था कि 12 फरवरी को दोनों पार्टियों के विलय की तारीख भी निश्चित हो गई थी। हालांकि अब इस तारीख पर कोई कुछ भी दावा करने को तैयार नहीं है। शिवसेना ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में कुछ लोगों की महत्वाकांक्षाएं और ज्यादा बढ़ गई हैं। उनकी पार्टी में भी उपमुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हो गई थी। वहीं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में आनन-फानन में सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री बना दिया गया ताकि पाटिल और पवार परिवार की एकता को भी दिखाया जाए। शिवसेना ने कहा कि सुनेत्रा पवार को भले ही सरकार की अगली सीट पर जगह दे दी गई है लेकिन स्टीयरिंग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ही हाथ में है। फडणवीस की दया पर ही सुनेतेरा पवार और एकनाथ शिंदे अपना अस्तित्व बचा पा रहे हैं। शिवसेना (UBT) ने यह भी कहा कि हो सकता कि सुनेत्रा पवार गूंगी गुड़िया ना साबित हों और कुछ दिनों में वह खुलकर सामने आएं। एक तरफ सुनेत्रा पवार 'सनातनी मिजाज' वाली बीजेपी के साथ है तो दूसरी तरफ अपने पति की अंतिम क्रियाएं संपन्न किए बिना ही वह राजनीति में सक्रिय होकर हिंदू रीति-रिवाजों को नजरअंदाज कर रही हैं। अपनी शर्तों पर विलय तटकरे के बयान से साफ है कि अजित पवार गुट फिलहाल एनडीए के साथ अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और किसी भी संभावित विलय की स्थिति में वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ना चाहता है. वहीं, शरद पवार गुट की ओर से अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच संवाद की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन मौजूदा बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दूरी कम होने के बजाय रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं. सीएम फडणवीस के बयान से नई बहस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अगर इस पर कोई गंभीर बातचीत चल रही होती तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार उन्हें जरूर बताते. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को न तो किसी चर्चा की जानकारी है और न ही विलय की किसी तारीख की. फडणवीस का बयान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की घोषणा … Read more

लोकसभा में चीन को लेकर सियासी संग्राम, राहुल गांधी के आरोपों पर रक्षा मंत्री का पलटवार

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानपर लोकसभा में हंगामा मच गया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के नाम पर दावा करते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास हैं। इसके लिए उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देने की बात कही, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें चैलेंज कर दिया। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी और कहा कि आप बताएं कि आखिर यह पुस्तक प्रकाशित हुई भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी पुस्तक के आधार पर यहां बात नहीं की जा सकती, जो प्रकाशित ही नहीं हुई है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि यह पुस्तक पब्लिश हुई थी या नहीं। अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।   राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह मनोज नरवणे की पुस्तक के आधार पर यह बात कह रहे हैं। इस पर डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि वह पुस्तक को प्रस्तुत कर दें। यदि कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है तो फिर उसके आधार पर ऐसे दावे कैसे किए जा सकते हैं। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का हवाला दिया है, जो प्रकाशित ही नहीं हुए हैं। इस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की स्पीच का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी इस सदन से बाहर के संदर्भों की बात की थी। इस पर होम मिनिस्टर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने किसी मीडिया रिपोर्ट या फिर विषय से हटकर किसी पुस्तक का जिक्र नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी स्पीच में 2004 से 2014 तक राष्ट्रपति के अभिभाषणों पर बात की थी। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जो आपत्तिजनक था। राजनाथ सिंह और अमित शाह के ऐतराज के बाद भी राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ये लोग तो आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि यह सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती। अखिलेश यादव ने भी दिया दखल- बोलने देने से परेशानी क्या है? राहुल गांधी की स्पीच को लेकर बवाल बढ़ा तो अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि चीन का मसला संवेदनशील है और उससे सावधान रहने की जरूरत है। डॉ. लोहिया भी ऐसा कहते थे और मुलायम सिंह यादव भी उसे लेकर चिंतित थे। ऐसे में नेता विपक्ष यदि चीन को लेकर कुछ कहना चाहते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक लगी है तो फिर उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। ऐसा करना गलत है और सदन की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी बार-बार इसी मसले पर बोलना चाहते थे, लेकिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राजनाथ सिंह ने कई बार खड़े होकर ऐसी पुस्तक के जिक्र पर आपत्ति जताई, जो प्रकाशित ही नहीं हुई। मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, राहुल गांधी को स्पीकर की नसीहत अंत में बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

BJP का सवाल, हिंदू त्योहारों में क्यों नहीं मिली छूट? रमजान में स्कूल टाइमिंग पर कांग्रेस को घेरा

बेंगलुरु  कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की स्पेशल टाइमिंग को लेकर भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को एक बयान में कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है। उन्होंने यह सवाल भी उठाए हैं कि अगर रमजान के दौरान स्कूल के स्टाफ या टीचर्स को जल्दी छुट्टी की इजाजत मिली है, तो नवरात्रि में इस तरह का नियम लागू क्यों नहीं किया गया। पूनावाला ने एक बयान में कहा, "हम देख सकते हैं कि कर्नाटक में रमजान के दौरान स्कूलों की टाइमिंग अलग होगा। लेकिन क्या आपने कर्नाटक सरकार किसी हिंदू त्योहार के दौरान ऐसी कोई छूट दी है? आप कह रहे हैं कि रमजान के दौरान टीचर और स्टाफ जल्दी जा सकते हैं, लेकिन क्या आप नवरात्रि के दौरान भी ऐसा ही करेंगे?” शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक को पहले रखती है और कांग्रेस के पास संविधान के अनुसार निष्पक्ष और समान रूप से काम करने का विजन नहीं है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए हिंदू आस्था का अपमान करना और वोट बैंक की दुकान चलाना, उनकी इकलौती पहचान बन गई है। और इसीलिए वे सबसे पहले वोटबैंक को रखते हैं।” स्कूलों के समय में बदलाव इससे पहले कर्नाटक के कुछ स्कूलों में रमजान को लेकर कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए थे। उर्दू और अन्य अल्पसंख्यक भाषा स्कूलों के निदेशालय के एक निर्देश के मुताबिक रमजान के महीने में राज्य में उर्दू मीडियम जूनियर प्राइमरी और सेकेंडरी प्राइमरी स्कूलों के बंद रहने का समय रमजान महीना शुरू होने की तारीख से एक महीने के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक बढ़ा दिया जाएगा।