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5000 शिक्षक पदों की भर्ती को मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के विरोध में प्रदर्शन, भविष्य की उम्मीदें बंधी!

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है. इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं.  कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व  ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है.  प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा  ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.  इतने सालों से चल रहा है संघर्ष वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं.