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प्राइवेट पार्ट की सफाई से जुड़ी जानकारी से 85% पुरुष अनजान, डॉक्टर से जानें हाइजीन के जरूरी टिप्स

महिलाओं की हाइजीन, वजाइना क्लीनिंग टिप्स पर अक्सर हम बात करते रहते हैं लेकिन पुरुषों के हाइजीन की बात काफी कम होती है। शरीर की सफाई हर किसी को करनी चाहिए फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला। अगर प्राइवेट पार्ट की सही से सफाई न की जाए, तो इंफेक्शन फैल जाता है और फिर ये गंभीर समस्या बन जाती है। ज्यादातर पुरुष जल्दबाजी में प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से नहीं करते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो संभल जाइये। स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर विहान सिंह का कहना है कि महिलाओं की तरह ही पुरुषों को भी प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से करना काफी जरूरी है। चलिए कुछ हाइजीन टिप्स बताते हैं। प्राइवेट पार्ट साफ करने का सही तरीका डॉक्टर के मुताबिक, यूरिन पास करने के बाद ज्यादातर पुरुष ऐसे ही अंडरवियर पहन लेते हैं लेकिन ज्यादातर केसेस में इंफेक्शन इसी वजह से होता है। यूरिन स्टेन रहने और नमी बनी रहने के कारण फंगल इंफेक्शन फैलता है। कुछ और भी बातें हैं, जो पुरुषों को मालूम होनी चाहिए, चलिए जानते हैं- 1- प्राइवेट पार्ट की सफाई कभी भी साबुन से न करें। हमेशा किसी क्लीनिंग जेल या प्राइवेट पार्ट फ्रेंडली सोप से करें। केमिकल वाले साबुन के पार्टिकल्स स्किन पर जम जाते हैं। 2– सेक्स के बाद पेनिस को पानी से धोते हुए अच्छे से साफ करें। कई पुरुष ऐसा नहीं करते और इंफेक्शन फैलता है। 3– प्राइवेट पार्ट में अगर गीलापन है, तो अंडरवियर न पहनें। गीलेपन से खुजली, रैशेस की समस्या हो सकती है। 4- प्राइवेट पार्ट के प्यूबिक को भी समय-समय पर ट्रिम करें। प्यूबिक बाल बैक्टीरिया और पसीने को फंसा सकते हैं। 5– कभी भी गीले अंडरवियर न पहनें। टाइट और गीले अंडरवियर पहनने से भी प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन फैल सकता है। कैसे करें साफ प्राइवेट पार्ट को साफ करने के लिए गुनगुना पानी इस्तेमाल करें और केमिकल फ्री साबुन का इस्तेमाल करें। नहाते समय पेनिस एरिया के आस-पास की स्किन को अच्छे से क्लीन करें।

महिलाओं से 10 साल पहले पुरुषों को होती है हार्ट डिजीज, स्टडी ने किया डरावना खुलासा

मुंबई  अक्सर हम यह मान लेते हैं कि दिल की बीमारी उम्र बढ़ने के साथ ही होती है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी परेशानियां सिर्फ 60–70 साल की उम्र के बाद ही आती हैं. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. आज की भागदौड़ भरी लाइफ, गलत खानपान, तनाव, कम नींद और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने दिल की बीमारियों को चुपचाप युवाओं तक पहुंचा दिया है सबसे खतरनाक बात यह है कि दिल की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है.  शुरुआत में न तो तेज दर्द होता है और न ही कोई साफ चेतावनी मिलती है. इसी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और जब तक समझ आता है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने दिल की बीमारी को लेकर एक और अहम बात सामने रखी है, जो खासतौर पर पुरुषों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है.    क्या कहती है नई स्टडी?    अमेरिका में 18 से 30 साल की उम्र के 5,000 से ज्यादा युवाओं पर लंबे समय तक किए गए एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) लगभग 10 साल पहले विकसित हो जाती है. यह अध्ययन CARDIA (Coronary Artery Risk Development in Young Adults) नाम से जाना जाता है और इसके नतीजे जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (JAHA) में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार 20 से 29 साल की उम्र तक पुरुष और महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा लगभग समान रहता है, लेकिन 35 साल की उम्र के आसपास पुरुषों में यह खतरा तेजी से बढ़ने लगता है. यह अंतर मध्य आयु तक बना रहता है. हैरानी की बात यह है कि ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और कोलेस्ट्रॉल जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह अंतर खत्म नहीं होता है.    पुरुषों में दिल की बीमारी पहले क्यों होती है? रीजेन्सी हॉस्पिटल, लखनऊ के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हर्षित गुप्ता बताते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं. जैसे पुरुषों में हार्मोनल सुरक्षा महिलाओं की तुलना में कम होती है, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कुछ समय तक दिल को सुरक्षा देता है, पुरुषों में कम उम्र से ही धूम्रपान, शराब, तनाव और अनियमित जीवनशैली अधिक देखने को मिलती है, जैविक (Biological) अंतर भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं, हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि महिलाओं को मिलने वाली हार्मोनल सुरक्षा स्थायी नहीं होती है. उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में भी दिल की बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ता है.  दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में होने वाली कुल मौतों में से 32 प्रतिशत मौतें हार्ट डिजीज के कारण होती हैं. साल 2022 में करीब 19.8 मिलियन लोगों की मौत दिल की बीमारियों से हुई. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि दिल की बीमारी कोई छोटी समस्या नहीं है.  समाधान क्या है? शोधकर्ताओं का मानना है कि दिल की बीमारी से बचाव की शुरुआत युवावस्था से ही होनी चाहिए.  20–30 साल की उम्र में ही दिल की सेहत की जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, तनाव से दूरी, धूम्रपान से बचाव और समय-समय पर हेल्थ चेकअप, यही दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखते हैं. 

हर दिन करें ये 5 आसान चीज़ें, और देखें कैसे ज़िंदगी की मुश्किलें 90% कम हो जाती हैं

क्या आप अपनी लाइफ से खुश हैं? ज्यादातर लोगों से अगर ये सवाल पूछा जाए तो अपनी लाइफ से जुड़ी सैकड़ों कमियां वो आपको गिना देंगे। कुल मिलाकर कहें तो अधिकतर लोगों की जिंदगी में शिकायतें ज्यादा भरी हुई हैं और खुशियां कम। खैर, सुख और दुख दोनों ही जिंदगी का हिस्सा हैं, आप चाहें या ना दुख तो जरूर आएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाइफ में ज्यादातर प्रॉब्लम्स हमारी ही बनाई हुई होती हैं। कई बार हम छोटी-छोटी चीजों को इतना इग्नोर करते हैं कि आगे चलकर वो एक बड़ी समस्या बनकर हमारे आगे खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव कर लें तो आपकी ज्यादातर प्रॉब्लम्स अपने आप सॉल्व हो सकती हैं। यकीन मानें ये कोई जादू-टोने का मामला नहीं है, बल्कि प्रैक्टिकल लाइफस्टाइल हैक्स हैं जो लाइफ की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में मदद करेंगे। सुबह जल्दी उठने की आदत डालें बचपन से ही आप घर के बड़ों से सुनते आए होंगे कि सुबह जल्दी उठने से सब ठीक हो जाता है। कुछ हद तक ये बात बिल्कुल सही है। ज्यादातर सफल लोगों की दिनचर्या उठाकर देखेंगे तो उसमें सुबह जल्दी उठने की आदत कॉमन पाएंगे। दरअसल जब आप जल्दी उठते हैं, तो आपके पास दिन का पूरा कंट्रोल होता है। आप हड़बड़ी में नहीं होते बल्कि आराम से पूरे दिन की प्लानिंग कर पाते हैं, जिससे पूरा दिन प्रोडक्टिव होता है। आप फ्रेश भी फील करते हैं और बेहतर फैसले ले पाते हैं। अपने स्क्रीन टाइम को कम कर दें आजकल हमारे दिन का आधा से ज्यादा समय फोन, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन के आगे ही गुजर जाता है। इसमें काम के घंटे कम होते हैं बल्कि फालतू का टाइम पास ज्यादा होता है। जितना समय आप स्क्रीन के आगे गुजारते हैं उतने ही नाखुश और डिप्रेस महसूस करते हैं। घंटों मोबाइल के आगे बैठकर परिवार के साथ भी आपकी बॉन्डिंग खराब होती है, स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होती है, मूड पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ता है और समय भी बर्बाद होता है। इसकी जगह एक अच्छी किताब पढ़ें, दोस्तों और फैमिली से बातचीत करें और लाइफ की प्लानिंग करें; आप खुश भी रहेंगे और बहुत चीजें आसान भी हो जाएंगी। रोज किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करें अपने बिजी लाइफस्टाइल के चलते लोग जरा सा भी समय अपनी हेल्थ को नहीं देते, फिर बिगड़ती तबियत और बढ़ता मोटापा उन्हें परेशान करता है। इसलिए जरूरी है कि रोजाना कम से कम आधा घंटा अपने शरीर को दिया जाए। आप हल्के फुल्की वॉक या स्ट्रेचिंग से भी शुरुआत कर सकते हैं। फिजिकल एक्टिविटी ना सिर्फ आपके हेल्दी और फिट रखने में मदद करती है, बल्कि आपके मूड, हार्मोन और स्ट्रेस लेवल को भी बैलेंस रखती है। हर रोज थोड़ा वक्त खुद को दें काम के लिए समय निकाल लिया, परिवार के लिए भी समय निकाल लिया, लेकिन क्या खुद के लिए समय निकाला? अगर आपको याद नहीं कि लास्ट टाइम आप कब अकेले खुद के साथ बैठे थे तो यकीन मानिए आप अपने साथ बड़ी ज्यादती कर रहे हैं। क्योंकि आप जबतक खुद के साथ कनेक्ट नहीं करेंगे, तब तक किसी और के साथ भी खुश नहीं रह सकेंगे। इसलिए जरूरी है कि रोजाना कुछ देर अपने साथ बिताएं, एक कप चाय पीएं और अपना मनपसंद काम करें। वो कोई हॉबी हो सकती हैं या फिर आप खुद से बात कर सकते हैं। कुल मिलाकर कुछ भी ऐसा करें जो आप इंजॉय कर सकें। दूसरे से कंपेयर करना बंद करें खुद को या अपनी लाइफ को दूसरों से कंपेयर करना जबतक बंद नहीं करेंगे, तब तक ना खुश रह पाएंगे और ना ही आगे बढ़ पाएंगे। आपको समझना होगा कि हर किसी की लाइफ जर्नी अलग-अलग होती है। आप सिर्फ वही देख पाते हैं, जो आपको दिखाया जाता है। उसके पीछे की असलियत आपकी समझ से बहुत अलग भी हो सकती है। इसलिए दूसरे को देखकर सिर्फ खुश हों लेकिन खुद से कंपेयर करने ना बैठ जाएं। आपका फोकस सिर्फ खुद को आज से बेहतर बनाने पर होना चाहिए, फिर देखना कैसे आप खुश भी रहते हैं और सक्सेस की सीढ़ियां चढ़ते जाते हैं।

Pixel 10a लॉन्च डेट हुई कंफर्म, सस्ता स्मार्टफोन होगा ये फीचर्स के साथ

नई दिल्ली  Pixel 10 सीरीज का सबसे सस्ता हैंडसेट Pixel 10a होगा. अब गूगल ने ऑफिशियली इस स्मार्टफोन के लुक को अनवील कर दिया है. साथ ही लॉन्चिंग डेट भी कंफर्म कर दी है.   Youtube पर गूगल ने एक शॉर्ट टीजर वीडियो पोस्ट किया है, जो 16 सेकेंड का है. इस शॉर्ट वीडियो में कंपनी ने स्मार्टफोन का लुक और लॉन्चिंग डेट की जानकारी शेयर की है. यह हैंडसेट ग्लोबल मार्केट में 18 फरवरी 2018 को लॉन्च होगा. Pixel 10a एंट्री लेवल फोन होगा  Pixel 10a, अपनी सीरीज का एंट्री लेवल का स्मार्टफोन होगा. कंपनी ने बीते साल Pixel 9a को अनवील किया था, जो पिक्सल 9 सीरीज का एंट्री लेवल स्मार्टफोन था. कंपनी हर साल सभी सीरीज के एंट्री लेवल स्मार्टफोन को A नाम के साथ लॉन्च करती है.  Pixel 10a के स्पेसिफिकेशन्स  Pixel 10a के स्पेशिफिकेशन्स का ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है, लेकिन इसमें भी Pixel 9a के जैसा 6.3-inch 120Hz Actua डिस्प्ले दिया जाएगा. इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा. वीडियो देखकर पता चलता है कि बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया जाएगा, हालांकि अभी सेंसर की जानकारी नहीं है.  Pixel 9a की इतनी थी कीमत  बीते साल Pixel 9a की शुरुआती कीमत 499 अमेरिकी डॉलर और भारत में 49,999 रुपये रखी गई थी. अब 18 फरवरी को लॉन्च होने वाले Pixel 10a की कीमत क्या होगी, वो तो ऑफिशियल लॉन्चिंग के  बाद ही पता चलेगी.  Pixel 10a इन चार कलर में होगा लॉन्च  टिप्स्टर Evan Blass ने बताया है कि Pixel 10a को ग्लोबल मार्केट में चार कलर वेरिएंट में पेश किया जाएगा. यह चार कलर के नाम ऑब्सिडियन, लेवेंडर, बेरी और फॉग है.  नए AI फीचर्स भी मिलेंगे  Pixel 10a की मदद से यूजर्स को सस्ते में गूगल का ईकोसिस्टम यूज करने को मिल जाता है.  इसमें ढेरों न्यू AI फीचर्स का भी एक्सेस मिलेगा. कंपनी लंबे समय से 7 साल तक Android OS वर्जन का अपडेट दे रही है और इस बार भी उम्मीद है कि कंपनी 7 साल तक OS अपडेट देने का ऐलान करेगी. 

क्या आपके ठंडे पैर बिगाड़ रहे हैं आपकी नींद? एक्सपर्ट्स बताते हैं इसके पीछे की साइंस

अक्सर कहा जाता है कि एक अच्छी और गहरी नींद सेहत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसोम्निया या नींद न आने की समस्या आम हो गई है। हम अक्सर अच्छी नींद के लिए गैजेट्स से दूरी बनाने या अंधेरे कमरे की बात करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पैरों का तापमान आपकी नींद की क्वालिटी तय करता है? जी हां, कई रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों के हाथ और पैर गर्म होते हैं, उन्हें ठंडे हाथ-पैर वाले लोगों की तुलना में जल्दी और गहरी नींद आती है। आइए जानते हैं इसके पीछे का विज्ञान और कैसे आप अपने पैरों को जल्दी गर्म कर सकते हैं। इसके पीछे का साइंस क्या है? दरअसल हमारे शरीर का तापमान हमारी स्लीप साइकिल को कंट्रोल करता है। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन हमारे शरीर को ठंडा करने के लिए पैरों को गर्म करना जरूरी है।     गर्मी रिलीज- जब हम सोने की तैयारी करते हैं, तो हमारे शरीर का आंतरिक तापमान गिरना शुरू हो जाता है। यह दिमाग को संकेत देता है कि अब आराम करने का समय है। हमारे हाथ और पैर शरीर के हीट रिलीज जोन होते हैं।     वैसोडिलेशन- जब आप अपने पैरों को गर्म करते हैं, तो वहां की ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं, जिसे वैसोडिलेशन कहा जाता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर की आंतरिक गर्मी त्वचा के जरिए बाहर निकलने लगती है। अगर आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो ब्लड वेसल्स सिकुड़ी रहती हैं और अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे शरीर को ठंडा होने में ज्यादा समय लगता है और नींद आने में देरी होती है। पैरों को गर्म करने के असरदार तरीके     गर्म पानी से नहाना- सोने से लगभग 1-2 घंटे पहले गर्म पानी से नहाना बहुत फायदेमंद होता है। ध्यान रखें कि पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो। यह आपके पूरे शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है।     ऊनी या मोटे मोजे पहनें- यह सबसे आसान तरीका है। बिस्तर पर जाने से पहले अपने आरामदायक मोजे पहन लें। यह पैरों की गर्मी को बरकरार रखता है और वैसोडिलेशन की प्रक्रिया को तेज करता है।     हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल- आप अपने पैरों के पास हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल रख सकते हैं। यह न केवल गर्मी देता है बल्कि मांसपेशियों को आराम भी पहुंचाता है।     पैरों की मालिश- सोने से पहले हल्के गुनगुने तेल से पैरों की मालिश करने से भी गर्मी पैदा होती है और थकान मिटती है।  

WhatsApp Premium की एंट्री: पैसे खर्च करने पर मिलेंगे 5 खास फीचर्स, क्या सच में लेना चाहिए सब्सक्रिप्शन?

नई दिल्ली WhatsApp बहुत जल्द सबस्क्रिप्शन फीचर लेकर आने वाला है और इस बात की पुष्टि खुद Meta कर चुका है। इसका मतलब है कि आज नहीं, तो कल WhatsApp चलाने के लिए लोगों को पैसे खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक WhatsApp का सब्सक्रिप्शन मॉडल काफी हद तक यूट्यूब जैसा रहेगा। कहने का मतलब है कि लोगों को बिना सब्सक्रिप्शन के भी ऐप इस्तेमाल करने दिया जाएगा और लोग बेसिक फीचर्स भी इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि Tech Crunch की रिपोर्ट के मुताबिक WhatsApp अपने प्रीमियम यूजर्स को अगग से खास फीचर्स उपलब्ध करवाएगा। ऐसा ही कुछ यूट्यूब भी करता है। लोग फ्री में यूट्यूब को एक्सेस कर सकते हैं लेकिन ज्यादा फीचर्स और विज्ञापनों से बचने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि WhatsApp के सब्सक्रिप्शन फीचर में क्या कुछ मिलेगा और क्या आपको इसके लिए पैसे खर्च करने चाहिए? सब्सक्रिप्शन में क्या देगा WhatsApp? रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp अपना सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स को कुछ खास फीचर्स उपलब्ध कराएगा। इसमें से एक स्टेटस टैब में विज्ञापन न दिखाना होगा। इसके अलावा खास स्टीकर्स, ऐप थीम, 3 से ज्यादा चैट्स पिन करने की सुविधा, ऐप का आइकन बदलने की सुविधा और खास रिंगटोन आदि। बता दें कि सब्सक्रिप्शन प्लान में सिर्फ यही फीचर्स नहीं होंगे। बाकी के फीचर्स और सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत का खुलासा होना अभी बाकी है। क्या Chat करने के भी लगेंगे पैसे? WhatsApp के सब्सक्रिप्शन मॉडल के बारे में सुनकर यूजर्स को लग सकता है कि उन्हें ऐप पर चैट करने के लिए भी पैसे देने होंगे। हालांकि ऐसा नहीं है। WhatsApp मुख्य रूप से सब्सक्रिप्शन विज्ञापन मुक्त अनुभव देने के लिए बेचेगा। कहने का मतलब है कि स्टेटस फीचर का इस्तेमाल करते हुए विज्ञापन न देखने के लिए लोगों को पैसे चुकाने होंगे। WhatsApp सब्सक्रिप्शन खरीदना सही होगा? लोगों के मन में अभी से सवाल आने लगे हैं कि क्या WhatsApp का सब्सक्रिप्शन खरीदना ठीक होगा। हालांकि इस बात का फैसला तब करना ज्यादा बेहतर होगा, जब कंपनी सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत और फीचर्स का खुलासा करेगी। हालांकि लीक्स पर मिल रही जानकारी के आधार पर देखें, तो ज्यादातर लोगों के लिए फ्री WhatsApp चलाते रहना ठीक रहेगा। हर कोई खास फीचर्स या 3 से ज्यादा चैट्स को पिन करना नहीं चाहता। इसके अलावा स्टेटस टैब में दिखने वाले विज्ञापन से भी लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टेटस काफी छोटे होते हैं और यूट्यूब की तरह वहां लोग लंबे वीडियो नहीं देखते। बता दें कि फिलहाल इंस्टाग्राम स्टोरीज में विज्ञापन दिखते हैं और लोगों को उससे परेशानी नहीं है। कब शुरू होगा WhatsApp का सब्सक्रिप्शन मॉडल? रिपोर्ट्स के मुताबित, WhatsApp के आने वाले सब्सक्रिप्शन मॉडल पर अभी Meta की ओर से ऑफिशियली सिर्फ यह जानकारी मिली है कंपनी इस पर काम कर रही है। इसके अलावा WhatsApp के सब्सक्रिप्शन मॉडल के बारे में ऐप के एक बीटा वर्जन 2.26.3.9 के कोड से भी पता चला है। ऐसे में हो सकता है कि WhatsApp तुरंत अपना सब्सक्रिप्शन मॉडल पेश न करे लेकिन ऐसा जल्द हो सकता है।

क्या आप जानते हैं Pen Drive के दो छेद का रहस्य? सही इस्तेमाल से काम हो जाएगा बेहद आसान

क्या आपने कभी पेन ड्राइव को गौर से देखा है? हर पेन ड्राइव के आगे वाले मेटल पार्ट पर दो चौकोर छेद होते हैं। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ पेन ड्राइव के डिजाइन से ज्यादा कुछ नहीं मानते और नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि गौर करने वाली बात है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ भी फिजूल में नहीं बनाया जाता। यही वजह है कि हर पेन ड्राइव पर दिखने वाले दो छेद, उसके सही ढंग से काम करने की वजह से जुड़े हैं। आज आपको इनका मकसद समझाएंगे ताकि अगली बार आप जब भी पेन ड्राइव का यूज करें, तो उसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाएं। सही दिशा बताने के लिए जरूरी लोग कई बार पेन ड्राइव लगाते हुए समझ नहीं पाते कि उसे किस तरफ से फिट करना है। ऐसे में पेन ड्राइव पर बने दो चौकोर छेद काम आते हैं। इनकी मदद से आप समझ सकते हैं कि पेन ड्राइव किस तफर से सीधी है और किस तरफ से उल्टी। आमतौर पर जिस तरफ ये पेन ड्राइव के छेद खुले होते हैं और उनके आर-पार दिखाई दे रहा होता है, वही हिस्सा ऊपर की ओर रहता है। इससे पोर्ट मेें ड्राइव उल्टा लगाने से उसके खराब होने का जोखिम नहीं रहता। मजबूत पकड़ के लिए जब आप पेन ड्राइव को पोर्ट में लगाते हैं, तो पेन ड्राइव के उन दो चौकोर छेदों में मेटल के दो उभार घुस जाते हैं। इससे आपकी पेन ड्राइव को पोर्ट में ढीली नहीं रहती और उसके मेटल पॉइंट सिस्टम के पॉइंट्स से सही तरीके से मैच कर पाते हैं। ऐसे में यह दो छेद आपके ड्राइव के सही तरह से फिट होने और काम करने के लिए लिहाज से भी जरूरी होते हैं। डेटा ट्रांसफर के लिए जरूरी पेन ड्राइव पर मौजूद दो चौकोर छेद डेटा ट्रांसफर को सही तरीके से पूरा होने में मदद करते हैं। इनकी मदद से आपकी पेन ड्राइव के कनेक्टर्स पीसी या उस सिस्टम से सही तरीके से अटैच हो पाते हैं, जिसमें डेटा भेजना या रिसीव करना होगा। ये छेद पेन ड्राइव को स्थिर भी बनाए रखते हैं और इससे आप आसानी से डेटा ट्रांसफर कर पाते हैं। अगर पेन ड्राइव के पॉइंट ठीक से सिस्टम से कनेक्ट न हों, तो आप डेटा को ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। एक स्टैंडर्ड के तौर पर जरूरी USB का डिजाइन 'USB-IF' जो कि एक ग्लोबल संस्था है, द्वारा तय किया जाता है। दुनिया भर की कंपनियां इसी स्टैंडर्ड को मानती हैं ताकि किसी भी कंपनी की पेन ड्राइव किसी भी कंप्यूटर के पोर्ट में आसानी से फिट हो सके। यह एक ग्लोबल स्टैंडर्ड की तरह काम करता है। यही वजह है कि ये दो चौकोर छेद आपको हर यूएसबी पेन ड्राइव पर जरूर मिल जाएंगे। पेन ड्राइव की अपनी मजबूती के लिए पेन ड्राइव के अंदर मौजूद प्लास्टिक के हिस्से को मेटल के खोल के साथ मजबूती से जोड़ने के लिए ये छेद एक 'एंकर' का काम करते हैं। साथ ही, बहुत मामूली स्तर पर ये गर्म होने वाली चिप के लिए दबाव कम करने में भी मदद करते हैं। इस तरह से हर पेन ड्राइव पर दिखने वाले चौकोर छेद आपकी पेन ड्राइव की मजबूती के लिए भी जरूरी होते हैं।

ठंड में चेहरे की नमी बरकरार रखने का घरेलू नुस्खा: दही से बने 5 असरदार फेस पैक

दही में लैक्टिक एसिड और नेचुरल फैट्स होते हैं, जो न केवल डेड स्किन को हटाते हैं बल्कि त्वचा को गहराई से मॉइश्चराइज भी करते हैं। ऐसे में, आज हम आपको दही से बने 5 ऐसे फेस पैक्स के बारे में बता रहे हैं, जो इस सर्दी आपके चेहरे को मक्खन जैसा मुलायम बना देंगे। दही और शहद अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ड्राई है, तो यह पैक आपके लिए बेस्ट है। शहद एक नेचुरल ह्यूमेक्टेंट है, यानी यह हवा से नमी खींचकर आपकी स्किन में लॉक करता है। कैसे बनाएं: 2 चम्मच गाढ़े दही में 1 चम्मच शहद मिलाएं। इसे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। चेहरा तुरंत सॉफ्ट हो जाएगा। दही और बेसन यह सदियों पुराना नुस्खा है जो कभी फेल नहीं होता। बेसन त्वचा की गंदगी साफ करता है और दही नमी देता है। कैसे बनाएं: 2 चम्मच दही में 1 चम्मच बेसन और चुटकी भर हल्दी मिलाएं। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और सूखने पर हल्के हाथों से रगड़ते हुए धो लें। इससे टैनिंग भी दूर होती है। दही और केला सर्दियों में झुर्रियां ज्यादा दिखाई देती हैं। केला और दही मिलकर त्वचा में कसाव लाते हैं और उसे जवां बनाए रखते हैं। कैसे बनाएं: आधे पके हुए केले को अच्छी तरह मैश करें और उसमें 1 चम्मच दही मिलाएं। इसे चेहरे पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं। यह पैक स्किन को बहुत ही स्मूथ टेक्सचर देता है। दही और ओट्स सर्दियों में अक्सर डेड स्किन जमने से चेहरा काला पड़ने लगता है। ओट्स एक बेहतरीन नेचुरल स्क्रब है जो बिना रूखापन दिए सफाई करता है। कैसे बनाएं: 2 चम्मच दही में 1 चम्मच पिसा हुआ ओट्स मिलाएं। इसे चेहरे पर लगाकर 2-3 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें और फिर धो लें। आपकी स्किन सांस लेने लगेगी। दही और ऑलिव ऑयल अगर आपकी स्किन इतनी ड्राई है कि पपड़ी निकलने लगती है, तो दही के साथ तेल का कॉम्बिनेशन जादुई असर करेगा। कैसे बनाएं: 1 चम्मच दही में आधा चम्मच ऑलिव ऑयल या बादाम का तेल मिलाएं। इसे रात को सोने से पहले लगाएं तो और भी अच्छा है। यह त्वचा को अंदर तक पोषण देता है। हफ्ते में कम से कम दो बार इन घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करें। बस एक बात का ध्यान रखें, अगर आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है या आपको डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी है, तो इस्तेमाल करने से पहले हाथ पर एक पैच टेस्ट जरूर कर लें।  

खूबसूरती पर खतरा: पिंपल्स फोड़ने से बढ़ सकता है इन्फेक्शन और दाग-धब्बों का जोखिम

चेहरे पर एक छोटा-सा पिंपल भी दिख जाए, तो हमारा मन उसे फोड़ने के लिए मचलने लगता है। पिंपल फोड़ना भले ही मन काफी संतोषजनक लगता है, लेकिन यह आदत आपकी स्किन के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिंपल फोड़ने के कारण चेहरे पर दाग हो सकते हैं और इन्फेक्शन का रिस्क भी काफी बढ़ जाता है। इसलिए अगर आपके चेहरे पर कभी पिंपल निकल भी जाए, तो भले ही आपका जी कितना भी मचले, इसे फोड़ने की गलती बिल्कुल मत करिएगा। आइए जानें पिंपल फोड़ने की आदत कैसे आपके लिए सजा बन सकती है। इन्फेक्शन का बढ़ता खतरा जब आप एक पिंपल को फोड़ते हैं, तो आप त्वचा पर एक तरह का खुला घाव बना देते हैं। हमारे हाथों और नाखूनों में अनगिनत बैक्टीरिया होते हैं। जैसे ही पिंपल फटता है, ये बैक्टीरिया उस खुले छेद के जरिए त्वचा के अंदर जा सकते हैं। इससे पिंपल वाली जगह पर गंभीर इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दर्द और मवाद की समस्या और भी बढ़ सकती है। त्वचा में जलन और सूजन हमारी त्वचा बहुत सेंसिटिव होती है, जबकि हमारे नाखून उसकी तुलना में काफी सख्त और मजबूत होते हैं। पिंपल निकालने के लिए जब आप नाखूनों से त्वचा पर तेज दबाव डालते हैं, तो आसपास के सेल्स डैमेज हो जाते हैं। इससे त्वचा में जलन और गंभीर सूजन पैदा हो सकती है। अक्सर लोग पिंपल्स निकालने वाले टूल्स का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल त्वचा को छील सकता है। इसलिए खुद से इन टूल्स का इस्तेमाल कभी न करें। त्वचा पर निशान पिंपल को दबाने का सबसे बुरा नतीजा स्कारिंग यानी स्थायी निशान के रूप में सामने आता है। अगर आप पिंपल निकालने के लिए बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं, तो खून निकल सकता है और त्वचा के टिश्यू गहराई तक डैमेज हो सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि कई पिंपल्स त्वचा की ऊपरी सतह पर नहीं बल्कि गहराई में होते हैं। ऐसे में उन्हें दबाने से वे बाहर निकलने के बजाय अंदर ही रह जाते हैं और त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं, जो बाद में गहरे गड्ढों या काले निशानों का रूप ले लेते हैं। भले ही पिंपल को फोड़ना उस वक्त सही लगे, लेकिन इसके नतीजे आपकी खूबसूरती को बिगाड़ सकते हैं। इसलिए अगर पिंपल्स की समस्या ज्यादा है, तो उन्हें खुद ठीक करने के बजाय किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना ही समझदारी है।  

महिलाओं में कम उम्र में कैंसर क्यों हो रहा है? डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले कारण

कैंसर को अक्सर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने एक चौंकाने वाला बदलाव देखा है। 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। हालांकि, बुजुर्गों की तुलना में इस आयु वर्ग में जोखिम अब भी कम है, लेकिन बदलता ट्रेंड चिंता का विषय है। ऐसे में इस बीमारी के खतरे को कम करने के लिए इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी है, ताकि समय पर पहचान करके बीमारी का बेहतर इलाज किया जा सके। डॉक्टरों के अनुसार, युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं, जो अक्सर काफी अग्रेसिव होते हैं। इसके अलावा, 30 से 40 की उम्र के बीच महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं। अनियमित स्क्रीनिंग के कारण सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भी कमी देखने को नहीं मिल रही। थायरॉइड और कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं। क्यों बढ़ रहा है यह खतरा? इस बढ़ते जोखिम के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे- मोटापा, शारीरिक गतिविधि में कमी, शराब पीना और अल्ट्रा प्रोसेस्ड डाइट। ये फैक्टर्स हार्मोनल बदलाव पैदा कर रहे हैं। इसके अलावा-     लाइफस्टाइल- देर से शादी और बच्चों के जन्म में देरी, कम प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग की कम अवधि भी ब्रेस्ट कैंसर के पैटर्न को प्रभावित कर रही है।     पर्यावरण और तनाव- प्लास्टिक से लेकर कॉस्मेटिक्स तक में पाए जाने वाले एंडोक्राइन-डिस्ट्रप्टिंग केमिकल्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं। सुस्त जीवनशैली, बढ़ता तनाव और नींद की कमी भी कैंसर का कारण बन रहा है।     जेनेटिक्स- युवा महिलाओं में कैंसर का एक हिस्सा BRCA जैसे जीन म्यूटेशन से जुड़ा होता है। अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो खतरा बढ़ जाता है। देर से पहचान अक्सर युवा महिलाओं में कैंसर की पहचान देरी से होती है, क्योंकि लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उम्र कम होने का मतलब यह नहीं है कि आपको खतरा नहीं है। ब्रेस्ट में गांठ, लगातार पेट से जुड़ी समस्याएं, बिना कारण वजन कम होना, असामान्य ब्लीडिंग या लंबे समय तक थकान को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। बचाव और जागरूकता जल्दी जांच से इलाज के नतीजों में बड़ा अंतर आ सकता है। महिलाओं को अपने शरीर को समझना चाहिए और इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-     नियमित जांच- 50 की उम्र से पहले ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड और 50 के बाद मैमोग्राफी मददगार होती है।     सेल्फ एग्जामिन- ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन यानी से  खुद से जांच की आदत डालें।     पारिवारिक इतिहास- अगर परिवार में किसी को कैंसर रहा है, तो समय से पहले स्क्रीनिंग शुरू कर दें।